Category: कैमिस्ट्री

  • प्लैंक का क्वांटम सिद्धांत क्या है ?

    प्लैंक का क्वांटम सिद्धांत क्या है ?

    What is Plank’s Quantum Theory ?

    सन् 1901 में प्लैंक ने तप्त काली वस्तुओं से उत्सर्जित विभिन्न कम्पनावृत्तियों वाली प्रकाश ऊर्जा के अध्ययन से एक सिद्धांत का प्रतिपादन किया।

    इस सिद्धांत के अनुसार, “किसी वस्तु से प्रकाश और ऊष्मा जैसी विकिरण ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण सतत् नहीं होता, बल्कि असतत् रूप से छोटे-छोटे सवेष्ट (Packets) में होता है।’ इन छोटे संवेष्टों को ‘क्वांटम’ (Quantum) कहते हैं।

    उदाहरण

    हाइड्रोजन (H) परमाणु के नाभिक में सिर्फ 1 प्रोटॉन रहता है अत: हाइड्रोजन की परमाणु संख्या 1 होती है।

    कार्बन (C) परमाणु के नाभिक में 6 प्रोटॉन रहते हैं। अतः कार्बन की परमाणु संख्या 6 होती है।

    क्वांटम संख्याएं (Quantum Numbers)

    क्वांटम संख्याएं वे संख्याएं हैं जो किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति तथा उसकी ऊर्जा की जानकारी देता है। किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति और उसकी ऊर्जा जानने के लिए निम्नलिखित चार तथ्यों का ज्ञान अनिवार्य है

    (1) इलेक्ट्रॉन का कोश, (2) उस कोश में वह किस सबकोश में है, (3) उस सबकोश में वह किस कक्षक में है, तथा (4) उस कक्षक में उसका चक्रण किस प्रकार है।

    उदाहरणः

    1. हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं, जिसकी परमाणु संख्या 1 किन्तु उनकी द्रव्यमान संख्याएं क्रमश: 1,2 और 3 होती है। प्रोटियम (1H1), ड्यूटेरियम(1H2), ट्राइटियम (1H3),

    2. कार्बन के दो समस्थानिक होते हैं, जिनकी परमाणु संख्या 6 तथा द्रव्यमान संख्याएं 12 और 14 होती है। 6C12 तथा 6C14

    परमाणु संख्या (Atomic Number)

    किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित इकाई धन आवेशों की कुल संख्या या उस तत्व के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों कि कुल संख्या को उस तत्व की परमाणु संख्या कहते है l

  • रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत क्या है ?

    रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत क्या है ?

    What is Rutherford’s Nuclear Theory ?

    1911 ई. में लॉर्ड रदरफोर्ड (Lord Rutherford) ने एक अति महत्त्वपूर्ण प्रयोग करके परमाणु की आंतरिक व्यवस्था से सम्बन्धित एक आश्चर्यजनक तथ्य का पता लगाया।

    रदरफोर्ड द्वारा किये गए इस प्रयोग को रदरफोर्ड का प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford’s Scattering Experiment) कहा जाता है। टॉम्सन द्वारा प्रस्तुत परमाणु का स्वरूप अस्वीकार करते हुए रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग के निरीक्षणों के आधार पर एक सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसे रदरफोर्ड का ‘नाभिकीय सिद्धांत’ कहते हैं

    रदरफोर्ड के ‘नाभिकीय सिद्धांत’ की सिद्धांत की मुख्य बातें

    1. परमाणु में इलेक्ट्रॉनों से घिरे केन्द्र में प्रोटॉन का एक छोटा-सा किन्तु भारी नाभिक होता है।
    2. परमाणु के अंदर का अधिकांश भाग खाली होता है।
    3. परमाणु गोलीय (Spherical) होता है।
    4. परमाणु के नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में अत्यन्त छोटा होता है।

    परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या के लिए रदरफोर्ड ने अनुमान लगाया कि परमाणु सौरमंडल की तरह होता है। परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथ में ठीक उसी तरह परिक्रमा करते रहते हैं, जिस तरह सूर्य के चारों ओर विभिन्न नक्षत्र करते हैं। इन वृत्ताकार पथ को कक्षाएं (Orbits) कहा जाता है। ऐसा होने से नाभिक तथा इलेक्ट्रॉन के बीच कार्यरत स्थिर विद्युत आकर्षण बल इलेक्ट्रॉन के वेग से उत्पन्न केन्द्राभिसारी बल (Centrifugal force) के बराबर होता है। इस परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉन अपनी कक्षाओं में गतिशील रहते हुए परमाणु को स्थायित्व प्रदान करते हैं।

  • परमाणु द्रव्यमान, मोल और एवोग्राड्रो संख्या क्या है ?

    परमाणु द्रव्यमान, मोल और एवोग्राड्रो संख्या क्या है ?

    परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass)

     किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान एक संख्या है जो यह बतलाती है, कि उस तत्व के एक परमाणु का द्रव्यमान कार्बन (परमाणु द्रव्यमान = 12) के एक परमाणु के द्रव्यमान के 12वें भाग से कितना गुना भारी है।

    मोल (Mole)

    मोल किसी पदार्थ के परमाणु, अणु अथवा आयन की निश्चित संख्या को व्यक्त करता है। यह संख्या 6.022 x 1023 है। संख्या 6.022 x 1023 जो मोल को प्रकट करता है, को एवोगाड्रो संख्या भी कहते हैं। अत: मोल पदार्थ के कणों की एवोगाड्रो संख्या भी व्यक्त करता है।

    एवोगाड्रो संख्या (Avogadro Number)

    किसी तत्व के एक ग्राम परमाणु (1 मोल) में उपस्थित परमाणुओं की संख्या 6.022 x 10-3 होती है या किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के 1 ग्राम अणु (1 मोल) में उपस्थित अणुओं की संख्या भी इतनी ही अर्थात् 6.022 x 10 होती है। इस संख्या को ‘ एवोगाड्रो संख्या’ कहते है।

  • मिश्रणों को अलग करने की विधियाँ क्या है ?

    मिश्रणों को अलग करने की विधियाँ क्या है ?

    मिश्रण में उपस्थित घटकों को विभिन्न विधियों द्वारा अलग-अलग किया जाता है। मिश्रणों के पृथक्करण की कुछ सामान्य विधिया निम्नलिखित हैं:

    क्रिस्टलन (Crystallisation)

    क्रिस्टलन विधि के द्वारा अकार्बनिक ठोसों में उपस्थित घटकों का पृथक्करण एवं शुद्धीकरण किया जाता है। इसमें उपस्थित अशुद्ध ठोस या मिश्रण को उचित विलायक के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है तथा गर्म अवस्था में ही इस विलयन को फनल (Funnel) द्वारा छाना जाता है। छानने के पश्चात् विलयन को ठंडा किया जाता है। ठंडा होने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टल के रूप में विलयन से पृथक् हो जाता है और इसमें उपस्थित अशुद्धियां मातृ द्रव में घुली रह जाती हैं। इन क्रिस्टलों को छानकर अलग कर सुखा लिया जाता है।

    आसवन (Distillation)

    आसवन विधि द्वारा मुख्यतः द्रवों के मिश्रण को पृथक् किया जाता है। जब दो द्रवों के क्वथनांकों में अंतर अधिक होता है, तो उनके मिश्रण को इस विधि से पृथक किया जाता है।

    आसवन विधि में द्रव को वाष्प में परिवर्तित कर किसी दूसरे स्थान में भेजा जाता है, जहां उसे ठंडा कर पुनः द्रव अवस्था में परिवर्तित कर लिया जाता है। आसवन विधि में पहला प्रक्रम वाष्पन तथा दूसरा प्रक्रम संघनन कहलाता है

    उर्ध्वपातन (Sublimation)

    सामान्य ठोस पदार्थों को गर्म करने पर वे द्रव अवस्था में परिवर्तित होते हैं और उसके पश्चात् गैसीय अवस्था में, लेकिन कुछ ठोस पदार्थ ऐसे होते हैं। जिन्हें गर्म किये जाने पर वे द्रव अवस्था में आने के बदले सीधे वाष्प में परिणत हो जाते हैं। वाष्प को ठंडा किये जाने पर यह पुनः ठोस अवस्था में हो जाते है। ऐसे पदार्थों को उर्ध्वपातूज (Sublimate) कहा जाता है। इस प्रकार की क्रिया ‘उर्ध्वपातन‘ कहलाती है।

    इस विधि के द्वारा दो ऐसे ठोसों के मिश्रण में से उसको पृथक् करते हैं, जिसमें एक ठोस उर्ध्वपात्ज होता है, दूसरा नहीं। ऐसे ठोसों के मिश्रण को गर्म करने पर उर्ध्वपात्ज ठोस सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो । जाता है। इस वाष्प को अलग ठंडा कर लिया जाता है। इस प्रकार दोनों ठोस पृथक् हो जाते है। इस विधि के द्वारा कपूर, नेफ्थलीन, अमोनियम क्लोराइड, एन्थ्रासीन, बेन्जोइक अम्ल, आदि पदार्थ शुद्ध किये जाते हैं

    प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)

    प्रभाजी आसवन विधि के द्वारा उन मिश्रित द्रवों का पृथक्करण किया जाता है, जिनके क्वथनांकों में बहुत कम का अंतर होता है। दूसरे शब्दों में द्रवों के क्वथनांक एक-दूसरे के समीप होते हैं।

    भूगर्भ से निकाले गये खनिज तेल से शुद्ध पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, आदि इसी विधि द्वारा पृथक किये जाते हैं। जलीय वायु (Liquid air) से विभिन्न गैसें भी इसी विधि द्वारा पृथक् किये जाते है।

    वर्णलेखन (Chromatography)

    वर्णलेखन विधि इस तथ्य पर आधारित है कि किसी मिश्रण के भिन्न घटकों की अधिशोषण क्षमता भिन्न-भिन्न होती है तथा वे किसी अधिशोषक पदार्थ में विभिन्न दूरियों पर अधिशोषित होते हैं और इस प्रकार पृथक् कर लिए जाते हैं

    भाप आसवन (Steam Distillation)

    भाप आसवन विधि के द्वारा ऐसे कार्बनिक पदार्थों का शुद्धीकरण किया जाता है। जो जल में अघुलनशील, परन्तु वाष्प के साथ वाष्पशील होते हैं। इस विधि के द्वारा विशेष रूप में उन पदार्थों का शुद्धीकरण किया जाता है जो अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाते हैं।

    कार्बनिक पदार्थों जैसे एसीटोन, मेथिल ऐल्कोहॉल, एसीटल्डिहाइड, आदि का शुद्धीकरण भाग आसवन विधि द्वारा ही किया जाता है।

  • अणु (Molecule)और परमाणु (Atom) क्या है ?

    अणु (Molecule)और परमाणु (Atom) क्या है ?

    What is Molecule & Atom ?

    किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है, परन्त रासायनिक अभिक्रियाओं (प्रतिक्रियाओं) में भाग नहीं ले सकता है तथा जिसमें उस पदार्थ के सभी गुण विद्यमान रहते हैं, अणु कहलाता है।

    एक पदार्थ के सभी अणु हर प्रकार (द्रव्यमान, आकार, गुण, आदि) से एक-दूसरे के सदृश होते हैं। इसके विपरीत, किन्ही दो पदार्थों के अणु एक-दूसरे से सर्वथा भिन्न होते हैं।

    उदाहरण के लिए, जल (H2O) के सभी अणु सदृश होते हैं। जल के प्रत्येक अणु का सापेक्ष द्रव्यमान 18 होता है। इसके अणुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुण, इनके आकार, आदि पूर्णतया समरूप होते हैं।

    अणु दो प्रकार के होते हैं—तत्व के अणु एवं यौगिक के अणु।

    तत्व के अणु

    जब एक ही तत्व के एक से अधिक परमाणु मिलकर उसके सूक्ष्मतम स्वतंत्र कणों का निर्माण करते हैं, तो ये कण तत्व के ‘अणु’ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन का अणु (H) हाइड्रोजन के दो परमाणुओं से मिलकर बना होता है।

    यौगिक के अणु

    जब एक से अधिक तत्वों के परमाणु परस्पर मिलकर सूक्ष्मतम स्वतंत्र कणों का निर्माण करते हैं, तो ये कण यौगिक के अणु कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, मिथेन (CH) का प्रत्येक अणु कार्बन के एक परमाणु तथा हाइड्रोजन के चार परमाणुओं से मिलकर बना होता है।

    परमाणु (Atom)

    किसी पदार्थ (तत्व) का वह संभव सूक्ष्मतम कण जो स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता है, परन्तु रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है तथा जिसमें उस पदार्थ के सभी गुण विद्यमान रहते हैं, परमाणु कहलाता है

    डाल्टन के अनुसार, परमाणु अविभाज्य था, परन्तु आधुनिक आविष्कारों से यह ज्ञात हो चुका है कि ‘परमाणु भी सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है, जिनमें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रान मुख्य है

  • मिश्रण (Mixture) क्या है ?

    मिश्रण (Mixture) क्या है ?

    Mixture

    मिश्रण वह अशुद्ध पदार्थ है जो दो या दो से अधिक शुद्ध पदार्थों (तत्वों या यौगिकों या दोनों) के किसी भी अनुपात में बिना रासायनिक संयोग के मिलने से बनता है तथा जिसके अवयवी पदार्थों को सरल, यांत्रिक या भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।

    उदाहरण

    • वायु अनेक गैसों एवं धूलकणों का मिश्रण है l वायु के अवयवी गैसों में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प प्रमुख हैं।
    • समुद्री जल कई लवणों का जल में मिश्रण है, जिसमें सोडियम क्लोराइड प्रमुख लवण है।
    • पीतल, ताँबा और जस्ता का जल में मिश्रण होता है l

    मिश्रण के अवयवी पदार्थों की प्रकृति तथा बने मिश्रण के गुण एवं संघटन के आधार पर मिश्रण को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है:

    समांग मिश्रण (Homogeneous Mixture)

    वह मिश्रण जिसके प्रत्येक भाग में उसके अवयवी पदार्थों का संघटन एवं गुण समान होता है, समांग मिश्रण कहलाता है। चीनी का जल में विलयन, नमक का जल में विलयन, गंधक का कार्बन डाइसल्फाइड में विलयन, अमोनिया गैस का हवा में विलयन, आदि समांग मिश्रण के उदाहरण हैं।

    असमांग मिश्रण (Heterogeneous Mixture)

    वह मिश्रण जिसके विभिन्न भागों में उसके अवयवी पदार्थो का संघटन एवं गुण एक-से नहीं होते हैं, असमाग मिश्रण कहलाता है। लोहा एवं गंधक का मिश्रण, बालू एवं नमक का मिश्रण।

  • यौगिक (Compound) क्या है ?

    यौगिक (Compound) क्या है ?

    यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है जो दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनता है और जिसे उचित रासायनिक विधियों द्वारा दो या दो से अधिक सर्वथा भिन्न गुणों वाले अवयवों (या अवयव तत्वों) में विभक्त किया जा सकता है।

    यौगिकों को ऐसे पदार्थों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिनमें 2 या उससे अधिक प्रकार के तत्व होते हैं जो इसके परमाणुओं के एक निश्चित अनुपात में होते हैं। जब तत्व आपस में जुड़ते हैं तो तत्वों के कुछ व्यक्तिगत गुण (individual property) नष्ट हो जाते हैं और नए बने यौगिक में नए गुण हो जाते हैं।

    रासायनिक सूत्र (Chemical Formula)

    यौगिकों को उनके रासायनिक सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है। एक रासायनिक सूत्र परमाणुओं के अनुपात का एक प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व (Representation of the proportions) है जो एक विशेष रासायनिक यौगिक का निर्माण करता है।

    उदाहरण

    शुद्ध पानी दो तत्वों – हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक यौगिक है। पानी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात हमेशा 2:1 होता है। पानी के प्रत्येक अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं जो एक ऑक्सीजन परमाणु से बंधे (Bonded) होते हैं।

    शुद्ध टेबल नमक दो तत्वों – सोडियम और क्लोरीन से बना एक यौगिक है। सोडियम क्लोराइड में सोडियम आयनों का क्लोराइड आयनों से अनुपात हमेशा 1:1 होता है।

    शुद्ध मीथेन दो तत्वों – कार्बन और हाइड्रोजन से बना एक यौगिक है। मीथेन में हाइड्रोजन और कार्बन का अनुपात हमेशा 4:1 होता है।

    शुद्ध ग्लूकोज तीन तत्वों – कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक यौगिक है। ग्लूकोज में हाइड्रोजन से कार्बन और ऑक्सीजन का अनुपात हमेशा 2:1:1 होता है।

    यौगिक के प्रकार

    यौगिकों को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, आणविक यौगिक (Molecular Compounds) और लवण (Salts)

    आणविक यौगिकों में, परमाणु एक दूसरे को सहसंयोजक बंधों (covalent bonds) के माध्यम से बांधते हैं।

    लवण में यह आयनिक बंधों (ionic bonds) के साथ जुड़ा रहता है। ये दो प्रकार के बंधन हैं जिनसे प्रत्येक यौगिक बनता है।

  • तत्व (Element) क्या है ?

    तत्व (Element) क्या है ?

    What is Element ?

    तत्व वह मौलिक पदार्थ है, जिसे किसी भी भौतिक या रासायनिक विधि द्वारा न तो दो या दो से अधिक सदैव भिन्न गुणों वाले पदार्थों में विभाजित किया जा सकता है, और न ही दो या दो से अधिक पदार्थों के बीच संयोग कराकर संश्लेषित किया जा सकता है।

    इलेक्ट्रॉनिक संरचना के अनुसार तत्व वह पदार्थ है जिसके प्रत्येक परमाणु का नाभिकीय आवेश समान होता है। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सोडियम, लोहा, ताँबा, सोना, चादी, प्लैटिनम, आदि तत्वों के प्रमुख उदाहरण हैं।

    तत्व के प्रकार

    तत्व दो प्रकार के होते हैं—धातु (Metal) और अधातु (Non-metal)|

    धातु

    धातु तत्व विद्युत और ऊष्मा के सुचालक होते हैं तथा ये ठोस अवस्था में आघातवर्द्धनीय (Malleable) और तन्य (Ductile) होते हैं। लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, चांदी, सोना, प्लैटिनम, आदि धातु हैं।

    अधातु

    अधातु तत्व विद्युत और ऊष्मा के कुचालक होते हैं। साथ ही साथ अधातु तत्व भुरभुरे (Brittle) होते हैं और प्रहार करने पर चूर-चूर हो जाते है। गंधक, फॉस्फोरस, ऑक्सीजन, ब्रोमीन, इत्यादि अधातु है।

    2021 तक 118 रासायनिक तत्वों की खोज की जा चुकी है l इनमे से 94 तत्व प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। तत्वों को आम तौर पर उसी क्रम में सूचीबद्ध किया जाता है जिसमें प्रत्येक को पहले शुद्ध तत्व के रूप में परिभाषित किया गया था, क्योंकि अधिकांश तत्वों की खोज की सटीक तिथि सटीक रूप से निर्धारित नहीं की जा सकती है।

    वर्तमान समय में 112 तत्वों की खोज की जा चुकी है। इनमें से 92 तत्व प्रकृति में पाये जाते हैं। जबकि शेष अन्य तत्व वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में कृत्रिम तरीकों से संश्लोषित किए गए हैं।

    आवर्त सारणी का विकास (Development of Periodic Table)

    रसायनज्ञों (Chemists) ने हमेशा से तत्वों को उनके गुणों के बीच समानता को प्रतिबिंबित(reflect) करने के लिए व्यवस्थित करने के तरीकों की तलाश की है। आधुनिक आवर्त सारणी (modern periodic table) में तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक (atomic number) (एक परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या) के क्रम में सूचीबद्ध (lists) किया गया है।

    ऐतिहासिक रूप से, हालांकि, तत्वों को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे वैज्ञानिकों द्वारा सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान का उपयोग किया गया था। यह मुख्य रूप से इसलिए था क्योंकि परमाणुओं के छोटे उप-परमाणु कणों (प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉनों) से बने होने का विचार विकसित नहीं हुआ था।

    फिर भी, आधुनिक आवर्त सारणी का आधार अच्छी तरह से स्थापित था और यहां तक ​​कि परमाणु संख्या की अवधारणा विकसित होने से बहुत पहले से अनदेखे तत्वों के गुणों की भविष्यवाणी करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

    17 फरवरी, 1869 को, रसायन विज्ञान के एक रूसी प्रोफेसर, दिमित्री इवानोविच मेंडेलीव (Dimitri Ivanovich Mendeleev) ने अपने कई आवधिक चार्टों में से पहला पूरा किया (first of his numerous periodic charts)।

  • पदार्थों की भौतिक अवस्थाएं कौनसी है ?

    पदार्थों की भौतिक अवस्थाएं कौनसी है ?

    Physical States of Substances

    भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थों को तीन वर्गों में बांटा गया है। ये तीन वर्ग हैं—ठोस (Solid), द्रव (Liquid) तथा गैस (Gas) |

    किसी पदार्थ की अवस्था (ठोस द्रव या गैस) उसके अन्तराण्विक बल (Intermolecular force) पर निर्भर करती है।

    ठोस (Solid)

    ठोस पदार्थ की वह अवस्था है जिसमें उसके आकार एवं आयतन निश्चित होते हैं, जैसे-कुर्सी, मेज, ईंट, आदि।

    ठोसों के कण आपस में अत्यधिक निकट होते हैं, इस कारण इनमें उच्च घनत्व और असंपीड्यता होती है। ठोसों में कणों के उच्च क्रम में व्यवस्था को ‘क्रिस्टल जालक’ कहते हैं जिसके फलस्वरूप क्रिस्टलों की एक नियमित ज्यामितीय आकृति होती है।

    द्रव (Liquid)

    द्रव पदार्थ की वह अवस्था है, जिसमें उसका आयतन निश्चित होता है, परन्तु आकार अनिश्चित होता है जैसे दूध, पानी, तेल और शराब, आदि

    द्रव पदार्थ की सभी स्थितियों में ऊपरी सतह हमेशा समतल होती है। द्रव पदार्थ के अणु ठोस पदार्थ की अपेक्षा दूर-दूर रहते हैं। फिर भी, इनके बीच की दूरी बहुत अधिक नहीं होती है। अत: द्रव पदार्थ अपना आकार असानी से बदल सकते हैं।

    गैस (Gas)

    गैस पदार्थ की वह अवस्था है, जिसमें उसके आकार और आयतन दोनों अनिश्चित होते हैं, जैसे—वायु, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, क्लोरीन, आदि।

    गैस अवस्था में पदार्थ का न तो कोई आकार होता है और न कोई आयतन।

  • क्लोरीन क्या है ?

    क्लोरीन एक रासायनिक तत्व है, जिसकी परमाणु संख्या 17 तथा संकेत Cl है। ऋणात्मक आयन क्लोराइड के रूप में यह साधारण नमक में उपस्थित होती है और सागर के जल में घुले लवण में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।

    सामान्य तापमान और दाब पर क्लोरीन (Cl2 या “डाईक्लोरीन”) गैस के रूप में पायी जाती है। इसका प्रयोग तरणतालों को कीटाणुरहित बनाने में किया जाता है।

    यह एक हैलोजन है और आवर्त सारणी में समूह 17 में रखी गयी है। यह एक पीले और हरे रंग की हवा से हल्की प्राकृतिक गैस जो एक निश्चित दाब और तापमान पर द्रव में बदल जाती है।

    यह पृथ्वी के साथ ही समुद्र में भी पाई जाती है। क्लोरीन पौधों और मनुष्यों के लिए आवश्यक है। इसका प्रयोग कागज और कपड़े बनाने में किया जाता है।

    इसमें यह ब्लीचिंग एजेंट (धुलाई करने वाले/ रंग उड़ाने वाले द्रव्य) के रूप में काम में लाई जाती है। वायु की उपस्थिति में यह जल के साथ क्रिया कर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का निर्माण करती है।

    मूलत: गैस होने के कारण यह खाद्य श्रृंखला का भाग नहीं है। यह गैस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। तरणताल में इसका प्रयोग कीटाणुनाशक की तरह किया जाता है।

    साधारण धुलाई में इसे ब्लीचिंग एजेंट रूप में प्रयोग करते हैं। ब्लीच और कीटाणुनाशक बनाने के कारखाने में काम करने वाले लोगों में इससे प्रभावित होने की आशंका अधिक रहती है। यदि कोई लंबे समय तक इसके संपर्क में रहता है तो उसके स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

    इसकी तेज गंध आंखों, त्वचा और श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक होती है। इससे गले में घाव, खांसी और आंखों व त्वचा में जलन हो सकती है, इससे सांस लेने में समस्या होती है।