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  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की सबसे अनोखी तस्वीर, अंतरिक्ष की सबसे करीबी झलक

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की सबसे अनोखी तस्वीर, अंतरिक्ष की सबसे करीबी झलक

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (वेब) (The James Webb Space Telescope (Webb) को 25 दिसंबर, 2021 को पूरी उम्मीदों के साथ अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि 10 अरब डॉलर की अंतरिक्ष वेधशाला (Space Observatory) उन्हें ब्रह्मांड की उत्पत्ति, उसकी आकाशगंगाओं और शायद पहले तारे के उत्पति (formation of the first stars) का भी पता लगाने की कोशिश करेगी । 12 जुलाई, 2022 को नासा द्वारा को जारी की गई शुरुआती तस्वीरों से संकेत मिलता है कि वेब अपने वादे पर खरा उतर रहा है ।

    National Aeronautics and Space Administration (NASA) – नासा के प्रशासक बिल नेल्सन (Bill Nelson ) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन तस्वीरों का खुलासा करने से पहले कहा, “हर तस्वीर एक नई खोज है, और प्रत्येक तस्वीर मानवता को ब्रह्मांड का एक नया दृश्य देगी जो पहले कभी नहीं देखा गया।” |

    दुनिया के इस सबसे बड़े जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने शुरुआती यूनिवर्स की सबसे गहरी, स्पष्ट और रंगीन इन्फ्रारेड फोटो खींची है, जो संभवतः 13 अरब साल पहले तक के ब्रह्मांड का नजारा दिखाती है | इस तस्वीर में अनगिनत सितारे, हजारों आकाशगंगाएं, सितारों के जन्मदाता नेबुला तक दिख रहे हैं |

    ब्रह्मांड अनगिनत अजूबों से भरा हुआ है | इसके रहस्यों को जानने के लिए इंसान लंबे अरसे से उत्सुक रहा है | नित नई तकनीक और उन्नत तकनीक के दम पर नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में कुछ ऐसा देखा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया था | उन्होंने ब्रह्मांड की अनोखी तस्वीर खींची है |

    वाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा जारी इस तस्वीर में अनगिनत सितारे और हजारों आकाशगंगाएं दिख रही हैं | बहुत दूर की धुंधली गैलेक्सी के झलकी भी इसमें दिख रही है | इस तस्वीर में हमारे सौरमंडल के बाहर एक विशाल गैसीय ग्रह और निहारिका (नेबुला) की दो तस्वीरें भी हैं | नेबुला वो जगह होती है, जहां सितारे पैदा होते हैं और नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा इसमें 5 घनी आकाशगंगाएं भी एकदूसरे के आसपास नजर आ रही हैं |

    ये ऐसी तस्वीर है, जिसमें इंसान ने इतनी दूरी तक और इतने समय पीछे तक का नजारा देखने में कामयाबी हासिल की है | माना जा रहा है कि टेलीस्कोप ने 13.8 अरब साल पहले हुए बिगबैंग के बाद निकली रोशनी के कुछ हिस्सों को तस्वीर में कैद किया है | 10 अरब डॉलर के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से खींची गई इस तस्वीर को “डीप फील्ड” नाम दिया गया है | टेलीस्कोप को ये तस्वीर लेने में 12.5 घंटे का समय लगा. इससे ब्रह्मांड के ओर-छोर की जानकारी हासिल करने में जुटे इंसान को नया नजरिया मिला है |

    नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष दूरबीन है. इसे पिछले साल अमेरिका के फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किया गया था | जनवरी में यह पृथ्वी से 16 लाख किलोमीटर दूर पहुंच गया था | वहां जाकर इसके उपकरणों को शुरू किया गया. इसमें 21 फुट का सोने से मढ़ा फूल की तरह दिखने वाला मिरर लगा है, जो अब तक अंतरिक्ष में भेजा गया सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील दर्पण है. इसके 18 सेग्मेंट हैं | जेम्स वेब के उप परियोजना वैज्ञानिक जोनाथन गार्डनर ने बताया कि इस टेलीस्कोप के जरिए हमें समय के अरबों साल पीछे देखने में कामयाबी मिली है | ऐसा इसलिए संभव हुआ कि उन आकाशगंगाओं से निकले प्रकाश को हमारी दूरबीन तक पहुंचने में अरबों साल लगे | अब आगे खगोलविद यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि ये आकाशगंगाएं कितनी पुरानी हैं | ब्रह्मांड की अनोखी चीजों के राज खोलने की कोशिश होगी | हमारे अपने सोलर सिस्टम के बारे में भी नई जानकारियां हासिल की जाएंगी |

  • यदि अंतरिक्ष में बंदूक चलाएं तो क्या होगा?

    यदि अंतरिक्ष में बंदूक चलाएं तो क्या होगा?

    कैसे चलती है गोली ?

    • आप जानते ही होंगे कि गोली को फायर करने के लिए उसमें मौजूद गन पाउडर या Propellant में आग लगानी पड़ती है जिसकी वजह से एक धमाके की मदद से ही गोली बन्दूक से बड़ी तेजी से बाहर निकलती है।
    • और आग लगाने के लिए हमें चाहिए ऑक्सीजन, पर स्पेस में ऑक्सीजन न होने की वजह से Artificial Oxidizers की मदद से गन पाउडर में आग लगाई जा सकती है और बुलेट को शूट किया जा सकता है।

    क्या प्रभाव होंगे ?

    कोई आवाज़ नहीं आयेगी ?

    • अगर हम पृथ्वी पर बंदूक से गोली चलाते हैं तो जैसे ही गोली बंदूक से निकलती है तो एक भारी आवाज पैदा होती है ।
    • पर अंतरिक्ष में मौजूद निर्वात (Vacuum) की वजह से वहाँ गोली चलाने पर कोई आवाज नहीं आएगी क्योंकि ध्वनि तरंगोंं को चलने करने के लिए कोई न कोई माध्यम चाहिए होता है और निर्वात में ध्वनि तरंगेंं नहीं चल पातीं और इसकी वजह से बिना किसी आवाज के ही गोली बंदूक से बाहर निकल जायेगी।

    कितना झटका लगेगा ?

    • जब किसी बंदूक से गोली निकलती है तो उसकी वजह से हमें पीछे की तरफ एक झटका लगता है जिसे “Recoiling of Gun” कहा जाता है।
    • Physics के अनुसार Newton के क्रिया प्रतिक्रिया वाले नियम और “Conservation of Linear Momentum” की वजह से ही गोली के बंदूक से निकलने पर पीछे की तरफ एक बल लगता है ।
    • Momentum और Mass की वजह से वो बल काफी कम होता है जिससे हमें ज्यादा दूर का धक्का नहीं लगता ।
    • स्पेस की बात करें तो ये Rules वहां भी Apply होते हैं पर Gravity न होने की वजह हम पीछे की तरफ तैरने लगेंगे और हमारा Displacement भी थोडा ज्यादा हो सकता है।
    • एक Calculation के मुताबिक अगर गोली बंदूक से 1000 m/s की स्पीड से निकलती है तो पीछे लगने वाले झटके की स्पीड कुछ centimeters/second ही होगी।

    गोली कहाँ तक जाएगी ?

    • जब हम पृथ्वी पर गोली चलाते हैं तो गुरुत्वाकर्षण और वायु के प्रतिरोध की वजह से उसपर कुछ बाहरी बल लगते हैं जिनकी वजह से कुछ समय बाद उसकी स्पीड कम हो जाती है और एक नियत दूरी तय करने के बाद वो रुक जाती है।
    • पर अंतरिक्ष में न तो गुरुत्वाकर्षण है और न ही हवा जो गोली पर कोई बाहरी बल लगाएं और उसे रोक सके।
    • इसका मतलब गोली अनिश्चित अंतराल के लिए tr​​avel करेगी और तब तक नहीं रुकेगी जब तक उसके रास्ते में कोई Asteroid या कोई Planet नहीं आ जाता।
  • क्या है हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी ?

    क्या है हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी ?

    हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी (Hubble Space Telescope (HST)) वास्तव में एक खगोलीय दूरदर्शी है जो अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह के रूप में स्थित है, इसे 25 अप्रैल सन् 1990 में अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की मदद से इसकी कक्षा में स्थापित किया गया था।

    हबल दूरदर्शी को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘ नासा ‘ ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था। अमेरिकी खगोलविज्ञानी एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे ‘ हबल ‘ नाम दिया गया। यह नासा की प्रमुख वेधशालाओं में से एक है।

    पहले इसे वर्ष 1983 में लांच करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों और बजट समस्याओं के चलते इस परियोजना में सात साल की देरी हो गई। वर्ष 1990 में इसे लांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इसके मुख्य दर्पण में कुछ खामी रह गई, जिससे यह पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है। वर्ष 1993 में इसके पहले सर्विसिंग मिशन पर भेजे गए वैज्ञानिकों ने इस खामी को दूर किया।

    यह एक मात्र दूरदर्शी है, जिसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है। वर्ष 2009 में संपन्न पिछले सर्विसिंग मिशन के बाद उम्मीद है कि यह वर्ष २०१४ तक काम करता रहेगा, जिसके बाद जेम्स वेब खगोलीय दूरदर्शी को लांच करने कि योजना है।