Category: कैमिस्ट्री

  • मैंगनीज क्या है ?

    What is Manganese?

    मैंगनीज एक रासायनिक तत्व है जिसका प्रतीक Mn और परमाणु क्रमांक 25 है। यह प्रकृति में एक मुक्त तत्व के रूप में नहीं पाया जाता है; यह अक्सर लोहे के साथ खनिजों में पाया जाता है।

    मैंगनीज एक संक्रमण धातु है जिसमें विशेष रूप से स्टेनलेस स्टील्स में औद्योगिक मिश्र धातु के बहुआयामी उपयोग होते हैं इसका निष्कर्षण मुख्यतः पाइरोलुसाइट (Pyrolusite) नामक अयस्क से किया जाता है।

    मैंगनीज के यौगिक

    पोटैशियम परमैंगनेट

    यह एक बैंगनी रंग का क्रिस्टलीय ठोस है। इसे लाल दवा के नाम से जाना जाता है। औद्योगिक पैमाने पर इसका उत्पादन मैंगनीज के अयस्क पाइरोलुसाइट से होता है। इसे प्रबलता से गर्म करने पर पोटैशियम मैंगनेट एवं मैंगनीज डाइऑक्साइड बनता है।

    पोटैशियम परमैगनेट का विस्तृत उपयोग आयतनीय विश्लेषण में ऑक्सीकारक के रूप में होता है। कार्बनिक यौगिकों में द्विबंधन की जांच में भी इसका उपयोग होता है। ऊनी, रेशमी एवं सूती कपड़ों के विरंजन तथा तेलों को रंगहीन बनाने में भी इसका उपयोग होता है। यह जल को कीटाणुरहित करता है।

    जीवित मानव शरीर में मैंगनीज सबसे कम पाया जाने वाला तत्व है

  • कैल्सियम क्या है ?

    What is Calcium ?

    कैल्सियम प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है

    परन्तु कार्बोनेट, सल्फेट, फॉस्फेट, फ्लोराइड, सिलिकेट, आदि यौगिकों के रूप में यह प्रकृति में विस्तृत रूप से पाया जाता है। कैल्सियम हडिड्यों, अण्डे के छिलके एवं शंख (मोलस्का समुदाय का प्राणी) का मुख्य अवयव है। दूध (Milk) में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व कैल्सियम है

    कैल्सियम धातु का निष्कर्षण द्रवित कैल्सियम क्लोराइड एवं कैल्सियम फ्लोराइड मिश्रण के विद्युत अपघटन से किया जाता है।

    कैल्सियम चाँदी की तरह उजली धातु है। अन्य सामान्य धातुओं की अपेक्षा मुलायम परन्तु सीसे की अपेक्षा कड़ी है। यह ऊष्मा और विद्युत का सुचालक होता है

    कैल्सियम के रासायनिक गुण

    अम्लों से अभिक्रिया कर यह हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। यह जल को अपघटित कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। क्षारों के साथ यह कोई अभिक्रिया नहीं करता है। इसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, कार्बन, फॉस्फोरस, क्लोरीन, ब्रोमीन, आदि अधातुओं के साथ गर्म करने पर क्रमशः हाइड्राइड, ऑक्साइड, नाइट्राइड, सल्फाइड, कार्बाइड, फास्फाइड, क्लोराइड, ब्रोमाइड, आदि यौगिक बनते हैं।

    कैल्सियम के उपयोग

    1. ऐल्कोहॉल में सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित जल को हटाने में।

    2. धातुओं के निष्कर्षण में उनमें सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित नाइट्रोजन, सल्फर, ऑक्सीजन, आदि को हटाने में।

    कैल्सियम के यौगिक

    कैल्सियम ऑक्साइड (Calcium Oxide)

    कैल्सियम ऑक्साइड को ‘क्विक लाइम’ (Quick lime) कहा जाता है। इसका उपयोग शुष्क कारक के रूप में, निर्माण कार्यों में गारे के रूप में, लाइम प्रकाश उत्पन्न करने तथा अनेक रसायनों के निर्माण में होता है।

    कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (Calcium Hydroxide)

    कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड को ‘बुझा हुआ चूना‘ कहते हैं। कली चूना की अभिक्रिया जल से कराने पर बुझा हुआ चूना प्राप्त होता है। शुष्क बुझे हुए चुने के ऊपर क्लोरीन गैस प्रवाहित करने पर ब्लीचिंग पाउडर प्राप्त होता है। इसका उपयोग—कोल गैस को शुद्ध करने में, शीशा, ब्लीचिंग पाउडर, कास्टिक सोडा, गारा, सीमेन्ट, इत्यादि बनाने में तथा मकानों में सफेदी करने के काम में होता है।

    कैल्सियम क्लोराइड (Calcium Chloride)

    कैल्सियम क्लोराइड थोड़ी मात्रा में समुद्री जल में पाया जाता है। यह जल एवं ऐल्कोहॉल में घुलनशील होता है। कैल्सियम क्लोराइड का उपयोग जलशोषक पदार्थ या Dehydrating agent के रूप में होता है। इसका उपयोग हिम मिश्रण में भी होता है।

    विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder)

    यह कैल्सियम का ऑक्सीक्लोराइड है। औद्योगिक पैमाने पर विरंजक चूर्ण का उत्पादन हेसेन क्लेवर विधि (Hasenclever’s process) द्वारा किया जाता है! यह सफेद चूर्ण होता है जिससे क्लोरीन जैसी गंध निकलती रहती है। इसका उपयोग कागज एवं कपड़ों के विरंजन में होता है। यह कीटाणु नाशक की तरह भी काम में लाया जाता है। अतः इसका उपयोग जल को संक्रमणरहित बनाने हेतु भी किया जाता है।

    जिप्सम (Gypsum)

    कैल्सियम सल्फेट को जिप्सम कहा जाता है। 120°C तक गर्म करने पर यह प्लास्टर ऑफ पेरिस में बदल जाता है। जिप्सम का उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा अमोनियम सल्फेट खाद बनाने में होता है।

    प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris)

    अर्द्धजलयोजित कैल्सियम सल्फेट को सामान्यतः प्लास्टर ऑफ पेरिस कहते हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग शल्य क्रिया में पटिट्यों के रूप में होता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से मूर्तियां एवं मूर्तियों के सांचे बनाये जाते हैं।

    सुपर फॉस्फेट ऑफ लीम

    मोनो कैल्सियम, हाइड्रोजन फॉस्फेट तथा सल्फेट के मिश्रण को सपुरफॉस्फेट कहते हैं। इसे फॉस्फोराइट नामक खनिज पदार्थ तथा जानवरों की हडिड्यों से बनाया जाता है। यह जल में घुलनशील होता है। अतः इसे पौधे आसानी से ग्रहण करते हैं। इस कारण यह अच्छा उर्वरक है।

    कैल्सियम कार्बाइड (Calcium Carbide)

    यह एक स्लेटी रंग का ठोस पदार्थ है। इसे नाइट्रोजन गैस की उपस्थिति में 1,200°C पर गर्म करने पर कैल्सियम सायनामाइड बनता है। कैल्सियम कार्बाइड पर जल से अभिक्रिया में एसीटिलीन गैस उत्पन्न होती है।

    नाइट्रोलिम (Nitrolim)

    कैल्सियम सायनामाइड को ‘नाइट्रोलिम’ कहा जाता है। इसका उपयोग खाद के रूप में होता है।

    हाइड्रोलिथ (Hydrolith)

    कैल्सियम हाइड्रोइड को ‘हाइड्रोलिथ’ कहते हैं। कैल्सियम धातु को हाइड्रोजन के साथ गर्म करने पर कैल्सियम हाइड्रोइड या हाइड्रोलिथ बनता है।

    कैल्सियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate)

    यह प्रकृति में चूने के पत्थर, संगमरमर, खड़िया, आदि के रूप में काफी मात्रा में पाया जाता है। मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ यह डोलोमाइट के रूप में पाया जाता है। यह एक उजला ठोस पदार्थ है। यह जल में अघुनशील होता है। कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO,) का प्रयोग दंत मंजन, पाउडर तथा पेस्ट बनाने में किया जाता है। यह दीवारों पर सफेदी करने के काम आता है। इसका उपयोग सीमेण्ट उद्योग में भी होता है।

    कैल्सियम फॉस्फेट (Calcium Phosphate)

    कैल्सियम फॉस्फेट का प्रयोग टूथ-पेस्ट (Tooth paste) बनाने में होता है।

  • ऐलुमिनियम क्या है ?

    What is Aluminum ?

    प्रकृति में ऐलुमिनियम स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाया जाता है।, लेकिन इसके यौगिक काफी मात्रा में मिलते हैं। यह बॉक्साइट, कोरंडम, डायस्पोर, फेलस्पर, अभ्रक, काओलीन, क्रायोलाइट, आदि रूपों में मिलता है।

    ऐलुमिनियम भू-पर्पटी में सबसे अधिक पाया जाने वाला धातु है। ऑक्सीजन और सिलिकन के बाद सबसे अधिक पाया जाने वाला यह तीसरा तत्व है। बॉक्साइट ऐलुमिनियम का मुख्य अयस्क है जो ऐलुमिनियम के जलयोजित ऑक्साइड के रूप में पाया जाता है।

    ऐलुमिनियम का निष्कर्षण

    ऐलुमिनियम धातु का निष्कर्षण मुख्यत: बॉक्साइट (Bauxite) अयस्क से विद्युत अपघटन विधि द्वारा किया जाता है। बॉक्साइट का रासायनिक नाम हाइड्रेटेड एलुमिना है। बॉक्साइट के विद्युत अपघटन में क्रायोलाइट का उपयोग बॉक्साइट को कम ताप पर घुलाने हेतु किया जाता है।

    ऐलुमिनियम के रासायनिक गुण

    तनु या सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलकर यह हाइड्रोजन गैस देता है एवं ऐलुमिनियम क्लोराइड बनता है। तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ धीरे-धीरे अभिक्रिया कर यह हाइड्रोजन गैस देता है। यह सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किये जाने पर ऐलुमिनियम सल्फेट बनाता है और (SO2) गैस बाहर निकलती है।

    ऐलुमिनियम के उपयोग

    1. ऐलुमिनियम तथा इसकी मिश्रधातु वायुयान, मोटर, आदि बनाने में प्रयुक्त होती है।

    2. यह घरेलू बर्तन बनाने में प्रयुक्त होता है।

    3. इसके तार विद्युत संचालन में प्रयुक्त होते हैं।

    4. लोहा (Fe), मैगनीज (Mn) आदि धातुओं के ऑक्साइडों को धातु में अवकृत करने में यह काम आता ।

    5. इसके पत्तर मिठाई, सिगरेट, आदि लपेटने के काम में आते हैं।

    6. थर्मिट विधि द्वारा धातु के कुछ ऑक्साइडों को धातु में अवकृत करने में यह प्रयुक्त होता है।

    ऐलुमिनियम की मिश्रधातुएं

    1. ऐलुमिनियम ब्रांज – Cu (90%), AI (10%) – बरतन, सिक्का, आदि निर्माण में

    2. मैग्नेलियम – Mg (2%), AI (95-96%), Cu-Fe (2-3%) – वायुयान निर्माण में

    3. ड्यूरेलुमिन – AI (95%), Cu (4%), Ni (1%) – वायुयान निर्माण में

    4. निकेलॉय – Cu (4%), Mn (0.5%), Mg (0.5%), AI (95%) – प्रेशर कुकर, वायुयान, आदि निर्माण में

    ऐलुमिनियम के यौगिक

    ऐलुमिनियम क्लोराइड (Aluminium Chloride)

    इसका उपयोग उत्प्रेरक के रूप में फ्रिडल क्राफ्ट अभिक्रिया में व्यापक तौर पर होता है। यह गैसोलिन (Gasoline) के उत्पादन में भी उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है। पेट्रोलियम के भंजन में अनार्द्र ऐलुमिनियम क्लोराइड का प्रयोग होता है।

    ऐलुमिना (Alumina)

    यह प्रकृति में बॉक्साइट, कोरंडम, नीलम, आदि कई रूपों में पाया जाता है। बड़े पैमाने पर यह बॉक्साइड अयस्क से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग कृत्रिम रत्न बनाने में, ऐलुमिनियम धातु बनाने में, ऐलुमिनियम के अन्य लवणों के निर्माण में, उत्प्रेरक के रूप में तथा भटिट्यों में अस्तर लगाने के काम में होता है।

    पोटाश एलम (Potash Alum)

    पोटाश एलम का रासायनिक नाम पोटैशियम ऐलुमिनियम सल्फेट होता है। इसका उपयोग रक्त प्रवाह रोकने में, कागज एवं चमड़ा उद्योग में, जल को मृदु बनाने, आदि में होता

    ऐलुमिनियम कार्बाइड (Aluminium Carbide)

    ऐलुमिनियम कार्बाइड को मिथेनाइड (Methanide) कहते हैं। ऐलुमिनियम कार्बाइड का जल की अभिक्रिया से मिथेन गैस बनती है।

    ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड (Aluminium Hydroxide)

    कपड़ों का अदाह्य बनाने तथा जलरोधी कपड़े तैयार करने में ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग किया जाता है।

    ऐलुमिनियम सल्फेट (Aluminium Sulphate)

    इसे हेयर साल्ट (Hair salt) भी कहते हैं। ऐलुमिनियम सल्फेट का प्रयोग कपड़ों की छपाई और रंगाई में रंगबंधक (Mordant) के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग फिटकरी बनाने में भी होता है।

  • मैग्नीशियम क्या है ?

    What is Magnesium ?

    मैग्नीशियम, सल्फेट के रूप में मैग्नीशियम झरने में तथा मैग्नीशियम क्लोराइड के रूप में समुद्री जल में पाया जाता है।

    पौधों को हरा रंग देने वाले कार्बनिक यौगिक क्लोरोफिल (Chlorophyll) में भी मैग्नीशियम उपस्थित रहता है

    मैग्नीशियम धातु का निष्कर्षण मुख्यतः कार्नालाइट अयस्क से किया जाता है। मैग्नीशियम चाँदी की तरह उजली एवं चमकीली धातु है। यह मुलायम, नम्य तथा प्रतन्य धातु है। अतः इसे आसानी से तार या फीते के रूप में प्राप्त किया जा सकता है। तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया कर यह हाइड्रोजन गैस बनाता है। यह क्षार से किसी भी प्रकार की अभिक्रिया नहीं करता है। तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ यह मैग्नीशियम नाइट्रेट तथा अमोनियम नाइट्रेट बनाता है।

    शुष्क ईथर की उपस्थिति में यह इथाइल आयोडाइड या ब्रोमाइड से अभिक्रिया करके इथाइल मैग्नीशियम आयोडाइड या ब्रोमाइड बनाता है जिसे ग्रिगनार्ड अभिकर्मक (Grignard’s reagent) कहते हैं। मैग्नीशियम नाइट्रोजन के साथ प्रतिक्रिया करके मैग्नीशियम नाइट्राइड बनाता है।

    मैग्नीशियम के उपयोग

    1. फ्लैश लाइट रिबन (Flash light ribbon) बनाने में।

    2. फोटोग्राफी एवं आतिशबाजी में।

    3. ग्रिगनार्ड अभिकर्मक बनाने में।

    4. मिश्रधातुओं के निर्माण में।

    मैग्नीशियम के यौगिक

    मैग्नीशिया (Magnesia)

    मैग्नीशियम ऑक्साइड मिल्क ऑफ मैग्नीशिया कहा जाता है। यह हल्के श्वेत रंग का चूर्ण होता है। यह प्रतिदीप्तिशील प्रकाश उत्पन्न करता है। चूंकि यह बहुत ऊंचे ताप पर द्रवित होता है। अतः भट्ठों में इसका अस्तर (Lining) लगाया जाता है। इसका उपयोग दवा के रूप में पेट की अम्लीयता दूर करने में भी होती है।

    मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Magnesium Hydroxide)

    यह एक क्षार है। शीरा (Molasses) से चीनी के निष्कर्षण में मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग होता है।

    मैग्नीशियम की मिश्रधातुएं

    1. मैग्नेलियम (Magnalium) Mg-2%,AI-95% तथा Cu-Fe-2-3%

    2. ड्युरालुमिन (Duralumin) AI-95%, Cu- 4%, Mg -0.5%, Mn-0.5

    3. इलेक्ट्रॉन (Elektron) Mg-95%, Zn-4.5% तथा Cu-0.5%

    मैग्नेलियम मिश्रधातु काफी हल्का होता है। इस कारण इसका उपयोग हवाई जहाज, तराजु, आदि के निर्माण में होता है।

    ड्यूरालुमिन का उपयोग भी हवाई जहाज के निर्माण में होता है। प्रेशर कुकर (Pressure cooker) भी ड्यूरालुमिन से बनाये जाते हैं। इलेक्ट्रॉन का उपयोग भी हवाई जहाज एवं मोटरगाड़ी के ढांचा बनाने में होता है।

    फ्लैश बल्बों में नाइट्रोजन गैस के वायुमंडल में मैग्नीशियम का तार रखा रहता है।

    मैग्नीशयम सल्फेट (Magnesium Sulphate)

    मैग्नेशियम सल्फेट प्रकृति में इप्सोमाइट के रूप में इप्सम के गर्म झरनों में पाया जाता है। इसका उपयोग कपास उद्योग तथा साबुन एवं पेन्ट उद्योग में होता है। ग्रीलो विधि से सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने में प्लैटिनीकृत MgSO4 का व्यवहार उत्प्रेरक के रूप में होता है। मैग्नीशियम सल्फेट का उपयोग शोधक (Purgative) के रूप में होता है।

    मैग्नीशियम कार्बोनेट (Magnesium Carbonate)

    यह मैग्नेसाइट या डोलोमाइट के रूप में प्रकृति में पाया जाता है। मैग्नीशियम कार्बोनेट का उपयोग छपाई की स्याही, दंत मंजन, चेहरे पर लगाने वाले पाउडर, आदि बनाने में होता है। मैग्नीशियम एल्वा की तरह यह दवा के रूप में उपयोग होता है। यह पेट की अम्लीयता दूर करने के काम में आता है।

    मैग्नीशियम एल्वा (Magnesium Alva)

    मैग्नीशियम एल्वा का प्रयोग पेट की अम्लता दूर करने में किया जाता है।

  • सोडियम क्या है ?

    What is Sodium ?

    सोडियम अत्यंत ही क्रियाशील तत्व होने के कारण यह मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। संयुक्त अवस्था में यह पर्याप्त मात्रा में क्लोराइड, नाइट्रेट, कार्बोनेट, बोरेट और सल्फेट के रूप में पाया जाता है।

    यह चाँदी के समान सफेद धातु हैं। यह मुलायम होता है एवं इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। इसका आपेक्षिक घनत्व 0.97 होता है। पानी से हल्का होने के कारण यह पानी पर तैरने लगता है। यह विद्युत का सुचालक होता है।

    सोडियम धातु बेंजीन तथा ईथर में विलेय होता है। सोडियम हाइड्रोक्साइड वायु में उपस्थित CO2 से संयोग कर सोडियम कार्बोनेट बनाता है, यही कारण है कि सोडियम धातु को केरोसीन तेल के अंदर डूबाकर रखा जाता है l

    सोडियम के उपयोग

    (1) अवकारक के रूप में,

    (2) सांश्लेषिक प्रतिक्रियाओं (Synthetic reactions) में,

    (3) सोडियम-लेड मिश्रधातु का उपयोग टेट्राइथाइल लेड नामक अपस्फोटनरोधी (Anti knocking) यौगिक बनाने में होता है और

    (4) द्रवित सोडियम का उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में ठंडक उत्पन्न करने में होता है।

    सोडियम के यौगिक

    सोडियम हाइड्रॉक्साइड (Sodium Hydroxide)

    सोडियम हाइड्रॉक्साइड को कास्टिक सोडा (Caustic soda) या दाहक सोडा कहा जाता है। इसका उपयोग पेट्रोलियम को शुद्ध करने में साबुन बनाने में, कागज, सूती कपड़ों में चमक पैदा करने में, कृत्रिम रेशम के निर्माण में, रंग तथा रेयॉन (Rayon) बनाने में, प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में तथा सोडियम धातु के निर्माण में होता है।

    सोडियम कार्बोनेट (Sodium Carbonate)

    सोडियम कार्बोनेट को धोने वाला सोडा या वाशिंग सोडा भी कहा जाता है। वाशिंग सोडा का बड़े पैमाने पर उत्पादन लेब्लांक विधि, सौल्वे विधि (अमोनिया-सोडा विधि) तथा वैद्युत विधि द्वारा किया जाता है।

    सोडियम कार्बोनेट का उपयोग जल का खारापन दूर करने में, पेट्रोलियम को शुद्ध करने में, प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में तथा शीशा, साबुन, कागज, कास्टिक सोडा, आदि के उत्पादन में होता है। वाशिंग सोडा का जलीय विलयन क्षारीय होता है। क्रिस्टलीय अवस्था में वाशिंग सोडा में क्रिस्टलन जल होता है। वाशिंग सोडा में अपमार्जक का गुण होता है।

    सोडियम बाइकार्बोनेट (Sodium Bicarbonate)

    सोडियम बाइकार्बोनेट का दूसरा नाम बेकिंग सोडा (Baking soda) है। सोडियम बाइकार्बोनेट को खाने वाला सोडा भी कहते हैं।

    आटा में खाने वाला सोडा मिलाने पर बनी रोटी अच्छी तरह फुलती है क्योंकि इस दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। सोडियम बाईकोर्बोनेट का उपयोग औषधि के रूप में, पेट की अम्लता (Acidity) दूर करने में, बेकिंग पाउडर (Baking powder) बनाने में तथा अग्निशामक यंत्रों में होता है।

    ग्लोबर साल्ट (Glouber’s Salt)

    सोडियम सल्फेट को ग्लोबर साल्ट कहा जाता है। यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड या सोडियम कार्बोनेट पर सल्फ्यूरिक अम्ल की प्रतिक्रिया से तैयार किया जाता है।

    यह एक रंगहीन तथा रवादार ठोस पदार्थ है। इसके एक अणु में रवा जल के 10 अणु उपस्थित रहते हैं। इसका उपयोग शीशा बनाने, कागज बनाने, दवा बनाने, सोडियम सल्फाइड के निर्माण, आदि में होता है।

    सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride)

    सोडियम क्लोराइड को साधारण नमक (Common salt) भी कहा जाता है। समुद्री जल के वाष्पीकरण प्रक्रिया से नमक का उत्पादन होता है। सोडियम क्लोराइड को बर्फ के साथ मिलाकर हिम-मिश्रण (Freezing mixture) बनाया जाता है।

    सोडियम क्लोराइड मानव के भोजन का आवश्यक अंग है। समुद्री जल में कुछ घुलनशील ठोस का 75% सोडियम क्लोराइड होता है। डिहाइड्रेशन के समय शरीर में सोडियम क्लोराइड कम हो जाता है। नमक को खुली हवा में छोड़ देने पर यह हवा से नमी को सोख लेता है। इसका कारण नमक में अशुद्धि के रूप में मैग्नीशियम क्लोराइड की उपस्थिति है जो कि प्रस्वेदी (Deliquescent) होता है।

    सोडियम पराक्साइड (Sodium Peroxide)

    यह हल्के पीले रंग का चूर्ण होता है। खुली हवा पर छोड़ देने पर हाइड्रॉक्साइड और कार्बोनेट की तह जम जाने के कारण यह सफेद हो जाता है।

    इसका उपयोग हाइड्रोजन पराक्साइड के निर्माण में, रंगाई के काम में, प्रयोगशाला में ऑक्सीकारक के रूप मे, रेशम, ऊन, आदि के विरंजन (Bleaching) में होता है। सोडियम पराक्साइड का उपयोग पनडुब्बी, जहाजों तथा अस्पताल, आदि की बंद हवा को शुद्ध करने में भी होता है।

    सोडियम नाइड्रेट (Sodium Nitrate)

    सोडियम नाइट्रेट को ‘चिली साल्टपीटर‘ कहते हैं। यह चीली तथा पेरू में काफी मात्रा में मिलता है। इसका उपयोग खाद के रूप में तथा नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में होता है।

    सोडियम थायोसल्फेट (Sodium Thiosulphate)

    इसे हाइपो (HYPO) के नाम से भी जाना जाता है।

    इसका उपयोग फोटाग्राफी (Photography) में निगेटिव और पॉजिटिव का स्थायीकरण करने में होता है। यह अनअपघटित सिल्वर ब्रोमाइड को दूर कर देता है। इसका उपयोग प्रतिक्लोर (Anticholinergic) के रूप में विजित (Bleached) वस्त्रों से क्लोरीन दूर करने में होता है। इसका उपयोग सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au) के निष्कर्षण में भी होता है।

    बोरेक्स या सुहागा (Borex)

    सोडियम टेट्राबोरेट डेका हाइड्रेट को ‘सुहागा‘ या ‘बोरेक्स‘ कहते हैं। यह सफेद क्रिस्टलीय ठोस है। यह जल में विलेय है।

    इसका मुख्य उपयोग है—(i) कांच, इनेमिल, साबुन व मोमबत्ती उद्योग में, (ii) कागज व सिरेमिक की वस्तुओं पर ग्लेज करने में, (iii) जल को मृदु करने में, और (iv) चमड़ा उद्योग में खोल को साफ करने व उसकी रंगाई में।

    माइक्रोकॉस्मिक लवण (Microcosmic Salt)

    सोडियम अमोनियन हाइड्रोजन फॉस्फेट को ‘माइक्रोकॉस्मिक लवण‘ कहते हैं।

    केल्गन (Calgen)

    सोडियम हेक्सा मेटाफॉस्फेट को ‘केल्गन‘ कहते हैं। इसका प्रयोग जल की कठोरता दूर करने में किया जाता है।

  • औषधि एवं रसायन क्या है ?

    What are Drugs and Chemicals ?

    ड्रग्स (Drugs) ऐसे रसायन (Chemicals) या पदार्थ होते हैं जो हमारे शरीर के काम करने के तरीके को बदल देते हैं।

    कुछ ऐसी दवाएं (medicines)जो ड्रग्स का ही रूप होती हैं जो लोगों की मदद करती हैं जब डॉक्टर उन्हें लिखते (prescribed) हैं और बीमारियों के इलाज के तौर पर उनका इस्तेमाल किया जाता है

    कुछ ड्रग्स ऐसे होते है जिनका कोई चिकित्सीय उपयोग या लाभ नहीं होता है। लेकिन जब उन्हें लिया जाता है (आमतौर पर निगलने, श्वास लेने या इंजेक्शन द्वारा), तो यह नशे का काम करती है l

    प्रकार

    निश्चेतक (Anaesthetic)

    निश्चेतक औषधियों का प्रयोग मुख्यतः संवेदना को कम करने के लिए किया जाता है

    कुछ प्रमुख निश्चेतक हैं—डाइ इथाइल ईथर, क्लोरोफॉर्म, सल्फोनल, वेरोनल, क्लोरो प्रोपेन, कोकीन, डायजीपाम, पेन्टोथल सोडियम, हेलोथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, आदि।

    एन्टीबायोटिक्स (Antibiotic)

    एन्टीबायोटिक्स औषधियां अत्यन्त सूक्ष्म जीवाणुओं, कवक, आदि से बनायी जाती है। ये औषधियां अन्य दूसरे प्रकार के जीवाणुओं को मारती है और उनकी वृद्धि को रोकती है।

    अलक्जेंडर फ्लेमिंग ने, 1929 में पहली एन्टीबायोटिक औषधि पेनीसिलीन का आविष्कार किया जिसके द्वारा विशेष प्रकार के जीवाणुओं को नष्ट किया जा सकता था।

    कुछ महत्त्वपूर्ण एन्टीबायोटिक औषधियां निम्न हैं—पेनीसिलीन, टेट्रासाइक्लिन, सेफेलोस्प्रिन्स स्ट्रेप्टोमाइसिन, जेन्टामाइसिन, रिफामाइसिन, क्लोरामाइसिटीन, आदि।

    एन्टीसेप्टिक (Antiseptic)

    एन्टीसेप्टिक औषधियां सूक्ष्म जीवाणुओं को मारने एवं उनकी वृद्धि को रोकने में सहायक होती हैं। यह रक्त को दूषित होने से रोकने व घाव, आदि भरने में विशेष रूप से सहायक होती है

    प्राचीन काल में ही सिरका तथा सिडार तेल का प्रयोग घावों, आदि के उपचार में होता आ रहा है। आधुनिक काल में एन्टिसेप्टिक औषधियां तैयार करने वालों में सेमिलवीस, लिस्टर व कोच, आदि का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

    कुछ महत्त्वपूर्ण एन्टिसेप्टिक औषधियां निम्न हैं—आयोडीन, हाइपोक्लोरस अम्ल, इथाइल ऐल्कोहॉल, फिनॉल, हेक्साक्लोराफीन, फॉर्मेल्डीहाइड, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, एक्रीफ्लेविन, आदि।

    एन्टीपायरेटिक्स (Antipyretics)

    एन्टीपायरेटिक्स का प्रयोग शरीर दर्द व बुखार उतारने में किया जाता है। कछ महत्त्वपूर्ण एन्टीपायरेटिक औषधियां निम्नलि हैं—ऐस्पीरिन, क्रोसीन, फिनैसिटिन, पायरोमिडीन, आदि।

    सल्फा ड्रग्स (Sulpha Drugs)

    सल्फा ड्राग्स या सल्फा औषधियों में मुख्य रूप से सल्फर और नाइट्रोजन होते हैं। इस प्रकार की औषधियां कुछ जीवाणुओं के प्रति अत्यंत प्रभावी होती हैं।

    सबसे पहली सल्फा औषधि सल्फानिलमाइड 1908 ई. में बनायी गई थी।

    कुछ महत्त्वपूर्ण सल्फा औषधियां निम्न हैं—सल्फानिलमाइड, सल्फाडायजीन, सल्फापिरीडीन, सल्फाथायोजाल, आदि।

    कुछ महत्वपूर्ण दवाएं

    एल.एस.डी. (L.S.D.): इसका पूरा नाम लाइसर्जिक अम्ल डाइथाइलेमाइड है। यह एक भ्रम उत्पन्न करने वाली दवा है।

    एस्पीरिन (Aspirin): एसीटाइल सैलिसिलिक अम्ल को ‘एस्पीरिन’ कहा जाता है। यह एक ज्वरनाशी तथा पीड़ानाशी दवा है।

    पैरल्डिहाइडः इसका उपयोग नींद लाने वाली दवा के रूप में होता है।

    यूरोट्रोपीन: इसका उपयोग मूत्र रोग की दवा के रूप में होता है। 

    क्लोरेटोन: इसका उपयोग पहाड़ी यात्रा या समुद्री यात्रा में चक्कर आने से रोकने की दवा के रूप में होता है।

  • विस्फोटक (Explosives) क्या है ?

    What are Explosives ?

    विस्फोटक ऐसे प्रतिक्रियाशील पदार्थ होते है जिनमे बड़ी मात्रा में संभावित ऊर्जा (potential energy) होती है जो अचानक निकलने पर विस्फोट उत्पन्न कर सकती है, विस्फोट का कारण तेज गर्मी, प्रकाश ध्वनि या दबाव होता है l इनके दहन पर अत्यधिक ऊष्मा और तीव्र ध्वनि पैदा होती है।

    भौतिकी में, संभावित ऊर्जा  (Potential Energy) किसी वस्तु द्वारा अन्य वस्तुओं के सापेक्ष उसकी स्थिति, अपने भीतर तनाव, उसके विद्युत आवेश या अन्य कारकों के कारण रखी गई ऊर्जा है  

    आर.डी.एक्स

    आर.डी.एक्स. का पूरा नाम रिसर्च एण्ड डेवलप्ड एक्सप्लोसिव (Research and Developed Explosive) है। इसका रासायनिक नाम साइक्लो ट्राइ मिथाइलीन ट्राईनाइट्रामाइन है। इसे प्लास्टिक विस्फोटक भी कहा जाता है।

    इस विस्फोटक को स.रा.अ. में साइक्लोनाइट; जर्मनी में हेक्सोजन तथा इटली में टी-4 के नाम से जाना जाता है

    इसमें प्लास्टिक पदार्थ, जैसे—पॉली ब्यूटाइन एक्रिलिक अम्ल या पॉलियूरेथेन को मिलाकर प्लास्टिक बान्डेड एक्सप्लोसिव बनाया जाता है। इसके एक रूप को सी-4 भी कहते हैं। यह एक प्रचंड विस्फोटक है तथा इसके तापमान व आग फैलाने की गति को बढ़ाने के लिए इसमें एल्युमिनियम चूर्ण मिलाया जाता है। आर.डी.एक्स. की विस्फोटक ऊष्मा 1,510 किलो कैलोरी प्रति किग्रा. होती है। इस विस्फोटक की खोज 1899 में जर्मनी के हैनिंग ने शुद्ध सफेद दानेदार पाउडर के रूप में किया था।

    टी.एन.जी. (T.N.G.)

    ट्राइनाइट्रो ग्लिसरीन एक रंगहीन तैलीय द्रव है जो डायनामाइट बनाने के काम आता है। इसे नोबल का तेल भी कहा जाता है। यह सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल व सान्द्र नाइट्रिक अम्ल की ग्लिसरीन के साथ क्रिया करके बनायी जाती है।

    टी.एन.टी. (T.N.T.)

    इसका पूरा नाम ट्राइनाइट्रो टॉल्वीन है जो कि सर्वाधिक प्रयोग में आने वाला एक विस्फोटक हैं। यह टॉल्वीन के साथ सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल व सान्द्र नाइट्रिक अम्ल की क्रिया से बनाया जाता है।

    डायनामाइट (Dynamite)

    डायनामाइट एक प्रकार का विस्फोटक है जिसका आविष्कार अल्फ्रेड नोबेल ने 1863 ई. में किया था। यह नाइट्रोग्लिसरीन को किसी अक्रिय पदार्थ जैसे लकड़ी के बुरादे या कीजेलगूर (Kieselguhr) में अवशोषित करके बनाया जाता है।

    आधुनिक डायनामाइट में नाइट्रोग्लिसरीन की जगह सोडियम नाइट्रेट का प्रयोग किया जाता है। जिलेटिन डायनामाइट में नाइट्रो सेलुलोस की भी मात्रा उपस्थित रहती है।

    टी.एन.पी. (T.N.P.)

    टी.एन.पी, का पूरा रूप ट्राइनाइट्रो फिनॉल (Trintro Phenol) होता है। इसे ‘पिक्रिक अम्ल’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • रेशे (Fibres) क्या है ?

    What are Fibres ?

    वे शृंखला-युक्त ठोस जिनकी लम्बाई-चौड़ाई की अपेक्षा सैकड़ों या हजारों गुना अधिक हो, ‘रेशे’ (Fibres) कहलाते हैं।

    संश्लिष्ट रेशा (Syntheitc Fibres)

    संश्लिष्ट रेशे कई सरल अणुओं के संयोग से बने बहुलक (Polymers) होते हैं। कृत्रिम तरीके से प्रयोगशालाओं में तैयार किये गये रेशों को ‘संश्लिष्ट’ रेशा कहा जाता है। उदाहरण, रेयॉन, नाइलॉन, पॉलिएस्टर।

    प्रमुख संश्लिष्ट रेशे

    नॉयलॉन (Nylon)

    नॉयलॉन ऐसे छोटे कार्बनिक अणुओं के बहुलकीकरण प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यह एक पॉली एमाइड रेशे का उदाहरण है।

    नॉयलान मानव द्वारा संश्लिष्ट किया गया पहला रेशा था। इसका निर्माण सर्वप्रथम 1935 ई. में किया गया था तथा व्यापारिक स्तर पर 1939 ई. में महिलाओं के लिए जुराबें इससे बनाई गई।

    नॉयलान का उपयोग मछली पकड़ने के जाल में, पैरासूट के कपड़े में, टायर, दांत, ब्रश, पर्वतारोहण के लिए रस्सी, आदि बनाने में होता है।

    रेयॉन (Rayon)

    सेल्युलोज से बने कृत्रिम रेशे को रेयॉन कहते हैं। रेयॉन बनाने के लिए सेल्युलोज कागज की लुगदी या काष्ठ को लिया जाता है। इसे सान्द्र तथा ठण्डे सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा कार्बन डाइसल्फाइड से उपचारित करते हैं।

    रेयॉन रासायनिक दृष्टि से सूत के समान है। रेयॉन का उपयोग कपड़ा बनाने में, कालीन बनाने में चिकित्सा-क्षेत्र में लिट या जाली बनाने के लिए किया जाता है।

    पॉलीएस्टर (Polyester)

    इसे इंग्लैंड में विकसित किया गया था। पॉलीएस्टर का उपयोग कपड़े के रूप में, नौकाओं का पाल बनाने में, अग्निशमन में, प्रयुक्त हौज पाइप, आदि बनाने में किया जाता है।

    कार्बन फाइबर (Carbon Fibres)

    कार्बन फाइबर कार्बन परमाणुओं की लम्बी श्रृंखला से बने होते हैं। इसका उपयोग अंतरिक्ष यान तथा खेलकूद की सामग्री बनाने में होता है।

  • रबड़ और उसके प्रकार

    Rubber and its type ?

    रबड़ भूमध्यरेखीय सदाबहार वनों में पाये जाने वाले एक प्रकार के वृक्ष के दूध से प्राप्त होता है। इस दूध को ‘लेटेक्स’ (Latex) कहा जाता है। यह अपनी प्रत्यास्थता (Elasticity), जल प्रतिरोधी (Resistance to water) तथा विद्युत कुचालकता के कारण अनेक उद्योगों में काम आने लगा। अमेजन नदी की द्रोणी, रबड़ के वृक्षों का मूल स्थान है।

    रबड़ दो प्रकार के होते हैं

    प्राकृतिक रबड़ (Natural Rubber)

    प्राकृतिक रबड़ कुछ विशिष्ट जाति के पेड़ों से निकले वनस्पति दूध (Latex) से प्राप्त किया जाता है। दूसरे शब्दों में प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रबड़ को प्राकृतिक रबड़ कहा जाता है। यह आइसोप्रीन का बहुलक है।

    संश्लिष्ट रबड़ (Synthetic Rubber)

    कृत्रिम स्रोतों से प्राप्त रबड़ को संश्लिष्ट रबड़ कहा जाता है। कृत्रिम रबड़ के विकास का श्रेय मैथ्यूस एवं हैरिस को जाता है। उन्होंने आइसोप्रीन को सोडियम के साथ 60°C तापक्रम पर प्रतिक्रिया कराकर प्राकृतिक रबड़ के सदृश बहुलक प्राप्त किया—जो संश्लिष्ट रबड़ कहलाता है।

    उदाहरण, बुना -N- रबड़, बुना -S- रबड़, पॉलिस्टाइरीन, ड्यूप्रीन रबड़, नियोप्रीन रबड़, थायोकॉल रबड़ तथा पॉलि विनाइल क्लोराइड, आदि।

  • प्लास्टिक (Plastics) क्या है ?

    What is Plastics ?

    प्लास्टिक सिंथेटिक (synthetic) या अर्ध-सिंथेटिक (semi-synthetic) सामग्रियों की एक विस्तृत श्रृंखला है जो मुख्य घटक के रूप में पॉलिमर का उपयोग करते हैं। उनकी प्लास्टिसिटी (plasticity) (प्लास्टिक का गुण)  प्लास्टिक को, विभिन्न आकृतियों की ठोस अवस्था में ढालना, उन्हें बाहर निकालना या उन्हें दबाना, संभव बनता है। प्लास्टिक का हल्का, टिकाऊ, लचीला और उत्पादन के लिए सस्ती होने के कारण इसका व्यापक उपयोग होता है

    प्लास्टिक आमतौर पर औद्योगिक प्रणालियों के माध्यम से बनाए जाते हैं। अधिकांश आधुनिक प्लास्टिक प्राकृतिक गैस या पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधन आधारित रसायनों से प्राप्त होते हैं; हालांकि, हाल के औद्योगिक तरीकों में अक्षय सामग्रियों (renewable materials ) से बने वेरिएंट का उपयोग किया जाता है l

    प्राकृतिक प्लास्टिक (Natural Plastics)

    प्राकृतिक प्लास्टिक वह प्लास्टिक है जो गर्म किये जाने पर मुलायम तथा ठंडा किये जाने पर कठोर हो जाता है। लाह (लाख) इसका एक अच्छा उदाहरण है।

    कृत्रिम प्लास्टिक (Artificial Plastics)

    रासायनिक विधि से तैयार किये गये प्लास्टिक को कृत्रिम प्लास्टिक कहा जाता है

    कृत्रिम प्लास्टिक दो प्रकार के होते हैं

    थर्मो प्लास्टिक (Thermo Plastics)

    यह गर्म करने पर मुलायम और ठंडा करने पर कठोर हो जाता है। यह गुण इसमें सदैव वर्तमान रहता है, चाहे इसे कितनी बार क्यों न गर्म व ठंडा किया जाये। जिन कार्बनिक यौगिक के अंत में एक द्विबन्ध रहता है, उनके योगशील बहुलीकरण (Addition polymerisation) से थर्मोप्लास्टिक बनता है

    उदाहरण—पॉलीइथिलीन, पॉली विनाइल क्लोराइड (PVC), पॉलीस्टइरीन, नायलॉन, टेफ्लॉन, इत्यादि।

    थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting Plastic)

    यह वह प्लास्टिक है जो पहली बार गर्म करते समय मुलायम हो जाता है और उसे इच्छित आकार में ढाल किया जाता हैं, इसे पुनः गर्म करके मुलायम नहीं बनाया जा सकता है। इस प्रकार की अनुत्क्रमणीय बहुलकों को ‘ताप दृढ़’ बहुलक कहते हैं।

    उदाहरण—ग्लिप्टल, वीटल, बेकेलाइट, इत्यादि।