प्लांटी (पादप जगत) Kingdom Plante क्या है ? उसके वर्गीकरण, विशेषताएँ और प्रकार (Hindi me)

What is Kingdom Plante? Padap Jagat kya hai ?

बहुकोशिकीय, प्रकाश-संश्लेषी, यूकैरियोटिक तथा उत्पादक जीवों को पादप जगत के अन्तर्गत रखा जाता है। पादप जगत का विस्तृत वर्गीकरण निम्न रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।

शैवाल (Algae)

शैवाल को सामान्यतया प्रोटिस्टा जगत के अन्तर्गत रखा जाता है। अधिकांश शैवालों के लक्षण पौधों से मिलते-जुलते है; जैसे – पर्णहरिम की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं भोजन निर्माण करना। उपर्युक्त सारणी के आधार पर हम कह सकते हैं कि शैवाल का वर्गीकरण मोनेरा, प्रोटिस्टा एवं पादप जगत के अन्तर्गत किया गया है। पादप जगत के अन्तर्गत शैवालों के तीन समूह निम्नलिखित हैं:

लाल शैवाल (Red Algae)

इसकी कोशिकाओं में (r-फाइकोइरिथ्रिन) नामक लाल वर्णक अधिकता से मिलते हैं।

भूरा शैवाल (Brown Algae)

इस शैवाल का रंग भूरा फ्यूकोजैन्थिन नामक वर्णकों के कारण होता है। इन्हें पादप जगत के फीयोफाइटा में रखा गया है।

हरे शैवाल (Green Algae)

स्थल पर सबसे पहले पौधों का विकास हरे शैवालों से ही हुआ है। हरे शैवाल में क्लोरोफिल-a तथा 6 और कुछ कैरोटिनॉइड क्लोरोप्लास्ट की ग्रेना में उपस्थित रहते हैं।

लाइकेन (Lichen)

लाइकेन शैवाल तथा कवक से बने होते हैं, ये सहजीवी होते हैं। शैवालांश (phycobiont) प्रकाश-संश्लेषण, जबकि कवकांश (mycobiont) शुष्कन से रक्षा तथा अवशोषण का कार्य करता है ये नंगी चटटानों पर सबसे पहले उगते हैं। रोसेला टिक्टोरिया लाइकेन से लिटमस प्राप्त होता है।

ब्रायोफाइटा (Bryophyta)

सर्वाधिक सरल छोटे स्थलीय पौधे हैं, जो आर्द्र स्थानों में विकसित होते हैं। पादप का शरीर थैलस या पर्णिल अर्थात् तना तथा पत्ती सदृश रचनाओं में विभेदित होता है परन्तु वास्तविक तना एवं पत्ती नहीं होता है। ये पौधे मूलाभास (राइजोड) के द्वारा मिट्टी से जुड़े होते हैं। इसमें जड़, पुष्प तथा बीज का अभाव होता है। इनमें युग्मकोद्भिद् अवस्था प्रभावी होती है। ब्रायोफाइटा को पादप जगत के उभयचर के रूप में जाना जाता है

ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta)

वे पौधे, जिनमें संवहनी ऊतक पाए जाते हैं उन्हें ट्रेकियोफाइट कहते हैं। इनके शरीर में जड़, तना, पत्ती होते हैं। तथा जाइलम और फ्लोएम जैसे संवहनी ऊतक होते हैं। वर्ग-ट्रेकियोफाइटा के तीन प्रकार- -टेरिडोफाइटा (बीजविहीन संवहनी पौधे), अनावृतबीजी (फलविहीन बीज वाले पौधे) तथा आवृतबीजी (पुष्पी पादप, जिसमें फल तथा बीज बनते हैं) हैं।

टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)

बीज रहित थैलीनुमा पादप, जो प्राचीनतम संवहनी पौधा है। यह मुख्यतया स्थलीय तथा छायादार और नम स्थानों पर पाया जाता है, परन्तु कुछ टेरिडोफाइट जलीय होते हैं; जैसे-एजोला, साल्वीनिया तथा मार्सिलिया आदि। टेरिडोफाइटा को मुख्यतया तीन समूहों-क्लब मॉस, हॉर्स टेल तथा फर्न में बाँटा जाता है।

अनावृतबीजी (Gymnosperms)

इस समूह के पौधों में बीज किसी प्रकार की संरचना से ढके हुए नहीं होते हैं अर्थात् बीज नग्न (खुला हुआ एवं अण्डाशय का अभाव) होता है। यह पौधा सदाबहार, काष्ठीय तथा लम्बा होता है। ये मरुद्भिद् स्वभाव के होते हैं, जिनमें रन्ध्र पत्ती में घुसे होते हैं तथा बाह्य त्वचा पर क्यूटिकल की पर्त चढ़ी होती है। अनावृतबीजी के अन्तर्गत शंकुधारी पौधे रखे गये हैं, जिसमें चीड़, फर, स्पूस आदि आते हैं।

आवृतबीजी (Angiosperms)

ये पुष्प युक्त पौधे होते हैं, जिसमें बीज सदैव फलों के अन्दर होता है। इस वर्ग के पौधों में जड़, तना, पत्ती, फूल और फल लगते हैं। ये शाक, झाड़िया या वृक्ष तीनों ही रूप में मिलते हैं। आवृतबीजी में परागकण तथा बीजाण्ड विशिष्ट रचना के रूप में विकसित होते हैं, जिन्हें पुष्प कहा जाता है, जबकि अनावृतबीजी में बीजाण्ड अनावृत होते हैं। आवृतबीजी को दो वर्गों एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में बाँटा गया है। एकबीजपत्री बीज में बीजपत्रों की संख्या एक होती है। जबकि द्विबीजपत्री में दो बीजपत्र होते हैं।

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