गोलीय तथा वर्ण विपथन (Spherical and Chromatic Aberration) क्या है ?

What are Spherical and Chromatic Aberration ?

गोलीय विपथन

यदि लेन्स बड़ा हो और उसके पूरे भाग पर प्रकाश पड़ता हो तो लेन्स का बाहरी भाग (Peripheral portion) तथा केन्द्रीय भाग प्रकाश के एक ही बिन्दु पर फोकस नहीं करते हैं। इससे एक बिन्दु रूप की वस्तु को प्रतिबिम्ब भी फैला हुआ और अस्पष्ट बनता है। इस दोष को ‘गोलीय विपथन‘ कहते हैं।

इस दोष का निवारण करने के लिए अनबिंदुक (Anastigmatic) लेन्सों का उपयोग किया जाता है। अनबिंदुक लेन्स विभिन्न प्रकार के कांच के अनेक लेन्सों को परस्पर जोड़ कर बनाए जाते हैं। गोलीय विपथन का निवारण विशेष प्रकार से बनाए गए नवचन्द्रक लेन्स (Meniscus lens) का उपयोग करके भी किया जाता है।

साधारण उपाय यह है, कि एक काले कागज में छोटा गोलाकार छिद्र बनाकर उस कागज को लेन्स पर लगा दिया जाये। इससे लेन्स के केवल केन्द्रीय भाग से प्रकाश गुजरेगा, अत: बाहरी भाग से प्रतिबिम्ब बनेगा ही नहीं परन्तु इस विधि में लेन्स का एक छोटा भाग ही प्रयुक्त होता है, अत: प्रतिबिम्ब कम चमकीला बनता है।

वर्ण विपथन

यदि अकेले लेन्स का प्रयोग किया जाए तो प्रायः श्वेत प्रकाश से भी प्रतिबिम्ब रंगीन व अस्पष्ट बनता है। लेन्स के इस दोष को ‘वर्ण विपथन‘ कहते हैं। इसका कारण यह है, कि लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक तथा उसके कारण लेन्स की फोकस दूरी भिन्न-भिन्न रंगों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। अत: भिन्न-भिन्न रंग की किरणें भिन्न-भिन्न बिन्दुओं पर फोकस होती है और प्रतिबिम्ब अस्पष्ट तथा रंगीन बनता है।

परमाणु सिद्धान्त का विकास करने वाले प्रसिद्ध रसायनज्ञ जॉन डाल्टन वर्णाध थे। अत: वर्णाधता को ‘डाल्टोनिक रोग’ भी कहते हैं।

मक्खिया पराबैंगनी प्रकाश को देख सकती है परन्तु लाल प्रकाश को नही देख सकती है l

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