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  • ध्वनि का परावर्तन क्या होता है ?

    ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)

    ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) भी होता है। यह ठीक उसी प्रकार होता है जैसे प्रकाश का परावर्तन होता है। ध्वनि की तरंग-दैर्ध्य अधिक होती है, इसलिए इसका परावर्तन बड़े आकार के पृष्ठों से अधिक होता है, जैसे—पर्वत, समुद्रतल, नदी, घाटी, पृथ्वीतल, आदि से परावर्तन। 

    प्रतिध्वनि (Echo)

    जो ध्वनि किसी दृढ़ दीवार या पहाड़, आदि से टकराने (अर्थात् परावर्तित होने) के बाद सुनाई देती है, उसे उस ध्वनि की ‘प्रतिध्वनि’ कहते हैं। यदि श्रोता परावर्तक तल के बहुत निकट खड़ा है, तो उसे प्रतिध्वनि नहीं सुनाई देगी।

    इसी प्रकार जब हम एक खाली कमरे में खड़े हैं, तो भी हमें प्रतिध्वनि नहीं सुनाई देती क्योंकि मूल ध्वनि तथा प्रतिध्वनि की आवाज एक साथ ही आती है।

    इसका कारण यह है, कि जब हमारा कान कोई ध्वनि सुनता है, तो उसका प्रभाव हमारे मस्तिष्क में 0.1 सेकण्ड तक रहता है, अत: यदि इस अवधि में कोई अन्य ध्वनि भी आएगी तो वह पहली के साथ मिल जाएगी।

    अतः स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक है, कि परावर्तक तल श्रोता से कम-से-कम इनती दूर अवश्य हो कि परावर्तित ध्वनि को उस तक पहुंचने में 0.1 सेकण्ड से अधिक समय लेगें। ध्वनि द्वारा वायु में 0.1 सेकण्ड में चली गई दूरी =1×332 = 33.2 मीटर 

    अत: यदि हम कोई ध्वनि उत्पन्न करते हैं, तो उसकी स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक तल की दूरी 33.2 की कम-से-कम मीटर = 16.6 (लगभग 17 मीटर) होनी चाहिए। 

    प्रतिध्वनि के प्रयोग

    प्रतिध्वनि द्वारा हम समुद्र की गहराई, वायुयान की ऊंचाई, सुदूर स्थित पहाड़ की दूरी, आदि माप सकते हैं। महासागर या समुद्र की गहराई मापने के लिए ध्वनि तरंग छोड़ी जाती है जो महासागर के तल से टकराकर लौट आती है। प्रतिध्वनि के लौटने में जो समय लगता है, उसके आधार पर गहराई निर्धारत कर ली जाती है।

  • ध्वनि का विस्पंद क्या होता है ?

    विस्पंद (Beat)

    जब कभी दो लगभग बराबर आवृत्ति की ध्वनि तरंग साथ-साथ उत्पन्न होती है, तो उनके अध्यारोपण से जो परिणामी ध्वनि उत्पन्न होती है, उसकी तीव्रता बारी-बारी से घटती और बढ़ती है। ध्वनि की तीव्रता के इस चढ़ाव व उतार को ‘विस्पंद’ कहते हैं। एक चढ़ाव और एक उतार को मिलाकर एक विस्पंद बनता है !

    विस्पंद आवृत्ति

    एक सेकण्ड में जितनी बार ध्वनि की तीव्रता में चढ़ाव या उतार होता है, उसे ‘विस्पंद आवृत्ति’ (Beat frequency) कहते हैं। विस्पंद आवृत्ति = ध्वनियों की आवृत्तियों का अन्तर = श्रोतों की आवृत्तियों का अन्तर। यदि हम बराबर आवृत्ति के दो ध्वनि श्रोतों को एक साथ बजाते हैं, तो उनसे उत्पन्न परिणामी ध्वनि की तीव्रता में हमें कोई उतार-चढ़ाव सुना नहीं देता। 

    विस्पंद के अनुप्रयोग

    • स्वरित्र द्विभुज की आवृत्ति के निर्धारण
    • वाद्यों के समस्वरण में
    • रेडियो अभिग्रहण में 
    • खानों में विस्फोटक मीथेन गैस का पता लगाने में
  • ध्वनि का व्यतिकरण क्या होता है ?

    ध्वनि का व्यतिकरण (Interference of Sound)

    जब समान आवृत्ति या आयाम की दो ध्वनि तरंगें एक साथ किसी बिन्दु पर पहुंचती हैं, तो उस बिन्दु पर ध्वनि ऊर्जा का पुनर्वितरण (Redistribution) हो जाता है। इस घटना को ध्वनि का व्यतिकरण कहते हैं।

    ‘सम्पोषी’ (Constructive) व्यतिकरण

    यदि दोनों तरंगें उस बिन्दु पर एक ही कला (Phase) में पहुंचती हैं, तो वहां ध्वनि की तीव्रता अधिकतम होती है। इसे ‘सम्पोषी’ (Constructive) व्यतिकरण कहते हैं।

    ‘विनाशी’ (Destructive) व्यतिकरण

    यदि दोनों तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं, तो वहां पर तीव्रता न्यूनतम होती है। इसे ‘विनाशी’ (Destructive) व्यतिकरण कहते हैं।

    उदाहरण

    व्यतिकरण के कुछ उदाहरण हैं—समुद्र में लाइट हाउस पर रखे साइरन से उत्पन्न की गई ध्वनि समुद्र पृष्ठ पर स्थित किसी बिन्दु पर दो प्रकार से पहुंचती है, एक तो लाइट हाउस से सीधे ही और दूसरे समुद्र के पृष्ठ से परावर्तित होने के बाद।

    इन दोनों तरंगों में व्यतिकरण के फलस्वरूप कुछ स्थानों पर ध्वनि तीव्र सुनाई देती है (वहां पर सम्पोषी व्यतिकरण होता है और कुछ स्थानों पर ध्वनि की तीव्रता बहुत कम होती है वहां पर विनाशी व्यतिकरण होता है। जिन्हें ‘नीरव क्षेत्र’ (Silence zone) कहते हैं। 

    किसी बड़े हॉल में एक ही स्थान पर उत्पन्न ध्वनि, श्रोता तक दो प्रकार से पहुंचती है, एक तो श्रोता के पास सीधे ही और दूसरे हाल की छत व दीवारों से परावर्तित होने के बाद। इन दोनों तरंगों में सम्पोषी व विनाशी व्यतिकरण होने के कारण हाल में कुछ बिन्दुओं पर तीव्र ध्वनि और कुछ पर अति मन्द (या बिल्कुल नहीं) ध्वनि सुनाई देगी। ध्वनि के व्यतिकरण का प्रभाव रेडियो के कार्यक्रमों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है।