Tag: scientist

  • माइकल फैराडे की जीवनी और प्रमुख आविष्कार| Biography of Michael Faraday and his inventions in Hindi

    माइकल फैराडे की जीवनी और प्रमुख आविष्कार| Biography of Michael Faraday and his inventions in Hindi

    इस आर्टिकल में हम महान वैज्ञानिक माइकल फैराडे (Michael Faraday) की जीवनी और उनके द्वारा बनाये गये प्रमुख आविष्कारों के बारे में बात करेगे |

    माइकल फैराडे (Michael Faraday) – परिचय


    माइकल फैराडे का पोर्ट्रेट (1791-1867)। हेनरी विलियम पिकर्सगिल (1782-1875) के द्वारा

    माइकल फैराडे Michael Faraday (22 सितंबर 1791 – 25 अगस्त 1867) एक ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी, रसायनज्ञ एवं दार्शनिक थे जिन्होंने विद्युत चुंबकत्व ((electromagnetism) और विद्युत रसायन विज्ञान (electrochemistry) के अध्ययन में योगदान दिया था। उनकी मुख्य खोजों में विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction), प्रतिचुम्बकत्व (Diamagnetism) और इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis) के अंतर्निहित सिद्धांत शामिल हैं। हालाँकि फैराडे ने बहुत कम औपचारिक शिक्षा प्राप्त की, फिर भी वह इतिहास के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक थे।

    प्रत्यक्ष धारा (direct current) ले जाने वाले कंडक्टर के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र पर अपने शोध से फैराडे ने भौतिकी में विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र की अवधारणा स्थापित की। फैराडे ने यह भी स्थापित किया कि चुंबकत्व प्रकाश की किरणों को प्रभावित कर सकता है और दोनों घटनाओं के बीच एक अंतर्निहित संबंध (underlying relationship) है।

    उन्होंने इसी तरह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण, प्रतिचुंबकत्व और इलेक्ट्रोलिसिस के नियमों की खोज की। विद्युत चुम्बकीय रोटरी उपकरणों (electromagnetic rotary devices) के उनके आविष्कारों ने इलेक्ट्रिक मोटर प्रौद्योगिकी (electric motor technology) की नींव रखी, और यह काफी हद तक उनके प्रयासों के कारण बिजली प्रौद्योगिकी में उपयोग के लिए व्यावहारिक बन पाई |

    एक रसायनज्ञ (Chemist) के रूप में, फैराडे ने बेंजीन (benzene) की खोज की, क्लोरीन (chlorine) के क्लैथ्रेट हाइड्रेट (clathrate hydrate) की जांच की, बन्सन बर्नर (Bunsen burner) के प्रारंभिक रूप और ऑक्सीकरण (oxidation) संख्याओं की प्रणाली का आविष्कार किया, और “एनोड (anode)”, “कैथोड (cathode)”, “इलेक्ट्रोड (electrode)” और “आयन (ion)” जैसी शब्दावली को लोकप्रिय बनाया। . फैराडे अंततः रॉयल इंस्टीट्यूशन (Royal Institution) में रसायन विज्ञान के पहले और अग्रणी फुलेरियन प्रोफेसर (Fullerian Professor) बन गए, जो एक आजीवन पद था।

    अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने अध्ययन की दीवार पर आर्थर शोपेनहावर (Arthur Schopenhauer) और जेम्स क्लर्क मैक्सवेल (James Clerk Maxwell) की तस्वीरों के साथ फैराडे की एक तस्वीर रखते थे ।

    माइकल फैराडे का प्रारंभिक जीवन – Early Life of Michael Faraday

    माइकल फैराडे का जन्म 22 सितंबर, 1791 को इंग्लैंड के न्युविंगटन बट्स (Newington Butts), सरे (जो अब साउथवार्क के लंदन बरो का हिस्सा है) में हुआ था। उनका परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी | उनके पिता का नाम जेम्स फैराडे (James Faraday) था और माँ का नाम मार्गरेट (Margaret) (नी हेस्टवेल) (Née Hastwell) था | उनके पिता एक गरीब लोहार थे ।

    बचपन में पढ़ाई के साथ-साथ यह अपने पिता के साथ काम भी करते थे। माइकल फैराडे अपने माता पिता के चार बच्चो में तीसरे नंबर पर थे। स्कूल से माइकल फैराडे को सिर्फ बेसिक एजुकेशन ही ले पाए | खुद को शिक्षित करने के लिए फैराडे  रसायन एव विद्युत् भौतिकी पर पुस्तकें पढ़ते रहते थे।

    14 साल की उम्र में वह ब्लैंडफोर्ड स्ट्रीट में एक स्थानीय बुकबाइंडर और बुकसेलर जॉर्ज रीबाऊ के प्रशिक्षु बन गए। अपनी सात साल की प्रशिक्षुता के दौरान फैराडे ने कई किताबें पढ़ीं, जिनमें आइजैक वॉट्स की द इम्प्रूवमेंट ऑफ द माइंड (Isaac Watts’s The Improvement of the Mind) भी शामिल है, और उन्होंने उत्साहपूर्वक उनमें निहित सिद्धांतों और सुझावों को लागू किया ।

    इस अवधि के दौरान, फैराडे ने सिटी फिलॉसॉफिकल सोसाइटी (City Philosophical Society) में अपने साथियों के साथ चर्चा की, जहां उन्होंने विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान में भाग लिया। उन्होंने विज्ञान, विशेषकर बिजली में भी रुचि विकसित की। फैराडे विशेष रूप से जेन मार्सेट की पुस्तक कन्वर्सेशन्स ऑन केमिस्ट्री (Conversations on Chemistry by Jane Marcet) से प्रेरित थे।

    माइकल फैराडे का वैज्ञानिक जीवन (Scientific life of Michael Faraday)

    1812 में, 20 साल की उम्र में और अपनी प्रशिक्षुता (apprenticeship) के अंत में, फैराडे ने रॉयल इंस्टीट्यूशन (Royal Institution) और रॉयल सोसाइटी (Royal Society) के प्रख्यात अंग्रेजी रसायनज्ञ हम्फ्री डेवी (Humphry Davy) और सिटी फिलॉसॉफिकल सोसाइटी (City Philosophical Society) के संस्थापक जॉन टैटम (John Tatum) के व्याख्यान में भाग लिया। इन व्याख्यानों के कई टिकट फैराडे को विलियम डांस(William Dance) द्वारा दिए गए थे, जो रॉयल फिलहारमोनिक सोसाइटी (Royal Philharmonic Society) के संस्थापकों में से एक थे। फैराडे ने बाद में डेवी को इन व्याख्यानों के दौरान लिए गए नोट्स के आधार पर 300 पन्नों की एक किताब भेजी। इसलिए 1813 में, जब नाइट्रोजन ट्राइक्लोराइड के साथ एक दुर्घटना में डेवी की आँखे ख़राब हो गई थी, तो उन्होंने फैराडे को एक सहायक के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया। इस प्रकार उन्होंने 1 मार्च 1813 को फैराडे को रॉयल इंस्टीट्यूशन में रासायनिक सहायक (Chemical Assistant) के रूप में नियुक्त किया।

    1842 में थॉमस फिलिप्स द्वारा फैराडे का चित्रण

    वर्ष 1820 में हैंड्स क्रिस्चियन ओर्स्टेड (Hans Christian Ørsted) ने अपनी खोज में बताया कि विद्युत धारा से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है। उनकी इस खोज से माइकल फैराडे को विचार आया कि यदि विद्युत धारा के प्रवाह से चुम्बकीय प्रभाव पैदा हो सकता है तो चुम्बकीय प्रभाव से विद्युत धारा को भी उत्पन्न कर सकते है।

    इसके लिए इन्होने एक प्रयोग किया जिसमें तार की एक कुंडली बनाकर चुम्बक के पास रखी गई। लेकिन उन्हें कुंडली में कोई बिजली बनती हुई नहीं दिखाई दी। उन्होंने कई बार अपने प्रयोग को दोहराया किन्तु उन्हें हर बार नाकामी हाथ लगी। तंग आकर एक दिन उन्होंने कुंडली को फेंकने के लिए चुंबक के पास से खींचा और उसी समय धारामापी ने विद्युत बनते हुए दिखा दिया। उस समय फैराडे को यह ज्ञात हुआ कि यदि कुंडली तथा चुंबक के बीच में आपेक्षिक गति होती है तभी उससे बिजली पैदा होती है। इसी को चुम्बकीय प्रेरण का सिद्धान्त (Principal of Electromagnetic Induction) कहते हैं। आज पूरे विश्व में इसी तरीके से बिजली का उत्पादन होता है।

    वर्ष 1831 में माइकल फैराडे ने ‘विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत (Principal of Electromagnetic Induction)’ की खोज की थी। चुम्बकीय क्षेत्र में एक चालक को घुमाकर विद्युत-वाहक-बल उत्पन्न किया। इसी सिद्धांत पर आने वाले समय में जनित्र (generator) बना था। फैराडे ने लगन के साथ कार्य किया और निरंतर प्रगति कर सन् 1833 में रॉयल इंस्टिट्यूट (Royal Institution) में रसायन के प्राध्यापक हो गए ।


    प्रेरण को प्रदर्शित करने वाले फैराडे के 1831 प्रयोगों में से एक। तरल बैटरी (दाएं) छोटे कुंडल (ए) के माध्यम से विद्युत प्रवाह भेजती है। जब इसे बड़े कुंडल (बी) के अंदर या बाहर ले जाया जाता है, तो इसका चुंबकीय क्षेत्र कुंडल में एक क्षणिक वोल्टेज उत्पन्न करता है, जिसे गैल्वेनोमीटर द्वारा पता लगाया जाता है

    चुम्बकीय प्रेरण पर कार्य करते हुए फैराडे ने एक और खोज की कि यदि दो कुंडलियों को पास में रखते हुए एक में ए-सी- विद्युत प्रवाहित की जाये तो दूसरे में स्वयं ए.सी. विद्युत बनने लगती है । ट्रांसफार्मर इसी सिद्धान्त पर कार्य करते हैं ।

    रसायन विज्ञान मे फैराडे ने बेन्जिन (Benzene) की खोज की, जिसका आज व्यापक पैमाने मे इस्तेमाल होता हैं। साथ उन्होने आक्सिकरण संख्या (Oxidation Number) का कॉन्सेप्ट दिया जिसका इस्तेमाल रासायनिक समीकारो को बैलेंस करने मे होता हैं ।

    बनसन बर्नर (Bunsen burner) की शुरुआती फॉर्म की खोज के साथ एनोड, कैथोड, इलेक्ट्रोड और आयन जैसी टर्मिनोलॉजी की भी खोज का श्रेय इन्हें जाता है। क्लोरीन गैस का द्रवीकरण करने में भी ये सफल हुए। फैराडे ही ऐसे पहले शख्स थे जिन्होंने गैसों के डिफ्यूजन संबंधी एक्सपेरीमेंट किये। कहा जाता है कि आइंस्टाइन ने अपने अध्ययन कक्ष में माइकल फैराडे की तस्वीर न्यूटन और जेम्स क्लार्क मैक्सवेल के साथ लगा रखी थी।

    फैराडे ने एक प्रकार की कांच की पट्टी पकड़ रखी है जिसका उपयोग उन्होंने 1845 में यह दिखाने के लिए किया था कि चुंबकत्व ढांकता हुआ पदार्थ (dielectric material) में प्रकाश को प्रभावित करता है।

    अपने जीवनकाल में फैराडे ने अनेक खोजें कीं। इन्होंने विद्युद्विश्लेषण (electrolysis) पर महत्वपूर्ण कार्य किए तथा विद्युद्विश्लेषण के नियमों की स्थापना की, जो फैराडे के नियम कहलाते हैं। विद्युद्विश्लेषण में जिन तकनीकी शब्दों का उपयोग किया जाता है, उनका नामकरण भी फैराडे ने ही किया।

    क्लोरीन गैस का द्रवीकरण करने में भी ये सफल हुए। परावैद्युतांक, प्राणिविद्युत्, चुंबकीय क्षेत्र में रेखा ध्रुवित प्रकाश का घुमाव, आदि विषयों में भी फैराडे ने योगदान किया। इन्होने अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें सबसे उपयोगी पुस्तक “विद्युत् में प्रायोगिक गवेषणाएँ” (Experimental Researches in Electricity) है। फैराडे को लेक्चर देना काफ़ी पसंद थे, उन्होने रॉयल इंस्टीटयूट में रसायन और भौतिकी पर लगातार लेक्चर दिया। इसे ‘केमिकल हिस्ट्री ऑफ कैंडल’ नाम दिया गया। उन्होंने 1827 से लेकर 1860 तक रिकार्ड 19 बार लेक्चर दिये।

    1831 में निर्मित, फैराडे डिस्क पहला विद्युत जनरेटर था। घोड़े की नाल के आकार के चुंबक (ए) ने डिस्क (डी) के माध्यम से एक चुंबकीय क्षेत्र बनाया। जब डिस्क को घुमाया गया, तो इससे केंद्र से रिम की ओर रेडियल रूप से एक विद्युत धारा प्रेरित हुई। करंट स्लाइडिंग स्प्रिंग संपर्क एम के माध्यम से, बाहरी सर्किट के माध्यम से, और एक्सल के माध्यम से वापस डिस्क के केंद्र में प्रवाहित हुआ।

    माइकल फैराडे का निजी जीवन (Personal life of Michael Faraday)

    फैराडे ने 12 जून 1821 को सारा बरनार्ड (Sarah Barnard) (1800-1879) से शादी की। वे सैंडेमेनियन चर्च (Sandemanian church) में अपने परिवारों के माध्यम से मिले थे | उनके कोई संतान नहीं थी।

    माइकल फैराडे – पुरस्कार और सम्मान

    जून 1832 में, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने फैराडे को डॉक्टर ऑफ सिविल लॉ की मानद उपाधि प्रदान की। अपने जीवनकाल के दौरान, विज्ञान के प्रति उनकी सेवाओं के सम्मान में उन्हें नाइटहुड की उपाधि की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने धार्मिक आधार पर यह मानते हुए ठुकरा दिया कि धन संचय करना और सांसारिक पुरस्कार प्राप्त करना बाइबल के शब्दों के विरुद्ध है | रॉयल सोसाइटी के फेलो चुने जाने पर, उन्होंने दो बार अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया। वह 1833 में रॉयल इंस्टीट्यूशन में रसायन विज्ञान के पहले फुलेरियन प्रोफेसर बने।

    1832 में, फैराडे को अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज का विदेशी मानद सदस्य चुना गया। उन्हें 1838 में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (American Academy of Arts and Sciences ) का एक विदेशी सदस्य (Foreign Honorary Member) चुना गया था। 1840 में, उन्हें अमेरिकन फिलॉसॉफिकल सोसायटी के लिए चुना गया था। वह 1844 में फ्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज के लिए चुने गए आठ विदेशी सदस्यों में से एक थे। 1849 में उन्हें नीदरलैंड के रॉयल इंस्टीट्यूट के एसोसिएट सदस्य के रूप में चुना गया, जो दो साल बाद रॉयल नीदरलैंड एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज बन गया और बाद में उन्हें Honorary Member बनाया गया।

    माइकल फैराडे की मृत्यु (Death of Michael Faraday)

    1839 में फैराडे को नर्वस ब्रेकडाउन का सामना करना पड़ा लेकिन अंततः वे विद्युत चुंबकत्व की अपनी जांच में लौट आए।[ 1848 में, प्रिंस कंसोर्ट के अभ्यावेदन के परिणामस्वरूप, फैराडे को सभी खर्चों और रखरखाव से मुक्त, मिडलसेक्स के हैम्पटन कोर्ट में एक ग्रेस और फेवर हाउस से सम्मानित किया गया था। यह मास्टर मेसन हाउस था, जिसे बाद में फैराडे हाउस कहा गया, ब्रिटिश सरकार के लिए कई विभिन्न सेवा परियोजनाएं प्रदान करने के बाद, जब सरकार ने उन्हें क्रीमियन युद्ध (1853-1856) में उपयोग के लिए रासायनिक हथियारों के उत्पादन पर सलाह देने के लिए कहा, तो फैराडे ने नैतिक कारणों का हवाला देते हुए भाग लेने से इनकार कर दिया ।

    फैराडे की 75 वर्ष की आयु में 25 अगस्त 1867 को हैम्पटन कोर्ट में उनके घर पर मृत्यु हो गई। अपनी मृत्यु से कुछ वर्ष पहले उन्होंने अपनी मृत्यु पर वेस्टमिंस्टर एब्बे में दफ़नाने के प्रस्ताव को ठुकराने के कारण उन्हें हाईगेट कब्रिस्तान में दफनाया गया था | लेकिन उनके सम्मान में वेस्टमिंस्टर एब्बे में आइजैक न्यूटन की कब्र के पास उनकी एक स्मारक पट्टिका बनाई गई ।

    माइकल फैराडे के सम्मान में दिए जाने वाले प्रमुख पुरस्कार

    फैराडे के वैज्ञानिक योगदान के सम्मान और स्मृति में, कई संस्थानों ने उनके नाम पर पुरस्कार दिए जाते हैं। जिनमे प्रमुख है :

    1. आईईटी फैराडे मेडल (The IET Faraday Medal)

    2. रॉयल सोसाइटी ऑफ़ लंदन माइकल फैराडे पुरस्कार (The Royal Society of London Michael Faraday Prize)

    3. भौतिकी संस्थान माइकल फैराडे पदक और पुरस्कार (The Institute of Physics Michael Faraday Medal and Prize)

    4. रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री फैराडे लेक्चरशिप पुरस्कार (The Royal Society of Chemistry Faraday Lectureship Prize)

  • चार्ल्स डार्विन की जीवनी | Biography of Charles Darwin in Hindi

    चार्ल्स डार्विन की जीवनी | Biography of Charles Darwin in Hindi

    इस आर्टिकल में हम महान जीवविज्ञानी चार्ल्स डार्विन की जीवनी के बारे में बात करेगे | चार्ल्स डार्विन के प्राकृतिक चयन द्वारा विकास के उनके अभूतपूर्व सिद्धांत ने पृथ्वी पर जीवन के बारे में हमारी समझ को आकार दिया है और जैविक अनुसंधान का मार्गदर्शन करना जारी रखा है। चार्ल्स डार्विन की इस जीवनी में उनके बचपन से लेकर उनकी महत्वपूर्ण खोजों और उनकी स्थायी विरासत तक की यात्रा का पता लगाया जाएगा।

    चार्ल्स डार्विन कौन थे – परिचय (Who is Charles Darwin? – Introduction)

    चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन (12 फरवरी 1809 – 19 अप्रैल 1882) एक अंग्रेजी प्रकृतिवादी, भूविज्ञानी और जीवविज्ञानी (English naturalist, geologist, and biologist) थे, जो विकासवादी जीव विज्ञान (Evolutionary biology) में अपने योगदान के लिए जाने जाते है | विकासवादी जीवविज्ञान का उपक्षेत्र है जो विकासवादी प्रक्रियाओं (प्राकृतिक चयन, सामान्य वंश, प्रजाति) का अध्ययन करता है जिसने पृथ्वी पर जीवन की विविधता उत्पन्न की। उनका यह प्रस्ताव कि जीवन की सभी प्रजातियाँ एक ही पूर्वज से उत्पन्न हुई हैं, अब आम तौर पर स्वीकार कर लिया गया है और विज्ञान में एक मौलिक अवधारणा मानी जाती है।

    चार्ल्स डार्विन की तस्वीर; फ़्रांसिस डार्विन किताब द लाइफ़ एंड लेटर्स ऑफ़ चार्ल्स डार्विन The Life and Letters of Charles Darwin (1887) का अग्रभाग

    अल्फ्रेड रसेल वालेस (Alfred Russel Wallace) के साथ एक संयुक्त प्रकाशन में, उन्होंने अपना वैज्ञानिक सिद्धांत पेश किया कि विकास का यह शाखा पैटर्न (branching pattern) एक प्रक्रिया से उत्पन्न हुआ जिसे उन्होंने प्राकृतिक चयन (natural selection) कहा, जिसमें अस्तित्व के लिए संघर्ष (struggle for existence) का चयनात्मक प्रजनन में शामिल कृत्रिम चयन के समान प्रभाव पड़ता है। डार्विन को मानव इतिहास में सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है ।

    चार्ल्स डार्विन क्यों महत्वपूर्ण हैं (why is Charles Darwin Important)?

    चार्ल्स डार्विन का महत्व वैज्ञानिक विचारों पर उनके परिवर्तनकारी प्रभाव में निहित है। प्राकृतिक चयन के माध्यम से विकास के उनके सिद्धांत ने मौजूदा मान्यताओं को चुनौती दी और आधुनिक विकासवादी अध्ययन की नींव रखी। विज्ञान के दायरे से परे भी, डार्विन के सिद्धांतों का दूरगामी प्रभाव था, जिसने राजनीतिक, आर्थिक और साहित्यिक क्षेत्रों को प्रभावित किया। सामाजिक डार्विनवाद (Social Darwinism) और यूजीनिक्स (Eugenics) के प्रचार के लिए उनके कुछ विचारों का दुरुपयोग होने के बावजूद, डार्विन स्वयं एक उन्मूलनवादी (Abolitionist) थे, जो समानता और न्याय की वकालत करते थे ।

    चार्ल्स डार्विन का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Charles Darwin)

    चार्ल्स डार्विन का बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Childhood and Family Background of Charles Darwin)

    चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin) का जन्म इंग्लैंड के श्रुस्बरी (Shrewsbury, England) में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनके पिता, डॉ. आर.डब्ल्यू. डार्विन (Dr. R.W. Darwin), एक मेडिकल डॉक्टर थे, और उनके दादा, डॉ. इरास्मस डार्विन (Dr. R.W. Darwin), एक प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री (botanist) थे। जब वह केवल आठ वर्ष के थे, तब उनकी माँ सुज़ाना (Susanna) की मृत्यु हो गई। छोटी उम्र से ही डार्विन (Darwin) ने प्रकृति में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने पक्षियों के अंडों और समुद्री सीपियों से लेकर भृंगों और सिक्कों तक विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ एकत्र कीं, अक्सर पक्षियों को देखने या भोजन कक्ष की मेज के नीचे पढ़ने में घंटों बिताते थे।

    शिक्षा और प्रभाव (Charles Darwin – Education and Influences)

    डार्विन ने 16 साल की उम्र में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय (University of Edinburgh) में अपनी औपचारिक शिक्षा शुरू की, बाद में कैम्ब्रिज के क्राइस्ट कॉलेज (Christ’s College in Cambridge) में चले गए। हालाँकि उन्हें एक उदासीन छात्र माना जाता था, ये वर्ष उनकी वैज्ञानिक गतिविधियों को आकार देने में महत्वपूर्ण थे। एडिनबर्ग में, उन्हें उस समय के असहमतिपूर्ण विचारों से अवगत कराया गया, जिनमें फ्रांसीसी विकासवादी जीन-बैप्टिस्ट लैमार्क (French evolutionist Jean-Baptiste Lamarck) के पूर्व छात्र रॉबर्ट एडमंड ग्रांट (Robert Edmond Grant) के विचार भी शामिल थे।

    कैम्ब्रिज में उनके गुरुओं ने संभावित डिजाइन के विचार का समर्थन किया, और एक वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर ने उन्हें HMS Beagle (बीगल) पर एक यात्रा में शामिल होने का सुझाव दिया, एक यात्रा जो डार्विन को प्राकृतिक चयन द्वारा विकास के सिद्धांत के लिए उनके अधिकांश साक्ष्य प्रदान करेगी। एचएमएस बीगल रॉयल नेवी का चेरोकी श्रेणी का 10-गन ब्रिग-स्लूप जहाज था, जो इस वर्ग के 100 से अधिक जहाजों में से एक था। 7,803 यूरो की लागत से निर्मित इस जहाज को 11 मई 1820 को टेम्स नदी पर वूलविच डॉकयार्ड से लॉन्च किया गया था।

    46 वर्ष की उम्र में डार्विन (1855)

    चार्ल्स डार्विन का व्यक्तिगत जीवन(Personal Life of Charles Darwin)

    विवाह और परिवार (Marriage and Family)

    डार्विन ने अपनी पहली चचेरी बहन एम्मा वेजवुड (Emma Wedgwood) से शादी की और उनके दस बच्चे हुए, जिनमें से तीन की कम उम्र में ही मृत्यु हो गई। अपनी व्यापक यात्राओं और वैज्ञानिक गतिविधियों के बावजूद, डार्विन एक समर्पित पति और पिता थे, जो अक्सर अपने बच्चों को अपने काम में शामिल करते थे।

    डार्विन ने अपनी चचेरी बहन एम्मा वेजवुड से शादी की

    चार्ल्स डार्विनकी व्यक्तिगत रुचियाँ और शौक (Personal Interests and Hobbies)

    अपने वैज्ञानिक हितों के अलावा, डार्विन को पढ़ने का शौक था और वह विशेष रूप से शेक्सपियर के कार्यों के शौकीन थे। उनके अन्य शौक में बागवानी, घूमना और घुड़सवारी शामिल थे। अपने पूरे जीवन में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित होने के बावजूद, डार्विन ने एक सक्रिय जीवनशैली बनाए रखी और अपना शोध कार्य जारी रखा।

    चार्ल्स डार्विन के आविष्कार और खोजें (Inventions and Discoveries of Charles Darwin)

    प्राकृतिक चयन द्वारा विकास का सिद्धांत (The Theory of Evolution by Natural Selection)

    चार्ल्स डार्विन का विज्ञान में सबसे उल्लेखनीय योगदान प्राकृतिक चयन द्वारा विकास का सिद्धांत है। 1859 में प्रकाशित उनके मौलिक कार्य “ऑन द ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़ (On the Origin of Species)” में उल्लिखित यह सिद्धांत बताता है कि प्रजातियाँ “प्राकृतिक चयन (natural selection)” नामक प्रक्रिया के माध्यम से जीवित रहती हैं, जहाँ जो प्रजातियाँ अपने प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक अनुकूलन हो पाने में सक्षम होती है वही पनपती हैं, प्रजनन करती हैं और विकसित होती है, जबकि जो प्रजातियाँ अपने आपको अपने प्राकृतिक आवास में अनुकूल नही हो पाती है वो विकसित नही हो पाती है । पक्षियों, पौधों और जीवाश्मों के अवलोकन और अध्ययन ने डार्विन को स्थान-विशिष्ट विविधताओं के साथ-साथ दुनिया भर की प्रजातियों के बीच समानताएं देखने के लिए प्रेरित किया, जिससे उन्हें विश्वास हुआ कि जिन प्रजातियों को हम आज जानते हैं वे धीरे-धीरे अपने पूर्वजों से विकसित हुई हैं।

    चार्ल्स डार्विन का जीवविज्ञान के क्षेत्र में योगदान (Contributions of Charles Darwin to the Field of Biology)

    प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के अलावा, डार्विन ने जीव विज्ञान में कई योगदान दिए। एचएमएस बीगल (HMS Beagle) पर उनकी पांच साल की यात्रा ने उन्हें विभिन्न पौधों और जानवरों का अध्ययन करने, उनके अनुकूलन और अस्तित्व के बारे में सिद्धांत तैयार करने का अवसर प्रदान किया।  इन निष्कर्षों को उनके “जर्नल ऑफ रिसर्च (Journal of Researches)” में प्रस्तुत किया गया और बाद में “बीगल की यात्रा के प्राणीशास्त्र (Zoology of the Voyage of the Beagle)” में संपादित किया गया, जिससे जीव विज्ञान के क्षेत्र को काफी समृद्ध किया गया। उनके साहसिक सिद्धांत उस समय के लोकप्रिय विचारों के विपरीत थे, उन्होंने प्रजातियों की निश्चितता पर सवाल उठाया और इसके बजाय विकास के एक जटिल शाखा पैटर्न का सुझाव दिया।

    चार्ल्स डार्विन की मृत्यु और उनकी महान विरासत (Death and Legacy of Charles Darwin)

    डार्विन के बाद के वर्ष (Darwin’s Later Years)

    आलोचना और विवाद का सामना करने के बावजूद, चार्ल्स डार्विन ने अपने अंतिम वर्षों तक अपना शोध जारी रखा। जब उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया, तब भी वे बौद्धिक रूप से जीवंत बने रहे, उन्होंने कई और किताबें प्रकाशित कीं और अपने सिद्धांतों को परिष्कृत किया। 19 अप्रैल, 1882 को एक गहरी वैज्ञानिक विरासत छोड़कर डार्विन का निधन हो गया। मृत्यु के बाद शुरुआत में उन्हें डाउनी के सेंट मैरी चर्चयार्ड में दफनाया जाता लेकिन डार्विन के सहयोगियों के अनुरोध पर, सार्वजनिक और संसदीय याचिका के बाद, विलियम स्पोटिसवूड William Spottiswoode (रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष – President of the Royal Society)) ने डार्विन को वेस्टमिंस्टर एब्बे (Westminster Abbey) के करीब जॉन हर्शेल (John Herschel) और आइजैक न्यूटन (Isaac Newton) के पास दफनाया गया । 26 अप्रैल 1882 को आयोजित अंतिम संस्कार में परिवार, दोस्तों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और गणमान्य व्यक्तियों सहित हजारों लोग शामिल हुए ।

    विज्ञान और समाज पर प्रभाव (Impact on Science and Society)

    डार्विन के सिद्धांतों ने विज्ञान और समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। प्राकृतिक चयन द्वारा विकास का सिद्धांत अब सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत है और आधुनिक जीव विज्ञान का आधार बनता है। इसने आनुवंशिकी (genetics) से लेकर पारिस्थितिकी (ecology), जीवाश्म विज्ञान (paleontology) से लेकर सामाजिक विज्ञान (social sciences) तक, असंख्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है। सामान्य वंशावली (common ancestry), योग्यतम की उत्तरजीविता (survival of the fittest) और प्राकृतिक चयन (natural selection) के बारे में उनके विचार पृथ्वी पर जीवन के बारे में हमारी समझ को आकार देते रहे हैं।

    चार्ल्स डार्विन इतिहास के सबसे प्रसिद्ध जीवविज्ञानी क्यों हैं? (Why Charles Darwin is History’s Most Famous Biologist)

    Charles Darwin’sRevolutionary Ideas (चार्ल्स डार्विन के क्रांतिकारी विचार)

    चार्ल्स डार्विन को उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण अक्सर इतिहास का सबसे प्रसिद्ध जीवविज्ञानी माना जाता है। प्राकृतिक चयन के उनके सिद्धांत ने प्रजातियों के निर्माण और विकास पर पारंपरिक विचारों को उलट दिया, धार्मिक और दार्शनिक विचारों को चुनौती दी। उनका यह दावा कि सभी जीवन रूप एक सामान्य पूर्वज से उत्पन्न हुए और समय के साथ प्रकृति की चयन प्रक्रिया के माध्यम से विकसित हुए, ने जैविक विविधता और जीवन के अंतर्संबंध के बारे में हमारी धारणा को बदल दिया।

    स्थायी प्रभाव

    डार्विन का प्रभाव जीव विज्ञान के क्षेत्र से परे तक फैला हुआ है। उनके विचारों ने सांस्कृतिक, दार्शनिक और सामाजिक विचारों में प्रवेश किया है, मानव स्वभाव, नैतिकता और सामाजिक संरचनाओं पर प्रवचन को आकार दिया है। समय बीतने के बावजूद, डार्विन के सिद्धांत प्रासंगिक बने हुए हैं और वैज्ञानिक जांच को प्रेरित करते रहे हैं, जिससे वह विज्ञान के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक बन गए हैं।

    निष्कर्ष चार्ल्स डार्विन पर अंतिम विचार (Conclusion – Final Thoughts on Charles Darwin)

    चार्ल्स डार्विन का जीवन और कार्य वैज्ञानिक जांच की भावना का प्रतीक है, जो एक अतृप्त जिज्ञासा (insatiable curiosity) और सत्य की निरंतर खोज को प्रदर्शित करता है। शुरुआती प्रतिरोध और विवाद के बावजूद, उनके क्रांतिकारी सिद्धांतों ने मौलिक रूप से वैज्ञानिक सोच को नया आकार दिया और जीवन की जटिलताओं के बारे में हमारी समझ का मार्गदर्शन करना जारी रखा। जैसे-जैसे हम जीवन और ब्रह्मांड के रहस्यों में गहराई से उतरते हैं, डार्विन की विरासत साहसिक विचारों और निरंतर अन्वेषण की परिवर्तनकारी शक्ति की याद दिलाती है। चार्ल्स डार्विन का योगदान सदैव मानवीय जिज्ञासा की शक्ति और वैज्ञानिक खोज की क्षमता के प्रमाण के रूप में खड़ा रहेगा।

  • Thomas Alva Edison Biography in Hindi | थॉमस अल्वा एडिसन का जीवन परिचय

    Thomas Alva Edison Biography in Hindi | थॉमस अल्वा एडिसन का जीवन परिचय

    इस आर्टिकल में हम महान वैज्ञानिक, व्यवसायियों और innovator थॉमस एडिसन की जीवनी (biography of Thomas Edison) के बारे में बात करेगे । एडिसन ने साधारण शुरुआत से प्रमुख प्रौद्योगिकी के आविष्कारक के रूप में काम किया, जिसमें पहला व्यावसायिक रूप से सफल प्रकाश बल्ब का आविष्कार शामिल था। आज उन्हें औद्योगिक क्रांति के दौरान अमेरिका की अर्थव्यवस्था के निर्माण में मदद करने का श्रेय दिया जाता है।

    थॉमस अल्वा एडिसन – परिचय (Thomas Alva Edison – Introduction)

    थॉमस अल्वा एडिसन (11 फरवरी, 1847 – 18 अक्टूबर, 1931) एक महान अमेरिकी आविष्कारक और व्यवसायी थे। उन्होंने विद्युत ऊर्जा उत्पादन (electric power generation), जन संचार (mass communication), ध्वनि रिकॉर्डिंग (sound recording) और मोशन पिक्चर्स (motion pictures) जैसे क्षेत्रों में कई उपकरण विकसित किए।

    इन आविष्कारों, जिनमें फोनोग्राफ (phonograph), मोशन पिक्चर कैमरा (motion picture camera) और इलेक्ट्रिक लाइट बल्ब (electric light bulb) के शुरुआती संस्करण शामिल हैं, जिनका आधुनिक औद्योगिक दुनिया पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। वह कई शोधकर्ताओं और कर्मचारियों के साथ काम करते हुए, आविष्कार की प्रक्रिया में संगठित विज्ञान (organized science) और टीम वर्क के सिद्धांतों को लागू करने वाले पहले आविष्कारकों में से एक थे। उन्होंने विश्व की पहली औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला (industrial research laboratory) की स्थापना की |

    एडिसन का पालन-पोषण अमेरिकी मिडवेस्ट (American Midwest) में हुआ था। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने एक टेलीग्राफ ऑपरेटर के रूप में काम किया, जिससे उनके कुछ शुरुआती आविष्कारों को प्रेरणा मिली। 1876 ​​में, उन्होंने न्यू जर्सी के मेनलो पार्क (Menlo Park, New Jersey)  में अपनी पहली प्रयोगशाला सुविधा स्थापित की, जहाँ उनके कई शुरुआती आविष्कार विकसित किए । बाद में उन्होंने व्यवसायी हेनरी फोर्ड (Henry Ford) और हार्वे एस. फायरस्टोन (Harvey S. Firestone) के सहयोग से फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में एक वनस्पति प्रयोगशाला और वेस्ट ऑरेंज, न्यू जर्सी में एक प्रयोगशाला की स्थापना की, जिसमें दुनिया का पहला फिल्म स्टूडियो, ब्लैक मारिया (the Black Maria) शामिल था। एडिसन को अमेरिकी इतिहास में सबसे productive आविष्कारक माना जाता है। एडिसन ने दो बार शादी की और छह बच्चों के पिता बने। 1931 में मधुमेह की जटिलताओं के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

    एडिसन के नाम 1,093 पेटेंट हैं जो उनकी मेहनत को दर्शाते हैं | आज दुनिया उनके आविष्कार का लोहा मानती है | बिजली के बल्ब की खोज इनकी सबसे बड़ी खोज मानी जाती है | बिजली के बल्ब के आविष्कार करने में उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी | एडिसन बल्ब बनाने में 10 हजार बार से अधिक बार असफल हुए. जिसपर उन्होंने कहा ‘मैं कभी नाकाम नहीं हुआ बल्कि मैंने 10,000 ऐसे रास्ते निकाले लिए जो मेरे काम नहीं आ सके’.

    थॉमस एडिसन का शुरूआती जीवन (Early life of Thomas Edison)

    थॉमस एडिसन का जन्म 1847 में मिलान, ओहियो (Milan, Ohio) में हुआ था, लेकिन 1854 में उनका परिवार पोर्ट ह्यूरन, मिशिगन (Port Huron, Michigan) में चला गया | थॉमस एडिसन के पिता का नाम सैमुअल ओग्डेन एडिसन जूनियर (1804-1896, और माँ का नाम नैन्सी मैथ्यूज इलियट (1810-1871) था और थॉमस एडिसन उनकी सातवीं और आखिरी संतान थे। एडिसन का उपनाम मूल रूप से “एडसन” था।

    एडिसन को पढ़ना, लिखना और गणित उनकी माँ ने सिखाया था, जो एक स्कूल शिक्षिका थीं। वह केवल कुछ ही महीनों के लिए स्कूल गये। एडिसन ज्यादातर चीजें खुद पढ़कर सीखते थे । एक बच्चे के रूप में, वह टेक्नोलॉजी की तरफ आकर्षित हुए और घर पर कई एक्सपेरिमेंट किया करते थे ।

    एडिसन को 12 साल की उम्र में सुनने की समस्याएं हो गई थी | उनके बहरेपन का कारण बचपन के दौरान बुखार और कान के संक्रमण का इलाज नही होना था । चूँकि वह एक कान से पूरी तरह बहरा था और दूसरे से बमुश्किल सुन पाते थे | स्पष्ट सुनाई न देने के कारण उन्हें एक बार में कोई भी पाठ समझ नहीं आ पाता था। साथ ही जिज्ञासु प्रवृत्ति होने के कारण वे शिक्षकों से कई प्रश्न किया करते थे। उनके प्रश्नों से तंग आकर उनके एक शिक्षक ने उन्हें ‘मंदबुद्धि’ करार दे दिया था। जब यह बात एडिसन की माँ तक पहुँची, तो उन्हें इतनी बुरी लगी कि उन्होंने एडिसन को स्कूल से ही निकाल लिया। वे एक शिक्षिका थी, अतः वे उन्हें घर पर ही पढ़ाने लगी।

    एडिसन की स्कूली शिक्षा मात्र 12 सप्ताह चली। एडिसन का मानना ​​था कि उनकी सुनने की क्षमता में कमी ने उन्हें ध्यान भटकने से बचने और अपने काम पर अधिक आसानी से ध्यान केंद्रित करने की अनुमति दी।

    थॉमस एडिसन का शुरूआती पेशा और वैज्ञानिक प्रयोग (Early career and scientific experiment of Thomas Edison)

    थॉमस एडिसन ने अपने करियर की शुरुआत एक समाचार विक्रेता के रूप में की, जो पोर्ट ह्यूरन से डेट्रॉइट तक चलने वाली ट्रेनों में समाचार पत्र, कैंडी और सब्जियां बेचते थे। 13 साल की उम्र तक उन्होंने प्रति सप्ताह 50 डॉलर का मुनाफ़ा कमाया, जिसका अधिकांश हिस्सा विद्युत और रासायनिक प्रयोगों के लिए उपकरण खरीदने में चला जाता था । 15 साल की उम्र में, 1862 में, उन्होंने 3 वर्षीय जिम्मी मैकेंज़ी को एक भागती हुई ट्रेन से टकराने से बचाया। जिम्मी के पिता जे.यू. मैकेंजी, माउंट क्लेमेंस, मिशिगन के स्टेशन एजेंट थे वो इस घटना से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने एडिसन को टेलीग्राफ ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया।

    1861 में एडिसन

    एडिसन को सड़क पर समाचार पत्र बेचने का विशेष अधिकार (exclusive right) प्राप्त हुआ, और, चार सहायकों की सहायता से, उन्होंने ग्रैंड ट्रंक हेराल्ड (Grand Trunk Herald) को टाइप किया और मुद्रित किया, जिसे उन्होंने अपने अन्य पत्रों के साथ बेचा। इससे एडिसन की उद्यमशीलता (entrepreneurial) की लंबी श्रृंखला शुरू हुई, क्योंकि उन्हें एक व्यवसायी के रूप में अपनी प्रतिभा का पता चला। अंततः, उनकी इसी उद्यमिता के चलते उन्होंने जनरल इलेक्ट्रिक सहित लगभग 14 कंपनियों को स्थापित किया जो की दुनिया में सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक थी।

    थॉमस एडिसन का व्यक्तिगत जीवन (Personal Life of Thomas Alva Edison)

    1871 में क्रिसमस के मौके पर 24 साल के एडिसन ने 16 वर्षीय मैरी स्टिलवेल से शादी कर ली। मैरी से मुलाकात के सिर्फ दो महीने के अंदर ही एडिसन ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था। मैरी से उन्हें तीन बच्चे हुए। 1884 में लंबी बीमारी के बाद एडिसन की पत्नि मेरी की मृत्यु हो गई। अपनी पत्नि की मृत्यु उपरांत एडिसन ने मेलेनो पार्क छोड़ दिया और 1886 में मीना मिलर से दूसरा विवाह कर वेस्ट ऑरेंज के लेवेलिन पार्क स्थित घर में निवास करने लगे।

    मीना मिलर एडिसन (1906)

    थॉमस एडिसन के आविष्कार (Inventions of Thomas Alva Edison)

    1866 में, 19 साल की उम्र में, एडिसन लुइसविले, केंटुकी चले गए, जहां, वेस्टर्न यूनियन के एक कर्मचारी के रूप में, उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस ब्यूरो न्यूज़ वायर में काम किया। अपनी रात की ड्यूटी के दौरान एडिसन पढने के साथ साथ कई एक्सपेरिमेंट किया करते थे । 1867 में उन्हें नौकरी निकाल दिया गया। उनका पहला पेटेंट इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर, यू.एस. पेटेंट 90,646 के लिए था, जो 1 जून 1869 को प्रदान किया गया था।

    मशीन की कम मांग को देखते हुए, एडिसन इसके तुरंत बाद न्यूयॉर्क शहर चले गए। उन प्रारंभिक वर्षों के दौरान उनको गाइड करने के लिय फ्रैंकलिन लियोनार्ड पोप (Franklin Leonard Pope) नामक एक साथी टेलीग्राफर और आविष्कारक थे, जिन्होंने वहा काम करने वाले गरीब युवाओं को अपने एलिजाबेथ, न्यू जर्सी, घर के तहखाने में रहने और काम करने की अनुमति दी थी । पोप और एडिसन ने अक्टूबर 1869 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और आविष्कारक के रूप में काम करते हुए अपनी खुद की कंपनी की स्थापना की।

    एडिसन ने 1874 में एक मल्टीप्लेक्स टेलीग्राफिक सिस्टम (multiplex telegraphic system) विकसित करना शुरू किया, जो एक साथ एक तार पर दो संदेश प्रसारित करने में दो संदेश भेज सकता था | साथ ही एडिसन ने  एक प्रिंटर को इन्वेंट किया, जो विद्युत संकेतों को अक्षरों में परिवर्तित करता था |

    मेनलो पार्क प्रयोगशाला Menlo Park laboratory (1876-1886)

    एडिसन का प्रमुख इनोवेशन 1876 में उनके द्वारा स्थापित औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला (industrial research lab) थी। इसका निर्माण मेनलो पार्क, रारिटन ​​​​टाउनशिप (अब उनके सम्मान में एडिसन टाउनशिप के नाम से जाना जाता है) में किया था । एडिसन ने बोली लगवाकर उनके द्वारा बनाया quadruplex telegraph वेस्टर्न यूनियन को $10,000 (2022 में $258,647) में बेच दिया । क्वाड्रुप्लेक्स टेलीग्राफ एडिसन की पहली बड़ी वित्तीय सफलता थी, और मेनलो पार्क प्रयोगशाला लगातार नए आविष्कारों और नई तकनीको को विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हुआ ।

    एडिसन की मेनलो पार्क लैब, 1880

    वहां उत्पादित अधिकांश आविष्कारों का श्रेय कानूनी तौर पर एडिसन को दिया गया, हालांकि कई कर्मचारियों ने उनके निर्देशन में अनुसंधान और विकास किया। उनके कर्मचारियों को आम तौर पर अनुसंधान करने में उनके निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाता था, और उन्होंने परिणाम देने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत की ।

    Phonograph

    दिसंबर 1877 में, एडिसन ने ध्वनि रिकॉर्ड (recording sound) करने के लिए एक विधि विकसित की जिसे फोनोग्राफ का नाम दिया । फ़ोनोग्राफ़ पर एडिसन ने सबसे पहले जो शब्द बोले थे वो थे ‘Mary had a little lamb” | हालांकि अगले एक दशक तक व्यावसायिक रूप से इतना अच्छा नही होने के बावजूद, फोनोग्राफ ने उन्हें दुनिया भर में प्रसिद्धि दिलाई, खासकर जब प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा विदेशों में सैनिकों तक संगीत पहुंचाने के लिए इस उपकरण का उपयोग किया गया था।

    अप्रैल 1878 में मैथ्यू ब्रैडी के वाशिंगटन, डी.सी. स्टूडियो में एडिसन की अपने फोनोग्राफ (दूसरा मॉडल) के साथ ली गई तस्वीर

    Light Bulb (प्रकाश बल्ब) (invented the lightbulb by Thomas Edison)

    जबकि एडिसन पहले बल्ब के आविष्कारक नहीं थे, लेकिन इस तकनीक को उन्होंने घर घर पहुंचाने में मदद की । 1800 के दशक की शुरुआत में अंग्रेजी आविष्कारक हम्फ्री डेवी (Humphry Davy) के पहले प्रारंभिक इलेक्ट्रिक आर्क लैंप (electric arc lamp) के आविष्कार के बाद एडिसन को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक, कुशल तापदीप्त प्रकाश बल्ब (efficient incandescent light bulb) को सही करने के लिए प्रेरित किया गया था।

    थॉमस एडिसन का प्रकाश बल्ब का पहला सफल मॉडल, दिसंबर 1879 में मेनलो पार्क में सार्वजनिक प्रदर्शन में इस्तेमाल किया गया

    डेवी के निर्माण के बाद के दशकों में, वॉरेन डे ला रू (Warren de la Rue), जोसेफ विल्सन स्वान (Joseph Wilson Swan), हेनरी वुडवर्ड (Henry Woodward) और मैथ्यू इवांस (Mathew Evans) जैसे वैज्ञानिकों ने वैक्यूम का उपयोग करके विद्युत प्रकाश बल्ब या ट्यूब को सही करने के लिए काम किया था, लेकिन वे असफल रहे । एडिसन ने वुडवर्ड और इवांस के पेटेंट को खरीद कर उसमे सुधार करने के बाद, 1879 में प्रकाश बल्ब का विकसित रुप को पेटेंट कराया । जनवरी 1880 में एडिसन ने इल्यूमिनेटिंग कंपनी की स्थापना की जो एडिसन की स्वामित्व वाली कंपनी थी जो बाद में जनरल इलेक्ट्रिक बन गई ।

    एडिसन के बाद के आविष्कार और व्यवसाय (Edison’s Later Inventions & Business)

    1887 में, एडिसन ने वेस्ट ऑरेंज, न्यू जर्सी में एक औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला का निर्माण किया, जो एडिसन प्रकाश कंपनियों (Edison lighting companies) के लिए प्राथमिक अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में कार्य करती थी। उन्होंने अपना अधिकांश समय प्रकाश प्रौद्योगिकी और बिजली प्रणालियों के विकास की देखरेख में बिताया। उन्होंने फोनोग्राफ में भी सुधार किया, और मोशन पिक्चर कैमरा (motion picture camera) और क्षारीय भंडारण बैटरी (alkaline storage battery) विकसित की।

    अगले कुछ दशकों में, एडिसन आविष्कारक के साथ साथ एक उद्योगपति और व्यवसाय प्रबंधक (business manager) के रूप में जाने लगे | 1890 के दशक के दौरान, एडिसन ने उत्तरी न्यू जर्सी में एक चुंबकीय लौह-अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र (magnetic iron-ore processing plant) बनाया जो व्यावसायिक रूप से विफल साबित हुआ। बाद में, वह इस प्रक्रिया को सीमेंट उत्पादन की एक बेहतर विधि में बदलने में सफल रहे।

    23 अप्रैल, 1896 को, एडिसन, मोशन पिक्चर (motion picture) प्रोजेक्ट करने वाले पहले व्यक्ति बने, जिन्होंने न्यूयॉर्क शहर में कोस्टर एंड बायल के म्यूजिक हॉल (Koster & Bial’s Music Hall) में दुनिया की पहली मोशन पिक्चर स्क्रीनिंग (motion picture screening) आयोजित की। मोशन पिक्चर्स में एडिसन की रुचि वर्षों पहले जब शुरू हुई थी, जब उन्होंने और डब्ल्यू.के.एल. डिक्सन नामक एक सहयोगी ने एक काइनेटोस्कोप(Kinetoscope), एक पीपहोल (peephole) देखने वाला उपकरण विकसित किया। उसके बाद, एडिसन की वेस्ट ऑरेंज प्रयोगशाला एडिसन फिल्म्स का निर्माण कर रही थी। एडिसन फिल्म्स  की पहली फिल्म ‘द ग्रेट ट्रेन रॉबरी’ थी, जो 1903 में रिलीज़ हुई थी।

    प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिकी सरकार ने एडिसन को नौसेना परामर्श बोर्ड का प्रमुख बनने के लिए कहा, जिसने सैन्य उपयोग के लिए प्रस्तुत आविष्कारों की जांच की। एडिसन ने पनडुब्बी डिटेक्टरों और बंदूक-स्थान तकनीकों सहित कई परियोजनाओं पर काम किया।

    1920 के दशक के अंत तक, एडिसन 80 वर्ष के हो चुके थे। उन्होंने और उनकी दूसरी पत्नी मीना ने अपना कुछ समय फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में अपने शीतकालीन निवास में बिताया, जहां ऑटोमोबाइल टाइकून हेनरी फोर्ड के साथ उनकी दोस्ती फली-फूली और उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्रेनों से लेकर घरेलू स्रोत खोजने तक कई परियोजनाओं पर काम करना जारी रखा।

    थॉमस एडिसन के पेटेंट

    अपने जीवनकाल के दौरान, एडिसन ने 1,093 अमेरिकी पेटेंट प्राप्त किए और अतिरिक्त 500 से 600 पेटेंट दायर किए जो असफल रहे या छोड़ दिए गए। उन्होंने 13 अक्टूबर, 1868 को 21 साल की उम्र में अपने इलेक्ट्रोग्राफिक वोट-रिकॉर्डर (Electrographic Vote-Recorder) के लिए अपना पहला पेटेंट निष्पादित किया। उनका अंतिम पेटेंट इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्रक्रिया(electroplating process) के दौरान वस्तुओं को पकड़ने के लिए एक उपकरण के लिए था।

    थॉमस एडिसन और निकोला टेस्ला (Thomas Edison and Nikola Tesla)

    एडिसन अकादमिक प्रशिक्षण के दौरान महान वैज्ञानिक में से एक निकोला टेस्ला से मिले | निकोला टेस्ला कॉन्टिनेंटल एडिसन कंपनी में काम करते थे जिसके फाउंडर एडिसन थे | उस समय अमेरिका में एडीसन की आविष्कृत डीसी विद्युत वितरण व्यवस्था लागू थी। डीसी (DC) यानि डायरेक्ट करेंट (Direct Current) ऐसी विद्युत धारा को कहते हैं जो हमेशा एक ही दिशा में बहती है। जैसे की विद्युत सेल से बनने वाली धारा।

    टेस्ला ने डीसी की कमियों की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया और एसी (AC) विद्युत वितरण व्यवस्था लागू करने की बात कही। इस तरह एडिसन के दिष्ट धारा(DC current) का टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) के बीच विवाद चलता रहा ।  टेस्ला ने चक्रीय चुम्बकीय क्षेत्र के सिद्धान्त की खोज की। उसका एक अन्य महत्वपूर्ण आविष्कार एसी विद्युत मोटर (AC Electric Motor) है जिसने डीसी विद्युत सिस्टम को पूरी तरह हाशिये पर ला दिया।

    1885 में दोनों अलग हो गए और सार्वजनिक रूप से प्रत्यक्ष धारा बिजली के उपयोग को लेकर एक दुसरे से प्रतिस्प्रधा करने लगे | इस तरह विद्युत ऊर्जा पर के उद्योग को लेकर दोनों विवादित रहे ।

    थॉमस एडिसन की मृत्यु (Death of Thomas Edison)

    एडिसन की मृत्यु 18 अक्टूबर, 1931 को न्यू जर्सी के वेस्ट ऑरेंज स्थित उनके घर, ग्लेनमोंट में मधुमेह की जटिलताओं से हो गई। वह 84 वर्ष के थे | दुनिया भर में कई समुदायों और निगमों ने उनके निधन का जश्न मनाने के लिए अपनी रोशनी कम कर दी या कुछ देर के लिए बिजली बंद कर दी।

    एडिसन का करियर एक अत्यंत सफल था जिस वजह से वे अमेरिका में लोक नायक बन गये थे | मृत्यु के समय एडिसन दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित अमेरिकियों में से एक थे। वह अमेरिका की पहली तकनीकी क्रांति में सबसे आगे थे और उन्होंने आधुनिक विद्युत जगत के लिए मंच तैयार किया था ।

    हेनरी फोर्ड, थॉमस एडिसन, और हार्वे एस. फायरस्टोन। फ़्लोरिडा, फ़रवरी 11, 1929

    महत्त्वपूर्ण प्रश्न

    • थॉमस एडिसन का पहला आविष्कार क्या था? what was thomas edison’s first invention
    • थॉमस एडिसन ने क्या किया? what did thomas edison do
    • थॉमस एडिसन कहाँ रहते थे ? where did thomas edison live
    • थॉमस एडिसन का जन्म कब हुआ और मृत्यु कब हुई? when was thomas edison born and died
    • क्या थॉमस एडिसन कॉलेज गए थे? did thomas edison go to college
    • गरमागरम प्रकाश बल्ब फोनोग्राफ incandescent light bulb the phonograph
    • थॉमस एडिसन को श्रेय दिया जाता है thomas edison is credited
    • एडीसन और प्रकाश बल्ब edison and the light bulb
    • लाइटबल्ब का आविष्कार किया? invented the lightbulb
    • थॉमस एडिसन का पेटेंट thomas edisons patent
    • मोशन पिक्चर कैमरा  motion picture camera

    Thomas Alva Edison (Quick Facts) थॉमस एडिसन – महत्वपुर्ण तथ्य

    • नाम: थॉमस अल्वा एडिसन Thomas Alva Edison
    • जन्म वर्ष Birth Year: 1847
    • जन्मतिथि Birth date: 11 फरवरी, 1847 (February 11, 1847)
    • जन्म राज्य Birth State: ओहियो Ohio
    • जन्म शहर Birth City: मिलान Milan
    • जन्म देश Birth Country: संयुक्त राज्य अमेरिका United States
    • श्रेय  Best Known For:: थॉमस एडिसन को पहले व्यावहारिक गरमागरम प्रकाश बल्ब और फोनोग्राफ जैसे आविष्कारों का श्रेय दिया जाता है। उनके पास अपने आविष्कारों के लिए 1,000 से अधिक पेटेंट थे। (Thomas Edison is credited with inventions such as the first practical incandescent light bulb and the phonograph. He held over 1,000 patents for his inventions)
    • इंडस्ट्रीज Industries : प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग (Technology and Engineering)
    • School: कूपर यूनियन (The Cooper Union)
    • रोचक तथ्य
    • थॉमस एडिसन को बचपन में बहुत कठिन माना जाता था इसलिए उनकी माँ ने उन्हें घर पर ही पढ़ाया।
    • एडिसन 1896 में न्यूयॉर्क शहर के कोस्टर एंड बायल के म्यूजिक हॉल में मोशन पिक्चर प्रोजेक्ट करने वाले पहले व्यक्ति बने।
    • एडिसन की निकोला टेस्ला से कटु प्रतिद्वंद्विता थी।
    • अपने जीवनकाल के दौरान, एडिसन को 1,093 अमेरिकी पेटेंट प्राप्त हुए।
    • मृत्यु वर्ष Death Year: 1931
    • मृत्यु तिथि Death date: 18 अक्टूबर, 1931
    • थॉमस एडिसन की मृत्यु कहा हुई : न्यू जर्सी, वेस्ट ऑरेंज, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • निकोला टेस्ला की जीवनी | Biography of Nikola Tesla in Hindi

    निकोला टेस्ला की जीवनी | Biography of Nikola Tesla in Hindi

    इस आर्टिकल में हम सर्बियाई अमेरिकी आविष्कारक, भौतिक विज्ञानी, यांत्रिक अभियन्ता, विद्युत अभियन्ता और भविष्यवादी निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) की जीवनी (Biography of Nikola Tesla), निकोला टेस्ला की प्रमुख खोजे, उनका निजी जीवन, और विज्ञानं के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में बात करेगे |

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla)परिचय

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) (10 जुलाई 1856 – 7 जनवरी 1943) एक सर्बियाई अमेरिकी आविष्कारक, भौतिक विज्ञानी, यांत्रिक अभियन्ता, विद्युत अभियन्ता और भविष्यवादी थे।

    34 साल की उम्र में निकोला टेस्ला (1856-1943) की एक तस्वीर

    निकोला टेस्ला की प्रसिद्धि उनके आधुनिक प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current AC एसी) विद्युत आपूर्ति प्रणाली के क्षेत्र में दिये गये अभूतपूर्व योगदान के कारण है। टेस्ला के विभिन्न पेटेंट और सैद्धांतिक कार्य, बेतार संचार और रेडियो के विकास का आधार साबित हुये हैं। वैद्युत चुंबकत्व के क्षेत्र में किये गये उनके कई क्रांतिकारी विकास कार्य, माइकल फैराडे के विद्युत प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों पर आधारित थे।

    ऑस्ट्रियाई साम्राज्य (Austrian Empire) (अब Croatia (क्रोएशिया) में जन्मे और पले-बढ़े टेस्ला ने 1870 के दशक में बिना डिग्री प्राप्त किए इंजीनियरिंग और भौतिकी का अध्ययन किया

    टेस्ला ने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल उपकरणों की एक श्रृंखला विकसित करने के लिए न्यूयॉर्क में प्रयोगशालाएं और कंपनियां स्थापित कीं। 1888 में वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक द्वारा लाइसेंस प्राप्त उनके अल्टरनेटिंग करंट (एसी) इंडक्शन मोटर और संबंधित पॉलीफ़ेज़ एसी पेटेंट (polyphase AC patents) ने उन्हें काफी पैसा कमाया और पॉलीफ़ेज़ सिस्टम की आधारशिला बन गए।

    टेस्ला ने मैकेनिकल ऑसिलेटर्स/जनरेटर, इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज ट्यूब और प्रारंभिक एक्स-रे इमेजिंग के साथ कई प्रयोग किए ताकि ऐसे आविष्कारों को वो पेटेंट करा सके और बाजार में ला सके, उन्होंने एक वायरलेस नियंत्रित नाव भी बनाई, जो अब तक प्रदर्शित पहली नावों में से एक थी।


    निकोला टेस्ला के आविष्कार जिन्होंने दुनिया बदल दी (Nikola Tesla inventions that changed the world)

    टेस्ला एक आविष्कारक के रूप में प्रसिद्ध हो गए और उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में मशहूर हस्तियों के सामने अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया। 1890 के दशक के दौरान, टेस्ला ने न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में अपने उच्च-वोल्टेज, उच्च-आवृत्ति बिजली प्रयोगों में वायरलेस प्रकाश व्यवस्था और दुनिया भर में वायरलेस विद्युत वितरण के लिए अपने विचारों को आगे बढ़ाया। 1893 में, उन्होंने अपने उपकरणों के साथ वायरलेस संचार की संभावना पर घोषणा की। टेस्ला ने इन विचारों को अपने अधूरे वार्डेनक्लिफ टॉवर प्रोजेक्ट (Wardenclyffe Tower project), एक अंतरमहाद्वीपीय वायरलेस संचार और पावर ट्रांसमीटर में व्यावहारिक उपयोग में लाने की कोशिश की, लेकिन इसे पूरा करने से पहले ही फंडिंग खत्म हो गई। जनवरी 1943 में न्यूयॉर्क शहर में उनकी मृत्यु हो गई थी |

    टेस्ला के कार्यों को 1960 तक किसी का ध्यान नही गया, उसके बाद General Conference on Weights and Measures के सम्मेलन ने उनके सम्मान में चुंबकीय प्रवाह घनत्व (magnetic flux density) की एसआई इकाई (SI) का नाम टेस्ला रखा। 1990 के दशक के बाद से टेस्ला एक महान वैज्ञानिक के रुप में लोकप्रियता बढ़ी है ।

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) का प्रारम्भिक जीवन और उनका परिवार (Early life of Nikola Tesla and his family)

    निकोला टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को स्किमडज़, क्रोएशिया में हुआ था, जब क्रोएशिया Austrian Empire का हिस्सा था। क्रोएशिया आज दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, लेकिन निकोला टेस्ला के जन्म के समय क्रोएरिया आर्थिक रुप से एक कमजोर देश था | निकोला टेस्ला का जन्म एक रोमन कैथोलिक घर में हुआ था और वो अपने माता-पिता की चौथी संतान थी । उनके एक बड़े भाई, डेन, दो बड़ी बहनों, एंजिनिया और मिल्का और एक छोटी बहन, मारिका थी। उनके पिता मिलुटिन टेस्ला (1819-1879) एक सच्चे रूढ़िवादी चर्च में एक पादरी थे । निकोला टेस्ला की माँ ज़ुका मैंडिक (1822-1892) एक गृहणी थी |

    टेस्ला के पूर्वज मोंटेनेग्रो (Montenegro) के पास पश्चिमी सर्बिया (western Serbia) से थे।  निकोला टेस्ला की माँ, ज़ुका मैंडिक (1822-1892), जिनके पिता भी रूढ़िवादी चर्च के पुजारी थे, को घर में घरेलू शिल्प उपकरण (home crafts tools) और यांत्रिक उपकरण बनाने की प्रतिभा के साथ ही सर्बियाई महाकाव्य कविताओं को याद करने की क्षमता थी। ज़ुका ने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी | टेस्ला ने अपनी अद्भुत स्मृति और रचनात्मक क्षमताओं का श्रेय अपनी मां के आनुवंशिकी और प्रभाव को दिया । निकोला के पिता रूढ़िवादी पादरी और लेखक थे और उनकी इच्छा थी कि निकोला भी बड़ा होकर पादरी बने ।

    जब एक बार निकोला अपने बड़े भाई के साथ झूल रहा था, तो उनके बड़े भाई डैनील अपनी आँखों के सामने झुकते हुए घोड़े से गिर कर मर गये थे। इस घटना ने आठ वर्षीय निकोला को अस्थिर कर दिया, जिसका पूरी जिंदगी उन पर बुरा असर रहा ।

    निकोला टेस्ला की शिक्षा (Education of Nikola Tesla)

    1861 में, टेस्ला ने स्मिलजान के प्राथमिक विद्यालय में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने जर्मन, गणित और धर्म का अध्ययन किया। 1862 में, टेस्ला परिवार पास के दुसरे शहर गोस्पिक (Gospić) में चला गया, जहाँ टेस्ला के पिता पैरिश पुजारी (parish priest) के रूप में काम करते थे। 1870 में, टेस्ला हायर रियल जिम्नेजियम (Higher Real Gymnasium) में हाई स्कूल में भाग लेने के लिए कार्लोवैक (Karlovac) में चले गए, जहां कक्षाएं जर्मन में आयोजित की गईं, जैसा कि ऑस्ट्रो-हंगेरियन मिलिट्री फ्रंटियर (Austro-Hungarian Military Frontier) के स्कूलों में आम तौर पर होता था।

    निकोला टेस्ला उम्र 23, (1879)

    टेस्ला ने बाद में लिखा कि उन्हें अपने भौतिकी प्रोफेसर द्वारा किये गये बिजली के प्रदर्शन में उनकी बहुत रुचि हो गई थी । टेस्ला ने कहा कि इस “रहस्यमय घटना” के इन प्रदर्शनों ने उन्हें “इस अद्भुत शक्ति के बारे में और अधिक जानने” के लिए प्रेरित किया। टेस्ला अपने दिमाग में इंटीग्रल कैलकुलस करने में सक्षम थे, जिससे उनके शिक्षकों को विश्वास हो गया कि वह धोखा दे रहे थे। उन्होंने 1873 में स्नातक की उपाधि प्राप्त करते हुए चार साल की पढाई उन्होंने तीन साल में पूरी की ।

    उन्होंने 1875 में मिलिट्री फ्रंटियर स्कॉलरशिप पर ग्राज़ के इंपीरियल-रॉयल टेक्निकल कॉलेज (Imperial-Royal Technical College in Graz) में दाखिला लिया। अपनी आत्मकथा में टेस्ला ने कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत की और उच्चतम ग्रेड अर्जित किए, नौ परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं और तकनीकी संकाय के डीन ने उनके पिता को निकोला टेस्ला के बारे में प्रशंसा पत्र लिखा जिसमे डीन ने बताया की “आपका बेटा प्रथम श्रेणी का सितारा है।” | लेकिन अपने तीसरे वर्ष तक निकोला टेस्ला स्कूल में असफल रहे और कभी स्नातक नहीं हुए, दिसंबर 1878 में ग्राज़ छोड़ दिया।  17 अप्रैल 1879 को, 60 वर्ष की आयु में टेस्ला के पिता की मृत्यु हो गई। शेष वर्ष के दौरान टेस्ला ने गोस्पिक में अपने पुराने स्कूल में अध्यापक के रूप में कार्य किया |

    टेस्ला ने अनेक पुस्तको का अध्ययन किया था और माना जाता है कि उनमे विलक्षण स्मृति थी। वे आठ भाषाओं के जानकार थे जिसमे सर्बो-क्रोएशीयन, चेक, अंग्रेजी, फ़्रेंच, जर्मन, हंगेरीयन, ईटालीयन और लैटीन का समावेश है। टेस्ला अविवाहित थे और उनका मानना था कि उनका ब्रह्मचर्य उनकी वैज्ञानिक उप्लब्धियों मे सहायक रहा है। उन्होने एक इंटरव्यु मे कहा था कि शादी ना कर के उन्होने विज्ञान के लिये एक कुर्बानी दी है ।

    निकोला टेस्ला की वैज्ञानिक जीवन (Scientific Life of Nikola Tesla)

    बुडापेस्ट टेलीफोन एक्सचेंज में कार्यरत

    टेस्ला 1881 में एक टेलीग्राफ कंपनी, बुडापेस्ट टेलीफोन एक्सचेंज में काम करने के लिए बुडापेस्ट, हंगरी चले गए । यहाँ टेस्ला तिवादर पुस्कस  (Tivadar Puskás), जो हंगरी के प्रसिद्ध आविष्कारक और  टेलीफोन एक्सचेंज के इन्वेन्टर थे के दिशा निर्देश में काम करने वाले थे | वहा पहुचने पर उन्हें पता लगता है की टेलीग्राफ कंपनी कार्यरत नही थी, इसलिए उन्होंने सेंट्रल टेलीग्राफ कार्यालय में ड्राफ्ट्समैन के रूप में काम किया।  कुछ ही महीनों में, बुडापेस्ट टेलीफोन एक्सचेंज चालू हो गया और टेस्ला को मुख्य इलेक्ट्रीशियन का पद आवंटित किया गया। अपने रोजगार के दौरान, टेस्ला ने सेंट्रल स्टेशन उपकरण में कई सुधार किए और एक टेलीफोन रिपीटर या एम्पलीफायर को बेहतर बनाने का दावा किया, जिसका कभी पेटेंट नहीं कराया गया और न ही सार्वजनिक रूप से इसका वर्णन किया गया । (where did nikola tesla work)

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) और थॉमस अल्वा एडीसन

    1882 में, तिवादर पुस्कस  (Tivadar Puskás) ने टेस्ला को पेरिस में कॉन्टिनेंटल एडिसन कंपनी में एक और नौकरी दिलवाई। कॉन्टिनेंटल एडिसन कंपनी की थी | महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडीसन इस कंपनी के फाउंडर थे | टेस्ला ने उस समय इलेक्ट्रिक पॉवर सप्लाई एक बिल्कुल नए उद्योग के रूप में शुरू हुआ था इस उद्योग के तहत बड़े पैमाने पर विद्युत ऊर्जा की सप्लाई के लिए शहर भर में indoor incandescent lighting (इनडोर तापदीप्त प्रकाश व्यवस्था) इनस्टॉल किए गये । टेस्ला ने यहाँ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में काफी व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

    प्रबंधन ने इंजीनियरिंग और भौतिकी में उनके उन्नत ज्ञान पर ध्यान दिया और जल्द ही उन्हें डायनेमो और मोटर बनाने के उन्नत संस्करण डिजाइन करने और बनाने का काम सौंपा। उन्हें फ्रांस और जर्मनी में बनाई जा रही अन्य एडिसन उपयोगिताओं में इंजीनियरिंग समस्याओं का निवारण करने के लिए भी भेजा।

    इसी दौरान उन्हें थॉमस अल्वा एडीसन के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने एडीसन की कंपनी को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया, लेकिन शीघ्र ही बड़े पैमाने पर विद्युत वितरण प्रणाली को लेकर दोनों में विवाद हो गया था ।

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) का अमेरिका में आगमन (Nikola Tesla’s arrival in America)

    जून 1884 मे उनका स्थानांतरण न्युयार्क अमरीका में कर दिया गया। टेस्ला ने एडिसन के सामने उसकी मोटर और जनरेटर को ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रस्ताव रखा था।  30 जुलाई 1891 को, 35 वर्ष की आयु में, टेस्ला संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता ले ली उसी वर्ष, उन्होंने अपने टेस्ला कॉइल (Tesla Coil) का पेटेंट कराया। टेस्ला कॉइल, का उपयोग उच्च-वोल्टेज, लो कर्रेंट, उच्च आवृत्ति वाली प्रत्यावर्ती-धारा बिजली (high frequency alternating-current electricity) का उत्पादन करने में था

    यूएस पेटेंट 381,968 से चित्रण, टेस्ला की प्रत्यावर्ती धारा प्रेरण मोटर के सिद्धांत को दर्शाता है

    उस समय अमेरिका में एडीसन की आविष्कृत डीसी विद्युत वितरण व्यवस्था लागू थी। डीसी (DC) यानि डायरेक्ट करेंट (Direct Current) ऐसी विद्युत धारा को कहते हैं जो हमेशा एक ही दिशा में बहती है। जैसे की विद्युत सेल से बनने वाली धारा। टेस्ला ने डीसी की कमियों की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया और एसी (AC) विद्युत वितरण व्यवस्था लागू करने की बात कही। एसी यानि अलटरनेटिंग करेंट (Alternative Current) लगातार अपनी दिशा बदलती रहती है। इस धारा की यह विशेषता होती है कि इसका वोल्टेज ट्रांसफोर्मर द्वारा बढ़ाकर काफी दूर तक भेजा जा सकता है। जबकि डीसी में ऐसा संभव नहीं। साथ ही एसी चालित मोटर और दूसरे उपकरणों में डीसी की अपेक्षा कम बिजली खर्च होती है।

    वो समय था एडिसन के दिष्ट धारा(DC current) का टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) के बीच विवाद जारी था । एडिसन ने प्रत्यावर्ती धारा का डर पैदा करने के लिये हर संसाधन का इस्तेमाल किया। लेकिन हर घर में बिजली सिर्फ प्रत्यावर्ती धारा से पहुंच सकती थी, और अतंत: टेस्ला की विजय हुयी।

    एडीसन ने टेस्ला को कहा कि यदि वह इस कार्य मे सफल हो गया तो उसे पचास हजार डालर मिलेंगे। टेस्ला ने ऐसा कर दिखाया, लेकिन एडिसन अपने वादे से मुकर गया। एडिसन ने अपने वादे को अमेरिकन हास्य(American Humor) कह कर टेस्ला का मजाक उड़ाया, गुस्से में टेस्ला ने एडिसन का साथ छोड़ दिया। एडीसन की कंपनी छोड़ने के पश्चात टेस्ला ने अपनी स्वयं की कंपनी टेस्ला इलेक्ट्रिक लाईट एन्ड मैनुफैक्चरींग की स्थापना की। इस कंपनी मे उन्होने डायनेमो इलेक्ट्रिक मशीन कम्युटेटर का अभिकल्पन किया। यह उनका सं. रा. अमरिका मे पहला पेटेंट था।

    चूंकि उस समय तक डीसी सिस्टम काफी बड़े पैमाने पर लागू था और एडीसन कंपनी डीसी उपकरणों को ही बना रही थी अत: एडीसन ने इस नये सिस्टम का विरोध किया। नतीजे में टेस्ला ने उसकी कंपनी को अलविदा कह दिया और उद्योगपति जार्ज वेस्टिंग हाउस के साथ मिलकर नई कंपनी की बुनियाद डाली जिसने एसी करेंट की उपयोगिता को दुनिया के सामने रखा।

    टेस्ला ने चक्रीय चुम्बकीय क्षेत्र के सिद्धान्त की खोज की। उसका एक अन्य महत्वपूर्ण आविष्कार एसी विद्युत मोटर (AC Electric Motor) है जिसने डीसी विद्युत सिस्टम को पूरी तरह हाशिये पर ला दिया। उसने नियाग्रा जल प्रपात (Niagara Falls) पर पहला जल विद्युत पावर स्टेशन (First water electric power station) तैयार किया, जिसके बाद न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में एसी विद्युत वितरण सिस्टम को स्वीकार कर लिया गया।

    1888 के अमेरिकी पेटेंट 390,721 में टेस्ला की एसी डायनेमो-इलेक्ट्रिक मशीन (एसी इलेक्ट्रिक जनरेटर)

    1887 मे टेस्ला ने प्रत्यावर्ती धारा (AC Current) से चलने वाली इंड्क्सन मोटर(Induction) बनायी, इस आविष्कार ने टेस्ला के लिये सफलता के रास्ते खोल दिये। इसके पश्चात के वर्षो मे टेस्ला और एडीसन के मध्य प्रसिद्ध दिष्ट धारा(DC current) का टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) से युद्ध चला। अंतत: इसमे टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) की विजय हुयी क्योंकि यह तरीका लंबी दूरी तक विद्युत के संवहण के लिये उपयुक्त था । माना जाता है कि टेस्ला ने 1895-96 मे X किरण की खोज कर ली थी, जो कि रांटजेन के 1996 की खोज से पहले थी, लेकिन उनकी प्रयोगशाला मे लगी आग से सारे उपकरण जल कर राख हो गये थे।

    मारकोनी (Marconi) को रेडियो का आविष्कारक माना जाता है। लेकिन टेस्ला ने यह सिद्धान्त दिया था कि वायुमंडल के बाहरी आयनमंडल से होकर रेडियो तरंगें पूरी दुनिया में भेजी जा सकती है। उसने रेडियो में प्रयुक्त होने वाली टेस्ला रॉड का भी आविष्कार किया और उसका रेडियो के असली आविष्कारक को लेकर मारकोनी के साथ काफी लंबा मुकदमा भी चला। उसने वायरलेस पावर सप्लाई (Wireless power supply) का विचार दिया जो बाद में लेसर किरणों (Laser Rays) का आधार बना।

    अपने एक प्रेजेंटेशन में उसने लाखों वोल्ट की आकाशीय बिजली बनाकर सबको दंग कर दिया था। एक बार उसने अपने उपकरण टेस्लास्कोप (Teslascope) पर कुछ अज्ञात सिग्नल रिकार्ड किये, जो उसके अनुसार किसी अन्य ग्रह से भेजे जा रहे थे। 1899 तथा 1900 के मध्य कोलोरेडो जलप्रपात मे एक प्रयोग के दौरान उन्होने कृत्रिम विद्युत तड़ित का निर्माण कर चकित कर दिया था।

    निकोला टेस्ला की प्रमुख खोजें (Discoveries of Nikola Tesla) in Hindi

    AC बिज़ली – AC से पहले पूरे अमेरिका में DC (Direct Current) की व्यवस्था लागू थी। DC उस बिज़ली की धारा को कहते है जो एक ही दिशा में बहती रहती है। पर टेस्ला ने DC की कई खामियों को उजागर किया और AC व्यवस्था लागू करने की बात कही। AC बिजली का फायदा यह है कि इसमें बिज़ली लगातार अपनी दिशा बदलती रहती है। इस की विशेषता यह है कि इसे DC के मुकाबले काफी दूर तक भेजा जा सकता है और इसमें बिज़ली की खत्म भी बेहद कम होती है।

    बिजली से चलने वाली मोटर – टेस्ला की बनाई बिजली की मोटर से ही आज पूरी दुनिया के पंखे, कूलर और अन्य घूमने वाली बिज़ली की चीज़ें चलती हैं।

    पहला जल विद्युत (बिज़ली) पावर स्टेशन – उन्होंने पहला जल बिज़ली स्टेशन बनाया जो बाद में सभी डैमों से बिज़ली पैदा करने का आइडिया बना।

    रेडियो और टेस्ला रॉड – मारकोनी को रेडियो का आविष्कारक माना जाता है। लेकिन यह भी सच है कि इस आविष्कार में टेस्ला का भी योगदान कम नहीं है। उसी ने यह सिद्धान्त दिया कि वायुमंडल के बाहरी आयनमंडल से होकर रेडियो तरंगें पूरी दुनिया में भेजी जा सकती है। उसने रेडियो में लगाई जाने वाली टेस्ला रॉड का भी आविष्कार किया।

    वायरलेस संचार (Wireless) – सन 1890 से 1906 तक टेस्ला ने वायेरलेस तरीके से बिज़ली को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुँचाने के तरीके पर काम किया, वो इसमें सफल तो नही हो पाए मगर उनका यहीं आइडिया बाद में लेसर किरणों (Laser Rays) का आधार बना। अपने इसी परियोजना में उन्होंने लाखों वोल्ट की आकाशीय बिजली बनाकर सबको दंग कर दिया था।

    चुंबकीय प्रभाव, रिमोट कंट्रोल और राडार की खोज़ भी टेस्ला ने ही की थी। उन्होंने अपने जीवन काल मे 300 पेटेंट प्राप्त किये। इसके अतिरिक्त टेस्ला के द्वारा किये गये ऐसे कई अविष्कार है जिन्हे उन्होने पेटेंट नही करवाया।

    टेस्ला अपनी ईस्ट ह्यूस्टन सेंट प्रयोगशाला में वायरलेस पावर प्रयोगों में उपयोग की जाने वाली spiral coil के सामने बैठे हैं

    निकोला टेस्ला के प्रमुख पेटेंट (Nikola Tesla’s Major Patents)

    इलेक्ट्रोटेक्निक और रेडियोइलेक्ट्रिसिटी के लिए टेस्ला के शोध और खोजों का बहुत महत्व है। कुल मिलाकर, निकोला टेस्ला ने संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 40 पेटेंट और दुनिया भर में 300 से अधिक पेटेंट पंजीकृत किए हैं। उनके आविष्कार बिजली और चुंबकत्व के उपयोग पर केंद्रित थे, जिनमें शामिल हैं: फ्लोरोसेंट लैंप, इंडक्शन मोटर (उद्योगों और विभिन्न घरेलू उपकरणों में प्रयुक्त), रिमोट कंट्रोल, टेस्ला कॉइल (Tesla Coil), रेडियो ट्रांसमिशन, कार स्टार्ट में इस्तेमाल होने वाला इग्निशन सिस्टम , प्रत्यावर्ती धारा आदि।टे

    टेस्ला के कुछ पेटेंटों का हिसाब नहीं दिया गया है, और विभिन्न स्रोतों ने कुछ ऐसे खोजे हैं जो पेटेंट अभिलेखागार (patent archives) में छिपे हुए हैं। टेस्ला को 26 देशों में कम से कम 278 ज्ञात पेटेंट जारी किए गए हैं। टेस्ला के कई पेटेंट संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में थे, लेकिन कई अन्य पेटेंट दुनिया भर के देशों में स्वीकृत किए गए थे। टेस्ला द्वारा विकसित कई आविष्कारों को पेटेंट संरक्षण में नहीं रखा गया था।

    लाखों वोल्ट उत्पन्न करने वाले अपने “magnifying transmitte” के बगल में बैठे टेस्ला की एक मल्टीपल एक्सपोज़र तस्वीर।
    7-मीटर (23 फीट) लंबे आर्क सामान्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन केवल पावर स्विच को तेजी से घुमाकर प्रभाव के लिए तैयार किए गए थे

    निकोला टेस्ला और पुरस्कार

    1894 में निकोला टेस्ला ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से मानद उपाधि प्राप्त की और फ्रैंकलिन संस्थान से इलियट क्रेसन पदक प्राप्त किया। 1912 में, टेस्ला ने एडिसन के साथ भौतिकी में नोबेल पुरस्कार साझा करने से इनकार कर दिया, जो अंततः एक अन्य शोधकर्ता को दिया गया था। 1934 में, फिलाडेल्फिया शहर ने उन्हें उनके पॉलीफ़ेज़ पावर सिस्टम के लिए जॉन स्कॉट मेडल से सम्मानित किया। निकोला नेशनल इलेक्ट्रिक लाइट एसोसिएशन के मानद सदस्य और अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस के सदस्य थे।

    निकोला टेस्ला की मृत्यु (Death of Nikola Tesla)

    7 जनवरी 1943 को दिल का दौरा पड़ने से निकोला टेस्ला का होटल न्यू यॉर्कर के कमरा 3327 में मृत्यु हो गई (। देहांत हो गया। निकोला टेस्ला अपनी मृत्यु के समय 86 वर्ष के थे (how old was nikola tesla when he died) | अपने जीवन के अंतिम दिनों में टेस्ला के कुछ प्रयोग असफल रहे, जिससे वह डिप्रैशन का शिकार हो गए। उन्होंने बाहर के लोगों से मिलना कम कर दिया।

  • मैरी क्यूरी का जीवन परिचय | Marie Curie Biography In Hindi

    मैरी क्यूरी का जीवन परिचय | Marie Curie Biography In Hindi

    इस आर्टिकल में हम महान वैज्ञानिक और प्रथम महिला नोबेल पुरस्कार विजेता मैडम मैरी क्यूरी (Madam Marie Curie) की जीवनी के बारे में बात करेगे |

    मैरी क्यूरी (Marie Curie) – परिचय

    मैरी सलोमिया स्क्लाडोवका क्यूरी (Marie Salomea Skłodowska–Curie) बाद में मैरी क्यूरी (Marie Curie) के नाम से जानी जाने वाली एक पोलिश (Polish) मूल की फ्रांसीसी भौतिक वैज्ञानिक है जो रेडियोधर्मिता (radioactivity) पर कार्य कर दो बार नोबेल पुरस्कार को प्राप्त करने वाली एकमात्र महिला थी |

    मैरी ने अपने पति पियरे क्यूरी (Pierre Curie) के साथ मिलकर विश्व को रेडियोएक्टिव की सौगात भी दी थी । सन् 1903 में मैरी क्यूरी नोबेल पुरस्कार से अलंकृत होने वाली वह पहली महिला वैज्ञानिक ((first woman to win a Nobel Prize)) थीं । दूसरी बार उन्हें यह पुरस्कार सन् 1911 में मिला | वैज्ञानिक क्षेत्र में कई विषयों में पुरस्कार पाने वाली वह प्रथम महिला थीं। 1906 में मैरी क्यूरी (Marie Curie) पेरिस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने वाली पहली महिला थीं |

    मैरी क्यूरी का प्रारंभिक जीवन (Early life of Marie Curie)

    मैरी क्यूरी का जन्म 7 नवंबर 1867 को रूसी साम्राज्य में कांग्रेस पोलैंड में वारसॉ (Warsaw) में हुआ था | ज़ोसिया, जोज़ेफ़, ब्रोन्या और हेला के बाद क्यूरी पाँच बच्चों में सबसे छोटी थी |

    मैरी क्यूरी के माता-पिता दोनों ही शिक्षक थे | मैरी के पिता व्लादिस्लाव (Władysław Skłodowski) गणित एवं भौतिकी के अध्यापक होने के साथ-साथ कुछ समय के लिए वारसा की दो व्यायामशालाओं के निदेशक भी थे। पोलैंड के विद्यालयों में जब प्रयोगशालाएँ बंद कर दी गईं तो व्लादिस्लाव अपने बच्चों को प्रयोग सिखाने हेतु सारे उपकरणों को अपने घर उठा लाए। बाद में रूसी अधिकारियों ने उन्हें पोलैंडवादी रवैए के कारण बर्खास्त कर दिया। इससे परिवार की आय काफी हद तक प्रभावित हुई और वे लगभग कंगाल हो गए।

    मैरी की माँ ब्रोनिस्लावा (Bronisława) भी एक शिक्षिका थीं और वारसा के एक कन्या आवासीय विद्यालय की प्रमुख थीं, परंतु मैरी के जन्म के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी । वे कैथोलिक धर्मावलंबी थीं, जबकि उनके पति नास्तिक थे । मैरी जब 10 वर्ष की थीं, उनकी सबसे बड़ी बहन जोफिया की टाइफस से मात्र 15 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। दो वर्ष बाद टीवी की बीमारी से उनकी माँ भी चल बसीं। दो मौतों के बाद मैरी के मन में धर्म के प्रति अनास्था का भाव जाग्रत् हुआ और उन्होंने कैथोलिकवाद को पूरी तरह त्याग दिया।

    जब वह दस साल की थी मैरी ने जे. सिकोरस्का के बोर्डिंग स्कूल में जाना शुरू किया इसके बाद उन्होंने लड़कियों के लिए एक व्यायामशाला में भाग लिया जहाँ से उन्होंने 12 जून 1883 को स्वर्ण पदक के साथ स्नातक किया |

    व्लाडिसलाव स्कोलोडोव्स्की और बेटियाँ (बाएं से) मैरी, ब्रोनिस्लावा और हेलेना, 1890

    अगले दो वर्ष मैरी ने अपने रिश्तेदारों के साथ बिताए और उसके बाद अपने पिता के पास वारसा चली गईं। वे उच्च शिक्षा हेतु आवेदन करने में असमर्थ थीं, क्योंकि उन दिनों लड़कियों को अधिक पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती थी, लेकिन शीघ्र ही उन्हें और उनकी बड़ी बहन ब्रानिस्लावा (Bronisława) को फ्लाइंग यूनिवर्सिटी (Flying University) नामक एक संस्थान मिल गया, जिसमें लड़कियों को प्रवेश दिया जाता था। वह ऐसा संगठन था, जो रूस के विरुद्ध पाठ्यक्रम संचालित करता था ।

    यूनिवर्सिटी में कुछ समय बिताने के बाद मैरी की बड़ी बहन ब्रोनिस्लावा ने मेडिकल शिक्षा हेतु पेरिस जाने का प्रबंध कर लिया। इस बीच मैरी ने अपनी बहन को आर्थिक सहायता देने के इरादे से वारसा में अध्यापिका (गवर्नेस) के रूप में काम करने का निर्णय ले लिया। इसके बाद वे मध्य पोलैंड के पूर्वी भाग में गवर्नेस के रूप में सुजुकी चली गईं। वहाँ अपने पिता के रिश्तेदारों के यहाँ अध्यापिका बन गईं।

    सन् 1890 में मैरी की बहन ब्रोनिस्लावा ने पेरिस के सामाजिक कार्यकर्ता एवं जानेमाने फिजीशियन (चिकित्सक) काजीमिर्ज ड्लुस्की (Kazimierz Dłuski) के साथ विवाह कर लिया। अगला डेढ़ वर्ष मैरी ने स्वाध्याय एवं पुस्तकें पढ़ने में बिताया। वे वापस वारसा चली गईं और एक बार फिर गवर्नेस की नौकरी कर ली और उसके साथ-साथ फ्लाइंग यूनिवर्सिटी में पढ़ाई भी करती रहीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वारसा के उद्योग एवं कृषि संग्रहालय में प्रवेश लेकर एक वर्ष तक उसकी प्रयोगशाला में अपना रसायनशास्त्र का प्रायोगिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी प्राप्त करती रहीं ।

    मैरी और ब्रोनिस्लावा (1886)

    अपने पिता, जो अब अच्छी स्थिति में थे, से आर्थिक सहायता पाकर मैरी सन् 1891 में फ्रांस चली गई। पोलैंड में उनका नाम मारिया था, परंतु पेरिस में उन्हें मैरी कहा जाने लगा। उन्हें सॉरबॉन्न अथवा वर्तमान पेरिस विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल गया। उन्होंने विश्वविद्यालय के समीप किराए के घर में रहकर रसायनशास्त्र, भौतिकी एवं गणित का अध्ययन किया ।

    सन् 1893 में मैरी को फिजिक्स में डिग्री मिल गई, जिसके बाद उन्हें प्रोफेसर गैब्रिएल लिपमैन (Gabriel Lippmann), जिन्हें सन् 1908 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ, की प्रयोगशाला में नौकरी मिल गई। एक फैलोशिप की सहायता से मैरी 1894 में दूसरी डिग्री हासिल करने में भी सफल रही।|

    पेरिस में मैरी की पियरे क्यूरी से मुलाकात हुई जो रेडियोधर्मिता के क्षेत्र में उनके पति और एक वैज्ञानिक के रूप में एक दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित थे |

    मैरी क्यूरी का पारिवारिक जीवन

    पेरिस में मैरी की भेंट पियरे क्यूरी  से हुई थी | दोनों एक साथ काम करने के बाद पियरे एवं मैरी दोनों के मन में एक दूसरे के प्रति भावनाएँ जाग्रत हुईं। पियरे ने जल्द ही मैरी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, परंतु मैरी ने इनकार करते हुए उन्हें बताया कि अपना काम पूरा होने के बाद वे पोलैंड वापस जाना चाहती हैं।

    अपनी योजनानुसार मैरी ने सन् 1894 में वारसा लौटकर क्राकोव विश्वविद्यालय में अपने लिए प्रोफेसर के पद हेतु आवेदन किया, परंतु महिला होने के बहाने जब उन्हें नौकरी देने से इनकार कर दिया गया । उसके बाद पियरे ने मैरी को पत्र के माध्यम से पी-एच.डी. करने की सलाह दी, जिसे मानते हुए वे पेरिस लौट आईं। इस बीच पियरे ने भी चुंबकीयता (मैगनेटिज्म  magnetism) पर अपना शोध-पत्र पूरा कर लिया और उन्हें मार्च, 1895 में डॉक्टरेट मिल गई।

    पियरे और मैरी क्यूरी (1895)

    26 जुलाई, 1895 को मैरी ने पेरिस के एक उपनगर सियाक्स में पियरे क्यूरी से सिविल मैरिज कर ली । मैरी के लिए वह एक नई शुरुआत थी । मैरी को इसका अधिक अंदाजा नहीं था कि जो जीवन वे जीने जा रही हैं, वह उनके भाग्य को पूरी तरह बदलकर रख देगा। उन दोनों की दो बेटियों हुईं — आयरीन (Irène) और ईव (Ève), जिनका जन्म क्रमश: 1897 एवं 1904 में हुआ।

    मैरी क्यूरी का वैज्ञानिक जीवन (Marie Curie Invention and Career)

    मैरी क्यूरी का वास्तविक वैज्ञानिक कॅरियर तब शुरू हुआ, जब उन्हें राष्ट्रीय उद्योग प्रोत्साहन समिति (Society for the Encouragement of National Industry) की ओर से विभिन्न प्रकार के स्टील की चुंबकीय मात्राओं की जाँच का दायित्व उन्हें सौंपा गया, परंतु उसके लिए एक प्रयोगशाला की आवश्यकता थी, जिसे पाना कठिन था। प्रोफेसर जोजफ वीरसुवोस्की (Józef Wierusz-Kowalski) ने मैरी की समस्या के विषय में सुना तो उन्होंने फौरन उनका परिचय पियरे क्यूरी से करा दिया, जो उस समय ई. एस. पी. सी. आई. पेरिस टेक.( The City of Paris Industrial Physics and Chemistry Higher Educational Institution (ESPCI Paris) में अध्यापन कर रहे थे। वहीं पहली बार मैरी की भेंट पियरे क्यूरी से हुई।

    प्रयोगशाला में पियरे और मैरी क्यूरी, सी. 1904

    मैरी की पहली खोज लगभग 1896 में हुई। उससे एक वर्ष पूर्व विल्हेल्म रोएंटिगन (Wilhelm Röntgen) ने अपने प्रयोगों के परिणामस्वरूप एक्स-रे की सफल पहचान की थी । हेनरी बेक्वेरल (Henri Becquerel) ने भी पाया कि यूरेनियम (uranium) साल्ट से निस्सरित तत्त्वों में भी एक्स-रे जैसे तत्त्व होते हैं । इस खोज ने मैरी को यूरेनियम साल्ट पर अपने खुद के शोध करने हेतु प्रेरित किया। इस काम में उसने अपने पति द्वारा कुछ समय पूर्व निर्मित इलेक्ट्रॉमीटर का प्रयोग किया ।
    यह ऐसा यंत्र है, जिसका प्रयोग वैद्युत करंट मापने के लिए किया जाता है ।

    मैरी ने पहले पाया कि यूरेनियम किरणों के आसपास की हवा विद्युत् संचालन करती है और आगे चलकर उसे यह भी ज्ञात हुआ कि यूरेनियम मिश्रणों की क्रिया उसकी आणविक अंतर्क्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि कोई ऐसी चीज थी, जो अणु के भीतर हो रही थी । इसने बाद के वैज्ञानिकों को अणु के भीतर स्थित तत्त्वों की जाँच हेतु प्रेरित किया ।

    19 अप्रैल, 1906 को एक सड़क दुर्घटना में पियरे की मृत्यु हो गई। अचानक मिली इस खबर ने मैरी को हिलाकर रख दिया, लेकिन वह उन्हें जीवन में आगे बढ़ने से नहीं रोक पाई ।

    सन् 1910 में मैरी अंतत: खनिज से रेडियम (Radium) मेटल अलग करने में सफल हो गई। यह उसके जीवन में उसके द्वारा किया गया सबसे कठिन काम था। इस अवधि के दौरान उसने रेडियोसक्रिय उत्सर्जन को मापने के एक अंतरराष्ट्रीय मानक की रूपरेखा भी तैयार की । कालांतर में उसे दंपती के सम्मान में क्यूरी नाम दिया गया।

    सन् 1911 में दि रॉयल एकेडेमी ऑफ साइंसेज ने क्यूरी को रसायनशास्त्र में दूसरा नोबेल पुरस्कार प्रदान किया। प्रशस्ति में कहा गया, रेडियम के पृथक्करण द्वारा रेडियम एवं पोलोनियम की खोज एवं इस महत्त्वपूर्ण तत्त्व के मिश्रणों तथा प्रकृति के अध्ययन के माध्यम से रसायनशास्त्र की प्रगति के लिए उनकी उल्लेखनीय सेवाओं हेतु मैरी क्यूरी को यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। दो नोबेल पुरस्कारों से अलंकृत होनेवाली वे प्रथम महिला बन गईं।

    पेरिस में रेडियम इंस्टीट्यूट अगस्त, 1914 में बनकर तैयार हो गया, परंतु प्रथम विश्वयुद्ध के सन् 1919 से पूर्व समुचित रूप से कार्य करना प्रारंभ नहीं किया। युद्ध के दौरान उन्होंने शल्य चिकित्सकों की सहायता हेतु युद्धक्षेत्र में मोबाइल रेडियोलॉजिकल केंद्र बनाने का सुझाव दिया | मैरी ने ‘रेडियोलॉजी इन वार (Radiology in War)’ नामक पुस्तक भी लिखी, जो सन् 1919 में प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में विश्वयुद्ध के दौरान उनके समस्त अनुभवों को संकलित किया गया है।

    मैरी क्यूरी और रेडियोधर्मिता, पोलोनियम और रेडियम

    क्यूरी ने यूरेनियम किरणों पर स्वयं के बनाए गए प्रयोगों को किया और शोध में पाया कि, यूरेनियम की स्थिति या रूप से कोई फर्क नहीं पड़ता | उन्होंने सिद्धांत दिया कि किरणें तत्व की परमाणु संरचना से आती हैं. इस क्रांतिकारी विचार ने परमाणु भौतिकी के क्षेत्र का निर्माण किया | क्यूरी ने स्वयं घटना का वर्णन करने के लिए “रेडियोधर्मिता” शब्द गढ़ा |

    क्यूरी अपने पति पियरे के साथ रेडियोधर्मिता की खोज के बाद रेडियोसक्रिय तत्त्वों के साथ काम कर रहे थे और उन्हें रेडियोधर्मिता (रेडिएशन) के हानिकारक प्रभावों का ज्ञान नहीं था, अतः वे बिना कोई सावधानी बरते काम करती रहीं, जिसकी कीमत मैरी को बाद में चुकानी पड़ी ।

    मैरी और पियरे पिचब्लेंडी (pitchblende) एवं टार्बरनाइट (torbernite) नामक दो खनिजों पर काम कर रहे थे । इन खनिजों को संभवत: यूरेनियम (Uranium) तत्त्व युक्त माना गया, परंतु कुछ अधिक प्रयोगों के बाद मैरी ने पाया कि यह संभव है कि खनिजों के अंदर कुछ अधिक तत्त्व मौजूद हों । सन् 1898 में मैरी ने पता लगाया कि थोरियम भी एक रेडियोधर्मी तत्त्व है, परंतु मैरी के शोध प्रबंध की प्रस्तुति के शीघ्र बाद उसे बताया गया कि उससे दो महीने पहले ही गर्हर्ड कार्ल स्मिट ने थोरियम पर अपना शोध प्रकाशित कर दिया था ।

    जुलाई, 1898 में उन्होंने पोलैंड के नाम पर पोलोनियम (polonium) नामक तत्त्व की खोज की घोषणा की  कुछ महीनों बाद खनिज पिचब्लेंड के साथ काम करते हुए इन्होंने 26 दिसंबर, 1898  में एक नए रेडियोधर्मी तत्व रेडियम की खोज की

    पिचब्लेंडी से पोलोनियम एवं रेडियम तत्त्वों को अलग करना अत्यंत कठिन था और इसके लिए मैरी को सालोसाल कड़ी मेहनत करनी पड़ी, तब जाकर कहीं डिफरेंशियल क्रिस्टलाइजेशन (differential crystallization) पद्धति से थोड़ा सा यूरेनियम साल्ट निकल पाया। लगभग 1902 के आसपास वे रेडियमक्लोराइड निकालने में सफल हुईं, परंतु सन् 1910 में पिचब्लेंडी से शुद्ध रेडियम अलग किया, परंतु वे पोलोनियम का पृथक्करण कभी पूर्ण नहीं कर सकी। सन् 1903 में मैरी क्यूरी को भौतिकी के क्षेत्र में उनका पहला नोबेल पुरस्कार उनके पति पियरे क्यूरी एवं वैज्ञानिक हेनरी बेक्वेरल के साथ संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ । इस प्रकार वह नोबेल पुरस्कार पानेवाली पहली महिला बनीं ।

    एक्स-रे (X-Ray) का विकास

    1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध छिड़ गया तो क्यूरी ने अपना समय और संसाधन इस कारण की मदद के लिए समर्पित किया | उन्होंने क्षेत्र में वहनीय एक्स-रे मशीनों के उपयोग की हिमायत की और इन चिकित्सा वाहनों ने “लिटिल क्यूरीज़” उपनाम अर्जित किया |

    युद्ध के बाद, क्यूरी ने अपने शोध को आगे बढ़ाने के लिए अपनी हस्ती का उपयोग किया | रेडियम खरीदने के लिए धन जुटाने और वारसॉ में एक रेडियम अनुसंधान संस्थान स्थापित करने के लिए क्यूरी ने दो बार  (1921 में और 1929) में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा की |

    मैरी क्यूरी को प्राप्त सम्मान और उपलब्धियां | Awards And Achievements received by Marie Curie

    क्यूरी ने अपने जीवन काल में कई सफलताएँ हासिल कीं | विज्ञान में एक अग्रणी व्यक्ति और महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में याद की जाने वाली उन्हें कई मरणोपरांत सम्मान मिले हैं |

    क्यूरी ने 1903 में भौतिकी के लिए और 1911 में रसायन विज्ञान के लिए दो नोबेल पुरस्कार जीते | वह नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला होने के साथ-साथ दो बार प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला थीं | वह दो अलग-अलग विज्ञान के क्षेत्र में खोज के लिय सम्मानित होने वाली एकमात्र व्यक्ति हैं |

    फिर उन्हें 1903 में अपने पति और हेनरी बेकरेल के साथ रेडियोधर्मिता पर उनके काम के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला |

    1911 में क्यूरी ने रेडियम और पोलोनियम की खोज के लिए इस बार रसायन विज्ञान में अपना दूसरा नोबेल पुरस्कार जीता | जबकि उन्हें यह पुरस्कार अकेले मिला उन्होंने अपने स्वीकृति व्याख्यान में अपने दिवंगत पति के साथ संयुक्त रूप से सम्मान साझा किया |

    मैरी क्यूरी को मिलने वाले प्रमुख पुरस्कार की सूची

    भौतिकी में नोबेल पुरस्कार – Nobel Prize in Physics (1903)

    डेवी पदक – Davy Medal (1903)

    मैटेटुकी पदक – Matteucci Medal (1904)

    एक्टनियन पुरस्कार – Actonian Prize (1907)

    इलियट क्रेसन पदक – Elliott Cresson Medal (1909)

    अल्बर्ट पदक – Albert Medal (1910)

    रसायन विज्ञान में में नोबेल पुरस्कार – Nobel Prize in Chemistry (1911)

    विल्लार्ड गिब्ब्स पुरस्कार – Willard Gibbs Award (1921)

    कैमरून पुरस्कार एडिनबर्घ यूनिवर्सिटी – Cameron Prize for Therapeutics of the University of Edinburgh (1931)

    अपने दूसरे नोबेल पुरस्कार की शताब्दी पर पोलैंड ने 2011 को मैरी क्यूरी का वर्ष घोषित किया और संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की कि यह रसायन विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष होगा | 7 नवंबर को गूगल एक विशेष गूगलडूडल के साथ उनकी जयंती मनाकर उनके द्वारा किए गए शोध के लिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है |

    मैरी क्यूरी की मृत्यु (Death of Marie Curie)

    अपने जीवन के अंतिम वर्षों में मैरी को अनेक पुरस्कार एवं सम्मान तथा अनेक संस्थानों की ओर से उनकी सदस्यता ग्रहण करने के प्रस्ताव भी प्राप्त हुए। उन्हें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वारेन जी. हार्डिंग द्वारा सन् 1921 में आमंत्रित भी किया गया, जिन्होंने उपहार के रूप में उन्हें अमेरिका में संगृहीत एक ग्राम यूरेनियम प्रदान किया। सन् 1923 में उन्होंने अपने पति की जीवनी पूरी की, जिसे नाम दिया गया ‘पियरे क्यूरी’ | उन्हें वारसा में रेडियम संस्थान की स्थापना का श्रेय भी दिया जाता है, जो सन् 1932 में विधिवत् प्रारंभ हुआ। उनकी अंतिम पुस्तक रेडियोएक्टिविटी (Radioactivity) सन् 1935 में मरणोपरांत प्रकाशित हुई ।

    सन् 1934 के प्रारंभ से ही मैरी का स्वास्थ्य क्षीण होने लगा। 4 जुलाई, 1934 को दक्षिणपूर्वी फ्रांस के छोटे से कस्बे पैस्सी में स्थित सानसेलमोज सैनिटोरियम (Sancellemoz sanatorium) में मैरी की मृत्यु हो गई। वे अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic anemia) से पीड़ित थीं। ऐसा माना जाता है कि यह रोग उन्हें लंबे समय तक रेडियोधर्मिता के संपर्क में रहने के कारण हुआ। मैरी को सियाक्स कब्रिस्तान में उनके पति की कब्र के निकट दफनाया गया। यद्यपि सन् 1995 में सम्मानस्वरूप उनके अवशेषों को पैंथियॉन, पेरिस में स्थानांतरित कर दिया गया।

    मैरी की मृत्यु के कुछ वर्षों बाद उनकी पुत्री ईव क्यूरी ने उनकी जीवनी लिखी, जिसे नाम दिया गया ‘मादाम क्यूरी (Madame Curie)’। इस पुस्तक के कारण कभी-कभी मैरी को ‘मैडम मैरी क्यूरी’ के रूप में भी जाना गया ।

    मैरी क्यूरी के वैज्ञानिक क्षेत्र में उनके योगदान ने बीसवीं और इक्कीसवीं सदी की दुनिया को आकार देने में योगदान दिया | क्यूरी के वैज्ञानिक कार्यों ने भौतिकी और रसायन विज्ञान में स्थापित विचारों को बदलने में मदद की, साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक उपलब्धियों को अपने देश पोलैंड और फ्रांस में प्राप्त कर के, उन बाधाओं को दूर किया जो उस समय के समाज में एक महिला होने के कारण झेलनी पड़ती थी  | अल्बर्ट आइंस्टीन ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि वह संभवतः एकमात्र व्यक्ति थीं जिन्हें प्रसिद्धि से भ्रष्ट नहीं किया जा सकता था ।

  • गैलीलियो गैलिली की जीवनी ( Biography of Galileo Galilei in hindi jivani)

    गैलीलियो गैलिली की जीवनी ( Biography of Galileo Galilei in hindi jivani)

    इस आर्टिकल में हम महान इतालवी दार्शनिक, खगोलशास्त्री और गणितज्ञ गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) की जीवनी के बारे में बात करेगे |

    गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) – परिचय

    गैलीलियो गैलिली एक इतालवी खगोलशास्त्री, भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ थे। जिन्हें कभी-कभी बहुज्ञ (polymath) के रूप में वर्णित किया जाता है। उन्हें अवलोकन संबंधी खगोल विज्ञान (observational astronomy), आधुनिक युग की सामान्य भौतिकी, वैज्ञानिक पद्धति और आधुनिक विज्ञान का जनक (Father) या आधुनिक भौतिकी का पिता कहा जाता है।

    गैलीलियो गैलिली का पोर्ट्रेट, 1636 (जस्टस सस्टरमैन्स द्वारा)

    गैलिलियो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने खगोलीय प्रेक्षण, चंद्रमा पर क्रेटरों व पहाड़ों की खोज और बृहस्पति के चार उपग्रहों, प्रायः गैलीली उपग्रहों के रूप में जाना जाता है, के लिए दूरबीन (telescope) का प्रयोग किया था। उन्होंने शुक्र के कलाओं का अवलोकन किया और सौर धब्बों के अध्ययन से सूर्य की घूर्णन गति का पता लगाया।

    गैलिलियो ने निष्कर्ष निकाला कि अरस्तु का वैश्विक मानचित्र, जो अपने समय में अभी भी व्यापक रूप से विश्वसनीय था, गलत था। इसके बजाय उन्होंने कॉपरनिकस के ‘सूर्य केंद्रीय सिद्धांत’ का समर्थन किया। दूरबीन के साथ उनकी खोजों ने खगोल विज्ञान में क्रांति ला दी और कोपर्निकन हेलियोसेंट्रिक प्रणाली (Copernican heliocentric system) की स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त किया  लेकिन उस प्रणाली की उनकी वकालत के परिणामस्वरूप अंततः उनके खिलाफ एक न्यायिक जांच प्रक्रिया शुरू हो गई।  उन पर मुकदमा चलाया गया और अपने जीवन के अंतिम आठ साल के लिए उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया ।

    गैलीलियो गैलिली का प्रारंभिक जीवन (Early life of Galileo Galilei)

    गैलीलियो गैलिली का जन्म आधुनिक इटली के पीसा नामक शहर मे 15 फ़रवरी 1564 को एक संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। इनके पिता विन्सौन्जो गैलिली उस समय के जाने माने संगीत विशेषज्ञ थे। वे ‘ ल्यूट ’ नामक वाद्य यंत्र बजाते थे, यही ल्यूट नामक यंत्र बाद में गिटार और बैन्जो के रूप में विकसित हुआ। अपनी संगीत रचना के दौरान विन्सौन्जो गैलिली ने तनी हुयी डोरी या तार के तनाव और उससे निकलने वाले स्वरों का गहनता से अध्ययन किया तथा यह पाया कि डोरी या तार के तनाव और उससे निकलने वाली आवाज में संबंध है।

    पिता के द्वारा संगीत के लिये तनी हुयी डोरी या तार से निकलने वाली ध्वनियों के अंतरसंबंधों के परिणामों का वैज्ञानिक अध्ययन उनके पुत्र गैलीलियो द्वारा किया गया।

    1570 के दशक की शुरुआत में गैलीलियो का परिवार फ़्लोरेंस चला गया, जहाँ गैलीली परिवार पीढ़ियों से रहता था। अपनी मध्य किशोरावस्था में गैलीलियो ने फ्लोरेंस के पास वलोम्ब्रोसा के  स्कूल में पढ़ाई की, और फिर 1581 में पीसा विश्वविद्यालय में मैट्रिक किया, जहां उन्हें चिकित्सा का अध्ययन करना था। हालाँकि, वह गणित के प्रति उनकी रूचि ज्यादा थी और अपने पिता के विरोध के बावजूद, उन्होंने गणितीय विषयों और दर्शनशास्त्र को अपना पेशा बनाने का फैसला किया।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei का वैज्ञानिक जीवन

    1581 से गैलीलियो ने खुद को अरिस्टोटेलियन दर्शन (Aristotelian philosophy) और गणित पढ़ाना शुरू कर दिया । 1585 में गैलीलियो ने बिना डिग्री प्राप्त किए विश्वविद्यालय छोड़ दिया और कई वर्षों तक उन्होंने फ्लोरेंस और सिएना में गणितीय विषयों की निजी शिक्षा दी।

    1588 मे उन्होने अकेडीमिया डेल्ले आर्टी डेल डिसेग्नो फ्लोरेन्स मे शिक्षक के रूप मे कार्य प्रारंभ किया। 1589 मे वे पिसा मे गणित व्याख्याता के रूप मे कार्य शुरू किया। 1592 से उन्होने पौडा विश्वविद्यालय मे ज्यामिति, यांत्रिकि और खगोलशास्त्र पढाना प्रारंभ किया। इस पद पर वे 1610 तक रहे। इस पद पर रहते हुये उन्होने मूलभूत विज्ञान (गतिविज्ञान, खगोल विज्ञान) तथा प्रायोगिक विज्ञान (पदार्थ की मजबूती, उन्न्त दूरबीन इत्यादि) पर कार्य किया।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei और भौतिक विज्ञान

    गैलीलियो ने भौतिक विज्ञान में गतिकी के समीकरण स्थापित किए। उनका जड़त्व का नियम प्रसिद्ध है। उन्होंने पीसा की मीनार के अपने प्रसिद्ध प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि वस्तुओं के गिरने की गति उनके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने पहली बार सिद्ध किया की निर्वात में प्रक्षेप्य का पथ पर्वलयकार होता है।

    पर वो अपने प्रयोगों के परिणामो को कैसे नकार सकते थे, जो पुरानी मान्यताओ के विरुद्ध जाते थे और वो इनकी पुरी ईमानदारी से व्याख्या करते थे। उनकी चर्च के प्रति निष्ठा के बावजूद उनका ज्ञान और विवेक उन्हें चर्च की किसी भी पुरानी अवधारणा को बिना प्रयोग और गणित के समझने से रोकता था। चर्च ने इसे अपनी अवज्ञा समझा। जिसे हम आपेक्षिकता का सिद्धांत कहते है, उसकी नीव भी गेलिलियो गैलिली ने ही डाली थी।

    उन्होंने कहा था “भौतिकी के नियम वही रहते है, चाहे कोई पिंड स्थिर हो या समान वेग में एक सरल रेखा में गतिमान। कोई भी अवस्था ना परम स्थिर या परम चल अवस्था हो सकती है”। इसी ने बाद में न्यूटन के नियमो को आधारभूत ढांचा दिया था। गैलीलियो की चित्रकला मे भी रूचि थी और उसमे भी उन्होने शिक्षा ग्रहण की।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei का गणितीय ज्ञान

    उनकी अभिरूचियो मे ज्योतिष भी था जो उस समय गणित और खगोल विज्ञान से जुड़ा हुआ था। गैलीलियो को सूक्ष्म गणितीय विश्लेषण करने का कौशल संभवत: अपने पिता विन्सैन्जो गैलिली से विरासत में आनुवांशिक रूप में तथा कुछ उनकी कार्यशैली को करीब से देख कर मिला होगा। विन्सैन्जो एक जाने-माने संगीत विशेषज्ञ थे और ‘ल्यूट’ नामक वाद्य यंत्र बजाते थे जिसने बाद में गिटार और बैन्जो का रूप ले लिया।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei को विज्ञान को लेकर प्रयोग

    उन्होंने भौतिकी में पहली बार ऐसे प्रयोग किए जिनसे ”अरैखिक संबंध(Non-Linear Relation)” का प्रतिपादन हुआ। तब यह ज्ञात था कि किसी वाद्य यंत्र की तनी हुई डोर (या तार) के तनाव और उससे निकलने वाली आवृत्ति में एक संबंध होता है, आवृत्ति तनाव के वर्ग के समानुपाती होती है।

    प्रकाश की गति नापने का सबसे पहले प्रयास गैलीलियो ने ही किया। गैलीलियो व उनका एक सहायक अँधेरी रात में कुछ मील की दूरी पर खड़े अलग-अलग पहाड़ों की चोटी पर कपाट लगी लालटेन लेकर चढ़ गए। उन्होंने अपने सहायक को निर्देश दिया कि जैसे ही उसे गैलीलियो की लालटेन का प्रकाश दिखे उसे अपनी लालटेन का कपाट खोल देना था। गैलीलियो को अपनी लालटेन के कपाट खोलने व सहायक की लालटेन का प्रकाश दिखने के बीच का समय अंतराल मापना था। पहाड़ों के बीच की दूरी उन्हें ज्ञात ही थी। इस तरह उन्होंने प्रकाश की गति ज्ञात की।

    गैलीलियो ने अपने इस प्रायोगिक निष्कर्ष को दुहराने का निश्चय किया। इस बार उन्होंने पहली से कहीं ज्यादा दुरी पर स्थित दो पहाड़ियों का चयन किया। उन्होंने फिर से उसी पुरानी लालटेन की प्रक्रिया को दुहराया और इस बार भी समय अंतराल पहले जितना ही आया। इससे उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि प्रकाश की गति उनके सहायक की प्रतिक्रिया के समय से बहुत कम है और प्रकाश का सही वेग नापना उनकी इस युक्ति से संभव नहीं है।

    गैलीलियो ने पैराबोला का अध्ययन करके यह नतीजा निकाला यदि वातावरण में friction को शुन्य मान लिया जाए और कोई पिंड एक समान त्वरण (uniform acceleration) से फेंका जाए तो वह एक परवलयाकार मार्ग पर चल कर वापस पृथ्वी पर आ गिरेगा। लेकिन वातावरण में मौजूद friction और उस समय तक के कुछ अज्ञात बलों की उपस्थिति के कारण वो अपने इस सिद्धांत की सही गणितीय व्याख्या नहीं कर पा रहे थे और इस बात की जानकारी उन्हें थी इसलिए उन्होंने यह भी कहा कि उनका यह सिद्धांत जरूरी नहीं कि किसी ग्रह जैसे पिंड पर भी लागू हो।

    गैलीलियो गैलिली द्वारा दूरबीन का आविष्कार (Telescope Invention by Galileo Galilei)

    गेलिलियो गैलिली ने आज से बहुत पहले गणित, सैधांतिक भौतिकी और प्रायोगिक भौतिकी में परस्पर संबध को समझ लिया था। परावलय या पैराबोला का अध्ययन करते हुए वो इस निष्कर्ष पर पहुचे थे कि एक समान त्वरण की अवस्था में पृथ्वी पर फेंका कोई पिंड एक परवलयाकार मार्ग में चलकर वापस पृथ्वी पर गिरेगा, बशर्ते हवा में घर्षण का बल अपेक्ष्नीय हो। सन 1608-9 में गेलिलियो गैलिली को दूरबीन के बारे में पता चला जिसका हॉलैंड में अविष्कार हो चुका था।

    केवल उसका विवरण सुनकर उन्होंने उससे भी कही अधिक परिष्कृत और शक्तिशाली दूरबीन स्वयं बना ली। जिसका सार्वजनिक प्रदर्शन उन्होने 25 अगस्त 1609 को किया था। उन्होंने बृहस्पति के उपग्रहों का पता लगाया और सिद्ध किया कि आकाशगंगा बहुत से तारों से मिलकर बनी है।

    गैलीलियो ने लगभग 200 टेलिस्कोप बनाये और उन्हें विभिन्न शिक्षण संस्थाओं को खगोलीय प्रेक्षणों (astronomical observations) के लिए दान कर दिया। उन्होंने इटली की ही भाषा में अपनी किताब लिखी ताकि आम आदमी भी उसे पढ़ सके। गैलीलियो ने चर्च के विचारों का खंडन किया था, इसलिए उन्हें न्यायिक जाँच और कई अन्य यातनाओं का सामना करना पड़ा।  गैलीलियो वैज्ञानिक सोच के एक महान प्रतिपादक थे।

    सही मायनों में गैलीलियो को आधुनिक विज्ञान का पिता कहा जा सकता है। गैलीलियो टेलिस्कोप (telescope) के अपने आविष्कार के कारण दुनिया में प्रसिद्द हुए। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बृहस्पति (Jupiter) ग्रह के 4 चंद्रमाओं का पता लगाया। साथ ही सबसे पहले सूर्य के धब्बों और शुक्र ग्रह की कलाओं (Phases of Venus) को देखा। अपने परीक्षणों के दौराण उन्होंने यह निष्कर्ष निकला की सभी ग्रह, सूर्य की परिक्रमा करते हैं ।

    गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) का पारिवारिक जीवन

    गैलीलियो ने रोमन कैथोलिक होने के बावजूद, मरीना गाम्बा के साथ विवाह के बिना तीन बच्चों को जन्म दिया। उनकी दो बेटियाँ थीं, वर्जीनिया (जन्म 1600) और लिविया (जन्म 1601), और एक बेटा, विन्सेन्ज़ो (जन्म 1606)।

    गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei),कोपर्निकनवाद और चर्च के साथ विवाद

    गैलीलियो का बढ़ता हुआ स्पष्ट कोपर्निकनवाद उसके लिए परेशानी का कारण बनने लगा। 1613 में उन्होंने पीसा में अपने छात्र बेनेडेटो कैस्टेली (1577-1644) को बाइबिल के कुछ अंशों के साथ कोपर्निकन सिद्धांत को बराबर करने की समस्या के बारे में एक पत्र लिखा। इस पत्र की गलत प्रतियां गैलीलियो के दुश्मनों द्वारा रोम में जांच के लिए भेजी गईं, और उन्हें पत्र को पुनः प्राप्त करना पड़ा और एक सटीक प्रति भेजनी पड़ी।

    क्रिस्टियानो बंटी (Cristiano Banti) की 1857 की पेंटिंग जिसमे गैलीलियो रोमन इनक्विजिशन ((Inquisition) का सामना कर रहे है

    गैलीलियो को 1633 में रोम में बुलाया गया था। इनक्विज़िशन के सामने अपनी पहली उपस्थिति के दौरान, उनका सामना 1616 के उस आदेश से हुआ जिसमें लिखा था कि उन्हें कोपर्निकन सिद्धांत पर चर्चा करने से मना किया गया था। अपने बचाव में गैलीलियो ने कार्डिनल बेलार्मिन, जिनकी तब तक मृत्यु हो चुकी थी, का एक पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्हें केवल सिद्धांत को न रखने या उसका बचाव न करने की चेतावनी दी गई थी। यह मामला कुछ हद तक गतिरोध में था, और, जिसे केवल एक दलील कहा जा सकता है,

    गैलीलियो ने कबूल किया कि उसने अपने मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। इस पर उन पर विधर्म का सख्त संदेह  (suspect of heresy) जताया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई | इस बात का कोई सबूत नहीं है कि गैलीलियो कभी भी कालकोठरी में नहीं था या उसे प्रताड़ित नहीं किया गया था; इंक्विज़िशन प्रक्रिया (Inquisition process) के दौरान वह ज्यादातर वेटिकन में टस्कन राजदूत के घर पर रहे और थोड़े समय के लिए इनक्विज़िशन भवन में एक आरामदायक अपार्टमेंट में रहे ।

    अपने त्याग के बावजूद, गैलीलियो ने अपने वैज्ञानिक अनुसंधान पर काम करना जारी रखा। उन्होंने कई महत्वपूर्ण रचनाएँ प्रकाशित कीं, जिनमें डायलॉग कंसर्निंग द टू चीफ वर्ल्ड सिस्टम्स (Dialogue Concerning the Two Chief World Systems) (1632) शामिल है, जिसमें हेलियोसेंट्रिक मॉडल (heliocentric model) के लिए तर्क दिया गया था।

    गैलीलियो की कुछ सबसे प्रसिद्ध खोजें (Some famous discoveries of Galileo Galilei)

    चंद्रमा पर पहाड़ – The mountains on the Moon
    बृहस्पति के चंद्रमा – The moons of Jupiter
    शुक्र के चरण – The phases of Venus
    शनि के छल्ले – The rings of Saturn
    शरीर गिरने का नियम – The law of falling bodies
    जड़ता का सिद्धांत – The principle of inertia
    परवलयिक प्रक्षेपवक्र – The parabolic trajectory

    गैलीलियो गैलिली की मृत्यु ( (Death of Galileo Galilei)

    गैलीलियो 70 वर्ष के थे। फिर भी लगातार काम करते रहे | सिएना में अपना अप्रकाशित अध्ययन लिखा, जो 1609 में दूरबीन में उनकी रुचि के कारण बाधित हो गया था और तब से रुक-रुक कर जारी रहा। यह पुस्तक इटली से प्रेरित होकर लीडेन, नीदरलैंड्स में 1638 में डिस्कोरसी ई डिमोस्ट्राज़ियोनी माटेमेटिके इंटोर्नो ए ड्यू नुओवे साइन्ज़ एटेनेंटी अल्ला मेकेनिका (डायलॉग्स कंसर्निंग टू न्यू साइंसेज) शीर्षक के तहत प्रकाशित हुई थी।

    यहां गैलीलियो ने पहली बार किरणों के झुकने और टूटने का पता लगाया और गति की अपनी गणितीय और प्रयोगात्मक जांच को संक्षेप में प्रस्तुत किया, जिसमें दो गतियों, निरंतर गति और एकसमान त्वरण के मिश्रण के परिणामस्वरूप गिरने वाले पिंडों के नियम और प्रक्षेप्य के परवलयिक पथ शामिल थे।  तब तक गैलीलियो अंधे हो गए थे, और उन्होंने अपना समय एक युवा छात्र विन्सेन्ज़ो विवियानी के साथ काम करने में बिताया |

    गैलीलियो के हस्ताक्षर

    8 जनवरी 1642 को बुखार और दिल की धड़कन बढ़ने के कारण 77 वर्ष की आयु में गैलीलियो की मृत्यु हो गई | टस्कनी के ग्रैंड ड्यूक, फर्डिनेंडो द्वितीय, उन्हें सांता क्रोस के बेसिलिका के मुख्य भाग में, उनके पिता और अन्य पूर्वजों की कब्रों के बगल में दफनाना चाहते थे, और उनके सम्मान में एक संगमरमर का मकबरा बनवाना चाहते थे।

    हालाँकि, पोप अर्बन VIII और उनके भतीजे, कार्डिनल फ्रांसेस्को बारबेरिनी के विरोध के कारण बाद, फर्डिनेंडो द्वितीय के इस निर्णय को रद्द कर दिया गया, क्योंकि गैलीलियो को कैथोलिक चर्च द्वारा “विधर्म के प्रबल संदेह (vehement suspicion of heresy)” के लिए निंदा की गई थी। इस कारण उन्हें बेसिलिका के दक्षिणी ट्रॅनसेप्ट में एक छोटे से कमरे में दफनाया गया था। 1737 में उनके सम्मान में एक स्मारक बनाए जाने के बाद उन्हें बेसिलिका के मुख्य भाग में फिर से दफनाया गया था इस दौरान, उनके अवशेषों से तीन उंगलियां और एक दांत हटा दिया गया था। ये उंगलियां फिलहाल इटली के फ्लोरेंस में म्यूजियो गैलीलियो में प्रदर्शनी में हैं |

    गैलीलियो के दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली

    विज्ञान में गैलीलियो का योगदान बहुत बड़ा था। उन्होंने खगोल विज्ञान में क्रांति लाने में मदद की और भौतिकी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैज्ञानिक पद्धति पर उनके काम ने आधुनिक विज्ञान की नींव रखने में मदद की। गैलीलियो एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक और साहसी विचारक थे और उनका काम आज भी वैज्ञानिकों को प्रेरित करता है।

  • अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय | Albert Einstein Biography in Hindi

    अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय | Albert Einstein Biography in Hindi

    इस आर्टिकल में हम आज हम महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की आत्मकथा अर्थात अल्बर्ट आइंस्टीन की जीवनी (Albert Einstein Biography in Hindi), अल्बर्ट आइंस्टीन की शिक्षा, उनके सिद्धांतों (Inventions of Albert Einstein) और अल्बर्ट आइंस्टीन की प्रमुख खोज के बारे में जानेंगे।

    अल्बर्ट आइंस्टीन ((Albert Einstein) – परिचय

    अल्बर्ट आइंस्टीन जर्मन में जन्मे सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी (Theoretical Physicist) थे जिन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत (theory of relativity) विकसित किया, जो आधुनिक भौतिकी के दो स्तंभों में से एक (क्वांटम यांत्रिकी (quantum mechanics) के साथ) है।

    अल्बर्ट आइंस्टीन को आमतौर पर 20वीं सदी का सबसे प्रभावशाली भौतिक विज्ञानी और 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक माना जाता है। उनका काम विज्ञान के दर्शन पर प्रभाव के लिए भी जाना जाता है। आइंस्टीन ने ब्रह्मांड के बारे में मनुष्य की समझ को विकसित किया और उनके सिद्धान्तों की ने अन्तरिक्ष यात्राओं को लेकर time ट्रेवल जैसे जटिल आविष्कारों के लिय एक द्वार का काम किया ।

    अल्बर्ट आइंस्टीन को बीसवीं सदी का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति माना जाता है।

    अल्बर्ट आइंस्टीन को उनके द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता सूत्र (mass–energy equivalence formula) E = mc2 के लिए जाना जाता है, जिसे “दुनिया का सबसे प्रसिद्ध समीकरण” माना जाता है। उन्हें “सैद्धांतिक भौतिकी में उनकी सेवाओं के लिए, और विशेष रूप से फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव की खोज के लिए उन्हें भौतिकी में 1921 का नोबेल पुरस्कार मिला, जो क्वांटम सिद्धांत के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम था।

    अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय – महत्वपुर्ण बिंदु

    जन्म      – 14 मार्च 1879 (उल्म, वुर्ट्टनबर्ग,जर्मन साम्राज्य में (Ulm, Kingdom of Württemberg, German Empire)

    मृत्यु      – उम्र ( 18 अप्रैल 1955 (प्रिंसटन (Princeton),न्यू जर्सी New Jersey, USA)

    पिता      –  हरमन आइंस्टीन Hermann Einstein

    माता        –  पॉलिन कोच आइंस्टीन Pauline Koch Einstein

    पत्नी        –  मिलेवा मेरिक  Mileva Marić (1903 – 1919),

                    एल्सा लोवेन्थल Elsa Löwenthal (1919 – 1936)

    पुरुस्कार –    भौतिकी में नोबेल प्राइज (1921 में)

    बच्चे     –  हंस अल्बर्ट आइंस्टीन (Hans Albert Einstein), एडवार्ड आइंस्टीन Eduard Einstein और Lieserl Maric

    शिक्षा –     Federal Polytechnic school in Zurich (Federal teaching diploma, 1900)

                   University of Zurich (PhD, 1905)

    अल्बर्ट आइंस्टीन का बचपन और शिक्षा (Albert Einstein’s early life, Childhood and Schooling in Hindi)

    अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के एक यहूदी परिवार में हुआ था। उसके पिता हरमन आइंस्टीन और माता पॉलिन कोच आइंस्टीन थी। हरमन आइंस्टीन एक सेल्समेन और इंजीनियर थे जो बिजली के उपकरण सप्लाई करते थे । सन 1980 में हरमन आइंस्टीन और पॉलिन आइंस्टीन उल्मा से 160 किलोमीटर दूर म्युनिक ( Munich ) में रहने आ गए । यहां आइंस्टीन के पिता और उनके चाचा जैकब ने इलेक्ट्रोटेक्नीस फैब्रिक जे. आइंस्टीन एंड सी नामक कंपनी की स्थापना की, जो प्रत्यक्ष धारा (Direct current)  पर आधारित विद्युत उपकरण बनाती थी।

    1893 में अल्बर्ट आइंस्टीन (आयु 14 वर्ष)

    अल्बर्ट आइंस्टीन बचपन में पढ़ाई में बहुत ही कमजोर थे और उनके कुछ अध्यापकों ने उन्हें मानसिक रूप से विकलांग कहना शुरू कर दिया | 9 साल की उम्र तक वे बोलना नही जानते थे | वे प्रकृति और ब्रहमांड से जुड़े नियमोंसे जुड़े रहस्यों के बारे में सोचा करते  थे | उन्होंने 6 साल की उम्र में सारंगी बजाना शुरू किया और अपनी पूरी जिन्दगी में इसे बजाना जारी रखा | अल्बर्ट जब आठ साल के हुए तो उसका एडमिशन लुइटपोल्ड जिम्नेजियम स्कूल (Luitpold Gymnasium School) में करा दिया गया । वर्तमान में इस स्कूल को अल्बर्ट आइंस्टीन जिम्नेजियम के नाम से जाना जाता है।

    12 साल की उम्र में इन्होंने ज्यामिति की खोज की एवं उसका सजग और कुछ प्रमाण भी निकाला | 16 साल की उम्र में, वे गणित के कठिन से कठिन हल को बड़ी आसानी से कर लेते थे | 1894 में अल्बर्ट के पिता की कंपनी ने म्युनिक में बिजली सप्लाई करने के लिए बोली लगाई लेकिन ये काम उन्हें मिल ना सका उस समय उनके पास इतने पैसे भी नही थे की वे डायरेक्ट कर्रेंट के उपकरणों को अल्टरनेटिव करंट में बदल सकें।

    इसी कारण उनकी कंपनी को बहुत भारी नुकसान झेलना पड़ा ये नौबत आई कि उन्हें ये कंपनी को बंद तक करना पड़ा। अब उनके पास कोई पैसे का स्त्रोत नही था इसीलिए नए व्यापार की तलाश में अल्बर्ट आइंस्टीन के परिवार को म्युनिक छोड़कर इटली के शहर मिलान में शिफ्ट हो गए ।

    आइंस्टीन ने बहुत कम उम्र से ही भौतिकी और गणित में उत्कृष्टता हासिल की और जल्द ही अपने से कई साल बड़े बच्चे की तरह गणितीय विशेषज्ञता हासिल कर ली। जब वह केवल बारह वर्ष के थे, तब उन्होंने खुद को बीजगणित, कैलकुलस और यूक्लिडियन ज्यामिति पढ़ाना शुरू किया; उन्होंने इतनी तेजी से प्रगति की कि उन्होंने अपने तेरहवें जन्मदिन से पहले पाइथागोरस प्रमेय का एक मूल प्रमाण खोज लिया था |

    केवल पंद्रह साल की उम्र में सन 1894 में अल्बर्ट ने अपना पहला रिसर्च पेपर को प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था ऑन द इन्वेस्टिगेशन ऑफ द स्टेट ऑफ़ द ईथर इन द मैग्नेटिक फील्ड ( On the investigation of the state of the Ether in the magnetic field )

    सितम्बर 1896 में अल्बर्ट ने सेकेंडरी स्कूल की पढ़ाई अच्छे अंको के साथ पास की फिर वो वहाँ से जुनिच (Zunich) वापस आ गए और अल्बर्ट ने फिर से फेडरल पॉलीटेक्निक में एंट्रेंस एग्जाम दिया इस बार उनका एडमिशन हो गया। आइंस्टीन की भावी पत्नी, 20 वर्षीय सर्बियाई मिलेवा मैरिक (Mileva Maric)  ने भी उसी वर्ष पॉलिटेक्निक स्कूल में दाखिला लिया। वह शिक्षण डिप्लोमा पाठ्यक्रम के गणित और भौतिकी अनुभाग में छह छात्रों में से एकमात्र महिला थीं। अगले कुछ वर्षों में, आइंस्टीन और मैरिक की दोस्ती प्रेम में बदल गई, और उन्होंने पाठ्येतर भौतिकी पर एक साथ बहस करने और किताबें पढ़ने में अनगिनत घंटे बिताए, जिसमें वे दोनों रुचि रखते थे।

                                            अल्बर्ट आइंस्टीन और मिलेवा मैरिक आइंस्टीन, 1912

    सन 1903 में अल्बर्ट आइंस्टीन और मिलेवा मैरीक ने बर्न, स्विट्जरलैंड में शादी कर ली। सन 1904 में उनका एक बेटा हुआ जिनका नाम हंस अल्बर्ट आइंस्टीन (Hans Albert Einstein) रखा गया । सन 1910 अल्बर्ट के दूसरे बेटे का जन्म हुआ जिनका नाम एडवार्ड आइंस्टीन (Eduard Einstein) रखा गया। हालांकि एडवार्ड की 20 साल की उम्र में ही मृत्यु हो जाती है।

    अल्बर्ट और मिलेवा दोनों 1914 में एक दूसरे से अलग हो गए । मिलेवा मैरिक अपने दोनों बेटों को लेकर अल्बर्ट से अलग हो गई और पाँच साल बाद सन 1919 में दोनों ने तलाक ले लिया । तलाक के बाद अल्बर्ट आइंस्टीन ने एल्सा से शादी कर ली।

    अल्बर्ट आइंस्टीन और एल्सा

    अल्बर्ट आइंस्टीन का शैक्षणिक करियर (Academic Career of Albert Einstein)

    सन 1900 में जब अल्बर्ट आइंस्टीन 21 साल के हुए तब उन्होंने फेडरल पॉलीटेक्निक टीचिंग डिप्लोमा पास किया। इसी साल उनका एक रिसर्च पेपर भी पब्लिश हुआ उसका शीर्षक था कंनक्लूशन ड्रॉन फ्रॉम द फेनोमेना ऑफ कैपिल्लरिटी (Conclusion Drawn from the Phenomena of Capillarity).

    सन 1901 में अल्बर्ट को स्विस (Swiss) की नागरिकता मिल गई और सन 1902 में जब अल्बर्ट 23 वर्ष के थे तब उनको स्विट्जरलैंड में बर्न के फेडरल इंस्टीटूट ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Federal Institute of Intellectual property) में एक असिस्टेंट एग्जामिनर (Assistant Examiner) लेवल 3 की नौकरी मिल गई । इस नौकरी में काम के घंटे कम होने के कारण अल्बर्ट को रिसर्च करने और उन्हें पब्लिश करने के लिए काफी वक्त मिल जाता था ।

    अपने काम करने के साथ – साथ अल्बर्ट पीएचडी भी कर रहे थे, कड़ी मेहनत से उन्होंने 30 अप्रैल 1905 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ जुरिच (University of Zurich) से पीएचडी (PHD) की डिग्री हासिल की।

    अल्बर्ट आइंस्टीन का वैज्ञानिक करियर (Scientist Career of Albert Einstein)

    1905 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने चार अभूतपूर्व रिसर्च पेपर्स को प्रकाशित किए, फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट (Photoelectric effect), बरौनिन मोशन (Brownian Motion), स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी (Special Theory of Relativity), और द एक्विवालेन्स ऑफ मास एंड एनर्जी (The Equivalence of mass and energy) पर । ये ऐसे सिदांत थे जिन्होंने मनुष्य की सोच को एक नया आकार दिया ।

    1908 तक, आइंस्टीन को एक अग्रणी वैज्ञानिक के रूप में पहचाना जाने लगा और उन्हें बर्न विश्वविद्यालय में व्याख्याता नियुक्त किया गया । अगले वर्ष, ज्यूरिख विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रोडायनामिक्स और सापेक्षता सिद्धांत पर व्याख्यान देने के बाद, अल्फ्रेड क्लिनर (Alfred Kleiner) (जो की आइंस्टीन के Doctoral Advisor थे) ने सैद्धांतिक भौतिकी में नव निर्मित प्रोफेसरशिप के लिए संकाय में उनकी सिफारिश की। आइंस्टीन को 1909 में एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया गया था और उसी वर्ष आइंस्टीन में जुरिच, स्विट्जरलैंड चले गए वहाँ पर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ जुरिच में प्रोफेसर की नौकरी की ।

    सन 1911 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक और थ्योरी दी जिसका नाम था द जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी (The general theory of relativity) इसी की मदद से आज हम जानते कि गुरुत्वाकर्षण (Gravity) कैसे काम करती है। उसका समय पर क्या प्रभाव पड़ता है।

    इसी साल अल्बर्ट जुरिच से प्राग (Prague) शिफ्ट हो गए, वहाँ उन्होंने चार्ल्स फर्डीनांड यूनिवर्सिटी (Charles Ferdinand University) में प्रोफेसर की नौकरी की और साथ ही उन्हें ऑस्ट्रियन  नागरिकता (Austrian Citizenship) भी मिली । यहाँ दो साल रहने के बाद वो बर्लिन जर्मनी चले गए ।

    2 अप्रैल 1921 अल्बर्ट ने पहली बार USA के न्यूयॉर्क शहर में कदम रखा वहाँ उंन्हे कोलंबिया और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था।

    1922 में, उन्हें “सैद्धांतिक भौतिकी में उनकी सेवाओं के लिए, और विशेष रूप से फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के कानून की खोज के लिए” भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1921 में कोई भी नामांकन अल्फ्रेड नोबेल द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता था, इसलिए 1921 का पुरस्कार आगे बढ़ाया गया और 1922 में आइंस्टीन को प्रदान किया गया ।

    सन 1930 दिसंबर में दूसरी बार USA में कदम रखा और कुछ समय तक कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (California Institute of Technology) में एक रिसर्च फेलो के रूप किया। फिर वो वापस बर्लिन जर्मनी आ गए।

    लेकिन सन 1933 तक हिटलर जर्मनी में बहुत ताकतवर हो चुका था। उसने यहूदियों को सरकारी नौकरियों से निकलना और उंन्हे मारना शुरू कर दिया। इसी कारण अल्बर्ट आइंस्टीन ने जर्मनी को छोड़ने का निर्णय लिया। अल्बर्ट और एल्सा 1933 में USA आ गए। वहाँ पर प्रोफ़ेसर के रूप में काम किया। फिर सात साल बाद उन्हें USA की नागरिकता मिल गई।

    अल्बर्ट आइंस्टीन – 1947

    अल्बर्ट आइंस्टीन की मृत्यु (17 अप्रैल 1955) (Death of Albert Einstein)

    17 अप्रैल 1955 को, आइंस्टीन की मेडिसिन प्रिंसटन मेडिकल सेंटर में 76 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई | आइंस्टीन ने अपने व्यक्तिगत अभिलेखागार, पुस्तकालय और बौद्धिक संपदा (personal archives, library, and intellectual assets) को इज़राइल में यरूशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय को सौंप दिया था |

    अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग ( Albert Einstein brain in Hindi )

    Albert Einstein brain weight – 1230 g

    18 अप्रैल 1955 को अल्बर्ट आइंस्टीन की मृत्यु के बाद, पैथोलॉजिस्ट डॉ थॉमस हार्वे ने आइंस्टीन के परिवार की अनुमति के बिना ही शोध के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग निकाल लिया। डॉ हार्वे ने कहा वो अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग को केवल शोध के लिए इस्तेमाल करना चाहते है, ताकि हम उनकी बुद्धिमत्ता का राज जान सकें। लेकिन अनुमति न मिलने के कारण अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग 20 सालो तक एक जार में रखा रहा । कुछ रिसर्च ये कहती है कि उनके दिमाग में Gliale Cell की मात्रा शायद अधिक थी। उनका लेफ्ट हिप्पोकैम्पस थोड़ा बड़ा था जो याद रखने और कुछ सीखने में एक बहुत बड़ा योगदान देता है। और इसी एरिया में आम मस्तिष्क के मुकालबे ज्यादा न्यूरॉन्स थे।

    अल्बर्ट आइंस्टीन का आईक्यू क्या था? (What was Albert Einstein’s IQ)?

    अल्बर्ट आइंस्टीन का आईक्यू लगभग 160 होने का अनुमान है। हालाकिं कोई निश्चित उत्तर या सबूत नहीं है कि आइंस्टीन ने अपने आईक्यू का परीक्षण कराया था, लेकिन सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking ) का आईक्यू समान होने का अनुमान है, लेकिन दोनों भौतिक विज्ञानी प्रशंसा के बावजूद दर्ज किए गए उच्चतम आईक्यू से बहुत दूर हैं।

    अल्बर्ट आइंस्टीन के अविष्कार (Albert Einstein Inventions in Hindi)

    प्रकाश की क्वांटम थ्योरी (Quantum theory of light)

    आइंस्टीन की प्रकाश की क्वांटम थ्योरी में उन्होंने ऊर्जा की छोटी थैली की रचना की जिसे फोटोन कहा जाता है, जिनमें तरंग जैसी विशेषता होती है | उनकी इस थ्योरी में उन्होंने कुछ धातुओं से इलेक्ट्रॉन्स के उत्सर्जन को समझाया | उन्होंने फोटो इलेक्ट्रिक इफ़ेक्ट की रचना की |

    E= mc2

    E             =             energy (उर्जा)

    m           =             mass (द्रव्यमान)

    c             =             the speed of light (प्रकाश की गति ) आइंस्टीन ने द्रव्यमान और ऊर्जा के बीच एक समीकरण प्रमाणित किया, उसको आज नुक्लेअर ऊर्जा (Nuclear Energy) कहते है | E= mc2 कहता है, मूलतः, द्रव्यमान और ऊर्जा एक ही भौतिक इकाई हैं। इस समीकरण और उनके अन्य सिद्धांतों ने परमाणु बम के विकास में मदद की, हालांकि आइंस्टीन को मैनहट्टन प्रोजेक्ट नामक अमेरिकी नेतृत्व वाले परमाणु हथियार प्रयास में भाग लेने के लिए कभी नहीं कहा गया था।

    ब्रोव्नियन मूवमेंट  (Brownian motion)

    यह अल्बर्ट आइंस्टीन की सबसे बड़ी और सबसे अच्छी ख़ोज कहा जा सकता है, जहाँ उन्होंने परमाणु के निलंबन में जिगज़ैग मूवमेंट का अवलोकन किया, जोकि अणु और परमाणुओं के अस्तित्व के प्रमाण में सहायक है |

    स्पेशल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी (Special Theory of Relativity)

    अल्बर्ट आइंस्टीन की इस थ्योरी में समय और गति के सम्बन्ध को समझाया है. ब्रम्हांड में प्रकाश की गति को निरंतर और प्रक्रति के नियम के अनुसार बताया है |

    जनरल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी (General Theory of Relativity)

    1915 में, उन्होंने सापेक्षता का अपना सामान्य सिद्धांत ((General Theory of Relativity) प्रकाशित किया, जो 1687 में सर आइजैक न्यूटन (Sir Isaac Newton) द्वारा “प्रिंसिपिया” के प्रकाशन के बाद गुरुत्वाकर्षण का पहला सिद्धांत था। न्यूटन के काम ने गुरुत्वाकर्षण को एक अवधारणा और एक सार्वभौमिक कानून दोनों के रूप में स्थापित किया, जिसमें कहा गया कि गुरुत्वाकर्षण एक स्थिर है वह बल जो वस्तुओं को खींचता है। यदि वस्तु का द्रव्यमान अधिक है तो टग मजबूत होगा और यदि आप दो वस्तुओं के बीच की दूरी बढ़ाते हैं तो टग कमजोर होगा।

    मेनहट्टन प्रोजेक्ट (Manhattan Project)

    अल्बर्ट आइंस्टीन ने मेनहट्टन प्रोजेक्ट Manhattan Project बनाया, यह एक अनुसंधान है, जोकि यूनाइटेड स्टेट्स का समर्थन करता है, उन्होंने सन 1945 में एटॉमिक बम को प्रस्तावित किया | उसके बाद उन्होंने विश्व युद्ध के दौरान जापान में एटॉमिक बम का इस्तेमाल किया |

    आइंस्टीन का रेफ्रीजरेटर

    यह अल्बर्ट आइंस्टीन का सबसे छोटा अविष्कार था, जिसके लिए वे प्रसिद्ध हुए | आइंस्टीन ने एक ऐसे रेफ्रीजरेटर का अविष्कार किया जिसमे अमोनिया, पानी, और ब्युटेन और ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा का उपयोग हो सके |

  • सर आइजैक न्यूटन की जीवनी – Sir Isaac Newton Biography

    सर आइजैक न्यूटन की जीवनी – Sir Isaac Newton Biography

    इस आर्टिकल में हम सर आइजैक न्यूटन की जीवनी (Isaac Newton Biography) के बारे में जानेगे | आइज़क न्यूटन एक महान वैज्ञानिक थे | आईए आइज़क न्यूटन की जीवनी को शुरू करते हैं।

    जन्म और प्रारम्भिक जीवन Birth and Early life

    सर आइजैक न्यूटन अब तक के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण का नियम और गति के सिद्धान्त की खोज की । वे एक महान गणितज्ञ, भौतिक वैज्ञानिक, ज्योतिष एवं दार्शनिक थे। उनके काम ने आधुनिक विज्ञान की नींव रखी और ब्रह्मांड की हमारी समझ को आकार देने में मदद की।

    न्यूटन का जन्म 4 जनवरी, 1643 को इंग्लैंड के वूलस्थोर्पे (Woolsthorpe) में हुआ था। उसके जन्म से तीन महीने पहले ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। जब वह तीन साल के थे तब उनकी मां ने दोबारा शादी कर ली और उन्हें अपने दादा-दादी के पास रहने के लिए भेज दिया गया।

    आइज़क न्यूटन की शिक्षा Education of Isaac Newton

    न्यूटन ने गणित और विज्ञान के लिए शुरुआती अभिरुचि दिखाई। उन्होंने ग्रांथम (Grantham) में किंग्स स्कूल (King’s School ) में पढ़ाई की, जहाँ उन्होंने गणित और भौतिकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 1661 में, उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (Cambridge University) के ट्रिनिटी कॉलेज (Trinity College ) में भर्ती कराया गया।

    कैम्ब्रिज में, न्यूटन ने गणित और प्राकृतिक दर्शन (natural philosophy) (the forerunner of physics)) का अध्ययन किया। वह विशेष रूप से खगोलशास्त्री जोहान्स केपलर (Astronomer Johannes Kepler) के काम में रुचि रखते थे, जिन्होंने ग्रहों की गति के तीन नियम (Three laws of Planetary Motion) विकसित किए थे। न्यूटन ने गणितज्ञ रेने डेसकार्टेस (mathematician René Descartes) के काम का भी अध्ययन किया, जिन्होंने गणितीय विश्लेषण की एक नई पद्धति विकसित की थी।

    आइज़क न्यूटन का करियर Career of Isaac Newton

    1665 में, ग्रेट प्लेग महामारी के चलते न्यूटन अपने शहर वूल्स्थोर्पे (Woolsthorpe) लौट आए और अगले दो साल बिलकुल अकेले रहे और उस दौरान, उन्होंने गति के नियम (Laws of Motion) और सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण (Universal Gravitation) के नियम सहित अपनी कुछ सबसे महत्वपूर्ण खोजें कीं ।

    1667 में न्यूटन कैंब्रिज लौट आए और अपनी डिग्री पूरी की। उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज (Trinity College) का फेलो चुना गया और उन्होंने गणित (mathematics) और प्राकृतिक दर्शनशास्त्र (natural philosophy) पढ़ाना शुरू किया।

    1687 में, न्यूटन ने अपनी उत्कृष्ट कृति, द फिलोसोफिक नेचुरलिस प्रिंसिपिया मैथेमेटिका (प्राकृतिक दर्शन के गणितीय सिद्धांत) Philosophic Naturalis Principia Mathematica (Mathematical Principles of Natural Philosophy)    प्रकाशित की। इस काम ने शास्त्रीय यांत्रिकी (classical mechanics) की नींव रखी, जो गति और उसके कारणों का अध्ययन है । प्रिन्सिपिया (Principia ) को अब तक लिखे गए सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्यों में से एक माना जाता है।

    न्यूटन ने प्रकाशिकी (optics) में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया (प्रकाशिकी – optics  भौतिकी की वह शाखा है जो प्रकाश के व्यवहार और गुणों का अध्ययन करती है, जिसमें पदार्थ के साथ इंटरेक्शन और इसका उपयोग करने या इसका पता लगाने वाले उपकरणों का निर्माण शामिल है। ) । 1666 में उन्होंने पता लगाया कि सफेद रोशनी रंगों के मिश्रण से बनी होती है। उन्होंने रिफ्लेक्टिंग टेलिस्कोप (reflecting telescope) का भी आविष्कार किया, जो एक प्रकार का टेलिस्कोप है जो प्रकाश को परावर्तित करने के लिए दर्पण का उपयोग करता है।

    न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण में प्रयोग Newton’s law of universal gravitation

    एक दिन न्यूटन एक पेड़ के नीचे बैठे थे और अचानक ऊपर से एक सेब गिरा तभी न्यूटन सोचने लगे यह सेब नीचे क्यों गिरा, ऊपर क्यों नहीं गया। वह काफी देर से बैठकर यही सोच रहे थे। बहुत देर तक सोचने और विचारने के बाद उन्होंने प्रयोग करके पता लगाया कि जो चीज ऊपर है वह नीचे आएगी।

    न्यूटन के सेब के पेड़ के प्रतिष्ठित वंशज: ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज

    Newton’s law of universal gravitation is usually stated as that every particle attracts every other particle in the universe with a force that is proportional to the product of their masses and inversely proportional to the square of the distance between their centers.

    जब तक गुरुत्वाकर्षण बल रहेगा तब तक वह चीज नीचे आएगी जब गुरुत्वाकर्षण बल खत्म हो जाएगा तो वो चीज वही तैरने लगेगी। इस प्रकार न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज की।

    आइज़क न्यूटन का गति के नियम में प्रयोग Newton’s laws of motion

    न्यूटन

    “Newton’s laws of motion are three basic laws of classical mechanics that describe the relationship between the motion of an object and the forces acting on it. These laws can be paraphrased as follows:

    1. A body remains at rest, or in motion at a constant speed in a straight line, unless acted upon by a force.
    2. When a body is acted upon by a force, the time rate of change of its momentum equals the force.
    3. If two bodies exert forces on each other, these forces have the same magnitude but opposite directions”

    न्यूटन के गति के तीन नियम

    न्यूटन के गति का पहला नियम है जिसे “जड़त्व का नियम” भी कहते है | इस नियम के अनुसार एक वस्तु तब तक स्थिर बनी रहेगी जब तक उस पर कोई बल ना लगाया जाए और एक वस्तु तब तक गतिमान रहेगी जब तक इस पर कोई बल ना लगाया जाए।

    न्यूटन के गति का दूसरा नियमसंवेग का नियम” है, इस नियम के अनुसार वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाये गये बल के अनुक्रमानुपाती तथा संवेग परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में होता है।

    न्यूटन के गति का तीसरा नियम “क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम” है, इस नियम के अनुसार जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाया जाता है तो वस्तु भी उतना ही बल उस बल के विपरीत दिशा में लगाती है।

    आइज़क न्यूटन किताबें Books of Isaac Newton

    आइज़क न्यूटन ने निम्न किताबे लिखी थी :

    • मेथड ऑफ़ फ़्लक्सियन्स
    • ऑफ़ नेचर ओब्वियस लॉस एंड प्रोसेसेज इन वेजिटेशन
    • डे मोटू कोर्पोरम इन जिरम
    • फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका
    • ऑप्टिक्स
    • टकसाल में मास्टर के रूप में रिपोर्टें
    • एरिथमेटिका युनीवरसेलिस
    • दी सिस्टम ऑफ़ दी वर्ल्ड
    • ऑप्टिकल लेक्चर्स
    • दी क्रोनोलोजी ऑफ़ एनशियेंट किंगडेम्स
    • डेनियल पर प्रेक्षण और डी एपोकलिप्स ऑफ़ सेंट जॉन

    इनकी कुछ किताबें इनके मरने से पहले प्रकाशित हुई थी और कुछ किताबें उनके मरने के बाद प्रकाशित हुई।

    न्यूटन के अकादमी सलाहकारों में Isaac Barrow, Benjamin Pulleyn आते थे और इतिहास में इनके शिष्य के बारे में भी लिखा गया है जिनके नाम Roger Cotes, William Whiston है। न्यूटन के जीवन में योहानेस केप्लर, गैलीलियो गैलिली, अरस्तु, रॉबर्ट बॉयल ने काफी प्रभाव डाला है।

    न्यूटन एक शानदार वैज्ञानिक और गणितज्ञ थे। ब्रह्मांड की हमारी समझ पर उनके काम का गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्हें विज्ञान के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों में से एक माना जाता है।

    अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के अतिरिक्त, न्यूटन का मानना था कि ईश्वर ब्रह्मांड का निर्माता है और प्रकृति के नियम ईश्वर की शक्ति और ज्ञान के प्रमाण हैं। इन्होंने धार्मिक शोध के बारे में भी कुछ लिखा है जो कि इतिहास में देखने को मिलता है। न्यूटन ने अपने जीवन में छोटे-बड़े बहुत से पदों को धारण किया है और उसका सम्मान प्राप्त किया है। न्यूटन के बारे में बहुत सी चीजें अभी भी रहस्यमयी हैं विद्वानों का अपना अलग-अलग ही मत है।

    आइज़क न्यूटन की मृत्यु Death of Isaac Newton

    आइज़क न्यूटन का  31 मार्च, 1727 को 84 वर्ष की आयु में केंसिंग्टन, मिडलसेक्स, जर्मनी में निधन हो गया। उन्हें इंग्लैंड के वेस्टमिंस्टर एब्बे (Westminster Abbey) में अन्य महान अंग्रेजी वैज्ञानिकों और लेखकों के साथ दफनाया गया था।

    न्यूटन का स्मारक उनके ही कब्र के ऊपर बनाया गया है और इनकी मूर्ति पत्थर की है जिसको माइकल रिज्ब्रेक ने सफ़ेद और धूसर संगमरमर में बनाया है, और इसका  डिजाइन वास्तुकार विलियम कैंट द्वारा बनाया गया है। उनका स्मारक दर्शाता है कि उनकी दाहिने कोहिनी कई महान पुस्तकों पर है और उनका बाया हाथ एक गणितीय सूची की और इशारा कर रहा है।

  • स्टीफन हॉकिंग

    स्टीफन हॉकिंग

    स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को हुआ था, एक विश्व प्रसिद्ध ब्रितानी भौतिक विज्ञानी, ब्रह्माण्ड विज्ञानी, लेखक और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक ब्रह्मांड विज्ञान केन्द्र (Centre for Theoretical Cosmology) के शोध निर्देशक थे।

    प्रारंभिक जीवन

    • स्टीफन हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड में फ्रैंक (1905-1986) और इसाबेल एलेन हॉकिंग (नी वाकर; 1915-2013) के घर हुआ था। हॉकिंग की मां का जन्म ग्लासगो, स्कॉटलैंड में डॉक्टरों के परिवार में हुआ था।
    • यॉर्कशायर के उनके अमीर पैतृक दादाजी ने खुद को कृषि भूमि खरीदने के लिए बढ़ा दिया था और फिर 20 वीं शताब्दी की शुरुवात में महान कृषि अवसाद में दिवालिया हो गया था।
    • उनके पैतृक दादी ने परिवार को अपने घर में एक स्कूल खोलकर वित्तीय बर्बाद कर दिया। अपने परिवार की वित्तीय बाधाओं के बावजूद, दोनों माता-पिता ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भाग लिया, जहां फ्रैंक ने दवा पढ़ी और इसाबेल ने दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र पढ़ा।
    • इसाबेल एक मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के सचिव के रूप में काम करती थी, और फ्रैंक एक चिकित्सकीय शोधकर्ता थे।
    • हॉकिंग की दो छोटी बहनें, फिलीपा और मैरी और एक गोद लिया भाई एडवर्ड फ्रैंक डेविड (1955-2003) था।
    • 1950 में, जब हॉकिंग के पिता नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च में पैरासिटोलॉजी के विभाजन के प्रमुख बने, तो उनका परिवार सेंट अल्बान, हर्टफोर्डशायर चला गया।
    • सेंट अल्बान में, उनके परिवार को बहुत बुद्धिमान और कुछ हद तक विलक्षण माना जाता था; उनके परिवार में भोजन अक्सर चुपचाप एक पुस्तक पढ़ने के साथ बिताया जाता था।
    • वे एक बड़े, अव्यवस्थित और खराब रखरखाव वाले घर में एक मितव्ययी अस्तित्व में रहते थे और एक परिवर्तित लंदन टैक्सीकैब में यात्रा करते थे।
    • अफ्रीका में काम कर रहे हॉकिंग के पिता की अनुपस्थिति के दौरान, शेष परिवार ने मार्जर्का में चार महीने उनकी मां के दोस्त बेरेल और उनके पति, कवि रॉबर्ट ग्रेव्स के घर बिताये।

    कार्य

    • स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया। उन्हें 12 मानद डिग्रियाँ और अमरीका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुये।
    • स्टीफ़न हॉकिंग की पुस्तक-रूप में प्रकाशित कृति है ‘समय का संक्षिप्त इतिहास’। यह पुस्तक सन् 1988 में प्रकाशित हुई थी और अपनी तथ्यपरकता एवं वैज्ञानिकता के कारण इतनी लोकप्रिय हुई कि 10 वर्षों में इसकी दस लाख प्रतियाँ बिक गयीं। आज भी उसकी माँग बनी हुई है।

    विचार

    • मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के सामने खोले और इस पर किये गये शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।
    • मुझे हमेशा यह गर्व रहेगा कि मैंने ब्रह्माण्ड को जानने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विज्ञान के क्षेत्र में कई नई खोजे की और लोग मेरे इसी योगदान की प्रसंशा करते हैं।

    निधन

    • एक परिवार के प्रवक्ता के मुताबिक, 14 मार्च 2018 की सुबह अपने घर कैंब्रिज में ‘हॉकिंग की मृत्यु हो गई थी। उनके परिवार ने उनके दुःख व्यक्त करने वाले एक बयान जारी किया था।