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  • निकोला टेस्ला की जीवनी | Biography of Nikola Tesla in Hindi

    निकोला टेस्ला की जीवनी | Biography of Nikola Tesla in Hindi

    इस आर्टिकल में हम सर्बियाई अमेरिकी आविष्कारक, भौतिक विज्ञानी, यांत्रिक अभियन्ता, विद्युत अभियन्ता और भविष्यवादी निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) की जीवनी (Biography of Nikola Tesla), निकोला टेस्ला की प्रमुख खोजे, उनका निजी जीवन, और विज्ञानं के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में बात करेगे |

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla)परिचय

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) (10 जुलाई 1856 – 7 जनवरी 1943) एक सर्बियाई अमेरिकी आविष्कारक, भौतिक विज्ञानी, यांत्रिक अभियन्ता, विद्युत अभियन्ता और भविष्यवादी थे।

    34 साल की उम्र में निकोला टेस्ला (1856-1943) की एक तस्वीर

    निकोला टेस्ला की प्रसिद्धि उनके आधुनिक प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current AC एसी) विद्युत आपूर्ति प्रणाली के क्षेत्र में दिये गये अभूतपूर्व योगदान के कारण है। टेस्ला के विभिन्न पेटेंट और सैद्धांतिक कार्य, बेतार संचार और रेडियो के विकास का आधार साबित हुये हैं। वैद्युत चुंबकत्व के क्षेत्र में किये गये उनके कई क्रांतिकारी विकास कार्य, माइकल फैराडे के विद्युत प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों पर आधारित थे।

    ऑस्ट्रियाई साम्राज्य (Austrian Empire) (अब Croatia (क्रोएशिया) में जन्मे और पले-बढ़े टेस्ला ने 1870 के दशक में बिना डिग्री प्राप्त किए इंजीनियरिंग और भौतिकी का अध्ययन किया

    टेस्ला ने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल उपकरणों की एक श्रृंखला विकसित करने के लिए न्यूयॉर्क में प्रयोगशालाएं और कंपनियां स्थापित कीं। 1888 में वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक द्वारा लाइसेंस प्राप्त उनके अल्टरनेटिंग करंट (एसी) इंडक्शन मोटर और संबंधित पॉलीफ़ेज़ एसी पेटेंट (polyphase AC patents) ने उन्हें काफी पैसा कमाया और पॉलीफ़ेज़ सिस्टम की आधारशिला बन गए।

    टेस्ला ने मैकेनिकल ऑसिलेटर्स/जनरेटर, इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज ट्यूब और प्रारंभिक एक्स-रे इमेजिंग के साथ कई प्रयोग किए ताकि ऐसे आविष्कारों को वो पेटेंट करा सके और बाजार में ला सके, उन्होंने एक वायरलेस नियंत्रित नाव भी बनाई, जो अब तक प्रदर्शित पहली नावों में से एक थी।


    निकोला टेस्ला के आविष्कार जिन्होंने दुनिया बदल दी (Nikola Tesla inventions that changed the world)

    टेस्ला एक आविष्कारक के रूप में प्रसिद्ध हो गए और उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में मशहूर हस्तियों के सामने अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया। 1890 के दशक के दौरान, टेस्ला ने न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में अपने उच्च-वोल्टेज, उच्च-आवृत्ति बिजली प्रयोगों में वायरलेस प्रकाश व्यवस्था और दुनिया भर में वायरलेस विद्युत वितरण के लिए अपने विचारों को आगे बढ़ाया। 1893 में, उन्होंने अपने उपकरणों के साथ वायरलेस संचार की संभावना पर घोषणा की। टेस्ला ने इन विचारों को अपने अधूरे वार्डेनक्लिफ टॉवर प्रोजेक्ट (Wardenclyffe Tower project), एक अंतरमहाद्वीपीय वायरलेस संचार और पावर ट्रांसमीटर में व्यावहारिक उपयोग में लाने की कोशिश की, लेकिन इसे पूरा करने से पहले ही फंडिंग खत्म हो गई। जनवरी 1943 में न्यूयॉर्क शहर में उनकी मृत्यु हो गई थी |

    टेस्ला के कार्यों को 1960 तक किसी का ध्यान नही गया, उसके बाद General Conference on Weights and Measures के सम्मेलन ने उनके सम्मान में चुंबकीय प्रवाह घनत्व (magnetic flux density) की एसआई इकाई (SI) का नाम टेस्ला रखा। 1990 के दशक के बाद से टेस्ला एक महान वैज्ञानिक के रुप में लोकप्रियता बढ़ी है ।

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) का प्रारम्भिक जीवन और उनका परिवार (Early life of Nikola Tesla and his family)

    निकोला टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को स्किमडज़, क्रोएशिया में हुआ था, जब क्रोएशिया Austrian Empire का हिस्सा था। क्रोएशिया आज दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, लेकिन निकोला टेस्ला के जन्म के समय क्रोएरिया आर्थिक रुप से एक कमजोर देश था | निकोला टेस्ला का जन्म एक रोमन कैथोलिक घर में हुआ था और वो अपने माता-पिता की चौथी संतान थी । उनके एक बड़े भाई, डेन, दो बड़ी बहनों, एंजिनिया और मिल्का और एक छोटी बहन, मारिका थी। उनके पिता मिलुटिन टेस्ला (1819-1879) एक सच्चे रूढ़िवादी चर्च में एक पादरी थे । निकोला टेस्ला की माँ ज़ुका मैंडिक (1822-1892) एक गृहणी थी |

    टेस्ला के पूर्वज मोंटेनेग्रो (Montenegro) के पास पश्चिमी सर्बिया (western Serbia) से थे।  निकोला टेस्ला की माँ, ज़ुका मैंडिक (1822-1892), जिनके पिता भी रूढ़िवादी चर्च के पुजारी थे, को घर में घरेलू शिल्प उपकरण (home crafts tools) और यांत्रिक उपकरण बनाने की प्रतिभा के साथ ही सर्बियाई महाकाव्य कविताओं को याद करने की क्षमता थी। ज़ुका ने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी | टेस्ला ने अपनी अद्भुत स्मृति और रचनात्मक क्षमताओं का श्रेय अपनी मां के आनुवंशिकी और प्रभाव को दिया । निकोला के पिता रूढ़िवादी पादरी और लेखक थे और उनकी इच्छा थी कि निकोला भी बड़ा होकर पादरी बने ।

    जब एक बार निकोला अपने बड़े भाई के साथ झूल रहा था, तो उनके बड़े भाई डैनील अपनी आँखों के सामने झुकते हुए घोड़े से गिर कर मर गये थे। इस घटना ने आठ वर्षीय निकोला को अस्थिर कर दिया, जिसका पूरी जिंदगी उन पर बुरा असर रहा ।

    निकोला टेस्ला की शिक्षा (Education of Nikola Tesla)

    1861 में, टेस्ला ने स्मिलजान के प्राथमिक विद्यालय में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने जर्मन, गणित और धर्म का अध्ययन किया। 1862 में, टेस्ला परिवार पास के दुसरे शहर गोस्पिक (Gospić) में चला गया, जहाँ टेस्ला के पिता पैरिश पुजारी (parish priest) के रूप में काम करते थे। 1870 में, टेस्ला हायर रियल जिम्नेजियम (Higher Real Gymnasium) में हाई स्कूल में भाग लेने के लिए कार्लोवैक (Karlovac) में चले गए, जहां कक्षाएं जर्मन में आयोजित की गईं, जैसा कि ऑस्ट्रो-हंगेरियन मिलिट्री फ्रंटियर (Austro-Hungarian Military Frontier) के स्कूलों में आम तौर पर होता था।

    निकोला टेस्ला उम्र 23, (1879)

    टेस्ला ने बाद में लिखा कि उन्हें अपने भौतिकी प्रोफेसर द्वारा किये गये बिजली के प्रदर्शन में उनकी बहुत रुचि हो गई थी । टेस्ला ने कहा कि इस “रहस्यमय घटना” के इन प्रदर्शनों ने उन्हें “इस अद्भुत शक्ति के बारे में और अधिक जानने” के लिए प्रेरित किया। टेस्ला अपने दिमाग में इंटीग्रल कैलकुलस करने में सक्षम थे, जिससे उनके शिक्षकों को विश्वास हो गया कि वह धोखा दे रहे थे। उन्होंने 1873 में स्नातक की उपाधि प्राप्त करते हुए चार साल की पढाई उन्होंने तीन साल में पूरी की ।

    उन्होंने 1875 में मिलिट्री फ्रंटियर स्कॉलरशिप पर ग्राज़ के इंपीरियल-रॉयल टेक्निकल कॉलेज (Imperial-Royal Technical College in Graz) में दाखिला लिया। अपनी आत्मकथा में टेस्ला ने कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत की और उच्चतम ग्रेड अर्जित किए, नौ परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं और तकनीकी संकाय के डीन ने उनके पिता को निकोला टेस्ला के बारे में प्रशंसा पत्र लिखा जिसमे डीन ने बताया की “आपका बेटा प्रथम श्रेणी का सितारा है।” | लेकिन अपने तीसरे वर्ष तक निकोला टेस्ला स्कूल में असफल रहे और कभी स्नातक नहीं हुए, दिसंबर 1878 में ग्राज़ छोड़ दिया।  17 अप्रैल 1879 को, 60 वर्ष की आयु में टेस्ला के पिता की मृत्यु हो गई। शेष वर्ष के दौरान टेस्ला ने गोस्पिक में अपने पुराने स्कूल में अध्यापक के रूप में कार्य किया |

    टेस्ला ने अनेक पुस्तको का अध्ययन किया था और माना जाता है कि उनमे विलक्षण स्मृति थी। वे आठ भाषाओं के जानकार थे जिसमे सर्बो-क्रोएशीयन, चेक, अंग्रेजी, फ़्रेंच, जर्मन, हंगेरीयन, ईटालीयन और लैटीन का समावेश है। टेस्ला अविवाहित थे और उनका मानना था कि उनका ब्रह्मचर्य उनकी वैज्ञानिक उप्लब्धियों मे सहायक रहा है। उन्होने एक इंटरव्यु मे कहा था कि शादी ना कर के उन्होने विज्ञान के लिये एक कुर्बानी दी है ।

    निकोला टेस्ला की वैज्ञानिक जीवन (Scientific Life of Nikola Tesla)

    बुडापेस्ट टेलीफोन एक्सचेंज में कार्यरत

    टेस्ला 1881 में एक टेलीग्राफ कंपनी, बुडापेस्ट टेलीफोन एक्सचेंज में काम करने के लिए बुडापेस्ट, हंगरी चले गए । यहाँ टेस्ला तिवादर पुस्कस  (Tivadar Puskás), जो हंगरी के प्रसिद्ध आविष्कारक और  टेलीफोन एक्सचेंज के इन्वेन्टर थे के दिशा निर्देश में काम करने वाले थे | वहा पहुचने पर उन्हें पता लगता है की टेलीग्राफ कंपनी कार्यरत नही थी, इसलिए उन्होंने सेंट्रल टेलीग्राफ कार्यालय में ड्राफ्ट्समैन के रूप में काम किया।  कुछ ही महीनों में, बुडापेस्ट टेलीफोन एक्सचेंज चालू हो गया और टेस्ला को मुख्य इलेक्ट्रीशियन का पद आवंटित किया गया। अपने रोजगार के दौरान, टेस्ला ने सेंट्रल स्टेशन उपकरण में कई सुधार किए और एक टेलीफोन रिपीटर या एम्पलीफायर को बेहतर बनाने का दावा किया, जिसका कभी पेटेंट नहीं कराया गया और न ही सार्वजनिक रूप से इसका वर्णन किया गया । (where did nikola tesla work)

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) और थॉमस अल्वा एडीसन

    1882 में, तिवादर पुस्कस  (Tivadar Puskás) ने टेस्ला को पेरिस में कॉन्टिनेंटल एडिसन कंपनी में एक और नौकरी दिलवाई। कॉन्टिनेंटल एडिसन कंपनी की थी | महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडीसन इस कंपनी के फाउंडर थे | टेस्ला ने उस समय इलेक्ट्रिक पॉवर सप्लाई एक बिल्कुल नए उद्योग के रूप में शुरू हुआ था इस उद्योग के तहत बड़े पैमाने पर विद्युत ऊर्जा की सप्लाई के लिए शहर भर में indoor incandescent lighting (इनडोर तापदीप्त प्रकाश व्यवस्था) इनस्टॉल किए गये । टेस्ला ने यहाँ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में काफी व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

    प्रबंधन ने इंजीनियरिंग और भौतिकी में उनके उन्नत ज्ञान पर ध्यान दिया और जल्द ही उन्हें डायनेमो और मोटर बनाने के उन्नत संस्करण डिजाइन करने और बनाने का काम सौंपा। उन्हें फ्रांस और जर्मनी में बनाई जा रही अन्य एडिसन उपयोगिताओं में इंजीनियरिंग समस्याओं का निवारण करने के लिए भी भेजा।

    इसी दौरान उन्हें थॉमस अल्वा एडीसन के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने एडीसन की कंपनी को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया, लेकिन शीघ्र ही बड़े पैमाने पर विद्युत वितरण प्रणाली को लेकर दोनों में विवाद हो गया था ।

    निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) का अमेरिका में आगमन (Nikola Tesla’s arrival in America)

    जून 1884 मे उनका स्थानांतरण न्युयार्क अमरीका में कर दिया गया। टेस्ला ने एडिसन के सामने उसकी मोटर और जनरेटर को ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रस्ताव रखा था।  30 जुलाई 1891 को, 35 वर्ष की आयु में, टेस्ला संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता ले ली उसी वर्ष, उन्होंने अपने टेस्ला कॉइल (Tesla Coil) का पेटेंट कराया। टेस्ला कॉइल, का उपयोग उच्च-वोल्टेज, लो कर्रेंट, उच्च आवृत्ति वाली प्रत्यावर्ती-धारा बिजली (high frequency alternating-current electricity) का उत्पादन करने में था

    यूएस पेटेंट 381,968 से चित्रण, टेस्ला की प्रत्यावर्ती धारा प्रेरण मोटर के सिद्धांत को दर्शाता है

    उस समय अमेरिका में एडीसन की आविष्कृत डीसी विद्युत वितरण व्यवस्था लागू थी। डीसी (DC) यानि डायरेक्ट करेंट (Direct Current) ऐसी विद्युत धारा को कहते हैं जो हमेशा एक ही दिशा में बहती है। जैसे की विद्युत सेल से बनने वाली धारा। टेस्ला ने डीसी की कमियों की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया और एसी (AC) विद्युत वितरण व्यवस्था लागू करने की बात कही। एसी यानि अलटरनेटिंग करेंट (Alternative Current) लगातार अपनी दिशा बदलती रहती है। इस धारा की यह विशेषता होती है कि इसका वोल्टेज ट्रांसफोर्मर द्वारा बढ़ाकर काफी दूर तक भेजा जा सकता है। जबकि डीसी में ऐसा संभव नहीं। साथ ही एसी चालित मोटर और दूसरे उपकरणों में डीसी की अपेक्षा कम बिजली खर्च होती है।

    वो समय था एडिसन के दिष्ट धारा(DC current) का टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) के बीच विवाद जारी था । एडिसन ने प्रत्यावर्ती धारा का डर पैदा करने के लिये हर संसाधन का इस्तेमाल किया। लेकिन हर घर में बिजली सिर्फ प्रत्यावर्ती धारा से पहुंच सकती थी, और अतंत: टेस्ला की विजय हुयी।

    एडीसन ने टेस्ला को कहा कि यदि वह इस कार्य मे सफल हो गया तो उसे पचास हजार डालर मिलेंगे। टेस्ला ने ऐसा कर दिखाया, लेकिन एडिसन अपने वादे से मुकर गया। एडिसन ने अपने वादे को अमेरिकन हास्य(American Humor) कह कर टेस्ला का मजाक उड़ाया, गुस्से में टेस्ला ने एडिसन का साथ छोड़ दिया। एडीसन की कंपनी छोड़ने के पश्चात टेस्ला ने अपनी स्वयं की कंपनी टेस्ला इलेक्ट्रिक लाईट एन्ड मैनुफैक्चरींग की स्थापना की। इस कंपनी मे उन्होने डायनेमो इलेक्ट्रिक मशीन कम्युटेटर का अभिकल्पन किया। यह उनका सं. रा. अमरिका मे पहला पेटेंट था।

    चूंकि उस समय तक डीसी सिस्टम काफी बड़े पैमाने पर लागू था और एडीसन कंपनी डीसी उपकरणों को ही बना रही थी अत: एडीसन ने इस नये सिस्टम का विरोध किया। नतीजे में टेस्ला ने उसकी कंपनी को अलविदा कह दिया और उद्योगपति जार्ज वेस्टिंग हाउस के साथ मिलकर नई कंपनी की बुनियाद डाली जिसने एसी करेंट की उपयोगिता को दुनिया के सामने रखा।

    टेस्ला ने चक्रीय चुम्बकीय क्षेत्र के सिद्धान्त की खोज की। उसका एक अन्य महत्वपूर्ण आविष्कार एसी विद्युत मोटर (AC Electric Motor) है जिसने डीसी विद्युत सिस्टम को पूरी तरह हाशिये पर ला दिया। उसने नियाग्रा जल प्रपात (Niagara Falls) पर पहला जल विद्युत पावर स्टेशन (First water electric power station) तैयार किया, जिसके बाद न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में एसी विद्युत वितरण सिस्टम को स्वीकार कर लिया गया।

    1888 के अमेरिकी पेटेंट 390,721 में टेस्ला की एसी डायनेमो-इलेक्ट्रिक मशीन (एसी इलेक्ट्रिक जनरेटर)

    1887 मे टेस्ला ने प्रत्यावर्ती धारा (AC Current) से चलने वाली इंड्क्सन मोटर(Induction) बनायी, इस आविष्कार ने टेस्ला के लिये सफलता के रास्ते खोल दिये। इसके पश्चात के वर्षो मे टेस्ला और एडीसन के मध्य प्रसिद्ध दिष्ट धारा(DC current) का टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) से युद्ध चला। अंतत: इसमे टेस्ला के प्रत्यावर्ती धारा(AC current) की विजय हुयी क्योंकि यह तरीका लंबी दूरी तक विद्युत के संवहण के लिये उपयुक्त था । माना जाता है कि टेस्ला ने 1895-96 मे X किरण की खोज कर ली थी, जो कि रांटजेन के 1996 की खोज से पहले थी, लेकिन उनकी प्रयोगशाला मे लगी आग से सारे उपकरण जल कर राख हो गये थे।

    मारकोनी (Marconi) को रेडियो का आविष्कारक माना जाता है। लेकिन टेस्ला ने यह सिद्धान्त दिया था कि वायुमंडल के बाहरी आयनमंडल से होकर रेडियो तरंगें पूरी दुनिया में भेजी जा सकती है। उसने रेडियो में प्रयुक्त होने वाली टेस्ला रॉड का भी आविष्कार किया और उसका रेडियो के असली आविष्कारक को लेकर मारकोनी के साथ काफी लंबा मुकदमा भी चला। उसने वायरलेस पावर सप्लाई (Wireless power supply) का विचार दिया जो बाद में लेसर किरणों (Laser Rays) का आधार बना।

    अपने एक प्रेजेंटेशन में उसने लाखों वोल्ट की आकाशीय बिजली बनाकर सबको दंग कर दिया था। एक बार उसने अपने उपकरण टेस्लास्कोप (Teslascope) पर कुछ अज्ञात सिग्नल रिकार्ड किये, जो उसके अनुसार किसी अन्य ग्रह से भेजे जा रहे थे। 1899 तथा 1900 के मध्य कोलोरेडो जलप्रपात मे एक प्रयोग के दौरान उन्होने कृत्रिम विद्युत तड़ित का निर्माण कर चकित कर दिया था।

    निकोला टेस्ला की प्रमुख खोजें (Discoveries of Nikola Tesla) in Hindi

    AC बिज़ली – AC से पहले पूरे अमेरिका में DC (Direct Current) की व्यवस्था लागू थी। DC उस बिज़ली की धारा को कहते है जो एक ही दिशा में बहती रहती है। पर टेस्ला ने DC की कई खामियों को उजागर किया और AC व्यवस्था लागू करने की बात कही। AC बिजली का फायदा यह है कि इसमें बिज़ली लगातार अपनी दिशा बदलती रहती है। इस की विशेषता यह है कि इसे DC के मुकाबले काफी दूर तक भेजा जा सकता है और इसमें बिज़ली की खत्म भी बेहद कम होती है।

    बिजली से चलने वाली मोटर – टेस्ला की बनाई बिजली की मोटर से ही आज पूरी दुनिया के पंखे, कूलर और अन्य घूमने वाली बिज़ली की चीज़ें चलती हैं।

    पहला जल विद्युत (बिज़ली) पावर स्टेशन – उन्होंने पहला जल बिज़ली स्टेशन बनाया जो बाद में सभी डैमों से बिज़ली पैदा करने का आइडिया बना।

    रेडियो और टेस्ला रॉड – मारकोनी को रेडियो का आविष्कारक माना जाता है। लेकिन यह भी सच है कि इस आविष्कार में टेस्ला का भी योगदान कम नहीं है। उसी ने यह सिद्धान्त दिया कि वायुमंडल के बाहरी आयनमंडल से होकर रेडियो तरंगें पूरी दुनिया में भेजी जा सकती है। उसने रेडियो में लगाई जाने वाली टेस्ला रॉड का भी आविष्कार किया।

    वायरलेस संचार (Wireless) – सन 1890 से 1906 तक टेस्ला ने वायेरलेस तरीके से बिज़ली को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुँचाने के तरीके पर काम किया, वो इसमें सफल तो नही हो पाए मगर उनका यहीं आइडिया बाद में लेसर किरणों (Laser Rays) का आधार बना। अपने इसी परियोजना में उन्होंने लाखों वोल्ट की आकाशीय बिजली बनाकर सबको दंग कर दिया था।

    चुंबकीय प्रभाव, रिमोट कंट्रोल और राडार की खोज़ भी टेस्ला ने ही की थी। उन्होंने अपने जीवन काल मे 300 पेटेंट प्राप्त किये। इसके अतिरिक्त टेस्ला के द्वारा किये गये ऐसे कई अविष्कार है जिन्हे उन्होने पेटेंट नही करवाया।

    टेस्ला अपनी ईस्ट ह्यूस्टन सेंट प्रयोगशाला में वायरलेस पावर प्रयोगों में उपयोग की जाने वाली spiral coil के सामने बैठे हैं

    निकोला टेस्ला के प्रमुख पेटेंट (Nikola Tesla’s Major Patents)

    इलेक्ट्रोटेक्निक और रेडियोइलेक्ट्रिसिटी के लिए टेस्ला के शोध और खोजों का बहुत महत्व है। कुल मिलाकर, निकोला टेस्ला ने संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 40 पेटेंट और दुनिया भर में 300 से अधिक पेटेंट पंजीकृत किए हैं। उनके आविष्कार बिजली और चुंबकत्व के उपयोग पर केंद्रित थे, जिनमें शामिल हैं: फ्लोरोसेंट लैंप, इंडक्शन मोटर (उद्योगों और विभिन्न घरेलू उपकरणों में प्रयुक्त), रिमोट कंट्रोल, टेस्ला कॉइल (Tesla Coil), रेडियो ट्रांसमिशन, कार स्टार्ट में इस्तेमाल होने वाला इग्निशन सिस्टम , प्रत्यावर्ती धारा आदि।टे

    टेस्ला के कुछ पेटेंटों का हिसाब नहीं दिया गया है, और विभिन्न स्रोतों ने कुछ ऐसे खोजे हैं जो पेटेंट अभिलेखागार (patent archives) में छिपे हुए हैं। टेस्ला को 26 देशों में कम से कम 278 ज्ञात पेटेंट जारी किए गए हैं। टेस्ला के कई पेटेंट संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में थे, लेकिन कई अन्य पेटेंट दुनिया भर के देशों में स्वीकृत किए गए थे। टेस्ला द्वारा विकसित कई आविष्कारों को पेटेंट संरक्षण में नहीं रखा गया था।

    लाखों वोल्ट उत्पन्न करने वाले अपने “magnifying transmitte” के बगल में बैठे टेस्ला की एक मल्टीपल एक्सपोज़र तस्वीर।
    7-मीटर (23 फीट) लंबे आर्क सामान्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन केवल पावर स्विच को तेजी से घुमाकर प्रभाव के लिए तैयार किए गए थे

    निकोला टेस्ला और पुरस्कार

    1894 में निकोला टेस्ला ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से मानद उपाधि प्राप्त की और फ्रैंकलिन संस्थान से इलियट क्रेसन पदक प्राप्त किया। 1912 में, टेस्ला ने एडिसन के साथ भौतिकी में नोबेल पुरस्कार साझा करने से इनकार कर दिया, जो अंततः एक अन्य शोधकर्ता को दिया गया था। 1934 में, फिलाडेल्फिया शहर ने उन्हें उनके पॉलीफ़ेज़ पावर सिस्टम के लिए जॉन स्कॉट मेडल से सम्मानित किया। निकोला नेशनल इलेक्ट्रिक लाइट एसोसिएशन के मानद सदस्य और अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस के सदस्य थे।

    निकोला टेस्ला की मृत्यु (Death of Nikola Tesla)

    7 जनवरी 1943 को दिल का दौरा पड़ने से निकोला टेस्ला का होटल न्यू यॉर्कर के कमरा 3327 में मृत्यु हो गई (। देहांत हो गया। निकोला टेस्ला अपनी मृत्यु के समय 86 वर्ष के थे (how old was nikola tesla when he died) | अपने जीवन के अंतिम दिनों में टेस्ला के कुछ प्रयोग असफल रहे, जिससे वह डिप्रैशन का शिकार हो गए। उन्होंने बाहर के लोगों से मिलना कम कर दिया।

  • गैलीलियो गैलिली की जीवनी ( Biography of Galileo Galilei in hindi jivani)

    गैलीलियो गैलिली की जीवनी ( Biography of Galileo Galilei in hindi jivani)

    इस आर्टिकल में हम महान इतालवी दार्शनिक, खगोलशास्त्री और गणितज्ञ गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) की जीवनी के बारे में बात करेगे |

    गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) – परिचय

    गैलीलियो गैलिली एक इतालवी खगोलशास्त्री, भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ थे। जिन्हें कभी-कभी बहुज्ञ (polymath) के रूप में वर्णित किया जाता है। उन्हें अवलोकन संबंधी खगोल विज्ञान (observational astronomy), आधुनिक युग की सामान्य भौतिकी, वैज्ञानिक पद्धति और आधुनिक विज्ञान का जनक (Father) या आधुनिक भौतिकी का पिता कहा जाता है।

    गैलीलियो गैलिली का पोर्ट्रेट, 1636 (जस्टस सस्टरमैन्स द्वारा)

    गैलिलियो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने खगोलीय प्रेक्षण, चंद्रमा पर क्रेटरों व पहाड़ों की खोज और बृहस्पति के चार उपग्रहों, प्रायः गैलीली उपग्रहों के रूप में जाना जाता है, के लिए दूरबीन (telescope) का प्रयोग किया था। उन्होंने शुक्र के कलाओं का अवलोकन किया और सौर धब्बों के अध्ययन से सूर्य की घूर्णन गति का पता लगाया।

    गैलिलियो ने निष्कर्ष निकाला कि अरस्तु का वैश्विक मानचित्र, जो अपने समय में अभी भी व्यापक रूप से विश्वसनीय था, गलत था। इसके बजाय उन्होंने कॉपरनिकस के ‘सूर्य केंद्रीय सिद्धांत’ का समर्थन किया। दूरबीन के साथ उनकी खोजों ने खगोल विज्ञान में क्रांति ला दी और कोपर्निकन हेलियोसेंट्रिक प्रणाली (Copernican heliocentric system) की स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त किया  लेकिन उस प्रणाली की उनकी वकालत के परिणामस्वरूप अंततः उनके खिलाफ एक न्यायिक जांच प्रक्रिया शुरू हो गई।  उन पर मुकदमा चलाया गया और अपने जीवन के अंतिम आठ साल के लिए उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया ।

    गैलीलियो गैलिली का प्रारंभिक जीवन (Early life of Galileo Galilei)

    गैलीलियो गैलिली का जन्म आधुनिक इटली के पीसा नामक शहर मे 15 फ़रवरी 1564 को एक संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। इनके पिता विन्सौन्जो गैलिली उस समय के जाने माने संगीत विशेषज्ञ थे। वे ‘ ल्यूट ’ नामक वाद्य यंत्र बजाते थे, यही ल्यूट नामक यंत्र बाद में गिटार और बैन्जो के रूप में विकसित हुआ। अपनी संगीत रचना के दौरान विन्सौन्जो गैलिली ने तनी हुयी डोरी या तार के तनाव और उससे निकलने वाले स्वरों का गहनता से अध्ययन किया तथा यह पाया कि डोरी या तार के तनाव और उससे निकलने वाली आवाज में संबंध है।

    पिता के द्वारा संगीत के लिये तनी हुयी डोरी या तार से निकलने वाली ध्वनियों के अंतरसंबंधों के परिणामों का वैज्ञानिक अध्ययन उनके पुत्र गैलीलियो द्वारा किया गया।

    1570 के दशक की शुरुआत में गैलीलियो का परिवार फ़्लोरेंस चला गया, जहाँ गैलीली परिवार पीढ़ियों से रहता था। अपनी मध्य किशोरावस्था में गैलीलियो ने फ्लोरेंस के पास वलोम्ब्रोसा के  स्कूल में पढ़ाई की, और फिर 1581 में पीसा विश्वविद्यालय में मैट्रिक किया, जहां उन्हें चिकित्सा का अध्ययन करना था। हालाँकि, वह गणित के प्रति उनकी रूचि ज्यादा थी और अपने पिता के विरोध के बावजूद, उन्होंने गणितीय विषयों और दर्शनशास्त्र को अपना पेशा बनाने का फैसला किया।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei का वैज्ञानिक जीवन

    1581 से गैलीलियो ने खुद को अरिस्टोटेलियन दर्शन (Aristotelian philosophy) और गणित पढ़ाना शुरू कर दिया । 1585 में गैलीलियो ने बिना डिग्री प्राप्त किए विश्वविद्यालय छोड़ दिया और कई वर्षों तक उन्होंने फ्लोरेंस और सिएना में गणितीय विषयों की निजी शिक्षा दी।

    1588 मे उन्होने अकेडीमिया डेल्ले आर्टी डेल डिसेग्नो फ्लोरेन्स मे शिक्षक के रूप मे कार्य प्रारंभ किया। 1589 मे वे पिसा मे गणित व्याख्याता के रूप मे कार्य शुरू किया। 1592 से उन्होने पौडा विश्वविद्यालय मे ज्यामिति, यांत्रिकि और खगोलशास्त्र पढाना प्रारंभ किया। इस पद पर वे 1610 तक रहे। इस पद पर रहते हुये उन्होने मूलभूत विज्ञान (गतिविज्ञान, खगोल विज्ञान) तथा प्रायोगिक विज्ञान (पदार्थ की मजबूती, उन्न्त दूरबीन इत्यादि) पर कार्य किया।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei और भौतिक विज्ञान

    गैलीलियो ने भौतिक विज्ञान में गतिकी के समीकरण स्थापित किए। उनका जड़त्व का नियम प्रसिद्ध है। उन्होंने पीसा की मीनार के अपने प्रसिद्ध प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि वस्तुओं के गिरने की गति उनके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने पहली बार सिद्ध किया की निर्वात में प्रक्षेप्य का पथ पर्वलयकार होता है।

    पर वो अपने प्रयोगों के परिणामो को कैसे नकार सकते थे, जो पुरानी मान्यताओ के विरुद्ध जाते थे और वो इनकी पुरी ईमानदारी से व्याख्या करते थे। उनकी चर्च के प्रति निष्ठा के बावजूद उनका ज्ञान और विवेक उन्हें चर्च की किसी भी पुरानी अवधारणा को बिना प्रयोग और गणित के समझने से रोकता था। चर्च ने इसे अपनी अवज्ञा समझा। जिसे हम आपेक्षिकता का सिद्धांत कहते है, उसकी नीव भी गेलिलियो गैलिली ने ही डाली थी।

    उन्होंने कहा था “भौतिकी के नियम वही रहते है, चाहे कोई पिंड स्थिर हो या समान वेग में एक सरल रेखा में गतिमान। कोई भी अवस्था ना परम स्थिर या परम चल अवस्था हो सकती है”। इसी ने बाद में न्यूटन के नियमो को आधारभूत ढांचा दिया था। गैलीलियो की चित्रकला मे भी रूचि थी और उसमे भी उन्होने शिक्षा ग्रहण की।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei का गणितीय ज्ञान

    उनकी अभिरूचियो मे ज्योतिष भी था जो उस समय गणित और खगोल विज्ञान से जुड़ा हुआ था। गैलीलियो को सूक्ष्म गणितीय विश्लेषण करने का कौशल संभवत: अपने पिता विन्सैन्जो गैलिली से विरासत में आनुवांशिक रूप में तथा कुछ उनकी कार्यशैली को करीब से देख कर मिला होगा। विन्सैन्जो एक जाने-माने संगीत विशेषज्ञ थे और ‘ल्यूट’ नामक वाद्य यंत्र बजाते थे जिसने बाद में गिटार और बैन्जो का रूप ले लिया।

    गैलीलियो गैलिली Galileo Galilei को विज्ञान को लेकर प्रयोग

    उन्होंने भौतिकी में पहली बार ऐसे प्रयोग किए जिनसे ”अरैखिक संबंध(Non-Linear Relation)” का प्रतिपादन हुआ। तब यह ज्ञात था कि किसी वाद्य यंत्र की तनी हुई डोर (या तार) के तनाव और उससे निकलने वाली आवृत्ति में एक संबंध होता है, आवृत्ति तनाव के वर्ग के समानुपाती होती है।

    प्रकाश की गति नापने का सबसे पहले प्रयास गैलीलियो ने ही किया। गैलीलियो व उनका एक सहायक अँधेरी रात में कुछ मील की दूरी पर खड़े अलग-अलग पहाड़ों की चोटी पर कपाट लगी लालटेन लेकर चढ़ गए। उन्होंने अपने सहायक को निर्देश दिया कि जैसे ही उसे गैलीलियो की लालटेन का प्रकाश दिखे उसे अपनी लालटेन का कपाट खोल देना था। गैलीलियो को अपनी लालटेन के कपाट खोलने व सहायक की लालटेन का प्रकाश दिखने के बीच का समय अंतराल मापना था। पहाड़ों के बीच की दूरी उन्हें ज्ञात ही थी। इस तरह उन्होंने प्रकाश की गति ज्ञात की।

    गैलीलियो ने अपने इस प्रायोगिक निष्कर्ष को दुहराने का निश्चय किया। इस बार उन्होंने पहली से कहीं ज्यादा दुरी पर स्थित दो पहाड़ियों का चयन किया। उन्होंने फिर से उसी पुरानी लालटेन की प्रक्रिया को दुहराया और इस बार भी समय अंतराल पहले जितना ही आया। इससे उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि प्रकाश की गति उनके सहायक की प्रतिक्रिया के समय से बहुत कम है और प्रकाश का सही वेग नापना उनकी इस युक्ति से संभव नहीं है।

    गैलीलियो ने पैराबोला का अध्ययन करके यह नतीजा निकाला यदि वातावरण में friction को शुन्य मान लिया जाए और कोई पिंड एक समान त्वरण (uniform acceleration) से फेंका जाए तो वह एक परवलयाकार मार्ग पर चल कर वापस पृथ्वी पर आ गिरेगा। लेकिन वातावरण में मौजूद friction और उस समय तक के कुछ अज्ञात बलों की उपस्थिति के कारण वो अपने इस सिद्धांत की सही गणितीय व्याख्या नहीं कर पा रहे थे और इस बात की जानकारी उन्हें थी इसलिए उन्होंने यह भी कहा कि उनका यह सिद्धांत जरूरी नहीं कि किसी ग्रह जैसे पिंड पर भी लागू हो।

    गैलीलियो गैलिली द्वारा दूरबीन का आविष्कार (Telescope Invention by Galileo Galilei)

    गेलिलियो गैलिली ने आज से बहुत पहले गणित, सैधांतिक भौतिकी और प्रायोगिक भौतिकी में परस्पर संबध को समझ लिया था। परावलय या पैराबोला का अध्ययन करते हुए वो इस निष्कर्ष पर पहुचे थे कि एक समान त्वरण की अवस्था में पृथ्वी पर फेंका कोई पिंड एक परवलयाकार मार्ग में चलकर वापस पृथ्वी पर गिरेगा, बशर्ते हवा में घर्षण का बल अपेक्ष्नीय हो। सन 1608-9 में गेलिलियो गैलिली को दूरबीन के बारे में पता चला जिसका हॉलैंड में अविष्कार हो चुका था।

    केवल उसका विवरण सुनकर उन्होंने उससे भी कही अधिक परिष्कृत और शक्तिशाली दूरबीन स्वयं बना ली। जिसका सार्वजनिक प्रदर्शन उन्होने 25 अगस्त 1609 को किया था। उन्होंने बृहस्पति के उपग्रहों का पता लगाया और सिद्ध किया कि आकाशगंगा बहुत से तारों से मिलकर बनी है।

    गैलीलियो ने लगभग 200 टेलिस्कोप बनाये और उन्हें विभिन्न शिक्षण संस्थाओं को खगोलीय प्रेक्षणों (astronomical observations) के लिए दान कर दिया। उन्होंने इटली की ही भाषा में अपनी किताब लिखी ताकि आम आदमी भी उसे पढ़ सके। गैलीलियो ने चर्च के विचारों का खंडन किया था, इसलिए उन्हें न्यायिक जाँच और कई अन्य यातनाओं का सामना करना पड़ा।  गैलीलियो वैज्ञानिक सोच के एक महान प्रतिपादक थे।

    सही मायनों में गैलीलियो को आधुनिक विज्ञान का पिता कहा जा सकता है। गैलीलियो टेलिस्कोप (telescope) के अपने आविष्कार के कारण दुनिया में प्रसिद्द हुए। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बृहस्पति (Jupiter) ग्रह के 4 चंद्रमाओं का पता लगाया। साथ ही सबसे पहले सूर्य के धब्बों और शुक्र ग्रह की कलाओं (Phases of Venus) को देखा। अपने परीक्षणों के दौराण उन्होंने यह निष्कर्ष निकला की सभी ग्रह, सूर्य की परिक्रमा करते हैं ।

    गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) का पारिवारिक जीवन

    गैलीलियो ने रोमन कैथोलिक होने के बावजूद, मरीना गाम्बा के साथ विवाह के बिना तीन बच्चों को जन्म दिया। उनकी दो बेटियाँ थीं, वर्जीनिया (जन्म 1600) और लिविया (जन्म 1601), और एक बेटा, विन्सेन्ज़ो (जन्म 1606)।

    गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei),कोपर्निकनवाद और चर्च के साथ विवाद

    गैलीलियो का बढ़ता हुआ स्पष्ट कोपर्निकनवाद उसके लिए परेशानी का कारण बनने लगा। 1613 में उन्होंने पीसा में अपने छात्र बेनेडेटो कैस्टेली (1577-1644) को बाइबिल के कुछ अंशों के साथ कोपर्निकन सिद्धांत को बराबर करने की समस्या के बारे में एक पत्र लिखा। इस पत्र की गलत प्रतियां गैलीलियो के दुश्मनों द्वारा रोम में जांच के लिए भेजी गईं, और उन्हें पत्र को पुनः प्राप्त करना पड़ा और एक सटीक प्रति भेजनी पड़ी।

    क्रिस्टियानो बंटी (Cristiano Banti) की 1857 की पेंटिंग जिसमे गैलीलियो रोमन इनक्विजिशन ((Inquisition) का सामना कर रहे है

    गैलीलियो को 1633 में रोम में बुलाया गया था। इनक्विज़िशन के सामने अपनी पहली उपस्थिति के दौरान, उनका सामना 1616 के उस आदेश से हुआ जिसमें लिखा था कि उन्हें कोपर्निकन सिद्धांत पर चर्चा करने से मना किया गया था। अपने बचाव में गैलीलियो ने कार्डिनल बेलार्मिन, जिनकी तब तक मृत्यु हो चुकी थी, का एक पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्हें केवल सिद्धांत को न रखने या उसका बचाव न करने की चेतावनी दी गई थी। यह मामला कुछ हद तक गतिरोध में था, और, जिसे केवल एक दलील कहा जा सकता है,

    गैलीलियो ने कबूल किया कि उसने अपने मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। इस पर उन पर विधर्म का सख्त संदेह  (suspect of heresy) जताया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई | इस बात का कोई सबूत नहीं है कि गैलीलियो कभी भी कालकोठरी में नहीं था या उसे प्रताड़ित नहीं किया गया था; इंक्विज़िशन प्रक्रिया (Inquisition process) के दौरान वह ज्यादातर वेटिकन में टस्कन राजदूत के घर पर रहे और थोड़े समय के लिए इनक्विज़िशन भवन में एक आरामदायक अपार्टमेंट में रहे ।

    अपने त्याग के बावजूद, गैलीलियो ने अपने वैज्ञानिक अनुसंधान पर काम करना जारी रखा। उन्होंने कई महत्वपूर्ण रचनाएँ प्रकाशित कीं, जिनमें डायलॉग कंसर्निंग द टू चीफ वर्ल्ड सिस्टम्स (Dialogue Concerning the Two Chief World Systems) (1632) शामिल है, जिसमें हेलियोसेंट्रिक मॉडल (heliocentric model) के लिए तर्क दिया गया था।

    गैलीलियो की कुछ सबसे प्रसिद्ध खोजें (Some famous discoveries of Galileo Galilei)

    चंद्रमा पर पहाड़ – The mountains on the Moon
    बृहस्पति के चंद्रमा – The moons of Jupiter
    शुक्र के चरण – The phases of Venus
    शनि के छल्ले – The rings of Saturn
    शरीर गिरने का नियम – The law of falling bodies
    जड़ता का सिद्धांत – The principle of inertia
    परवलयिक प्रक्षेपवक्र – The parabolic trajectory

    गैलीलियो गैलिली की मृत्यु ( (Death of Galileo Galilei)

    गैलीलियो 70 वर्ष के थे। फिर भी लगातार काम करते रहे | सिएना में अपना अप्रकाशित अध्ययन लिखा, जो 1609 में दूरबीन में उनकी रुचि के कारण बाधित हो गया था और तब से रुक-रुक कर जारी रहा। यह पुस्तक इटली से प्रेरित होकर लीडेन, नीदरलैंड्स में 1638 में डिस्कोरसी ई डिमोस्ट्राज़ियोनी माटेमेटिके इंटोर्नो ए ड्यू नुओवे साइन्ज़ एटेनेंटी अल्ला मेकेनिका (डायलॉग्स कंसर्निंग टू न्यू साइंसेज) शीर्षक के तहत प्रकाशित हुई थी।

    यहां गैलीलियो ने पहली बार किरणों के झुकने और टूटने का पता लगाया और गति की अपनी गणितीय और प्रयोगात्मक जांच को संक्षेप में प्रस्तुत किया, जिसमें दो गतियों, निरंतर गति और एकसमान त्वरण के मिश्रण के परिणामस्वरूप गिरने वाले पिंडों के नियम और प्रक्षेप्य के परवलयिक पथ शामिल थे।  तब तक गैलीलियो अंधे हो गए थे, और उन्होंने अपना समय एक युवा छात्र विन्सेन्ज़ो विवियानी के साथ काम करने में बिताया |

    गैलीलियो के हस्ताक्षर

    8 जनवरी 1642 को बुखार और दिल की धड़कन बढ़ने के कारण 77 वर्ष की आयु में गैलीलियो की मृत्यु हो गई | टस्कनी के ग्रैंड ड्यूक, फर्डिनेंडो द्वितीय, उन्हें सांता क्रोस के बेसिलिका के मुख्य भाग में, उनके पिता और अन्य पूर्वजों की कब्रों के बगल में दफनाना चाहते थे, और उनके सम्मान में एक संगमरमर का मकबरा बनवाना चाहते थे।

    हालाँकि, पोप अर्बन VIII और उनके भतीजे, कार्डिनल फ्रांसेस्को बारबेरिनी के विरोध के कारण बाद, फर्डिनेंडो द्वितीय के इस निर्णय को रद्द कर दिया गया, क्योंकि गैलीलियो को कैथोलिक चर्च द्वारा “विधर्म के प्रबल संदेह (vehement suspicion of heresy)” के लिए निंदा की गई थी। इस कारण उन्हें बेसिलिका के दक्षिणी ट्रॅनसेप्ट में एक छोटे से कमरे में दफनाया गया था। 1737 में उनके सम्मान में एक स्मारक बनाए जाने के बाद उन्हें बेसिलिका के मुख्य भाग में फिर से दफनाया गया था इस दौरान, उनके अवशेषों से तीन उंगलियां और एक दांत हटा दिया गया था। ये उंगलियां फिलहाल इटली के फ्लोरेंस में म्यूजियो गैलीलियो में प्रदर्शनी में हैं |

    गैलीलियो के दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली

    विज्ञान में गैलीलियो का योगदान बहुत बड़ा था। उन्होंने खगोल विज्ञान में क्रांति लाने में मदद की और भौतिकी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैज्ञानिक पद्धति पर उनके काम ने आधुनिक विज्ञान की नींव रखने में मदद की। गैलीलियो एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक और साहसी विचारक थे और उनका काम आज भी वैज्ञानिकों को प्रेरित करता है।

  • अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) क्या है ? उसके प्रकार, संरचना और कार्य (सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में )

    अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) क्या है ? उसके प्रकार, संरचना और कार्य (सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में )

    इस आर्टिकल में हम जानेगें की अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum)या अंतर द्रव्य जालिका किसे कहते है ? अन्तःप्रद्रव्यी जालिका कितने प्रकार की होती है ? अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) की सरंचना कैसी होती है ?, और अन्तःप्रद्रव्यी जालिका के कार्य क्या होते है ? और अन्तःप्रद्रव्यी जालिका के रूपांतर क्या होते है ? आदि

    अन्तःप्रद्रव्यी जालिका ( एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम) या अंतर द्रव्य जालिका क्या है ?

    अन्तःप्रद्रव्यी जालिका झिल्ली युक्त नलिकाओं का एक बहुत बड़ा तन्त्र होता है। यह दोहरी झिल्ली से घिरी होती है। यह जन्तु एवं पादप कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में अत्यंत सूक्ष्म, शाखित, झिल्लीदार, अनियमित नलिकाओं के घने जाल के रूप में पाई जाती है ।  यह लाइपोप्रोटीन की बनी होती है और कोशिकाओं में समानान्तर नलिकाओं के रूप में फैली रहती है। कोशिकाओं में इनका विस्तार कभी-कभी केन्द्रक की बाह्य झिल्ली से प्लाज्मा झिल्ली तक होता है।

    Endoplasm का अर्थ है जीवद्रव्य में और रेटिकुलम (reticulum) का अर्थ होता है एक प्रकार का जाल या जालिका | एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम की इस झिल्ली को पहली बार 1945 में कीथ आर. पोर्टर, अल्बर्ट क्लाउड और अर्नेस्ट एफ. फुलम द्वारा देखा गया था। बाद में, रेटिकुलम शब्द, जिसका अर्थ है “जाल या नेटवर्क”, पोर्टर द्वारा 1953 में इस झिल्ली युक्त नलिकाओं का वर्णन करने के लिए लागू किया गया था।

    एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम को झिल्ली युक्त नलिकाओं का पूरा एक नेटवर्क होने के कारण झिल्लियों का तंत्र (system of membrane) भी कहा जाता है।

    यह परिपक्व RBC को छोड़कर सभी यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है। मांसपेशियों में एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम को सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम कहा जाता है। जिसमें Ca की अधिकता होती है।

    अन्तः प्रद्रव्यी जालिका की संरचना (Structure of Endoplasmic reticulum)

    एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम की सामान्य संरचना सिस्टर्न नामक झिल्लियों का एक बना एक जाल या नेटवर्क होता है।

    ये थैली जैसी संरचनाएं साइटोस्केलेटन (cytoskeleton) द्वारा एक साथ रखी जाती हैं। फॉस्फोलिपिड झिल्ली (phospholipid membrane) सिस्टर्नल स्पेस (या लुमेन) को घेर लेती है, जो पेरिन्यूक्लियर स्पेस (perinuclear space) के साथ निरंतर होती है लेकिन साइटोसोल से अलग होती है।

    एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम तीन प्रकार की सरंचनाओं का एक जाल होता है जो निम्न है :

    सिस्टर्नी (Cisternae)

    ये लंबी, चपटी, अशाखित झिल्ली से बनी संरचना है। ये सिस्टर्नी समानांतर व्यवस्थित होकर  लैमिली (lamellae) का निर्माण करती हैं। ये खुरदरी अन्त: प्रद्रव्यी जालिका (Rough endoplasmic reticulum or RER) में अच्छी तरह से विकसित होती है।

    पुटिका (Vesicle)

    ये सिस्टर्नी से अलग, गोल और अंडाकार थैलीनुमा संरचना हैं, जो चिकनी अन्तः प्रदव्यीजालिका (Smooth endoplasmic reticulum – SER) में प्रचुर मात्रा में पायी जाती हैं।

    नलिकाएँ (Tubule)

    ये पुटिका तथा सिस्टर्नी से अलग-थलग और शाखित संरचना हैं जो चिकनी अन्तः प्रदव्यीजालिका में अच्छी तरह से विकसित है।

    अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के समान होती है, लेकिन इसके घटक भागों को अलग किया जा सकता है। गॉल्जीकाय (Golai Body) की तरह जीवद्रव्य में इसका कोई निश्चित स्थान नहीं है

    अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के प्रकार (Types of Endoplasmic reticulum)

    अन्तः प्रद्रव्यी जालिका दो प्रकार की खुरदरी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका खुरदरी अन्त: प्रद्रव्यी जालिका (Rough endoplasmic reticulum or RER) तथा चिकनी अन्तः प्रदव्यीजालिका (Smooth endoplasmic reticulumSER) होती है।

    खुरदरी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum)

    खुरदरी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (rough ER) का खुरदरापन उस पर स्थित राइबोसोम के कारण होता है। राइवोसोम पर प्रोटीन-संश्लेषण होता है। RER में राइबोसोम की बड़ी उपइकाई राइबोफ़ोरिन नामक ट्रांसमेम्ब्रेग्लाइकोप्रोटीन द्वारा जुड़ी होती है।

    अन्त:प्रद्रव्यी जालिका का प्रमुख कार्य उन सभी वसाओं व प्रोटीनों का संश्लेषण करना है, जो विभिन्न कोशिका झिल्ली अथवा केन्द्रक झिल्ली का निर्माण करते हैं।

    खुरदरी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के कार्य (Functions of Rough Endoplasmic Reticulum-RER)

    इसके द्वारा लाइसोसोम के एंजाइमों का निर्माण किया जाता है। विभिन्न प्रकार की प्रोटीन का संश्लेषण (Synthesis of Protein) करती है | ग्लाइकोसिलेशन (Glycosylation) की प्रक्रिया RER में ही होती है।
    RER में प्रोटियोसोम (proteasome) की सहायता से अनफोल्डेड प्रोटीन (Unfolded protein) को नष्ट किया जाता है।

    चिकनी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका (Smooth Endoplasmic Reticulum)

    चिकनी अन्त:प्रद्रव्यी जालिका (smooth ER) पर राइबोसोम नहीं पाए जाते हैं। SER कोशिकाझिल्ली के लिपिड का संश्लेषण तथा स्टेरॉयड हार्मोन संश्लेषण का प्रमुख स्थल है।

    चिकनी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के कार्य (Functions of Smooth Endoplasmic Reticulum)

    SER पर एस्कॉर्बिक एसिड (Vitamin C) का संश्लेषित किया जाता है। इसी पर विटामिन ए से रेटिना के वर्णकों का निर्माण होता है।
    ये लिपिड संश्लेषण और स्टेरॉयड हार्मोन में भाग लेता है
    ऑक्सीजन स्थानांतरण एंजाइम (ऑक्सीजिनेज) की सहायता से SER आविषालु पदार्थ की विषालुता को कम (Detoxification of drug) किया जाता है।
    पौधों में SER स्फिरोसोमे (Sphaerosomes) का निर्माण करती है।

    अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के रूपांतरण (Modification of Endoplasmic Reticulum)

    सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Sarcoplasmic reticulum)

    ये SER के रूपांतरण से बनते है। इनमें Ca2+ संचित रहता है। कंकाली पेशियों और हृद पेशियों में सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम पाए जाते है।

    ग्लाइकोसोम (Glycosome)

    यकृत कोशिकाओं में SER ग्लाइकोजन का संग्रहण करता है जिसे ग्लाइकोसोम कहते है।

    माइलॉयड काय (Myeloid Bodies)

    ये रेटिना की वर्णकित उपकला कोशिकाओं (pigmented epithelial cells) में मौजूद विशेष प्रकार की SER हैं। ये प्रकाश संवेदी (light sensitive) होते है |

    एर्गैस्टोप्लाज्म (Ergastoplasm)

    ये ER की लैमिला (lamellae) में पाए जाने वाले राइबोसोम का समूह हैं।

    माइक्रोसोम (Microsome)

    ये राइबोसोम से संबंधित ER का हिस्सा हैं। जो जीवित कोशिकाओं में नहीं पाया जाता। इनका पात्रे प्रोटीन संश्लेषण (in vitro protein synthesis) के अध्ययन में उपयोग किया जाता है।

    टी-नलिकाएं (T-Tubules)

    ये कंकाली पेशियों और हृद पेशियों की कोशिकाओं में अनुप्रस्थ व्यवस्थित होते हैं। ये पेशियों की कोशिकाओं में संकुचन को उत्तेजित और संचालित करते हैं।

    अन्तःप्रद्रव्यी जालिका आर्टिकल में शामिल महत्वपूर्ण प्रश्न :

    • अंतर द्रव्य जालिका की खोज किसने की थी?
    • एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम की खोज किसने की
    • एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम in Hindi क्या है ?
    • अन्तः प्रदव्ययी जलिका परिभाषा
    • अंतर द्रव्य जालिका का चित्र
    • अंतर द्रव्य जालिका को इंग्लिश में क्या कहते हैं
    • अंतर द्रव्य जालिका कितने प्रकार की होती हैं
    • अन्तः प्रदव्ययी जलिका के कार्य
    • अंतर द्रव्य जालिका के प्रमुख कार्य क्या है?
    • Smooth endoplasmic reticulum in Hindi
    • चिकनी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका क्या है ?
    • खुरदरी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के कार्य (Functions of Rough Endoplasmic Reticulum-RER) क्या है ?
  • हम, विज्ञान और हमारा दिमाग

    हम, विज्ञान और हमारा दिमाग

    मानव जीवन को जिस विकसित रूप में आज हम देखते है, आज जो भी मनुष्य ने अपने विकास को लेकर तरक्की की है, उसमे विज्ञान का एक बड़ा योगदान रहा है l यह हमारी जिज्ञासाओं का नतीजा है कि हम लगातार खुद से सवाल करते रहे, खुद को एवं प्रकृति को समझने का एक सतत प्रयास करते रहे है l विज्ञान ने जीवन को एक नया आयाम दिया है, सामान्य मनुष्य जिंदगी को एक बेहतर और विकसित जीवनशैली में तब्दील किया है l हालाकि मनुष्य विकास में धर्म, संस्कृति, और परिवेश की भी अहम भूमिका रही है लेकिन फिर भी विकास शब्द का जब हम प्रयोग करते है तो विज्ञान और टेक्नोलॉजी हमारे जेहन में सबसे पहले आता है l

    सवाल और विज्ञान

    कुछ सवाल तो ऐसे है जो हम लोग जीवन के किसी ना किसी मोड़ पर खुद से कर ही लेते है जैसे कि ब्रहामंड क्या है ? हम ब्रहमांड में कहा अस्तित्व रखते है ? हम मनुष्यों के जीवन का मकसद क्या है ? ऐसा क्यों है की प्रकृति की बनाई हर चीज एकदम परफेक्ट है, सब एक दुसरे से जुड़े हुए क्यों है, क्या इस ब्रह्माण्ड से भी परे कुछ है? हमारी मृत्यु के बाद क्या होता है? आने वाले 100–200 सालों बाद का जीवन कैसा होगा? हम technology के चरम पर कब पहुचेंगे ? क्या हम भविष्य देख सकते है ? क्या हम ब्रहामंड के रहस्यों को जानने में सक्षम हो पायेगे आदि l यह लिस्ट लम्बी भी हो सकती है और छोटी भी, यह सब सोचने वाले पर छोड़ देते है लेकिन इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारा मस्तिष्क जाने अनजाने ऐसे अनसुलझे सवाल करने में लगा रहता है l

    एक और बात है  कि किसी भी सवाल का जवाब वक्त के पल और उस क्षण के साथ मस्तिष्क में छिपा होता है l हमारा दिमाग उल जलूल सवालों में उलझने पर ज्यादा तेज गति से उसके जवाब को जानने का प्रयास करने लगता है ऐसा इसलिए है क्योकि प्रकृति ने बनाया ही ऐसा है l

    लेकिन क्या आप जानते है की मनुष्य की यह तरक्की और विकास और इससे जुड़े सारे सवाल – जवाब का origin क्या है या कह सकते है की कहाँ से शुरू हुए l इनका जवाब है की यह सारे सवाल – जवाब और आविष्कार का origin हमारा मस्तिष्क है, हमारा दिमाग है l

    हमारे विचार और विज्ञान

    आज हम Tesla की कारों से लेकर से लेकर Nasa के मार्स रोवर तक जिनके भी बारे में बात करते है उन्हें देखते है सब ने कही कही ना कही सबसे पहले दिमाग में तस्वीर बनायीं थी l ब्रहामंड का नियम शुरू से ही यही रहा है की मनुष्य जनित हर वो चीज जो हम आज देखते है वो सबसे पहले हमारे दिमाग में आयी थी l हमारे दिमाग में उसकी तस्वीर बनी थी l उसी आधार पर हमने प्रयास कर के उसको अस्तित्व में लेकर आते है l

    आसान भाषा में अगर बात करे तो जिस घड़ी को आपने पहन रखा है, जिस mobile से आप बात करते है वो सब सबसे पहले हमारे दिमाग में एक विचार के जरिये आया l आपने सोचा और फिर आपने उसे implement किया तो वो चीज अस्तित्व में आयी यानी भौतिक दुनिया में आयी l उदाहरण लेते है की आज आपने अपने लिय एक Apple का mobile ख़रीदा है और उसको आपने हाथ में पकड़ा हुआ है l अब सोचिये की सबसे पहले एक विचार आपके दिमाग में आया की मुझे एक apple mobile लेना है l उस विचार पर आपने कार्य करना शुरू किया अर्थात आप उस विचार को अपने दिमाग से निकाल कर वास्तिवक दुनिया में implement करते हो और तत्काल आप mobile खरीद लेते हो l

    कुछ आविष्कार जैसे Google Search Engine, डीएनए, सिलाई मशीन,  आइन्स्टीन का सापेक्षता का नियम (Einstein’s Theory of Relativity), periodic table आदि के महान विचार इनके वैज्ञानिको को सपने में आये थे l  दुनिया के कुछ सबसे प्रसिद्ध कलाकारों, वैज्ञानिकों और अन्वेषकों ने अपने Eureka moments बीच नींद में आये l

    मशहूर रसायन वैज्ञानिक दिमित्री मेंडेलीव (Dimitry Mendeleev) ने रासायनिक तत्वों को एक साथ जोड़ने वाला पैटर्न को बनाने की कोशिश में 10 साल तक लगे रहे । एक रात उसे periodic table का सपना आता है और उसे सपने में वो आईडिया मिलता है जिसकी खोज में वो लगातार लगा हुआ था l अपनी डायरी में दिमित्री लिखते है की मैंने सपने में एक table देखी l उस table पर सारे तत्व की जहा आवश्यकता थी वहा पर गिर रहे थे l आगे उन्होंने बताया की वो तुरंत अपने बिस्तर से उठे और सारे तत्वों का क्रम सपने में जैसे देखा वैसे ही लिख लिया l इस तरह उन्होंने periodic table तैयार की l

    हमारा दिमाग और हमारे सवाल

    मतलब साफ़ है कि कही ना कही सवालों के जवाब हमारे दिमाग के पास होते है बात सिर्फ यह है कि सवाल हमे हमारे दिमाग से बार बार करना होगा l विज्ञान के हिसाब से जब हमसे यानी हमारे दिमाग से कोई सवाल पूछा जाता है तो हमारा पूरा दिमाग उत्तेजित (stimulated) हो जाता है और सेरोटोनिन (Serotonin) रिलीज होना शुरू हो जाता है ।

    सेरोटोनिन के रिलीज़ होने से हमारा दिमाग ज्यादा relaxed और focused हो जाता है इससे यह किसी भी सवाल का उत्तर खोजने या किसी भी समस्या का समाधान ढूढनें में ज्यादा सक्षम हो जाता है । क्योकिं हमारा दिमाग एक निर्धारित शर्तो के अनुसार काम करता है इसलिए दिमाग में Dopamine की मात्रा बढ़ने लगती है l डोपामाइन एक प्रकार का न्यूरोट्रांसमीटर है जिसे हमारा शरीर विकसित करता है और हमारा nervous system इसके जरिये nerve cells को मेसेज भेजता है । डोपामाइन एक यूनिक human ability है जो हमे सोचने, समझने और प्लानिंग करने की क्षमता प्रदान करता है l

    इस तरह प्रकृति  के अलावा मनुष्य के द्वारा बनाया हुआ सब कुछ हमारे मस्तिष्क की देन है l प्रसिद्ध लेखिका रोंडा बर्न (Rhonda Byrne) ने अपनी किताब ‘The Secret’ में बताया है की हमारे मस्तिष्क की ताकत से हम हमारे जीवन में कुछ भी प्राप्त कर सकते है l उसने बताया कि हमारे विचार ही हमारी जिंदगी बनाते है और हमारे विचार वास्तविक चीजों में बदलते है (Your Thoughts become things). इसिलिय हमारे विचारों पर हमारा नियंत्रण जरुरी है और साथ में हमे हमारे दिमाग की ताकत को विज्ञान के हिसाब से समझ कर उसका इस्तेमाल करना है l

    कुल मिलाकर हम इस निष्कर्ष पर पहुचते है की हमारा मस्तिष्क हमे सही दिशा दिखा सकता है, हमारे अनगिनत सवालों के जवाब दे सकता है, हमे वो बना सकता है जो हम वास्तव में बनना चाहते है l इसिलिय अपने विचारों पर ध्यान दे l उन्हें समझे, अपने दिमाग को पॉजिटिव थॉट्स से भर दे l उसे यकीन दिला दे की  जो आप चाहते है उसे हासिल करना ही है l

    याद रखिये आप दिमाग के लिय सब कुछ आसान है क्योकि  जो आपके सामने है वो सब विचार है तो फिर देर किस बात की आज ही इस पर विचार कीजिये l

  • क्या आप जानते है  (सीरीज 02) – मानव शरीर के  अद्भुत तथ्य

    क्या आप जानते है (सीरीज 02) – मानव शरीर के अद्भुत तथ्य

    Amazing and Interesting Science Facts about Human Body

    • एक औसत मानव शरीर हर दिन लगभग 11,000 लीटर हवा सांस के रूप में लेता और छोड़ता है ।
    • आपकी नाक और कान आपके पूरे जीवन में बढ़ते रहते हैं।
    • लगभग 80 प्रतिशत जो हमें स्वाद लगता है वो वास्तव में गंध होती है। Flavour (जायका) असल मे स्वाद और गंध का मिश्रण होता है l
    • आपकी सूंघने की शक्ति आपके स्वाद लेने के sense से लगभग 10,000 गुना अधिक शक्तिशाली होती है।
    • हमारा दिमाग शरीर द्वारा ली गई कुल ऑक्सीजन का लगभग एक चौथाई भाग इस्तेमाल करता है ।
    • एक वयस्क इंसान के दिमाग का वजन लगभग 1.5 किलोग्राम होता है। यद्यपि यह शरीर के वजन का केवल 2 प्रतिशत बनाता है, फिर भी दिमाग पूरे शरीर की ऊर्जा का लगभग 20 प्रतिशत उपयोग करता है।
    • संगीत सुनते समय, हमारे दिल की धड़कन ताल (rythm) के साथ तालमेल बिठा लेती है ।
    • त्वचा मानव शरीर का सबसे बड़ा अंग है l
    • एक वर्ष में, हमारा हृदय (heart) एक सामान्य स्विमिंग पूल को भरने जितना रक्त पंप कर देता है ।
    • आपके घर में बड़ी मात्रा में धूल वास्तव में मृत त्वचा है l हमारे शरीर से लगभग हर घंटे त्वचा के लगभग 600,000 कण निकल जाते है ।