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  • SSC परीक्षा के लिए साइंस GK प्रश्न और उत्तर – सीरीज 3

    SSC परीक्षा के लिए साइंस GK प्रश्न और उत्तर – सीरीज 3

    विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (Important questions and their answer in Hindi), जो की प्रतियोगी परीक्षाओं के हिसाब से उपयोगी है | Science GK के इन प्रश्नों की तीसरी श्रृखला इस प्रकार है :

    विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (Important Science Questions and Answers in Hindi)

    जीव विज्ञान

    • हड्डियों एवं दाँतों में मुख्य रूप से कौन-सा रसायन होता है? – कैल्शियम
    • ‘हीमोफीलिया’ एक आनुवंशिक रोग है, जिसका क्या परिणाम है? – रक्त का नहीं जमना
    • मनुष्य का सामान्य रक्तचाप कितना होता है? –120/80
    • मलेरिया किसके द्वारा होता है? – मादा ऐनोफिलीज द्वारा
    • डॉक्टरों के द्वारा प्रयुक्त शब्द ‘CAT’ स्कैन का क्या अर्थ है? – कम्प्यूटराइज्ड एक्सियल टोमोग्राफी
    • पसीना निकलने से शरीर का सबसे उपयोग कार्य क्या होता है? – शरीर का ताप नियन्त्रित होना
    • ‘टिटेनस रोग’ किस जीवाणु से होता है? – क्लोस्ट्रीडियम टिटैनी
    • ‘एन्थ्रोपोलॉजी’ क्या है? – मानव विज्ञान का अध्ययन
    • मानव शरीर की किस ग्रन्थि को ‘मास्टर ग्रन्थि’ कहा जाता है? – पीयूषिका
    • आप मानव शरीर में उरोस्थि को कहाँ पाएँगे? – जाँघ में
    • मानव शरीर के किस भाग में ‘पायरिया’ रोगलगता है? – दाँत और मसूड़ा
    • लाल रक्त कणिकाएँ कहाँ बनती हैं? – अस्थि मज्जा में
    • शरीर के थर्मोस्टेट (ताप स्थिरांक) का काम करने वाली ग्रन्थि कौन-सी है? – हाइपोथैलेमस
    • पक्षियों के अध्ययन के विज्ञान को क्या कहते हैं? – आर्निथोलॉजी
    • किस रक्त समूह के व्यक्तियों को सार्वभौमिक दाता (यूनिवर्सल डोनर) कहा जाता है? – O ग्रुप
    • अवशोषित भोज्य पदार्थ को प्रोटोप्लाज्म में बदलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है? – एसीमिलेशन
    • ‘ट्रैकोमा’ रोग किस अंग से सम्बन्धित रोग है? – आँख
    • इन्सुलिन, एण्ड्रनलीन, थॉयरीरिक्सल और हीमोग्लोबिन में से कौन-सा हॉर्मोन नहीं है? – हीमोग्लोबिन
    • किसी मनुष्य के द्वारा श्वसन में एक बार में खींची गयी हवा कितनी होती है – 500 मिमी
    • किस विटामिन की कमी के कारण मसूढ़ों से रक्त आता है और दाँत हिलने लगते हैं? – विटामिन C
    • वयस्क मानव ढाँचा कितनी हड्डियों पर आधारित होता है? – 206
    • खारे नमकीन जल में कौन-सा पेड़ उग सकता है? – मैंग्रोव
    • मनुष्य का मेरुदण्ड किससे संरक्षित है? – कशेरुक
    • यदि कोई व्यक्ति दोषपूर्ण द्विकपर्दी वॉल्व से पीड़ित है, तो उसके शरीर का कौन-सा अंग रोगग्रस्त है? – फुफ्फुस
    • मादा पशुओं में बच्चे पैदा होते समय कौन- सा हॉर्मोन अधिक सक्रिय होता है? — ऑक्सीटोसिन
    • किसके दूध में वसा की सर्वाधिक मात्रा पायी जाती है? — रेण्डियर
    • ऊन के लिए विख्यात पशु ‘पश्मीना’ क्या है? — बकरी
    • किस स्तनधारी के दूध में जल की मात्रा सबसे कम होती है? — मादा हाथी
    • मनुष्य के शरीर में ‘एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका’ कहाँ पाया जाता है? — आँत में
    • मच्छर में मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र किसने खोजा था? — रोनाल्ड रॉस ने
    • निम्न में से किसमें रक्त नहीं होता है, किंतु वह श्वसन करता है? — हाइड्रा
    • मानव शरीर में पसलियों के कितने जोड़े होते हैं? — 12
    • स्तनधारियों में लाल रुधिर कणिकाओं का निर्माण कहाँ होता है? — अस्थिमज्जा में
    • जीव विज्ञान’ (Biology) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था? — लैमार्क एवं ट्रैविरेनस ने
    • ‘वनस्पति विज्ञान’ के जनक कौन हैं? — थियोफ्रेस्ट
    • पुष्पों के अध्ययन को क्या कहा जाता है? — एन्थोलॉजी
    • ‘भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण’ का मुख्यालय कहाँ स्थित है? — कोलकाता
    • निम्न में से किसे ‘वर्गिकी का पितामह’ कहा जाता है? — कार्ल वार्न लीनियस
    • वर्गीकरण की आधारीय इकाई क्या है? — स्पेशीज
    • जीवाणु की खोज सर्वप्रथम किसने की थी? — ल्यूवेन हॉक
    • वास्तविक केन्द्रक किसमें अनुपस्थित होता है? — जीवाणुओं में
    • भोजन की विषाक्तता उत्पन्न होती है? — क्लोस्ट्रीडियम बौटूलीनम द्वारा
    • निम्नलिखित में से कौन-सी बीमारी जीवाणुओं के द्वारा होती है? — कुष्ठ
    • वृक्षों की छालों पर उगने वाले कवकों को क्या कहते हैं? — कार्टीकोल्स
    • पौधे क्या उत्सर्जित करते हैं? – रात में कार्बनडाइऑक्साइड और दिन में ऑक्सीजन

    भौतिकी और रसायन विज्ञान

    • रसोई गैस का मिश्रण क्या है? – ब्यूटेन एवं प्रोपेन का
    • ऊष्मा का सबसे कम ऊष्मारोधी धातु कौन सी है? – एल्युमीनियम
    • वाट को किसमें प्रकट कर सकते हैं?– जूल प्रति सेकण्ड में
    • एल्कोहॉल उद्योग में किस कवक का प्रयोग होता है? – यीस्ट
    • कपड़े से स्याही और जंग के धब्बे छुड़ाने के लिए किसका प्रयोग होता है? – ईथर
    • ट्रांसफॉर्मर का प्रयोग किसके नियन्त्रित करने में होता है? – धारा
    • ग्रेनाइट, ग्रेफाइल और बैसाल्ट में से कौन-सी रूपान्तरि चट्टान है? – ग्रेनाइट
    • रेखीय संवेग संरक्षण किसके बराबर है? – न्यूटन के द्वितीय नियम
    • सूक्ष्म जीवाणुओं से प्राप्त वे तत्व कौन-से हैं, जिनका उपयोग सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है? – प्रतिजैविक
    • ऊष्मा गति का प्रथम नियम अवधारणा की पुष्ठि कौन करता है? – ऊर्जा संरक्षण
    • आदर्श गैस की ऊर्जा किस पर आधारित होती है? – तापमान पर
    • पेट्रोलियम की गुणवत्ता किससे प्रदर्शित की जाती है? – ऑक्टेन नम्बर से
    • वाष्प भट्टी में किससे आयरन ऑक्साइड उपचयित होता है? – कार्बन
    • भूमि के अपमार्जन में योगदान देने वाला जीव कौन-सा है? – केंचुआ
    • सूर्य में कौन-सा तत्व सर्वाधिक मात्रा में रहता है? – हाइड्रोजन
    • हीरा (Diamond) क्या है? – शुद्ध कार्बन का क्रिस्टलीय
    • प्रसिद्ध ‘विग बैंग थ्योरी’ किस मुख्य सिद्धान्त पर आधारित है? – ऊष्मा गतिकी के सिद्धान्त
    • प्रेशर कुकर में खाना जल्दी क्यों पकता है? – बढ़ा हुआ प्रेशर, उबलन बिन्दु (क्वथनांक) बढ़ा देता है
    • प्रकाश का वेग सर्वप्रथम किसने नापा? – रोमर
    • मौसम के उतार-चढ़ाव अधिकतम कहाँ होते हैं? – सबट्रॉपिक (उपोष्ण प्रदेश)
    • अल्टीमीटर से क्या नापते हैं? – भूतल से ऊँचाई
    • क्रायोजेनिक इंजन का प्रयोग किसमेंहोता है? – रॉकेट में
    • ‘लॉ ऑफ फ्लोटिंग’ का सिद्धान्त किसने दिया था? – आर्किमिडीज ने
    • इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और पोजिट्रॉन इनमें से सबसे बड़ा कण कौन-सा है? – इलेक्ट्रॉन
    • दूध उबालने की स्फूर पश्चयता कितनी होती है? –100°C
    • कौन-सा तत्व रासायनिक रूप में धातु व अधातु दोनों के समान कार्य करता है? – बेरॉन
    • ऐसबेस्टस क्या है? – रेशायुक्त खनिज है
    • कौन-सी फसल, मृदा में नाइट्रोजन यौगिकीकरण को बढ़ाती है? – बीन्स
    • पके हुए अंगूरों में क्या होता है? – ग्लूकोस
    • निम्नलिखित में से किसे ‘जेली फिश’ के नाम से जाना जाता है? — ऑरीलिया
    • वाशिंग मशीन का कार्य किस सिद्धांत पर आधारित है? — अपकेंद्रण
    • न्यून तापमानों (क्रायोजेनिक्स) का अनुप्रयोग होता है? — अंतरिक्ष यात्रा, चुम्बकीय प्रोत्थापन एवं दूरमिति में
    • द्रव बूँद की संकुचित होकर न्यूनतम क्षेत्र घेरने की प्रवृत्ति का कारण होता है? — पृष्ठ तनाव
    • अल्फा कण के दो धन आवेश होते हैं, इसका द्रव्यमान लगभग बराबर होता है — 310
    • जेट इंजन किस सिद्धांत पर कार्य करता है? — रैखिक संवेग संरक्षण
    • नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में निम्न में से कौन-सी फ़सल सहायक है? — फली (बीन्स)
  • कार्बन क्रेडिट क्या होता है?

    कार्बन क्रेडिट क्या होता है?

    कार्बन क्रेडिट की संकल्पना क्योटो प्रोटोकॉल से उद्भूत हुई, संयुक्त राष्ट्र की पहल पर ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती से निबटने हेतु 1992 में यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेन्शन ऑन क्लाइमेट चेंज अस्तित्व में आया !

    इसने जलवायु परिवर्तन के खतरों से निबटने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए बातचीत शुरू की फतेह जापान के क्योटो शहर में 11 दिसंबर 1997 को हुए UNFCC के तीसरे सम्मेलन में क्योटो प्रोटोकॉल को स्वीकार किया गया

    क्या है कार्बन क्रेडिट

    कार्बन क्रेडिट एक तरह का सर्टिफिकेट है जो कार्बन उत्सर्जन करने का सर्टिफिकेट देता है. ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए इसे तैयार किया गया है. आप जितना कार्बन उत्सर्जन करेंगे, उतना ही ज्यादा आपको ऐसे प्रोजेक्ट में खर्च करने होंगे जो उत्सर्जन को घटाएं.

    समाधान

    इसका समाधान क्या है? क्या सभी उद्योग बंद कर देने चाहिए? ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि दुनिया को चलाना जरूरी है और यह उद्योगों के बिना मुमकिन नहीं है. इसका एक हल यह हो सकता है कि अक्षय ऊर्जा के स्रोतों से उद्योगों को चलाया जाए. इसमें सोलर या विंड एनर्जी का सहारा लिया जा सकता है जिससे कि कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है. हालांकि पूरी दुनिया को अक्षय ऊर्जा स्रोत से अभी चलाना मुश्किल है क्योंकि इसमें कई वर्षों का वक्त लगेगा. ऐसे में अभी क्या किया जा सकता है?

    कार्बन क्रेडिट पर विवाद

    1997 में क्योटो प्रोटोकॉल में दुनिया भर के सभी देशों ने कार्बन उत्सर्जन घटाने पर सहमति जताई थी. उसी के हिसाब से कार्बन क्रेडिट की रूपरेखा तैयार की गई थी. इसके तहत एक सीमा तय की गई कि कंपनियां एक साल में कितना कार्बन उत्सर्जन कर सकती हैं. यूरोपीय संघ के देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन में बड़े स्तर पर कटौती करने का फैसला किया. इसके लिए कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया गया.

    इसी हिसाब से उद्योगों को कार्बन के लक्ष्य दिए गए. इसमें एक दिक्कत ये आई कि दुनिया के कुछ हिस्से में देशों ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती की जबकि कुछ देशों में उत्सर्जन जारी है. इससे उत्सर्जन में कटौती करने वाले देशों की लागत में बढ़ोतरी आई है. इसे देखते हुए कार्बन क्रेडिट पर कई लोग सवाल भी उठाते हैं. एक बात जरूर है कि कार्बन क्रेडिट के नाम पर कई परियोजनाओं में निवेश किया गया जिससे हमारे पर्यावरण को स्वस्छ बनाने में मदद मिली है.

  • शुष्क सेल (Dry Cell) बनाने में क्या प्रयोग किया जाता है ?

    शुष्क सेल (Dry Cell) बनाने में क्या प्रयोग किया जाता है ?

    शुष्क सेल में अमोनियम क्लोराइड तथा जिंक क्लोराइड का प्रयोग विद्युत अपघटन के रूप में किया जाता है |

    ड्राई-सेल बैटरी एक या एक से अधिक इलेक्ट्रोकेमिकल कोशिकाओं से बना एक उपकरण है जो संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।

    इसमें एक इलेक्ट्रोलाइट होता है जो पेस्ट या अन्य नम माध्यम में निहित होता है।एक मानक शुष्क सेल बैटरी में एक केंद्रीय छड़ के भीतर एक जस्ता एनोड और एक कार्बन कैथोड शामिल होता है।

    कैडमियम, कार्बन, लेड, निकल और जिंक का उपयोग विभिन्न शुष्क सेल डिजाइन और क्षमताओं के निर्माण के लिए किया जाता है, कुछ मॉडल दूसरों की तुलना में कुछ उपकरणों के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

    वेट-सेल बैटरियों के विपरीत, सूखी बैटरी फैलती नहीं है, जो उन्हें पोर्टेबल उपकरणों के लिए आदर्श बनाती है।

  • पाचन क्या है ? सरल भाषा में

    पाचन क्या है ? सरल भाषा में

    जटिल अणुओं का उनके सरल अणुओं में परिवर्तन पाचन कहलाता है | प्रोटीनों (जटिल अणुओं) का एमीनो अम्लों (सरल अणुओं) में विघटन – इसी प्रकार ग्लुकोज़ CO2 और H2O में विघटन – श्वसन प्रक्रिया ग्लूकोस का ग्लाइकोजन में रूपांतरण संश्लेषणात्मक प्रक्रिया है !

    पाचन वह क्रिया है जिसमें भोजन को यांत्रि‍कीय और रासायनिक रूप से छोटे छोटे घटकों में विभाजित कर दिया जाता है ताकि उन्हें रक्तधारा में अवशोषित किया जा सके. पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

    स्तनपायी प्राणियों द्वारा भोजन को मुंह में लेकर उसे दांतों से चबाने के दौरान लार ग्रंथियों से निकलने वाले लार में मौजूद रसायनों के साथ रासायनिक प्रक्रिया होने लगती है।

    यह भोजन फिर ग्रासनली से होता हुआ उदर में जाता है, जहां हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सर्वाधिक दूषित करने वाले सूक्ष्माणुओं को मारकर भोजन के कुछ हिस्से का यांत्रि‍क विभाजन (जैसे, प्रोटीन का विकृतिकरण) और कुछ हिस्से का रासायनिक परिवर्तन आरंभ करता है।

    भोजन को पक्वाशय में पहुंचते ही सर्वप्रथम इसमें यकृत से निकलने वाला पित्त रस आकर मिलता है पित्त रस छारीय होता है और यह भोजन को अम्लीय से छारीय बना देता है यहां अग्नाशय से अग्नाशय रस आकर भोजन मिलता है इसमें तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं !

    • ट्रिप्सिन यह प्रोटीन एवं उनको पॉलिपेप्टाइड तथा अमीनो अम्ल में परिवर्तित करता है
    • एमाइलेज – यह मांड को घुलनशील शर्करा में परिवर्तित करता है
    • लाइपेज – यह इमल्सीफाइड वसाओं का ग्रीन तथा फैटी एसिड्स में परिवर्तित करता है
  • नीले हरे शैवालों की कुछ जातियों की कौन सी विशेषता उन्हें जैविक खाद के रूप में वर्धित करने में सहायक है ?

    नीले हरे शैवालों की कुछ जातियों की कौन सी विशेषता उन्हें जैविक खाद के रूप में वर्धित करने में सहायक है ?

    नीले हरे शैवालों में ऐसी क्रियाविधि होती है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को ऐसे नए रूप में परिवर्तित कर देती है जिसे फसल के पौधे आसानी से ग्रहण कर सकते हैं !

    शैवालों के अध्ययन को फ़ाइकोलोजी कहते हैं, शैवाल प्राय पर्णहरित युक्त, संवहन ऊतक रहित, आत्मपोषी होते हैं !

    इनका प्रयोग निम्न रूपों में किया जाता है –

    • भोजन के रूप में – फोरफाइरा, अल्वा, सरगासन, लेमिनेरिया, नास्टोक
    • आयोडिन बनाने में – लेमिनेरिया, फ्यूकस, एकलोनिया आदि
    • खाद के रूप में – नोस्टोक, एनाबीना, केल्प आदि
    • औषधियों के रूप में – क्लोरेला से क्लोरेलिन नामक प्रतिजैविक एवं लेमिनेरिया से टिंचर आयोडिन वनाई जाती है !
    • अनुसंधान कार्यों में – क्लोरेला असीटेबुलेरिया, एलोनिया आदि, ये खेत में सड़कर वायु मंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल देते हैं जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है !
  • कुछ पौधे कीटभक्षी (insectivorous plants) क्यों होते हैं ?

    कुछ पौधे कीटभक्षी (insectivorous plants) क्यों होते हैं ?

    कुछ वनस्पतियां कीट भक्षी होती हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त नाइट्रोजन प्राप्त नहीं होता है और वह पर्याप्त नाइट्रोजन प्राप्त करने के लिए कीट पर निर्भर रहती है !  ये पौधे अपने भोजन को स्वयं संश्लेषित करने की क्षमता रखते हैं और इसलिए इन्हें स्वपोषी (ऑटोट्रोफ्स) कहा जाता है।

    कीट भक्षी पौधे

    1- सेरोसेनिया – इस पौधे में थैली नुमा पत्तियां जमीन पर एक झुंड में सजी रहती हैं। आकर्षक रंग की इन पत्तियों पर कुछ ग्रंथियां रहती हैं जिनमें शहद होता है। कीट पतंगे इसके रंग और शहद के कारण थैली के भीतर चले जाते हैं और कांटों में फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते।

    2- ड्रोसैरा -इसे सनड्यूज़ भी कहते हैं। इसकी गोल-गोल पत्तियों के किनारे लाल रंग की घुण्‍डी वाले आलपिन सरीखे बाल होते हैं जिनसे एक चिपचिपा रस निकलता रहता है। छोटे कीट पतंगों को यही रस चिपका लेता है और फिर घुण्डियां मुड़कर चारों ओर से उसे घेर लेती हैं।

    3- यूट्रीकुलेरिया – इसे ब्लैडरवर्ट भी कहते हैं। इसकी पत्तियां गोल गुब्बारेनुमा होती हैं। जैसे ही कोई कीट-पतंगा इसके नजदीक आता है इस मौजूद रेशे उसे जकड़ लेते हैं। पत्तियों में निकलने वाला एंजाइम कीटो को खत्म करने में मदद करता है।

    4- पिचर प्लांट – इसे नेपिन्थिस के नाम से भी जाना जाता है। इसके मुंह और किनारे की ओर शहद की थैलियां होती हैं। कीट पतंगे सुराही के रंग से आकर्षित होकर शहद के लालच में अपनी जान गंवा बैठते हैं। चिकनी दीवार के कारण ये रेंगकर बाहर भी निकल नहीं पाते। इसे घटपर्णी के नाम से भी जाना जाता है। 

    5- डायोनिया – इसमें कीट पतंगों को पकड़ने वाला फंदा जमीन पर सजी पत्तियां होती हैं। यह भी ड्रोसैरा की तरह ही शिकार करता है। इसके दो पत्ते इसके लिए शिकार का काम करते हैं जिनके ऊपर लगे बाल इतने सक्रिय होते हैं कि चींटी तक की मौजूदगी तक पहचान लेते हैं। जैसे ही शिकार करीब आता है 1 सेकंड में उसे निगल लेता है।

  • अम्लीय वर्षा के किसे कहते हैं ? कारण | प्रभाव | दुष्परिणाम

    अम्लीय वर्षा के किसे कहते हैं ? कारण | प्रभाव | दुष्परिणाम

    नाइट्रोजन के ऑक्साइड और सल्फर के ऑक्साइड वायुमंडल में जलवाष्प से अभिक्रिया कर क्रमशः नाइट्रिक अम्ल और सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं जो वर्षा के जल के साथ धरती पर गिरने लगते हैं जिससे अम्लीय वर्षा कहा जाता है !

    अम्लवर्षा में अम्ल दो प्रकार के वायु प्रदूषणों से आते हैं : SO2 और NO2, ये प्रदूषक प्रारंभिक रूप से कारखानों की चिमनियों, बसों व स्वचालित वाहनों के जलाने से उत्सर्जित होकर वायुमंडल में मिल जाते है।

    प्रभाव

    • अम्ल पदार्थो तथा संरचनाओं को दुर्बल बना देते है,जिससे मार्बल लाइमस्टोन सैंडस्टोन आदि से निर्मित बिल्डिंग का डैमेज होने लगता है।
    • अम्लीय बर्षा के कारण मृदा की अम्लीयता बढ़ जाती है जिसका मानव तथा जलीय जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा कृषि उत्पादकता भी कम हो जाती है।
    • अम्लीयता सॉइल माइक्रोबियल फौना तथा नाइट्रोजन फिक्सेशन को भी प्रभावित करती है मृदा रसायन में परिवर्तन होने से उत्पादकता काम हो जाती है।
    • अम्लीय वर्ष के कारण स्टाइल जिंक ऑईल बेस्ट पेंट्स तथा ऑटोमोबाइल कोटिंग्स आदि संछारण होने लगता है।

    दुष्परिणाम

    • अम्लवर्षा के कारण जलीय प्राणियों की मृत्यृ खेंतो और पेड़-पौधों की वृद्धि में गिरावट, तांबा और सीसा जैसे घातक तत्वों का पानी में मिल जाना, ये सभी दुष्परिणाम देखे जा सकते है। 
    • जर्मनी व पश्चिम यूरोप में जंगलो के नष्ट होने का कारण भी अम्लवर्षा ही है। मनुष्यों पर भी इसका परिणाम गंभीर होता है।
    • अम्लीय वर्षा के कारण आगरा का ताजमहल पीला पड़ रहा है
  • Antioxidants हमें स्वस्थ रहने में कैसे मदद करते हैं ?

    Antioxidants हमें स्वस्थ रहने में कैसे मदद करते हैं ?

    आहार में नियमित रूप से ताजे फल और सब्जियां ग्रहण करना वांछनीय है क्योंकि एक ऑक्सीकरण रोधी अच्छे स्रोत होते हैं | ऑक्सीकरण रोधी तत्व व्यक्ति के स्वस्थ बने रहने और दीर्घायु होने में सहायक सिद्ध होते हैं | क्योंकि यह शरीर में चयापचय के उपोत्पाद के रूप में उत्पन्न मुक्त मूलकों को निष्क्रिय बनाते हैं |

    ऑक्सीकरण एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण किसी पदार्थ से ऑक्सीकारक एजेंट में होता है |

    ऑक्सीकरण अभिक्रिया के परिणाम स्वरूप मुक्त मूलक उत्पन्न हो सकते जिनके द्वारा कोशिकाओं को क्षति पहुंचाने वाली श्रंखला अभिक्रिया आरंभ हो सकती है |

  • अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र बनने का कारण क्या है ?

    अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र बनने का कारण क्या है ?

    अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र का बनाना चिंता का विषय है, इस छिद्र का संभावित कारण विशिष्ट ध्रुवीय वाताग्र तथा समतापमंडलीय बादलों की उपस्थिति तथा क्लोरोफ्लोरो कार्बनों का अंतर्प्रवाह है |

    ध्रुवीय समतापमंडलीय बादलों में उपस्थित नाइट्रिक अम्ल, क्लोरोफ्लोरो कार्बनों से अभिक्रिया कर क्लोरीन का निर्माण करता है जो कि ओजोन परत के प्रकाश रासायनिक विनाश के लिये उत्तरदायी है |

  • CFL  और LED में क्या अंतर है ?

    CFL और LED में क्या अंतर है ?

    पारा वाष्प से विद्युत गुजारकर CFL में पराबैंगनी प्रकाश उत्पन्न किया जाता है जिसे लैम्पके अन्दर फास्फर कोटिंग से अवशोषित कराकर रौशनी उत्पन्न की जाती है !

    LED लैम्पों में पारंपरिक अर्धचालक प्रकाश उत्सर्जक डायोडों, आर्गेनिक LED या पालीमर LED तकनीक का प्रयोग होता है |

    सफल का औसत कार्यकाल 6000 से 15000 घंटे होता है जबकि LED लैम्प सामान्यत: 25-30 साल तक चल सकता है !

    ध्यान रखें !

    • प्रकाश उत्पन्न करने के लिए सफल पारा वाष्प और स्न्दिप्क का प्रयोग करता है, जबकि LED लैम्प अर्धचालक पदार्थों का प्रयोग करता है |
    • LED लैम्प की तुलना में सफल कम ऊर्जा सक्षम है |