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  • Nobel Prize in Chemistry 2022: तीन वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री में मिला नोबेल पुरस्कार

    Nobel Prize in Chemistry 2022: तीन वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री में मिला नोबेल पुरस्कार

    रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (The Royal Swedish Academy of Sciences) ने रसायन विज्ञान के लिए 2022 (Nobel Prize in Chemistry 2022 ) के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की | इस बार नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कैमिस्ट कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi), डेनमार्क की यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के मॉर्टेन मेल्डल (Morten Meldal) और अमेरिका ला जोला स्थित स्क्रिप्स रिसर्च के वैज्ञानिक के. बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless) को दिया गया है |

    ये साझा पुरस्कार उन्हें क्लिक केमिस्ट्री (Click Chemistry) और बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री (Bioorthogonal Chemistry) के विकास के लिए दिया गया है |

    The Royal Swedish Academy of Sciences द्वारा निकाली प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया की रसायन विज्ञान 2022 का नोबेल पुरस्कार कठिन प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए दिया जा रहा है | के. बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless) और मॉर्टेन मेल्डल (Morten Meldal) ने रसायन विज्ञान के एक कार्यात्मक रूप ‘क्लिक केमिस्ट्री (Click Chemistry)’ की नींव रखी है जिसमें आणविक भवन ब्लॉक (molecular building) जल्दी और कुशलता से एक साथ स्नैप करते हैं। कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi) ने क्लिक केमिस्ट्री को एक नए आयाम में ले लिया है और जीवित जीवों (living organisms) में क्लिक केमिस्ट्री का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

    क्लिक केमिस्ट्री यानी ऐसी केमिस्ट्री जिसमें आप बेकार और गड़बड़ पदार्थों को हटाकर किसी नए प्रकार का पदार्थ बना सकते हैं |

    क्लिक केमिस्ट्री (Click Chemistry) तकनीक कैंसर का इलाज कर सकती है | डीएनए में बदलाव कर सकती है | प्लास्टिक कचरे से निजात दिला सकती है | घर को सुरक्षित बना सकती है | शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग से बचा सकती है क्लिक केमिस्ट्री और बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री का इस्तेमाल भविष्य में जीवों और इंसानों के शरीर में ऐसे मॉलीक्यूल्स के निर्माण के लिए होगा, जो उन्हें बीमारी मुक्त जीवन दे सकें या फिर बीमाॉरियों से बचा सकें या बीमारी होने ही न दें | क्लिक केमिस्ट्री असल में समान व्यवहार रखने वाले छोटे-छोटे मॉलीक्यूल्स (molecules) को जोड़ने की प्रक्रिया है इसे बायोकंजुगेशन (Bioconjugation) कहते हैं |

    कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi)

    कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi)

    कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi) एक अमेरिकी कैमिस्ट हैं | उनका जन्म 10 अक्टूबर, 1966 को बॉस्टन में हुआ | इन्हें रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) दोनों में किए गए उनके कामों के लिए जाना जाता है | जीवित प्रणालियों के साथ कैमिकल रिएक्शन के लिए बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री ((Bioorthogonal Chemistry))‘ शब्द उन्हीं ने दिया है |

    55 वर्षीय कैरोलिन ने 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) से स्नातक किया और 1993 में यूसी बर्कले से रसायन विज्ञान में पीएचडी की | सेलुलर इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में यूसीएसएफ में पोस्टडॉक्टरल काम पूरा करने के बाद, वह 1996 में यूसी बर्कले फैकल्टी में शामिल हो गईं | जून 2015 में, वे Sarafan ChEM-H में स्कॉलर के तौर पर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में संकाय में शामिल हुईं |        

    प्रो. कौरोलिन की लैब कैंसर, सूजन और बैक्टीरियल इंफेक्शन से जुड़े सेल सरफेस ग्लाइकोसिलेशन में बदलावों पर केंद्रित है | उन्हें उनकी शोध उपलब्धियों के लिए कई सम्मान और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है | वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज की निर्वाचित सदस्य हैं | उन्हें लेमेल्सन-एमआईटी पुरस्कार, हेनरिक वेलैंड पुरस्कार और मैकआर्थर फाउंडेशन फैलोशिप से सम्मानित किया गया है | कैरोलिन बर्टोज़ी मैसाचुसेट्स के लेक्सिंगटन में पली-बढ़ी हैं | उनके पिता, विलियम बर्टोज़ी, MIT में फिजिक्स के प्रोफेसर थे | कैरोलिन ने तो क्लिक केमिस्ट्री को अलग ही आयाम पर पहुंचा दिया | कैरोलिन ने ऐसे क्लिक केमिस्ट्री की खोज की जो जीवों में काम करता था | उन्होंने इसे बायोऑर्थोगोनल रिएक्शन (Bioorthogonal Reaction) का नाम दिया यानी ऐसी क्लिक केमिस्ट्री जो कोशिकाओं के अंदर हो रही है | इस तकनीक के आते ही इसका ज्यादा उपयोग दवाओं को लेकर किया गया | सबसे पहले कैंसर की दवाओं को लेकर काम शुरू किया गया | अब इन दवाओं के क्लनिकल ट्रायल्स चल रहे हैं |

    मॉर्टेन पीटर मेल्डल (Morten Peter Meldal)

    मॉर्टेन पीटर मेल्डल (Morten Peter Meldal)

    मॉर्टेन पीटर  मेल्डल (Morten Peter Meldal) एक डेनिश कैमिस्ट हैं | उनका जन्म 16 जनवरी 1954 को डेनमार्क में हुआ था | वह डेनमार्क में कोपेनहेगन युनिवर्सिटी में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर हैं | उन्हें CuAAC-क्लिक रिएक्शन करने के लिए जाना जाता है |

    उन्होंने 1981 में डेनमार्क टेक्निकल युनिवर्सिटी से कैमिकल इंजीनियरिंग में एमएससी की है | उन्होंने 1983 में डेनमार्क के इंस्टिट्यूट ऑफ ऑर्गैनिक कैमिस्ट्री से पीएचडी की | 1988 – 2011 तक वह इस युनिवर्सिटी में अलग-अलग पदों पर रहे | वह कार्ल्सबर्ग लैब में लीडर ऑफ सिंथेसिस रहे और 2003 में प्रोफेसर बने | उन्होंने कॉम्बिनेटरियल केमिस्ट्री और पेप्टाइड केमिस्ट्री में नई तकनीकों का विकास किया |

    मॉर्टेन मेल्डल (Morten Meldal) ने ऐसा केमिकल रिएक्शन खोजा जो इस समय कई जगहों पर इस्तेमाल हो रहा है | जैसे दवाओं के विकास में, डीएनए मैपिंग में और नए टिकाऊ पदार्थों को बनाने में |

    उनकी रुचि बायोऑर्गेनिक केमिस्ट्री और पॉलिमर, एंजाइमोलॉजी में विकास और जीपीसीआर में रही है | उन्हें राल्फ एफ. हिर्शमैन (Ralph F. Hirschmann) और विंसेंट डू विग्नॉड अवार्ड्स (Vincent du Vignaud Awards) सहित कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं | वे सोसाइटी ऑफ कॉम्बिनेटोरियल साइंसेज के अध्यक्ष भी हैं |

    कार्ल बैरी शार्पलेस (Karl Barry Sharpless)

    कार्ल बैरी शार्पलेस (Karl Barry Sharpless)

    कार्ल बैरी शार्पलेस (Karl Barry Sharpless) एक अमेरिकी कैमिस्ट हैं | इनका जन्म 28 अप्रैल, 1941 को फ़िलाडेल्फ़िया में हुआ | इन्हें स्टीरियोसेलेक्टिव रिएक्शन और क्लिक केमिस्ट्री पर उनके काम के लिए जाना जाता है |

    के. बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless) को दूसरी बार नोबेल पुरस्कार मिला है | इससे पहले भी शार्पलेस को 2001 में चिरली उत्प्रेरित ऑक्सीकरण रिएक्शन (chirally catalysed oxidation reactions) पर उनके काम और क्लिक केमिस्ट्री शब्द को पैदा करने के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था |

    नोबेल पुरस्कार 2022 (Nobel Prize 2022)

    नोबेल पुरस्कार की घोषणा सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को हुई थी |

    स्वीडिश वैज्ञानिक स्वंते पाबो को चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था (3 अक्टूबर 2022) | उन्हें निएंडरथल डीएनए पर उनकी खोजों के लिए ये पुरस्कार मिला था |

    इसके बाद मंगलवार (4 अक्टूबर) को भौतिकी विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज की घोषणा की गई थी. भौतिकी के लिए इस साल ये पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को दिया गया | एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर को भौतिकी विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया है | ‘क्वांटम मेकैनिक्स’ के क्षेत्र में तीनों वैज्ञानिकों को कार्य करने के लिए नोबेल प्राइज दिया गया है |

    स्त्रोत:

    नोबल पुरस्कार आधिकारिक वेबसाइट : https://www.nobelprize.org/

    प्रेस रिलीज़ – https://www.nobelprize.org/prizes/chemistry/2022/press-release/

    The click reaction that changed chemistry: https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-chemistry2022-figure2.pdf

    Bioorthogonal chemistry illuminates the cell : https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-chemistry2022-figure3.pdf

  • Nobel Prize in Physics 2022: तीन वैज्ञानिकों को भौतिक विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज

    Nobel Prize in Physics 2022: तीन वैज्ञानिकों को भौतिक विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज

    एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर को भौतिक विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज (The Nobel Prize in Physics 2022) से सम्मानित किया गया है |

    नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत 3 अक्टूबर 2022  से हो गई थी | सबसे पहले फिजियोलॉजी/मेडिसिन कैटि‍गरी में पुरस्‍कार का ऐलान किया गया। इस बार का मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार स्वीडन के स्‍वांते पाबो (Svante Pääbo) को ‘‘विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम से संबंधित खोजों के लिए (Discoveries concerning the genomes of extinct hominins and human evolution)’ दिया गया है।  पाबो ने आधुनिक मानव और विलुप्त प्रजातियों के जीनोम की तुलना कर बताया कि इनमें आपसी मिश्रण है।

    इसी क्रम में मंगलवार (4 अक्टूबर 2022) को भौतिकी विज्ञान (Physics Science) के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (The Royal Swedish Academy of Sciences) ने एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect), जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John F. Clauser) और एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger) को भौतिकी में 2022 नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया है |

    एलेन एस्पेक्ट फ्रांस के भौतिक विज्ञानी हैं, जबकि जॉन ए.क्लॉसर अमेरिका और एंटोन जिलिंगर ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक हैं।

    तीनों वैज्ञानिकों को ‘क्वांटम मेकैनिक्स’ के क्षेत्र में कार्य करने के लिए ये पुरस्कार दिया गया है |

    उन्हें यह पुरस्कार इनटैंगल्ड फोटॉन (Entangled photons) के साथ प्रयोग करने, बेल असमानताओं (Bell inequalities) के उल्लंघन को स्थापित करने और क्वांटम इन्फॉर्मेशन साइंस में उनके काम के लिए दिया गया है |

    इन वैज्ञानिकों ने इनटैंगल्ड फोटॉन (Entangled photons) का उपयोग करते हुए अभूतपूर्व प्रयोग किए हैं, जहां दो कण अलग होने पर भी एक इकाई की तरह व्यवहार करते हैं। उनके परिणामों ने क्वांटम सूचना पर आधारित नई तकनीक का रास्ता साफ कर दिया है।

    इनटैंगल्ड फोटॉन (Entangled photons) और एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर की खोज

    क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) अब अनुसंधान का एक बड़ा क्षेत्र है जिसमें क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम नेटवर्क और सुरक्षित क्वांटम एन्क्रिप्टेड संचार शामिल हैं।

    इस विकास का एक प्रमुख कारक यह है कि कैसे क्वांटम यांत्रिकी दो या दो से अधिक कणों को एक उलझी हुई अवस्था में मौजूद रहने की अनुमति देता है। उलझे हुए जोड़े में से एक कण का क्या होता है यह निर्धारित करता है कि दूसरे कण का क्या होता है, भले ही वे बहुत दूर हों।

    लंबे समय तक, यह सवाल था कि क्या सहसंबंध (correlation ) इसलिए था क्योंकि एक उलझे हुए जोड़े (entangled pair) में कणों में छिपे हुए variables, निर्देश होते थे जो उन्हें बताते हैं कि उन्हें प्रयोग में कौन सा परिणाम देना चाहिए।

    1960 के दशक में, जॉन स्टीवर्ट बेल (John Stewart Bell) ने उनके नाम पर गणितीय असमानता विकसित की। यह बताता है कि यदि छिपे हुए चर (variables) हैं, तो बड़ी संख्या में माप के परिणामों के बीच संबंध कभी भी एक निश्चित मूल्य से अधिक नहीं होगा। हालांकि, क्वांटम यांत्रिकी भविष्यवाणी करता है कि एक निश्चित प्रकार का प्रयोग बेल की असमानता (Bell’s inequality) का उल्लंघन करेगा, इस प्रकार एक मजबूत सहसंबंध (stronger correlation) के परिणामस्वरूप अन्यथा संभव होगा।

    जॉन एफ क्लॉजर ने जॉन बेल के विचारों को विकसित किया, जिससे एक व्यावहारिक प्रयोग हुआ। जब उन्होंने माप लिया, तो उन्होंने बेल असमानता का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करके क्वांटम यांत्रिकी का समर्थन किया। इसका मतलब है कि क्वांटम यांत्रिकी को एक सिद्धांत द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है जो छिपे हुए चर (hidden variables) का उपयोग करता है।

    जॉन एफ क्लॉजर के प्रयोग के बाद कुछ खामियां (loopholes) रह गईं। एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect) ने सेटअप को इस तरह से विकसित किया, जिससे एक महत्वपूर्ण बचाव का रास्ता बंद हो गया। वह एक उलझी हुई जोड़ी (entangled pair) के अपने स्रोत को छोड़ने के बाद माप सेटिंग्स (measurement settings) को स्विच करने में सक्षम था, इसलिए जब वे उत्सर्जित (emitted) होते थे तो सेटिंग परिणाम को प्रभावित नहीं कर सकती थी। परिष्कृत उपकरणों और प्रयोगों की लंबी श्रृंखला का उपयोग करते हुए, एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger) ने उलझी हुई क्वांटम अवस्थाओं (entangled quantum) का उपयोग करना शुरू कर दिया। अन्य बातों के अलावा, उनके शोध समूह ने क्वांटम टेलीपोर्टेशन (quantum teleportation) नामक एक घटना का प्रदर्शन किया है, जिससे क्वांटम अवस्था को एक कण से एक दूरी पर स्थानांतरित करना संभव हो जाता है (makes it possible to move a quantum state from one particle to one at a distance)।

    एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect)

    एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect)

    फ्रांस के फिजिसिस्ट एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect) का जन्म 15 जून 1947 को फ्रांस के एजेन में हुआ था | 75 वर्षीय एलेन एस्पेक्ट ने पेरिस साकले यूनिवर्सिटी और पेरिस यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी | 1980 में जब उनकी पीएचडी चल रही थी, तब उन्होंने बेल टेस्ट एक्सपेरीमेंट्स (Bell Test Experiments) करने शुरू कर दिए थे  जिसमें उन्होंने क्वांटम इनटैंगलमेंट (Quantum Entanglement) से जुड़े कुछ रहस्यों का पता लगाया |

    इनटैंगल्ड फोटॉन (1982) के साथ उनके बेल टेस्ट एक्सपेरिमेंट ने, 1935 में शुरू हुई अल्बर्ट आइंस्टीन और निल्स बोहर के बीच एक बहस को सुलझाने में योगदान दिया है |

    एलेन एस्पेक्ट, इंस्टीट्यूट डी ऑप्टिक ग्रेजुएट स्कूल और इकोले पॉलीटेक्निक (यूनिवर्सिटी पेरिस-सैकले) में प्रोफेसर हैं | वह कई एकैडमी (फ्रांस, यूएसए, ऑस्ट्रिया) के सदस्य हैं | अब तक उन्हें अपने रिसर्च के निम्न पुरस्कार मिल चुके है :

    CNRS गोल्ड मेडल (2005); 2010 में फिजिक्स में वुल्फ पुरस्कार ( Wolf prize); निल्स बोहर (Nils Bohr Gold medal); अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल (2012); ओएसए (2013) का इवेस मेडल/क्विन प्राइज़; और 2014 में क्वांटम सूचना में बलजान पुरस्कार(Balzan prize)

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John Francis Clauser)

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John Francis Clauser)

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर एक अमेरिकी एक्सपेरिमेंटल और थ्योरेटिकल भौतिक विज्ञानी हैं | उन्हें क्वांटम मेकैन्किस में उनके योगदान के लिए जाना जाता है | उन्हें क्लॉसर-हॉर्न-शिमोनी-होल्ट (Clauser-Horne-Shimony-Holt (CHSH) ) इनीक्वैलिटी, नॉन लोकल क्वांटम इनटैंगलमेंट के पहले प्रायोगिक प्रमाण और लोकल रियलिज़्म की थ्योरी के निर्माण के लिए जाना जाता है |

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर का जन्म 1 दिसंबर 1942 को अमेरिका के पासाडेना में हुआ था | उन्होंने 1964 में, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से फिजिक्स में बी.एस किया | 1966 में उन्होंने फिजिक्स में एमए किया और 1969 में कोलंबिया युनिवर्सिटी से पीएचडी की | 1969 से 1996 तक उन्होंने लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी, लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी और कैलिफोर्निया युनिवर्सिटी बर्कले में काम किया |

    1969 में, जॉन बेल के सैद्धांतिक परिणामों से प्रेरित माइकल हॉर्न, अब्नेर शिमोनी और रिचर्ड होल्ट के साथ, उन्होंने स्थानीय छिपी हुई वेरिएबल थ्योरी के पहले टेस्ट का प्रस्ताव दिया था | इन सिद्धांतों के लिए उन्होंने पहले प्रयोगात्मक परीक्षण योग्य सीएचएसएच-बेल की थ्योरम- क्लॉजर-हॉर्न-शिमोनी-होल्ट (CHSH) इनीक्वैलिटी दी | 1972 में, उन्होंने CHSH का पहला प्रायोगिक परीक्षण किया और 1976 में दूसरा परीक्षण किया |

    1974 में, माइकल हॉर्न के साथ काम करते हुए उन्होंने लोकल रियलिस्टिक थ्योरी के सिद्धांत को लोकल हिडन वैरिएबल थ्योरी के सामान्यीकरण के रूप में तैयार किया | 1974 में उन्होंने प्रकाश के लिए उप-पॉसोनियन आंकड़ों (Sub-Poissonian statistics) का पहला अवलोकन किया | इस तरह पहली बार प्रयोगात्मक रूप से साबित किया कि फोटॉन स्थानीयकृत कणों (localized particles) की तरह व्यवहार कर सकते हैं न कि विद्युत चुम्बकीय विकिरण (electromagnetic radiation) के संक्षिप्त पल्स की तरह |

    1982 में उन्हें जॉन बैल के साथ रियलिटी फाउंडेशन प्राइज़ (Reality Foundation Prize) दिया गया | 2010 में उन्हें एलेन एस्पेक्ट और एंटोन ज़िलिंगर के साथ, नॉन लोकल क्वांटम इनटेंगलमेंट पर उनकी टिप्पणियों के लिए और लोकल रियलिज़िम के एक्सपेरिमेंटल टेस्ट के लिए फिजिक्स में वुल्फ पुरस्कार (Wolf Prize) से सम्मानित किया गया था | 2011 में उन्हें थॉमसन-रॉयटर्स प्रशस्ति-पत्र पुरस्कार (Thompson-Reuters Citation Laureate) से सम्मानित किया गया था

    एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger)

    एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger)

    एंटोन ज़िलिंगर का जन्म 20 May 1945 को ऑस्ट्रिया के रीड इम इनक्रेइस में हुआ था | ज़िलिंगर वियना यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं और ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज में क्वांटम ऑप्टिक्स और क्वांटम सूचना संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं | उनके ज्यादातर शोध क्वांटम इनटैंगलमेंट के प्रयोगों से जुड़े हैं | उन्हें खासतौर पर अपने एक्सपेरिमेंटल और सैद्धांतिक कामों के लिए जाना जाता है, खासकर इनटैंगलमेंट, क्वांटम टेलीपोर्टेशन, क्वांटम कम्यूनिकेशन और क्रिप्टोग्राफी |

    उन्होंने 1971 में वियना यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी | 1999 में वियना यूनिवर्सिटी में शामिल होने से पहले वे वियना की टेक्निकल यूनिवर्सिटी और इन्सब्रुक यूनिवर्सिटी के संकायों में थे, जहां उन्होंने फिजिक्स डिपार्टमेंट के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया | ज़िलिंगर ने एमआईटी, म्यूनिख के तकनीकी विश्वविद्यालय, हम्बोल्ट विश्वविद्यालय बर्लिन, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और कॉलेज डी फ्रांस में चेयर इंटरनेशनल सहित कई जगहों पर काम किया है | ज़िलिंगर ऑस्ट्रियन फिजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष रहे हैं और फिलहाल ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष हैं |

    पिछले साल इनको मिला था भौतिकी में नोबल पुरस्कार

    पिछले साल स्यूकुरो मानेबे, क्लॉस होसेलमैन और जियोर्जियो पेरिसी को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह पुरस्कार जटिल भौतिक प्रणालियों को लेकर हमारी समझ में विकसित करने के लिए दिया गया था।

    स्यूकुरो मानेबे और क्लॉस होसेलमैन ने यह पुरस्कार ‘धरती की जलवायु की भौतिक मॉडलिंग’ और ‘ग्लोबल वार्मिंग की भविष्यवाणी’ को मजबूत करने के लिए जीता था। वहीं पेरिसी को ‘परमाणु से ग्रहों के पैमाने तक ‘भौतिक प्रणालियों में उतार-चढ़ाव की क्रिया के खोज के लिए’ नोबल से सम्मानित किया गया था।

    स्त्रोत:

    नोबल पुरस्कार आधिकारिक वेबसाइट : https://www.nobelprize.org/

    एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect) के बारे में – https://youtu.be/lZyZtrF01qQ

    एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger) के बारे में – https://youtu.be/epooR8ONrj4

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John F. Clauser)https://youtu.be/ZYZiLX2uibM

    प्रेस रिलीज़ – https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2022/press-release/

    Does colour exist when no one is watching? – https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-physics2022-figure2.pdf

    Entangled particles that never met – https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-physics2022-figure3.pdf

  • Nobel Prize 2022: स्‍वीडन के स्‍वांते पाबो को मेडिसिन का नोबेल (नोबेल पुरस्कार के बारे में जाने)

    Nobel Prize 2022: स्‍वीडन के स्‍वांते पाबो को मेडिसिन का नोबेल (नोबेल पुरस्कार के बारे में जाने)

    नोबेल प्राइज वीक 2022 (Nobel Prize) की शुरुआत हो गई है। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित हो रहे वीक में सबसे पहले फिजियोलॉजी/मेडिसिन कैटि‍गरी में पुरस्‍कार का ऐलान किया गया। इस बार का मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार स्वीडन के स्‍वांते पाबो (Svante Pääbo) को ‘‘विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम से संबंधित खोजों के लिए (Discoveries concerning the genomes of extinct hominins and human evolution)’ दिया गया है।  

    द नोबेल कमि‍टी के सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन ने उनके नाम का ऐलान किया। इस साल के नोबेल पुरस्कार की घोषणा 3-10 अक्टूबर को की जा रही है | इस साल 5 अक्टूबर को केमिस्ट्री, 6 अक्टूबर को साहित्य, 7 अक्टूबर को नोबेल शांति और 10 अक्टूबर को इकोनॉमिक्स के लिए नोबेल का ऐलान किया जाएगा। नोबेल पुरस्कारों को व्यापक रूप से उनके संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के रूप में माना जाता है

    नोबेल फाउंडेशन ने 2020 और 2021 के विजेताओं के साथ दिसंबर में स्टॉकहोम में होने वाले नोबेल सप्ताह में 2022 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं को आमंत्रित करने का भी फैसला किया है।

    वेबसाइट – https://www.nobelprize.org/

    Press Release – https://www.nobelprize.org/prizes/medicine/2022/press-release/

    कौन हैं स्वांते पाबो (Svante Pääbo)

    20 अप्रैल 1955 को स्‍वीडन के स्‍टॉकहोम में जन्‍मे स्‍वांते पाबो ने उप्‍साला यूनिवर्सिटी (Uppsala University) से अपनी पढ़ाई पूरी की। स्‍वांते एक जेनेटिसिस्ट (Geneticist) हैं और इवोल्यूशनरी जेनेटिक्स ( Evolutionary Genetics ) के क्षेत्र में एक्सपर्ट हैं। उन्होंने 1986 में उप्साला विश्वविद्यालय में अपनी पीएचडी थीसिस पूरी की | स्‍वांते पाबो ज्यूरिख विश्वविद्यालय, स्विट्जरलैंड और बाद में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, यूएसए में पोस्टडॉक्टरल फेलो थे। वे 1990 में म्यूनिख विश्वविद्यालय, जर्मनी में प्रोफेसर बने। 1999 में उन्होंने जर्मनी के लीपज़िग में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी (Max Planck Institute for Evolutionary Anthropology) की स्थापना की, जहा स्‍वांते अभी सेवाएं दे रहे हैं।  वह ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जापान में सहायक प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत हैं।

    DNA को लेकर भी उन्‍होंने काफी काम किया है। खास बात यह है कि स्‍वांते के पिता सुन बर्गस्‍ट्रॉमी (Sune Bergström) जो एक बायोकेमिस्‍ट थे उन्हें 1982 में नोबेल प्राइज मिला था |

    अपने शोध के जरिए स्‍वांते पाबो ने विलुप्त होमिनिन से कई अतिरिक्त जीनोम अनुक्रमों (genome sequences) का विश्लेषण पूरा कर लिया है। पाबो की खोजों का इस्‍तेमाल वैज्ञानिक समुदाय द्वारा मानव विकास और प्रवास को बेहतर ढंग से समझने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। जीनोम सिक्‍वेसिंग के नए तरीकों से संकेत मिलता है कि अफ्रीका में होमो सेपियंस के साथ होमिनिन भी मिश्रित हो सकते हैं। 
    Photo courtesy: https://www.nobelprize.org/prizes
    पाबो के इस मौलिक शोध ने एक पूरी तरह से नए विज्ञान 'जीवाश्म विज्ञान' को जन्म दिया है । सभी जीवित मनुष्यों को विलुप्त होमिनिन से अलग करने वाले आनुवंशिक अंतरों को प्रकट करके, उनकी खोजों ने यह पता लगाने का आधार प्रदान किया कि क्या हमें विशिष्ट मानव बनाता है।

    हम मनुष्य कहा से आये है ? Where do we come from?

    मानव विकास के अध्ययन के लिए जीवाश्म विज्ञान और पुरातत्व महत्वपूर्ण हैं। अनुसंधान ने इस बात का सबूत दिया कि शारीरिक रूप से आधुनिक मानव, होमो सेपियन्स, लगभग 300,000 साल पहले पहली बार अफ्रीका में दिखाई दिए, जबकि हमारे सबसे करीबी रिश्तेदार, निएंडरथल, अफ्रीका के बाहर विकसित हुए और लगभग 400,000 साल से 30,000 साल पहले तक यूरोप और पश्चिमी एशिया में बसे हुए थे, जिस बिंदु पर वे विलुप्त हो गए। लगभग 70,000 साल पहले, होमो सेपियन्स के समूह अफ्रीका से मध्य पूर्व में चले गए और वहाँ से वे दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गए। होमो सेपियन्स और निएंडरथल इस प्रकार यूरेशिया के बड़े हिस्से में दसियों हज़ार वर्षों तक सहअस्तित्व में रहे। लेकिन हम विलुप्त निएंडरथल के साथ अपने संबंधों के बारे में क्या जानते हैं? सुराग जीनोमिक जानकारी से प्राप्त किए जा सकते हैं। 1990 के दशक के अंत तक, लगभग पूरे मानव जीनोम को अनुक्रमित कर दिया गया था। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसने विभिन्न मानव आबादी के बीच अनुवांशिक संबंधों के बाद के अध्ययनों की अनुमति दी। हालांकि, वर्तमान मानव और विलुप्त निएंडरथल के बीच संबंधों के अध्ययन के लिए पुरातन नमूनों से बरामद जीनोमिक डीएनए की अनुक्रमण की आवश्यकता होगी।

    Photo courtesy: https://www.nobelprize.org/prizes

    नोबेल पुरस्कार क्या है ? कैसे शुरुआत हुई नोबेल पुरस्कारों की

    नोबेल पुरस्कार की 1895 में स्थापना हुई थी। पहली बार 1901 में नोबेल पुरस्कार दिए गए थे। अब तक 975 लोगों को नोबेल मिल चुका है। इसके अलावा संस्थानों को 609 नोबेल पुरस्कार दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में नोबेल दिया जाता है उनमें फिजिक्स (Physics), मेडिसिन (Physiology or Medicine), केमिस्ट्री (Chemistry), साहित्य (Literature), शांति (Peace) और अर्थशास्‍त्र शामिल हैं।

    पुरस्कार समारोह प्रतिवर्ष होते हैं।  एक पुरस्कार तीन से अधिक व्यक्तियों के बीच साझा नहीं किया जा सकता है, यद्यपि नोबेल शांति पुरस्कार तीन से अधिक लोगों के संगठनों को प्रदान किया जा सकता है। यद्यपि नोबेल पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिए जाते हैं, यदि किसी व्यक्ति को पुरस्कार दिया जाता है और प्राप्त करने से पहले उसकी मृत्यु हो जाती है, तो पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

    नोबेल की स्थापना किसने की?

    एक धनी स्वीडिश उद्योगपति और डाइनामाइट के आविष्कारक सर एल्फ्रेड नोबेल (Sir Alfred Nobel की वसीहत के आधार पर चिकित्सा, भौतिकी, रसायन शास्त्र, साहित्य और शांति क्षेत्र के नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की गई थी। पहला नोबेल पुरस्कार वर्ष 1901 में सर एल्फ्रेड नोबेल के निधन के पांच साल बाद दिया गया था।

    अल्फ्रेड नोबेल

    अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्टॉकहोल्म के स्वीडन में हुआ था। इनका तालुक्क एक अभियंता परिवार से था जो बहुत ही समृद्ध था। आप एक रसायनज्ञ, अभियंता व् अविष्कारक है। 1894 में आपने बेफोर्स आयरन और स्टील मील ख़रीदा जिसे आपने एक महत्वपूर्ण हथियार निर्माता का केंद्र बनाया तथा आपने बैल्लेस्टिक मिसाइलो का भी सफल परीक्षण किया।

    अर्थशास्त्र का नोबेल

    अर्थशास्त्र का नोबेल, जिसे आधारिक तौर पर ‘बैंक ऑफ स्वीडन प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमोरी ऑफ एल्फ्रेड नोबेल (एल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में अर्थशास्त्र में बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार)’, उसकी स्थापना एल्फ्रेड नोबेल की वसीहत के आधार पर नहीं हुई थी, बल्कि स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने 1968 में इसकी शुरुआत की थी।

    नोबेल पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार में क्या मिलता है?\

    प्रत्येक क्षेत्र के नोबेल के तहत विजेताओं को एक स्वर्ण पदक और एक प्रमाणपत्र के साथ एक करोड़ क्रोनोर (लगभग नौ लाख डॉलर) की पुरस्कार राशि दी जाती है। विजेताओं का सम्मान हर साल 10 दिसंबर को किया जाता है। 1896 में 10 दिसंबर की तारीख को ही एल्फ्रेड नोबेल का निधन हुआ था।

    1901 से 2021 तक अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 609 बार नोबेल पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं।

    किसी प्रत्याशी को नोबेल पुरस्कार के लिय कौन नामित कर सकता है?

    दुनियाभर में हजारों लोग नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन जमा करने के पात्र हैं। इनमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, कानूनविद, पूर्व नोबेल पुरस्कार विजेता और खुद नोबेल समिति के सदस्य शामिल हैं। हालांकि, नामांकन को 50 वर्षों तक गुप्त रखा जाता है, लेकिन जो लोग उन्हें जमा करते हैं, वे कभी-कभी सार्वजनिक रूप से अपनी सिफारिशों की घोषणा करते हैं, खासकर नोबेल शांति पुरस्कार के संबंध में।

    नोबेल पुरस्कारों का नॉर्वे से क्या संबंध है?

    नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे में प्रदान किया जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों के पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं। ऐसा एल्फ्रेड नोबेल की इच्छा के आधार पर किया जाता है। इस इच्छा के पीछे की असल वजह तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन एल्फ्रेड नोबेल के जीवनकाल में स्वीडन और नॉर्वे एक संघ का हिस्सा थे, जो 1905 में भंग हो गया था।

    स्टॉकहोम स्थित नोबेल फाउंडेशन, जो पुरस्कार राशि का प्रबंधन करता है और ओस्लो स्थित शांति पुरस्कार समिति के बीच संबंध कई मौके पर तनावपूर्ण रहे हैं।