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  • मानव में अंतःस्त्रावी तंत्र (Endocrine System in Hindi) (ग्रंथियां (Glands) एवं हार्मोन्स (Harmones)

    मानव में अंतःस्त्रावी तंत्र (Endocrine System in Hindi) (ग्रंथियां (Glands) एवं हार्मोन्स (Harmones)

    इस आर्टिकल में हम जानेगे की मानव में अंतःस्त्रावी तंत्र (Endocrine System) किस प्रकार कार्य करता है, अंतःस्त्रावी तंत्र (Endocrine System) में ग्रंथियां (Glands) एवं हार्मोन्स (Harmones) की क्या भूमिका है, हॉर्मोन (Harmone) क्या होते है, हॉर्मोन अन्तःस्रावी ग्रन्थिया (Glands) क्या है, पिट्यूटरी ग्रन्थि या पीयूष ग्रंथि (मास्टर ग्रन्थि) (Pituitary gland) क्या है, थाईराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) क्या है, पैराथायरॉइड ग्रन्थि (Parathyroid glands), एड्रिनलिन ग्रन्थि (Adrenal Gland), पीनियल ग्रन्थि, अग्न्याशय ग्रन्थि, थाइमस ग्रन्थि, पैंक्रियास ग्रंथि (Pancreatic gland) और हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) ग्रन्थि आदि | साथ ही जानेगे की हॉर्मोन के अल्पस्रावण के कारण होने वाले रोग, हॉर्मोन के अतिस्रावण के कारण होने वाले रोग विभिन्न मानव हॉर्मोन, उनके स्रोत, स्वभाव तथा मानव शरीर पर प्रभाव आदि

    मानव में अंतःस्त्रावी तंत्र (Endocrine System)

    शरीर के विभिन्न भागों में उपस्थित नलिकाविहीन ग्रन्थियों को अन्तःस्रावी तन्त्र कहा जाता है। थामस एडिसन को अन्तःस्त्रावी विज्ञान का जनक कहा जाता है। अंतःस्त्रावी तंत्र के अध्ययन को एन्ड्रोक्राइनोलोजी कहते है | तन्त्रिका तंत्र से इसका घनिष्ठ संबंध है।

    इसलिए इन दोनों को संयुक्त कर एक नयी विज्ञान की शाखा का विकास हुआ है, जिसे “न्यूरोऐण्डोक्राइनोलॉजी” कहते है।

    अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से हॉर्मोन का स्राव होता है तथा समूह को इन्हीं हॉर्मोनों के द्वारा शरीर की सभी रासायनिक क्रियाओं का नियन्त्रण होता है, जहाँ वहिःस्रावी ग्रन्थियाँ स्राव वाहिनियों (ducts) द्वारा विसर्जित करती है जैसे लार ग्रन्थियाँ वहीं अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ वाहिनी विहीन (ductless) ग्रन्थियाँ होती हैं, जो अपना स्राव रुधिर में मुक्त करती है और यह स्राव रुधिर के माध्यम से निर्धारित अंगों में पहुँचकर रासायनिक क्रियाओं का समन्वय करता है।

    रासायनिक स्तर पर हार्मोन्स मुख्यत: स्टीरॉएड्स या प्रोटीन्स या प्रोटीन्स से उत्पन्न पदार्थ होते है।

    हॉर्मोन (Harmone)

    हॉर्मोन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से अल्प मात्रा में स्रावित होने वाला कार्बनिक पदार्थ है। इसकी खोज बेलिस और स्टारलिंग ने सीक्रिटिन हॉर्मोन के रूप में की। रसायनिक दृष्टि से हॉर्मोन प्रोटीन, स्टीरॉइड्स तथा अमीनो अम्ल के व्युत्पन्न पदार्थ होते हैं।

    प्रोटीन हॉर्मोन (जल में घुलनशील) – इन्सुलिन

    स्टीरॉयड हॉर्मोन (वसा में घुलनशील) लिंग हॉर्मोन – एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टीरॉन

    अमीनो अम्ल – थायरॉक्सिन

    अतः हॉर्मोन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से स्रावित होने वाला वह तत्व है, जो जैव-उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है तथा अन्तः वातावरण को नियन्त्रित करता है एवं अन्य हॉर्मोनों की क्रिया को अनुमति प्रदान करता है।

    हॉर्मोन कोशिका कला (cell membrane) की पारगम्यता को बदलकर उसे चयनात्मक पारगम्य बनाता है ताकि आवश्यक अणुओं का विनियम हो सके।

    मनुष्य की अन्तः स्त्रावी ग्रन्थियाँ मनुष्य के शरीर में कुल 9 अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश नर एवं मादा में समान होती हैं, जो निम्न हैं:

    पिट्यूटरी ग्रन्थि या पीयूष ग्रंथि (मास्टर ग्रन्थि) (Pituitary gland)

    पीयूष ग्रन्थि मस्तिष्क में पाई जाती है। यह मटर के दाने के समान होती है। यह शरीर की सबसे छोटी अतःस्त्रावी ग्रंथी है। यह कपाल की Sphenoid हड्डी में एक गड्डे में स्थित होती है। इसे Cell Turcica कहते है। इसका भार- 0.6gm होता है। इसे “मास्टर ग्रंथि’ भी कहते है।

    इसके द्वारा आक्सीटोसीन, ADH/वेसोप्रेसीन हार्मोन, प्रोलेक्टीन होर्मोन, वृद्धि हार्मोन स्त्रावित होते है। इन्हें संयुक्त रूप से पिट्यूटेराइन हार्मोन कहते है।

    पश्चपालि (POSTERIER LOBE)

    अथवा न्यूरोहाइपोफाइसिस से। इसमें दो हार्मोन स्रावित होते है —

    आक्सीटोसीन हार्मोन

    यह हार्मोन मनुष्य में दुध का निष्कासन व प्रसव पीड़ा के लिए उत्तरदायी होता है। इसे Love हार्मोन भी कहते है। है। यह गर्भावस्था के या प्रसव के समय गर्भाशय के फैलने तथा प्रसव के पश्चात गर्भाशय के सिकुड़ने को प्रेरित करता है। यह “Pitocin” भी कहलाता है |

    ADH/ वैसोप्रेसीन

    इसे “एंटिडाइयूरेटिक हार्मोन” भी कहते है अर्थात ADH अथवा पिट्रेसिन ADH वृक्क की वाहिनियों एवं कोशिकाओं में जल के अवशोषण को नियन्त्रित करता है व शरीर में जल संतुलन का भी कार्य करता है। यह हार्मोन वृक्क नलिकाओं में जल के पुनरावशोषण को बढ़ाता है व मूत्र का सांद्रण करता है इसकी कमी से बार-बार पेशाब आता है।

    अग्रपालि (ANTERIOR LOBE)

    अथवा एडीनोहाइपोफाइसिस से उत्सर्जित होने वाले हार्मोन्स

    STH = Somatotropic Hormone

    यह शरीर के वृद्धि व लम्बाई को नियन्त्रित करती है। अधिकता से:- भीमकायता, एक्रोमिगली विकार उत्पन्न हो जाता है। कमी से:- बौनापन (Dwarfism)

    GTH = Gonadotropic Hormone

    यह जनन अंगों के कार्यो का नियन्त्रण करता है।

    (a) FST = Follicle Stimulating hormone – नर में वृषण शुक्रजनन नलिकाओं तथा यह अंडाशय में फालिकल की

    वृद्धि में मदद करता है।

    (b) LH = Luteiniging hormone – इससे नर में टेस्टोस्टीरोन H.एवं मादा में एस्ट्रोजन H. स्रावित होता है। मादा की माहवारी को नियन्त्रित करता है।

    ACTH = Andrenocorticotropic Hormone –

    यह Adrenal Cortex के स्राव को नियन्त्रित करता है।

    TSH = Thyroid Stimulating Hormone –

    इसे थाइरोट्रोपिन हार्मोन भी कहते है। यह थाइराइड ग्रंथि की वृद्धि एवं स्रावण क्रिया का प्रेरक होता है।

    LTS = Lactogenic Hormone

    “प्रोलेक्टिन” भी कहते है। यह गर्भित मादा में दुग्ध-निर्माण एवं स्राव को प्रेरित करता है।

    (vi) Diabetogenic Hormone

    यह कार्बोहाइड्रेट के उपापचय को प्रभावित करता है। इसका प्रभाव इंसुलिन के ठीक विपरीत होता है।

    (vii) MSH = Melenocite Stimulating Hormone

    शरीर के अंग (मिलैनिन) को नियन्त्रित करता है।

    मध्यपालि (Intermediate Lobe)

    पीयूषग्रंथि का यह भाग अविकसित होता है।

    थाईराइड ग्रंथि (Thyroid Gland)

    यह ग्रन्थि गले में श्वास नली के पास होती है यह शरीर की सबसे बड़ी अंतरस्त्रावी ग्रन्थि है। इसकी आकृति एच होती है। इसके द्वारा थाइराॅक्सीन हार्मोन स्त्रावित होता है। ये भोजन के आक्सीकरण व उपापचय की दर को नियंत्रित करता है। कम स्त्रवण से गलगण्ड रोग हो जाता है।

    इसके कम स्त्रवण से बच्चों में क्रिटिनिज्म रोग व वयस्क में मिक्सिडीया रोग हो जाता है। अधिकता से ग्लुनर रोग, नेत्रोन्सेधी गलगण्ड रोग हो जाता है।

    थाईराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) से जुड़े रोग

    (i) जड़वामनता (Cretinism):- यह बच्चों में होता है। मानसिक व शारीरिक वृद्धि अवरूध हो जाता है।

    (ii) Myxodema:- यह यौवनावस्था में होने वाले इस रोग में उपापचय भली-भाँति नहीं हो पाता, जिससे हृदय स्पंदन व रक्त चाप कम हो जाता है।

    (iii) Hypothyroidism:- सामान्य जनन कार्य सम्भव नहीं हो पाता। कभी-कभी इस रोग से मनुष्य गूंगा व बहरा भी हो जाता है।

    (iv) Simple Goitre:- आयोडिन की कमी से Thyroid Gland का आकार काफी बड़ जाता है।

    अधिकता से रोग

    (i) Toxic Goitre – उदर गति तीव्र रक्त चाप बढ़ जाता है।

    ii) Exophthalmic Goitre – आँख फूलकर नेत्रकोटर से बाहर निकल आती है।

    पैराथायरॉइड ग्रन्थि (Parathyroid glands)

    यह ग्रन्थि गले में थाइराॅइड ग्रन्थि के पीछे स्थित होती है। इस ग्रन्थि से पैराथार्मोन हार्मोन स्त्रावित होता है। यह हार्मोन रक्त में Ca++ बढ़ाता है जो विटामिन डी की तरह कार्य करता है। इस हार्मोन की कमी से टिटेनी रोग हो जाता है। इस हार्मोन के अधिक स्राव से ओस्टिओपोरोसिरा रोग हो जाता है |

    एड्रिनलिन ग्रन्थि (Adrenal Gland)

    इसे अधिवृक्क ग्रन्थि भी कहते है। यह वृक्क के ऊपर स्थित होती है। यह ग्रन्थि संकट, क्रोध के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होती है।

    इस ग्रन्थि के बाहरी भाग को कार्टेक्स व भीतरी भाग को मेड्यूला कहते है।

    कार्टेस से कार्टीसोल हार्मोन स्त्रावित होता है। जिसे जिवन रक्षक हार्मोन कहते है। मेड्यूला में एड्रिनलीन हार्मोन स्त्रावित होता है जिसे करो या मरो हार्मोन भी कहते है। यह मनुष्य में संकट के समय रक्त दाब हृदयस्पंदन, ग्लुकोज स्तर, रक्त संचार आदि बढ़ा कर शरीर को संकट के लिए तैयार करता है।

    Adrenal Cortex से स्रावित हार्मोन्स

    मिनरैलो कॉर्टिकोइडस – एल्डोस्टीरान = शरीर में लवण का नियन्त्रण करना।

    ग्लुकोकॉर्टिकोइडस

    कार्टिसोल व कॉर्टिकोस्टीरोन ये दोनों शरीर में उपापचय, यकृत में Glycogenesis, आदि का नियन्त्रण करते है।

    लिंग हार्मोन्स

    एण्डोजेन्स व इस्ट्रोजन ये दोनों नर में स्रावित होने वाले हार्मोन है, जो Endogens नर व Estrogen मादा में पेशियों तथा जनन अंगों के विकास को प्रेरित करते है।

    (B) Adrenal Medulla से स्रावित हार्मोन्स :– (i) एड्रीनलीन या ऐपीनैफ्रीन व नॉरएड्रीनलीन या नॉरऐपीनैफ्रीन एड्रीनलीन हमें संकट कालीन परिस्थतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। गुस्स या डर के समय उत्पन्न होने वाले हाव-भाव ऐड्रीनेंलीन के द्वारा ही उत्पन्न होते है। इसका चिकित्सा में अत्यंत महत्वपूर्ण है- क्योंकि “इसे हृदय में Inject कभी-कभी रूके हुये हृदय में हत् स्पंदन प्रारंभ किया जा सकता है। नार ऐड्रीनेलीन भी हृदय को नियन्त्रित करता है।

    Gonadotropic Hormone (GTH)

    यौवनावस्था से केवल 2-3 वर्ष पहले ही इनका स्राव शुरू होता है। “Hypothalmus” में स्थित जैनेटिक जैव घड़ी (Genetic biology Clock) इनके प्राव के समय को नियन्त्रित करती है।

    हाशी मोटो रोग

    यह रोग में Thyroid Gland के द्वारा हार्मोन्स का भाव अत्यन्त कम हो जाता है। स्राव को बढ़ाने के लिए दी गई दवाई शरीर में विष की तरह काम करने लगती है। इसे खत्म करने के लिए शरीर में Antibodies बनने लगती है जो Thyroid को नष्ट कर देती है। इसे Anti-immune रोग या “थायराइड की आत्म हत्या” कहते है |

    Addison’s disease

    Adrenal Hormone की कमी से होता है। इसका वर्णन सर्वप्रथम Thomus Addision ने किया था। इससे मूत्र के साथ अधिक मात्रा में जल के लवण भी निष्कासित हो जाता है। इसे शरीर Dehydration हो जाता है। अत: Adrenal Hormone को “जीवन-रक्षक हार्मोन्स” कहते है।

    कुशिंग रोग

    Adrenal Hormone के अधिक स्राव से होता है।

    इडीमा रोग (Edema disease)

    Adrenal Hormone के अधिक स्राव व साथ में Na+ के स्राव के कारण होता है।

    पीनियल ग्रन्थि

    यह ग्रन्थि अग्र मस्तिष्क के थैलेमस भाग में स्थित होती है। इसे तीसरी आंख भी कहते है। यह मिलैटोनिन हार्मोन को स्त्रावित करती है। जो त्वचा के रंग को हल्का करता है व जननंगों के विकास में विलम्ब करता है। इसे जैविक घड़ी भी कहते है।

    अग्न्याशय ग्रन्थि

    अग्नाश्य ग्रन्थि को मिश्रत(अन्तः व बाहरी) ग्रन्थि कहते है। यकृत के बाद दुसरी सबसे बड़ी ग्रन्थि है। इस ग्रन्थि में लैग्रहैन्स द्वीप समुह पाया जाता है। इसमें α व β कोशिकाएं पाई जाती है। जिनमें α कोशिकाएं ग्लुकागाॅन हार्मोन का स्त्रवण करती है। जो रक्त में ग्लुकोज के स्तर को बढ़ाता है।

    β कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन का स्त्राव करती है। जो रक्त में ग्लुकोज को कम करता है। यह एक प्रकार की प्रोटिन है। जो 51 अमीनो अम्ल से मिलकर बनी होती है। इसका टीका बेस्ट व बेरिंग ने तैयार किया ।

    इंसुलिन की कमी से मधुमेह(डाइबिटिज मेलिटस) नामक रोग हो जाता है व अधिकता से हाइपोग्लासिनिया रोग हो जाता है।

    थाइमस ग्रन्थि

    थाइमस ग्रन्थि को प्रतिरक्षी ग्रन्थि भी कहते है। इससे थाइमोसिन हार्मोन स्त्रावित होता है। यह हृदय के समीप पाई जाती है। यह ग्रन्थि एंटीबाॅडी का स्त्रवण करती है। यह ग्रन्थि बचपन में बड़ी व वयस्क अवस्था में लुप्त हो जाती है। यह ग्रन्थि टी-लिम्फोसाडट का परिपक्वन करती है। इसका प्रभाव लैंगिक परिवर्धन व प्रतिरक्षी तत्वों के परिवर्धन पर पड़ता है।

    जनन ग्रन्थियां

    पुरूष – वृषण – टेस्टोस्टीराॅन

     मादा – अण्डाश्य – एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रान

    जनद – यह भी अंतः स्रावी ग्रंथियां हैं जो हमारे द्वितीयक लैंगिक लक्षणों को उत्पन्न करती है पुरुषों में जैसे आवाज का भारी होना दाढ़ी मूछ का आना,  महिलाओं में आवाज का पतला होना और दाढ़ी मूछ का नहीं आना

    वृषण- यह पुरुषों की अंतः स्रावी ग्रंथि होती है जो उन में द्वितीयक लैंगिक लक्षण के लिए उत्तरदाई होती है इसमें निकलने वाला हार्मोन टेस्टोस्टेरोन कहलाता है या हार्मोन पुरुषों में दाढ़ी मूछ का आना, आवाज का भारी होना आदि के लिए उत्तरदाई होता है साथ ही वृषण में स्पर्मेटोजेनेसिस अर्थात शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है

    अंडाशय – यह दो गुलाबी संरचनाएं होती है जो शरीर के अंदर स्थित होती है इसमें दो हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन निकलते हैं जो मादा में द्वितीय लक्षण के लिए आवश्यक है |

    पैंक्रियास ग्रंथि (Pancreatic gland) 

    यह एक मिश्रित ग्रंथि होती है जिसकी लैंगर हैंस दीप कोशिकाओं में स्थित अल्फा और बीटा कोशिकाएं क्रम से ग्लूकेगन और इंसुलिन हार्मोन का श्रवण करती है ग्लूकेगन शरीर में शुगर की मात्रा को बढ़ाकर तथा इंसुलिन बढ़ी हुई शुगर को कम करके रक्त में शुगर की मात्रा का नियमन करता है इस हार्मोन की कमी से मधुमेह नामक रोग हो जाता है |

    सामान्य भाषा में कहें तो व्यक्ति चाहे कितना भी भोजन करें यदि वह प्रतिदिन व्यायाम और रनिंग करता है तो उसके शरीर में शर्करा की मात्रा के नियमन के लिए सही मात्रा में हार्मोन बनते रहेंगे और व्यक्ति को कभी मधुमेह से जूझना ही नहीं पड़ेगा |

    हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) 

    यह ग्रंथि थैलेमस के नीचे मस्तिष्क में स्थित होती है यह ग्रंथि हमारी मास्टर ग्रंथि अर्थात पीयूष ग्रंथि पर कंट्रोल करती है इसलिए इसे सुपर मास्टर ग्रंथि भी कहते हैं |

    हारमोंस के शरीर पर प्रभाव के बारे में वैज्ञानिक अभी तक रिसर्च कर रहे हैं बहुत ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं हुई है क्योंकि प्रकृति और शरीर में कितनी मात्रा में इनका प्रभाव क्या होता है इस पर खोज अभी जारी है |

    पौधों के हारमोंस

    पौधों में किसी भी प्रकार का अंतः स्रावी तंत्र नहीं पाया जाता है उसके बावजूद भी पौधों में हारमोंस बनते हैं जिन्हें पादप हार्मोन कहा जाता है सभी प्रकार के पादप हारमोंस या तो पौधों की वृद्धि को प्रेरित करते हैं या पौधों में प्रीति को संदमित करते हैं उदाहरण जिबरेलिन

    ग्रन्थि से जुड़े महत्वपुर्ण तथ्य (स्मार्ट फैक्ट्स)

    पिनियल ग्रन्थि (pineal gland) को लैंगिक जैव घड़ी (biological clock) भी कहा जाता है, जो 70 वर्ष की आयु में घटनी प्रारम्भ हो जाती है।

    थॉमस एडीसन को अन्तःस्रावी विज्ञान का जनक कहा जाता है।

    अग्न्याशय और जनद (gonad) मिश्रित ग्रन्थियाँ हैं।

    पिट्यूटरी ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि (master gland) भी कहते हैं।

    थायरॉइड ग्रन्थि सबसे बड़ी अन्तः स्रावी ग्रन्थि है।

    अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रन्थि है, जिसमें अन्तःस्रावी एवं बहिःस्रावी दोनों भाग होते हैं। इसके लैंगरहैन्स की द्वीपिकाओं में तीन प्रकार की कोशिकाएँ पाई जाती हैं। यथा – α – कोशिकाओं से ग्लूकेगॉन हॉर्मोन, β-कोशिकाएँ से इन्सुलिन हॉर्मोन, δ – कोशिकाओं से सोमेटोस्टेटिन हॉर्मोन स्रावित होता है।

    रेनिन (Rennin) जठर ग्रन्थि (gastric gland) की जाइमोजन कोशिकाओं से स्रावित प्रोटीन अपघटनी एन्जाइम है, जबकि रेनिन (renin) वृक्क से स्रावित एक एन्जाइम है, जो हॉर्मोन की भाँति कार्य करता है। एड्रीनेलीन या एपीनेफ्रिन को संकटकालीन (emergency) हॉर्मोन कहा जाता है।

    मानव शरीर के सबसे छोटी अंत: स्रावी ग्रंथि है- “पिटयूटरी ग्रंथि’। व सबसे बड़ी अंत: स्रावी ग्रंथि- Thyroid Gland |

    एडीनल ग्रंथि की स्रावित हार्मोन को “लड़ो या उड़ो अथवा संघर्ष या पलायन की उपमा प्रदान की गई।

    एक्रोमेगाली रोग “सोमेट्रोट्रॉपिक हार्मोन (STH) के अधिक मात्रा में स्रावण से होता है।

    उत्तेजक पदार्थों को हार्मोन्स सर्वप्रथम-स्टारलिंग (1905) ने कहा था।

    स्तनधारियों में दुग्ध स्राव को- “आक्सीटोसिन व प्रोलैक्टिन” उत्तेजित करता है।

    एक्रोमेगाली रोग “सोमेट्रोट्रॉपिक हार्मोन (STH) के अधिक मात्रा में स्रावण से होता है।

    एड्रीनल ग्रंथि के हार्मोन के कम स्रावण से एडीसन, हाइपोग्लाइसीमिया तथा काँस्य वर्ण रोग हो जाते है।

    3F (Fight, Flight & Fright) हार्मोन्स-एड्रीनलिन को कहते है।

    Thyroid Gland के अति स्रावण से ग्रवसरोग, प्लूमर रोग, एक्सोफ्थैल्मिक ग्वाटर नामक रोग हो जाते है।

    हॉर्मोन के अल्पस्रावण के कारण होने वाले रोग

    रोगहार्मोनग्रंथिप्रमुख प्रभाव
    बौनापनSTHएड्रिनोहाइपोफाइसिसबाल्यावस्था में वृद्धि का निरोधन।
    सायमण्ड रोगSTHएड्रिनोहाइपोफाइसिसवयस्क अवस्था में व्यक्ति समय से पूर्व बूढ़ा दिखाई देता है।
    अवटुमनताथायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रन्थिशारीरिक वृद्धि व मानसिक वृद्धि मन्द हो जाती है व बौनापन।
    मिक्सोडेमाथायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रन्थिहृदय गति मन्द, रोगी सुस्त त्वचा, पलकें व होंठ मोटे हो जाते हैं।
    हाशीमोटो रोगथायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रन्थिथायरॉइड की आत्महत्या
    हाइपोकैल्सीमियाPTHपैराथायरॉइडCa2+ की कम व फास्फेट की मात्रा बढ़ जाती है |
    टिटेनीPTHपैराथायरॉइडCa2+ की कमी व पेशियों में ऐंठन
    एडीसन रोगमिनरेलोकोर्टिकॉइड्सएड्रिनल कॉर्टेक्सNa2+ की कमी, रुधिर दाब कम हो जाता है (हाइपोनेट्रिया)
    डाइबिटीज मेलीटसइन्सुलिनलैंगरहैन्स के द्वीप समूह (B-कोशिकाएँ)रुधिर में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है व मूत्र से होकर उत्सर्जन होने लगता है।
    डाइबिटीज इन्सीपीडसADHन्यूरोहाइपोफाइसिसपॉलियूरिया

    हॉर्मोन के अतिस्रावण के कारण होने वाले रोग

    रोगहार्मोनहार्मोन स्त्रावी ग्रंथिप्रमुख प्रभाव
    महाकायता या भीमकायता (Gigantism)STHएड्रिनोहाइपोफाइसिसबाल्यावस्था में अतिस्रावण से भीमकाय शरीर
    अग्राभिकायता (Acromegaly)STHएड्रिनोहाइपोफाइसिसवयस्कावस्था में चेहरे की अस्थियों का लम्बा होना, इसे रिवर्सल टू गॉरिला भी कहते हैं।
    नैत्रोत्सेंधी गलगण्ड (Exophthalmic goitre)थायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रन्थिनेत्र गोलक बाहर की ओर उभर जाते हैं।
    प्लूमर रोग (Plummer disease)थायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रन्थिग्रन्थि में जगह-जगह गाठें हो जाती हैं।
    ग्रेव का रोग (Grave’s disease)थायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रन्थिसम्पूर्ण ग्रन्थि फूल जाती है।
    ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)PTHपैराथायरॉइड ग्रन्थिअस्थियाँ कमजोर व भंगुर हो जाती हैं व अस्थियों से Ca2+ निकल कर रुधिर सीरम में बढ़ जाता है। इसे हाइपरकैल्सीमिया कहते हैं।
    संपुटीतन्तुमय अस्थि विकृति (Osteitis fibrosa cystica)PTHपैराथायरॉइड ग्रन्थिहाइपोकैल्सीमिया
    कुशिंग रोग (Cushing disease)कॉर्टीसोलएड्रिनल कॉर्टेक्सवक्षीय भाग में वसा के जमाव से शरीर भौंडा हो जाता है।
    एड्रिनोजेनाइटल सिण्ड्रोम हिरसुटिज्मडीहाइड्रोएपी एण्डोस्टीरॉनएड्रिनल कॉर्टेक्समहिलाओं में नर के लक्षण-दाढ़ी मूँछ आना, आवज में भारीपन, क्लाइटोरिस का बड़ा होना।

    विभिन्न मानव हॉर्मोन, उनके स्रोत, स्वभाव तथा मानव शरीर पर प्रभाव

    क्र. सं.हार्मोन का नामस्त्रोतस्वभावप्रभाव
    1.सोमेटोस्टेटिन हॉर्मोनहाइपोथैलेमस के न्यूरॉनप्रोटीनGH का श्रावण रोकता है।
    2.थायरोट्रॉपिन मुक्ति हॉर्मोनहाइपोथैलेमस के न्यूरॉनप्रोटीनTSH का स्रावण प्रेरित करता है।
    3.कॉर्टिकोटॉपिन मुक्ति हॉर्मोनहाइपोथैलेमस के न्यूरॉनप्रोटीनACTH का स्रावण प्रेरित करता है।
    4.गोनेडोट्रॉपिन मुक्ति हॉर्मोनहाइपोथैलेमस के न्यूरॉनप्रोटीनगोनेडोट्रॉपिन का स्रावण प्रेरित करता है।
    5.सोमेटोट्रॉफिक या वृद्धि हॉर्मोन (STH or GH)अग्र पीयूष ग्रन्थिप्रोटीन1. DNA, RNA व प्रोटीन संश्लेषण में सहायक।
    2. ग्लूकोनियोजेनेसिस प्रेरित करता है।
    3. शरीर की वृद्धि में सहायक।
    6.एड्रिनोकॉर्टिकोट्रॉफिक हॉर्मोन (ACTH)अग्र पीयूष ग्रन्थिप्रोटीनएड्रिनल कॉर्टेक्स को हॉर्मोन स्रावण के लिए प्रेरित करता है।
    7.थायरॉयड प्रेरक हॉर्मोन (TSH)अग्र पीयूष ग्रन्थिप्रोटीनथायरॉइड ग्रन्थि को हॉर्मोन स्रावण के लिए प्रेरित करता है।
    8.गोनेडोट्रॉफिक हॉर्मोन (a) पुटिका प्रेरक हॉर्मोन     (b) ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोनअग्र पीयूष ग्रन्थिप्रोटीन1. जनदों का विकास।
    2. गेमीटोजेनेसिस को प्रेरित करता है।

    1. जनदों से लिंग हॉर्मोनों के स्रावण को प्रेरित करता है। 2. अण्डोत्सर्ग प्रेरित करता है।
    9.प्रोलैक्टिन हॉर्मोनअग्र पीयूष ग्रन्थिप्रोटीन1. दुग्ध निर्माण प्रेरित करता है।
    2. स्तन ग्रन्थियों का विकास।
    10.मेलेनोसाइट प्रेरक हॉर्मोनमध्य पीयूष ग्रन्थिप्रोटीनमेलेनोसाइट में मेलेनिन निर्माण व वितरण में सहायक।
    11.वेसोप्रेसिन या पिट्रेसिन या मूत्र  बहुलता हॉर्मोनपश्च पीयूष ग्रन्थिप्रोटीन1. धमनियों का संकुचन
    2. नेफ्रॉन्स द्वारा जल का पुनरावशोषण।
    12.ऑक्सीटोसिन या पिटोसिनपश्च पीयूष ग्रन्थिप्रोटीन1. शिशु जन्म के समय प्रसव वेदना प्रारम्भ करता है। 2. स्तन ग्रन्थियों से दुग्ध स्रावण को प्रेरित करता है।
    13.मैलेटोनिनपिनियल कायअमीनो अम्ल1. स्तनधारियों में लैंगिक परिपक्वन को रोकता है।
    2. अभयचरों में त्वचा के रंग को हल्का करता है।
    14.थायरॉक्सिन या टैट्राआयोडो थायरोनिनथायरॉइड ग्रन्थिअमीनो अम्ल1. आधारी उपापचय का नियन्त्रण।
    2. हृदय स्पंदन का नियमन तथा शरीर ताप का नियन्त्रण । 3. ऊतक विभेदन में सहायक है अन्तःकायान्तरण प्रेरित करता है।
    4. ग्लूकोनियोजेनेसिस
    15.थायरोकैल्सिटोनिनथायरॉइड ग्रन्थि की C-कोशिकाएँप्रोटीनमूत्र में Ca का उत्सर्जन बढ़ाता है तथा अन्तरा-कोशिकीय द्रव (ECF) में Ca स्तर बढ़ाता है।
    16.पैराथॉर्मोन या कोलिप का हॉर्मोनपैराथायरॉइड ग्रन्थिप्रोटीन1. Ca तथा P उपापचय का नियन्त्रण ।
    2. होमियोस्टेसिस तथा रुधिर में Ca तथा P स्तर का नियन्त्रण | 3. अस्थियों तथा दाँतों का निर्माण व वृद्धि।   
    17.कैल्सीटोनिनपैराथायरॉइडप्रोटीनपैराथॉर्मोन का विपरीत प्रभाव।
    18.थायमोसीनथायमस ग्रन्थिप्रोटीनलिम्फोसाइटों के विभेदीकरण में सहायक तथा शरीर के रक्षा तन्त्र का भाग
    19.ग्लूकोकॉर्टिकॉएड, कॉर्टीसोल तथा कार्टिकॉस्टीरॉनएड्रिनल कॉर्टेक्सकॉर्टिकॉएडकार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन उपापचय का नियन्त्रण
    20.मिनरेलोकॉर्टिकॉएड एल्डोस्टीरॉनएड्रिनल कॉर्टेक्सकॉर्टिकॉएड1. Na तथा K उपापचय का नियन्त्रण 2. रुधिर में Na की मात्रा बढ़ाने में सहायक
    21.लिंग कॉर्टिकॉएड, एण्डस्टेनेडिओन तथा एस्ट्रोजन  एड्रिनल  कॉर्टेक्सकॉर्टिकॉएडबाह्य लिंग लक्षणों के विकास में सहायक
    22.एड्रिनेलीन या एपीनेफ्रीनएड्रिनल मेड्यूलाकैटकोलेमिन1. हृदय स्पंदन, रुधिर दबाव तथा श्वसन का नियमन । 2. शरीर को युद्ध या पलायन के लिए तैयार करता है।
    23.नॉरड्रिनेलीन या नॉर-एपीनेफ़ोनएड्रिनल मेड्यूलाकैटकोलेमिनरुधिर वाहिनियों के संकुचन द्वारा रुधिर दाब में वृद्धि
    24.इन्सुलिनअग्न्याशय में उपस्थित लेंगरहैन्स की द्वीपकाओं की β-कोशिकाएँप्रोटीन1. ग्लूकोस उपापचय का नियन्त्रण 2. ग्लाइकोजेनेसिस तथा लाइपोजेनेसिस में सहायक । 3. ग्लूकोनियोजेनेसिस में वृद्धि | 4. प्रोटीन संश्लेषण बढ़ाता है।
    25.ग्लूकागॉन या
    हाइपरग्लाइसेमिक कारक
    अग्न्याशय में उपस्थित लेंगरहैन्स की द्वीपकाओं की α-कोशिकाएँप्रोटीनइन्सुलिन का विपरीत ग्लाइकोजीनोलिसिस प्रेरित करता है तथा प्रोटीनों का अपचय बढाता है।
    26.एस्ट्रोजनअण्डाशय की ग्राफियन पुटिकाएँस्टीरॉइड1. मादा में सहायक प्रजनन अंगों की वृद्धि व विकास। 2. मादा में द्वितीयक लिंग लक्षणों का विकास।
    27.प्रोजेस्टेरॉन1. अण्डाश्य की कॉर्पस ल्यूटियम 2. अपरास्टीरॉइड1. गर्भाशय को भ्रूण के अधिरोपण के लिए तैयार करता है। 2. गर्भावस्था बनाए रखने में सहायक है।
    28.टेस्टोस्टीरॉनवृषण की लीडिंग कोशिकाएँस्टीरॉइड1. नर के सहायक प्रजनन अंगों की वृद्धि तथा विकास। 2. द्वितीयक लिंग लक्षणों का विकास।
    3. पेशियों के विकास में सहायक
    29.कोरियोनिक गोनैडोट्रॉपिक  हॉर्मोनअपराप्रोटीनकॉर्पस ल्यूटियम को बनाए रखने में सहायक।
    30.प्लेसेण्टल लैक्टोजनअपराप्रोटीनदुग्ध निर्माण को प्रेरित करता है।
    31.रिलेक्सिनअपराप्रोटीनप्यूबिक संघान की पेशियों को लचीला बनाकर बच्चे के जन्म में सहायता करता है।
    32.रेनिनवृक्कप्रोटीन1.   एल्डोस्टीरॉन के स्रावण को प्रेरित करता है।
    2.  प्लाज्मा प्रोटीन एन्जियोटेन्सीनोजन को एन्जियोटेन्सिन में तोड़ता है, जो हृदय स्पंदन की दर को बढ़ाता है।