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  • SSC परीक्षा के लिए साइंस GK प्रश्न और उत्तर – सीरीज 1

    SSC परीक्षा के लिए साइंस GK प्रश्न और उत्तर – सीरीज 1

    SSC में GK में विज्ञान के प्रश्न अवश्य पूछे जाते है | हम यहाँ आप को ये 500 महत्वपूर्ण प्रश्न लेकर आये है जिसकी SSC परीक्षा के लिए साइंस GK प्रश्न और उत्तर की पहली सीरीज निचे दी गई है |

    रेडियोऐक्टिवता की खोज किसने की थी?

    Ans हेनरी बेकरल ने

    दो समतल दर्पण एक-दूसरे से 60° के कोण पर झुके हैं। इनके बीच रखी एक गेंद के बने प्रतिबिम्बों की संख्या कितनी होगी?

    Ans पाँच

    पानी के अन्दर हवा का एक बुलबुला किस तरह बर्ताव करता है?

    Ans एक अवतल लेंस

    इकाइयों की समस्त व्यवस्थाओं में किस इकाई की मात्रा समान होती है?

    Ans विशिष्ट गुरुत्व

    यदि कोई मनुष्य समतल दर्पण की ओर 4 मीटर/सेकेण्ड की चाल से आ रहा है, तो दर्पण में मनुष्य का प्रतिबिम्ब किस चाल से आता हुआ प्रतीत होगा?

    Ans 8 मीटर/सेकेण्ड

    कारों, ट्रकों और बसों में ड्राइवर की सीट के बगल में कौन-सा दर्पण लगा होता है?

    Ans उत्तल दर्पण

    ऐसे तत्त्व जिनमें धातु और अधातु दोनों के गुण पाये जाते हैं वे कहलाते हैं?

    Ans उपधातु

    वनस्पति विज्ञान के जनक कौन हैं?

    Ans थियोफ्रेस्टस

    निम्नलिखित में से किसमें ध्वनि की चाल सबसे अधिक होगी?

    Ans इस्पात में

    एक व्यक्ति घूमते हुए स्टूल पर बांहें फैलाये खड़ा है। एकाएक वह बांहें सिकोड़ लेता है, तो स्टूल का कोणीय वेग

    Ans बढ़ जायेगा

    चन्द्रमा पर एक बम विस्फ़ोट होता है। इसकी आवाज़ पृथ्वी पर

    Ans सुनाई नहीं देगी

    चन्द्रमा पर वायुमण्डल न होने का कारण है

    Ans पलायन वेग

    यदि किसी सरल लोलक की सबसे बड़ी आँखें किस स्तनधारी प्राणी की होती है?

    Ans हिरण

    आज कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में सर्वाधिक योगदान करने वाला देश है?

    Ans संयुक्त राज्य अमरीका

    निम्नलिखित में से किस उद्योग में अभ्रक कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होता है?

    Ans विद्युत

    विद्युत प्रेस का आविष्कार किसने किया था?

    Ans हेनरी शीले ने

    प्रेशर कुकर में खाना जल्दी पक जाता है, क्योंकि?

    Ans प्रेशर कुकर के अन्दर दाब अधिक होता है

    दाब बढ़ाने पर जल का क्वथनांक?

    Ans बढ़ता है

    ‘प्रत्येक क्रिया के बराबर व विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है।’ यह न्यूटन का

    Ans तीसरा नियम है

    ताँबा (कॉपर) का शत्रु तत्त्व है?

    Ans गंधक

    उगते व डूबते समय सूर्य लाल प्रतीत होता है, क्योंकि?

    Ans लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम होता है

    लम्बाई 4% बढ़ा दी जाये, तो उसका आवर्तकाल

    Ans 2% बढ़ जायेगा

    एक लड़की झूला झूल रही है। उसके पास एक अन्य लड़की आकर बैठ जाती है, तो झूले का आवर्तकाल

    Ans अपरिवर्तित रहेगा

    हम रेडियो की घुण्डी घुमाकर, विभिन्न स्टेशनों के प्रोग्राम सुनते हैं। यह सम्भव है

    Ans अनुनाद के कारण

    ‘वेन्चुरीमीटर’ से क्या ज्ञात करते हैं?

    Ans जल के प्रवाह की दर

    चौराहों पर पानी के फुहारे में गेंद नाचती रहती है, क्योंकि

    Ans पानी का वेग अधिक होने से दाब घट जाता है

    यदि द्रव्यमान परिवर्तित हुए बिना पृथ्वी सिकुड़कर अपनी वर्तमान त्रिज्या की आधी रह जाये तो दिन होगा

    Ans 12 घण्टे का

    यदि किसी पिण्ड को पृथ्वी से 11.2 किलोमीटर/सेकेण्ड के वेग से फेंका जाये तो पिण्ड

    Ans पृथ्वी पर कभी नहीं लौटेगा

    उपग्रह में समय ज्ञात करने के लिए, अन्तरिक्ष यात्री को क्या प्रयोग करना चाहिए?

    Ans स्प्रिंग घड़ी

    यदि पृथ्वी की त्रिज्या 1% कम हो जाये, किन्तु द्रव्यमान वही रहे तो पृथ्वी तल का गुरुत्वीय त्वरण

    Ans 2% घट जायेगा

    दाब का मात्रक है?

    Ans पास्कल

    खाना पकाने का बर्तन होना चाहिए

    Ans उच्च विशिष्ट ऊष्मा का निम्न चालकता का

    झरने में जब जल ऊँचाई से गिरता है तो उसका ताप

    Ans बढ़ जाता है

    केल्विन तापमापी में बर्फ़ का गलनांक होता है

    Ans २७३° K

    बॉटनी शब्द की उत्पत्ति किस भाषा के शब्द से हुई है?

    Ans ग्रीक

    क्यूरी (Curie) किसकी इकाई का नाम है?

    Ans रेडियोएक्टिव धर्मिता

    किस रंग की तरंग दैर्ध्य सबसे कम होती है?

    Ans बैगनी

    कमरे में रखे रेफ़्रीजरेटर का दरवाज़ा खोल दिया जाता है तो कमरे का ताप

    Ans बढ़ जायेगा

    इन्द्रधनुष में कितने रंग होते हैं?

    Ans सात रंग

    ‘सेकेण्ड पेण्डुलम’ का आवर्तकाल क्या होता है?

    Ans 2 सेकेण्ड

    ‘भारतीय विज्ञान संस्थान’ कहाँ स्थित है?

    Ans बैंगलोर में

    पराध्वनिक विमानों की चाल होती है

    Ans ध्वनि की चाल से अधिक

    भूस्थिर उपग्रह की पृथ्वी से ऊँचाई होती है

    Ans 36,000 किलोमीटर 14.निम्नलिखित में से किस पदार्थ में ऑक्सीजन नहीं है — मिट्टी का तेल

    चिकित्सा शास्त्र के विद्यार्थियों को किसकी शपथ दिलायी जाती है?

    Ans हिप्पोक्रेटस

    कार में रेडियेटर का क्या कार्य होता है?

    Ans इंजन को ठण्डा रखना

    मनुष्य के शरीर के ताप होता है

    Ans 37° C

    दूर दृष्टिदोष से पीड़ित व्यक्ति को

    Ans निकट की वस्तुएँ दिखाई नहीं देती हैं

    किताब के ऊपर रखे किसी लेंस को ऊपर उठाने पर यदि मुद्रित अक्षरों का आकार बढ़ता हुआ दिखाई देता है, तो लेंस

    Ans उत्तल है

    यदि किसी लेंस से अक्षरों का आकार छोटा दिखाई देता हैं, तो लेंस

    Ans अवतल है

    तारे टिमटिमाते हैं

    Ans अपवर्तन के कारण

    निम्नलिखित में से कौन एक आवेश रहित कण है?

    Ans न्यूट्रॉन

    पौधों की आंतरिक संरचना का अध्ययन कहलाता है

    Ans शारीरिकी

    निम्न में से किस रंग का अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है

    Ans बैंगनी

    स्वच्छ जल से भरे तालाब की गहराई 3 मीटर प्रतीत होती है। यदि हवा के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक 4/3 हो, तो तालाब की वास्तविक गहराई क्या होगी?

    Ans 4 मीटर

    लेंस की क्षमता का मात्रक क्या है?

    Ans डायोप्टर

    रडार की कार्यप्रणाली निम्न सिद्धान्त पर आधारित है

    Ans रेडियों तरंगों का परावर्तन

    न्यूटन की गति के नियमों के अनुसार निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?

    Ans द्वितीय नियम से बल की परिभाषा ज्ञात की जाती है।

    किसी पिण्ड के उस गुणधर्म को क्या कहते हैं, जिससे वह सीधी रेखा में विराम या एकसमान गति की स्थिति में किसी भी परिवर्तन का विरोध करता है?

    Ans जड़त्व

    लेसर निम्न सिद्धान्त पर कार्य करती है

    Ans विकरण का उद्दीप्ति उत्सर्जन

    दलदल में फँसे व्यक्ति को लेट जाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि?

    Ans क्षेत्रफल अधिक होने से दाब कम हो जाता है

    बर्फ़ के टुकड़ों को आपस में दबाने पर टुकड़े आपस में चिपक जाते हैं, क्योंकि?

    Ans दाब अधिक होने से बर्फ़ का गलनांक घट जाता है

    मोटर कार में शीतलन तन्त्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

    Ans केवल संवहन

    जीवित प्राणियों के शरीर में होने वाली निम्नलिखित में से कौन सी एक प्रक्रिया, पाचक प्रक्रिया है?

    Ans प्रोटीनों का ऐमिनो अम्लों में विघटन

    एक टेलीविश्ज़न में दूरस्थ नियन्त्रण के लिए किस प्रकार के वैद्युत चुम्बकीय विकिरण का उपयोग किया जाता है?

    Ans हर्त्ज या लघु रेडियो तरंगें

    मिथेन जिसके वायुमण्डल में उपस्थित है, वह है?

    Ans बृहस्पति

    निम्नलिखित में किस अधातु में धातुई चमक पायी जाती है?

    Ans ग्रेफाइट,आयोडिन

    एक गुब्बारे में हाइड्रोजन व ऑक्सीजन गैस के बराबर-बराबर अणु हैं। यदि गुब्बारे में एक छेद कर दिया जाए तो

    Ans हाइड्रोजन गैस तेज़ी से निकलेगी

    कपूर के छोटे-छोटे टुकड़े जल की सतह पर नाचते हैं

    Ans पृष्ठ तनाव के कारण

    पानी का घनत्व अधिकतम होता है?

    Ans 4°C पर

    यदि दो उपग्रह एक ही वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हैं तो उनके

    Ans वेग समान होंगे

    पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे एक उपग्रह से एक पैकेट छोड़ दिया जाता है तो

    Ans उपग्रह के साथ उसी चाल से पृथ्वी की परिक्रमा करेगा

    निम्नलिखित में से कौन एक यौगिक है?

    Ans अमोनिया

    यंग प्रत्यास्थता गुणांक का SI मात्रक है

    Ans न्यूटन/मी.2

    कैण्डेला मात्रक है

    Ans ज्योति तीव्रता

    जल एक यौगिक है, क्योंकि

    Ans इसमें रासायनिक बंधों से जुड़े हुए दो भिन्न तत्त्व होते हैं।

    वह विज्ञान जिसका सम्बन्ध जीवधारियों के अध्ययन से होता है कहलाता है

    Ans जीव विज्ञान

    फाइकोलॉजी में किसका अध्ययन किया जाता है?

    Ans शैवाल

    जूल निम्नलिखित में से किसकी इकाई है

    Ans ऊर्जा

    मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति कब लागू की गई?

    Ans 1971 ई.

    चमगादड़ अंधेरे में उड़ते हैं, क्योंकि

    Ans चमगादड़ पराश्रव्य तरंगें उत्पन्न करते हैं

    प्रोटीन के पाचन में सहायक एन्जाइम है?

    Ans ट्रिप्सिन

    उन देशों में जहाँ के लोगों का मुख्य खाद्यान्न पॉलिश किया हुआ चावल है, लोग पीड़ित होते हैं?

    Ans बेरी-बेरी से

    माँसपेशियाँ में निम्नलिखित में से किसके एकत्र होने से थकान होती है?

    Ans लैक्टिक अम्ल

    प्रकाश वर्ष होता है?

    Ans एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की जाने वाली दूरी

    समुद्र की गहराई नापने के लिए कौन-सा उपकरण प्रयोग किया जाता है?

    Ans फ़ेदोमीटर

    कम्प्यूटर की IC चिप्स किस पदार्थ की बनी होती हैं?

    Ans सिलिकन की

    वह काल्पनिक रेखा जो फ़ोकस एवं पोल से गुजरते हुए गोलकार दर्पण पर पड़ती है, वह कहलाती है?

    Ans मुख्य अक्ष

    अगर किसी वस्तु का फ़ोकस अवतल दर्पण पर पड़ता है, तो उसकी छाया कैसी बनेगी?

    Ans अनन्त

    वह धातु जो अम्ल एवं क्षार के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन निकालती है?

    Ans जिंक

    जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?

    Ans लैमार्क तथा ट्रेविरेनस ने

    कार्य का मात्रक है?

    Ans जूल

    प्रकाश वर्ष इकाई है?

    Ans दूरी की

    एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना पदार्थ कहलाता है?

    Ans तत्त्व

    दो या दो से अधिक तत्त्वों के मात्रा के विचार से एक निश्चित अनुपात में संयोग करने से बना पदार्थ कहलाता है?

    Ans यौगिक

    किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव को कहते हैं?

    Ans डाप्लर प्रभाव

    कोई कण एक सेकेण्ड में जितने कम्पन करता है, उस संख्या को कहते हैं?

    Ans आवृति

    वायु में ध्वनि की चाल 332 मीटर/सेकेण्ड होती है। यदि दाब बढ़ाकर दो गुना कर दिया जाए, तो ध्वनि की चाल क्या होगी?

    Ans 332 मी./से.

    निम्नलिखित में से समय का मात्रक नहीं है?

    Ans प्रकाश वर्ष

    पारसेक (Parsec) इकाई है?

    Ans दूरी की

    निम्नलिखित में से कौन धातु होते हुए भी विद्युत का कुचालक है?

    Ans सीसा

  • अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 2022 में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से खोजे 200 से ज्यादा ग्रह

    अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 2022 में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से खोजे 200 से ज्यादा ग्रह

    अंतरिक्ष को अनंत माना जाता है। इसमें अनगिनत खगोलीय पिंड (Celestial bodies) हैं जिनकी बहुत थोड़ी संख्या ही अब तक ज्ञात थी। खगोलीय पिंड (Celestial bodies) यानी एक प्राकृतिक वस्तु (object) जो पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर स्थित है, जैसे धूमकेतु (comet), क्षुद्रग्रह (asteroid), चंद्रमा (moon), ग्रह (planet), सूर्य (sun) या तारा (star) ।

    लेकिन 2022 ऐसा साल रहा जिसमें अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आई। वैज्ञानिकों ने इस साल हमारे सोलर सिस्टम के बाहर भी सैकड़ों ग्रह खोज डाले। और इसका सबसे बड़ा श्रेय जाता है जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) को। इसके आने के बाद से वैज्ञानिकों की आंखों की पहुंच अंतरिक्ष में करोड़ों प्रकाश वर्ष आगे तक चली गई।

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope)

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) अब तक का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप है, जिसे अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया है। JWST को 25 दिसंबर 2021 में लॉन्च किया गया था और लांच के बाद से ही इसने सितारों और आकाशगंगाओं के निर्माण की जांच शुरू कर दी है । जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप – जिसे कभी-कभी JWST या वेब (Webb) कहा जाता है, NASA का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष विज्ञान टेलीस्कोप है।

    अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा (National Aeronautics and Space Administration – NASA) ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी (European Space Agency – ESA) और कैनेडियन स्पेस एजेंसी (Canadian Space Agency – CSA) के सहयोग से JWST को develop और डिजाईन किया है ।

    नोट: जेम्स वेब कौन है? (Who is James Webb) – जेम्स एडविन वेब एक अमेरिकी सरकार के अधिकारी थे, जिन्होंने 1949 से 1952 तक राज्य के अवर सचिव (Undersecretary of State) के रूप में कार्य किया। वह 14 फरवरी, 1961 से 7 अक्टूबर, 1968 तक नासा के दूसरे नियुक्त प्रशासक भी थे।

    जेम्स वेब किस लिए प्रसिद्ध है? – जेम्स एडविन वेब ने फरवरी 1961 से अक्टूबर 1968 तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रशासक के तौर पर बेहतरीन कार्य किया था।

    नए एग्जोप्लेनेट्स (Exoplanet) की खोज

    एग्जोप्लेनेट (Exoplanet) ऐसे ग्रहों को कहा जाता है हमारे सौर मंडल की सीमा के बाहर मौजूद हैं। अब तक खोजे गए एग्जोप्लेनेट्स (Exoplanet) की संख्या अब 5235 हो गई है। एस्ट्रोनॉमर्स ने इस साल 200 के लगभग एग्जोप्लेनेट्स की खोज की है।

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से यह संभव हो पाया है। इसने हबल टेलीस्कोप को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, हबल टेलीस्कोप अभी भी अपना काम कर रहा है। नासा ने एक ट्वीट में यह जानकारी दी है कि अकेले 2022 में ही उसने सैकड़ों एग्जोप्लेनेट्स का पता लगा लिया है।

    हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope)

    एक स्पेस टेलीस्कोप है जिसे 1990 में पृथ्वी की निचली कक्षा में लॉन्च किया गया था और यह अभी भी ऑपरेशन में है। यह पहला अंतरिक्ष टेलीस्कोप नहीं था, लेकिन यह सबसे बड़े और सबसे बहुमुखी में से एक टेलिस्कोप है, जो एक महत्वपूर्ण शोध उपकरण (vital research tool) और खगोल विज्ञान के लिए वरदान के रूप में प्रसिद्ध है।

    नए एग्जोप्लेनेट्स (Exoplanet) की बनावट

    नासा के मुताबिक, 2022 की शुरुआत में उनके पास खोजे गए एग्जोप्लनेटेस् की संख्या 5000 के करीब थी। लेकिन 2022 के खत्म होते होते उन्होंने 200 से ज्यादा एग्जोप्लेनेट्स खोज डाले और यह संख्या 5235 पर पहुंच गई। इनमें से 4% ग्रह ऐसे हैं जिन पर पृथ्वी और मंगल की तरह ही चट्टाने पाई जाती हैं। इस उपलब्धि से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 2023 में और अधिक एग्जोप्लेनेट्स को अंतरिक्ष वैज्ञानिक खोज सकने में कामयाब हो जाएंगे।

    एग्जोप्लेनेट्स की बनावट में बहुत भिन्नता पाई जाती है। इनमें से कुछ आकार में बहुत छोटे होते हैं, तो कुछ दिखने में धरती जैसे लगते हैं और इनकी सतह पर भी रेत और चट्टानें पाई जाती हैं। 2022 में खोजा गया सबसे लेटेस्ट प्लेनेट नेप्च्यून (Neptune) जैसा दिखता है। इसका नाम HD 109833 b बताया गया है। यह एक जी-टाइप तारे के गिर्द घूमता है।

    नोट: नेपच्यून सूर्य से आठवां ग्रह है और सौरमंडल का सबसे दूर का ज्ञात ग्रह है। व्यास की दृष्टि से यह सौर मंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह, तीसरा सबसे विशाल ग्रह और सबसे घना विशालकाय ग्रह है। यह पृथ्वी के द्रव्यमान का 17 गुना है, और इसके निकट-जुड़वां यूरेनस से थोड़ा अधिक भारी है

    एग्जोप्लेनेट (Exoplanet) में नए क्या मिला

    अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को दो एग्जोप्लेनेट ऐसे भी मिले हैं जिन पर अधिकतर मात्रा में पानी मौजूद हो सकता है। इन पर प्रत्य़क्ष रूप से पानी की खोज नहीं हुई है। बल्कि इनके आकार और घनत्व की तुलना जब दूसरे मॉडल्स के साथ की गई तो पता चला कि इनके घनत्व का आधे से ज्यादा हिस्सा ऐसे पदार्थ से बना है जो चट्टानों से तो हल्का है, लेकिन हाइड्रोजन और हीलियम जैसे गैसीय पदार्थों से भारी है। इसलिए बहुत संभावना जताई गई है इन पर पानी मौजूद हो सकता है। अगर ऐसा हो पाता है तो पृथ्वी के अलावा भी किसी अन्य ग्रह पर जीवन पाया जा सकता है।

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) के बारे जानने के लिए नासा की official वेबसाइट – https://webb.nasa.gov/

  • कंप्यूटर और उससे जुड़े आविष्कारों की कहानी (Invention Story of Computer)

    कंप्यूटर और उससे जुड़े आविष्कारों की कहानी (Invention Story of Computer)

    यह कल्पना करना कठिन है कि कंप्यूटर और उनके आविष्कारों के बिना जीवन कैसा होगा। कंप्यूटर के आविष्कार से हमारे काम करने, खेलने और कम्युनिकेशन के तरीके में एक क्रांति आई है । हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां कंप्यूटर हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है । चलिए, तो आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम देखेगे की कंप्यूटर के आविष्कार मानवता के लिए क्या मायने रखते हैं और इसने हमारे जीवन में इसके आविष्कार से लेकर अब तक कैसे बदलाव किये है |

    चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) के “कंप्यूटर” और उसके आविष्कार की कहानी

    ब्रिटिश गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज को अक्सर “कंप्यूटर का जनक (“father of the computer)” होने का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि वह कंप्यूटर के विचार की कल्पना करने वाले पहले व्यक्ति थे। कंप्यूटर का विचार 1800 के दशक का है, जब चार्ल्स बैबेज ने एक अंतर इंजन (difference engine) के विचार की कल्पना की थी, एक ऐसा इंजन या उपकरण जिसे खगोलीय और गणितीय डेटा की गणना (calculate astronomical and mathematical data) करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

    जब चार्ल्स बैबेज ने पहली बार कंप्यूटर के विचार की कल्पना की, तो उन्होंने इसका वर्णन करने के लिए “कंप्यूटर” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने इसे एक डिफरेंस इंजन (Difference Engine) कहा, क्योंकि इसे संख्याओं के बीच अंतर की गणना करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

    हालाँकि, “कंप्यूटर (computer)” शब्द का अर्थ अंततः कुछ पूरी तरह से अलग हो गया। इसका उपयोग उन मशीनों का वर्णन करने के लिए किया गया था जो सूचनाओं को संसाधित (process) कर सकती थीं, डेटा संग्रहीत (data collection) कर सकती थीं और यहां तक ​​कि गणना (calculation) भी कर सकती थीं।

    “कंप्यूटर” शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए भी किया जाता था जो इन मशीनों को संचालित करते थे। कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों में, कंप्यूटर उन लोगों द्वारा संचालित किए जाते थे जिन्हें “कंप्यूटर” कहा जाता था। इन लोगों को इस बात की गहरी समझ थी कि कंप्यूटर कैसे काम करते हैं और उन्हें कई तरह के काम करने के लिए प्रोग्राम करने में सक्षम थे।

    हालाँकि, पहला कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर the Electronic Numerical Integrator and Computer (ENIAC) के आविष्कार पर चार्ल्स बैबेज के अंतर इंजन (difference engine) की परिकल्पना को मान्यता मिली       ।

    ENIAC का आविष्कार 1946 में John Mauchly और J. Presper Eckert द्वारा किया गया था। यह संग्रहीत कार्यक्रम अवधारणा का उपयोग करके बनाया गया पहला कंप्यूटर था और उस समय की किसी भी अन्य मशीन की तुलना में बहुत तेजी से गणना करने में सक्षम था।

    ENIAC एक विशाल मशीन थी जो पुरे एक कमरे जितनी जगह घेरता था और 18,000 से अधिक वैक्यूम ट्यूबों का इसमें उपयोग किया।

    कंप्यूटर से लैपटॉप की यात्रा और जिंदगी बदलने की कहानी (Computer Invention Date and How It Changed Our Lives)

    बैबेज का डिफरेंस इंजन तो कभी पूरा नहीं हुआ, लेकिन इस मशीन के आईडिया ने अन्य वैज्ञानिकों को एक ऐसी मशीन की कल्पना करने को मजबूर किया जो सूचना को संसाधित (process) कर सके ।

    इस तरह 1950 और 1960 के दशक की शुरुआत में कंप्यूटर एक बड़ी मशीन के रुप में था जो की पुरे एक कमरे जितनी जगह घेरता था और यह ज्यादातर सैन्य और बड़े व्यवसायों द्वारा उपयोग किया जाता था ।

    जैसे-जैसे समय बीतता गया और टेक्नोलॉजी advanced होती गई, कंप्यूटर छोटे और अधिक शक्तिशाली होते गए, अंततः व्यक्तिगत कंप्यूटर (personal Computer), Laptop और इंटरनेट के आविष्कार के रूप में बदल गये ।

    और इस तरह कंप्यूटर ने हमारे कम्युनिकेशन, business और entertainment के तरीके को बदल दिया। अब हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां कंप्यूटर हर जगह हैं, हमारे घरों और कार्यालयों से लेकर हमारी कारों और यहां तक ​​कि हमारी जेब में |

    कंप्यूटर के आविष्कारक और उनके आविष्कार (The Inventors of the Computer and Their Inventions)

    पहले कंप्यूटर का आविष्कार कई अलग-अलग लोगों द्वारा किया गया था, जिनमें चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage), जॉन वॉन न्यूमैन (John von Neumann) और एलन ट्यूरिंग (Alan Turing) शामिल थे। इनमें से प्रत्येक आविष्कारक ने कंप्यूटर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    चार्ल्स बैबेज को अक्सर “कंप्यूटर का जनक (“father of the computer)” होने का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि उनका डिफरेंस इंजन कंप्यूटिंग के उद्देश्य से डिजाइन की जाने वाली पहली मशीन थी।

    जॉन वॉन न्यूमैन एक गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे जिन्होंने एक संग्रहीत प्रोग्राम कंप्यूटर के विचार की कल्पना की थी, जो एक ऐसी मशीन थी जो डेटा और निर्देशों को एक ही मेमोरी में संग्रहीत कर सकती थी। एलन ट्यूरिंग एक ब्रिटिश गणितज्ञ और कंप्यूटर वैज्ञानिक थे जिन्होंने ट्यूरिंग मशीन विकसित की, जिसे आधुनिक कंप्यूटर का पहला उदाहरण माना जाता है।

    कंप्यूटर और संग्रहीत कार्यक्रम अवधारणा (Stored Program Concept) का आविष्कार

    कंप्यूटर का आविष्कार मानव इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर (significant milestone) था। कंप्यूटर के आविष्कार से पहले, सूचना को मैन्युअल रूप से या कैलकुलेटर की सहायता से संसाधित किया जाना था। लेकिन कंप्यूटर के आविष्कार के साथ, सूचनाओं को बहुत तेजी से और अधिक कुशलता से संसाधित किया जा सकता था।

    संग्रहीत कार्यक्रम की अवधारणा ((Stored Program Concept)  का आविष्कार कंप्यूटिंग में एक बड़ी सफलता थी। इस अवधारणा ने निर्देशों (instructions) और डेटा (data) को एक ही मेमोरी (memory) में संग्रहीत करने की अनुमति दी, जिससे कंप्यूटर के लिए प्रोग्राम (programme) को स्टोर (store) करना और चलाना (operate) संभव हो गया। कंप्यूटिंग में यह एक बड़ा कदम था, क्योंकि इसने कंप्यूटरों को विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए प्रोग्राम करने की अनुमति दी थी।

    समय के साथ कंप्यूटर कैसे बदल गए हैं?

    पहले कंप्यूटर के आविष्कार के बाद से, कंप्यूटर तेजी से शक्तिशाली और बहुमुखी (versatile) हो गए हैं। आज, कंप्यूटर पहले से कहीं अधिक छोटे और अधिक शक्तिशाली हैं। वे गेमिंग से लेकर जटिल वित्तीय प्रणालियों (complex financial systems) के प्रबंधन तक कई प्रकार के कार्य करने में सक्षम हैं।

    कंप्यूटर अपने यूजर इंटरफेस (user interface) के मामले में भी बदल गए हैं। कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों में, कंप्यूटर उन लोगों द्वारा संचालित किए जाते थे जिन्हें कंप्यूटर और उनकी प्रोग्रामिंग भाषा की गहरी समझ थी।

    लेकिन आज, कंप्यूटर उन लोगों द्वारा संचालित किए जाते हैं जिन्हें कंप्यूटर और उनके यूजर इंटरफेस की बुनियादी समझ है। इसने कंप्यूटर को आम जनता के लिए और अधिक सुलभ बना दिया है।

    हमारे जीवन में कंप्यूटर के लाभ

    कंप्यूटर के आविष्कार ने हमारे जीवन में कई फायदे लाए हैं। कंप्यूटर ने हमारे लिए सूचनाओं को अधिक तेज़ी से और कुशलता से संसाधित करना संभव बना दिया है। उन्होंने हमारे लिए दुनिया में कहीं से भी बड़ी मात्रा में जानकारी प्राप्त करना संभव बना दिया है।

    कंप्यूटर ने हमारे लिए एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट करना भी आसान बना दिया है। अब हम मेसेज भेज सकते हैं, इमेजेज और वीडियो शेयर कर सकते हैं और यहां तक ​​कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों को वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। कंप्यूटर ने हमारे लिए घर से काम करना भी संभव बना दिया है |

    हमारे जीवन में कंप्यूटर के नुकसान

    किसी भी तकनीक की तरह, कंप्यूटर के उपयोग के भी कुछ नुकसान हैं। मुख्य नुकसानों में से एक यह है कि गलत सूचना फैलाने के लिए कंप्यूटर का उपयोग किया जा सकता है। जैसे-जैसे कंप्यूटर तेजी से शक्तिशाली होते गए हैं, वे हैकर्स और साइबर अपराधियों के लिए एक उपकरण बन गए हैं। इससे अपराधियों के लिए लोगों की निजी जानकारी और पैसे चुराना आसान हो गया है।

    कंप्यूटर का एक और नुकसान यह है कि इसका उपयोग लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा सकता है। कंप्यूटर का उपयोग लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है, जिससे गोपनीयता की चिंता हो सकती है।

    इसके अतिरिक्त, कंप्यूटर का उपयोग लोगों की राय में हेरफेर करने और चुनाव के परिणाम में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है।

    निष्कर्ष

    कंप्यूटर के आविष्कार ने हमारे जीने, काम करने और संवाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है। कंप्यूटर ने हमारे लिए सूचनाओं को अधिक तेज़ी से और कुशलता से संसाधित करना संभव बना दिया है। उन्होंने हमारे लिए एक दूसरे के साथ संवाद करना और दुनिया में कहीं से भी बड़ी मात्रा में जानकारी प्राप्त करना आसान बना दिया है।

    हालाँकि, दुरुपयोग की संभावना (potential for misuse) और निजी जानकारी और गोपनीयता संबंधी चिंताएँ (privacy concerns) जैसी कुछ कमियां computer में है । लेकिन कुल मिलाकर, कंप्यूटर के आविष्कार का हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और इसने हमारे जीने के तरीके में क्रांति ला दी है। जब से इसका आविष्कार हुआ तब से अब तक, कंप्यूटर ने हमारे जीवन को बेहतर बनाया है ।

  • नासा जब अपना पहला अस्टोरोइड-Asteroid (क्षुद्रग्रह) का नमूना लिया  

    नासा जब अपना पहला अस्टोरोइड-Asteroid (क्षुद्रग्रह) का नमूना लिया  

    अक्टूबर 2020 में, नासा के अंतरिक्ष यान ओएसआईआरआईएस-रेक्स (OSIRIS-Rex) पृथ्वी से 321 मिलियन किलोमीटर दुरी तय करके बेन्नू नामक 4.5 अरब साल पुराने क्षुद्रग्रह से चट्टानों का सैंपल लिया । यह पहला मिशन जो था जो पृथ्वी से इतनी दूर जाकर एक एक क्षुद्रग्रह को छुआ। इस क्राफ्ट को वैज्ञानिक टीम धरातल पर उतरना चाहती थी लेकिन सतह बहुत ही ज्यादा पथरीली थी इसकी बाद वैज्ञानिकों ने एक रोबोटिक हाथ का इस्तेमाल करते हुए एक चट्टान अस्टोरोइड की उठा ली |

    जब फ्लैप ने नमूना लेने के बाद बंद होना चाहिए था उसी वक्त बड़ी रॉक की वजह से वह पूरा बंद नही हो पाया जिस वजह से कुछ सैंपल रह गये | हालाकिं नासा को भरोसा है कि वे 400 ग्राम और 1 किलो से अधिक नमूना सामग्री ले पाने में सक्षम हुए है, जो न्यूनतम लक्ष्य द्रव्यमान (60 ग्राम से अधिक) से ज्यादा है |

    क्यों है जरूरी अस्टोरोइड नमूना ?

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इसमें पानी और प्रीबायोटिक सामग्री हो सकती है, जो जीवन का निर्माण खंड है। साथ ही लौटाई गई सामग्री से वैज्ञानिकों को सौर मंडल के गठन और विकास, ग्रह निर्माण के प्रारंभिक चरणों, और कार्बनिक यौगिकों के स्रोत के बारे में अधिक जानने में सक्षम होने की उम्मीद है जिससे पृथ्वी पर जीवन का निर्माण हुआ।

    ओएसआईआरआईएस-रेक्स (OSIRIS-Rex) क्या है ?

    OSIRIS-REx (Origins, Spectral Interpretation, Resource Identification, Security, Regolith Explorer) (उत्पत्ति, स्पेक्ट्रल व्याख्या, संसाधन पहचान, सुरक्षा, रेजोलिथ एक्सप्लोरर) नासा का क्षुद्रग्रह-अध्ययन ( asteroid-study) और नमूना-वापसी (sample-return) मिशन है। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य 101955 बेन्नू (101955 Bennu) से कम से कम 60 ग्राम (2.1 औंस) का एक नमूना प्राप्त करना है |

    OSIRIS-Rex के बारे में जाने –

    https://www.nasa.gov/osiris-rex

    मिशन ओएसआईआरआईएस-रेक्स (OSIRIS-Rex)

    OSIRIS-REx को 8 सितंबर 2016 को लॉन्च किया गया था, 22 सितंबर 2017 को इसने पृथ्वी से उड़ान भरी, और 3 दिसंबर 2018 को बेन्नू अस्टोरोइड पर पहुचा । इसने अगले कई महीने सतह का विश्लेषण करने में बिताए ताकि एक उपयुक्त जगह का पता लगाया जा सके जिससे नमूना निकाला जा सके। 20 अक्टूबर 2020 को, OSIRIS-REx ने बेन्नू की सतह को छुआ और सफलतापूर्वक एक नमूना एकत्र किया। ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स के 24 सितंबर 2023 को अपने नमूने के साथ पृथ्वी पर लौटने की उम्मीद है और बाद में 99942 एपोफिस (99942 Apophis क्षुद्रग्रह) का ओएसआईआरआईएस-एपेक्स (OSIRIS-APEX ) (‘एपोफिस एपेक्स) के रूप में अध्ययन करने के लिए अपना नया मिशन शुरू करेगा, जो 2029 में उस क्षुद्रग्रह पर पहुंचेगा।

    101955 बेन्नू (101955 Bennu) क्या है ?

    101955 बेन्नू 11 सितंबर 1999 को लीनियर प्रोजेक्ट द्वारा खोजे गए अपोलो समूह में एक कार्बनयुक्त क्षुद्रग्रह है। यह एक संभावित खतरनाक वस्तु है जो सेंट्री रिस्क टेबल पर सूचीबद्ध है | इस क्षुद्रग्रह का 2178 और 2290 के बीच इसके पृथ्वी से टकराने की 1,800 में 1 संचयी संभावना है। विशेषकर 24 सितंबर 2182 को सबसे बड़ा जोखिम माना गया है | इसका नाम प्राचीन मिस्र के पौराणिक पक्षी बेन्नू के नाम पर रखा गया है, जो सूर्य, सृष्टि और पुनर्जन्म से जुड़ा है।

  • मानव प्रजनन तंत्र | Human Reproductive System

    मानव प्रजनन तंत्र | Human Reproductive System

    इस आर्टिकल में हम प्रजनन तंत्र के बारे में जानेगे | प्रजनन तंत्र (Reproductive System) क्या है, मानव प्रजनन तंत्र | Human Reproductive System क्या है, अलैगिक जनन (Asexual Reproduction) और लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) क्या है, नर प्रजनन तंत्र (Male reproductive system) और उसके मुख्य अंग कोनसे है, मादा जनन तंत्र (Female reproductive system)  और उसके मुख्य अंग कोनसे है, मानव प्रजनन की क्रियाविधि (Mechanism of human reproduction) कोन कोनसी है, आदि |

    प्रजनन तंत्र (Reproductive System)

    प्रजनन तन्त्र (Reproductive System) वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा जीवधारी अपने जैसा जीव उत्पन्न करता है, जनन या प्रजनन (reproduction) कहलाता है। इस प्रक्रम द्वारा जीव अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं | प्रजनन वह प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी ही जैसी अन्य उर्वर सन्तानों की उत्पत्ति करता है और इस प्रकार अपनी संख्या में वृद्धि कर अपनी जाति के अस्तित्व को बराबर बनाए रखकर उसे विलुप्त होने से बचाता है। जीवों के प्रजनन में भाग लेने वाले अंगों को प्रजनन अंग (Reproductive organs) और एक जीव के सभी प्रजनन अंगों को सम्मिलित रूप से प्रजनन तंत्र (Reproductive system) कहते हैं।

    प्राणियों में जनन के प्रकार

    प्राणियों में जनन के निम्न प्रकार है :

    अलैगिक जनन (Asexual Reproduction)

    जनक की इस विधि में जीव की कायिक कोशिकाओं में कई बार विभाजन होता है, जिससे समान रूप के दो अथवा अधिक नए जीव बनते हैं। अलैगिक जनन निम्न विधियों द्वारा होता है

    (i) द्विविखण्डन (Binary fission) – एककोशिकीय जीव; जैसे अमीबा, पैरामीशियम।

    (ii) बहुविखण्डन (Multiple fission) – एक कोशिका से अनेक कोशिकाओं अर्थात् जीवों की उत्पत्ति होती है; जैसे- मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम में

    (iii) मुकुलन (Budding) – इस विधि में शरीर में एक उभार बन जाता है। इस पार्श्व उभार को मुकुल (bud) कहते हैं। जनक शरीर के ऊपर मुकुल धीरे-धीरे बड़ा होकर एक नए जीव बन जाते हैं। हाइड्रा एवं यीस्ट कोशिकाओं में होता है।

    (iv) पुनरुद्भवन (Regeneration) खण्डित शारीरिक भागों को पुनः प्राप्त करने की जीव की क्षमता पुनर्जनन या पुनरुद्भवन है। हाइड्रा, प्लेनेरिया तथा स्पंजों में यह क्रिया होती है। हाइड्रा को यदि टुकड़ों में काटा जाए, तो इसका प्रत्येक टुकड़ा एक नया हाइड्रा होगा।

    लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

    लैंगिक जनन के लिए दो लिंगों, नर और मादा का होना आवश्यक है। अधिकतर प्राणियों में मनुष्यों की भाँति नर तथा मादा जनन अंग अलग-अलग जीव में होते हैं ऐसे जीव एकलिंगी (unisexual) कहलाते हैं। पौधों तथा कुछ प्राणियों में जैसे फीताकृमि, केंचुआ, तारामीन आदि में नर तथा मादा लैंगिक अंग एक ही जीव में पाए जाते हैं। ऐसे जीवों को द्विलिंगी या उभयलिंगी (hermaphrodite) कहते हैं।

    लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

    1. जनद प्राथमिक लैंगिक अंग होते हैं, जो अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा युग्मक बनाते हैं। वृषण नर जनद होता है, जो शुक्राणुओं को उत्पन्न करता है तथा अण्डाशय मादा जनद है, जो अण्डाणुओं को उत्पन्न करता है।

    2. लैंगिक जनन का प्रारम्भ दो विभिन्न युग्मकों के सम्मिलन (fusion) से होता है, जिसे निषेचन (fertilization) कहते हैं। निषेचन के बाद एक युग्मनज (zygote) बनता है, जो नए जीव में विकसित होता है।

    3. मछलियों एवं उभयचरों में निषेचन सामान्यतया शरीर के बाहर होता है। इसे बाह्य निषेचन (जो सदैव जलीय माध्यम में होता है), कहते हैं, जबकि आन्तरिक निषेचन सरीसृपों, पक्षियों तथा स्तनधारियों में होता है।

    4. लैंगिक जनन एक उच्च विकसित प्रक्रिया है तथा अलैंगिक जनन की तुलना में इसके बहुत लाभ हैं। लैंगिक जनन संततियों में गुणों की विभिन्नताओं को बढ़ावा देता है क्योंकि इसमें दो विभिन्न तथा लैंगिक असमानता वाले जीवों से आए युग्मकों का संलयन होता है।

    मानव प्रजनन तन्त्र (Human Reproductive System)

    मानव एकलिंगी (Unisexual) प्राणी है, अर्थात् नर और मादा लिंग अलग-अलग जीवों में पाये जाते हैं। जो जीव केवल शुक्राणु उत्पन्न करते हैं उसे नर कहते हैं। जिन जीवों से केवल अण्डाणु की उत्पत्ति होती है, उन्हें मादा कहते हैं। शुक्राणु तथा अंडाणु के निषेचन ( Fer tilization ) से युग्मनज ( Zygote ) का निर्माण होता है जो आगे चल कर नए जीव का निर्माण करता है ।

    मानव में प्रजनन तंत्र अन्य जन्तुओं की अपेक्षा बहुत अधिक विकसित और जटिल होता है। मानव में अंडे का निषेचन (Fertilization) फैलोपियन नलिका (Fallopian tube) तथा भ्रूणीय तथा (Embryonic development) गर्भाशय (Uterus) में होता है।

    मानव जरायुज (viviparous) होते हैं अर्थात् ये सीधे शिशु को जन्म देते हैं। मानव में जनन अंग मादा में 12 से 13 वर्ष की उम्र में तथा नर में 15 से 18 वर्ष की उम्र में प्रायः क्रियाशील हो जाते हैं। प्रजनन अंग भी कुछ हार्मोन (Hormone) का स्राव (secretion) करते हैं जो शरीर में अनेक प्रकार के परिवर्तन लाते हैं। ऐसे परिवर्तन मादा में प्रायः वक्ष तथा जनन अंगों पर बाल उगने तथा नर में दाढ़ी एवं मूंछ आने से परिलक्षित होता है। मानव में नर तथा मादा प्रजनन अंग पूर्णतया अलग अलग होते हैं।

    लैंगिक जनन हेतु इस के लिए उत्तरदायी जनन कोशिकाओं का विकास एक विशेष अवधि जिसे यौवनांरभ (Puberty) कहा जाता है में होता है । इस अवस्था में लैगिंक विकास दृष्टिगोचर होने लगता है तथा जनन परिपक्वता आती है ।


    मनुष्य में लैगिंक परिपक्वता 18 – 19 वर्ष की उम्र में पूर्ण हो जाती है । इस अवधि में मनुष्यों की संवेदनाओं तथा उसके बौद्धिक व मानसिक स्तर में परिवर्तन आता है । यौवनांरभ से लैगिंक परिपक्वता तक आए परिवर्तनों के मूल में विभिन्न हार्मोनो का स्त्रावंण है | मानव नर में टेस्टोस्टेरोन Testosterone ) तथा स्त्रियों में एस्ट्रोजन (Estrogen) तथा प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) प्रमुख लिंग हार्मोन हैं ।

    लड़को में यौवनांरभ के लक्षण – आवाज का भारी होना , दाढ़ी मूंछ आना , काँख एंव जननांग क्षेत्र में बालों का आना , त्वचा तैलीय होना आदि ।

    लड़कियों में यौवनांरभ के लक्षण – लड़कियों में में स्तन का बनाना तथा आकार में वृद्धि , त्वचा का तैलीय होना, जननांग क्षेत्र में बालों का आना, रजोधर्म (Menstrual cycle) का शूरू होना, आदि यौवनांरभ के लक्षण हैं।

    नर जनन अंग – वृषण , वृषणकोष , शुक्रवाहिनी , शुक्राशय , प्रोस्टेट ग्रन्थि, मूत्र मार्ग तथा शिश्न ।

    मादा जनन अंग – अण्डाशय , अण्डवाहिनी , गर्भाशय तथा योनि ।

    नर प्रजनन तंत्र (Male reproductive system)

    जनन कोशिका उत्पादित करने वाले अंग एवं जनन कोशिकाओं को निषेचन के स्थान तक पहुँचाने वाले अंग संयुक्त रूप से नर प्रजनन तंत्र कहलाते हैं।

    मानव के नर प्रजनन तंत्र में निम्नलिखित लैंगिक अंग (Sex Organs) एवं उनसे सम्बद्ध अन्य रचनाएँ पायी जाती हैं –

    वृषण एवं वृषण कोष (Scrotum), 2. अधिवृषण (Epididymis) 3. शुक्रवाहिका, 4. शुक्राशय (Seminal vesicles), 5. मूत्र मार्ग (Urethera), 6. शिश्न (Penis), 7. पुरःस्थ या प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland)

    जनद अंग (Gonads)

    ये वे अंग छोटे होते हैं जो या तो लैंगिलैं क कोशिकाओं या युग्मकों (Sex cells तथा Gametes) का निर्माण करते हैं । साथ ही ये कुछ हार्मोन का स्त्राव भी करते है । ये अंग जनद (Gonads) कहलाते हैं । नर में जनद वृषण (Testis) कहलाते है तथा नर जनन कोशिका – शुक्राणु का निर्माण करने के लिए उत्तरदायी होते हैं । यह उदर गुहा के बाहर वृषण कोष (Scrotum) में उपस्थित होता है । वृषण के दो भाग होते है | प्रथम जो शुक्राणु निर्माण करता है तथा द्वितीय अंतः स्त्रावी ग्रन्थि के तौर पर टेस्टोस्टेरान हार्मोन का स्त्राव करता है ।

    वृषण एवं वृषण कोष (Testes and scrotal sac)

    मानव प्रजनन अंगों में वृषण मुख्य तथा अन्य सहायक अंग हैं। इसमें शुक्राणुओं का निर्माण होता है तथा इससे पुरुष हॉमोन टेस्टोस्टेरॉन का अन्तःस्राव होता है। वृषण नर में पाया जाने वाला प्राथमिक जनन अंग है। ये नर जनन ग्रन्थियाँ हैं जो अण्डाकार होती हैं। इनकी संख्या दो होती है। वृषण त्वचा की बनी एक थैली जैसी रचना में स्थित रहते हैं जो शरीर के बाहर लटकती रहती है। इसे वृषण कोष (Scrotal Sae )कहते हैं। वृषण की कोशिकाओं द्वारा नर युग्मक अर्थात् शुक्राणुओं का निर्माण होता है।

    शुक्राणु (sperm) उत्पादन के लिए आवश्यक ताप शरीर के ताप से कम होता है। यही कारण है कि वृषण उदर गुहा के बाहर वृषण कोष में स्थित होते हैं। एक औसत स्खलन में लगभग एक चम्मच शुक्र स्राव होता है। इसमें शुक्राणुओं की संख्या 20 से 20 लाख तक होती है।

    शुक्राणु की लम्बाई 5 माइक्रॉन होती है। यह तीन भाग में विभाजित रहता है- सिर, ग्रीवा और पुच्छ। शुक्राणु शरीर में 30 दिन तक जीवित रहते हैं जबकि मैथून के पश्चात स्त्रियों में केवल 72 घण्टे तक ये जीवित रहते हैं। वृषण में एक प्रकार का द्रव भरा रहता है जिसे वृषण द्रव (seminal fluid) कहते हैं। वृषण का प्रत्येक खण्ड शुक्रजनन नलिकाओं (seminiferous tubules) से भरा रहता है। ये नलिकाएँ छल्लेदार होती है।

    शुक्रजनन नलिकाओं के बीच अंतराली कोशिकाओं (Interstitial cells) के समूह पाये जाते हैं जो नर जनन हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) का स्राव करती है। यह हार्मोन गौण लैंगिक लक्षणों (secondary sexual characters) के विकास और नियंत्रण में सहायक होता है। सभी शुक्रजनन नलिकाएँ आपस में मिलकर शुक्र अपवाहिका (vas efferentia) बनाती है। शुक्र-अपवाहिकाएँ मिलकर अन्त में अधिवृषण-वाहिनी (Epididymis duct) बनाती है।

    वृषण में ही शुक्रजनन नलिकाओं द्वारा शुक्राणु कोशिकाओं की उत्पत्ति होती है। वृषण से शुक्राणु कोशिकाएँ अधिवृषण (Epididyonis) में चली जाती हैं जहाँ वे संचित रहती हैं। वृषण का प्रमुख कार्य शुक्राणुओं का निर्माण करना और नर हार्मोन टेस्टोस्टेरान की उत्पत्ति करना है।

    अधिवृषण (Epididymis)

    यह एक 6 मीटर लम्बी कुण्डलित नलिका होती है जो प्रत्येक वृषण के पीछे स्थित होती है। यह वृषण से अच्छी तरह जुड़ी रहती है। इसका एक छोर वृषण से जुड़ा रहता है तथा दूसरा छोर अधिवृषण से आगे बढ़कर शुक्रवाहिका (vas deferens) बनाता है। अधिवृषण शुक्राणुओं के प्रमुख संग्रह स्थान का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त अधिवृषण में शुक्राणुओं का परिपक्वन (Maturation) भी होता है। शुक्राणु यहीं सक्रियता प्राप्त करते हैं।

    शुक्रवाहिका (Vas deferens)

    यह एक पतली नलिका होती है जिसकी भित्तियाँ मांसपेशियों की बनी होती है। अधिवृषण से शुक्राणु शुक्रवाहिका में पहुँचते हैं। शुक्रवाहिका अधिवृषण को शुक्राशय (seminal vesicle) से जोड़ती है। ये शुक्राणुओं को आगे की ओर बढ़ाने का काम करती हैं।

    शुक्राशय (vas vesicles)

    यह एक जोड़ी पतली पेशीयुक्त भितियोंवाली रचना होती है। ये पालियुक्त (Lobed) रचनाएँ होती हैं। यह प्रोस्टेट ग्रन्थियों (Prostate glands) के ऊपर स्थित रहता है। दोनों ओर के शुक्राशय मिलकर स्खलनीय वाहिनी (Ejaculatory duct) का निर्माण करते हैं। शुक्राशय से एक प्रकार का चिपचिपा पदार्थ स्रावित होता है। 

    पुरःस्थ या प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland)

    यह मूत्र मार्ग (Urethra) से मूत्राशय (Urinary bladder) तक सम्बद्ध रहता है। इसका आकार गोल सुपारी जैसा होता है। दोनों पुरःस्थ (Prostate) ग्रन्थियाँ संयुक्त होकर एक सामान्य पुरःस्थ ग्रन्थि का निर्माण करती है। इसमें लगभग दो दर्जन नलिकाएँ होती हैं जो मूत्रमार्ग (Urethra) में खुलती है। पुरःस्थ से एक प्रकार का द्रव स्रावित होता है जिसे पुरःस्थ द्रव (Prostate fluid) कहते हैं। यह द्रव शुक्र (semen) को विशिष्ट गंध (smell) प्रदान करता है। पुरःस्थ द्रव शुक्राशय द्रव के साथ मिलकर मूत्रमार्ग (Urethra) में पहुँचते हैं।

    शिश्न (Penis)

    शिश्न पुरुषों का संभोग करने वाला अंग होता है। शिश्न के माध्यम से ही शुक्राणु मादा के प्रजनन तंत्र में पहुँचते हैं। मूत्र मार्ग (Urethra) मूत्राशय से प्रारम्भ होकर शिश्न से गुजरकर उसके (शिश्न के) ऊपरी भाग में खुलता है। शिश्न में अत्यधिक रक्त की आपूर्ति होती है। साथ-ही-साथ इसकी पेशियाँ भी विशिष्ट प्रकार की होती है। जो इसे कड़ापन प्रदान करती है। शिश्न शुक्र (semen) को शरीर से बाहर निकालकर मादा की योनि (vagina) के भीतर तक पहुँचाता है।

    मादा जनन तंत्र (Female reproductive system) 

    मादा जनन तंत्र में निम्नलिखित जनन अंग होते हैं- 1. अण्डाशय, 2. अण्डवाहिनियाँ, 3. गर्भाशय, 4. योनि।

    अण्डाशय (Ovaries)

    प्रत्येक मादा में एक जोड़ा अंडाशय होता है। ये उदर के निचले भाग में श्रोणिगुहा (Pelvie cavity) में दोनों ओर दाएँ और बाएँ एक-एक स्थित होते हैं। प्रत्येक अंडाशय एक अंडाकार (Oval) रचना होती है। प्रत्येक अंडाशय लगभग 4 सेमी लम्बा, 2.5 सेमी चौड़ा और 1.5 सेमी मोटा होता है। अंडाशय पेरिटोनियम (Peritoneurn) झिल्ली द्वारा उदर (Abdomen) से सटा रहता है। अंडाशय के भीतर अंडाणुओं का अंडजनन द्वारा निर्माण होता है। अंडाशय का बाह्य स्तर एपिथीलियम का बना होता है जिसे जनन एपिथीलियम (Germinal epithelium) कहते हैं।

    अंडाशय का आन्तरिक भाग तंतुओं एवं संयोजी ऊतक (Connective tissue) का बना होता है, जिसे स्टोमा (stroma) कहते हैं। अंडाशय का मुख्य कार्य अंडाणु (Ovum) पैदा करना है। अंडाशय से दो हार्मोन आस्ट्रोजन (Oestrogen) तथा प्रोजेस्टेरान (Progesterone) का स्राव (Secretion) होता है, जो ऋतुस्राव (Menstruation) को नियंत्रित करते हैं।

    अण्डवाहिनियाँ (Fallopian tube)

    अण्डवाहिनी या फैलोपियन नलिका की संख्या दो होती है, जो गर्भाशय के ऊपरी भाग के दोनों बगल लगी रहती है। प्रत्येक फेलोपियन नलिका लगभग 10 सेमी लम्बी होती है। इस नलिका का एक सिरा गर्भाशय से सम्बद्ध रहता है और दूसरा सिरा अण्डाशय की ओर अंगुलियों के समान झालर बनाता है। इस रचना को फिम्ब्री (Fimbri) कहते हैं।

    अण्डाणु जब अण्डाशय से बाहर निकलता है तब वह फिम्ब्री द्वारा पकड़ लिया जाता है। इसके बाद अण्डाणु फेलोपियन नलिका की गुहा में पहुँच जाता है। फेलोपियन नलिका से अण्डाणु गर्भाशय में पहुँचता है। फेलोपियन नलिका का प्रमुख कार्य फिम्ब्री द्वारा अण्डाणु को पकड़ना और गर्भाशय में पहुँचाना है।

    गर्भाशय (Uterus)

    यह एक नाशपाती के समान रचना होती है जो श्रोणिगुहा (Pelvie Cavity) में स्थित होती है। यह सामान्यतः 7.5 सेमी लम्बा, 5 सेमी चौड़ा तथा 3.5 सेमी मोटा होता है। इससे ऊपर की तरफ दोनों ओर अर्थात् दाएँ और बाएँ कोण पर अण्डवाहिनी खुलती है। इसका निचला भाग सँकरा होता है जिसे ग्रीवा (Cervix) कहते हैं। ग्रीवा आगे की ओर योनि में परिवर्तित हो जाता है।

    गर्भाशय का निचला छिद्र इसी में खुलता है। गर्भाशय की भित्ति पेशीय (Muscular) होती है, जिसके भीतर खाली जगह होती है। गर्भाशय की भित्ति के अंदर की ओर एक कोशिकीय स्तर होता है जिसे गर्भाशय अंत: स्तर (Endometrium) कहते हैं। गर्भाशय प्रमुख कार्य निषेचित अण्डाणुओं को भ्रूण परिवर्द्धन हेतु उचित स्थान प्रदान करना है।

    योनि (vagina)

    यह एक नली के समान रचना होती है। यह लगभग 7.5 सेमी लम्बी होती है। यह बाहर के तल से गर्भाशय तक फैली रहती है। इसके सामने मूत्राशय (Urinary bladder) तथा नीचे मलाशय (Recturn) स्थित होता है। योनि की दीवार पेशीय ऊतक की बनी होती है। योनि का एक सिरा मादा जनन छिद्र के रूप में बाहर खुलता है तथा दूसरा सिरा पीछे की ओर गर्भाशय की ग्रीवा (Cervix) से जुड़ा रहता है। योनि के शरीर के बाहर खुलने वाले छिद्र की योनि द्वार (Vaginal orifice) कहते हैं।

    योनि की दीवार में वल्बोरीथल ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं, जिससे एक चिपचिपा द्रव निकलता है। यह द्रव संभोग के समय योनि को चिकना बनाता है। योनि एवं मूत्रवाहिनी के द्वार के ऊपर एक छोटा-सा मटर (Pea) के दाने के जैसा उभार स्थित होता है जिसे भग शिशिनका (Clitoris) कहते हैं। यह एक अत्यन्त ही उत्तेजक अंग होता है, जिसे स्पर्श करने या शिश्न (Penis) के सम्पर्क में आने पर स्री को अत्यधिक सुखानुभूति होती है। मैथून के समय शिश्न से वीर्य निकलकर योनि में गिरता है तथा योनि इसे गर्भाशय में पहुँचा देती है।

    अण्डोत्सर्ग (Ovulation)

    अण्डाणु के परिवर्द्धन के साथ-साथ गर्भाशय भी परिवर्द्धित होता है। परिवर्द्धन की ये क्रियाएँ हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती हैं। 28 दिन की सक्रियता में मानव अण्डाशय सामान्यतः केवल एक अण्डाणु की उत्पत्ति करता है। अण्डाशय द्वारा अण्डाणु की निर्मुक्ति को अण्डोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं।

    ऋतुस्राव चक्र (Menstruation cycle)

    ऋतुस्राव चक्र का पाया जाना प्राइमेट्स का प्रमुख लक्षण है। स्त्री का प्रजनन काल 12-13 वर्ष की उम्र में प्रारम्भ होता है जो 40-50 वर्ष की उम्र तक चलता है। इस प्रजनन काल में गर्भावस्था को छोड़कर प्रति 26 से 28 दिनों की अवधि पर गर्भाशय से रक्त तथा इसकी आन्तरिक दीवार से शलेष्म का स्राव होता है। यह स्राव तीन-चार दिनों तक चलता है। इसे ही रजोधर्म या मासिक धर्म या ऋतुस्राव चक्र (Menstruation cycle) कहते हैं। ऋतुस्राव के प्रारम्भ होने के 14 दिन बाद अण्डोत्सर्ग होता है। यह अण्डोत्सर्ग दोनों अण्डाशयों से बारी-बारी से होती है।

    अण्डोत्सर्ग के कुछ समय के पश्चात अण्डाणु अण्डवाहिनी में पहुँच जाता है और 15वें से 19वें दिन तक इसमें रहता है। इस बीच यदि स्त्री सम्भोग करे, तो यह अण्डाणु निषेचित होकर गर्भाशय में चला जाता है, अन्यथा वह अगले ऋतुस्राव में बाहर निकल जाता है। लड़कियों में मासिक धर्म या ऋतुस्राव चक्र प्रथम बार 12-13 वर्ष की उम्र में प्रारम्भ होता है, इसे मेनार्कि (Menarche) कहते हैं।

    अण्डोत्सर्ग के पश्चात पुटक (Follicle) पीले रंग का हो जाता है। अब इस पुटक को पीत पिण्ड या कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus leuteum) कहते हैं। पीतपिण्ड या कॉर्पसल्यूटियम के परिवर्द्धन का भी नियंत्रण हार्मोन द्वारा होता है। कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा एक हार्मोन का स्राव होता है जिसे प्रोजेस्टेरॉन (Progesterone) कहते हैं।

    गर्भधारण हेतु उपयुक्त परिस्थितियां (Favourable conditions for pregnancy): 

    सम्भोग क्रिया द्वारा हमेशा गर्भधारण नहीं होता है। इसके लिए कुछ परिस्थितियों का अनुकूल होना आवशयक है ये परिस्थितियाँ हैं-

    1. गर्भधारण के लिए आवश्यक है कि ऋतुस्राव के 14वें दिन के आस-पास या 11वें से 18वें दिन के अन्दर सम्भोग अनिवार्य रूप से हो।
    2. अण्डवाहिनी (Fallopian tube) एवं गर्भाशय सूजन एवं संक्रमण से मुक्त हो।
    3. वीर्य (semen) में शुक्राणुओं (sperms) की संख्या सामान्य हो।

    मानव प्रजनन की क्रियाविधि (Mechanism of human reproduction)

    मानव के प्रजनन में तीन अवस्थाएँ होती हैं। ये हैं-

    युग्मक जनन (Gametogenesis)

    वृषण तथा अण्डाश्य में अगुणित युग्मकों ( Haploid gametes ) की निर्माण विधि को युग्मकजनन कहा जाता है । नर के वृषण में होने वाली इस क्रिया द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण होता है तथा यह क्रिया शुक्रजनन कहलाती है । मादा के अण्डाशय में युग्मको ‘ की निर्माण क्रिया जिस के द्वारा अण्डाणु का निर्माण होता है । अण्डजनन कहलाती है ।

    निषेचन (Fertilization)

    मादा में उपस्थित अण्डाणु मेथुन के दौरान नर द्वारा छोड़े गए शुक्राणुओं के संपर्क में आते हैं तथा संयुग्मन कर युग्मनज ( Zygote ) का निर्माण करते है । यह प्रक्रिया निषेचन कहलाती है

    भ्रूणीय विकास (Gametogenesis)

    वृषण (Testes) एवं अण्डाशयों (Ovaries) में युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मक जनन (Gametogenesis) कहते हैं। युग्मकों का निर्माण वृषण तथा अण्डाशय की जनन कोशिकाओं में अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा होता है। वृषण में शुक्राणुओं (sperms) का निर्माण शुक्रजनन (Spermatogenesis) तथा अण्डाणु (ovum) का अण्डाशय में निर्माण अण्डजनन (Oogenesis) कहलाता है।

    शुक्रजनन (Spermatogenesis) एवं अण्डजनन (Oogenesis) में समानता एवं विभिन्नताएं

    समानता (Similarities)
    शुक्रजननअण्डजनन
    1. शुक्राणुओं का निर्माण जनन एपिथीलियम की कोशिकाओं के विभाजन से होता है।1. अण्डाणुओंका निर्माण भी जनन एपिथीलियम की कोशिकाओं के विभाजन से होता है।
    2. शुक्रजनन क्रिया में गुणन, वृद्धि एवं परिपक्वन तीनों प्रावस्थाएँ होती हैं।2. अण्डजनन क्रिया में भी शुक्रजनन की तरह तीनों प्रावस्थाएँ होती हैं।
    3. शुक्रजनन के परिपक्वन प्रावस्था में दो विभाजन होते हैं।3. अण्डजनन के परिपक्वन प्रावस्था में भी शुक्रजनन के परिपक्वन प्रावस्था की तरह दो विभाजन होता है।
    4. समसूत्री विभाजन द्वारा गुणन प्रावस्था में कोशिकाएँ संख्या में वृद्धि करती है।4. इसमें भी समसूत्री विभाजन द्वारा गुणन प्रावस्था में कोशिकाएँ संख्या में वृद्धि करती हैं।
    5. इसमें अन्तिम उत्पाद नर युग्मक (Male gametes) बनते हैं।5. इसमें अन्तिम उत्पाद मादा युग्मक (Female gametes) बनते हैं।
    विभिन्नताएं (Dissimilarities):
    1. एक स्पर्मेटोसाइट से चार शुक्राणुओं का निर्माण होता है।1. एक ऊगोनिया (Oogonia) से केवल एक अण्डाणु का निर्माण होता है।
    2. शुक्रजनन क्रिया में कोई भी ध्रुव कोशिका नहीं बनती है।2. अण्डजनन में दो या तीन ध्रुव कोशिकाएँ बनती हैं।
    3. स्पर्मेटोसाइट से बने चारों शुक्राणु निषेचन क्रिया में भाग ले सकते हैं।3. ऊगोनिया से बना अण्डाणु निषेचन क्रिया में भाग ले सकता है। ध्रुव कोशिकाए निषेचन क्रिया में भाग नहीं लेती हैं।
    4. शुक्राणु छोटे एवं सक्रिय होते हैं।4. अण्डाणु बड़े एवं निष्क्रिय होते हैं।

    निषेचन (Fertilization)

    नर युग्मक (शुक्राणु) एवं मादा युग्मक (अण्डाणु) के आपस में सम्मिलन से युग्मनज (zygote) बनने की क्रिया को निषेचन कहते हैं। मनुष्य में अन्तः निषेचन (Internal fertilization) पाया जाता है। मनुष्य में निषेचन की क्रिया मादा की अण्डवाहिनी (Fallopian tube) में होती है। इस क्रिया में नर युग्मक का केवल केन्द्रक भाग लेता है जबकि सम्पूर्ण मादा युग्मक इसमें भाग लेता है।

    भ्रूणीय विकास (Embryonic development)

    निषेचन क्रिया के बाद बना युग्मनज तीव्रता से समसूत्री विभाजनों द्वारा विभाजित होने लगता है, और अन्ततः गर्भाशय में एक पूर्ण विकसित शिशु को स्थापित करता है। निषेचन के लगभग 10 सप्ताह तक के विकसित युग्मनज को भ्रूण (Embryo) तथा युग्मनज में होने वाले विभिन्न क्रमिक परिवर्तनों को भ्रूणीय विकास कहते हैं।

    भ्रूण में 5वें सप्ताह तक तीन जननिक स्तरों का निर्माण हो जाता है। ये तीन जननिक स्तर हैं- (a) इण्डोडर्म (Endoderm) (b) मीसोडर्म (Mesoderm) तथा (c) एक्टोडर्म (Ectoderm)

    इसके पश्चात इन स्तरों से विभिन्न शारीरिक अंगों का निर्माण होता है। भ्रूण में 7वें से 9वें सप्ताह के मध्य तक हाथ, पैर, श्वसन तंत्र, तंत्रिका तंत्र एवं पाचन तंत्र बन जाते हैं। तीसरे माह में भ्रूण में कंकाल तंत्र बन जाता है। चौथे माह में सिर एवं शरीर पर रोएँ, पाँचवें माह में आहारनाल, रुधिर व अस्थिमज्जा बन जाते हैं। छठे माह में भ्रूण छोटे शिशु का रूप धारण कर लेता है।

    सातवें माह तक शिशु के सभी अंग अच्छी तरह कार्य करने लगते हैं। आठवें माह में उसमें वसा का जमाव होने लगता है जबकि नवें माह में वह जन्म के लिए तैयार हो जाता है। भ्रूण का पोषण जरायु (Chorin) एम्नियान एवं अपरा (Placenta) द्वारा होता है। मनुष्य में गर्भाधान काल 280 दिनों का होता है। इसके पश्चात प्रसव द्वारा शिशु मादा के शरीर के बाहर आ जाता है।

    मानव प्रजनन तंत्र | Human Reproductive System – महत्वपूर्ण तथ्य

    1. यौवनारम्भ (Puberty): मनुष्य के जीवन काल में जब उसमें जनन क्षमता आरम्भ होती है, वह समय यौवनारम्भ (Puberty) कहलाता है। जनन की क्षमता स्त्रियों में सामान्यतः 12-16 वर्ष की उम्र में प्रारम्भ होती है जबकि 40-50 वर्ष की आयु में समाप्त हो जाती है। पुरुषों में भी यौवनारम्भ प्रायः 12-16 वर्ष की उम्र में होता है जबकि 50 वर्ष की उम्र के बाद धीरे-धीरे जनन क्षमता घटती जाती है।
    2. गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters): यौवनारम्भ के समय मनुष्य के शरीर में अनेक प्रकार के परिवर्तन होते हैं तथा अनेक ऐसे परिवर्तन होते हैं जो मादा को नर से विभेदित करते हैं। इन लक्षणों को गौण लैंगिक लक्षण कहते हैं।
    3. मेनार्कि (Menarche)– लड़कियों में मासिक चक्र का प्रथम बार प्रारम्भ होना (12-13 वर्ष की उम्र में) मेनार्कि (Menarche) कहलाता है।
    4. रजनोवृति (Menopause): स्त्रियों में 40-50 वर्ष की उम्र के पश्चात ऋतु स्राव नहीं होता है। इसे ही रजनोवृति (Menopause) कहते हैं।
    5. अण्डोत्सर्ग (Ovulation): अण्डाशय द्वारा अण्डाणु की निर्मुक्ति को अण्डोत्सर्ग कहते हैं।
    6. जरायु (Chorion): गर्भ की सबसे बाहरी झिल्ली को जरायु कहते हैं।
    7. अंकुर (Villi): जरायु से अंगुलियों के आकार के अनेक प्रवर्द्ध निकलते हैं, जिन्हें अंकुर कहते हैं।
    8. अपरा (Placenta): अंकुर और गर्भाशय कोशिकीय परत के सम्पर्क क्षेत्र को अपरा कहते हैं।
    9. नाभिरज्जु (Umbilical cord): गर्भ अपरा से एक मजबूत डोरी जैसी रचना से जुड़ा रहता है जिसे नाभिरज्जु कहते हैं। यह माता और गर्भ के बीच सम्पर्क अंग का कार्य करता है।
    10. युग्मनज (zygote): निषेचित अण्डाणु को युग्मनज कहा जाता है।
    11. कृत्रिम वीर्य सेचन (Artificial insemination): जब शुक्राणु की मादा योनि (Vagina) में कृत्रिम विधि द्वारा स्थानान्तरित किये जाते हैं तो इस क्रिया को कृत्रिम वीर्यसेचन कहते हैं।
    12. आन्तरिक निषेचन (Internal fertilization): उच्च स्तनधारियों में निषेचन की क्रिया मादा के शरीर के अंदर होती है। इस प्रकार के निषेचन की आन्तरिक निषेचन कहते हैं।
    13. वीर्य सेचन (Insemination): मैथुन के समय नर के शिशन द्वारा मादा की योनि में वीर्य जमा करना वीर्य सेचन या इनसेमिनेशन कहलाता है।

    पादप प्रजनन (Plant Reproduction)

    अधिकांश आवृतबीजी पौधों में लैंगिक जनन होता है लेकिन कुछ में कर्तन; जैसे-गन्ने में, रोपण; जैसे- गुलाब, बौगेनविलिया में आदि पाया जाता है।

    लैंगिक जनन में अर्द्धसूत्री विभाजन से वीजाणुओं तथा इनके संलयन से द्विगुणित युग्मनज का निर्माण होता है।

    परागकण नर युग्मकोद्भिद् की प्रथम कोशिका है इसकी बाह्य परत स्पोरोपोलेनिन की बनी होती है। यह अधिक प्रतिरोध क्षमता रखती है।

    मादा जनन अंग में गुरूबीजाणु मात्र कोशिका से चार गुरूबीजाणु बनते हैं परन्तु केवल एक कार्यशील होता है, जो विभाजित होकर समान्यतया 7 कोशिकीय, 8 केन्द्रकीय पॉलीगोनम प्रकार का भ्रूणकोष बनाता है।

    एक नर युग्मक अण्ड से संयोग कर युग्मनज बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केन्द्रक से संयोग कर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक बनाता है अर्थात् आवृतबीजियों के निषेचन में पाँच केन्द्रक भाग लेते हैं, इसे द्विनिषेचन कहते है।


  • मानव कंकाल तंत्र (Human Skeletal System)

    मानव कंकाल तंत्र (Human Skeletal System)

    हमारे शरीर को निश्चित आकार एवं आकृति प्रदान करने के लिए एक ढांचे (structure) की आवश्यकता होती है। बिना ढांचे के शरीर न तो चल-फिर सकेगा और न ही कार्य कर सकेगा। यह ढांचा कंकाल तंत्र कहलाता है। कंकाल तन्त्र बाह्य व अन्तः सजीव या मृत कठोर संरचनाओं का एक तन्त्र है, जो शरीर को सहारा, आकार, सुरक्षा, सन्धि और गति प्रदान करता है।

    कंकाल तंत्र का निर्माण अस्थियाँ, उपास्थियाँ, संधियाँ आदि मिलकर करते हैं। इस तरह अस्थियों, उपास्थियों से मिलकर बने शरीर के ढाँचे को ही कंकाल तंत्र कहते हैं।

    मनुष्य का कंकाल तन्त्र (Human Skeletal System)

    मानव कंकाल तन्त्र छोटी-बड़ी कुल 206 अस्थियों से मिलकर बना हुआ है। मनुष्य की शिशु अवस्था में 300 अस्थियाँ पाई जाती है। अस्थियाँ आपस में सन्धियों द्वारा जुड़ी होती हैं, जिसके ऊपर मांसपेशियाँ पाई जाती है। अस्थि में 50% जल एवं 50% ठोस, अकार्बनिक एवं कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं।

    मानव अन्तःकंकाल की उत्पत्ति मीसोडर्म से होती है। संरचनात्मक दृष्टि से अंतःकंकाल दो भागों अस्थि एवं उपास्थि से मिलकर बना होता है।

    कंकाल तंत्र के प्रकार (Type of Skeletal System)

    शरीर में उपस्थिति के आधार पर कंकाल तंत्र के दो प्रकार के होते हैं:

    (i) बाहय कंकाल (Exo-skeleton)

    (ii) अंतः कंकाल (Endo-skeleton)

    बाहय कंकाल (Exo-skeleton)

    शरीर की बाहरी सतह पर पाये जाने वाले कंकाल को बाह्य कंकाल (Exo-skeleton) कहा जाता है। बाह्य कंकाल की उत्पत्ति भ्रूणीय एक्टोडर्म या मीसोडर्म से होती है । त्वचा की उपचर्म या चर्म ही बाह्य ककाल के रूप में रूपान्तरित हो जाती है।

    बाह्य कंकाल शरीर के आंतरिक अंगों की रक्षा करता है तथा यह मृत होता है। मछलियों में शल्क, कछुओं में ऊपरी कवच, पक्षियों में पिच्छ, तथा स्तनधारियों में बाल, बाह्य कंकाल के उदाहरण हैं जो इन प्राणियों को अत्यधिक सर्दी एवं गर्मी से सुरक्षित रखने के साथ ही शरीर को सुरक्षा प्रदान करते है |

    अंतः कंकाल (Endo-skeleton)

    शरीर के अंदर पाये जाने वाले कंकाल को अन्तः कंकाल (Endo-skeleton) कहते हैं। इसकी उत्पत्ति भ्रूणीय मीसोडर्म से होती है। अन्तःकंकाल सभी कशेरुकियों में पाया जाता है।

    कशेरुकियों में अन्तःकंकाल ही शरीर का मुख्य ढ़ाँचा बनाता है। यह मांसपेशियों (Muscles) से ढंका रहता है। संरचनात्मक दृष्टि से अन्तःकंकाल दो भागों से मिलकर बना होता है-

    1. अस्थि (Bone)

    2. उपास्थि (Cartilage)

    अस्थि (Bone)

    अस्थि एक ठोस, कठोर एवं मजबूत संयोजी ऊतक है जो तन्तुओं एवं मैट्रिक्स का बना होता है। इसके मैट्रिक्स में कैल्सियम और मैग्नीशियम के लवण पाये जाते हैं तथा इसमें अस्थि कोशिकाएँ एवं कोलेजन तंतु व्यवस्थित होते हैं।

    कैल्सियम एवं मैग्नीशियम के लवणों की उपस्थिति के कारण ही अस्थियाँ कठोर होती हैं। प्रत्येक अस्थि के चारों ओर तंतुमय संयोजी ऊतक से निर्मित एक दोहरा आवरण पाया जाता है जिसे परिअस्थिक कहते हैं। इसी परिअस्थिक के द्वारा लिगामेण्ट्स टेन्ड्न्स तथा दूसरी मांसपेशियाँ जुड़ी होती हैं।

    अस्थि मज्जा (Bone Marrow)

    मोटी तथा लम्बी अस्थियों में एक खोखली गुहा पाई जाती है, जिसे मज्जा गुहा (marrow cavity) कहा जाता है। इसमें स्थित तरल पदार्थ अस्थि मज्जा कहलाता है। यह दो प्रकार की होती है।

    (i) लाल अस्थि मज्जा – इसमें लाल रुधिर कणिकाओं (RBC) का निर्माण होता है। लाल अस्थि मज्जा केवल स्तनधारियों में पायी जाती है

    (ii) पीला अस्थि मज्जा – इसमें श्वेत रुधिर कणिकाओं (WBC)का निर्माण होता है।

    अस्थि के प्रकार

    विकास के आधार पर अस्थियाँ दो प्रकार की होती हैं।

    (i) कलाजात अस्थि (Investing bone)

    (ii) उपास्थिजात अस्थि (Cartilage bone)

    कलाजात अस्थि (Investing bone)

    यह अस्थि त्वचा के नीचे संयोजी ऊतक की झिल्लियों से निर्मित होती है। इसे मेम्ब्रेन अस्थि कहते हैं। खोपड़ी की सभी चपटी अस्थियाँ कलाजात अस्थियाँ होती हैं।

    उपास्थिजात अस्थि (Cartilage bone)

    यह अस्थियाँ सदैव भ्रूण की उपास्थि को नष्ट करके उन्हीं के स्थानों पर बनती हैं। इस कारण इन्हें रिप्लेसिंग बोन भी कहा जाता है। कशेरुक दण्ड तथा पैरों की अस्थियाँ उपास्थिजात अस्थियाँ होती हैं।

    2. उपास्थि (Cartilage)

    उपास्थि का निर्माण ककाली संयोजी ऊतकों से होता है। यह भी एक प्रकार का संयोजी ऊतक होता है। यह अर्द्ध ठोस, पारदर्शक एवं लचीले ग्लाइकोप्रोटीन से बने मैट्रिक्स से निर्मित होता है। उपास्थि का मैट्रिक्स थोड़ा कड़ा होता है। इसके मैट्रिक्स के बीच में रिक्त स्थान में छोटी-छोटी थैलियाँ होती हैं जिसे लैकुनी कहते हैं।

    लैकुनी में एक प्रकार का तरल पदार्थ भरा रहता है। लैकुनी में कुछ जीवित कोशिकाएँ भी पायी जाती हैं, जिसे कोण्ड्रियोसाइट कहते हैं। इसके मैट्रिक्स में इलास्टिन तन्तु एवं कोलेजन भी पाये जाते हैं। उपास्थि के चारों ओर एक प्रकार की झिल्ली पायी जाती है जिसे पेरीकोण्ड्रियम कहते हैं।

    मानव कंकाल तंत्र की अस्थियाँ

    मनुष्य के कंकाल में कुल 206 अस्थियाँ होती हैं। मनुष्य के कंकाल को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

    (i) अक्षीय कंकाल

    (ii) उपांगीय कंकाल

    1. अक्षीय कंकाल (Axial skeleton)

    शरीर का मुख्य अक्ष बनाने वाले कंकाल को अक्षीय कंकाल कहते हैं। इसमें खोपड़ी की हड्डी, मेरुदंड, पसलियां एवं उरोस्थि होते हैं।

    अक्षीय कंकाल के दो प्रकार होते हैं।

    (i) खोपड़ी (Skull)

    (ii) कशेरुक दण्ड (Vertebral Column)

    खोपड़ी

    मनुष्य के सिर के अन्तः कंकाल के भाग को खोपड़ी कहते हैं इसमें 29 अस्थियाँ होती हैं इसमें से 8 अस्थियाँ संयुक्त रूप से मनुष्य के मस्तिष्क को सुरक्षित रखती हैं। इन अस्थियों से बनी रचना को कपाल कहते हैं।

    कपालों की सभी अस्थियाँ सीवनों के द्वारा दृढ़तापूर्वक जुड़ी रहती हैं इनके अतिरिक्त 14 अस्थियाँ चेहरे को बनाती हैं 6 अस्थियाँ कान को हायड नामक एक और अस्थि खोपड़ी में होती हैं।

    मनुष्य की खोपड़ी में कुल 22 अस्थियाँ होती हैं। इनमें से 8 अस्थियाँ संयुक्त रूप से मनुष्य के मस्तिष्क को सुरक्षित रखती है। इन अस्थियों से बनी रचना को कपाल कहते हैं। ये सभी अस्थियाँ सीवनों के द्वारा जुड़ी रहती है।

    इनके अतिरिक्त 14 अस्थियाँ और होती हैं जो चेहरे को बनाती है। मनुष्य की खोपड़ी में महारन्ध्र नीचे की ओर होता है। महारन्ध्र के दोनों ओर अनुकपाल अस्थिकन्द  होते हैं, जो एटलस कशेरुक के अवतलों में स्थित होते हैं।

    खोपड़ी की मुख्य अस्थियाँ निम्न हैं :

    फ्रॉण्टल (Frontal),

    पेराइटल (Parietal),

    ऑक्सीपिटल (Occipital),

    टेम्पोरल (Temporal),

    मेलर (Maler),

    मैक्सिला (Maxilla),

    डेण्टरी (Dentary),

    नेजल (Nasal)

    कशेरुक दण्ड

    मनुष्य का कशेरुक दण्ड 33 कशेरुकाओं से मिलकर बना है सभी कशेरुक उपास्थि गदिदयो के द्वावा जुड़े रहते हैं। इन गदिदयो से कशेरुक दण्ड लचीला रहता हैं | कशेरुक दण्ड सिर को साधे रहता है तथा गर्दन एवं घड़ को आधार प्रदान करता है। इसमें छोटी-बड़ी 33 हड्डियाँ होती हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से कशेरुक कहते हैं।

    कशेरुक दण्ड में अस्थियों का योग

    1. गर्दन (Cervical region) 7 कशेरुक

    2. वक्ष (Thoracic region) 12 कशेरुक

    3. कटि (Lumber region) 5 कशेरुक

    4. त्रिक (Sacral region) 5 कशेरुक

    5. पुच्छ (Caudal region) 4 कशेरुक

    कुल = 33 कशेरूक

    इसका पहला कशेरुक दण्ड जो कि एटलस कशेरुक दण्ड कहलाता हैं।

    कशेरुक दण्ड के कार्य

    यह सिर को साधे रहता हैं।

    यह गर्दन तथा धड़ को आधार प्रदान करता हैं।

    यह मनुष्य को खड़े होकर चलने, खड़े होने आदि में मदद करता हैं।

    यह गर्दन व धड़ को लचक प्रदान करते हैं जिससे मनुष्य किसी भी दिशा में अपनी गर्दन और धड़ को मोड़ने में सफर होता हैं। यह मेरुरज्जु को सुरक्षा प्रदान करता हैं।

    अक्षीय कंकाल खोपड़ी के घटक

    मानव की खोपड़ी में 29 अस्थियां होती हैं जिनमें से 8 अस्थियां मानव के मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करती हैं और खोपड़ी के अस्थि के जोड़ से जुड़ी होती हैं। बाकी की अस्थियां मनुष्य का चेहरा बनाती है जिनमें से 14 अस्थियां उल्लेखनीय रूप से प्रतिवादी होती हैं।

    2. उपांगीय कंकाल (Appendicular Skeleton)

    उपांगीय कंकाल के अन्तर्गत मेखलाएँ तथा हाथ-पैरों की अस्थियाँ आती हैं।

    • मेखलाएँ
    • अंसमेखला
    • श्रोणि मेखला तथा पैर की अस्थियाँ

    मेखलाएँ (Girdles)

    मनुष्य में अग्रपाद तथा पश्चपाद् को अक्षीय कंकाल पर साधने के लिए दो चाप पाये जाते हैं, जिन्हें मेखलाएँ कहते हैं। अग्रपाद की मेखला को अंसमेखला तथा पश्च पाद की मेखला को श्रोणि मेखला कहते हैं।

    अंस मेखला से अग्रपाद की अस्थि ह्यूमरस एवं श्रोणि मेखला से पश्च पाद की अस्थि फीमर जुड़ी होती है। ये अस्थियाँ गुहाओं में व्यवस्थित होती हैं जिन्हें एसिटेबुलम कहते हैं।

    अंसमेखला तथा हाथ की अस्थियाँ (Bones of dectoral girdle and hand)

    मनुष्य की अंसमेखला के दोनों भाग अलग-अलग होते हैं। इसके प्रत्येक भाग में केवल एक चपटी व तिकोनी अस्थि होती है, जिसे स्कैपुला कहते हैं। यह आगे की पसलियों को पृष्ठ तल की ओर ढके रहती है। इसका आगे वाला मोटा भाग क्लेविकिल से जुड़ा रहता है।

    इसी सिरे पर एक गोल गड्ढ़ा होता है, जिसे ग्लीनॉइड गुहा कहते हैं। ग्लीनॉइड गुहा में ह्यूमरस का सिर जुड़ा रहता है। ग्लीनॉइड गुहा के निकट ही एक प्रवर्द्ध होता है जिसे कोरोकॉइड प्रवर्द्ध कहते हैं। अंसमेखला हाथ की अस्थियों को अपने से जोड़ने के लिए सन्धि स्थान प्रदान करती है। यह हृदय तथा फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करती है। यह मांसपेशियों को अपने से जोड़ने के लिए स्थान प्रदान करती है। मनुष्य के हाथ की अस्थियों में ह्यूमरस, रेडियस अलना, कार्पलस, मेटाकार्पल्स तथा फैलेन्जस होती है। मनुष्य की रेडियस अलना जुड़ी न होकर एक-दूसरे से स्वतंत्र होती है।

    श्रोणि मेखला तथा पैर की अस्थियाँ (Bones of Pelvic girdle and legs)

    मनुष्य की श्रोणि मेखला तीन प्रकार की अस्थियों से मिलकर बनी होती है।

    ये तीनों अस्थियाँ हैं:  इलियम, इश्चियम तथा प्यूबिस

    वयस्क में ये तीनों अस्थियाँ आपस में जुड़ी रहती हैं। प्यूबिस अधर तल पर दूसरी ओर की प्यूबिस से, इलियम आगे की ओर सेंक्रम से तथा इश्चियम पृष्ठ तल की ओर दूसरी ओर की इश्चियम से जुड़ी रहती है। इलियम, इश्चियम तथा प्यूबिस के संधि स्थल पर एक गड्ढ़ा होता है जिसे एसिटेबुलम कहते हैं। एसिटेबुलम में फीमर अस्थि का सिर जुड़ा रहता है।

    श्रोणि मेखला पैरों की अस्थियों को अपने से जोड़ने के लिए संधि स्थान प्रदान करती है। यह अन्तरांगों को सुरक्षा प्रदान करती है। मनुष्य के पैर में फीमर, टिबियो फिबुला, टॉर्सल्स तथा मेटा टॉर्सल्स अस्थियाँ होती हैं। इनमें टिबियोफिबुला मुक्त रहती है।

    फीमर तथा टिबियोफिबुला के सन्धि स्थान पर एक गोल अस्थि होती है, जिसे घुटने की अस्थि या पटेला कहते हैं। इस जोड़ पर मनुष्य का पैर केवल एक ओर ही मुड़ सकता है। टॉर्सल्स में से एक बड़ी होती है जो ऐड़ी बनाती है। तलवे की अस्थियाँ मेटाटॉर्सल्स कहलाती है। अँगूठे में केवल दो तथा अन्य अँगुलियों में तीन-तीन अंगुलास्थियाँ होती हैं।

    कंकाल तंत्र के कार्य :-

    यह शरीर को निश्चित आकृति एवं आधार प्रदान करता है।

    शरीर के आंतरिक कोमल अंगों की बाह्य आघातों से रक्षा करता है।

    यह पेशियों की सहायता से सम्पूर्ण शरीर एवं शरीर के अंगों को गति प्रदान करता है।

    यह शरीर को मजबूती प्रदान करता है।

    हड्डियों के कार्य (Function of skeleton)

    हड्डियां शरीर को एक निश्चित रुप देता है।

    हड्डियां से शरीर को सहारा मिलता है।

    कंकाल से शरीर के अंगों की रक्षा होती है।

    शरीर को बाहरी आघातों से रक्षा करता है।

    कंकाल की मज्जा गुहा फैट को इकट्ठा करता है।

    RBC यानि लाल रक्त कंडिकाओ का निर्माण करता है।

  • Nobel Prize in Chemistry 2022: तीन वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री में मिला नोबेल पुरस्कार

    Nobel Prize in Chemistry 2022: तीन वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री में मिला नोबेल पुरस्कार

    रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (The Royal Swedish Academy of Sciences) ने रसायन विज्ञान के लिए 2022 (Nobel Prize in Chemistry 2022 ) के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की | इस बार नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कैमिस्ट कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi), डेनमार्क की यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के मॉर्टेन मेल्डल (Morten Meldal) और अमेरिका ला जोला स्थित स्क्रिप्स रिसर्च के वैज्ञानिक के. बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless) को दिया गया है |

    ये साझा पुरस्कार उन्हें क्लिक केमिस्ट्री (Click Chemistry) और बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री (Bioorthogonal Chemistry) के विकास के लिए दिया गया है |

    The Royal Swedish Academy of Sciences द्वारा निकाली प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया की रसायन विज्ञान 2022 का नोबेल पुरस्कार कठिन प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए दिया जा रहा है | के. बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless) और मॉर्टेन मेल्डल (Morten Meldal) ने रसायन विज्ञान के एक कार्यात्मक रूप ‘क्लिक केमिस्ट्री (Click Chemistry)’ की नींव रखी है जिसमें आणविक भवन ब्लॉक (molecular building) जल्दी और कुशलता से एक साथ स्नैप करते हैं। कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi) ने क्लिक केमिस्ट्री को एक नए आयाम में ले लिया है और जीवित जीवों (living organisms) में क्लिक केमिस्ट्री का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

    क्लिक केमिस्ट्री यानी ऐसी केमिस्ट्री जिसमें आप बेकार और गड़बड़ पदार्थों को हटाकर किसी नए प्रकार का पदार्थ बना सकते हैं |

    क्लिक केमिस्ट्री (Click Chemistry) तकनीक कैंसर का इलाज कर सकती है | डीएनए में बदलाव कर सकती है | प्लास्टिक कचरे से निजात दिला सकती है | घर को सुरक्षित बना सकती है | शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग से बचा सकती है क्लिक केमिस्ट्री और बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री का इस्तेमाल भविष्य में जीवों और इंसानों के शरीर में ऐसे मॉलीक्यूल्स के निर्माण के लिए होगा, जो उन्हें बीमारी मुक्त जीवन दे सकें या फिर बीमाॉरियों से बचा सकें या बीमारी होने ही न दें | क्लिक केमिस्ट्री असल में समान व्यवहार रखने वाले छोटे-छोटे मॉलीक्यूल्स (molecules) को जोड़ने की प्रक्रिया है इसे बायोकंजुगेशन (Bioconjugation) कहते हैं |

    कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi)

    कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi)

    कैरोलिन आर. बर्टोजी (Carolyn R. Bertozzi) एक अमेरिकी कैमिस्ट हैं | उनका जन्म 10 अक्टूबर, 1966 को बॉस्टन में हुआ | इन्हें रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) दोनों में किए गए उनके कामों के लिए जाना जाता है | जीवित प्रणालियों के साथ कैमिकल रिएक्शन के लिए बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री ((Bioorthogonal Chemistry))‘ शब्द उन्हीं ने दिया है |

    55 वर्षीय कैरोलिन ने 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) से स्नातक किया और 1993 में यूसी बर्कले से रसायन विज्ञान में पीएचडी की | सेलुलर इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में यूसीएसएफ में पोस्टडॉक्टरल काम पूरा करने के बाद, वह 1996 में यूसी बर्कले फैकल्टी में शामिल हो गईं | जून 2015 में, वे Sarafan ChEM-H में स्कॉलर के तौर पर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में संकाय में शामिल हुईं |        

    प्रो. कौरोलिन की लैब कैंसर, सूजन और बैक्टीरियल इंफेक्शन से जुड़े सेल सरफेस ग्लाइकोसिलेशन में बदलावों पर केंद्रित है | उन्हें उनकी शोध उपलब्धियों के लिए कई सम्मान और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है | वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज की निर्वाचित सदस्य हैं | उन्हें लेमेल्सन-एमआईटी पुरस्कार, हेनरिक वेलैंड पुरस्कार और मैकआर्थर फाउंडेशन फैलोशिप से सम्मानित किया गया है | कैरोलिन बर्टोज़ी मैसाचुसेट्स के लेक्सिंगटन में पली-बढ़ी हैं | उनके पिता, विलियम बर्टोज़ी, MIT में फिजिक्स के प्रोफेसर थे | कैरोलिन ने तो क्लिक केमिस्ट्री को अलग ही आयाम पर पहुंचा दिया | कैरोलिन ने ऐसे क्लिक केमिस्ट्री की खोज की जो जीवों में काम करता था | उन्होंने इसे बायोऑर्थोगोनल रिएक्शन (Bioorthogonal Reaction) का नाम दिया यानी ऐसी क्लिक केमिस्ट्री जो कोशिकाओं के अंदर हो रही है | इस तकनीक के आते ही इसका ज्यादा उपयोग दवाओं को लेकर किया गया | सबसे पहले कैंसर की दवाओं को लेकर काम शुरू किया गया | अब इन दवाओं के क्लनिकल ट्रायल्स चल रहे हैं |

    मॉर्टेन पीटर मेल्डल (Morten Peter Meldal)

    मॉर्टेन पीटर मेल्डल (Morten Peter Meldal)

    मॉर्टेन पीटर  मेल्डल (Morten Peter Meldal) एक डेनिश कैमिस्ट हैं | उनका जन्म 16 जनवरी 1954 को डेनमार्क में हुआ था | वह डेनमार्क में कोपेनहेगन युनिवर्सिटी में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर हैं | उन्हें CuAAC-क्लिक रिएक्शन करने के लिए जाना जाता है |

    उन्होंने 1981 में डेनमार्क टेक्निकल युनिवर्सिटी से कैमिकल इंजीनियरिंग में एमएससी की है | उन्होंने 1983 में डेनमार्क के इंस्टिट्यूट ऑफ ऑर्गैनिक कैमिस्ट्री से पीएचडी की | 1988 – 2011 तक वह इस युनिवर्सिटी में अलग-अलग पदों पर रहे | वह कार्ल्सबर्ग लैब में लीडर ऑफ सिंथेसिस रहे और 2003 में प्रोफेसर बने | उन्होंने कॉम्बिनेटरियल केमिस्ट्री और पेप्टाइड केमिस्ट्री में नई तकनीकों का विकास किया |

    मॉर्टेन मेल्डल (Morten Meldal) ने ऐसा केमिकल रिएक्शन खोजा जो इस समय कई जगहों पर इस्तेमाल हो रहा है | जैसे दवाओं के विकास में, डीएनए मैपिंग में और नए टिकाऊ पदार्थों को बनाने में |

    उनकी रुचि बायोऑर्गेनिक केमिस्ट्री और पॉलिमर, एंजाइमोलॉजी में विकास और जीपीसीआर में रही है | उन्हें राल्फ एफ. हिर्शमैन (Ralph F. Hirschmann) और विंसेंट डू विग्नॉड अवार्ड्स (Vincent du Vignaud Awards) सहित कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं | वे सोसाइटी ऑफ कॉम्बिनेटोरियल साइंसेज के अध्यक्ष भी हैं |

    कार्ल बैरी शार्पलेस (Karl Barry Sharpless)

    कार्ल बैरी शार्पलेस (Karl Barry Sharpless)

    कार्ल बैरी शार्पलेस (Karl Barry Sharpless) एक अमेरिकी कैमिस्ट हैं | इनका जन्म 28 अप्रैल, 1941 को फ़िलाडेल्फ़िया में हुआ | इन्हें स्टीरियोसेलेक्टिव रिएक्शन और क्लिक केमिस्ट्री पर उनके काम के लिए जाना जाता है |

    के. बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless) को दूसरी बार नोबेल पुरस्कार मिला है | इससे पहले भी शार्पलेस को 2001 में चिरली उत्प्रेरित ऑक्सीकरण रिएक्शन (chirally catalysed oxidation reactions) पर उनके काम और क्लिक केमिस्ट्री शब्द को पैदा करने के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था |

    नोबेल पुरस्कार 2022 (Nobel Prize 2022)

    नोबेल पुरस्कार की घोषणा सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को हुई थी |

    स्वीडिश वैज्ञानिक स्वंते पाबो को चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था (3 अक्टूबर 2022) | उन्हें निएंडरथल डीएनए पर उनकी खोजों के लिए ये पुरस्कार मिला था |

    इसके बाद मंगलवार (4 अक्टूबर) को भौतिकी विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज की घोषणा की गई थी. भौतिकी के लिए इस साल ये पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को दिया गया | एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर को भौतिकी विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया है | ‘क्वांटम मेकैनिक्स’ के क्षेत्र में तीनों वैज्ञानिकों को कार्य करने के लिए नोबेल प्राइज दिया गया है |

    स्त्रोत:

    नोबल पुरस्कार आधिकारिक वेबसाइट : https://www.nobelprize.org/

    प्रेस रिलीज़ – https://www.nobelprize.org/prizes/chemistry/2022/press-release/

    The click reaction that changed chemistry: https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-chemistry2022-figure2.pdf

    Bioorthogonal chemistry illuminates the cell : https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-chemistry2022-figure3.pdf

  • Nobel Prize in Physics 2022: तीन वैज्ञानिकों को भौतिक विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज

    Nobel Prize in Physics 2022: तीन वैज्ञानिकों को भौतिक विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज

    एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर को भौतिक विज्ञान के लिए नोबेल प्राइज (The Nobel Prize in Physics 2022) से सम्मानित किया गया है |

    नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत 3 अक्टूबर 2022  से हो गई थी | सबसे पहले फिजियोलॉजी/मेडिसिन कैटि‍गरी में पुरस्‍कार का ऐलान किया गया। इस बार का मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार स्वीडन के स्‍वांते पाबो (Svante Pääbo) को ‘‘विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम से संबंधित खोजों के लिए (Discoveries concerning the genomes of extinct hominins and human evolution)’ दिया गया है।  पाबो ने आधुनिक मानव और विलुप्त प्रजातियों के जीनोम की तुलना कर बताया कि इनमें आपसी मिश्रण है।

    इसी क्रम में मंगलवार (4 अक्टूबर 2022) को भौतिकी विज्ञान (Physics Science) के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (The Royal Swedish Academy of Sciences) ने एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect), जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John F. Clauser) और एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger) को भौतिकी में 2022 नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया है |

    एलेन एस्पेक्ट फ्रांस के भौतिक विज्ञानी हैं, जबकि जॉन ए.क्लॉसर अमेरिका और एंटोन जिलिंगर ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक हैं।

    तीनों वैज्ञानिकों को ‘क्वांटम मेकैनिक्स’ के क्षेत्र में कार्य करने के लिए ये पुरस्कार दिया गया है |

    उन्हें यह पुरस्कार इनटैंगल्ड फोटॉन (Entangled photons) के साथ प्रयोग करने, बेल असमानताओं (Bell inequalities) के उल्लंघन को स्थापित करने और क्वांटम इन्फॉर्मेशन साइंस में उनके काम के लिए दिया गया है |

    इन वैज्ञानिकों ने इनटैंगल्ड फोटॉन (Entangled photons) का उपयोग करते हुए अभूतपूर्व प्रयोग किए हैं, जहां दो कण अलग होने पर भी एक इकाई की तरह व्यवहार करते हैं। उनके परिणामों ने क्वांटम सूचना पर आधारित नई तकनीक का रास्ता साफ कर दिया है।

    इनटैंगल्ड फोटॉन (Entangled photons) और एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर की खोज

    क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) अब अनुसंधान का एक बड़ा क्षेत्र है जिसमें क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम नेटवर्क और सुरक्षित क्वांटम एन्क्रिप्टेड संचार शामिल हैं।

    इस विकास का एक प्रमुख कारक यह है कि कैसे क्वांटम यांत्रिकी दो या दो से अधिक कणों को एक उलझी हुई अवस्था में मौजूद रहने की अनुमति देता है। उलझे हुए जोड़े में से एक कण का क्या होता है यह निर्धारित करता है कि दूसरे कण का क्या होता है, भले ही वे बहुत दूर हों।

    लंबे समय तक, यह सवाल था कि क्या सहसंबंध (correlation ) इसलिए था क्योंकि एक उलझे हुए जोड़े (entangled pair) में कणों में छिपे हुए variables, निर्देश होते थे जो उन्हें बताते हैं कि उन्हें प्रयोग में कौन सा परिणाम देना चाहिए।

    1960 के दशक में, जॉन स्टीवर्ट बेल (John Stewart Bell) ने उनके नाम पर गणितीय असमानता विकसित की। यह बताता है कि यदि छिपे हुए चर (variables) हैं, तो बड़ी संख्या में माप के परिणामों के बीच संबंध कभी भी एक निश्चित मूल्य से अधिक नहीं होगा। हालांकि, क्वांटम यांत्रिकी भविष्यवाणी करता है कि एक निश्चित प्रकार का प्रयोग बेल की असमानता (Bell’s inequality) का उल्लंघन करेगा, इस प्रकार एक मजबूत सहसंबंध (stronger correlation) के परिणामस्वरूप अन्यथा संभव होगा।

    जॉन एफ क्लॉजर ने जॉन बेल के विचारों को विकसित किया, जिससे एक व्यावहारिक प्रयोग हुआ। जब उन्होंने माप लिया, तो उन्होंने बेल असमानता का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करके क्वांटम यांत्रिकी का समर्थन किया। इसका मतलब है कि क्वांटम यांत्रिकी को एक सिद्धांत द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है जो छिपे हुए चर (hidden variables) का उपयोग करता है।

    जॉन एफ क्लॉजर के प्रयोग के बाद कुछ खामियां (loopholes) रह गईं। एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect) ने सेटअप को इस तरह से विकसित किया, जिससे एक महत्वपूर्ण बचाव का रास्ता बंद हो गया। वह एक उलझी हुई जोड़ी (entangled pair) के अपने स्रोत को छोड़ने के बाद माप सेटिंग्स (measurement settings) को स्विच करने में सक्षम था, इसलिए जब वे उत्सर्जित (emitted) होते थे तो सेटिंग परिणाम को प्रभावित नहीं कर सकती थी। परिष्कृत उपकरणों और प्रयोगों की लंबी श्रृंखला का उपयोग करते हुए, एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger) ने उलझी हुई क्वांटम अवस्थाओं (entangled quantum) का उपयोग करना शुरू कर दिया। अन्य बातों के अलावा, उनके शोध समूह ने क्वांटम टेलीपोर्टेशन (quantum teleportation) नामक एक घटना का प्रदर्शन किया है, जिससे क्वांटम अवस्था को एक कण से एक दूरी पर स्थानांतरित करना संभव हो जाता है (makes it possible to move a quantum state from one particle to one at a distance)।

    एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect)

    एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect)

    फ्रांस के फिजिसिस्ट एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect) का जन्म 15 जून 1947 को फ्रांस के एजेन में हुआ था | 75 वर्षीय एलेन एस्पेक्ट ने पेरिस साकले यूनिवर्सिटी और पेरिस यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी | 1980 में जब उनकी पीएचडी चल रही थी, तब उन्होंने बेल टेस्ट एक्सपेरीमेंट्स (Bell Test Experiments) करने शुरू कर दिए थे  जिसमें उन्होंने क्वांटम इनटैंगलमेंट (Quantum Entanglement) से जुड़े कुछ रहस्यों का पता लगाया |

    इनटैंगल्ड फोटॉन (1982) के साथ उनके बेल टेस्ट एक्सपेरिमेंट ने, 1935 में शुरू हुई अल्बर्ट आइंस्टीन और निल्स बोहर के बीच एक बहस को सुलझाने में योगदान दिया है |

    एलेन एस्पेक्ट, इंस्टीट्यूट डी ऑप्टिक ग्रेजुएट स्कूल और इकोले पॉलीटेक्निक (यूनिवर्सिटी पेरिस-सैकले) में प्रोफेसर हैं | वह कई एकैडमी (फ्रांस, यूएसए, ऑस्ट्रिया) के सदस्य हैं | अब तक उन्हें अपने रिसर्च के निम्न पुरस्कार मिल चुके है :

    CNRS गोल्ड मेडल (2005); 2010 में फिजिक्स में वुल्फ पुरस्कार ( Wolf prize); निल्स बोहर (Nils Bohr Gold medal); अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल (2012); ओएसए (2013) का इवेस मेडल/क्विन प्राइज़; और 2014 में क्वांटम सूचना में बलजान पुरस्कार(Balzan prize)

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John Francis Clauser)

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John Francis Clauser)

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर एक अमेरिकी एक्सपेरिमेंटल और थ्योरेटिकल भौतिक विज्ञानी हैं | उन्हें क्वांटम मेकैन्किस में उनके योगदान के लिए जाना जाता है | उन्हें क्लॉसर-हॉर्न-शिमोनी-होल्ट (Clauser-Horne-Shimony-Holt (CHSH) ) इनीक्वैलिटी, नॉन लोकल क्वांटम इनटैंगलमेंट के पहले प्रायोगिक प्रमाण और लोकल रियलिज़्म की थ्योरी के निर्माण के लिए जाना जाता है |

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर का जन्म 1 दिसंबर 1942 को अमेरिका के पासाडेना में हुआ था | उन्होंने 1964 में, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से फिजिक्स में बी.एस किया | 1966 में उन्होंने फिजिक्स में एमए किया और 1969 में कोलंबिया युनिवर्सिटी से पीएचडी की | 1969 से 1996 तक उन्होंने लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी, लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी और कैलिफोर्निया युनिवर्सिटी बर्कले में काम किया |

    1969 में, जॉन बेल के सैद्धांतिक परिणामों से प्रेरित माइकल हॉर्न, अब्नेर शिमोनी और रिचर्ड होल्ट के साथ, उन्होंने स्थानीय छिपी हुई वेरिएबल थ्योरी के पहले टेस्ट का प्रस्ताव दिया था | इन सिद्धांतों के लिए उन्होंने पहले प्रयोगात्मक परीक्षण योग्य सीएचएसएच-बेल की थ्योरम- क्लॉजर-हॉर्न-शिमोनी-होल्ट (CHSH) इनीक्वैलिटी दी | 1972 में, उन्होंने CHSH का पहला प्रायोगिक परीक्षण किया और 1976 में दूसरा परीक्षण किया |

    1974 में, माइकल हॉर्न के साथ काम करते हुए उन्होंने लोकल रियलिस्टिक थ्योरी के सिद्धांत को लोकल हिडन वैरिएबल थ्योरी के सामान्यीकरण के रूप में तैयार किया | 1974 में उन्होंने प्रकाश के लिए उप-पॉसोनियन आंकड़ों (Sub-Poissonian statistics) का पहला अवलोकन किया | इस तरह पहली बार प्रयोगात्मक रूप से साबित किया कि फोटॉन स्थानीयकृत कणों (localized particles) की तरह व्यवहार कर सकते हैं न कि विद्युत चुम्बकीय विकिरण (electromagnetic radiation) के संक्षिप्त पल्स की तरह |

    1982 में उन्हें जॉन बैल के साथ रियलिटी फाउंडेशन प्राइज़ (Reality Foundation Prize) दिया गया | 2010 में उन्हें एलेन एस्पेक्ट और एंटोन ज़िलिंगर के साथ, नॉन लोकल क्वांटम इनटेंगलमेंट पर उनकी टिप्पणियों के लिए और लोकल रियलिज़िम के एक्सपेरिमेंटल टेस्ट के लिए फिजिक्स में वुल्फ पुरस्कार (Wolf Prize) से सम्मानित किया गया था | 2011 में उन्हें थॉमसन-रॉयटर्स प्रशस्ति-पत्र पुरस्कार (Thompson-Reuters Citation Laureate) से सम्मानित किया गया था

    एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger)

    एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger)

    एंटोन ज़िलिंगर का जन्म 20 May 1945 को ऑस्ट्रिया के रीड इम इनक्रेइस में हुआ था | ज़िलिंगर वियना यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं और ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज में क्वांटम ऑप्टिक्स और क्वांटम सूचना संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं | उनके ज्यादातर शोध क्वांटम इनटैंगलमेंट के प्रयोगों से जुड़े हैं | उन्हें खासतौर पर अपने एक्सपेरिमेंटल और सैद्धांतिक कामों के लिए जाना जाता है, खासकर इनटैंगलमेंट, क्वांटम टेलीपोर्टेशन, क्वांटम कम्यूनिकेशन और क्रिप्टोग्राफी |

    उन्होंने 1971 में वियना यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी | 1999 में वियना यूनिवर्सिटी में शामिल होने से पहले वे वियना की टेक्निकल यूनिवर्सिटी और इन्सब्रुक यूनिवर्सिटी के संकायों में थे, जहां उन्होंने फिजिक्स डिपार्टमेंट के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया | ज़िलिंगर ने एमआईटी, म्यूनिख के तकनीकी विश्वविद्यालय, हम्बोल्ट विश्वविद्यालय बर्लिन, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और कॉलेज डी फ्रांस में चेयर इंटरनेशनल सहित कई जगहों पर काम किया है | ज़िलिंगर ऑस्ट्रियन फिजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष रहे हैं और फिलहाल ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष हैं |

    पिछले साल इनको मिला था भौतिकी में नोबल पुरस्कार

    पिछले साल स्यूकुरो मानेबे, क्लॉस होसेलमैन और जियोर्जियो पेरिसी को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह पुरस्कार जटिल भौतिक प्रणालियों को लेकर हमारी समझ में विकसित करने के लिए दिया गया था।

    स्यूकुरो मानेबे और क्लॉस होसेलमैन ने यह पुरस्कार ‘धरती की जलवायु की भौतिक मॉडलिंग’ और ‘ग्लोबल वार्मिंग की भविष्यवाणी’ को मजबूत करने के लिए जीता था। वहीं पेरिसी को ‘परमाणु से ग्रहों के पैमाने तक ‘भौतिक प्रणालियों में उतार-चढ़ाव की क्रिया के खोज के लिए’ नोबल से सम्मानित किया गया था।

    स्त्रोत:

    नोबल पुरस्कार आधिकारिक वेबसाइट : https://www.nobelprize.org/

    एलेन एस्पेक्ट (Alain Aspect) के बारे में – https://youtu.be/lZyZtrF01qQ

    एंटोन ज़िलिंगर (Anton Zeilinger) के बारे में – https://youtu.be/epooR8ONrj4

    जॉन फ्रांसिस क्लॉजर (John F. Clauser)https://youtu.be/ZYZiLX2uibM

    प्रेस रिलीज़ – https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2022/press-release/

    Does colour exist when no one is watching? – https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-physics2022-figure2.pdf

    Entangled particles that never met – https://www.nobelprize.org/uploads/2022/10/press-physics2022-figure3.pdf

  • Nobel Prize 2022: स्‍वीडन के स्‍वांते पाबो को मेडिसिन का नोबेल (नोबेल पुरस्कार के बारे में जाने)

    Nobel Prize 2022: स्‍वीडन के स्‍वांते पाबो को मेडिसिन का नोबेल (नोबेल पुरस्कार के बारे में जाने)

    नोबेल प्राइज वीक 2022 (Nobel Prize) की शुरुआत हो गई है। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित हो रहे वीक में सबसे पहले फिजियोलॉजी/मेडिसिन कैटि‍गरी में पुरस्‍कार का ऐलान किया गया। इस बार का मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार स्वीडन के स्‍वांते पाबो (Svante Pääbo) को ‘‘विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम से संबंधित खोजों के लिए (Discoveries concerning the genomes of extinct hominins and human evolution)’ दिया गया है।  

    द नोबेल कमि‍टी के सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन ने उनके नाम का ऐलान किया। इस साल के नोबेल पुरस्कार की घोषणा 3-10 अक्टूबर को की जा रही है | इस साल 5 अक्टूबर को केमिस्ट्री, 6 अक्टूबर को साहित्य, 7 अक्टूबर को नोबेल शांति और 10 अक्टूबर को इकोनॉमिक्स के लिए नोबेल का ऐलान किया जाएगा। नोबेल पुरस्कारों को व्यापक रूप से उनके संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के रूप में माना जाता है

    नोबेल फाउंडेशन ने 2020 और 2021 के विजेताओं के साथ दिसंबर में स्टॉकहोम में होने वाले नोबेल सप्ताह में 2022 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं को आमंत्रित करने का भी फैसला किया है।

    वेबसाइट – https://www.nobelprize.org/

    Press Release – https://www.nobelprize.org/prizes/medicine/2022/press-release/

    कौन हैं स्वांते पाबो (Svante Pääbo)

    20 अप्रैल 1955 को स्‍वीडन के स्‍टॉकहोम में जन्‍मे स्‍वांते पाबो ने उप्‍साला यूनिवर्सिटी (Uppsala University) से अपनी पढ़ाई पूरी की। स्‍वांते एक जेनेटिसिस्ट (Geneticist) हैं और इवोल्यूशनरी जेनेटिक्स ( Evolutionary Genetics ) के क्षेत्र में एक्सपर्ट हैं। उन्होंने 1986 में उप्साला विश्वविद्यालय में अपनी पीएचडी थीसिस पूरी की | स्‍वांते पाबो ज्यूरिख विश्वविद्यालय, स्विट्जरलैंड और बाद में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, यूएसए में पोस्टडॉक्टरल फेलो थे। वे 1990 में म्यूनिख विश्वविद्यालय, जर्मनी में प्रोफेसर बने। 1999 में उन्होंने जर्मनी के लीपज़िग में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी (Max Planck Institute for Evolutionary Anthropology) की स्थापना की, जहा स्‍वांते अभी सेवाएं दे रहे हैं।  वह ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जापान में सहायक प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत हैं।

    DNA को लेकर भी उन्‍होंने काफी काम किया है। खास बात यह है कि स्‍वांते के पिता सुन बर्गस्‍ट्रॉमी (Sune Bergström) जो एक बायोकेमिस्‍ट थे उन्हें 1982 में नोबेल प्राइज मिला था |

    अपने शोध के जरिए स्‍वांते पाबो ने विलुप्त होमिनिन से कई अतिरिक्त जीनोम अनुक्रमों (genome sequences) का विश्लेषण पूरा कर लिया है। पाबो की खोजों का इस्‍तेमाल वैज्ञानिक समुदाय द्वारा मानव विकास और प्रवास को बेहतर ढंग से समझने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। जीनोम सिक्‍वेसिंग के नए तरीकों से संकेत मिलता है कि अफ्रीका में होमो सेपियंस के साथ होमिनिन भी मिश्रित हो सकते हैं। 
    Photo courtesy: https://www.nobelprize.org/prizes
    पाबो के इस मौलिक शोध ने एक पूरी तरह से नए विज्ञान 'जीवाश्म विज्ञान' को जन्म दिया है । सभी जीवित मनुष्यों को विलुप्त होमिनिन से अलग करने वाले आनुवंशिक अंतरों को प्रकट करके, उनकी खोजों ने यह पता लगाने का आधार प्रदान किया कि क्या हमें विशिष्ट मानव बनाता है।

    हम मनुष्य कहा से आये है ? Where do we come from?

    मानव विकास के अध्ययन के लिए जीवाश्म विज्ञान और पुरातत्व महत्वपूर्ण हैं। अनुसंधान ने इस बात का सबूत दिया कि शारीरिक रूप से आधुनिक मानव, होमो सेपियन्स, लगभग 300,000 साल पहले पहली बार अफ्रीका में दिखाई दिए, जबकि हमारे सबसे करीबी रिश्तेदार, निएंडरथल, अफ्रीका के बाहर विकसित हुए और लगभग 400,000 साल से 30,000 साल पहले तक यूरोप और पश्चिमी एशिया में बसे हुए थे, जिस बिंदु पर वे विलुप्त हो गए। लगभग 70,000 साल पहले, होमो सेपियन्स के समूह अफ्रीका से मध्य पूर्व में चले गए और वहाँ से वे दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गए। होमो सेपियन्स और निएंडरथल इस प्रकार यूरेशिया के बड़े हिस्से में दसियों हज़ार वर्षों तक सहअस्तित्व में रहे। लेकिन हम विलुप्त निएंडरथल के साथ अपने संबंधों के बारे में क्या जानते हैं? सुराग जीनोमिक जानकारी से प्राप्त किए जा सकते हैं। 1990 के दशक के अंत तक, लगभग पूरे मानव जीनोम को अनुक्रमित कर दिया गया था। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसने विभिन्न मानव आबादी के बीच अनुवांशिक संबंधों के बाद के अध्ययनों की अनुमति दी। हालांकि, वर्तमान मानव और विलुप्त निएंडरथल के बीच संबंधों के अध्ययन के लिए पुरातन नमूनों से बरामद जीनोमिक डीएनए की अनुक्रमण की आवश्यकता होगी।

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    नोबेल पुरस्कार क्या है ? कैसे शुरुआत हुई नोबेल पुरस्कारों की

    नोबेल पुरस्कार की 1895 में स्थापना हुई थी। पहली बार 1901 में नोबेल पुरस्कार दिए गए थे। अब तक 975 लोगों को नोबेल मिल चुका है। इसके अलावा संस्थानों को 609 नोबेल पुरस्कार दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में नोबेल दिया जाता है उनमें फिजिक्स (Physics), मेडिसिन (Physiology or Medicine), केमिस्ट्री (Chemistry), साहित्य (Literature), शांति (Peace) और अर्थशास्‍त्र शामिल हैं।

    पुरस्कार समारोह प्रतिवर्ष होते हैं।  एक पुरस्कार तीन से अधिक व्यक्तियों के बीच साझा नहीं किया जा सकता है, यद्यपि नोबेल शांति पुरस्कार तीन से अधिक लोगों के संगठनों को प्रदान किया जा सकता है। यद्यपि नोबेल पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिए जाते हैं, यदि किसी व्यक्ति को पुरस्कार दिया जाता है और प्राप्त करने से पहले उसकी मृत्यु हो जाती है, तो पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

    नोबेल की स्थापना किसने की?

    एक धनी स्वीडिश उद्योगपति और डाइनामाइट के आविष्कारक सर एल्फ्रेड नोबेल (Sir Alfred Nobel की वसीहत के आधार पर चिकित्सा, भौतिकी, रसायन शास्त्र, साहित्य और शांति क्षेत्र के नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की गई थी। पहला नोबेल पुरस्कार वर्ष 1901 में सर एल्फ्रेड नोबेल के निधन के पांच साल बाद दिया गया था।

    अल्फ्रेड नोबेल

    अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्टॉकहोल्म के स्वीडन में हुआ था। इनका तालुक्क एक अभियंता परिवार से था जो बहुत ही समृद्ध था। आप एक रसायनज्ञ, अभियंता व् अविष्कारक है। 1894 में आपने बेफोर्स आयरन और स्टील मील ख़रीदा जिसे आपने एक महत्वपूर्ण हथियार निर्माता का केंद्र बनाया तथा आपने बैल्लेस्टिक मिसाइलो का भी सफल परीक्षण किया।

    अर्थशास्त्र का नोबेल

    अर्थशास्त्र का नोबेल, जिसे आधारिक तौर पर ‘बैंक ऑफ स्वीडन प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमोरी ऑफ एल्फ्रेड नोबेल (एल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में अर्थशास्त्र में बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार)’, उसकी स्थापना एल्फ्रेड नोबेल की वसीहत के आधार पर नहीं हुई थी, बल्कि स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने 1968 में इसकी शुरुआत की थी।

    नोबेल पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार में क्या मिलता है?\

    प्रत्येक क्षेत्र के नोबेल के तहत विजेताओं को एक स्वर्ण पदक और एक प्रमाणपत्र के साथ एक करोड़ क्रोनोर (लगभग नौ लाख डॉलर) की पुरस्कार राशि दी जाती है। विजेताओं का सम्मान हर साल 10 दिसंबर को किया जाता है। 1896 में 10 दिसंबर की तारीख को ही एल्फ्रेड नोबेल का निधन हुआ था।

    1901 से 2021 तक अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 609 बार नोबेल पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं।

    किसी प्रत्याशी को नोबेल पुरस्कार के लिय कौन नामित कर सकता है?

    दुनियाभर में हजारों लोग नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन जमा करने के पात्र हैं। इनमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, कानूनविद, पूर्व नोबेल पुरस्कार विजेता और खुद नोबेल समिति के सदस्य शामिल हैं। हालांकि, नामांकन को 50 वर्षों तक गुप्त रखा जाता है, लेकिन जो लोग उन्हें जमा करते हैं, वे कभी-कभी सार्वजनिक रूप से अपनी सिफारिशों की घोषणा करते हैं, खासकर नोबेल शांति पुरस्कार के संबंध में।

    नोबेल पुरस्कारों का नॉर्वे से क्या संबंध है?

    नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे में प्रदान किया जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों के पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं। ऐसा एल्फ्रेड नोबेल की इच्छा के आधार पर किया जाता है। इस इच्छा के पीछे की असल वजह तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन एल्फ्रेड नोबेल के जीवनकाल में स्वीडन और नॉर्वे एक संघ का हिस्सा थे, जो 1905 में भंग हो गया था।

    स्टॉकहोम स्थित नोबेल फाउंडेशन, जो पुरस्कार राशि का प्रबंधन करता है और ओस्लो स्थित शांति पुरस्कार समिति के बीच संबंध कई मौके पर तनावपूर्ण रहे हैं।

  • मनुष्य के संवेदी अंग (Human Sense Organs) (ज्ञानेन्द्रिय) | ह्यूमन सेंस ऑर्गन्स

    मनुष्य के संवेदी अंग (Human Sense Organs) (ज्ञानेन्द्रिय) | ह्यूमन सेंस ऑर्गन्स

    इस आर्टिकल में हम मानव के प्रमुख संवेदी अंगों (Human Sense Organs) के बारे में बात करेगे | मनुष्य के संवेदी अंग (Human Sense Organs) कोनसे है और उनके प्रमुख कार्य क्या है, मानव कान (Human Ear), मानव नेत्र (Human Eye), मनुष्य का नाक (Human Nose), मानव त्वचा (Human Skin), मानव जीभ (Human Tongue) आदि Human Sense Organs के क्या कार्य है | साथ ही हम मनुष्य के संवेदी अंग (Sense Organs) से जुड़े महत्वपुर्ण तथ्य जानेगे |

    संवेदी तन्त्रिकाएँ उद्दीपनों को मस्तिष्क तक पहुंचाती है तथा आवश्यकतानुसार चालक तन्त्रिका तन्तुओं द्वारा इन्हें प्रतिक्रियाओं के रूप में अपवाहक अंगों को भेज दिया जाता है। मनुष्य के प्रमुख संवेदी अंग कान (Ear), आँख (eye), नाक (Nose) तथा त्वचा (skin) है।

    मानव कान (Human Ear)

    कान ध्वनि तरंगों को सुनने एवं सन्तुलन बनाने में सहायक होते हैं

    मध्य कर्ण में शरीर की सबसे छोटी अस्थि स्टेपीस होती है।

    कर्ण पल्लव की तन्तुमय उपास्थि ध्वनि तरंगों का संग्रह करती है। मनुष्य में कर्ण पल्लव अवशेषी अंग हैं।

    कान को भीतर से देखने के लिए अरीस्कोप का प्रयोग करते हैं।

    मानव नेत्र (Human Eye)

    नेत्र या आँखे प्रकाश संवेदी अंग हैं। प्रत्येक नेत्र एक गेंद के आकार की गोल एवं खोखली रचना है, इसे नेत्र गोलक (eyeball) कहते हैं।

    दृढ़ पटल (Sclerotia)

    दृढ़ पटल (Sclerotia) बाह्य दृढ़ तथा गोलक के कोटर से बाहर पारदर्शी कॉर्निया (cornea) बनाता है।

    रक्तक पटल (Choroid)

    रक्तक पटल (Choroid) कोमल, संयोजी ऊतक का बना होता है । इसमें रंगा कणिकाएँ होती हैं। रंगा कणिकाएँ खरगोश में लाल, मनुष्य में काली, भूरी या में नीली होती हैं।

    दृष्टि पटल (Retina)

    दृष्टि पटल (Retina) सबसे भीतरी परत है, जो संवेदी होती है। दृष्टि पटल पर प्रतिविम्व सत्य एवं उल्टा बनता है। यह नेत्र गोलक की सबसे भीतरी संवेदी परत है, यह दो प्रकार की कोशिकाओं, दृष्टि शलाकाएँ (rods) एवं दृष्टि शंकुओं (cones) की बनी होती है।

    शलाकाएँ

    शलाकाएँ कम प्रकाश के लिए संवेदी होती हैं तथा इनमें लाल गुलावी वर्णक, रोडोप्सिन पाया जाता है।

    शंकु तेज प्रकाश के लिए संवेदी है तथा रंगों में अन्तर उत्पन्न करते हैं; जैसे- लाल, हरा, नीला आदि ।

    मानव के प्रमुख दृष्टि दोष

    निकट दृष्टि दोष (Myopia)

    इसमें केवल कम दूरी की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। प्रतिबिम्ब दृष्टिपटल के सामने बनता है यह रोग अवतल लेन्स के उपयोग द्वारा ठीक हो सकता है।

    दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)

    इसमें केवल दूर की वस्तुएँ दिखाई देती हैं। प्रतिबिम्ब दृष्टिपटल के पीछे बनता है। इस रोग को उत्तल लेन्स (convex lens) का उपयोग करके दूर किया जा सकता है।

    दृष्टिवैषम्य (Astigmatism)

    इसमें कॉर्निया की आकृति असामान्य हो जाती है। सिलैण्ड्रोकल लेन्स द्वारा यह रोग दूर हो सकता है।

    कन्जक्टीवाइटिस (Conjunctivitis)

    जीवाणु द्वारा कन्जक्टिवा में सूजन आ जाती है। 5. रतौंधी (Night blindness ) विटामिन A की कमी से रोडोप्सिन का निर्माण कम होता है, जिसके कारण कम प्रकाश में दिखाई नहीं देता।

    वर्णान्धता (Colour blindness)

    यह आनुवंशिक रोग है, जो आँखों में शंकु कोशिकाओं की कमी से होता है। ऐसे व्यक्ति लाल व हरे रंग में अन्तर नहीं कर पाते।

    मनुष्य का नाक (Human Nose)

    नाक गन्ध ग्रहण करने वाला संवेदी अंग है।

    नासावेश्मों (nasal chamber) की दीवार घ्राण उपकला (olfactory epithelium) अस्थियों पर मढ़ी रहती है।

    घ्राण ग्राही कोशिकाएँ लम्बी पतली एवं तुर्क रूप तथा द्विध्रुवीय तन्त्रिका कोशिकाएँ होती हैं। घ्राण कोशिकाएं, स्वाद कोशिकाओं की तुलना में अधिक रसायन संवेदी होती हैं। प्राण संवेदनाओं; जैसे-मिर्च, क्लोरोफार्म, अमोनिया आदि से आँसू निकल आते हैं। कुत्ते तीव्र घ्राण संवेदी होते हैं।

    कुत्ते विभिन्न मनुष्यों की पहचान इसलिए कर लेते हैं क्योंकि इनमें अन्तर करने की क्षमता होती है।

    विभिन्न मनुष्यों की गन्ध में मॉथ, तितली आदि को एन्टीना में घ्राण रसायन संवेदांग होते हैं।

    नासावश्मों के आधार पर जैकोब्सन के अंग (Jacobson’s organs ) नामक दो खोखले कोश होते हैं। मनुष्य में ये अवशेषो होते हैं।

    मानव त्वचा (Human Skin)

    त्वचा शरीर का बाह्य आवरण है। यह शरीर की सुरक्षा का पहला बाहरी कवच है।

    त्वचा का बाहरी स्तर उपचर्म या एपीडर्मिस (epidermis) होता है, जो एक्टोडर्म (ectoderm) से बनता है। त्वचा का आन्तरिक स्तर चर्म या डर्मिस (dermis) होता है, जो मीसोडर्म (mesoderm) से बनता है।

    त्वचा में त्वक् संवेदी (Cutaneous Receptors) होते हैं, जो निम्न हैं:
    एल्जीसी रिसेप्टर (algecireceptor) पीड़ा ग्राही
    मीसनगर के देहाणु (Meissner’s corpuscles) तथा मरकेल की तश्तरियाँ (Merkel’s discs) स्पर्शग्राही (tangoreceptor) है।

    पैसीनी के देहाणु (Pacini’s corpuscles) दाब तथा कम्पन ग्राही होते हैं।

    क्राउस के देहाणु (Krause’s corpuscles) शीत उद्दीपन ग्रहण करते हैं और शीत ग्राही (cold receptors) कहलाते हैं।

    रूफिनी के छोर अंग (end organ of Ruffini) गर्मी का उद्दीपन ग्रहण करते हैं और ऊष्मा ग्राही (heat receptors) कहलाते हैं।

    मानव जीभ (Human Tongue)

    जीभ मुख के तल पर एक पेशी होती है, जो भोजन को चबाना और निगलना आसान बनाती है। यह स्वाद अनुभव करने का प्रमुख अंग होता है, क्योंकि जीभ स्वाद अनुभव करने का प्राथमिक अंग है, जीभ की ऊपरी सतह पेपिला और स्वाद कलिकाओं से ढंकी होती है। जीभ का दूसरा कार्य है स्वर नियंत्रित करना। यह संवेदनशील होती है और लार द्वारा नम बनी रहती है, साथ ही इसे हिलने-डुलने में मदद करने के लिए इसमें बहुत सारी तंत्रिकाएं तथा रक्त वाहिकाएं मौजूद होती हैं। इन सब के अलावा, जीभ दातों की सफाई का एक प्राकृतिक माध्यम भी है।

    मनुष्य के संवेदी अंग (Sense Organs) से जुड़े महत्वपुर्ण तथ्य

    उभयचर, सरीसृप तथा पक्षियों में एक ही कर्ण अस्थि मैलियस पाई जाती है।

    आइरिस के केन्द्र में दिखाई पड़ने वाला काला छिद्र तारा (pupil) है।

    उल्लू की रेटिना में शलाकाएँ अधिक, जबकि मुर्गा (fowl) की रेटिना में शंकु अधिक पाए जाते हैं।

    कॉर्निया नेत्र का असंवहनीय भाग है।
    कशेरुकियों की त्वचा का रंग मिलेनीन वर्णक के कारण होता है।

    मांसाहारी जन्तुओं; जैसे बिल्ली, कुत्ता, शेर आदि की आँखें टेपिटम ल्यूसीडम के कारण रात में चमकती है।
    पीले-हरे रंग के लिए आँखें सबसे अधिक संवेदी होती हैं।

    मधुमक्खियाँ पराबैंगनी किरणें देख सकती हैं, जबकि गिद्ध में सबसे तीव्र दृष्टि पाई जाती है।

    शरीर अनुपात के आधार पर हिरन में सबसे बड़ी आँखें होती हैं।

    दृष्टिपटल पर प्रतिबिम्ब सत्य एवं उल्टा बनता है।