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  • चोक कुण्डली (Choke Coil) क्या है ?

    चोक कुण्डली (Choke Coil) क्या है ?

    What is Choke Coil ?

    चोक कुण्डली ऐसी कुण्डली है जो अपने अन्दर से D.C. को तो बिना प्रतिरोध के निकल जाने देती है परन्तु A.C. के प्रवाह में अवरोध उत्पन्न करती है।

    नर्म लोहे के एक क्रोड (Core) के ऊपर पृथक्कृत तांबे का तार लपेट कर चोक कुण्डली को बनाया जाता है। लोहे के कारण कुण्डली के प्रेरकत्व (Inductance) का मान बढ़ जाता है। चोक कुण्डली से यह लाभ होता है, कि इसके कारण परिपथ में व्यय विद्युत ऊर्जा का मान न्यूनतम होता है। चोक कुण्डली का उपयोग घरों की ट्यूब-लाइट व रेडियो में किया जाता है। दिष्ट धारा परिपथों में धारा के मान को नियन्त्रित करने के लिए धारा नियन्त्रक के रूप में चोक कुण्डली का प्रयोग किया जाता है।

  • प्रत्यावर्ती धारा और वाटहीन धारा क्या है ?

    प्रत्यावर्ती धारा और वाटहीन धारा क्या है ?

    What are Alternative Current-A.C. and Wattless Current ?

    प्रत्यावर्ती धारा (Alternative Current-A.C.)

    ऐसी धारा जिसका परिमाण व दिशा समय के साथ बदले तथा एक निश्चित समय के पश्चात् उसी दिशा में उसी परिमाण के साथ उसकी पुनरावृत्ति हो, को ‘प्रत्यावर्ती धारा’ कहते हैं।

    प्रत्यावर्ती धारा का परिमाण व दिशा निरन्तर परिवर्तित होती रहती है। यह धारा पहले एक दिशा में शून्य से अधिकतम, अधिकतम से शून्य तथा फिर विपरीत दिशा में शून्य से अधिकतम व अधिकतम से शून्य हो जाती है। इसे प्रत्यावर्ती धारा का एक चक्र (Cycle) कहते हैं।

    वाटहीन धारा (Wattless Current)

    जब प्रत्यावर्ती धारा (A.C.) परिपथ में बिना ऊर्जा का व्यय किए प्रवाहित होती हो तो ऐसी धारा को वाटहीन धारा कहते हैं। ऐसी धारा तभी प्रवाहित होगी जब परिपथ में ओमीय प्रतिरोध का मान शून्य हो।

  • ट्यूब-लाइट (Tube-light) कैसे काम करती है ?

    ट्यूब-लाइट (Tube-light) कैसे काम करती है ?

    How Tube – Light works ?

    प्रतिदीप्तिशील पदार्थ (Fluorescent material)

    कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं, कि जब उन पर उच्च आवृत्ति का प्रकाश जैसे पराबैंगनी प्रकाश डाला जाता है तो वे उसे अवशोषित कर लेते है। और उसके बाद निम्न आवृत्ति के प्रकाश का उत्सर्जन करते है। ऐसे पदार्थों को प्रतिदीप्तिशील पदार्थ (Fluorescent material) कहते हैं तथा घटना को ‘प्रतिदीप्ति’ (Fluorescence) कहते हैं।

    ट्यूब-लाइट में कांच की एक लम्बी ट्यूब होती है जिसके अन्दर की दीवारों पर प्रतिदीप्तिशील पदार्थ का लेप चढ़ा रहता है। ट्यूब के अन्दर अक्रिय गैसें, जैसे—आर्गन को कुछ पारे के साथ भर देते हैं।

    ट्यूब के दोनों किनारों पर बेरियम ऑक्साइड की तह चढ़े हुए दो तन्तु लगे होते हैं।

    जब तन्तुओं में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो इनसे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं जो ट्यूब में भरी गैस का आयनीकरण करते हैं। आयनीकरण से उत्पन्न आयनों के प्रवाह के फलस्वरूप ट्यूब में धारा बहने लगती है।

    ट्यूब में स्थित पारा गरमी पाकर वाष्पित होता है तथा इससे विद्युत उत्सर्जन होने के कारण पराबैंगनी किरणें उत्पन्न होती है।

    जब ये किरणें ट्यूब की दीवारों पर पुते प्रतिदीप्तिशील पदार्थ पर पड़ती हैं, तो वह उन्हें अवशोषित करके निचली आवृत्ति के दृश्य प्रकाश का उत्सर्जन करती है।

    ट्यूब में प्रतिदीप्तिशील पदार्थ इस प्रकार का लगाया जाता है, कि उससे उत्पन्न प्रकाश सूर्य के प्रकाश जैसा श्वेत दिखायी देता है।

  • विद्युत बल्ब (Electric Bulb) कैसे काम करता है ?

    विद्युत बल्ब (Electric Bulb) कैसे काम करता है ?

    How Electric Bulb works ?

    विद्युत बल्ब का आविष्कार टॉमस एल्वा एडीसन ने किया था।

    इसमें टंगस्टन धातु का एक पतला कुण्डलीनुमा तन्तु (फिलामेण्ट) लगा होता है। इस धातु का ऑक्सीकरण रोकने के लिए बल्ब के अन्दर निर्वात भर दिया जाता है। इसका आवरण पतले कांच का बना होता है। कभी-कभी बल्ब के अन्दर पूर्णतः निर्वात न करके उसमें नाइट्रोजन या आर्गन (अक्रिय) गैस भर दी जाती है।

    बल्ब में अक्रिय गैस इसलिए भरते हैं क्योंकि निर्वात में उच्चताप पर टंगस्टन व धातु का वाष्पीकरण हो जाता है तथा यह वाष्पीकृत होकर बल्ब की दीवारों पर चिपक जाता है।

    टंगस्टन धातु का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक अत्यधिक (लगभग 3500°C) होता है। धारा प्रवाहित किए जाने पर तन्तु का ताप 1,500°C से 2,500°C तक हो जाता है और बल्ब काला पड़ जाता है l इसे ‘ब्लैकनिंग‘ कहते हैं। इस प्रक्रिया के बाद तन्तु कमजोर होकर टूट जाता है।

    साधारण बल्ब में दी गई विद्युत ऊर्जा का केवल 5 से 10% भाग ही प्रकाश ऊर्जा में परिवर्तित होता है

  • विद्युत प्रेस (Electric Iron) कैसे काम करती है ?

    विद्युत प्रेस (Electric Iron) कैसे काम करती है ?

    How Electric Iron works ?

    घरेलू विद्युत प्रेस में भी नाइक्रोम का तार अभ्रक (Mica) की प्लेट पर लिपटा रहता है। अभ्रक बहुत अच्छा विद्युतरोधी है और बहुत ऊंचे ताप तक भी नहीं पिघलता है। इस प्लेट को किसी लोहे या इस्पात के उचित आकार के आवरण के अन्दर रखा जाता है। आवरण के ऊपर किसी कुचालक पदार्थ का हत्था पकड़ने के लिए लगा होता है।

    जब तार में धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह गरम हो जाता है और आवरण को भी गरम कर देता है जिससे कपड़े आसानी से प्रेस किए जा सकते हैं।

  • विद्युत हीटर (Electric Heater) कैसे काम करता है ?

    विद्युत हीटर (Electric Heater) कैसे काम करता है ?

    How Electric Heater works ?

    विद्युत हीटर का प्रयोग कई रूपों में किया जाता है। इसमें किसी विद्युतरोधी पदार्थ जैसे—प्लास्टर ऑफ पेरिस की एक खांचेदार प्लेट होती है, जिसमें मिश्रधातु नाइक्रोम (निकल व क्रोमियम की मिश्रधातु) का सर्पिलाकार तार (जिसे एलीमेण्ट कहते हैं) लगा होता है। जब तार के दोनों सिरों को विद्युत सप्लाई मेन्स से जोड़ते हैं, तो वह अत्यधिक प्रतिरोध होने के कारण लाल तप्त होकर चमकने लगता है और अत्यधिक ऊष्मा देता है।

    हीटर के तार की प्रतिरोधकता उच्च होनी चाहिए तथा उसका उच्च ताप तक ऑक्सीकरण नहीं होना चाहिए।

  • ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect) क्या है ?

    ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect) क्या है ?

    What is Heating Effect ?

    जब किसी चालक (धातु) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो गतिशील इलेक्ट्रॉन निरन्तर चालक के परमाणुओं से टकराते हैं तथा इस प्रक्रिया में अपनी ऊर्जा चालक के परमाणुओं को स्थानान्तरित करते हैं। इससे चालक का ताप बढ़ जाता है।

    चालक के ताप के बढ़ने की इस घटना को विद्युत धारा का ‘ऊष्मीय प्रभाव’ कहते हैं।

    विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग विभिन्न विद्युत ताप उपकरणों जैसे बिजली के बल्ब, बिजली के लोहे, कमरे के हीटर, गीजर, बिजली के फ्यूज आदि में किया जाता है।

  • विद्युत-लेपन, विधुत – मुद्रण और विधुत परिष्करण क्या है ?

    विद्युत-लेपन, विधुत – मुद्रण और विधुत परिष्करण क्या है ?

    What is Electroplating, Electrotyping and Electro-refining ?

    विद्युत-लेपन (Electroplating)

    एक धातु पर दूसरी धातु की सतह चढ़ायी जाने की क्रिया को विद्युत-लेपन कहते हैं। बाजारों में बिकने वाली सस्ती धातुओं के आभूषणों पर चांदी या सोने की पर्त चढ़ा कर उन्हें मूल्यवान बनाया जाता है।

    उदाहरणार्थ, जैसे ताबे पर चादी की तह चढ़ाने के लिए सिल्वर नाइट्रेट (AgNO,) का जलीय विलयन लेकर इसमें तांबे की प्लेट का कैथोड व चांदी की प्लेट का ऐनोड लिया जाता है। जलीय विलयन में सिल्वर नाइट्रेट, सिल्वर (Ag’) व नाइट्रेट (NO.) आयनों में टूट जाता है। जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो सिल्वर आयन तांबे की प्लेट पर आकर जमा होने लगते हैं जिससे इस पर चांदी की पतली परत चढ़ जाती है। साधारणतया जिस धात पर लेपन करना होता है उसे कैथोड तथा जिस धातु का लेपन करना होता है, उसे ऐनोड बनाया जाता है।

    विद्युत-मुद्रण (Electrotyping)

    विद्युत-मुद्रण में विद्युत अपघटन के द्वारा मुद्रण के लिए ब्लॉक बनाए जाते है l

    धातुओं का विद्युत परिष्करण (Electro-refining of Metals)

    अशुद्ध या मिश्रित धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन के द्वारा किया जाता है। इस विधि में मिश्रित धातु का ऐनोड व उसी का कैथोड लिया जाता है। इन दोनों को धातु के किसी लवण के जलीय विलयन में डालकर वोल्टामीटर बनाया जाता है और विद्युत अपघटन कराया जाता है। ऐनोड से मिश्रित धातु विलयन में घुलती है तथा शुद्ध धातु कैथोड पर एकत्रित होती जाती है।

  • विद्युत अपघट्य (Electrolyte) क्या है ?

    विद्युत अपघट्य (Electrolyte) क्या है ?

    What is Electrolyte ?

    किसी लवण के जलीय विलयन (Solution) को जिसमें से विद्युत धारा गुजर सकती है, ‘विद्युतअपघट्य’ (Electrolyte) कहते हैं।

    जब किसी लवण के जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो विलयन का धनात्मक व ऋणात्मक आयनों में अपघटन (Decomposition) हो जाता है। इस घटना को विद्युत धारा का ‘रासायनिक प्रभाव’ कहते हैं।

    धनायन (Cation) और ऋणायन (Anion)

    जब किसी विद्युत अपघट्य लवण का जलीय विलयन बनाते हैं, तो लवण दो प्रकार के आयनों में टूट जाता है। इन आयनों पर विपरीत प्रकार के आवेश होते हैं। जिन आयनों पर धन-आवेश होता है, उन्हें ‘धनायन’ (Cation) कहते हैं तथा ऋणावेश वाले आयनों को ‘ऋणायन’ (Anion) कहते हैं।

    जिस उपकरण में लवणों (Salts) के जलीय विलयनों का विद्युत अपघटन होता है उसे वोल्टामीटर’ (Voltameter) कहते हैं।

    ऐनोड और कैथोड

    वोल्टामीटर के धन इलेक्ट्रोड को ऐनोड व ऋण इलेक्ट्रोड को ‘कैथोड’ कहते हैं। जब आयन युक्त विलयन (विद्युत-अपघटय) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है,

    तो धनायन कैथोड की ओर एवं ऋणायन ऐनोड की ओर चलने लगते हैं और उन पर जाकर जमा हो जाते हैं।

  • विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) क्या है ?

    विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) क्या है ?

    What is Electromagnetic Induction ?

    चुम्बकीय फ्लक्स

    किसी चुम्बकीय क्षेत्र में जहां तीव्रता अधिक होती है वहां पर चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या (प्रति इकाई क्षेत्रफल में) भी अधिक होती है। चुम्बकीय क्षेत्र में रखी हुई किसी सतह के लम्बवत् गुजरने वाली कुल चुम्बकीय रेखाओं की संख्या को उस सतह का ‘चुम्बकीय फ्लक्स‘ कहते हैं।

    विद्युत धारा (Induced current)

    यदि किसी बन्द परिपथ में होकर गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन कर दिया जाए तो परिपथ में विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है जिसे प्रेरित विद्युत धारा (Induced current) कहते हैं।

    चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन से विद्युत धारा उत्पन्न होती है। अत: विद्युत धारा उत्पन्न होने की इस घटना को ‘विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण’ कहते हैं।

    चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तन से उत्पन्न विद्युत वाहक बल (e.m.f) को प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced e.m.) कहा जाता है। परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा का अस्तित्व तब तक रहता है जब तक फ्लक्स परिवर्तन होता है।