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  • ऑक्सीजन (Oxygen) क्या है ?

    ऑक्सीजन (Oxygen) क्या है ?

    What is Oxygen ?

    यह एक रासायनिक तत्त्व है। ऑक्सीजन का प्रतीक O और परमाणु संख्या 8 होती है। यह आवर्त सारणी में चाकोजेन समूह (Chalcogen Group) का सदस्य है ऑक्सीजन में 8 इलेक्ट्रॉन और 8 प्रोटॉन होते हैं। इसका परमाणु भार 15.999 और घनत्व 1.429 ग्राम/लीटर है।

    ऑक्सीजन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील (reactive) अधातु, और एक ऑक्सीकरण एजेंट (oxidizing agent) है जो आसानी से ज्यादातर तत्वों और यौगिकों के साथ ऑक्साइड बनाता है।

    हाइड्रोजन और हीलियम के बाद, ऑक्सीजन ब्रह्मांड में द्रव्यमान के हिसाब से तीसरा सबसे प्रचुर तत्व है। ऑक्सीजन गैस पृथ्वी के वायुमंडल का 20.95% है। आक्साइड के रूप में ऑक्सीजन पृथ्वी की कृस्ट (crust) का लगभग आधा हिस्सा बनाती है।

    ऑक्सीजन के तीन समस्थानिक होते हैं- 8O16, 8O17 तथा 8O18

    ऑक्सीजन गैस (Oxygen Gas)

    ऑक्सीजन गैस की खोज सर्वप्रथम स्वीडन के शीले नामक वैज्ञानिक ने 1772 ई. में की थी।

    यह एक रंगहीन, गंधहीन एवं वायु से कुछ भारी गैस है। ऑक्सीजन को प्राण वायु (Life air) कहा जाता है।

    यह गैस स्वयं नहीं जलती परन्तु जलने में सहायक होती है।

    ऑक्सीजन की प्रकृति अनुचुम्बकीय होती है।

    प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस पोटैशियम क्लोरेट को मैंगनीज डाइऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में 375°C तापक्रम पर गर्म करके बनायी जाती है।

    कृत्रिम श्वसन में हीलियम और ऑक्सीजन के मिश्रण का प्रयोग होता है। ऑक्सीजन का उपयोग ऑक्सीजन हाइड्रोजन एवं ऑक्सी-ऐसीटिलीन ज्वाला उत्पन्न करने में होता है।

    द्रवीभूत ऑक्सीजन का उपयोग रॉकेट ईंधन (Rocket fuel) के रूप में होता है।   

    मानव-शरीर में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व ऑक्सीजन (O) है। वायुमंडल में समस्त ऑक्सीजन हरे पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण (Photosyntheis) प्रक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न हुई है।

    तरल ऑक्सीजन (Liquid oxygen) का रंग हल्का नीला और चुंबकीय होता है।

    ऑक्सीजन का इतिहास (History of Oxygen)

    ऑक्सीजन की खोज और प्रारम्भिक अध्ययन जे॰ प्रीस्टले (Joseph Priestley) और सी॰डब्ल्यू॰ शेले (Carl Wilhelm Scheele) ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। सन् 1772 ई॰ में कार्ल शीले ने पोटैशियम नाइट्रेट को गर्म करके आक्सीजन गैस तैयार किया, किन्तु उनका यह कार्य सन् 1777 ई॰ में प्रकाशित हुआ। सन् 1774 ई॰ में जोसेफ प्रिस्टले ने मर्क्युरिक-आक्साइड को गर्म करके ऑक्सीजन गैस तैयार किया। एन्टोनी लैवोइजियर ने इस गैस के गुणों का वर्णन किया तथा इसका नाम आक्सीजन रखा, जिसका अर्थ है – ‘अम्ल उत्पादक‘।

    ऑक्सीजन के उपयोग (use of Oxygen)

    जीवित प्राणियों के लिए आक्सीजन अति आवश्यक है। जीवित रहने के लिए पृथ्वी पर अधिकांश जीवों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
    जानवरों और पौधों को श्वसन के लिए इसकी आवश्यकता होती है।

    ऑक्सीजन हम जिस हवा में सांस लेते हैं और जो पानी (H2O) पीते हैं उसमें ऑक्सीज़न पाया जाता है l

    मनुष्य में भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में ऑक्सीज़न सहायक होती है, इसे वे श्वसन द्वारा इसे ग्रहण करते हैं।

    द्रव ऑक्सीजन तथा कार्बन, पेट्रोलियम इत्यादि का मिश्रण अति विस्फोटक होता है। इसलिए इनका उपयोग चट्टान आदि के तोड़ने में होता है।

    लोहे की मोटी चद्दर काटने अथवा मशीन के टूटे भागों को जोड़ने के लिए ऑक्सीजन तथा दहनशील गैस को ब्लो पाइप में जलाया जाता है।
    साधारण ऑक्सीजन के साथ हाइड्रोजन या एसिटिलीन जलाई जाती है। इसके लिए ये गैसें इस्पात के बेलनों में अति संपीडित अवस्था में बिकती हैं।

    ऑक्सीजन सिरका, वार्निश इत्यादि बनाने तथा असाध्य रोगियों के साँस लेने के लिए भी उपयोगी है। इसका उपयोग अधिकतर श्वसन व अनेक क्रियाविधियों मे होता है ।

    ऑक्सीजन के कई व्यावहारिक उपयोग हैं। इसका सबसे अधिक उपयोग स्टील के निर्माण में किया जाता है। इसका उपयोग अयस्क से धातु को गलाने, पानी को छानने, प्लास्टिक बनाने और रॉकेट ईंधन बनाने के लिए भी किया जाता है।

    ऑक्सीजन के टैंक का उपयोग सांस लेने में समस्या वाले लोगों के इलाज के लिए और विमान, पनडुब्बी, अंतरिक्ष यात्रियों और स्कूबा गोताखोरों के लिए जीवन समर्थन (life support systems) के रूप में भी किया जाता है।

    ऑक्सीजन – महत्वपुर्ण तथ्य (Oxygen – Important and interesting Facts)\

    जानवरों और पौधों को श्वसन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। पादप प्रकाश संश्लेषण (Plant photosynthesis) ऑक्सीजन चक्र को संचालित करता है और इसे हवा में लगभग 21% बनाए रखता है। जबकि ऑक्सीजन गैस जीवन के लिए आवश्यक है, इसकी अत्यधिक मात्रा विषाक्त (toxic) या घातक हो सकती है। ऑक्सीजन विषाक्तता के कारण दृष्टि दोष, खाँसी, मांसपेशियों में मरोड़ और दौरे हो सकते है । सामान्य दबाव पर, ऑक्सीजन विषाक्तता (toxic) तब होती है जब गैस 50% से अधिक हो जाती है।

    ऑक्सीजन गैस रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होती है। यह आमतौर पर तरलीकृत हवा के आंशिक आसवन द्वारा शुद्ध किया जाता है, लेकिन यह तत्व पानी, सिलिका और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे कई यौगिकों में पाया जाता है।

    तरल और ठोस ऑक्सीजन का रंग हल्का नीला होता है। कम तापमान और उच्च दबाव पर, ऑक्सीजन नीले मोनोक्लिनिक क्रिस्टल (Blue monoclinic crystals) से नारंगी, लाल, काले और यहां तक ​​कि धातु के रूप में अपना स्वरूप बदल देता है।

    ऑक्सीजन एक अधातु (nonmetal) है। इसमें कम तापीय और विद्युत चालकता होती है, लेकिन उच्च विद्युतीयता और आयनीकरण ऊर्जा है। परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन प्राप्त करते हैं और सहसंयोजक रासायनिक बंधन बनाते हैं।

    ऑक्सीजन गैस सामान्यतः द्विसंयोजी अणु O2 है। ओजोन, O3, शुद्ध ऑक्सीजन का दूसरा रूप है। परमाणु ऑक्सीजन, जिसे “सिंगलेट ऑक्सीजन” भी कहा जाता है, प्रकृति में होता है, हालांकि आयन आसानी से अन्य तत्वों के साथ बंध जाता है। सिंगलेट ऑक्सीजन ऊपरी वायुमंडल (upper atmosphere) में पाई जा सकती है। ऑक्सीजन के एक परमाणु में आमतौर पर -2 की ऑक्सीकरण संख्या होती है।

    ऑक्सीजन दहन में सहायक होता है हालांकि, यह वास्तव में ज्वलनशील नहीं है l इसे ऑक्सीकारक माना जाता है। शुद्ध ऑक्सीजन के बुलबुले जलते नही है ।

    मानव शरीर के द्रव्यमान का लगभग 2/3 भाग ऑक्सीजन है। इस तरह यह शरीर में द्रव्यमान के हिसाब से सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है। उसमें से अधिकांश ऑक्सीजन पानी (H2O) का हिस्सा है। यद्यपि शरीर में ऑक्सीजन परमाणुओं की तुलना हाइड्रोजन परमाणु अधिक होते हैं, लेकिन उनका द्रव्यमान काफी कम होता है। ऑक्सीजन भी पृथ्वी की क्रस्ट (Crust) में सबसे ज्यादा पाया जाता है (द्रव्यमान के हिसाब से लगभग 47%) और ब्रह्मांड में तीसरा सबसे सामान्य तत्व है। जैसे ही तारे हाइड्रोजन और हीलियम को जलाते हैं, ऑक्सीजन और अधिक मात्रा में हो जाती है।

    ऑक्सीजन पानी में घुल जाती है। ताजे पानी में प्रति लीटर लगभग 6.04 एमएल ऑक्सीजन होता है, जबकि समुद्री जल में प्रति लीटर लगभग 4.95 एमएल ऑक्सीजन होता है।

    हवा में पाई जाने वाली ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा निर्मित होती है – पौधों के बिना हवा में ऑक्सीजन बहुत कम होती। पृथ्वी पर अधिकांश ऑक्सीजन छोटे समुद्री पौधों से आती है जिन्हें फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton) कहा जाता है।

    300 मिलियन वर्ष पहले जब ऑक्सीजन का स्तर अधिक था, कीड़े बड़े हो गए थे। ड्रैगनफली कभी पक्षियों जितनी बड़ी होती थीं!

    ऑरोरा बोरेलिस, या उत्तरी रोशनी का हरा रंग (Green Colour of the Aurora Borealis, or Northern Lights) सौर वायु कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन परमाणुओं से टकराने के कारण होता है।

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (Oxygen Concentrator) क्या है और उसका इस्तेमाल

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हवा में मौजूद अन्य गैस से ऑक्सीजन को फिल्टर करता है। हवां में तीन तरह की गैस मौजूद हैं, जिसमें करीबन 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ऑक्सीजन शामिल है और 1 प्रतिशत अन्य गैसें हैं। ऐसे में हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए अन्य अशुद्धियों के साथ साथ नाइट्रोजन को खत्म करने की जरूरत होती है।

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कैसे काम करता है ?

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में एक मोटर दी गई है, जिसकी मदद से यह कमरे से हवा ग्रहण करता है और उसके फिल्टर के जरिए आगे भेजता है। फिर हवा को गर्म करता है और नाइट्रोजन को खत्म करता है, ऑक्सीजन कंप्रेस होती है, फिर साफ पानी से होकर गुजरती है और आखिर में सांस लेने के लिए उपलब्ध होती है। इसे आप एक प्रकार का एयर प्यूरिफायर समझ सकते हैं, जिसमें कम्प्रेसर, मोटर्स, प्रेशर रेगुलेटर्स, हीट एक्सचेंजर और अन्य कंपोनेंट मौजूद हैं।

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर ऑक्सीजन को बनाता नहीं है सिर्फ इसे साफ करके भेजता है। ऑक्सीजन फ्लो को लीटर प्रति मिनट (LPM) में मापा जाता है। ऐसे में आपको कम से कम एक ऐसी डिवाइस लेनी चाहिए जो कि लगातार 5LPM फ्लो से ऑक्सीजन उपलब्ध करवाए। ।

    आमतौर पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग सांस की बीमारी और अस्थमा आदि से पीड़ित लोग करते हैं

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (oxygen concentrator) का उपयोग खास तौर पर होम आइसोलेशन में मौजूद कोरोना वायरस के मरीजों और ऑक्सीजन की कमी का सामने कर रहे अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है l ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हल्के और मध्य लक्षणों वाले कोविड-19 मरीजों के लिए काफी उपयोगी है l

    ऑक्सीजन कंसंट्रेटर अलग-अलग क्षमता के होते हैं. छोटे पोर्टेबल कंसंट्रेटर एक मिनट में एक या दो लीटर ऑक्सीजन मुहैया करा सकते हैं, जबकि बड़े कंसंट्रेटर 5 या 10 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन सप्लाई की क्षमता रखते हैं. इनसे मिलने वाली ऑक्सीजन 90 से 95 फीसदी तक शुद्ध होती है. लेकिन अधिकतम रेट से सप्लाई करने पर शुद्धता में कुछ कमी आ सकती है.

    कंसंट्रेटर्स में ऑक्सीजन सप्लाई को रेगुलेट करने के लिए प्रेशर वॉल्व लगे होते हैं.  WHO द्वारा 2015 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक कंसंट्रेटर को लगातार काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है, जिससे लगातार लंबे समय तक ऑक्सीजन सप्लाई कर सके.

  • रॉकेट का आविष्कार कैसे हुआ ?

    रॉकेट का आविष्कार कैसे हुआ ?

    क्या आपने कभी सोचा है ? यदि रॉकेट का आविष्कार नहीं होता तो मानव आज अं‍तरिक्ष में नहीं जा पाता उसका अं‍तरिक्ष में जाने का सपना सपना रह जाता ! और ना ही ढेर सारी जो मिसाइल बनाई जा रही हैं वो बन पातीं !

    रॉकेट एक ऐसा वायुयान है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार करते हुए अंतरिक्ष तक पहुचता है यही एक राकेट-यान है जिस से अंतरिक्ष में यात्रा की जा सकती है कहा जाता है !

    कब हुआ था आविष्कार ?

    रॉकेट का इतिहास 13वी सदी से शुरु होता है सबसे पहले रॉकेट का अविष्कार चीन में रॉकेट का आविष्कर हुआ था और शुरु में राकेट का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जाता था | सबसे पहले राकेट का इस्तेमाल सन 1232 में किया गया था, चीनी और मंगोलों एक दूसरे के साथ युद्ध में किया था

    मंगोल लड़ाकों के द्वारा रॉकेट टेक्नोलोजी यूरोप पहुँची थी और फिर अलग अलग शासकों से यूरोप और एशिया के अन्य भागों मे प्रचलित हुई

    ये भी कहा जाता है सन् 1792 में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने अंग्रेज सेना के साथ युद्ध के समय उनके विरुद्ध लोहे के बने रॉकेटों का प्रयोग किया गया था

    कैसे उड़ता है रॉकेट

    रॉकेट के उड़ने का सिद्धान्त न्यूटन के गति के तीसरे नियम क्रिया तथा बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया पर आधारित है रॉकेट के अंदर तरल आक्सीजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है इसमें ईंधन को जलाया जातां है तो जिससे उच्च दाब पर गैस उत्पन्न होती है

    अंग्रेजो ने यह चीज कभी नही देखी थी पहले और वे घबरा गये और जब वे आखिर में युद्ध हार गये और बाद में अंग्रेज सेना ने रॉकेट के बारे में जाना और उसका महत्त्व को समझा और इसकी टेक्नोलोजी को विकसित कर विश्वभर में इसका इस्तेमाल अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए किया।

    तरल ईंधन वाला रॉकेट

    सन् 1926 में, रॉबर्ट गोडार्ड दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट शुरू की थी और 16 मार्च, 1926 को ऑबर्न, मैसाचुसेट्स, पर दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट प्रक्षेपण था जो 60 मील प्रति घंटा, दूर लैंडिंग 41 फुट और 184 फुट की ऊंचाई तक पहुंच गया।

  • फॉस्फोरस (Phosphorus) क्या है ?

    फॉस्फोरस (Phosphorus) क्या है ?

    What is Phosphorus ?

    फॉस्फोरस (Phosphorus)

    फॉस्फोरस नाइट्रोजन का अनुरूप (Analogue) है। यह एक अभिक्रियाशील तत्व है। इसी कारण फॉस्फोरस प्रकृति में मुक्तावस्था में नहीं पाया जाता है। मानव शरीर में फॉस्फोरस की उपस्थिति अनिवार्य है। जानवरों की हडिड्या में लगभग 58% कैल्सियम फॉस्फेट रहता है। इसके अतिरिक्त फॉस्फोरस रक्त तथा शरीर के दूसरे भागो में भी पाया जाता है।

    फॉस्फोरस के अपरूप

    फॉस्फोरस के कई अपरूप प्रकृति में पाये जाते हैं, ये है—(1) श्वेत या पीला फॉस्फोरस, (2) लाल फॉस्फोरस, (3) सिन्दुरी फॉम्फोरस, (4) काला फॉस्फोरस तथा (5) बैंगनी फॉस्फोरस

    श्वेत या पीला फॉस्फोरस ((White or Yellow Phosphorus)

    यह रंगहीन मोम जैसा मुलायम रवेदार ठोस पदार्थ होता है। इसे प्रकाश में छोड़ देने पर यह धीरे-धीरे पीला हो जाता है। इस कारण इसे पीला फॉस्फोरस भी कहते हैं। इसमें लहसून (Garlic) जैसी गंध होती है। यह एक विषैला पदार्थ होता है। यह अन्धेरे में आर्द्र वायु के सम्पर्क में आकर हल्के पीले रंग का प्रकाश देता है। इस घटना को स्फुरदीप्ति (Phosphorescence) कहते हैं।

    फॉस्फोरस के सभी अपरूपों में श्वेत फॉस्फोरस सर्वाधिक अभिक्रियाशील होता है। श्वेत फॉस्फोरस का हवा में दहन स्वत: दहन का उदाहरण है। श्वेत फॉस्फोरस सं आतिशबाजी के सामान बनाये जाते हैं। श्वेत फॉस्फोरस से युद्धकाल में प्रयुक्त होने वाली अग्नि बम एवं धूम्र बम बनाये जाते हैं। श्वेत फॉस्फोरस का कास्टिक सोडा के घोल के साथ गर्म करने पर फॉस्फीन प्राप्त होता है।

    लाल फॉस्फोरस (Red Phosphorus)

    लाल फॉस्फोरस लाल रंग का अपारदर्शक एवं रवेदार ठोस पदार्थ है। यह स्फुरदीप्ति (Phosphorescence) प्रदर्शित नहीं करता है। यह विषैला भी नहीं होता है। श्वेत फॉस्फोरस को नाइट्रोजन या कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति में 250°C तक गर्म करने पर यह लाल फॉस्फोरस में परिवर्तित हो जाता है। लाल फॉस्फोरस का प्रयोग दियासलाई (Matches) के निर्माण में किया जाता है। दियासलाई बनाने में लाल फॉस्फोरस और फॉस्फोरस डाइसल्फाइड का उपयोग होता है। दियासलाई (Safty matches) बनाने में चीड़ की लकड़ी की सलाइयों के सिर पर पोटैशियम क्लोरट, रेड लेड, एण्टिमनी सल्फाइड और गोंद का मिश्रण लगाया जाता है। डिब्बी पर (रगड़ने वाली सतह पर) लाल फॉस्फोरस, एण्टिमनी सल्फाइड, कांच के चूर्ण और गोंद का मिश्रण लगाया जाता है।

    फॉस्फोरस के यौगिक (Compounds of Phosphorus)

    फॉस्फीन (Phosphine)

    फॉस्फोरस हाइड्राइड (PH) को फॉस्फीन (Phosphine) कहा जाता है। फॉस्फीन पेड़ पौधों व अन्य कार्बनिक पदार्थों के सड़ने से दलदली स्थानों में पैदा होती है और वायु में जलती है जिसमे चमक पैदा होती है। यह एक रंगहीन और सड़ी मछली जैसी गंध की विषैली गैस है। कैल्सियम फॉरफाइड होम सिग्नल (Holme’s singnal) बनाने के काम आता है जिसका उपयोग समुद्र में जहाजों को संकेत देने में किया जाता है। कैल्सियम फॉस्फाइड धूम्र पट (Smoke screen) बनाने में काम आता है, क्योंकि इसकी जल के साथ प्रतिक्रिया होने पर अशुद्ध फॉस्फीन बनती है जो वायु में स्वतः जलती है और मंटा फॉस्फोरिक अम्ल का सघन धुआँ बनता है।

    फॉस्फोरस का उपयोग (Use of Phosphorus)

    फॉस्फोरस का उपयोग हाइपोफॉस्फाइट, आदि यौगिक बलवर्द्धक औषधियों के निर्माण में होता है। फॉस्फोरस से फॉस्फर ब्रांज मिश्रधातु तैयार किये जाते हैं।

    सुपर फॉस्फेट का उपयोग उर्वरक के रूप में खेतों में फसलों की पैदावार बढ़ाने में किया जाता है।

    फॉस्फोरस की अनुपस्थिति में पेड़ पौधे प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया नहीं कर पाते हैं।

    फॉस्फोरस के अभाव में इनके पत्ते अपना रंग खो देते है तथा अंततोगत्वा सूख जाते हैं।

    एलुमिनियम फॉस्फाइड का उपयोग अनाजों के परिरक्षण में होता है।

    जिंक फॉस्फाइड का उपयोग चूहा-विष के रूप में होता है।

  • नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide) क्या है ?

    नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide) क्या है ?

    What is Nitrous Oxide ?

    नाइट्रस ऑक्साइड गैस को अल्प मात्रा में सूंघने पर हंसी उत्पन्न होती है। इसी गुण के कारण नाइट्रस ऑक्साइड को हंसी उत्पन्न करने वाली गैस या ‘Laughing Gas‘ कहते हैं। नाइट्रस ऑक्साइड का फार्मूला N2O है l नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) की खोज का श्रेय प्रीस्टले (Pristley) को जाता है। विद्युत विसर्जन के समय हवा के ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन आपस में संयोग कर नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण करते हैं।

    यह एक रंगहीन गैस है जिसका उपयोग आमतौर पर बेहोश करने की प्रक्रिया में और दर्द से राहत के लिए किया जाता है साथ ही चीड़-फाड़ (Surgery) या दांत उखाड़ते समय बेहोश करने के लिए ऑक्सीजन के साथ नाइट्स ऑक्साइड (N2O) का मिश्रण निश्चेतक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

    नाइट्रस ऑक्साइड को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आवश्यक दवाओं की सूची (List of Essential Medicines ) में शामिल किया है, जो हेल्थ सिस्टम के लिए आवश्यक सबसे सुरक्षित और सबसे प्रभावी दवाओं में से एक हैं। इसका उपयोग रॉकेट प्रणोदक में ऑक्सीडाइज़र के रूप में और इंजनों के बिजली उत्पादन को बढ़ाने के लिए मोटर रेसिंग में भी किया जाता है।

    यह तीसरी सबसे महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस होने के कारण इसका ग्लोबल वार्मिंग को बढाती है ।

    नाइट्रस ऑक्साइड का उपयोग नशे के रूप में किया जाता रहा है और इसका शुरू से एक रोचक इतिहास रहा है l

     यह 1799 ब्रिटिश उच्च वर्गीय लोगो में ‘लाफिंग गैस पार्टी (Laughing Gas Party)’ का चलन शुरू हुआ जिसमे नाइट्रस ऑक्साइड गैस का हसने और हँसाने के लिए प्रयोग होता था l 2010 के दशक तक, कुछ देशों में नाइट्रस ऑक्साइड का प्रयोग सामान्य रूप से एक लोकप्रिय मनोरंजक दवा (Recreational Drug)  के रूप में शुरू हो गया था l इसी वजह से कई देशों में नाइट्रस ऑक्साइड के उपयोग को लेकर सख्त कानून बना रखे है ताकि इसका प्रयोग सिर्फ मेडिकल में किया जा सके l

  • नाइट्रोजन के यौगिक और उसके प्रकार क्या है ?

    नाइट्रोजन के यौगिक और उसके प्रकार क्या है ?

    What are the compounds of Nitrogen and its types?

    अमोनिया (Ammonia)

    अमोनिया नाइट्रोजन का एक स्थायी हाइड्राइड है। बर्थोलेट (Berthollet) ने 1785 ई. में बताया कि अमोनिया नाइट्रोजन व हाइड्रोजन का यौगिक है। अमोनिया का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन हैबर विधि (Habber’s process) द्वारा किया जाता है। यह एक रंगहीन गैस है जिसमें तीखी गंध होती है। इसे सूंघने पर छींक तथा आंखों में आंसू आ जाते हैं। उच्च दाब पर अमोनिया को कार्बन डाइऑक्साइड के साथ गर्म करने पर कार्बनिक यौगिक यूरिया प्राप्त होता है।

    अमोनिया का उपयोगः

    द्रवित अमोनिया का उपयोग रेफ्रीजरेटरों में बर्फ जमाने के काम में होती है,

    (ii) अमोनियम लवणों के उत्पादन में,

    (iii) यूरिया के निर्माण में,

    (iv) सफाई के काम में चिकनाई दूर करने के लिए,

    (v) ओस्टवाल्ड विधि द्वारा नाइट्रिक अम्ल बनाने में,

    (vi) सौल्वे विधि (Solvey process) द्वारा सोडियम कार्बोनेट के उत्पादन हेतु प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में,

    (vii) हाइड्रोजन के उत्पादन में। तथा

    द्रव अमोनिया की बोतलों को कुछ समय तक बर्फ में रखने के पश्चात् खोला जाता है क्योंकि द्रव अमोनिया का वाष्प दाब (Vapour pressure) अधिक होता है।

    नौसादर (Ammonium Chloride)

    नौसादर का व्यापारिक नाम अमोनिया क्लोराइड है। इसका सामान्य सूत्र NH4CI होता है।

    नौसादर का उपयोगः

    (i)   शुष्क बैटरियों में,

    (ii)  धातुओं को जोड़ने के पहले उनकी सतह साफ करने में,

    (iii) प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में,

    (iv)  औषधि निर्माण में, तथा

    (v)   बर्तनों में कलई करने में।

    नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide)

    नाइट्रस ऑक्साइड गैस को अल्प मात्रा में सूंघने पर हंसी उत्पन्न होती है। इसी गुण के कारण नाइट्रस ऑक्साइड को हंसी उत्पन्न करने वाली गैस या ‘Laughing Gas’ कहते हैं। चीड़-फाड़ (Surgery) या दांत उखाड़ते समय बेहोश करने के लिए ऑक्सीजन के साथ नाइट्स ऑक्साइड (N,O) का मिश्रण निश्चेतक के रूप में प्रयोग किया जाता है। नाइट्रस ऑक्साइड (N,O) की खोज का श्रेय प्रीस्टले (Pristley) को प्राप्त है। विद्युत विसर्जन के समय हवा के ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन आपस में संयोग कर नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण करते हैं।

    नाइट्रिक अम्ल (Nitric Acid)

    प्रयोगशाला में नाइट्रिक अम्ल का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन की तीन विधियां है, ये है:

    i. ओस्तवाल्ड विधि (Ostwald Process)

    ii. बर्कलैंड आईड विधि (Birkeland Eyed Process)!

    iii. वकयंत्र विधि (Retort Process)।

    सान्द्र नाइट्रिक अम्ल एक भास्मिक अम्ल है। यह एक प्रबल ऑक्सीकारक भी है।

    नाइट्रिक अम्ल का उपयोगः

    i.   कई धातुओं के लिए घोलक के रूप में।

    ii.  प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में।

    iii. नाइट्रेट्स के उत्पादन में।

    iv.  सोने एवं सिल्वर को शुद्ध करने में।

    v.    तांबा, पीतल, कांसा, आदि के ऊपर चित्र बनाने या नाम लिखने में।

    vi.  डायनामाइट, पिक्रिक अम्ल (TNP), ट्राइनाइट्रो टॉल्वीन (TNT), ट्राइनाइट्रो बेन्जीन (TNB), आदि विस्फोटकों के निर्माण में।

    अम्लराज (Aquaregia)

    एक आयतन सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (HNO3) तथा तीन आयतन सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hcl) की मिश्रित करने पर जो मिश्रण प्राप्त होता है, उसे ‘अम्लराज’ या Aquaregia कहते हैं। अम्लराज में सोना, प्लेटिनम, आदि धातु घुल जाते हैं।

    नाइट्रस अम्ल (Nitrous Acid)

    नाइट्रस अम्ल बहुत ही अस्थायी होता है। इस कारण इस अम्ल को आवश्यकता पड़ने पर ही बनाया जाता है। नाइट्रय अम्लों के लवणनाइट्राइट कहलाते हैं।

  • अमोनिया (Ammonia) क्या है ?

    अमोनिया (Ammonia) क्या है ?

    What is Ammonia ?

    अमोनिया नाइट्रोजन का एक स्थायी हाइड्राइड है। बर्थोलेट (Berthollet) ने 1785 ई. में बताया कि अमोनिया नाइट्रोजन व हाइड्रोजन का यौगिक है। अमोनिया का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन हैबर विधि (Habber’s process) द्वारा किया जाता है। यह एक रंगहीन गैस है जिसमें तीखी गंध होती है। इसे सूंघने पर छींक तथा आंखों में आंसू आ जाते हैं। उच्च दाब पर अमोनिया को कार्बन डाइऑक्साइड के साथ गर्म करने पर कार्बनिक यौगिक यूरिया प्राप्त होता है।

    अमोनिया एक तीक्ष्म गंध वाली रंगहीन गैस होती है। यह हवा से हल्की होती है और इसका वाष्प घनत्व 8.5 होता है। यह जल में अति विलेय होता है। अमोनिया के जलीय घोल को लिकर अमोनिया कहते है यह क्षारीय प्रकृति का होता है। जोसेफ प्रिस्टले ने सर्वप्रथम अमोनियम क्लोराइड को चूने के साथ गर्म करके अमोनिया गैस को बनाया था । बर्थेलाट ने इसके रासायनिक गठन का अध्ययन किया तथा इसको बनाने वाले तत्वों को पता लगाया। प्रयोगशाला में अमोनियम क्लोराइड तथा बुझे हुए सूखे चूने के मिश्रण को गर्म करके अमोनिया गैस तैयार की जाती है।

    अमोनिया का उपयोग

    द्रवित अमोनिया का उपयोग रेफ्रीजरेटरों में बर्फ जमाने के काम में होती है,

    (ii) अमोनियम लवणों के उत्पादन में,

    (iii) यूरिया के निर्माण में,

    (iv) सफाई के काम में चिकनाई दूर करने के लिए,

    (v) ओस्टवाल्ड विधि द्वारा नाइट्रिक अम्ल बनाने में,

    (vi) सौल्वे विधि (Solvey process) द्वारा सोडियम कार्बोनेट के उत्पादन हेतु प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में,

    (vii) हाइड्रोजन के उत्पादन में। तथा

    द्रव अमोनिया की बोतलों को कुछ समय तक बर्फ में रखने के पश्चात् खोला जाता है क्योंकि द्रव अमोनिया का वाष्प दाब (Vapour pressure) अधिक होता है।

  • नाइट्रोजन (Nitrogen) क्या है ?

    नाइट्रोजन (Nitrogen) क्या है ?

    What is Nitrogen ?

    नाइट्रोजन (Nitrogen) (N), फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As), ऐन्टिमनी (Sb) एवं बिस्मथ (Bi) को आधुनिक आवर्त सारणी के उपवर्ग VA में रखा गया है। वर्ग VA के तत्व प्रतिरूपी तत्व (Typical elements) अथवा सामान्य तत्व (Normal elements) कहलाते हैं। नाइट्रोजन को छोड़ शेष सभी VA के तत्व ठोस अवस्था में पाये जाते हैं।

    नाइट्रोजन (Nitrogen)

    नाइट्रोजन वायु का एक प्रमुख अवयव है। आयतन की दृष्टि से वायुमंडल का लगभग 78% भाग नाइट्रोजन होता है। वायुमंडल सहित पृथ्वी पर नाइट्रोजन का बाहुल्य भारानुसार 0.01% है। संयुक्त अवस्था में नाइट्रोजन की थोड़ी मात्रा नाइट्रेट के रूप में पायी जाती है। अमोनिया एवं अमोनिया लवणों के रूप में भी नाइट्रोजन की उपस्थिति होती है। नाइट्रोजन प्रोटीन (Protein) नामक जटिल कार्बनिक यौगिक में उपस्थित रहता है। नाइट्रोजन यूरिया (Urea) नामक कार्बनिक यौगिक का प्रमुख अवयव है। यूरिया में नाइट्रोजन की 46% मात्रा पायी जाती है। पेड़-पौधे मिट्टी से नाइट्रेट्स के रूप में प्राप्त करते हैं। जीवधारी नाइट्रोजन को पेड़ पौधा से प्रोटीन के रूप में प्राप्त करते हैं।

    नाइट्रोजन का उपयोग

    1. नाइट्रोजन का सबसे प्रमुख व्यापारिक उपयोग अमोनिया के उत्पादन में होता है जो अमोनियम सल्फेट नामक उर्वरक बनाने में प्रयुक्त होता है।

    2. थोड़ी मात्रा में नाइट्रोजन का उपयोग धातुकर्म एवं रासायनिक कार्यों में निष्क्रिय माध्यम प्रदान करने के लिए होता है।

    3. नाइट्रोजन विद्युत बल्बों में तथा उच्च ताप मापने वाले तापमापी में भरने के काम में आता है।

    4. कृत्रिम गर्भाधान के लिए बैल के वीर्य को द्रव नाइट्रोजन में रखा जाता है।

    लेग्युमिनस परिवार (Leguminous family) या दलहनी परिवार के पौधों की जड़ों की गांठों में पाया जाने वाला राइजोबियम (Rhizobieum) नामक सहजीवी जीवाणु (Symbiotic bacteria) नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भाग लेता है।

    नाइट्रोजन यौगिकों का नाइट्रोजन में परिवर्तन विनाइट्रीकरण कहलाता है। यह क्रिया कुछ जीवाणुओं द्वारा सम्पादित होता है जिसे विनाइट्रीकारक जीवाणु (Denitrifying bacteria) कहते हैं। विनाइट्रीकारक जीवाणु के प्रभाव से नाइट्रोजन युक्त यौगिक सीधे नाइट्रोजन में परिवर्तित होकर वायुमंडल में चले जाते हैं।

    कैल्सियम सायनाइड को नाइट्रोलियम के नाम से जाना जाता है जिसका उपयोग उर्वरक के रूप में किया जाता है।

    जलती हुई सींक को नाइट्रोजन से भरे जार में ले जाने पर वह बुझ जाती है।

    अमोनियम लवण विच्छेदित होकर अमोनिया उत्पन्न करते हैं। इसी कारण अस्तबलों, पेशाबखानों व शौचालयों से बराबर अमोनिया की गंध निकलती रहती है।

    नाइट्रोजन के यौगिक

    अमोनिया (Ammonia)

    अमोनिया नाइट्रोजन का एक स्थायी हाइड्राइड है। बर्थोलेट (Berthollet) ने 1785 ई. में बताया कि अमोनिया नाइट्रोजन व हाइड्रोजन का यौगिक है। अमोनिया का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन हैबर विधि (Habber’s process) द्वारा किया जाता है। यह एक रंगहीन गैस है जिसमें तीखी गंध होती है। इसे सूंघने पर छींक तथा आंखों में आंसू आ जाते हैं। उच्च दाब पर अमोनिया को कार्बन डाइऑक्साइड के साथ गर्म करने पर कार्बनिक यौगिक यूरिया प्राप्त होता है।

    अमोनिया का उपयोग

    द्रवित अमोनिया का उपयोग रेफ्रीजरेटरों में बर्फ जमाने के काम में होती है,

    (ii) अमोनियम लवणों के उत्पादन में,

    (iii) यूरिया के निर्माण में,

    (iv) सफाई के काम में चिकनाई दूर करने के लिए,

    (v) ओस्टवाल्ड विधि द्वारा नाइट्रिक अम्ल बनाने में,

    (vi) सौल्वे विधि (Solvey process) द्वारा सोडियम कार्बोनेट के उत्पादन हेतु प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में,

    (vii) हाइड्रोजन के उत्पादन में। तथा

    द्रव अमोनिया की बोतलों को कुछ समय तक बर्फ में रखने के पश्चात् खोला जाता है क्योंकि द्रव अमोनिया का वाष्प दाब (Vapour pressure) अधिक होता है।

    नौसादर (Ammonium Chloride)

    नौसादर का व्यापारिक नाम अमोनिया क्लोराइड है। इसका सामान्य सूत्र NH4CI होता है।

    नौसादर का उपयोग

    (i) शुष्क बैटरियों में,

    (ii) धातुओं को जोड़ने के पहले उनकी सतह साफ करने में,

    (iii) प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में,

    (iv) औषधि निर्माण में, तथा

    (v) बर्तनों में कलई करने में।

  • सिलिकन (Silicon) क्या है ?

    सिलिकन (Silicon) क्या है ?

    What is Silicon ?

    सिलिकन प्रकृति में रेत (Sand) और पत्थर के रूप में अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह अपरूपता (Allotropy) घटना प्रदर्शित करता है। यह एक अधातु तत्व है। इसके हाइड्राइड ‘सिलोन’ (Silone) कहलाते हैं। पृथ्वी की सतह पर ऑक्सीजन के अतिरिक्त दूसरा बहुतायत में पाया जाने वाला तत्व सिलिकन है। पृथ्वी की परत में इसकी प्रतिशत मात्रा 26% रहती है।

    सिलिकन का उपयोगः

    1. शुद्ध सिलिकन का उपयोग अतिचालकता (Super conductivity) में होता है।

    2. कम्प्यूटर चिप्स के निर्माण में।

    3. अर्धचालक उपकरणों के निर्माण

    4. कार्बोरेण्डम के निर्माण में।

    5. मिश्रधातुओं के निर्माण में।

    6.  इस्पात या लोहे को अम्ल प्रतिरोधी (Acid resistant) बनाने में। ।

    7. सिलिकोन नामक बहुलक के निर्माण में

    8. सिलिका जेल (Silica gel) के रूप में इसका उपयोग शुष्ककारक (Drying agent) के रूप में होता है

    9. सिलिका वाटिका (Silica garden) के निर्माण में।

    सिलिकन के यौगिकः

    1. सिलिकन कार्बाइड (Silicon Carbide): इसे कार्बोरेण्डम (Carborendum) कहा जाता है। इसे ‘कृत्रिम हीरा‘ भी कहते हैं।

    2. सिलिका (Silica): सिलिका को बालू (Sand) भी कहा जाता है। यह ठोस अवस्था में पाया जाता है। इसका उपयोग कांच निर्माण तथा सीमेण्ट के उत्पादन में किया जाता है। क्वार्टज (Quartz) सिलिका का क्रिस्टलीय रूप है। यह प्रकृति में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला खनिज है।

  • कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) क्या है ?

    कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) क्या है ?

    What is Carbon Dioxide ?

    कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के लिए प्राणदायिनी गैस है। वायुमंडल में पायी जाने वाली गैसों में CO2 की मात्रा 0.03% होती है। CO, गैस जन्तु जगत द्वारा श्वास के रूप में बाहर छोड़ी जाती है। पौधे दिन के समय CO2 गैस ही ग्रहण करते हैं। CO2 गैस ग्रीन हाऊस प्रभाव (Green house effect) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होती है। प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया में CO2 गैस प्रयुक्त होती है। किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया के दौरान भी CO2 गैस बाहर निकलती है। CO2 गैस की प्रकृति अम्लीय होती है। CO2 गैस चूने के जल को दुधिया कर देती है।

    सोडावाटर में अधिक दाब पर CO2 गैस घुली रहती है। शीतल पेय पदार्थों के बोतलों (Cold drinks) में उच्च दाब पर CO2 गैस भरी होती है। ठोस कार्बन डाइऑक्साइड को शुष्क बर्फ या Dry ice या क्तपावसक कहते हैं।

    CO2 गैस आग बुझाने के काम आता है। अग्निशामक यंत्रों में सोडियम बाइकार्बोनेट के घोल पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया कराकर CO2 गैस तैयार की जाती है।

    ठोस कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग रेफ्रीजरेशन में होता है।

    कार्बन डाइऑक्साइड का जलीय घोल कार्बोनिक अम्ल कहलाता है।

    पेड़-पौधे रात्रि के समय कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर छोड़ते है। इस कारण रात में पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए।

    कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोगः

    सोडावाटर, लेमोनेड, आदि में।

    चीनी उद्योग में, चूने को अवक्षेपित करने में।

    सफेद लेड के उत्पादन में।

    कड़ा इस्पात (Hard steel) के निर्माण में।

    अग्निशमन में।

  • कार्बन यौगिक – कार्बन मोनोक्साइड (Carbon Monoxide)

    कार्बन यौगिक – कार्बन मोनोक्साइड (Carbon Monoxide)

    कार्बन मोनोक्साइड (Carbon Monoxide)

    यह रंगहीन, स्वादहीन, विषैली, जल में अत्यंत अल्प घुलनशील, हवा के बराबर भारी तथा ज्वलनशील गैस है। कार्बन मोनोक्साइड गैस मानव रक्त के हीमोग्लोबीन के साथ मिलकर कार्बोक्सी हीमोग्लोबीन (Carboxy Haemoglobin) नामक एक लाल पदार्थ बनाता है जिससे रक्त में ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। फलत: मनुष्य की श्वास क्रिया रुकने लगती है और अंत में मृत्यु हो जाती है। यह सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ संयोग कर फॉस्जीन या कार्बोनिल क्लोराइड (Phosgene or Carbonyl chloride) का निर्माण करती है जो कि एक विषैली गैस है।

    कार्बन मोनोक्साइड के उपयोगः

    1. फॉस्जीन गैस बनाने में।

    2. मिथाइल ऐल्कोहॉल तथा सोडियम फॉर्मेट बनाने में।

    3. अवकारक के रूप में धातुकर्म में।

    4. शुद्ध निकेल धातु तैयार करने में।

    5. प्रोड्यूशर गैस और जल गैस के रूप में ईंधन के लिए।