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  • जन्तु जगत (एनिमेलिया) Animal kingdom क्या है ? जन्तु जगत का वर्गीकरण (Taxonomy of Animal Kingdom)

    जन्तु जगत (एनिमेलिया) Animal kingdom क्या है ? जन्तु जगत का वर्गीकरण (Taxonomy of Animal Kingdom)

    इस आर्टिकल में हम जानेगे कि जंतु जगत (Jantu Jagat) क्या है और जंतु जगत (एनिमल किंगडम) का वर्गीकरण किस प्रकार है ?

    जंतु जगत (Animal kingdom)

    जन्तु जगत के अन्तर्गत सभी प्रकार के यूकैरियोटिक बहुकोशिकीय तथा विषमपोषी (जो पोषण के लिए प्रत्यक्ष रूप से दूसरे जीवों पर निर्भर हो) जीव आते हैं।  यह यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय, विषमपोषी प्राणियों का वर्ग है जिसमे कोशिका भित्ति रहित कोशिकाओं से बना है।

    ये अधिकांशतया भोजन का अन्तर्ग्रहण करते हैं तथा आन्तरिक गुहा में इसका पाचन होता है। प्रोटोजोआ तथा पोरोफेरा को छोड़कर सभी में तन्त्रिका तन्त्र पाया जाता है। जन्तु जगत के अन्तर्गत विशिष्ट संघ आते हैं |

    चुकीं इन प्राणियों की संरचना एवं आकार में विभिन्नता होते हुए भी उनकी कोशिका व्यवस्था, शारीरिक सममिति, पाचन तंत्र, परिसंचरण तंत्र एवं जनन तंत्र की रचना में कुछ आधारभूत समानताएँ पाई जाती हैं। इन्हीं विशेषताओं को वर्गीकरण का आधार बनाया गया है।

    जंतु जगत का वर्गीकरण

    जंतु जगत का वर्गीकरण निम्न प्रकार से है :

    प्रोटोजोआ (Protozoa)

    प्रोटोजोआ का सर्वप्रथम अध्ययन ल्यूवेनहॉक ने किया तथा गोल्डफस ने इस संघ को प्रोटोजोआ नाम दिया। प्रोटोजोआ को सामान्यतया प्रोटिस्टा जगत के अर्न्तगत रखा जाता है। यह एककोशिकीय सूक्ष्मजीव है। इसकी सभी क्रियाएँ कोशिका के अन्तर्गत घटित होती हैं; जैसे-अमीबा, सारकोडिना आदि।

    इसके अन्तर्गत फ्लेजैलायुक्त यूमेस्टिजिना भी आते हैं, जिसकी अनेक जातियाँ पादपों तथा जन्तुओं पर परजीवी के रूप में रहती हैं। तथापि कई वर्गीकरणों में प्रोटोजोआ को अन्य एककोशिकीय जीवों के साथ प्रोटिस्टा जगत में रखा जाता है।

    अमीबा (Amoeba)

    अमीबा की खोज रसेल वॉन रोजेनहॉफ ने 1755 में की। इसका शरीर प्लाज्मालेमा से ढका होता है। यह प्लाज्मालेमा श्वसन और उत्सर्जन दोनों का कार्य करती है। अमीबा कूटपादों (pseudopodia) द्वारा गमन करता है। अमीबा में परासरण संकुचनशील रिक्तिका द्वारा होता है। इसके शरीर में कंकाल नहीं होता है।

    अमीबा में प्राणिसमभोजी पोषण की विधि महत्त्वपूर्ण होती है। इसमें अलैंगिक जनन द्विखण्डन विधि द्वारा होता है। साथ ही भक्षकाणु क्रिया (invagination) की विधि द्वारा भोजन ग्रहण करता है।

    प्लाज्मोडियम (Plasmodium): मलेरिया परजीवी

    यह मलेरिया फैलाने वाला अन्त:परजीवी है। यह दो पोषकों (digenetic) में अपना पूरा जीवन चक्र सम्पन्न करता है-प्रथम मनुष्य व दूसरा मादा एनॉफिलीज मच्छर। प्लाज्मोडियम का अलैंगिक जीवन मनुष्य में तथा लैंगिक जीवन मच्छर में घटित होता है।

    मनुष्य में पूरा होने वाला जीवन चक्र शाइजोगोनी तथा मच्छर में पूरा होने वाला जीवन चक्र स्पोरोगोनी कहलाता है। प्रासी नामक वैज्ञानिक ने मादा एनॉफिलीज मच्छर में प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र का वर्णन किया।

    पोरीफेरा (Porifera)

    छिद्रधारी जन्तु इस संघ के सभी जन्तु सामान्यतया खारे जल में पाए जाते हैं। इसके शरीर में कई छिद्र होते हैं और कांटे जैसे स्पिक्यूल रेशाओं का बना एक कंकाल होता है। इन्हें आमतौर पर स्पंज कहा जाता है। इसके शरीर में दो प्रकार के छिद्र ऑस्टिया और ऑस्कुलम होते हैं। स्पंज में ही केवल नाल तन्त्र (canal system) पाया जाता है।

    कंकाल कैल्शियम काबोंनेट या सिलिका नामक कार्बनिक पदार्थ का बना होता है। स्पंज के शरीर में पाए जाने वाले असंख्य छिद्र (ostia), जिसके माध्यम से जल तथा जल के साथ ऑक्सीजन व भोजन शरीर में पहुँचती है। स्पंज अमोनिया उत्सर्जी पदार्थ होता है। कीप कोशिकाएँ (collar cell) स्पंजों का एक विशिष्ट गुण हैं।

    सीलेन्ट्रेटा (Coelenterata)

    इस वर्ग के सभी प्राणी जलीय होते है, जो मुख्य रूप से समुद्री जल में तथा कुछ, जैसे-हाइड्रा मीठे जल में पाए जाते है। इस वर्ग के सभी प्राणी द्विस्तरीय तथा बहुकोशिकीय होते हैं, जिसमें बाहरी स्तर एपीडमिंस तथा भीतरी स्तर गैस्ट्रोडर्मिस के बीच मीसोग्लिया नामक जैली स्तर पाया जाता है। इसमें लैंगिक तथा अलैंगिक दोनों प्रकार का जनन होता है। अलैंगिक जनन मुकुलन (budding) द्वारा होता है।

    इसकी मेड्यूसा अवस्था में केवल लैंगिक जनन होता है। इसकी देहगुहा को सीलेन्ट्रॉन कहते हैं तथा इसी के द्वारा भोजन प्राप्त करना तथा अपच भोजन बाहर निकलने की क्रिया सम्पन्न होती है। संघ-सीलेन्ट्रेटा का मुख्य सदस्य हाइड्रा, जेलीफिश आदि हैं।

    हाइड्रा (Hydra)

    हाइड्रा की खोज ल्यूवेनहॉक ने की थी। यह मीठे जल में पाया जाता है, जबकि इस वर्ग के अधिकांश जीव समुद्री लवणीय जल में पाए जाते हैं। इसके शरीर की सममिति अरीय (radial symmetry) होती है। इसकी देह भित्ति द्विजन स्तरी (diploblastic) होती है। बाहरी भाग में घनाकार कोशिकाओं के बने अधिचर्म में उपकला पेशी कोशिकाएँ, संवेदी, तत्रिका, जनन तथा दंश कोशिकाएँ होती हैं।

    हाइड्रा सबसे छोटा पॉलिप होता है। हाइड्रा विरडिस्सिमा हरे रंग का तथा हाइड्रा ओलाइगैक्टिस भूरे रंग का होता है। इसके शरीर पर उपस्थित स्पर्शक चलन, भोजन ग्रहण एवं सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसकी देह गुहा सीलेन्ट्रॉन कहलाती है तथा इसमें गुही नहीं होती है। हाइड्रा में पुनरुद्भवन (regeneration) की अपार क्षमता होती है।

    प्लेटिहेल्मिन्थीज (Platyhelminthes): फीताकृमि

    ये परजीवी तथा स्वतन्त्रजीवी दोनों प्रकार के होते हैं। इसके तीन वर्ग टवेलेरिया, टमेंटोडा तथा सेस्टोडा हैं वे सामान्यतया फीते के समान चपटे अथवा पत्ती के समान आकृति के द्विपार्श्व सममिति (bilaterally symmetrical) तथा त्रिस्तरीय जन्तु है। श्वसन अधिकांशतया अवायवीय (anaerobic) होता है तथा उत्सर्जन हेतु ज्वाला कोशिकाएँ होती हैं इस वर्ग के जीव उभयलिंगी होते हैं अर्थात् एक ही जीव में नर तथा मादा जननांग पाए जाते हैं। इस संघ के अन्तर्गत प्लेनेरिया, टीनिया सोलियम जैसे कोड़े के समान अखण्डित जन्तु आते हैं तथा अधिकांशतया परजीवी होते हैं।

    एस्केल्मिन्थीज (Aschelminthes): गोलकृमि

    इनका शरीर गोल होता है। इसके अन्तर्गत ऐस्कैरिस, ये परजीवी तथा स्वतन्त्रजीवी दोनों प्रकार के होते हैं। हुकवर्म, फाइलेरिया कृमि, पिनकृमि, गीनिया कृमि आदि आते हैं। इसके शरीर में बहुकेन्द्रकी एपीडर्मिस (Syncytial epidermis) पाई जाती है। ये नलिका के अन्दर नलिका शरीर संरचना प्रस्तुत करते हैं।
    इसके शरीर में परिवहन अंग तथा श्वसन अंग नहीं होते हैं परन्तु तन्त्रिका तन्त्र काफी विकसित होता है। इसके शरीर में उत्सर्जन प्रोटोनेफ्रीडिया द्वारा होता है। इसमें उत्सर्जी पदार्थ यूरिया उत्सर्जी प्रकार का होता है।

    ऐकैरिस लुम्बीक्वॉएडिस

    ऐस्कैरिस अन्तःपरजीवी है, जो मनुष्य के छोटी आंत में पाया जाता है। इसमें उत्सर्जन रेनेट कोशिका द्वारा होता है। ऐस्कैरिस अमोनिया तथा यूरिया का उत्सर्जन करती है। ऐस्कैरिस द्वारा उत्पन्न रोग को ऐस्कैरिएसिस कहते हैं। ऐस्कैरिस को रोगी के आंत से निकालने हेतु चीनोपोडियम का तेल प्रयोग किया जाता है। इसमें लार ग्रन्थियाँ नहीं पाई जाती हैं।

    एनीलिडा (Annelida)

    खण्डित जन्तु ये स्वतन्त्र जीवी कृमि सदृश जीव होते हैं, जिसका शरीर मुलायम, गोल तथा खण्डित होता है। इसके अन्तर्गत केंचुआ, जोंक, समुद्री चूहा आदि जीव आते हैं।

    आर्थोपोडा (Arthropoda) (संयुक्त पाद प्राणी)

    अप-आर्थोपोडा प्राणी संसार का सबसे बड़ा वर्ग माना जाता है। आपापोडा संघ के जन्तुओं की सबसे अधिक संख्या कीट वर्ग में है। ‘आर्थोपोडा’ शब्द का अर्थ होता है-संयुक्त उपांग (Arthron = Joint; podes Front)। इस संघ के जन्तुओं में चलन एवं कुछ अन्य कायों के लिए जोड़ीदार, दृढ़ एवं पाश्चीय संयुक्त उपांग होते हैं। ये जन्तु बहुकोशिकीय, द्विपार्थ सममित तथा खण्डयुक्त शरीर वाले हैं। शरीर तीन भागों सिर, वक्ष और उदर में बँटा होता है। इसमें काश्टीन युक्त बाह्य कंकाल होता इसके पाद सन्धियुक्त होते हैं। इसकी देहगुहा हीमोसील क्यूटिकल का बन कहलाती है।
    इस वर्ग के अन्तर्गत तिलचट्टा, झींगा मछली, केकड़ा, खटमल, मकड़ी, मच्छर, मक्खी, टिड्डी, मधुमक्खी आदि आते हैं।

    मोलस्का (Mollusca) (कोमल शरीर युक्त प्राणी)

    मोलस्का नॉन-कॉडेटा का दूसरा सबसे बड़ा संघ है। यह मीठे समुद्री जल तथा स्थल पर पाए जाते हैं। इसका शरीर कोमल, अखण्डित तथा उपांगरहित एवं त्रिस्तरीय होता है। शरीर त्वचा की एक तह से ढका रहता है, जिसे मैण्टल कहा जाता है। इनमें एक अधर पेशी अंग होता है, जिसे पाद कहते हैं, जिसकी सहायता से चलन कार्य सम्पन्न होता है। ये एकलिंगी होते हैं। इसमें उत्सर्जन मेटानेफ्रिडिया के द्वारा, जबकि श्वसन क्लोन, टिनिडिया या फेफड़ों द्वारा होता है। उदाहरण ऑक्टोपस (डेविलफिश), (कटलफिश), सिप्रिया (कौड़ी)।

    इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata)

    इस संघ के सभी सदस्य समुद्री होते हैं। इसके अन्तर्गत कांटेदार त्वचा वाले प्राणी आते हैं। इसमें अनेक तन्तु सदृश मुलायम संरचनाएँ होती हैं, जिसे ट्यूब फीट कहते हैं। इसी के माध्यम से ये चलन करते हैं। इकाइनोडर्म त्रिजनस्तरीय जन्तु है, जिसमें पंचकोणीय अरीय सममिति है परन्तु लार्वा अवस्था में द्विपार्श्व सममिति होती है। जल संवहन तन्त्र की उपस्थिति इसका विशिष्ट लक्षण है। इसके अन्तर्गत स्टारफिश, समुद्री आर्चिन, समुद्री खीरा तथा ब्रिटील स्टार आदि जीव आते हैं।

    कॉर्डेटा (Chordata)

    इस संघ के अन्तर्गत वे प्राणी आते हैं, जिसमें नोटोकॉर्ड के साथ-साथ पृष्ठ नालाकार तन्त्रिका तन्त्र और ग्रसनीय क्लोम दरारें पाई जाती हैं।

    मत्स्य (Pisces) वर्ग

    इसका हृदय द्वि-कोष्ठीय तथा शिरीय होता है हृदय में केवल अशुद्ध रुधिर ही बहता है। श्वसन की क्रिया गिल्स द्वारा होती है।

    एम्फीबिया (Amphibia): उभयचर

    यह जल और थल दोनों में पाए जाते हैं; जैसे-मेंढक लार्वा अवस्था (टैडपोल) में जलीय तथा परिपक्व होकर स्थल पर अनुकूलित हो जाते हैं। जलीय से थलीय होने पर इसमें पूँछ समाप्त हो जाती है औरहोने लगता है।

    सरीसृप (Reptilia) वर्ग

    ये थल पर रेंगकर चलने वाले प्राणी हैं। मीसोजोइक युग को सरीसृपों का युग कहा जाता है। चूँकि इस युग में डायनासोर तथा अन्य सरीसृप काफी प्रभावशाली थे। इस वर्ग के अन्तर्गत रेंगने वाले तथा बिल में रहने वाले, शीत रुधिरतापी (cold-blooded) तथा एपिडर्मल शल्क वाले जन्तु आते हैं। इसके हृदय में तीन कोष्ठ होता है परन्तु मगरमच्छ और घड़ियाल में चार-कोष्ठीय हृदय होते हैं। सर्पो एवं मगरमच्छ में मूत्राशय नहीं पाया जाता है। इसमें निषेचन आन्तरिक होता है तथा ये अधिकतर अण्डज (oviparous) होते हैं। इसके अण्डे कैल्सियम कार्बोनेट की बनी कवच से ढके रहते हैं। इस वर्ग के अन्तर्गत छिपकली, सांप, कछुआ, घड़ियाल, मगरमच्छ आदि जीव आते हैं।

    पक्षी (Aves) वर्ग

    इसके अन्तर्गत पक्षी तथा द्विपाद पंखयुक्त प्राणी आते हैं, जो ऊष्म रुधिरीय कशेरुकी हैं। इनकी अग्रभुजाएँ परों (wings) में परिणत हो जाती हैं। इसमें दाँत का अभाव होता है। पक्षियों के शरीर के सभी अंग उड़ने के लिए अनुकूलित होते हैं, जैसे-पंख का दण्ड खोखला होता है, पूंछ में हड्डियों का अभाव होता है। सुदृढ़ वक्ष मांसपेशी उड़ने के लिए आवश्यक दृढ़ता प्रदान करता है। इसके आहारनाल में दो अतिरिक्त कोष्ठक होते हैं, जिसमें से एक क्रॉप भोजन संचय करता है तथा गिजार्ड इसे पीसने का कार्य करता है। इसका हृदय चार कोष्ठीय होता है दो अलिंद तथा दो निलय। ये समतापी होते हैं।

    स्तनधारी (Mammalia) वर्ग

    सीनोजोइक काल को स्तनधारियों का युग कहा जाता है। ‘स्तनधारी’ शब्द का अर्थ होता है स्तन ग्रंथियाँ वाले जन्तु, जो अपने बच्चों को दूध पिलाती है। स्तनी वर्ग के सभी प्राणी अधिक विकसित और समतापी होते हैं। इस वर्ग के अन्तर्गत आने वाले प्राणी के दाँत जीवन में दो बार निकलते हैं।

    स्तनधारी तीन प्रकार के होते है
    (i) प्रोटोथीरिया – अण्डे देते हैं। उदाहरण एकिडना
    (ii) मेटाथीरिया – अपरिपक्व बच्चे देते हैं। उदाहरण कंगारू
    (iii) यूथीरिया – पूर्ण विकसित शिशुओं को जन्म देते हैं। उदाहरण मनुष्य

  • अनावृतबीजी (Gymnosperms) एवं आवृतबीजी (Angiosperm) क्या है ? अनावृतबीजी एवं आवृतबीजी पोधों के बीच अंतर, लक्षण, विशेषताएँ और महत्त्व क्या है ?

    अनावृतबीजी (Gymnosperms) एवं आवृतबीजी (Angiosperm) क्या है ? अनावृतबीजी एवं आवृतबीजी पोधों के बीच अंतर, लक्षण, विशेषताएँ और महत्त्व क्या है ?

    इस आर्टिकल में हम जानेगें: अनावृतबीजी (Gymnosperms – जिम्नोस्पर्म) पोधे क्या होते है ?, अनावृतबीजी पोधों की विशेषताएँ, लक्षण और उदहारण क्या है ?, अनावृतबीजी पोधों का आर्थिक महत्त्व  क्या है ?, आवृतबीजी (Angiosperm – एंजियोस्पर्म) पोधे क्या होते है ?, आवृतबीजी पोधों की विशेषताएँ, लक्षण और उदाहरण क्या है ? आवृतबीजी पोधों का आर्थिक महत्त्व  क्या है ? और अनावृतबीजी और आवृतबीजी पोधों के अंतर क्या है ?

    अनावृतबीजी और आवृतबीजी पौधों की दो मुख्य श्रेणियां हैं। दोनों बीज वाले (seed bearing) पौधे हैं जिनमें कुछ समानताएं हैं। अनावृतबीजी आवृतबीजी विकसित होने के 200 मिलियन से अधिक वर्षों से पहले ही पृथ्बी पर इनकी उपस्थिती थी l इन दोनों के बीच मुख्य अंतर इनकी विविधता (diversity) है। 

    अनावृतबीजी (Gymnosperms – जिम्नोस्पर्म) पोधे क्या होते है ?

    अनावृतबीजी समूह के पौधों में बीज किसी प्रकार की संरचना से ढके हुए नहीं होते हैं अर्थात् बीज नग्न (खुला हुआ एवं अण्डाशय का अभाव) होता है। जैसा कि नाम से पता चलता है कि अनावृतबीजी पादप जगत के संवहनी पौधे हैं जो नग्न बीज धारण करते हैं। इनकी बहुत ही कम प्रजाति पृथ्वी पर पाई जाती है इसका मुख्य कारण इनके बीजों के संरक्षण का अभाव है। बीज निकलने पर वो खुले और असुरक्षित होते हैं। इन बीजों को जल्दी से जमीन में उतर कर पनपने की आवश्यकता होती है ताकि ख़राब मौसम, जानवरों या अन्य कारणों से इनको क्षति न पहुचे l

    अनावृतबीजी पोधों की विशेषताएँ और लक्षण

    यह पौधा सदाबहार, काष्ठीय तथा लम्बा होता है। ये मरुद्भिद् स्वभाव के होते हैं, जिनमें रन्ध्र पत्ती में घुसे होते हैं तथा बाह्य त्वचा पर क्यूटिकल की पर्त चढ़ी होती है। अनावृतबीजी के अन्तर्गत शंकुधारी पौधे रखे गये हैं, जिसमें चीड़, फर, स्पूस आदि आते हैं।

    भारत में विशेषकर मैदानी भागों में साइकेड नामक पौधे पाए जाते हैं। इस वर्ग के पौधे काष्ठीय, लम्बे एवं बहुवर्षीय होते हैं। इसमें वायु परागण होता है तथा बहुभ्रूणता पाई जाती है, जिसमें मूलांकुर तथा प्राकुंर (plumule) के साथ ही एक या एक से अधिक बीजपत्र बनते हैं।

    अनावृतबीजी पोधों के उदाहरण

    जिम्नोस्पर्म की बहुत कम प्रजातियाँ हैं, इन पौधों के कुछ उदाहरण सरू (cypress), गनेटम (Gnetum), पाइन (pine), स्प्रूस (spruce), रेडवुड (redwood), जिन्कगो (Ginkgo), साइकैड्स (Cycads), जुनिपर (Juniper), फ़िर (Fir) और वेलवित्चिया (Welwitschia) हैं।

    अनावृतबीजी पोधों का आर्थिक महत्त्व

    • साइकस के तनों से मण्ड निकालकर खाने वाला साबूदाना बनाया जाता है। इसलिए साइकस को सागोपाम भी कहा जाता है।
    • चीड़ के पेड़ से तारपीन का तेल, देवदार की लकड़ी से सिड्रस का तेल तथा जूनीपेरस की लकड़ी से सिड्रस काष्ठ तेल का उत्पादन होता है।
    • जूनीपेरस की लकड़ी का उपयोग पेन्सिल तथा पैन होल्डर बनाने में होता है। एबीज तथा पीसिया की लकड़ी को माचिस की डिब्बियाँ तथा उसके काष्ठ लुग्दी से कागज तैयार किया जाता है। 3
    • चीड़ के पेड़ से रेजिन का उत्पादन होता है।
    • इफेड्रीन दवा, जो इफेड्रा से प्राप्त होता है, का उपयोग दमा की बीमारियों के इलाज हेतु किया जाता है।

    आवृतबीजी (Angiosperm – एंजियोस्पर्म) क्या है

    जैसा कि नाम से पता चलता है, आवृतबीजी संवहनी पौधे हैं, जो फलों या परिपक्व अंडाशय में बीज देते हैं। आवृतबीजी फूल बनाता है जो प्रजनन अंगों और फलों (reproductive organs and fruits ) को carry करता है । ये पौधे स्थलीय आवास के लिए अधिक अनुकूल हैं और इनका बहुत व्यापक रुप से फैले हुए है, अभी तक इनकी लगभग 250000 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है

    आवृतबीजी पोधों की विशेषताएँ और लक्षण

    ये पुष्प युक्त पौधे होते हैं, जिसमें बीज सदैव फलों के अन्दर होता है। इस वर्ग के पौधों में जड़, तना, पत्ती, फूल और फल लगते हैं। ये शाक, झाड़िया या वृक्ष तीनों ही रूप में मिलते हैं। आवृतबीजी में परागकण तथा बीजाण्ड विशिष्ट रचना के रूप में विकसित होते हैं, जिन्हें पुष्प कहा जाता है, जबकि अनावृतबीजी में बीजाण्ड अनावृत होते हैं।

    आवृतबीजी पोधों के उदाहरण

    आम, सेब, केला, आड़ू, चेरी, नारंगी और नाशपाती सहित फलों के पेड़ अक्सर फल देने से पहले फूल दिखाते हैं और परागण प्रक्रिया आमतौर पर मधुमक्खियों के जरिये संपन्न करते है । चावल, मक्का और गेहूं सहित अनाज भी एंजियोस्पर्म के उदाहरण हैं। इन पौधों में परागण प्रक्रिया पवन द्वारा की जाती है। एंजियोस्पर्म के अन्य उदाहरणों में गुलाब, लिली, ब्रोकोली, केल, पेटुनीया, बैंगन, टमाटर, मिर्च और गन्ना शामिल हैं।

    आवृतबीजी पोधों के प्रकार

    आवृतबीजी को दो वर्गों एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में बाँटा गया है।

    एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधों में अन्तर

    एकबीजपत्रीद्विबीजपत्री
    बीज में बीजपत्रों की संख्या एक होती है।इसमें दो बीजपत्र होते हैं।
    पुष्प प्रायः त्रितयी (timerous) अर्थात् पुष्पांग प्रायः तीन के जोड़े में होते हैं।पुष्प प्रायः चतुर्तयी एवं पंचतयी होती हैं अर्थात् इसमें पुष्पांग 4 – 5 के जोड़े होता है।
    प्रायः अपस्थानिक जड़ें तथा इनमें संवहन पूल प्राय 8-32 होती हैं।इसमें प्रायः मूसला जड़ें तथा इनमें संवहन पूल 2-6 होती हैं। 
    तने में संवहन पूल (vascular bundles) बिखरे हुए होते हैं।इसमें संवहन पूल घेरे में व्यवस्थित होती है तथा संवहन पूलों में कैम्बियम की पट्टी उपस्थित होती है।
    पत्तियों में शिराएँ एक-दूसरे के समानान्तर होती हैं।इसमें शिरा-विन्यास जालिकावत् शिराओं का जाल होता है।

    आवृतबीजियों का आर्थिक महत्त्व

    • हेविया ब्रेसिलिएन्सिस एवं फाइकस इलास्टिका से रबर प्राप्त होती है। कोको तथा चॉकलेट थियोब्रोया कोको के बीजों से प्राप्त होती है। इलायची इलेटेरिया कोडेमोमम का फल है।
    • (Economic Importance of Angiosperms) कोयर नामक रेशा नारियल के फल की मध्यफलभित्ति से प्राप्त होता है।
    • क्रिकेट बल्ले सैलिक्स एल्बा की लकड़ी से बनाये जाते हैं।
    • हॉकी के बल्ले, टेनिस व बैडमिन्टन के रैकेट तथा क्रिकेट स्टम्प मोरस एल्वात्र लकड़ी से बनाये जाते हैं।
    • केसर क्रोकस सटाइवस के पुष्पों की वर्तिकार तथा वर्तिका से प्राप्त होती है। च्युइंगम, एक्रेस सैपोटो के दूधिया क्षीर से प्राप्त होती है।

    अनावृतबीजी और आवृतबीजी पोधों में क्या अंतर है ?  

    आवृतबीजी और अनावृतबीजी के बीच मुख्य अंतर इनकी विविधता है। आवृतबीजी की विविधता अनावृतबीजी से अधिक है। उच्च विविधता क्षमता की वजह से ही आवृतबीजी पोधें स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र की एक विस्तृत विविधता के अनुकूल हैं। आवृतबीजी की एक अन्य विशेषता फूल और फलों का उत्पादन है।

    आवृतबीजीअनावृतबीजी
    आवृतबीजी पोधों में बीज फूलों के पौधों द्वारा निर्मित होता है और एक अंडाशय के भीतर संलग्न होता हैअनावृतबीजी पोधों में बीज नग्न (खुले) एवं इनमे अण्डाशय का अभाव होता है
    इन पौधों का जीवनचक्र मौसमी (seasonal) होता हैये पौधे सदाबहार होते हैं
    इनमे ट्रिपलोइड ऊतक (triploid tissue) होते हैइनमे हैप्लोइड उत्तक होते है 
    पत्तियाँ आकार में चपटी होती हैंपत्तियां सुई के आकार की होती हैं
    यह पोधे कठोर लकड़ी के साथ होते है यह पोधे नर्म होते है 
    इनका प्रजनन जानवरों पर निर्भर रहता हैइनका प्रजनन हवा पर निर्भर करता है
    इन पोधों की प्रजनन प्रणाली Reproductive system (उभयलिंगी unisexual or bisexual) फूलों में मौजूद होती है इन पोधों की प्रजनन प्रणाली Reproductive system शंकु (corn) में मौजूद होती है और उभयलिंगी प्रकार की होती हैं
  • टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) के प्रकार, मुख्य लक्षण, विशेषताएं और गुण (in Hindi)

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) के प्रकार, मुख्य लक्षण, विशेषताएं और गुण (in Hindi)

    इस आर्टिकल में हम जानेगे कि :

    टेरिडोफाइटा या टेरिडोफाइट क्या है ? What is Pteridophyta

    टेरिडोफाइटा के प्रकार क्या है ? What are the types of Pteridophyta

    टेरिडोफाइटा की विशेषताएं क्या है ?

    टेरिडोफाइटा पादपों के मुख्य लक्षण क्या है ? What are the Main characteristics of Pteridophyta ?

    टेरिडोफाइटा के प्रमुख आर्थिक महत्व Economic importance of Pteridophyta

    टेरिडोफाइटा या टेरिडोफाइट क्या है ? (What is Pteridophyta)

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) ऐसे थैलीनुमा पादप, जो प्राचीनतम संवहनी पौधा है। यह मुख्यतया स्थलीय तथा छायादार और नम स्थानों पर पाया जाता है l परन्तु कुछ टेरिडोफाइट जलीय होते हैं; जैसे-एजोला, साल्वीनिया तथा मार्सिलिया आदि।

    टेरिडोफाइट्स (टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)पहले सही अर्थों में land plants रूप में पौधों के जगत में एक महत्वपूर्ण समूह का गठन करते हैं। टेरिडोफाइट्स को “बीजाणु वाले संवहनी पौधे” या बीज रहित संवहनी पौधे भी कहा जाता है, वे क्रिप्टोगैम से संबंधित हैं।

    टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) शब्द दो शब्दों “”Pteron meaning feather” और ” phyton meaning plant” से लिया गया है। इस प्रकार टेरिडोफाइट पंख जैसी पत्तियों वाले पौधे होते हैं। टेरिडोफाइट्स ब्रायोफाइट्स (bryophytes) और स्पर्मेटोफाइट्स (spermatophytes) के बीच एक संक्रमणकालीन स्थिति पर कब्जा कर लेते हैं।

    टेरिडोफ़ाइटा (Pteridophyta) फर्न और फर्न किस्म के पौधे हैं। इनमें कुछ पौधे आज भी पाए जाते हैं, पर एक समय, 35 करोड़ वर्ष पूर्व, डिवोनी युग में इनका बाहुल्य और साम्राज्य था, जैसा इनके फाँसिलों से पता लगता है और ये संसार के प्रत्येक भाग में फैले हुए थे। कोयले के फॉसिलों में ये विशेष रूप से पाए जाते हैं। टेरिडोफाइटा ही कोयला क्षेत्र की उत्पत्ति के कारण हैं।

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) कभी एक बड़ा पादप वर्ग हुआ करता था जिसके बड़े आकार के वृक्ष होते थे। किंतु जलवायु में निरंतर  परिवर्तन से  यह पोधे समाप्त हो गये  और इनकी जगह विवर्तबीज (Gymnosperm) और आवृतबीजी किस्म के पौधों ने ले लिया है, पर कही कही यह आज भी पृथ्वी पर छोटे कद के टेरिडोफाइटा के रूप में मौजूद हैं।

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) – जीवन चक्र (Life Cycle)

    टेरिडोफाइटा के प्रकार (Types of Pteridophyta)

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) को मुख्यतया तीन समूहों – क्लब मॉस (also known as Lycopods or Lycophytes), हॉर्स टेल (Horsetails) तथा फर्न (Ferns) में बाँटा जाता है।

    टेरिडोफाइटा के प्रकार

    टेरिडोफाइट्स (फर्न और लाइकोफाइट्स) बीजाणु वाले संवहनी पौधे (Free-sporing vascular plants)  हैं जिनका जीवन चक्र बारी-बारी से, मुक्त-जीवित गैमेटोफाइट (Gametophyte) और स्पोरोफाइट (Sporophyte) चरणों के साथ होता है जो पूरी तरह परिपक्व होने पर यह  स्वतंत्र हो जाते हैं। स्पोरोफाइट का शरीर जड़ों, तने और पत्तियों में अच्छी तरह से विभेदित (differentiated ) होता है। इनकी जड़ बहुत strong होती है और इनका तना या तो भूमिगत होता है या हवा में लटकता रहता है ।

    टेरिडोफाइटा के प्रकार

    पत्तियां माइक्रोफिल (Microphylls ) या मेगाफिल (Megaphylls ) दोनों में से कोई एक होती हैं। इनमे वैस्कुलर प्लांट एपोमॉर्फीज़ (Vascular Plant Apomorphies) (जैसे, वैस्कुलर टिश्यू (vascular tissue) और लैंड प्लांट प्लेसीओमॉर्फीज़ (Land Plant Plesiomorphies) (जैसे, बीजाणु फैलाव और बीजों की अनुपस्थिति) शामिल हैं।

    फर्न का तना भूमिगत होता है, जो राइजोम (प्रकन्द) कहलाता है। यह भूमि में तिरछा उगता है। इसी कारण से इसका शीर्ष भाग भूमि में से कुछ बाहर निकला रहता है। यह फर्न का एक महत्त्वपूर्ण भाग है, जिसके निचले भाग से जड़ तथा ऊपरी भाग से पत्ती निकलती है। एजोला एक जलीय फर्न है, इसका उपयोग जैव-उर्वरक की तरह होता है।

    टेरिडोफाइटा के मुख्य लक्षण और विशेषताएं (Characteristic of Pteridophyta)

    यह टेरिडोफाइटा पादप जगत का एक ऐसा वर्ग है जिनमें फूलों (पुष्पों) और बीजों का निर्माण तो नहीं होता किंतु संवहन ऊतक (Vascular plants) उपस्थित होते हैं अर्थात टेरिडोफाइटा पादप वर्ग के पौधों में फूल और बीज नही पाए जाते है

    संवहन ऊतक के द्वारा ही शरीर के संपूर्ण भागों में जल, खनिज लवण और भोजन का संवहन होता है। टेरिडोफाइटा पादप वर्ग के पादपों का शरीर जड़, तना और पत्ती में विभक्त होता है।

    टेरिडोफाइट जाइलम और फ्लोएम के साथ एक संवहनी पौधा है जो बीजाणुओं (spores) को फैलाता है। क्योंकि टेरिडोफाइट्स न तो फूल पैदा करते हैं और न ही बीज, उन्हें कभी-कभी “क्रिप्टोगैम” (cryptogams) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि उनके प्रजनन के साधन छिपे हुए हैं।

    जैसा की उपर बताया गया है इस प्रकार के पोधों में संवहन ऊतक जाइलम और फ्लोएम होते हैं, जो खनिज लवण, जल और भोजन का संवहन करते हैं।

    कुछ फॉसिलों में जड़ें और पत्तियाँ नहीं पाई गई हैं। ये संवहनीय (vascular) पौधे हैं

    इनके बीजाणु अंकुरित होकर फर्न नहीं बनते, अपितु ये सूक्ष्म और नगण्य thallus बनते हैं, जिनमें लैंगिक इंद्रियों जैसे भाग रहते हैं।

    टेरिडोफाइटा प्रजाति के वृक्षों का शरीर जड़, तना और पत्ती में विभाजित होता है। किन्तु कुछ पादपों में यह संरचनाएँ विकसित होती है, जबकि कुछ पादपों में अल्प विकसित होती हैं।

    टेरिडोफाइटा पादप वर्ग के ऊतक अधिक विकसित नहीं होते हैं। जबकि कुछ पादपों में जड़े पूरी तरह से अनुपस्थित होती है।

    टेरिडोफाइटा वर्ग का मुख्य पौधा बीजाणुभिद होता है, जो जड़, तना, तथा पत्ती में विभक्त रहता है।

    यह उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन में इसकी अधिकता मिलती है।

    फर्न के जीवन चक्र में प्रभावी प्रवस्था द्विगुणित बीजाणुद्भिद् होती है अर्थात् जीवन चक्र बीजाणुद्भिद् में दो प्रावस्था युग्मकोद्भिद् एवं बीजाणुद्भिद् होती हैं।

    जीवन चक्र में प्रभावी पौधा बीजाणुद्भिद् ही होता है

    बीजाणुद्भिद् जड़, तना और पत्तियों में विभक्त होता है।

    जड़ का स्वरूप अपस्थानिक होता है, जो राइजोम (प्रकन्द) से नीचे की और निकलती है। यद्यपि एडिएण्टम नामक फर्न अपस्थानिक जड़ें पत्तियों से तब निकलती है, जब पत्तियों के शीर्ष भाग मिट्टी के सम्पर्क में आते हैं इन पत्तियों से नए पौधे निकलते हैं इसी आधार पर एडिएण्टम को घुमक्कड़ फर्न (walking fern) कहा जाता है।

    युग्मोदभिद पौधे पर नर और मादा जननांग होते है, नर जननांग को पुंधानी तथा मादा जननांग को स्त्रीधानी के नाम से जाना जाता है।

    टेरिडोफाइटा के प्रमुख आर्थिक महत्व Economic importance of Pteridophyta

    टेरिडोफाइटा का को विशेष आर्थिक महत्त्व नही है  फिर भी इसके कुछ सामान्य आर्थिक महत्व निम्न है :

    मरसीलिया और  सिरेटोप्टेरिस जैसे कुछ टेरिडोफाइटा का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है।

    टेरिडियम जैसे टेरिडोफाइटा का उपयोग पालतू पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है l

    लाइकोपोडियम के बीजाणु का उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाइयों के उत्पादन में किया जाता है।

    सिलेजिनेला जैसे टेरिडोफाइटा की पुनर्जीवन की खास विशेषता होने के कारण इन टेरिडोफाइट्स पोधों का उपयोग सजावट के रूप में किया जाता है l

    टेरिडोफाइटा से जुड़े महत्वपुर्ण प्रश्न – उत्तर

    टेरिडोफाइटा क्या होते है ?

    टेरिडोफाइट्स संवहनी पौधे (vascular plants ) होते हैं जो बीजाणुओं का उपयोग करके प्रजनन करते हैं। वे फूल और बीज नहीं पैदा करते हैं और इसलिए उन्हें क्रिप्टोग्राम्स (cryptogams) भी कहा जाता है।

    टेरिडोफाइट्स के तीन अलग-अलग प्रकार क्या हैं?

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) को मुख्यतया तीन समूहों – क्लब मॉस (also known as Lycopods or Lycophytes), हॉर्स टेल (Horsetails) तथा फर्न (Ferns) में बाँटा जाता है।

    टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) को ट्रेकोफाइट्स (tracheophytes) क्यों कहा जाता है?

    टेरिडोफाइट्स को ट्रेकोफाइट्स के रूप में जाना जाता है क्योंकि उनमें पानी और पोषक तत्वों के संचालन के लिए विशेष ऊतक होते हैं। इन विशिष्ट ऊतकों को जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) के रूप में जाना जाता है।

    टेरिडोफाइट्स कहाँ पाए जाते हैं?

    टेरिडोफाइट नम, छायादार और नम स्थानों में पाए जाते हैं। वे चट्टानों, दलदलों और दलदलों और उष्णकटिबंधीय पेड़ों की दरारों में पाए जाते हैं।

    टेरिडोफाइट्स को “वानस्पतिक सर्प (botanical snakes)” क्यों कहा जाता है?

    सरीसृप (Reptiles) उभयचरों (amphibians)के बाद भूमि पर विकसित होने वाले वाला दुसरे जानवर थे उसी तरह टेरिडोफाइट्स पहले भूमि पर पाए जाने पोधे थे जो ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) के बाद विकसित हुए | यही कारण है कि टेरिडोफाइट्स को “वानस्पतिक सर्प (botanical snakes) या “पादप जगत के सर्प” कहा जाता है।

  • क्या इन्टरनेट एक महान खोज है ?

    क्या इन्टरनेट एक महान खोज है ?

    इंटरनेट आज हमारे दैनिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे बहुत से कार्य है जो हम आज इंटरनेट का उपयोग करके करते है और इसी वजह से इन्टरनेट हमारी जिंदगी को ज्यादा आसान बनाता है l

    कम्युनिकेशन, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग, research, शॉपिंग , जॉब सर्चिंग और भी कई ऐसे अनगिनत कार्य है जो इन्टरनेट ने हमे उपलब्ध करवाए है l

    हम कह सकते हैं कि इंटरनेट की प्रगति के साथ हम जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति कर रहे हैं क्योंकि यह न केवल हमारे कार्यों को आसान बनाता है बल्कि हमारा समय भी बचाता है।

    आज इंटरनेट का उपयोग आवश्यकता के आधार पर विभिन्न उद्देश्यों के लिए करते है l आज बिना इसके हमारे दिन की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है l बड़ी कंपनी से लेकर एक सामान्य व्यक्ति तक सब की इस पर निर्भरता बढ़ गयी है l

    इसमें कोई दो राय नही है की इन्टरनेट ने कंप्यूटर, लैपटॉप और mobile के माध्यम से जानकारी (information) को पूरी दुनिया में आसानी से उपलब्ध करवाई है l

    इन्टरनेट, निर्भरता और दूरियां

    यहाँ हम बात करते है सदी के कुछ महान आविष्कारों की जिन्होंने मानव जाति के विकास को एक नया आयाम दिया:

    यह सारे आविष्कार हमारी प्रगति और हमारे विकास की कहानी कहते है

    इसी तरह बिजली के आविष्कार ने एक नए युग की शुरूआत की थी l आज हम बिना इलेक्ट्रिसिटी के लाइफ की कल्पना भी नही कर सकते है हमारे ज्यादातर कार्य इस पर निर्भर है l और इस आविष्कार ने मनुष्य के विकास को नई दिशा दी l

    इसी तरह हम सब जानते है की टेलीफोन और एयरोप्लेन के आविष्कारों भी महान आविष्कारों में से एक थे l एयरोप्लेन के विकास से पहले ऐसा था कि दुनिया आपसे में समुन्द्र के रास्ते से ही जुडी थी l समुंद्री जहाजों से लोग एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाते थे l सिर्फ व्यापारी लोग ही इस तरह की जोखिम भरी यात्राएं करते थे l

    जहा टेलीफोन ने एक ही पल में कम्ययुनिकेशन के बीच की दुरी को ख़त्म कर दिया वही हवाई जहाज के आविष्कार ने कुछ ही घंटे या मिनटों  में एक देश से दुसरे देश की यात्रा को बेहद सुलभ बना दिया l

    इनसे अगला दौर इन्टरनेट का है आज इस माध्यम ने सारी दूरियाँ खत्म कर दी गई है और आपसी कम्युनिकेशन को ज्यादा आसान और सभी के लिय सुलभ कराया है l सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इसमें बड़ी भूमिका निभाते हुए पूरी दुनिया को single family में तब्दील कर दिया l

    इन्टरनेट का जन्म

    सबसे पहले तो इन्टरनेट के अविष्कार का श्रेय किसी एक वैज्ञानिक को नही दिया जा सकता l आज हम जिस इन्टरनेट को जानते है वो दर्जनों वैज्ञानिकों, programmers और इंजिनियरों द्वारा लगातार विकसित की गई technology और नए features के द्वारा संभव हो पाया है l

    शीत युद्ध के दौरान जब सोवियत संघ ने स्पूतनिक उपग्रह के प्रक्षेपण ने अमेरिकी रक्षा विभाग को ऐसे तरीकों पर सोचना पड़ा जिससे की परमाणु हमला होने के बावजूद भी सूचनाओं  का आदान प्रदान कर सकें l  

    इसी आधार पर सबसे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा ARPANET (Advanced Research Projects Agency Network) को विकसित किया l ARPANET मुख्य तौर पर सेना के उपयोग के लिए develope किया गया था l इस नेटवर्क से universites, सरकारी एजेंसीज और defence contractors को जोड़ा गया l लेकिन यह नेटवर्क लिमिटेड था और wireless भी नही था इसी वजह से यह युद्ध क्षेत्र में लड़ रहे अमेरिकी सैनिक के काम का नही था l

    ARPANET नेटवर्क का नक्शा (1974)

    1970 के दशक में यह टेक्नोलॉजी लगातार विकसित हुई जब साइंटिस्ट Robert Kahn और Vinton Cerf ने ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल और इंटरनेट प्रोटोकोल (Transmission Control Protocol and Internet Protocol, or TCP/IP) को विकसित किया जो कि एक ऐसा कम्युनिकेशन मॉडल था जो की एक standard सेट करता था की कैसे इनफार्मेशन मल्टीपल नेटवर्क के बीच ट्रांसमिट की जा सकती थी l

    ARPANET ने 1 जनवरी, 1983 को TCP/IP को अपनाया और वही से शोधकर्ताओं ने “नेटवकों के नेटवर्क (network of networks)” को assemble करना शुरू किया जिससे आधुनिक इंटरनेट विकसित हुआ ।

    World Wide Web और Google

    1990 में ऑनलाइन दुनिया को ओर ज्यादा पहचान मिली जब कंप्यूटर वैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee) ने वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) का आविष्कार किया। वेब हमे वेबसाइटों और हाइपरलिंक के रूप में इन्टरनेट पर उपलब्ध इनफार्मेशन तक पहुचाता है ।

    टिम बर्नर्स ली

    वेब ने जनता के बीच इंटरनेट को लोकप्रिय बनाने में मदद की, और सूचना के विशाल भंडार को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में कार्य किया, जिसे अब हम में से अधिकांश दैनिक आधार पर एक्सेस करते हैं।

    वेब ने इंटरनेट को लोकप्रिय बनाने में मदद की, और सूचना के विशाल भंडार को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में कार्य किया, जिसे अब हम लोग वर्तमान में access करते है ।

    इंटरनेट कई नेटवर्क (networks) से बना है या कह सकते है इन्टरनेट पूरा एक networks का जाल है l जब हम google के through किसी वेबसाइट पर जाते है तो डाटा आपके सामने आने से पहले यह कई routers को पार करके सटीक इनफार्मेशन या कह सकते है की सबसे relevant इनफार्मेशन आपके स्क्रीन पर दिखाता है l

    जब भी हम google पर कुछ सर्च करते है तो google का सर्च इंजन web crawlers software इस्तेमाल करके  उस सुचना से जुड़े नए या अपडेटेड पेज देखता है crawlers जो web pages की indexing करता है indexing में जो वेबसाइट इंजन के सामने आई है उसे इंजन analyze करता है और फिर सबसे highest quality content आपके स्क्रीन पर दिखाता है l

    सबमरीन कम्युनिकेशन केबल (Submarine Communication Cable)

    डेटा केबल सिस्टम को सबमरीन कम्युनिकेशन केबल भी कहा जाता है. इस केबल के जरिये दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक सेंकेंडों में जानकारी पहुंचाई जाती है और काम इंटरनेट के जरिये होता है l

    सबमरीन केबल नेटवर्क Source: Dataset encoded by Greg Mahlknecht

    टेलीकम्युनिकेशन सिग्नल ढोने के लिए दो जगहों के बीच समुद्र के रास्ते से ये केबल बिछाए जाते हैं. यह केबल समुद्र से होते हुए जमीनी इलाकों तक लायी जाती है और इंटरनेट जैसी सुविधाएं प्रदान करती है l

    आजकल फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी से केबल बिछाई जाती है l समुद्र के नीचे दौड़ाए जाने वाले इस केबल सिस्टम की शुरुआत सबसे पहले 1850 में किया गया था. यह काम टेलीग्राम ट्रैफिक के लिए किया गया था धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया और आज इंटरनेट का पूरा सिस्टम इसी पर आधारित है l  

    इन्टरनेट के उपयोग

    1. कम्युनिकेशन – इन्टरनेट ने कम्युनिकेशन को आसान बना दिया है और आज हम इस माध्यम से किसी भी व्यक्ति से संपर्क कर सकते है l कम्युनिकेशन को इन्टरनेट ने बहुत ही आसान बनाया है और मनुष्य की सोशल लाइफ में बढाया है l
    2. Research (रिसर्च) – पहले किसी भी विषय पर जानकारी के लिय हमे ढेर सारी किताबें पढ़नी पड़ती है लेकिन इन्टरनेट ने ज्यादातर सूचनाएं हमारे एक क्लिक पर उपलब्ध करवा दी है इसिलिय research को इन्टरनेट ने बहुत ही आसान बनाया है l
    3. एजुकेशन – इन्टरनेट ने हमे educate करने में एक महत्वपुर्ण भूमिका निभायी है l आज ऑनलाइन education के माध्यम से पूरी दुनिया में इन्टरनेट ने education को सुलभ कराया है l
    4. Financial Transaction – इन्टरनेट ने ऑनलाइन transaction और बैंकिंग को बहुत ही आसान बना दिया है l अब आपको बैंक की लम्बी लाइन में नही लगना पड़ता है और बहुत सारे पैसे लेकर अपने जेब में नही घुमने है l
    5. Online Shopping – यह एक ऐसा concept था जिसने शॉपिंग का एक्सपीरियंस ही बदल के रख दिया l
    6. Real time updates – इन्टरनेट ने ही आज यह आसान बनाया है की हमे रियल time में सूचनाएं मिल जा रही है l

    यह कुछ महत्वपुर्ण इन्टरनेट के योगदान है इसकी लिस्ट लम्बी है लेकिन महत्वपुर्ण यह है इन्टरनेट ने लाइफ काफी आसान बना दी है l

    इन्टरनेट सही या गलत

    जिस क्षेत्र में इंटरनेट ने सबसे अधिक प्रभाव डाला है, वह है तरीका, गति और समय जो हम एक दूसरे के साथ संचार और बातचीत करते हैं। इंटरनेट सूचना प्रौद्योगिकी में एक क्रांति है। इंटरनेट हमारे व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए उपयोगी डेटा (data), सूचना(information) और ज्ञान(knowledge) प्रदान करता है और यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपार सुचना का कितने productive तरीके से इस्तेमाल करे ।

    इंटरनेट एक अच्छे कार्य या प्रगति के लिय एक पावरफुल source है,  लेकिन इसके गलत प्रयोग (जैसे पोर्न, अवैध ऑनलाइन सम्बन्ध, डार्क web, साइबर क्राइम, हैकिंग और अन्य आपत्तिजनक सामग्री) से नुकसान होने का अंदेशा भी रहता है ।

    ऐसा नही है की इन्टरनेट के नुकसान नही है लेकिन ऐसे हजारों कारण भी कि इसके इस्तेमाल ने लोगों के जीवन को बदला है l इंटरनेट का उपयोग जो शिक्षा और अच्छे कार्यों में इस्तेमाल हुआ है वो अद्वितीय हैं।

    भविष्य और इन्टरनेट

    भविष्य में, इंटरनेट एक ऐसा प्लेटफार्म बन जाएगा जो जिससे हम हमारे रोजमर्रा के कई कार्यों को क्लिक या बोलने पर से कण्ट्रोल कर सकेगे । Artificial Intelligence जैसी तकनीक हमारे इन्टरनेट के अनुभव को ही बदल देगी l

    आज हम इन्टरनेट को लेकर जो महसूस करते है वो सच में एक क्रांति है, क्योंकि इंटरनेट मानवता को एक साझा उद्देश्य के लिय एकजुट होने और यह सुनिश्चित करने का मौका देता है की हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ भी नहीं खोये और उन्हें और भी बेहतर दुनिया देकर जाये ।

    क्या आने वाले समय artificial intelligence जैसी खूबी के साथ हम हमारी ऑनलाइन दुनिया और वास्तविक दुनिया में फर्क कर पायेगे l हमारा भविष्य कैसा होगा ? क्या इन्टरनेट हमे virtual world में ले का सकता है ? या इन्टरनेट हमे खत्म कर देगा और हमे गुलाम बना लेगा या हम इसके नशे में डूब जायेगे ? यह सब सवाल तकनीक पर निर्भर करेगे और इनके जवाब भविष्य में हमारे द्वारा इन्टरनेट के सही और गलत इस्तेमाल पर निर्भर करेगे l

  • हम, विज्ञान और हमारा दिमाग

    हम, विज्ञान और हमारा दिमाग

    मानव जीवन को जिस विकसित रूप में आज हम देखते है, आज जो भी मनुष्य ने अपने विकास को लेकर तरक्की की है, उसमे विज्ञान का एक बड़ा योगदान रहा है l यह हमारी जिज्ञासाओं का नतीजा है कि हम लगातार खुद से सवाल करते रहे, खुद को एवं प्रकृति को समझने का एक सतत प्रयास करते रहे है l विज्ञान ने जीवन को एक नया आयाम दिया है, सामान्य मनुष्य जिंदगी को एक बेहतर और विकसित जीवनशैली में तब्दील किया है l हालाकि मनुष्य विकास में धर्म, संस्कृति, और परिवेश की भी अहम भूमिका रही है लेकिन फिर भी विकास शब्द का जब हम प्रयोग करते है तो विज्ञान और टेक्नोलॉजी हमारे जेहन में सबसे पहले आता है l

    सवाल और विज्ञान

    कुछ सवाल तो ऐसे है जो हम लोग जीवन के किसी ना किसी मोड़ पर खुद से कर ही लेते है जैसे कि ब्रहामंड क्या है ? हम ब्रहमांड में कहा अस्तित्व रखते है ? हम मनुष्यों के जीवन का मकसद क्या है ? ऐसा क्यों है की प्रकृति की बनाई हर चीज एकदम परफेक्ट है, सब एक दुसरे से जुड़े हुए क्यों है, क्या इस ब्रह्माण्ड से भी परे कुछ है? हमारी मृत्यु के बाद क्या होता है? आने वाले 100–200 सालों बाद का जीवन कैसा होगा? हम technology के चरम पर कब पहुचेंगे ? क्या हम भविष्य देख सकते है ? क्या हम ब्रहामंड के रहस्यों को जानने में सक्षम हो पायेगे आदि l यह लिस्ट लम्बी भी हो सकती है और छोटी भी, यह सब सोचने वाले पर छोड़ देते है लेकिन इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारा मस्तिष्क जाने अनजाने ऐसे अनसुलझे सवाल करने में लगा रहता है l

    एक और बात है  कि किसी भी सवाल का जवाब वक्त के पल और उस क्षण के साथ मस्तिष्क में छिपा होता है l हमारा दिमाग उल जलूल सवालों में उलझने पर ज्यादा तेज गति से उसके जवाब को जानने का प्रयास करने लगता है ऐसा इसलिए है क्योकि प्रकृति ने बनाया ही ऐसा है l

    लेकिन क्या आप जानते है की मनुष्य की यह तरक्की और विकास और इससे जुड़े सारे सवाल – जवाब का origin क्या है या कह सकते है की कहाँ से शुरू हुए l इनका जवाब है की यह सारे सवाल – जवाब और आविष्कार का origin हमारा मस्तिष्क है, हमारा दिमाग है l

    हमारे विचार और विज्ञान

    आज हम Tesla की कारों से लेकर से लेकर Nasa के मार्स रोवर तक जिनके भी बारे में बात करते है उन्हें देखते है सब ने कही कही ना कही सबसे पहले दिमाग में तस्वीर बनायीं थी l ब्रहामंड का नियम शुरू से ही यही रहा है की मनुष्य जनित हर वो चीज जो हम आज देखते है वो सबसे पहले हमारे दिमाग में आयी थी l हमारे दिमाग में उसकी तस्वीर बनी थी l उसी आधार पर हमने प्रयास कर के उसको अस्तित्व में लेकर आते है l

    आसान भाषा में अगर बात करे तो जिस घड़ी को आपने पहन रखा है, जिस mobile से आप बात करते है वो सब सबसे पहले हमारे दिमाग में एक विचार के जरिये आया l आपने सोचा और फिर आपने उसे implement किया तो वो चीज अस्तित्व में आयी यानी भौतिक दुनिया में आयी l उदाहरण लेते है की आज आपने अपने लिय एक Apple का mobile ख़रीदा है और उसको आपने हाथ में पकड़ा हुआ है l अब सोचिये की सबसे पहले एक विचार आपके दिमाग में आया की मुझे एक apple mobile लेना है l उस विचार पर आपने कार्य करना शुरू किया अर्थात आप उस विचार को अपने दिमाग से निकाल कर वास्तिवक दुनिया में implement करते हो और तत्काल आप mobile खरीद लेते हो l

    कुछ आविष्कार जैसे Google Search Engine, डीएनए, सिलाई मशीन,  आइन्स्टीन का सापेक्षता का नियम (Einstein’s Theory of Relativity), periodic table आदि के महान विचार इनके वैज्ञानिको को सपने में आये थे l  दुनिया के कुछ सबसे प्रसिद्ध कलाकारों, वैज्ञानिकों और अन्वेषकों ने अपने Eureka moments बीच नींद में आये l

    मशहूर रसायन वैज्ञानिक दिमित्री मेंडेलीव (Dimitry Mendeleev) ने रासायनिक तत्वों को एक साथ जोड़ने वाला पैटर्न को बनाने की कोशिश में 10 साल तक लगे रहे । एक रात उसे periodic table का सपना आता है और उसे सपने में वो आईडिया मिलता है जिसकी खोज में वो लगातार लगा हुआ था l अपनी डायरी में दिमित्री लिखते है की मैंने सपने में एक table देखी l उस table पर सारे तत्व की जहा आवश्यकता थी वहा पर गिर रहे थे l आगे उन्होंने बताया की वो तुरंत अपने बिस्तर से उठे और सारे तत्वों का क्रम सपने में जैसे देखा वैसे ही लिख लिया l इस तरह उन्होंने periodic table तैयार की l

    हमारा दिमाग और हमारे सवाल

    मतलब साफ़ है कि कही ना कही सवालों के जवाब हमारे दिमाग के पास होते है बात सिर्फ यह है कि सवाल हमे हमारे दिमाग से बार बार करना होगा l विज्ञान के हिसाब से जब हमसे यानी हमारे दिमाग से कोई सवाल पूछा जाता है तो हमारा पूरा दिमाग उत्तेजित (stimulated) हो जाता है और सेरोटोनिन (Serotonin) रिलीज होना शुरू हो जाता है ।

    सेरोटोनिन के रिलीज़ होने से हमारा दिमाग ज्यादा relaxed और focused हो जाता है इससे यह किसी भी सवाल का उत्तर खोजने या किसी भी समस्या का समाधान ढूढनें में ज्यादा सक्षम हो जाता है । क्योकिं हमारा दिमाग एक निर्धारित शर्तो के अनुसार काम करता है इसलिए दिमाग में Dopamine की मात्रा बढ़ने लगती है l डोपामाइन एक प्रकार का न्यूरोट्रांसमीटर है जिसे हमारा शरीर विकसित करता है और हमारा nervous system इसके जरिये nerve cells को मेसेज भेजता है । डोपामाइन एक यूनिक human ability है जो हमे सोचने, समझने और प्लानिंग करने की क्षमता प्रदान करता है l

    इस तरह प्रकृति  के अलावा मनुष्य के द्वारा बनाया हुआ सब कुछ हमारे मस्तिष्क की देन है l प्रसिद्ध लेखिका रोंडा बर्न (Rhonda Byrne) ने अपनी किताब ‘The Secret’ में बताया है की हमारे मस्तिष्क की ताकत से हम हमारे जीवन में कुछ भी प्राप्त कर सकते है l उसने बताया कि हमारे विचार ही हमारी जिंदगी बनाते है और हमारे विचार वास्तविक चीजों में बदलते है (Your Thoughts become things). इसिलिय हमारे विचारों पर हमारा नियंत्रण जरुरी है और साथ में हमे हमारे दिमाग की ताकत को विज्ञान के हिसाब से समझ कर उसका इस्तेमाल करना है l

    कुल मिलाकर हम इस निष्कर्ष पर पहुचते है की हमारा मस्तिष्क हमे सही दिशा दिखा सकता है, हमारे अनगिनत सवालों के जवाब दे सकता है, हमे वो बना सकता है जो हम वास्तव में बनना चाहते है l इसिलिय अपने विचारों पर ध्यान दे l उन्हें समझे, अपने दिमाग को पॉजिटिव थॉट्स से भर दे l उसे यकीन दिला दे की  जो आप चाहते है उसे हासिल करना ही है l

    याद रखिये आप दिमाग के लिय सब कुछ आसान है क्योकि  जो आपके सामने है वो सब विचार है तो फिर देर किस बात की आज ही इस पर विचार कीजिये l

  • उड़ने वाली इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप (Flying Microchip) ‘माइक्रोफ्लायर (Microflier), नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने बनाई पंखों वाली माइक्रोचिप (Winged Microchip)

    उड़ने वाली इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप (Flying Microchip) ‘माइक्रोफ्लायर (Microflier), नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने बनाई पंखों वाली माइक्रोचिप (Winged Microchip)

    इस पोस्ट में आप जानेंगे

    • Flying Microchip ‘माइक्रोफ्लायर (Microflier क्या है ?
    • उसको विकसित कैसे किया ?
    • माइक्रोफ्लायर की विशेषताएँ क्या है ?

    हाल ही में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने एक उड़ने वाली इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप का निर्माण किया है इस माइक्रोचिप को इंजीनियरों ने ‘माइक्रोफ्लायर’ नाम दिया है और इसे सबसे छोटी मानव निर्मित उड़ान संरचना के रूप में वर्णित किया गया है l

    यह रिसर्च को ‘Nature’ पत्रिका ने अपने 23 सितम्बर 2021 के संस्करण में प्रकाशित किया है l

    Flying Microchip माइक्रोफ्लायर की विशेषताएँ क्या है ? (What are the specifications of Flying Microchip ‘Microflier)

    पंखों वाला यह माइक्रोचिप (Winged Microchip) अब तक का सबसे छोटा मानव निर्मित flying structure (उड़ने वाला ढांचा) है l रेत के कण के आकार यह माइक्रोफ्लायर वायु प्रदूषण, वायुजनित रोग और पर्यावरण प्रदूषण की निगरानी करने में सक्षम है l

    रेत के कण के आकार की यह चिप मोटर या इंजन रहित है और यह हवा के सहारे उड़ान भरता है l

    इस माइक्रोचिप (या ” माइक्रोफ्लायर”) में मोटर या इंजन नहीं है। इसके बजाय, यह हवा में maple पेड़ के बीज की तरह उड़ान पकड़ता है (मेपल के पेड़ के प्रोपेलर बीज जिन्हें हेलीकाप्टर बीज भी कहते है क्यों की वो अपने पैरेंट पेड़ से उड़ते हुए बहुत दूर चले जाते है) और यह माइक्रोफ्लायर जमीन की ओर हवा के माध्यम से एक हेलीकॉप्टर की तरह घूमता है।

    मेपल के पेड़ों और अन्य प्रकार के हवा में बिखरे हुए बीजों का अध्ययन करके, इंजीनियरों ने माइक्रोफ्लायर के वायुगतिकी (aerodynamics) को यह सुनिश्चित करने के लिए अनुकूलित किया कि जब यह ऊंचाई से निचे की तरफ आएगा तो धीमी गति और नियंत्रित तरीके के साथ नीचे गिरे । यही खासियत इसकी उड़ान को स्थिर करती है और ज्यादा बड़े क्षेत्र में इसकी उडान को आसान बनाती है l इसी कारण यह माइक्रोफ्लायर हवा में ज्यादा देर तक टिक पाते है, जिससे यह वायु प्रदूषण और वायुजनित रोग की निगरानी के लिए आदर्श माना गया है ।

    माइक्रोफ्लायर का उपयोग क्या है ?

    यह माइक्रोचिप  contramination, आबादी के सर्वेक्षण और बिमारियों को ट्रैक कर उनकी निगरानी करने में सक्षम है l

    इस माइक्रोफ्लायर को Ultra – Miniatuarized technology से भी लैस किया जा सकता है l

    जिसमे वायरलेस संचार के लिए एंटीना, डेटा स्टोर, करने के लिए एम्बेडेड मेमोरी, बिजली के स्त्रोत और सेंसर शामिल है इस तकनीक भविष्य में लघु इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करेगी l 

    माइक्रोफ्लायर को कैसे विकसित किया गया ? How the Flying Microchip ‘Microflyer’ was developed/Invented ?

    जॉन रोजर्स जो इस डिवाइस को डेवलप करने वाली टीम का नेतृत्व किया है उन्होंने बताया कि “हमारा लक्ष्य छोटे पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में पंखों वाली उड़ान को जोड़ना था, ताकि इन क्षमताओं का प्रयोग प्रदूषण निगरानी, ​​जनसंख्या निगरानी या रोग ट्रैकिंग के साथ साथ पर्यावरण को समझने में कर सके l उन्होंने आगे बताया कि हम मनुष्य हम बायोलॉजिकल दुनिया से प्रभावित विचारों का उपयोग करके अरबों वर्षों के दौरान, प्रकृति ने बीजों में जो परिष्कृत वायुगतिकी का गुण दिया है उसी आधार पर हमने डिजाइन तैयार किए, उन्हें अनुकूलित किया और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्लेटफॉर्म पर implement किया ।

    अधिकांश लोगों ने हवा के माध्यम से मेपल के पत्ते के घूमने वाले प्रोपेलर बीज को स्पिन यानि गोल गोल घूमते हुए  और धीरे-धीरे जमीन पर उतरते हुए देखा होगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है कि कैसे प्रकृति ने विभिन्न पौधों के अस्तित्व को बढ़ाने के लिए उनके बीज के प्रकार को बहुत ही सुनियोजित ढंग से और परिष्कृत तरीके विकसित किया है ताकि यह बीज व्यापक रूप से फैले और स्थिर पेड़ – पौधे व्यापक रूप से अपनी आबादी बढ़ाये l

    Maple Tree
    Maple Seed

    News Source : https://news.northwestern.edu/stories/2021/september/microflier-winged-microchip-is-smallest-ever-human-made-flying-structure/ https://news.northwestern.edu/stories/2021/september/microflier-winged-microchip-is-smallest-ever-human-made-flying-structure/

  • ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta – ट्रेकोफाइट्स) क्या है ? vascular प्लांट्स के प्रकार

    ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta – ट्रेकोफाइट्स) क्या है ? vascular प्लांट्स के प्रकार

    What is Tracheophyta or Vascular Plants ?

    इस चैप्टर में हम जानेगे:

    • ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta – ट्रेकोफाइट्स) या वैस्कुलर प्लांट क्या है ? (What is a Tracheophyta or a Vascular Plant?)
    • ट्रेकियोफाइटा पोधों की विशेषताएँ क्या है ? (What are the characteristics of Tracheophyta plants ? ) 
    • ट्रेकियोफाइटा के प्रकार क्या है ? (What is the type of Tracheophyta?)

    ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta – ट्रेकोफाइट्स) या वैस्कुलर प्लांट

    वे पौधे, जिनमें संवहनी ऊतक (vascular tissue) पाए जाते हैं उन्हें ट्रेकियोफाइट या ट्रेकोफाइट्स कहते हैं। इन्हें Vascular plants भी कहते है l  

    यह भूमि पर पाए जाने वाले पौधों का एक मोनोफिलेटिक उपसमूह (monophyletic subgroup) है l

    ट्रेकियोफाइटा पोधों की विशेषताएँ क्या है ?

    इनके शरीर में जड़, तना, पत्ती होते हैं। तथा जाइलम और फ्लोएम जैसे संवहनी ऊतक होते हैं। यूकेरियोटिक प्रकार वाले यह पोधे पृथ्वी पर सबसे ज्यादा पाए जाते है और यह पृथ्वी पर उपस्थित जीव जगत के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी और लाभदायक होते है । क्लोरोफिल ए और बी उत्प्रेरक की उपस्थिति के कारण यह सार्वभौमिक रूप से हरे रंग के होते हैं।

    जैसा कि हम जानते है पौधे (Plante) को दो प्रमुख समूहों में बाँटा जाता है पहला, ब्रायोफाइटा (Bryophyta), जिसमें लिग्निफाइड कोशिका भित्ति (Lignified cell wall) नहीं होती है और इसलिए कुछ सेंटीमीटर से ज्यादा ऊपर की ओर बढ़ने में असमर्थ होते हैं; और दूसरा, ट्रेकोफाइटा (Tracheophyta), जिसमें एक लिग्निफाइड कोशिका भित्ति होती है और यह पोधे 100 मीटर से अधिक ऊंचे पेड़ (जैसे सिकोइया सेपरविरेंस) बन सकते हैं l

    ट्रेकियोफाइटा के प्रकार क्या है ? What is the type of Tracheophyta?

    ट्रेकियोफाइटा के तीन वर्ग होते है:

    • टेरिडोफाइटा (Pteridophyte) (बीजविहीन संवहनी पौधे),
    • अनावृतबीजी (Angiosperm) (फलविहीन बीज वाले पौधे) तथा
    • आवृतबीजी (Angiosperms) (पुष्पी पादप, जिसमें फल तथा बीज बनते हैं)

    टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)

    बीज रहित थैलीनुमा पादप, जो प्राचीनतम संवहनी पौधा है। यह मुख्यतया स्थलीय तथा छायादार और नम स्थानों पर पाया जाता है, परन्तु कुछ टेरिडोफाइट जलीय होते हैं; जैसे-एजोला, साल्वीनिया तथा मार्सिलिया आदि। टेरिडोफाइटा को मुख्यतया तीन समूहों-क्लब मॉस, हॉर्स टेल तथा फर्न में बाँटा जाता है।

    टेरिडोफाइटा पोधों के प्रकार

    अनावृतबीजी (Gymnosperms)

    इस समूह के पौधों में बीज किसी प्रकार की संरचना से ढके हुए नहीं होते हैं अर्थात् बीज नग्न (खुला हुआ एवं अण्डाशय का अभाव) होता है। यह पौधा सदाबहार, काष्ठीय तथा लम्बा होता है। ये मरुद्भिद् स्वभाव के होते हैं, जिनमें रन्ध्र पत्ती में घुसे होते हैं तथा बाह्य त्वचा पर क्यूटिकल की पर्त चढ़ी होती है। अनावृतबीजी के अन्तर्गत शंकुधारी पौधे रखे गये हैं, जिसमें चीड़, फर, स्पूस आदि आते हैं।

    अनावृतबीजी पोधों के प्रकार

    आवृतबीजी (Angiosperms)

    ये पुष्प युक्त पौधे होते हैं, जिसमें बीज सदैव फलों के अन्दर होता है। इस वर्ग के पौधों में जड़, तना, पत्ती, फूल और फल लगते हैं। ये शाक, झाड़िया या वृक्ष तीनों ही रूप में मिलते हैं। आवृतबीजी में परागकण तथा बीजाण्ड विशिष्ट रचना के रूप में विकसित होते हैं, जिन्हें पुष्प कहा जाता है, जबकि अनावृतबीजी में बीजाण्ड अनावृत होते हैं। आवृतबीजी को दो वर्गों एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में बाँटा गया है। एकबीजपत्री बीज में बीजपत्रों की संख्या एक होती है। जबकि द्विबीजपत्री में दो बीजपत्र होते हैं।

  • क्या आप जानते है ? प्रकृति के अद्भुत और रोचक तथ्य

    क्या आप जानते है ? प्रकृति के अद्भुत और रोचक तथ्य

    Amazing and interesting facts about nature

    prakriti ke kuch adbhut aur rochak tathye photos ke sath

    हमारी पृथ्वी पर हर सेकंड में लगभग 40 से अधिक बार बिजली गिरती है l

    बारिश के पानी में बी 12 विटामिन होता है l

    एक अध्ययन के अनुसार, भूकंप पानी को सोने में बदल देता है क्योंकि दबाव के कारण पानी का अचानक वाष्पीकरण हो जाता है, जिससे चट्टानों में भ्रंश रेखाओं (fault lines) के साथ सोने का निर्माण होता है।

    आकाशीय बिजली के एक बोल्ट में सूरज के सतह से पांच गुना ज्यादा गर्मी होती है I

    सूरजमुखी के फूलों को रेडियोधर्मी (radioactive) कचरे को साफ करने में इस्तेमाल किया जाता है I

    वैज्ञानिक विधि “टाक्सिनीरिंग” (toxin-eering) एक ऐसी विधि है, जो जहर को दर्द निवारक दवा में बदल देती है l

    मधुमक्खीयों को बम खोजने के लिए भी ट्रेन किया जा सकता है l

    आप बर्फ को कांच की तरह इस्तेमाल कर के आग उत्पन्न कर सकते हैं l

    शहद कभी भी खराब नहीं होता है वह हजारों वर्षों तक ठीक रहता है l

    दिमाग पर शराब का असर होने में सिर्फ छह मिनट का समय लगता है l

    aasha hai post aapko pasand aayi hogi l aesi hi aur prakriti ka bare adbhut aur rochak batein janane ke liy comment padhte rhiye ‘thevigyan’. dhanyawaad

  • ब्रायोफाइटा क्या है l   (Bryophytes ब्रायोफाइट्स (in Hindi) उदाहरण, लक्षण, प्रकार, विशेषताएँ और गुण

    ब्रायोफाइटा क्या है l (Bryophytes ब्रायोफाइट्स (in Hindi) उदाहरण, लक्षण, प्रकार, विशेषताएँ और गुण

    इस आर्टिकल में हम ब्रायोफाइटा (Bryophytes) के बारे में निम्न तथ्य जानेगे :

    • ब्रायोफाइटा (Bryophytes) क्या है ?
    • ब्रायोफाइटा (Bryophytes) के सामान्य लक्षण क्या है ?
    • ब्रायोफाइटा (Bryophytes) की विशेषताएँ क्या है ?
    • ब्रायोफाइटा (Bryophytes) के गुण और महत्त्व क्या है ?

    ब्रायोफाइटा (Bryophytes)

    ब्रायोफाइटा (Bryophyta) वनस्पति जगत का एक बड़ा वर्ग है और यह एम्ब्रियोफाइटा का सबसे साधारण व आद्य समूह है। पौधों के वर्गीकरण में ब्रायोफाइटा का स्थान शैवाल (Algae) और टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) के बीच में आता है। ब्रायोफाइटा प्रथम स्थलीय पौधे हैं, जो शैवाल से विकसित हुए हैं। डासोनियाँ ब्रायोफाइटा का सबसे बड़ा पौधा है जिसकी ऊँचाई 40 से 70 सेमी. है।

    ब्रायोफाइटा की मुख्य  लक्षण, विशेषताए और उसके गुण

    ब्रायोफाइटा को पादप जगत के उभयचर भी कहा जाता है क्योंकि ये भूमि पर जीवित रहते है , परन्तु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते है।

    इसके अन्तर्गत वे सभी पौधें आते हैं जिनमें वास्तविक संवहन ऊतक (vascular tissue) नहीं होते, जैसे मोसेस (mosses), हॉर्नवर्ट (hornworts) और लिवरवर्ट (liverworts) आदि।

    ब्रायोफाइटा सर्वाधिक सरल छोटे स्थलीय पौधे हैं, जो आर्द्र स्थानों में विकसित होते हैं।

    पादप का शरीर थैलस या पर्णिल अर्थात् तना तथा पत्ती सदृश रचनाओं में विभेदित होता है परन्तु वास्तविक तना एवं पत्ती नहीं होता है।

    ये पौधे मूलाभास (राइजोड) के द्वारा मिट्टी से जुड़े होते हैं। इसमें जड़, पुष्प तथा बीज का अभाव होता है। इनमें युग्मकोद्भिद् अवस्था प्रभावी होती है।

    अधिकतर ब्रायोफाइटा में क्लोरोफिल पाया जाता है, जिससे वे स्वपोषी होते हैं। इनमें लैंगिक तथा अलैंगिक दोनों प्रकार का जनन होता है।

    ब्रायोफाइटा को पादप जगत के उभयचर के रूप में जाना जाता है अर्थात् ऐसे पौधे स्थलीय होते हैं, जिसे निषेचन के लिए जल की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

    ब्रायोफाइटा में जल तथा लवण के संवहन हेतु संवहन ऊतक नहीं होते हैं। इसमें पदार्थों का संवहन एक कोशिका से दूसरे कोशिका में होता है।

    ब्रायोफाइटा के अन्तर्गत लिवरवर्ट तथा मॉस आते हैं। मॉस मिट्टी को बाँधे रखता है तथा मृदा अपरदन को रोकते हैं।

    कोयले सदृश पीट ईंधन, मॉस और स्फैगनम जैसे ब्रायोफाइट के हजारों वर्षों तक भूमि के नीचे दबकर रहने से निर्मित होते हैं।

    पौधे की सतह पर क्यूटिकिल का अभाव होता है। (जिसके फलस्वरूप पौधे से पानी के वाष्पीकरण का विशेष प्रतिबन्ध नहीं रह पाता तथा जल की अत्यधिक हानि होती है ऐसी स्थिति का उनकी वृद्धि पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।)

    युग्मकोद्भिद् (gametophyte)

    इस समुदाय का पौधा युग्मकोद्भिद् होता है ये पौधे स्थली होने के साथ ही छायादार स्थानों पर उगते हैं और इन्हें अपने जीवन में पर्याप्य आर्द्रता की आवश्यकता होती है, निषेचन के लिये जल आवश्यक है। अतः कुछ वैज्ञानिक ब्रायोफाइटा समुदाय को वनस्पति जगत् का एम्फीबिया कहते हैं। ये पौधे थैलेफाइटा से अधिक विकसित होते हैं।

    इन पौधों का और अधिक विकास तभी संभव हुआ, जब उनमें संवहनी ऊतक का विकास हो गया। संवहन तन्त्र की जड़ से जल तथा खनिज, लवणों को पत्ती तक तथा पत्ती से शर्करा को पौधे की अन्य कोशिकाओं तक पहुँचाने का कार्य करता है। इसी गुण के कारन ट्रैकियोफाइटा का विकास संभव हुआ।

    लैंगिक जनन (reproduction)

    यह पादप युग्मकोदृभिद पीढ़ी पर आश्रित होती है। कायिक जनन विखंडन द्वारा होता है। अगुणित युग्मकोद्भिद पादप में नर लैंगिक अंग को पुंधानी कहते है। जिसमे समसूत्री विभाजन द्वारा पुमंग बनते है , जो अगुणित होते है। मादा लैंगिक अंग स्त्रीधानी कहलाते है। जिनमे अगुणित अण्ड बनता है। पुमंग व अण्ड के संलयन से युग्मनज बनता है।

    युग्मनज से एक बहुकोशिकीय बिजानुभिद विकसित होता है जो द्विगुणित होता है तथा पाद , सिटा व कैप्सूल में विभक्त होता है।  बीजाणुभिद में अर्द्धसूत्री विभाजन से अगुणित बीजाणु बनते है जो अंकुरित होकर अगुणित नया पादप बनाते है।

    ब्रायोफाइटा के प्रकार

    ब्रायोफाइटा को तीन वर्गों में बाँटा गया है:

    हिपैटिसी या हिपैटिकॉप्सिडा (Hepaticopsida)

    इस वर्ग के पौधों का शरीर यकृत के समान हरे रंग का होता है। इसलिए इसे लिवरवर्ट्स भी कहते हैं। पौधों के शरीर को सूकाय कहते हैं। वह चपटा होता है। सूकाय में जड़, तना, पत्तियाँ नहीं होती है। इसकी निचली सतह के अनेक एककोशिकीय मूलांग निकले होते हैं। मूलांग का कार्य स्थिरता प्रदान करना तथा भूमि से पानी एवं खनिज लवणों का अवशोषण करना है।

    जैसे : रिक्सिया तथा मार्केन्शिया आदि।

    ऐंथोसिरोटी, या ऐंथोसिरोटॉप्सिडा (Anthocerotopsida) और मार्केन्टीऑफायटा

    इसमें पौधे बहुत ही साधारण और पृष्ठाधरी रूप से विभेदित (dorsiventrally differentiated) होते हैं, पर मध्यशिरा (mid rib) नहीं होती। इन पौधों का शरीर सूकायक होता है। इनके बीजाणुद्भिद् में सीटा अनुपस्थित होता है। इस उपवर्ग में एक ही गण ऐंथेसिरोटेलीज है, जिसमें पाँच या छह वंश और लगभग 300 जातियाँ हैं। इनमें ऐंथोसिरोस (Anthoceros) और नोटोथिलस (Notothylas) प्रमुख वंश हैं। ये पौधे संसार के कई भागों में पाए जाते हैं। भारत में यह हिमालय की तराई तथा पर्वत पर और कुछ जातियाँ नीचे मैदान में भी पाई जाती हैं।

    जैसे : एन्थोसिरास में।

    मसाइ (Musci) या ब्रायॉप्सिडा (Bryopsida)

    इसमें उच्च उच्च श्रेणी के ब्रायोफाइट्स आते हैं। ये ठण्डे एवं नम स्थानों पर तथा पुरानी दीवारों पर समूहों में पाए जाते हैं। इसमें तना तथा पत्ती जैसी रचना पाई जाती है। मूल की जगह पर बहुकोशिकीय मूलांग होते हैं। मॉस का पौधा युग्मकोद्भिद् होता है। इसका बीजाणुद्भिद् आंशिक रूप से युग्मकोद्भिद् पर निर्भर रहता है।

    जैसे : मॉस में।

    स्फैगनम नामक मॉस का उपयोग कटे हुए पौधों के अंगों को नम रखने के लिए किया जाता है। मॉस को स्थल वनस्पति का पुरोगामी कहा जाता है। इसका आशय यह है कि मॉस लाइकेन के साथ सतह पर एक पर्त बनाते हैं तथा मृत्यु के बाद सतह पर ह्यमस की परत जम जाती है, जिस पर अन्य पौधे उगते हैं।

    Water moss (Fontinalis).

    ब्रायोफाइटा का महत्व

    1. शाकाहारी स्तनधारी कुछ ब्रायोफाइट्स पौधे का प्रयोग भोजन के रूप में करते है

    2. स्फेगमन व अन्य जाति के ब्रायोफाइटा को ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

    3. इनमें पानी रोकने की क्षमता होती है इसलिए पैकिंग व सजीवो के स्थानान्तरण में उपयोग किया जाता है। साथ ही जल अवशोषण की क्षमता अधिक होने की वजह से ये बाढ़ रोकने में मदद करते हैं

    4. ये अनुक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

    5. पूर्तिरोधी अर्थात् ऐण्टिसेप्टिक होने के कारण स्फैगनम का उपयोग सर्जिकल ड्रेसिंग के लिए किया जाता है। स्फैगनम के पौधों से स्फैगनाल नामक प्रतिजैविक प्राप्त किया जाता है।

    6. ब्रायोफाइट्स दुनिया के विभिन्न हिस्सों के जनजातीय लोगों के बीच लोकप्रिय उपाय हैं। आदिवासी लोग इन पौधों का उपयोग अपने दैनिक जीवन में विभिन्न बीमारियों को ठीक करने के लिए करते हैं।

    7.  ब्रायोफाइट्स का उपयोग अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, पोलैंड, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, तुर्की, जापान, दक्षिण, उत्तर और पूर्वी भारत, चीन, ताइवान के विभिन्न आदिवासी समुदायों द्वारा यकृत विकारों, त्वचा रोगों, हृदय रोगों, ज्वरनाशक, रोगाणुरोधी, घाव भरने और कई अन्य बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।

    8. इन उपयोगों के अलावा कुछ ब्रायोफाइट्स में विभिन्न कैंसर सेल लाइनों के खिलाफ एंटीट्यूमर गतिविधियां (antitumor activities) का गुण होता है जो कि बहुत ही महत्वपुर्ण है और कैंसर जैसे रोग के इलाज के लिय इस पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

    ब्रायोफाइटा से जुड़े हुए कुछ प्रश्न और उनके जवाब

    प्रश्न  – ब्रायोफाइटा का अर्थ क्या है?

    उत्तर – ब्रायोफाइटा के अन्तर्गत वे सभी पौधें आते हैं जिनमें वास्तविक संवहन ऊतक (vascular tissue) नहीं होते, जैसे मोसेस (mosses), हॉर्नवर्ट (hornworts) और लिवरवर्ट (liverworts) आदि। ब्रायोफाइटा (Bryophyta) वनस्पति जगत का एक बड़ा वर्ग है और यह एम्ब्रियोफाइटा का सबसे साधारण व आद्य समूह है। एंजियोस्पर्म के बाद ब्रायोफाइट्स भूमि पौधों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है। पौधों के वर्गीकरण में ब्रायोफाइटा का स्थान शैवाल (Algae) और टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) के बीच में आता है। यह पृथ्वी पर लगभग हर जगह पाया जाता है परन्तु इसका मानव जीवन में खास उपयोग नही है l ब्रायोफाइटा प्रथम स्थलीय पौधे हैं, जो शैवाल से विकसित हुए हैं। डासोनियाँ ब्रायोफाइटा का सबसे बड़ा पौधा है जिसकी ऊँचाई 40 से 70 सेमी. है।

    प्रश्नब्रायोफाइटा का आर्थिक महत्व क्या है?

    उत्तर – ब्रायोफाइटा वर्ग के पोधों में जल अवशोषण (water absorption) की क्षमता अधिक होने की वजह से ये बाढ़ (flood) रोकने में मदद करते हैं l इस वर्ग के पौधे मृदा अपरदन (soil erosion) को रोकने में भी सहायता होते हैं। स्फेगमन (Sphagnum) व अन्य जाति के ब्रायोफाइटा को ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। पूर्तिरोधी अर्थात् ऐण्टिसेप्टिक होने के कारण स्फैगनम का उपयोग सर्जिकल ड्रेसिंग (surgical dressing) के लिए किया जाता है। स्फैगनम के पौधों से स्फैगनाल नामक प्रतिजैविक प्राप्त किया जाता है। आदिवासी लोग इन पौधों का उपयोग अपने दैनिक जीवन में विभिन्न बीमारियों को ठीक करने के लिए करते हैं। कुछ ब्रायोफाइट्स में विभिन्न कैंसर सेल लाइनों के खिलाफ एंटीट्यूमर गतिविधियां (antitumor activities) का गुण होता है जो कि बहुत ही महत्वपुर्ण है और कैंसर जैसे रोग  के इलाज के लिय किया जाता है l

  • फेसबुक – रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – चश्मा से चलते फिरते फोटो और विडियो कैप्चर कर सकेगे यूजर

    फेसबुक – रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – चश्मा से चलते फिरते फोटो और विडियो कैप्चर कर सकेगे यूजर

    Ray-Ban and Facebook introduce Ray-Ban Stories -Smart Glasses

    फेसबुक (Facebook) कंपनी ने प्रसिद्ध चश्मा कंपनी रे-बैन (Ray-Ban) के साथ मिलकर एक ऐसा चश्मा (smart glass) विकसित किया है जिस से यूजर अपनी आँखों से जो भी देख रहा है उसका फोटो और विडियो बना सकेगा और उसको अपने सोशल मीडिया फ्रेंड्स के साथ शेयर भी कर सकेगा l कंपनी ने इस चश्मा को रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास (Ray-Ban Stories – Smart Glass) का नाम दिया है l फेसबुक ने रे-बैन के साथ मिलकर इस रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास को 20 अलग-अलग कॉम्बिनेशन में लॉन्च किया गया है।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास की खासियत क्या है ?

    What are the specifications of Ray-Ban Stories: Smart glasses 

    अपने फेसबुक ब्लॉग (https://tech.fb.com/) के जरिये फेसबुक ने बताया की रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास में 5 मेगापिक्सेल का ड्यूल इंटीग्रेटेड (dual integrated) कैमरा है। जिससे आप जो भी अपनी आँखों से देख रहे होते है उसको आसानी से कैप्चर कर सकते है l फोटो के साथ साथ इसमें यूजर कैप्चर बटन का इस्तेमाल करके या फेसबुक असिस्टेंट वॉयस कमांड (Facebook Assistant voice commands) के साथ हैंड्स-फ्री (Hands Free) का इस्तेमाल करके 30 सेकंड तक के वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकता है l इसके अलावा यूजर इसमें म्यूजिक सुन सकता है और फोन कॉल को अटेंड कर सकता है ।

    ब्लॉग में कंपनी ने कहा कि जब भी आप अपने स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल करके फोटो लेते हैं या वीडियो रिकॉर्ड करते हैं तो एक हार्ड-वायर्ड कैप्चर LED (hard-wired capture LED ) की रोशनी होगी जिससे आपके सामने वाले को पता लगेगा की आप फोटो या विडियो बना रहे है ।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – बेहतर म्यूजिक का मजा

    Ray-Ban Stories Smart Glass – Enjoy richer voice and sound transmission

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास इन-बिल्ट स्पीकर्स के साथ आता हैं और इसके तीन-माइक्रोफोन ऑडियो ऐरे (three-microphone audio array) आपके कॉल और वीडियो को एक बेहतर वॉयस और साउंड ट्रांसमिशन (richer voice and sound transmission) देते है और यूजर एक्सपीरियंस को बढ़ाते है । कंपनी ने स्मार्ट ग्लास में बीमफॉर्मिंग टेक्नोलॉजी (Beamforming technology) का इस्तेमाल किया है जो आपके कॉल के दौरान बैकग्राउंड में हो रहे शोर को कम करता है और आपके कॉलिंग को ज्यादा आसान बनाता है ।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – अपने दोस्तों और सोशल मीडिया फॉलोअर्स के साथ स्टोरी और मेमोरी शेयर करे

    Ray-Ban Stories Smart Glass – share story and memory with friends

    रे-बैन स्टोरीज को नए फेसबुक व्यू ऐप (new Facebook View app) के साथ जोड़ा गया है ताकि यूजर्स अपनी फेसबुक पोस्ट, स्टोरीज (stories) और मेमोरी (memories) को दोस्तों और अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स के साथ शेयर कर सकें।

    फेसबुक व्यू ऐप (Facebook View app)

    फेसबुक व्यू ऐप (Facebook View app) जो iOS और एंड्रॉइड पर उपलब्ध है वो रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास से कैप्चर किए गए कंटेंट को फोन में इंपोर्ट (import), एडिट (edit) और शेयर (share) करने का आप्शन (option) देगा । यह कंटेंट को आपके फ़ोन की मेमोरी में सेव करने का option भी देगा जिसको बाद में आप edit करके शेयर कर सकते है l

    रे-बैन की स्टोरीज क्लासिक रे-बैन स्टाइल्स में 20 फॉर्म्स में मिलती हैं। वेफरर (Wayfarer), वेफेयरर लार्ज (Wayfarer Large), राउंड (Round) और क्लियर सन लेंस (Clear Sun Lense) की एक सीरीज के साथ 5 कलर में आता है। रे-बैन स्टोरीज़ स्मार्ट चश्मा एक विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पोर्टेबल चार्जिंग केस के साथ आते हैं, जिसके जरिये आप अपने चश्मे को आसानी से रिचार्ज कर सकते हैं और पूरी तरह से चार्ज होने पर आप इस चश्मा को तीन दिनों तक पहन सकते है।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास की कीमत क्या है ?

    What is price of Ray-Ban Stories Smart Glass ?

    कंपनी ने रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास की कीमत अभी $299 USD (लगभग 21,000 रुपए) रखी है और यह 20 स्टाइल कॉम्बिनेशन में ऑनलाइन मिलेगा। भारत में अभी यह चश्मा लांच नही हुआ है l फ़िलहाल फेसबुक ने इसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड, इटली और यूके के कुछ चुनिंदा रिटेल स्टोर्स में बेचने के लिय रखा है ।

    Full Article के लिए यहाँ जाये – https://tech.fb.com/ray-ban-and-facebook-introduce-ray-ban-stories-first-generation-smart-glasses/