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  • प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कला या कोशिका कला (Plasma membrane) क्या है ? इसकी संरचना (Structure) एवं कार्य।

    इस आर्टिकल में हम जानेगे की प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कला या कोशिका कला क्या होती है, प्लाज्मा झिल्ली की संरचना (Structure), इकाई झिल्ली संकल्पना, फ्ल्यूइड मोजैक मॉडल और कोशिका कला या प्लाज्मा झिल्ली के कार्य क्या होता है आदि |

    प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कला या कोशिका कला (Plasma membrane) क्या है

    कोशिका कला कोशिका की सबसे बाहरी परत है, जो उसके विभिन्न घटकों को बाहरी वातावरण से अलग करती है। सभी कोशिकाओं (जन्तु कोशिका या पादप या नग्न कोशिकाएँ) के अवयव चारों तरफ से एक अत्यन्त पतली, लचीली तथा अर्द्धपारगम्य झिल्ली (Semi-permeable membrane) घिरे रहते हैं, जिसे जीवद्रव्य कला या कोशिका कला (Plasma membrane) कहते हैं ।

    यह झिल्ली जीवद्रव्य कला, जीवद्रव्य तथा ऊतक द्रव्य (Tissue fluid) के बीच एक अवरोधक की तरह कार्य करती है, जिससे होकर कुछ विलयन, विलायक तथा यौगिक अन्दर – बाहर हो सकते हैं। इस तरह यह झिल्ली आवश्यक पदार्थों को अन्दर अथवा बाहर जाने देती है। इसी को चयनात्मक पारगम्यता (selective permeability) कहते हैं। इस दृष्टि से O2 एवं CO2, कोशिका झिल्ली के आर-पार विसरण प्रक्रिया तथा जल परासरण प्रक्रिया द्वारा कोशिका के अन्दर एवं बाहर होते हैं।

    प्लाज्मा झिल्ली की संरचना (Structure of Plasma membrane)

    रॉबर्टसन (1959) की इकाई झिल्ली अवधारणा के अनुसार सभी कोशिकाएँ दो प्रोटीन परतों (प्रत्येक 20 Å मोटी) के मध्य फॉस्फोलिपिड की परत (35 Å मोटी) की बनी होती है।

    इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से प्लाज्मा शिल्ली का अध्ययन करने पर ये तीन स्तरों की बनी दिखाई देती है :

    (i) 20 Å मोटी, बाह्य सघन स्तर (External dense layer) – यह प्रोटीन की बनी होती है।

    (ii) 35 Å मोटी, मध्य हल्की स्तर (Middle light layer) – यह द्विध्रुवीय तथा फॉस्फोलिपिड की बनी होती है।

    (iii) 20 Å मोटी भीतरी सघन स्तर (Internal dense layer) – यह भी प्रोटीन की बनी होती है।

    इकाई झिल्ली संकल्पना (Unit membrane concept)

    रॉबर्ट्सन (Robertson) ने सन् 1959 में प्लाज्मा झिल्ली के बारे में जो परिकल्पना का प्रतिपादन किया, जिसे ‘इकाई झिल्ली परिकल्पना‘ कहते हैं।

    इस परिकल्पना के अनुसार, प्रोटीन-लिपिड तथा प्रोटीन की बनी त्रिस्तरीय प्लाज्मा झिल्ली को ‘इकाई झिल्ली‘ (Unit membrane) कहते हैं और प्लाज्मा झिल्ली के अलावा कोशिका के अन्दर मिलने वाली सभी झिल्लियाँ इकाई झिल्ली की ही बनी होती हैं । रॉबर्ट्सन  की परिकल्पना के अनुसार एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम, माइटोकॉण्ड्रिया, लाइसोसोम, गॉल्जीकाय, राइबोसोम, केन्द्रक कला (Nuclear membrane) व लवक आदि भी इसी इकाई झिल्ली के बने होते हैं। इस परिकल्पना के अनुसार, विभिन्न प्रकार के कोशिकाओं की संरचना प्लाज्मा झिल्ली या इकाई झिल्ली के द्वारा होती है।

    फ्ल्यूइड मोजैक मॉडल (Fluid Mosaic Model)

    सिंगर एवं निकोलसन (1972) ने तरल मोजैक मॉडल प्रस्तुत किया इसके अनुसार, कोशिका कला में दो प्रकार की प्रोटीन (परिधीय अथवा बाह्य तथा समाकल या आन्तरिक), ग्लाइकोप्रोटीन तथा ग्लाइकोलिपिड होते हैं। सर्वप्रथम प्लाज्मा झिल्ली की त्रिस्तरीय संरचना के बारे में डेनियली तथा डेवसन (Danielli and Davson) ने सन् 1935 में बताया। इसके बाद हार्वे तथा डेनियली ने इसकी रचना का एक कल्पित चित्र बनाया।

    कोशिका कला या प्लाज्मा झिल्ली के कार्य (Functions cell membrane or plasma
    membrane)

    कोशिका झिल्ली लचीली होती है और कार्बनिक अणुओं; जैसे-ग्लाइकोप्रोटीन तथा ग्लाइकोलिपिड की बनी होती है।

    कोशिका झिल्ली का लचीलापन एककोशिकीय जीवों में कोशिका के बाह्य वातावरण से भोजन तथा अन्य पदार्थ ग्रहण करने में सहायता करता है। इस प्रक्रिया को एण्डोसाइटोसिस कहते हैं। अमीबा इसी प्रक्रिया द्वारा भोजन ग्रहण करता है।

    पारगम्यता (Permeability)

    कोशिका कला पतली, लचीली झिल्ली होती है, जो आवश्यक पदार्थों को कोशिका के अन्दर व बाहर आने-जाने देती है। कोशिका कला की इस प्रवृत्ति को पारगम्यता (Permeability) कहते है। पारगम्यता के आधार पर कोशिका कला के अलग अलग प्रकार होते है  –

    ऐसी कोशिका कला जो किसी भी पदार्थ को आर-पार नहीं जाने देती, अपारगम्य होती है।

    ऐसी कोशिका कला जो कुछ चुने हुये पदार्थों को ही कोशिका के अन्दर एवं बाहर आने-जाने देती है, चयनात्मक पारगम्य कला (Selective permeable membrane) होती है। सभी कोशिका कला इस श्रेणी की ही होती है।

    ऐसी कोशिका कला जो जल को कोशिका के अन्दर एवं बाहर आने-जाने देती है, “अर्द्धपारगम्य कोशिका कला होती है।

    ऐसी कोशिका कला, जो केवल गैस पदार्थों को कोशिका के अन्दर व बाहर नहीं आने-जाने देती है, अपारगम्य कोशिका कला होती है।

    परासरण (Osmosis)

    जब कम सान्द्र एवं अधिक सान्द्र विलयनों को अर्द्धपारगम्य झिल्ली के द्वारा अलग रखा जाता है, तो जल कम सान्द्रता वाले विलयन से अधिक सान्द्रता वाले विलयनों की ओर बहता है, तो यह क्रिया परासरण (Osmosis) कहलाती है। जब जल कोशिका के अन्दर से बाहर जाता है, तो बाह्य परासरण (Exosmosis) कहलाता है। जब जल कोशिका में बाहर से अन्दर जाता है, तो अन्तःपरासरण (Endosmosis) कहलाता है

    विसरण (Diffusion)

    जब कोशिका कला के द्वारा दो अलग-अलग सान्द्रता वाले विलयन अलग होते हैं, तो कम सान्द्रता वाला विलयन अधिक सान्द्रता वाले विलयन की ओर बहने लगता है तथा सान्द्रता समान होने पर बहना बन्द हो जाता है।

  • जंतु कोशिका और पादप कोशिका में अंतर || तुलना तथा समानता

    हम इस आर्टिकल में जानेगे में की जंतु कोशिका और पादप कोशिका में क्या अंतर है ? जंतु कोशिका किसे कहते हैं और पादप कोशिका किसे कहते हैं। इसके साथ ही हम जंतु कोशिका और पादप कोशिका में क्या अंतर है , जंतु कोशिका तथा पादप कोशिका में क्या समानता है, साथ ही जंतु कोशिका और पादप कोशिका का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।

    जंतु कोशिका और पादप कोशिका के बीच के अंतर को जानने के लिय हम सबसे पहले कोशिका के बारे में जानेगें |

    कोशिका

    जीवों के उनके जैविक क्रियाओं में आकार प्रदान करने वाली मूलभूत इकाई को कोशिका कहा जाता है। उसका जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक और संरचनात्मक इकाई है।

    मुख्य रूप से दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं।

    1. प्रोकैरियोटिक कोशिका 2. यूकैरियोटिक कोशिका

    प्रोकैरियोटिक कोशिका

    प्रोकैरियोटिक कोशिका ऐसी कोशिका होती है जिसमें केंद्रक नहीं होता है तथा इनमें कोशिकांग भी सुविकसित नहीं होता है प्रोकरयोटिक कोशिका में कोशिका भित्ति म्यूरॉन की बनी होती है इनके गुणसूत्र में हिस्टोन प्रोटीन नहीं पाया जाता है

    उदाहरण – जीवाणु ( Bacteria ) , साइनोबैक्टीरिया अर्कीबैक्टीरिया , विषाणु ( Virus ) , बैक्टीरियोफेज , माइकोप्लाज्मा ( PPLO ) , नील हरित शैवाल ( Blue green algae ) रिकेट्सिया की कोशिकाएं आदि |

    यूकैरियोटिक कोशिका

    यूकैरियोटिक कोशिका में केंद्रक पाए जाते हैं इनमें कोशिकांग पूर्ण रूप से विकसित होता है यूकैरियोटिक कोशिका के गुणसूत्र में हिस्टोन प्रोटीन पाया जाता है तथा ये क्षारीय प्रकृति के होते हैं।

    उदाहरण – सभी जन्तु कोशिका , प्रोटोजोआ , जीव, पादप कोशिका, जन्तु आदि।

    यूकैरियोटिक कोशिका दो प्रकार की होती है।

    जन्तु कोशिका

    पादप कोशिका।

    मूल रूप से जो कोशिका जंतुओं में पाई जाती हैं उसे जंतु कोशिका कहते हैं |

    जो कोशिकाएं पोधों में पाई जाती है उन्हें पादप कोशिका कहते है |

    जन्तु  एवं पादप कोशिका में अन्तर (Difference between Plant and Animal cell)

    जन्तु कोशिकापादप कोशिका
    कोशिका कला के बाहर कोई भित्ति नहीं होती। कोशिका कला ही कोशिका की सीमा है।कोशिका कला चारों ओर से एक भित्ति द्वारा घिरी रहती है, जिसे कोशिका भित्ति कहते हैं, जो प्रायः सेलुलोज नामक पदार्थ की बनी होती है।
    रसधानियाँ अनुपस्थित या बहुत छोटी होती हैं। अतः कोशिकाद्रव्य कोशिका में समान रूप से वितरित रहता हैबड़ी-बड़ी रसधानियाँ होती हैं, जो कि कोशिका का काफी बड़ा भाग घेरे रहती हैं।
    लवक नहीं पाए जाते हैं।लवक पाए जाते हैं (हरे हरितलवक, रंगहीन ल्यूकोप्लास्ट एवं रंगीन क्रोमोप्लास्ट)।
    अधिकांश जन्तुओं की कोशिकाओं में सेण्ट्रोसोम पाए जाते हैं।अधिकांश पौधों की कोशिकाओं में सेन्ट्रोसोम नहीं पाए जाते हैं।
    लाइसोसोम पाए जाते हैं।अधिकांश पौधों की कोशिकाओं में लाइसोसोम नहीं मिलते।
  • कोशिका संरचना और कार्य || कोशिका के प्रकार

    कोशिका जीवों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है, 1665 में इसकी खोज रॉबर्ट हुक (Robert Hooke) ने की थी |

    एक ही कोशिका से बने जीवों, जैसे- जीवाणु, प्रोटोज़ोआ और यीस्ट्स, आदि को एककोशिकीय प्राणी (Unicellular Organisms) और एक से अधिक कोशिका से बने जटिल जीवों को बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms) कहा जाता है |

    सभी प्रकार की कोशिकाएँ कोशिका झिल्ली तथा जीवद्रव्य से बनी होती हैं। कोशिका झिल्ली कोशिका का बाहरी आवरण बनाती है तथा उसके भीतर के पदार्थ को जीवद्रव्य कहा जाता है। 1932 में जर्मनी के दो वैज्ञानिकों नॉल और रस्का ने इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार किया। इस सूक्ष्मदर्शी की सहायता से वस्तु अपने आकार से एक लाख गुना बड़ी दिखाई पड़ती है।

    पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों को दो वर्गों में बाँटा गया है :

    1. अकोशिकीय जीव अर्थात् ऐसे जीव जिनमें कोई कोशिका नहीं पाई जाती है, जैसे- विषाणु (Virus) जीवाणु, प्रोटोज़ोआ आदि |

    2. कोशिकीय जीव अर्थात् ऐसे जीव जिनमें एक या एक से अधिक कोशिकाएं पाई जाती हैं | कोशिकीय प्राणियों को पुनः प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक नामक दो भागों में बाँटा जाता है|

    A. प्रोकैरियोटिक जीव

    B. यूकैरियोटिक जीव

    कोशिका के प्रकार

    इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा हमें कोशिकाओं के अनेक घटक दिखाई देते हैं, जो इस प्रकार हैं :

    (a) कोशिका कला

    (b) कोशिकाद्रव्य

    (c) कोशिकांग

    (d) केन्द्रक

    कोशिका की संरचना

    सभी कोशिकाओं में तीन कार्यात्मक क्षेत्र (Functional Region) होते है जो इस प्रकार है:

    1. कोशिका या प्लाज्मा झिल्ली (Cell or Plasma Membrane) और कोशिका भित्ति (Cell Wall)

    2. केन्द्रक/न्यूक्लियस (Nucleus)

    3. केन्द्रक द्रव्य/साइटोप्लाज्म (Cytoplasm)

    कोशिका की बाहरी सतह प्लाज्मा झिल्ली होती है, जिसके अन्दर केन्द्रक द्रव्य/साइटोप्लाज्म पाया जाता है |

    माइटोकांड्रिया (Mitochondria), क्लोरोप्लास्ट (Chloroplasts) आदि विभिन्न कोशिकांग साइटोप्लाज्म में ही तैरते हुए पाए जाते हैं |

    प्लाज्मा झिल्ली के मुख्य कार्य

    प्लाज्मा झिल्ली कुछ पदार्थों के कोशिका के अन्दर और बाहर जाने पर नियंत्रण रखती है | अतः प्लाज्मा झिल्ली को चयनात्मक पारगम्य झिल्ली (Selective Permeable Membrane) भी कहते हैं |

    (i) प्रसरण (Diffusion) : अधिक सघन (Condense) पदार्थ से कम सघन पदार्थ की ओर प्रवाह प्रसरण कहलाता है| यह प्रवाह तब तक होता रहता है जब तक दोनों पदार्थों की सघनता समान न हो जाये| प्रसरण की दर गैसीय पदार्थों में द्रव व तरल पदार्थों की तुलना में अधिक होती है |

    (j) परासरण (Osmosis) : आंशिक रूप से पारगम्य (Permeable) झिल्ली के सहारे उच्च जलीय सांद्रता (Concentration) वाले भाग से निम्न जलीय सांद्रता वाले भाग की ओर जल का प्रवाह परासरण कहलाता है |

    (k) एंडोसाइटोसिस (Endocytosis) : प्लाज्मा झिल्ली के सहारे कोशिका द्वारा पदार्थों का अंतर्ग्रहण (Ingestion) एंडोसाइटोसिस कहलाता है | (l) एक्सोसाइटोसिस (Exocytosis) : इस प्रक्रिया में पुटिका (Vesicle) झिल्ली प्लाज्मा झिल्ली से टकराकर अपने पदार्थों को आस-पास के माध्यम में निकाल देती है | इसे ‘कोशिका वमन (Cell Vomiting)’ कहते हैं |

    अंग और कोशिकांग में अंतर (Difference between Organs and Cell Organelles)

    अंग (Organs)कोशिकांग (Cell Organelles)
     अंग बहुकोशिकीय जीवों में पाए जाते हैं|कोशिकांग सभी यूकैरियोटिक जीवों में पाए जाते हैं|
    इनका आकार बड़ा होता है |इनका आकार छोटा होता है |
    ये किसी भी जीव के शरीर के ऊपर या नीचे पाए जा सकते हैं |ये प्रायः आतंरिक (Internal) होते हैं |
    अंगों का निर्माण ऊतकों (Tissues) से होता है और ऊतकों का निर्माण कोशिकाओं से होता है | कोशिका के अन्दर ही कोशिकांग पाए जाते हैं |इनका निर्माण सूक्ष्म और वृहद् अणुओं (Molecules) से होता है |
    अंग आपस में मिलकर अंग-प्रणाली का निर्माण करते हैं और अंग प्रणाली किसी जीव के शरीर का निर्माण करती है |कोशिकांग आपस में मिलकर कोशिका का निर्माण करते हैं |
  • कोष्ठीकरण (Compartmentalisation) क्या है ? कोशिका का कोष्ठीकरण क्या होता है ?

    कोशिका में कोष्ठीकरण का आशय उस संगठन से है, जिसमें यूकैरियोटिक कोशिका के अन्तर्गत विभिन्न कोशिकांग अर्थात् माइटोकॉण्ड्रिया, लाइसोसोम आदि अंग प्लाज्मा झिल्ली द्वारा घिरे होते हैं, इसी को कोशिका का कोष्ठीकरण कहते हैं।

    कोशिकीय जीवन के लिए कोष्ठीकरण की आवश्यकता

    कोशिकीय जीवन के लिए कोष्ठीकरण बहुत आवश्यक है। प्लाज्मा, झिल्लीयुक्त कोशिका कोष्ठक के रूप में होती है। पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के चारों ओर सैल्यूलोज भित्ती होती है। यूकैरिआटिक कोशिका में बहुत से झिल्लीयुक्त अंगक अर्थात् कोष्ठक होते हैं। प्रत्येक अंगक की रचना तथा कार्य विशिष्ट होते हैं। प्रोकैरिआटिक कोशिकाओं में अन्त:कोष्ठक नहीं होते हैं।

  • प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में क्या अन्तर है ?

    इस आर्टिकल में हम जानेगे कि प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic Cell)और यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic Cell) क्या है और किस तरह एक दुसरे से भिन्न है | प्रोकैरियोटिक कोशिका और यूकैरियोटिक कोशिका के बीच क्या अंतर है और इनकी विशेषताएँ क्या है |

    प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic Cell) क्या है ?

    इस प्रकार की कोशिकाओं में केन्द्रक कला नहीं होती है। इस प्रकार केन्द्रकीय पदार्थ कोशिकाद्रव्य में बिखरा होता है। गुणसूत्र के स्थान पर हिस्टोन प्रोटीन रहित DNA के धागे होते हैं। ऐसी कोशिकाओं में पूर्ण रूप से विकसित कोशिकांगों का अभाव रहता है। ये कोशिकाएँ अर्थात् वास्तविक केन्द्रक रहित प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ नीले-हरे शैवाल, माइकोप्लाज्मा और जीवाणु में पाई जाती हैं।

    यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic Cell) क्या है ?

    इस प्रकार की कोशिकाओं में पूर्ण विकसित केन्द्रक अर्थात् केन्द्रक कला और केन्द्रिका युक्त तथा पूर्ण विकसित कोशिकांग पाए जाते हैं। इस प्रकार की कोशिकाओं के गुणसूत्र में DNA तथा हिस्टोन प्रोटीन से बनी इकाई न्यूक्लिओसोम पाई जाती हैं। ये कोशिका अर्थात् वास्तविक केन्द्रक वाली यूकैरियोटिक कोशिकाएँ अधिकांश शैवाल, उच्च पादप एवं जन्तुओं में पाई जाती हैं।

    प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में अन्तर (Difference between Prokaryotic and Eukaryotic Cell)

    प्रोकैरियोटिक कोशिकायूकैरियोटिक कोशिका
    इनमें प्रारम्भी अविकसित केन्द्रक होता है।इनमें पूर्ण विकसित केन्द्रक होता है।
    ये आदिम (primitive) कोशिकाएं हैं।ये सुविकसित कोशिकाएँ हैं। 
    कोशिकाद्रव्य पूर्ण कोशिका में फैला रहता है।केन्द्रक एवं कोशिका कला के बीच सीमित रहता है।
    केन्द्रक कला तथा केन्द्रिका अनुपस्थित होती है।केन्द्रक कला तथा केन्द्रिका उपस्थित होती हैं।
    DNA हिस्टोन प्रोटीन रहित होता है।DNA के साथ हिस्टोन प्रोटीन जुड़ी होती है। 
    गॉल्जी तन्त्र, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका, लवक तथा माइटोकॉण्ड्रिया अनुपस्थित होते हैं।उपस्थित होते हैं (लवक केवल पादप कोशिका में)।
    श्वसन तन्त्र जीवद्रव्व कला में उपस्थित होता है।श्वसन तन्त्र माइटोकॉण्ड्रिया में उपस्थित होता है।
    प्रकाश-संश्लेषण क्रोमेटोफोर में होता है।प्रकाश-संश्लेषण पादप कोशिका के हरितलवक में होता है।
    राइबोसोम 70 S प्रकार के होते हैं।राइबोसोम 70 S या 80S प्रकार के होते हैं।
    कशामिका में सूक्ष्म तन्तुओं की (9+2) व्यवस्था नहीं होती।कशामिका में सूक्ष्म नलिकाओं की (9+2) व्यवस्था होती है। 
    रिक्तिका अनुपस्थित होती हैं।रिक्तिका उपस्थित होती है।
    लयनकाय या लाइसोसोम अनुपस्थित होते हैं।लयनकाय या लाइसोसोम जन्तु कोशिका में उपस्थित होते हैं।
    सूत्री कोशिका विभाजन (mitosis) नहीं होता।सूत्री कोशिका विभाजन होता है।
    कोशिका भित्ति पतली होती है।इनमें कोशिका भित्ति मोटी होती है | 
  • कोशिका (Cell) क्या है ? कोशिका के प्रकार और विशेषताएँ (Koshika – Sampurn Jankari Hindi me)

    प्रत्येक जीव का जीवन एक कोशिका से आरम्भ होता है | यदि वह इसी एक कोशिका के सहारे अपने जीवन को चलाता रहता है तो उसे एककोशिकीय जीव (Unicellular) जीव कहा जाता है, परन्तु अधिकांश जीवों में यह कोशिका विभाजन करती है और अंत में बहुकोशिकीय जीव बन जाता है | कोशिका जीवधारियों की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई होती है |

    • ‘कोशिका’ का अंग्रेजी शब्द सेल (Cell) लैटिन भाषा के ‘शेलुला’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ ‘एक छोटा कमरा’ है। कुछ सजीव जैसे जीवाणुओं के शरीर एक ही कोशिका से बने होते हैं, उन्हें एककोशकीय जीव कहते हैं जबकि कुछ सजीव जैसे मनुष्य का शरीर अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है उन्हें बहुकोशकीय सजीव कहते हैं। कोशिका की खोज रॉबर्ट हूक ने १६६५ ई० में किया।
    • १९३९ ई० में श्लाइडेन तथा श्वान ने कोशिका सिद्धान्त प्रस्तुत किया जिसके अनुसार सभी सजीवों का शरीर एक या एकाधिक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है तथा सभी कोशिकाओं की उत्पत्ति पहले से उपस्थित किसी कोशिका से ही होती है।
    • सजीवों की सभी जैविक क्रियाएँ कोशिकाओं के भीतर होती हैं। कोशिकाओं के भीतर ही आवश्यक आनुवांशिक सूचनाएँ होती हैं जिनसे कोशिका के कार्यों का नियंत्रण होता है तथा सूचनाएँ अगली पीढ़ी की कोशिकाओं में स्थानान्तरित होती हैं।

    कोशिका के प्रकार

    वास्तविक केन्द्रक की उपस्थिति के आधार पर कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं

    1. प्रोकैरियोटिक 2. यूकैरियोटिक

    प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ प्रायः स्वतंत्र होती हैं जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाएँ, बहुकोशीय प्राणियों में पायी जाती हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिका में कोई स्पष्ट केन्द्रक नहीं होता है। केन्द्रकीय पदार्थ कोशिका द्रव में बिखरे होते हैं। इस प्रकार की कोशिका जीवाणु तथा नीली हरी शैवाल में पायी जाती है। सभी उच्च श्रेणी के पौधों और जन्तुओं में यूकैरियोटिक प्रकार की कोशिका पाई जाती है। सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओ में संगठित केन्द्रक पाया जाता है जो एक आवरण से ढका होता है।

  • Antioxidants हमें स्वस्थ रहने में कैसे मदद करते हैं ?

    Antioxidants हमें स्वस्थ रहने में कैसे मदद करते हैं ?

    आहार में नियमित रूप से ताजे फल और सब्जियां ग्रहण करना वांछनीय है क्योंकि एक ऑक्सीकरण रोधी अच्छे स्रोत होते हैं | ऑक्सीकरण रोधी तत्व व्यक्ति के स्वस्थ बने रहने और दीर्घायु होने में सहायक सिद्ध होते हैं | क्योंकि यह शरीर में चयापचय के उपोत्पाद के रूप में उत्पन्न मुक्त मूलकों को निष्क्रिय बनाते हैं |

    ऑक्सीकरण एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण किसी पदार्थ से ऑक्सीकारक एजेंट में होता है |

    ऑक्सीकरण अभिक्रिया के परिणाम स्वरूप मुक्त मूलक उत्पन्न हो सकते जिनके द्वारा कोशिकाओं को क्षति पहुंचाने वाली श्रंखला अभिक्रिया आरंभ हो सकती है |

  • अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र बनने का कारण क्या है ?

    अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र बनने का कारण क्या है ?

    अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र का बनाना चिंता का विषय है, इस छिद्र का संभावित कारण विशिष्ट ध्रुवीय वाताग्र तथा समतापमंडलीय बादलों की उपस्थिति तथा क्लोरोफ्लोरो कार्बनों का अंतर्प्रवाह है |

    ध्रुवीय समतापमंडलीय बादलों में उपस्थित नाइट्रिक अम्ल, क्लोरोफ्लोरो कार्बनों से अभिक्रिया कर क्लोरीन का निर्माण करता है जो कि ओजोन परत के प्रकाश रासायनिक विनाश के लिये उत्तरदायी है |

  • CFL  और LED में क्या अंतर है ?

    CFL और LED में क्या अंतर है ?

    पारा वाष्प से विद्युत गुजारकर CFL में पराबैंगनी प्रकाश उत्पन्न किया जाता है जिसे लैम्पके अन्दर फास्फर कोटिंग से अवशोषित कराकर रौशनी उत्पन्न की जाती है !

    LED लैम्पों में पारंपरिक अर्धचालक प्रकाश उत्सर्जक डायोडों, आर्गेनिक LED या पालीमर LED तकनीक का प्रयोग होता है |

    सफल का औसत कार्यकाल 6000 से 15000 घंटे होता है जबकि LED लैम्प सामान्यत: 25-30 साल तक चल सकता है !

    ध्यान रखें !

    • प्रकाश उत्पन्न करने के लिए सफल पारा वाष्प और स्न्दिप्क का प्रयोग करता है, जबकि LED लैम्प अर्धचालक पदार्थों का प्रयोग करता है |
    • LED लैम्प की तुलना में सफल कम ऊर्जा सक्षम है |
  • एक नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का क्या काम होता है ?

    एक नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का क्या काम होता है ?

    एक नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का कार्य न्यूट्रान की गति को कम करना है | भारी जल और कुछ नहीं बल्कि D2O है |

    डयूटेरियम और ट्राईटियम H2 के आइसोटॉप्स हैं, भारी जल हाइड्रोजन के गुरुत्तर समस्थानिक ( डयूटेरियम) और आक्सीजन का यौगिक है |

    इसका सापेक्षिक घनत्व 101 और हिमांक साधारण जल से थोड़ा आशिक होता है |

    नाभिकीय ऊर्जा के साथ – साथ अनुसन्धान रिएक्टरों के लिए आवश्यक गुरुजल की मांग की आपूर्ति के निमित्त उत्पादन के लिए गुरुजल बोर्ड, मुंबई उत्तरदायी है |