चुम्बकीय क्षेत्र और उसके उपयोग

Magnetic Field and its use

चुम्बक के चारों ओर कम्पास-सूई द्वारा चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है। अतः चुम्बक के चारों ओर वह क्षेत्र, जिसमें चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है, ‘चुम्बकीय क्षेत्र‘ कहलाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा, चुम्बकीय सुई से निर्धारित की जाती है।

चुम्बकीय क्षेत्र के मात्रक को ‘टेसला’ (Tesla) कहते हैं।

उपयोग

विद्युत-चुम्बकीय में चुम्बकीय क्षेत्र का बहुत महत्त्व है।

विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण का प्रयोग बिजली घरों में प्रयोगआने वाले जेनरेटरों में गाड़ियों के डायनमों में होता है।

आवेशित कणों को त्वरित करने के लिए चुम्बकीय क्षेत्र का प्रयोग होता है। इन त्वरित कणों का नाभिकीय प्रयोगों में बहुत महत्त्व है।

ऐम्पियर मीटर द्वारा बिना परिपथ में जोड़े अधिक धारावाही तारों में बहती धारा का मान पढ़ा जा सकता है। यह धारा के चुम्बकीय प्रभाव पर आधारित यन्त्र है। MRI में चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव में उच्च आवृत्ति की रेडियो तरंगों का मानव शरीर के विभिन्न भाग भिन्न अनुपात में अवशोषण करके एक प्रतिछाया (Image) बनाते हैं जिससे शरीर के भीतरी भाग में अनियमितताओं का पता चलता है तथा उसकी चिकित्सा की जाती है।

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने विश्व का पहला प्लास्टिक चुम्बक विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। दरहम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कार्बनिक सुचालक पदार्थ समूह का यह पहला ऐसा चुम्बक है जो सामान्य तापमान में भी काम कर सकेगा। यह चुम्बक एक तरह का पॉलिमर है जो पीएएनआई (PANI) और टीसीएनक्यू (TCNA) के मिश्रण से निर्मित अणुओं की श्रृंखला है। इसमें असाधारण विद्युतीय गुण है। प्लास्टिक चुम्बक का प्रयोग कम्प्यूटर हार्ड डिस्क की कोटिंग में किए जाने की सम्भावना है जिससे उच्च क्षमता वाले ” डिस्क का विकास हो सकता है। इसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में किया जा सकेगा।

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