Category: फ़िजिक्स

  • पोलेराइड (Polaroids) क्या है ?

    What is Polaroids ?

    रेखीय ध्रवित या समतल ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करने के लिए पोलेराइड (Polaroids) नामक युक्ति का उपयोग किया जाता है। इसमें एक फिल्म होती है जिसे कांच की दो प्लेटों के बीच रखा जाता है। इस फिल्म को बनाने के लिए नाइट्रो सेलुलोज (Nitro cellulose) की एक पतली शीट पर कार्बनिक यौगिक हरपेथाइट (Herapathite) या आयडोक्विनाइन सल्फेट (Idoquinine sulphate) के अति सूक्ष्म आकार के क्रिस्टल इस प्रकार फैलाकर रखें जाते हैं, कि सभी क्रिस्टलों के अक्ष एक-दूसरे के समानान्तर रहें।

    पोलेराइड के उपयोग (Uses of Polaroids)

    1. प्रकाश की चकाचौंध दूर करने के लिए सन ग्लासेस (Sunglasses) में।

    2. मोटर कार के विंड स्क्रीन (Wind screen) तथा हेडलाइट के कवर ग्लास पर पोलेराइड लगा दिया जाते हैं। पोलेराइडों के अक्ष ऊर्ध्वाधर से 45° के कोण पर झुके रहते हैं।

    3. वायुयान और ट्रेन में प्रवेश करने वाले प्रकाश की तीव्रता को नियन्त्रित करने में।

    4.त्रिविमीय वाले चित्रों को देखने में।

    5. धातुओं के प्रकाशीय गुणों के अध्ययन में।

    6. पोलेराइड फोटोग्राफी और कैमरा में

  • यान्त्रिक तरंगें (अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ तरंग) क्या है ?

    Mechanical waves (Longitudinal and Transverse waves)

    अनुदैर्ध्य तरंग में माध्यम के कण तरंग-संचरण के अनुदिश ही कम्पन करते हैं किन्तु अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण तरंग-संचरण की दिशा के लम्बवत् कम्पन करते हैं।

    दोनों ही तरंगों में परावर्तन, अपवर्तन और विवर्तन की घटनाएं होती हैं। अत: इन गणों के आधार पर इन दोनों ही तरंगो में विभेद कर पाना संभव नही है। ध्रुवण प्रकाश सम्बन्धी ऐसी घटना है जो अनुदैर्ध्य तरंग और अनुप्रस्थ तरंग में अन्तर स्पष्ट करती है।

    अनुदैर्ध्य तरंग में ध्रुवण की घटना नहीं होती, जबकि अनुप्रस्थ तरंग में ध्रुवण की घटना होती है। ध्वनि तरंगों में ध्रुवण नहीं होता हैं क्योंकि वे वायु में अनुदैर्ध्य तरंगे हैं।

    प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं। अनुप्रस्थ तरंगों के कम्पन तरंग-संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं। उदाहरणार्थ, यदि प्रकाश-तरंग कागज के तल के लम्बवत् दिशा में गमन करती है, तो उसके कम्पन कागज के तल में होंगे।

    प्रकाश एक विद्युत-चुम्बकीय तरंग भी है।

    प्रकाश एक विद्युत-चुम्बकीय तरंग भी है। विद्युत-चुम्बकीय तरंग को संचिरत होने के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है। प्रकाश-तरंग में विद्युत-वेक्टर (अर्थात् विद्युत क्षेत्र) और चुम्बकीय-वेक्टर (अर्थात् चुम्बकीय क्षेत्र) प्रकाश-संचरण की दिशा के लम्बवत् तलों में एक-दूसरे के लम्बवत् दोलन करते हैं। प्रकाश तरंगों का प्रकाशकीय प्रभाव केवल विद्युत-वेक्टरों के कारण होता है।

    अधुवित प्रकाश (Unpolarised light)

    साधारण प्रकाश में विद्युत-वेक्टर के कम्पन (या अनुप्रस्थ कम्पन) प्रकाश-संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में प्रत्येक दिशा में समान रूप से अथवा सममित रूप से होते हैं। ऐसे प्रकाश को अधुवित प्रकाश (Unpolarised light) कहते हैं। प्रकाश-स्रोतों जैसे विद्युत बल्ब, मोमबत्ती, ट्यूब-लाइट, आदि से उत्सर्जित प्रकाश अधुवित प्रकाश होते हैं।

    ‘ध्रुवण’ (Polarisation)

    यदि प्रकाश-तरंग के कम्पन (या विद्युत-वेक्टर के कम्पन) प्रकाश-संचरण की दिशा में लम्बवत् तल में एक ही दिशा में हों, प्रत्येक दिशा में समहित न हों, तो इस प्रकाश को समतल ध्रुवित प्रकाश (Plane polarised light) भी कहते हैं। प्रकाश सम्बन्धी यह घटना ‘ध्रुवण’ (Polarisation) कहलाती है। समतल ध्रुवित प्रकाश को ‘रेखीय ध्रुवित प्रकाश (Linearly polarised light) भी कहते है।

  • प्रकाश तरंगों का विवर्तन क्या है ?

    What is Diffraction of Light Waves ?

    ध्वनि तरंगों के रूप में आगे बढ़ती है। जब ध्वनि के मार्ग में कोई अवरोध (Obstacle) आ जाता है, तो वह मुड़कर चलने लगती है। यही कारण है, कि कमरे के बाहर की आवाज कमरे के अन्दर चारों ओर फैलकर वहां बैठे प्रत्येक व्यक्ति को सुनाई देने लगती है। किनारों पर ध्वनि तरंगों का मुड़ना ध्वनि का विवर्तन कहलाता है।ध्वनि तरंगों की तरंग-दैर्ध्य अवरोध के आकार की कोटि की होती है, अतः ध्वनि का विवर्तन आसानी से ज्ञात हो जाता है।

    विवर्तन

    विवर्तन, प्रत्येक प्रकार की तरंग का एक गुण होता है। प्रकाश भी एक तरंग है। अत: उसमें भी विवर्तन का गुण होता है। सामान्य परिस्थितियों में प्रकाश का विवर्तन दृष्टिगोचर नहीं होता। किन्तु जब प्रकाश किसी छोटे छिद्र (स्लिट) से गुजरता है या उसके मार्ग में कोई बहुत पतली वस्तु (अवरोध), जैसे—बाल, तार, इत्यादि आ जाती है, तो प्रकाश किनारे पर कुछ मुड़ जाता है जिससे प्रकाश रंगीन दिखाई देने लगता है तथा छाया के किनारे तीक्ष्ण (Sharp) नहीं होते हैं।

    तीक्ष्ण धार वाले किनारों पर प्रकाश का मुड़ना तथा अवरोध द्वारा बनी ज्यामितीय छाया में प्रकाश के अतिक्रमण की घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं।

    प्रकाश का विवर्तन के अनुप्रयोग

    प्रकाश के विवर्तन के कारण ही दूरदर्शी में तारों के प्रतिबिम्ब तीक्ष्ण बिन्दुओं की तरह दिखाई न देकर अस्पष्ट धब्बों की तरह दिखाई देते हैं।

    जब आप किसी ग्रामोफोनर रिकार्ड या कॉम्पैक्ट डिस्क को किसी कोण से देखते हैं, तो वह इन्द्रधनुषी दिखता है। इसका कारण यह है, कि जब श्वेत प्रकाश की किरण डिस्क के विभिन्न उभारों से होकर समानान्तर गुजरती है, तो वे उभार प्रिज्म की तरह कार्य करते हैं और प्रकाश की श्वेत किरणें सात वर्गों में टूट जाती है। पुनः इन विक्षेपित किरणों का विवर्तन व संचरण होता है, तब वे हमारी आंख तक पहुंचती हैं।

  • प्रकाश तरंगों का व्यतिकरण क्या है ?

    What is Interference of Light Waves ?

    व्यतिकरण सभी प्रकार की तरंगों का एक गुण है। चूंकि प्रकाश तरंगों के रूप में चलता है, अत: प्रकाश तरंगें भी व्यतिकरण की घटना को दर्शाती हैं।

    परिभाषा

    जब समान आवृत्ति और लगभग समान आयाम की दो प्रकाश तरंगें किसी माध्यम में एक साथ एक ही दिशा में गमन करती हैं, तो अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार परिणामी तरंग का निर्माण करती हैं। परिणामी तरंग का आयाम मूल तरंगों के आयाम से भिन्न होता है। चूंकि प्रकाश की तीव्रता आयाम के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है, प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है। कुछ स्थानों पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम, कुछ स्थानों पर न्यूनतम अथवा शून्य होती है। इस घटना को प्रकाश का ‘व्यतिकरण’ कहते हैं।

    व्यतिकरण दो प्रकार के होते हैं—(1) संपोषी या रचनात्मक व्यतिकरण और (2) विनाशी व्यतिकरण।

    संपोषी या रचनात्मक व्यतिकरण (Constructive Interference)

    माध्यम के जिस बिन्दु पर दोनों तरंगें समान कला में मिलती है अर्थात् दोनों तरंगों के शीर्ष या गर्त एक साथ पड़ते हैं, उस बिन्दु पर दोनों तरंगें एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ाती है। अत: प्रकाश की परिणामी तीव्रता अधिकतम होती है। इस प्रकार के व्यतिकरण को ‘संपोषी’ या ‘रचनात्मक व्यतिकरण‘ कहते हैं।

    विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference)

    माध्यम के जिस बिन्दु पर दोनों तरंगे विपरीत कला में मिलती है अर्थात् एक तरंग के शीर्ष पर दूसरी तरंग का गर्त या एक तरंग के गर्त पर दूसरी तरंग का शीर्ष पड़ता है, उस बिन्दु पर दोनों तरंगें एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देती है। अत: उस बिन्दु पर प्रकाश की परिणामी तीव्रता न्यूनतम या शून्य होती है। इस प्रकार के व्यतिकरण का विनाशी व्यतिकरण न्यूनतम या शून्य होती है। इस प्रकार के व्यतिकरण को ‘विनाशी व्यतिकरण‘ कहते हैं।

    उदाहरण

    वर्षा ऋतु में विभिन्न मोटर वाहनों से टपकी तेल की बूंदे सड़क पर पतली फिल्म के रूप में बिखर जाती है।

    सूर्य के प्रकाश में यह फिल्म विभिन्न रंगों की दिखाई देती है। इसी तरह जल की सतह पर तेल की बूंदों से बनी पतली फिल्म भी रंगीन दिखाई देती है।

    साबुन के रंगहीन बुलबुले भी सूर्य के प्रकाश में रंगीन दिखाई देते हैं। इन सबका कारण प्रकाश का व्यतिकरण है।

  • गोलीय तथा वर्ण विपथन (Spherical and Chromatic Aberration) क्या है ?

    गोलीय तथा वर्ण विपथन (Spherical and Chromatic Aberration) क्या है ?

    What are Spherical and Chromatic Aberration ?

    गोलीय विपथन

    यदि लेन्स बड़ा हो और उसके पूरे भाग पर प्रकाश पड़ता हो तो लेन्स का बाहरी भाग (Peripheral portion) तथा केन्द्रीय भाग प्रकाश के एक ही बिन्दु पर फोकस नहीं करते हैं। इससे एक बिन्दु रूप की वस्तु को प्रतिबिम्ब भी फैला हुआ और अस्पष्ट बनता है। इस दोष को ‘गोलीय विपथन‘ कहते हैं।

    इस दोष का निवारण करने के लिए अनबिंदुक (Anastigmatic) लेन्सों का उपयोग किया जाता है। अनबिंदुक लेन्स विभिन्न प्रकार के कांच के अनेक लेन्सों को परस्पर जोड़ कर बनाए जाते हैं। गोलीय विपथन का निवारण विशेष प्रकार से बनाए गए नवचन्द्रक लेन्स (Meniscus lens) का उपयोग करके भी किया जाता है।

    साधारण उपाय यह है, कि एक काले कागज में छोटा गोलाकार छिद्र बनाकर उस कागज को लेन्स पर लगा दिया जाये। इससे लेन्स के केवल केन्द्रीय भाग से प्रकाश गुजरेगा, अत: बाहरी भाग से प्रतिबिम्ब बनेगा ही नहीं परन्तु इस विधि में लेन्स का एक छोटा भाग ही प्रयुक्त होता है, अत: प्रतिबिम्ब कम चमकीला बनता है।

    वर्ण विपथन

    यदि अकेले लेन्स का प्रयोग किया जाए तो प्रायः श्वेत प्रकाश से भी प्रतिबिम्ब रंगीन व अस्पष्ट बनता है। लेन्स के इस दोष को ‘वर्ण विपथन‘ कहते हैं। इसका कारण यह है, कि लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक तथा उसके कारण लेन्स की फोकस दूरी भिन्न-भिन्न रंगों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। अत: भिन्न-भिन्न रंग की किरणें भिन्न-भिन्न बिन्दुओं पर फोकस होती है और प्रतिबिम्ब अस्पष्ट तथा रंगीन बनता है।

    परमाणु सिद्धान्त का विकास करने वाले प्रसिद्ध रसायनज्ञ जॉन डाल्टन वर्णाध थे। अत: वर्णाधता को ‘डाल्टोनिक रोग’ भी कहते हैं।

    मक्खिया पराबैंगनी प्रकाश को देख सकती है परन्तु लाल प्रकाश को नही देख सकती है l

  • रंगीन टेलीविजन (Colour Television) कैसे काम करता है ?

    How does color television work?

    इसमें चित्रों का निर्माण प्राथमिक रंगों के विभिन्न प्रकार के संकलनों द्वारा होता है। चित्र से प्रकाश को रंगीन टेलीविजन के कैमरे पर लेंस द्वारा संसृत किया जाता है। जब प्रकाश कैमरे पर पहंचता है, तो यह विशेष प्रकार के दर्पणों द्वारा तीन किरण पुंजों में विभक्त हो जाता है। जब प्रत्येक किरण-पुंज फिल्टर से गुजरती है तब उससे तीन पृथक् लाल, हरा और नीले रंगों का किरण-पुंज बनता है।

    एक रंगीन टेलीविजन के पर्दे पर हजारों ऐसे छोटे-छोटे संवेदनशील क्षेत्र होते हैं जो इलेक्ट्रॉन के सम्पर्क में आने पर दीप्त हो जाते हैं। कुछ क्षेत्र लाल प्रकाश, कुछ हरे प्रकाश तथा शेष बचे अन्य क्षेत्र नीला प्रकाश उत्पन्न करते हैं। जब हम कोई रंगीन कार्यक्रम देखते हैं, तो लाल, हरा या नीला प्रकाश ही नहीं देखते अपितु इनके संकलन से निर्मित अनेक रंगों के चित्र देखते है हम श्वेत प्रकाश तब देखते हैं जब नीले, हरे और लाल रंग के प्रकाश का एक निश्चित अनुपात में संकलन होता है। प्राथमिक रंगों के मिश्रण से श्वेत वर्ण के प्रकाश के निर्मित होने के कारण ही एक रंगीन टेलीविजन पर हम श्वेत-श्याम चित्र भी देख सकते हैं।

  • रंजक (Pigment) क्या है ?

    What is Pigment ?

    वैसे पदार्थ हैं जो पेंटों या रंग-सामग्नियों को रंग प्रदान करते हैं।

    ऐसा इसलिए हो पाता है, कि ये रंजक कुछ ही वर्गों को परावर्तित करते हैं तथा शेष सभी वर्गों के प्रकाश को अवशोषित कर लेते हैं। अधिकांश रंजक अशुद्ध होते हैं अर्थात् वे एक से अधिक वर्ण को परावर्तित करते हैं। जब उन्हें मिलाया जाता है तो उनसे मेल खाने वाले या सर्वनिष्ठ सभी वर्ण परावर्तित हो जाते हैं।

    उदाहरण के लिए, नीले और पीले पेंटों को मिलाने से एक हरा रंग बनता है क्योंकि नीला रंग जामुनी तथा हरे रंग को परावर्तित करता है साथ ही नीले रंग को भी। जबकि पीला रंग हरे, पीले और नारंगी वर्ण के प्रकाश को परावर्तित करता है। केवल हरा रंग ही दोनों द्वारा परावर्तित होता है। रंगीन रंजकों को मिलाना एवं व्यवकलन (Subtraction) प्रक्रिया है। रंगीन प्रकाशों को संकलन द्वारा मिश्रित किया जाता है।

  • वस्तुओं के रंग (Colour of Objects)

    Colour of Objects

    वस्तुओं का अपना कोई रंग नहीं होता। वस्तुएं प्रकाश का कुछ भाग परावर्तित करती है तथा कुछ भाग अवशोषित भी करती हैं। प्रकाश का परावर्तित भाग ही वस्तु का रंग निर्धारित करता है।

    कोई वस्तु जिस रंग में दिखाई देती है वह वास्तव में, (श्वेत प्रकाश के सातों रंगों में से) केवल उसी रंग को परावर्तित करती है, शेष सभी रंग को अवशोषित कर लेती है जो वस्तु सभी रंगों को परावर्तित कर देती है वह श्वेत दिखाई देती है क्योंकि सभी रंगों को मिश्रित प्रभाव श्वेत होता है जो वस्तु सभी रंगों को अवशोषित कर लेती है और किसी रंग को परावर्तित नहीं करती है, वह काली दिखाई देती है। अत: सभी अपारदर्शी (Opaque) वस्तुओं का रंग उनके द्वारा परावर्तित प्रकाश का रंग होता है। इसके विपरीत पारदर्शी (Transparent) वस्तुओं का रंग उनसे पार होने वाले प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, जब हरे कांच को हम सूर्य के प्रकाश में देखते है, तो वह हरा दिखाई देता है क्योंकि वह हरे रंग को अपने अन्दर से जाने देता है और शेष सभी रंगों को अवशोषित कर लेता है। अतः स्पष्ट है, कि यदि किसी लाल रंग की प्लेट को हरे प्रकाश में (अन्य किसी एक रंग के प्रकाश में) देखा जाए तो वह हरे प्रकाश को अवशोषण कर लेगी इसलिए काली दिखाई देगी।

  • इन्द्रधनुष कैसे बनता है ?

    How does rainbow become ?

    इन्द्रधनुष बनने का कारण

    पूर्ण आन्तरिक परावर्तन तथा अपवर्तन द्वारा वर्ण विक्षेपण का सबसे अच्छा उदाहरण आकाश में वर्षा के बाद दिखाई देने वाला इन्द्रधनुष है। सूर्य की सफेद किरणें जब जल की बूंदों पर पड़ती हैं, तो उनके प्रकाश का बूंदों के भीतर के अवतल तल से पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है और जब यह बूंदों से बाहर निकलने लगती हैं, तो विक्षेपित हो जाती है और इस प्रकार विभिन्न रंग दिखाई पड़ते हैं। कभी-कभी दो इन्द्रधनुष दिखाई देते हैं। दूसरा इन्द्रधनुष बूंदों में दो बार आन्तरिक परावर्तन होने के कारण बनता है। दोनों का एक ही केन्द्र होता है और यह सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में होता है। जब दो इन्द्रधनुष बनते हैं, तो एक को ‘प्राथमिक’ तथा दूसरे को ‘द्वितीयक इन्द्रधनुष’ कहते हैं।

    प्रकाश के सात रंगों में से लाल, हरा तथा नीला रंग ‘प्राथमिक रंग’ कहलाते हैं क्योंकि उन्हें विभिन्न अनुपात में मिलाने से अन्य रंग प्राप्त होते हैं। इस तरह मिलाने से जो रंग प्राप्त होते हैं उन्हें ‘द्वितीयक रंग’ कहते हैं।

    लाल + नीला = बैंगनी

    नीला + हरा = प्रशियन नीला (Peacock blue or Cyan)

    लाल + हरा = पीला

    जब दो रंग परस्पर मिलने से श्वेत प्रकाश उत्पन्न करते हैं, उन्हें ‘पूरक रंग’ कहते हैं।

    विभिन्न रंगों के मिश्रण से निम्नलिखित रंग प्राप्त कर सकते हैं:

    लाल + हरा = पीला लाल + नीला = मैजेंटा

    हरा + नीला = पीकॉक ब्ल्यू (सयान)

    हरा + मैजेंटा = श्वेत लाल + पीकॉक ब्ल्यू = श्वेत

    नीला + पीला = श्वेत लाल + हरा + नीला = श्वेत

  • वर्ण-विक्षेपण, प्रकाश-किरण और स्पेक्ट्रम

    Chromatic aberration, Light Beam and Spectrum

    वर्णक्रम अथवा स्पेक्ट्रम

    जब कोई प्रकाश-किरण प्रिज्म में से गुजरती है, तो वह अपने मार्ग से विचलित होकर प्रिज्म के आधार की ओर झुक जाती है। यदि किरण सूर्य के श्वेत प्रकाश की है, तो झुकने के साथ-साथ विभिन्न रंगों की किरणों में विभाजित भी हो जाती है। इस प्रकार से उत्पन्न विभिन्न रंगों के समूह को ‘वर्णक्रम अथवा स्पेक्ट्रम” (Spectrum) कहते हैं,

    जब सूर्य के प्रकाश को प्रिज्म के भीतर से गुजारा जाता है, तो हमें श्वेत निर्गत प्रकाश के स्थान पर रंगीन प्रकाश की पट्टी (Bond) प्राप्त होती है। रंगीन प्रकाश की पट्टी को ‘स्पेक्ट्रम’ कहते हैं और इसमें रंग लाल (R). नारंगी (O), पीला (Y), हरा (G), नीला (B), जामुनी (D और बैंगनी (V) रंग के होते हैं।

    वर्ण-विक्षेपण

    श्वेत प्रकाश के अपने अवयवी (Component) रंगों में विभक्त होने की क्रिया को ‘वर्ण-विक्षेपण’ कहते हैं।

    किसी पारदर्शी पदार्थ, जैसे कांच का अपवर्तनांक प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है। यह लाल प्रकाश के लिए सबसे कम तथा बैंगनी प्रकाश के लिए सबसे अधिक होता है।

    प्रकाश-किरण और वर्ण-विक्षेपण

    प्रकाश-किरण कांच के प्रिज्म में से गुजरती है, तो वह अपने प्रारम्भिक मार्ग से विचलित होकर प्रिज्म के आधार की ओर झुक जाती है। प्रकाश-किरण में उत्पन्न यह विचलन कांच के अपवर्तनांक पर निर्भर करता है। अपवर्तनांक जितना अधिक होगा, प्रकाश-किरण का विचलन भी उतना ही अधिक होगा। अत: यदि प्रिज्म में से गुजरने वाली किरण श्वेत प्रकाश की है तब इस प्रकाश में उपस्थित भिन्न-भिन्न रंगों की किरणों में विचलन भिन्न-भिन्न होगा। कांच का अपवर्तनांक लाल प्रकाश के लिए सबसे कम तथा बैंगनी प्रकाश के लिए सबसे अधिक है। अत: लाल प्रकाश की किरण प्रिज्म के आधार की ओर सबसे कम झुकेगी तथा बैंगनी प्रकाश की किरण सबसे अधिक झुकेगी। इस प्रकार श्वेत प्रकाश का प्रिज्म में गुजरने पर वर्ण-विक्षेपण हो जाएगा।