Category: फ़िजिक्स

  • ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect) क्या है ?

    ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect) क्या है ?

    What is Heating Effect ?

    जब किसी चालक (धातु) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो गतिशील इलेक्ट्रॉन निरन्तर चालक के परमाणुओं से टकराते हैं तथा इस प्रक्रिया में अपनी ऊर्जा चालक के परमाणुओं को स्थानान्तरित करते हैं। इससे चालक का ताप बढ़ जाता है।

    चालक के ताप के बढ़ने की इस घटना को विद्युत धारा का ‘ऊष्मीय प्रभाव’ कहते हैं।

    विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग विभिन्न विद्युत ताप उपकरणों जैसे बिजली के बल्ब, बिजली के लोहे, कमरे के हीटर, गीजर, बिजली के फ्यूज आदि में किया जाता है।

  • विद्युत-लेपन, विधुत – मुद्रण और विधुत परिष्करण क्या है ?

    विद्युत-लेपन, विधुत – मुद्रण और विधुत परिष्करण क्या है ?

    What is Electroplating, Electrotyping and Electro-refining ?

    विद्युत-लेपन (Electroplating)

    एक धातु पर दूसरी धातु की सतह चढ़ायी जाने की क्रिया को विद्युत-लेपन कहते हैं। बाजारों में बिकने वाली सस्ती धातुओं के आभूषणों पर चांदी या सोने की पर्त चढ़ा कर उन्हें मूल्यवान बनाया जाता है।

    उदाहरणार्थ, जैसे ताबे पर चादी की तह चढ़ाने के लिए सिल्वर नाइट्रेट (AgNO,) का जलीय विलयन लेकर इसमें तांबे की प्लेट का कैथोड व चांदी की प्लेट का ऐनोड लिया जाता है। जलीय विलयन में सिल्वर नाइट्रेट, सिल्वर (Ag’) व नाइट्रेट (NO.) आयनों में टूट जाता है। जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो सिल्वर आयन तांबे की प्लेट पर आकर जमा होने लगते हैं जिससे इस पर चांदी की पतली परत चढ़ जाती है। साधारणतया जिस धात पर लेपन करना होता है उसे कैथोड तथा जिस धातु का लेपन करना होता है, उसे ऐनोड बनाया जाता है।

    विद्युत-मुद्रण (Electrotyping)

    विद्युत-मुद्रण में विद्युत अपघटन के द्वारा मुद्रण के लिए ब्लॉक बनाए जाते है l

    धातुओं का विद्युत परिष्करण (Electro-refining of Metals)

    अशुद्ध या मिश्रित धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन के द्वारा किया जाता है। इस विधि में मिश्रित धातु का ऐनोड व उसी का कैथोड लिया जाता है। इन दोनों को धातु के किसी लवण के जलीय विलयन में डालकर वोल्टामीटर बनाया जाता है और विद्युत अपघटन कराया जाता है। ऐनोड से मिश्रित धातु विलयन में घुलती है तथा शुद्ध धातु कैथोड पर एकत्रित होती जाती है।

  • विद्युत अपघट्य (Electrolyte) क्या है ?

    विद्युत अपघट्य (Electrolyte) क्या है ?

    What is Electrolyte ?

    किसी लवण के जलीय विलयन (Solution) को जिसमें से विद्युत धारा गुजर सकती है, ‘विद्युतअपघट्य’ (Electrolyte) कहते हैं।

    जब किसी लवण के जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो विलयन का धनात्मक व ऋणात्मक आयनों में अपघटन (Decomposition) हो जाता है। इस घटना को विद्युत धारा का ‘रासायनिक प्रभाव’ कहते हैं।

    धनायन (Cation) और ऋणायन (Anion)

    जब किसी विद्युत अपघट्य लवण का जलीय विलयन बनाते हैं, तो लवण दो प्रकार के आयनों में टूट जाता है। इन आयनों पर विपरीत प्रकार के आवेश होते हैं। जिन आयनों पर धन-आवेश होता है, उन्हें ‘धनायन’ (Cation) कहते हैं तथा ऋणावेश वाले आयनों को ‘ऋणायन’ (Anion) कहते हैं।

    जिस उपकरण में लवणों (Salts) के जलीय विलयनों का विद्युत अपघटन होता है उसे वोल्टामीटर’ (Voltameter) कहते हैं।

    ऐनोड और कैथोड

    वोल्टामीटर के धन इलेक्ट्रोड को ऐनोड व ऋण इलेक्ट्रोड को ‘कैथोड’ कहते हैं। जब आयन युक्त विलयन (विद्युत-अपघटय) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है,

    तो धनायन कैथोड की ओर एवं ऋणायन ऐनोड की ओर चलने लगते हैं और उन पर जाकर जमा हो जाते हैं।

  • विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) क्या है ?

    विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) क्या है ?

    What is Electromagnetic Induction ?

    चुम्बकीय फ्लक्स

    किसी चुम्बकीय क्षेत्र में जहां तीव्रता अधिक होती है वहां पर चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या (प्रति इकाई क्षेत्रफल में) भी अधिक होती है। चुम्बकीय क्षेत्र में रखी हुई किसी सतह के लम्बवत् गुजरने वाली कुल चुम्बकीय रेखाओं की संख्या को उस सतह का ‘चुम्बकीय फ्लक्स‘ कहते हैं।

    विद्युत धारा (Induced current)

    यदि किसी बन्द परिपथ में होकर गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन कर दिया जाए तो परिपथ में विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है जिसे प्रेरित विद्युत धारा (Induced current) कहते हैं।

    चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन से विद्युत धारा उत्पन्न होती है। अत: विद्युत धारा उत्पन्न होने की इस घटना को ‘विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण’ कहते हैं।

    चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तन से उत्पन्न विद्युत वाहक बल (e.m.f) को प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced e.m.) कहा जाता है। परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा का अस्तित्व तब तक रहता है जब तक फ्लक्स परिवर्तन होता है।

  • विद्युत शक्ति (Power) क्या है ?

    विद्युत शक्ति (Power) क्या है ?

    What is Power ?

    विद्युत परिपथ में ऊर्जा के क्षय होने की दर को ‘शक्ति’ कहते हैं। इसका SI मात्रक वाट (W) होता है।

    1 किलोवाट-घण्टा मात्रक अथवा 1 यूनिट, विद्युत ऊर्जा की वह मात्रा है जो कि किसी परिपथ में व्यय होती है जबकि परिपथ में 1,000 वोल्ट विभवान्तर पर 1 ऐम्पियर की धारा 1 घण्टे तक प्रवाहित की जाए, अथवा 100 वोल्ट विभवान्तर पर 10 ऐम्पियर की धारा 1 घण्टे तक प्रवाहित की जाए।

  • विधुत (Electricity) से जुडी परिभाषाये और अनुप्रयोग

    विधुत (Electricity) से जुडी परिभाषाये और अनुप्रयोग

    Definitions and applications related to electricity

    परिभाषाये

    प्रतिरोधों का श्रेणीक्रम समायोजन (Series Combination of Resistances)

    यदि प्रतिरोधों को एक-दूसरे से इस प्रकार जोड़ा जाए कि उनमें समान धारा प्रवाहित हो तथा भिन्न-भिन्न प्रतिरोधों के बीच भिन्न-भिन्न विभवान्तर हो तो यह प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में समायोजन’ कहलाता है। दिए हुए निश्चित प्रतिरोधों से अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।

    प्रतिरोधों का समानान्तर क्रम समायोजन (Parallel Combination of Resistances)

    यदि प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाए कि प्रत्येक प्रतिरोध पर विभवान्तर समान रहे (परन्तु उनमें धाराएं असमान भी हो सकती हैं।) तो यह प्रतिरोधों का समान्तर क्रम में समायोजन कहलाता है। दिए हुए निश्चित प्रतिरोधों से न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु इस समायोजन का प्रयोग किया जाता है।

    लॉरेन्ज बल (Lorentz Force)

    जब किसी चुम्बकीय क्षेत्र में कोई आवेशित कण गति करता है, तो उस पर एक बल आरोपित होता है जिसे लॉरेन्ज बल कहते हैं। यह बल कण के आवेश, उसकी चाल तथा चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है।

    चुम्बकीय क्षेत्र का मात्रक: 1 टेसला (T) = 1 न्यूटन/ऐम्पियर मीटर) = वेबर/मीटर2    

    धारामापी (Galvanometer)

    विद्युत परिपथ में विद्युत धारा की उपस्थिति बताने वाला यह एक सुग्राही यन्त्र है। इस यन्त्र की सहायता से 10-6 ऐम्पियर तक की विद्युत धारा को मापा जा सकता है।

    अमीटर (Ammeter)

    किसी शंट युक्त धारामापी को ‘अमीटर’ कहते हैं। इसमें एक पैमाना होता है। इसकी सहायता से धारा का मान ऐम्पियर में ज्ञात किया जाता है। एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है। अमीटर । को सदैव विद्युत परिपथ के श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।

    शंट

    शंट एक अत्यन्त कम प्रतिरोध वाला तार होता है। जिसे धारामापी के समान्तर क्रम में लगाकर अमीटर बनाया जाता है। शंट उच्च धाराओं से धारामापी की रक्षा करता है क्योंकि यह मुख्य धारा का अधिकांश भाग अपने अन्दर होकर प्रवाहित कर देता है। शंट का प्रतिरोध कम होने से शंटयुक्त धारामापी का कुल प्रतिरोध भी बहुत कम हो जाता है।

    वोल्टमीटर (Voltmeter)

    धारामापी के श्रेणीक्रम में एक उच्च प्रतिरोध लगाकर वोल्टमीटर बनाया जाता है। इसके पैमाने पर परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर पढ़ने के लिए वोल्ट में अंशांकन कर दिया जाता है। वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। वास्तव में, एक आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनन्त होता है। इसको परिपथ के उन दो बिन्दुओं के बीच समान्तर क्रम में जोड़ते हैं जिनके बीच विभवान्तर ज्ञात करना होता है।

    महत्वपूर्ण बातें

    घर के विद्युत परिपथ में बिजली के बल्ब पार्श्वबद्ध संयोजित रहते है क्योंकि श्रेणीबद्ध होने पर एक बल्ब के फिलामेण्ट के टूटने पर सभी बल्बों के धारा का प्रवाह रुक जाएगा।

    शुद्ध धातु के तार का प्रतिरोध ताप के साथ बढ़ता है।

  • ओम का नियम (Ohm’s Law) क्या है ?

    ओम का नियम (Ohm’s Law) क्या है ?

    What is Ohm’s Law ?

    किसी चालक में प्रवाहित विद्युत धारा का मान उसके सिरों पर लगे हुए विभवान्तर के अनुक्रमानुपाती होता है। (जबकि चालक की विमाएं तथा ताप स्थिर रहें)। इस कथन को ओम का नियम (Ohm’s Law) कहते हैं।

    विभवान्तर को वोल्ट में तथा धारा को ऐम्पियर में व्यक्त करें, तो प्रतिरोध का मान वोल्ट/ऐम्पियर में होगा। वोल्ट/ऐम्पियर को ‘ओम’ (Ohm) कहते हैं।

    जो चालक ओम के नियम का पालन करते हैं उन्हें ओमीय प्रतिरोध (Ohmic resistor) तथा उनके प्रतिरोधक को ओमीय प्रतिरोध कहते हैं, जैसे—मैंगनिन का तार।

    जो चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते, उन्हें अन ओमीय प्रतिरोधक तथा उनके प्रतिरोध को अनओमीय प्रतिरोध (Non-ohmic resistance) कहते हैं, जैसे ट्रायोड वाल्व का प्रतिरोध।

    पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध

    • किसी चालक पदार्थ के एक मीटर भुजा वाले घन के आमने-सामने के फलकों के बीच विद्युत प्रतिरोध को उस पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध (Specific resistance) कहते हैं। इसका मात्रक ओम मीटर होता है। एक ही पदार्थ के बने हुए मोटे तार का प्रतिरोध कम तथा पतले तार का प्रतिरोध अधिक होता है परन्तु दोनों का विशिष्ट प्रतिरोध समान होता है क्योंकि यह केवल पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है। विशिष्ट प्रतिरोध को आजकल ‘प्रतिरोधकता’ (Resistivity) कहा जाता है।

  • विद्युत सेल (Power Cell) क्या है ?

    विद्युत सेल (Power Cell) क्या है ?

    What is Power Cell ?

    विद्युत सेल परिपथ में दो बिन्दुओं के बीच आवश्यक विभवांतर बनाकर विद्युतधारा के प्रवाह को लगातार बनाए रखने वाली युक्ति है।

    विद्युत सेल में रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

    सेल के प्रकार

    सेल दो प्रकार के होते हैं प्राथमिक (Primary) व द्वितीयक (Secondary)।

    टार्च, रेडियो, आदि में प्रयुक्त होने वाले शुष्क सेल प्राथमिक सेल होते हैं।

    कार की बैटरी का निर्माण लैड सेल से किया जाता है जो कि द्वितीयक सेल है। इन्हें ‘स्टोरेज सेल’ या ‘एक्यूमुलेटर‘ भी कहते हैं। इनका आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम होता है, अतः इनसे उच्च धारा प्राप्त की जा सकती है। इनका लाभ यह है, कि इनको पुनः आवेशित (Recharge) किया जा सकता है।

    आपातकालीन (Emergency) लाइट में भी द्वितीयक सेलों से निर्मित क्षारीय बैटरी का प्रयोग किया जाता है जो मेन्स सप्लाई के बन्द हो जाने पर स्वत: प्रकाश देने लगती है और सप्लाई के आ जाने पर बन्द हो जाती है और पुन: आवेशित होने लगती है।

    सेल का विद्युत वाहक बल (e.m.f.)

    1 कूलॉम्ब आवेश को पूरे विद्युत परिपथ में एक पूर्ण चक्र लगाने हेतु सेल द्वारा किए गए कार्य को सेल का वि.वा.ब. (e.m.f) कहते हैं। वि.वा.ब. का मात्रक वोल्ट होता है।

  • समाकलित परिपथ (Integrated Circuits) क्या है ?

    समाकलित परिपथ (Integrated Circuits) क्या है ?

    What is Integrated Circuits ?

    इसे संक्षेप में IC कहते हैं। साधारणत: IC अर्द्धचालक युक्तियों (Semiconductor devices) की एक ऐसी व्यवस्था होती है जो विशेष प्रकार का कार्य कर सकती हैं या कई कार्य कर सकती है,

    जैसे स्विच का कार्य, टाइमर का कार्य, आदि।

    इसमें प्राय: एक ही क्रिस्टल चिप होती है। जिसका आकार 1.5 मिमी. के लगभग होता है। इसमें विभिन्न प्रकार के ऐक्टिव तथा पैसिव परिपथ तथा उनके विभिन्न संयोग (Combinations) बने होते हैं।

  • विद्युत विभव (Voltage) और विभवान्तर (Potential Difference) क्या है ?

    विद्युत विभव (Voltage) और विभवान्तर (Potential Difference) क्या है ?

    What is Electricity Voltage and Potential Difference ?

    विभव (Voltage)

     किसी धनात्मक परीक्षण आवेश को अनन्त से विद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में किए गए कार्य एवं परीक्षण आवेश के मान की निष्पत्ति (Ration) को उस बिन्दु का विद्युत विभव (Electric potential) कहा जाता है अर्थात् विद्युत विभव SI मात्रक वोल्ट होता है तथा विभव एक अदिश राशि है

    यदि 1 कूलॉम्ब धनात्मक आवेश को अनन्त से विद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में 1 जूल कार्य करना पड़े, तो उस बिन्दु का विद्युत विभव 1 वोल्ट (Volt) कहलाता है।

    विभवान्तर (Potential Difference)

    एक कूलॉम्ब धनात्मक आवेश को विद्युत क्षेत्र में एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन बिन्दुओं के मध्य विभवान्तर (Potential difference) कहते हैं। विभवान्तर एक अदिश राशि है।

    विभव तथा विभवान्तर दोनों के मात्रक एक ही अर्थात् वोल्ट होते हैं।

    विद्युत सेल परिपथ में दो बिन्दुओं के बीच आवश्यक विभवांतर बनाकर विद्युतधारा के प्रवाह को लगातार बनाए रखने वाली युक्ति है।