किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को उस वस्तु का संवेग कहते हैं।
संवेग = द्रव्यमान (Mass) x वेग (Velocity)
संवेग एक सदिश राशि है जिसको अंग्रेंजी के ‘P’ अक्षर द्वारा प्रदर्शित किया जाता है जिसकी दिशा वही होती है जो वेग की होती है।
संवेग गति की मात्रा को संदर्भित करता है । जैसे किसी खेल में कोई टीम जो आगे बढ़ रही है तो हम कहते है कि टीम momentum (गति) में है।
इसका मात्रक सी.जी.एस. पद्धति में ‘ग्राम-सेमी/सेकण्ड’ या ‘डाइन-सेकण्ड’ तथा एम.के.एस. पद्धति में ‘किग्रा-मीटर/सेकण्ड’ या ‘डाइन-सेकण्ड’ होता है
यदि दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान समान हैं, और जिनमें से एक वस्तु अधिक वेग से चल रही है, तथा दूसरी वस्तु कम वेग से चल रही है, तो अधिक वेग से चलने वाली वस्तु को रोकने में अधिक बल लगाना पड़ेगा। तथा कम वेग से चल रही वस्तु को रोकने में कम बल लगाना पड़ेगा।
महान अंग्रेज वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन (1642-1727) ने गति के अध्ययन के आधार पर गति के तीन नियमों को 1679 ई. में प्रतिपादित किया जो यान्त्रिकी (Mechanics) के आधारी नियम हैं।
प्रथम नियम (First Law)
इस नियम के अनुसार, ‘यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है, तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी और यदि यह एकसमान चाल से सीधी रेखा में चल रही है, तो वैसे ही चलती रहेगी. जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल (Force) लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन न किया जाए।’ इसे ‘गैलीलियो का नियम’ भी कहते हैं।
न्यूटन के प्रथम नियम को ‘जड़त्व का नियम (Law of Inertia) भी कहते हैl
जड़त्व (Inertia)
प्रत्येक वस्तु में अपनी विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था बनाए रखने की प्रवृत्ति पाई जाती है। वस्तु के इस प्रकृति को जड़त्व कहते हैं। जड़त्व के कारण वस्तु अपने वेग में परिवर्तन होने से रोकता है।
जड़त्व दो प्रकार का होता है:
1. विराम का जड़त्व (Inertia of Rest): यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है, तो वह सदैव विराम में ही रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल लगाकर उसी विराम की अवस्था को बदल नहीं दिया जाता ।
2. गति का जड़त्व (Inertia of Motion): यदि कोई वस्तु एकसमान चाल से सीधी रेखा में चल रही है, तो वह वैसे ही चलती रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल लगाकर उसकी गति की अवस्था को बदल नहीं दिया जाता। इस प्रकार, बल वह बाह्य कारक है जिसके द्वारा किसी वस्तु की विराम अथवा गति की अवस्था में परिवर्तन किया जाता है। अत: प्रथम नियम हमें बल की एक परिभाषा प्रदान करता है।
जड़त्व के कुछ उदाहरण (Some Important Examples of Inertia):
(i) चलती हुई मोटरकार के अचानक रुकने पर उसमें बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं मोटरकार के रुकने पर उसका फर्श तथा उस पर टिके यात्रियों के पैर तुरन्त ठहर जाते हैं परन्तु शरीर का शेष भाग जड़त्व के कारण अभी गतिशील रहता है इसलिए यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।
(ii) चलती हुई गाड़ी पर चढ़ने वाले यात्री के पैर गाड़ी पर चढ़ते ही गतिशील हो जाते हैं परन्तु शरीर अभी विराम अवस्था में ही रहता है जिसके कारण यात्री पीछे की ओर गिर पड़ता है। अत: चलती गाड़ी पर चढ़ने से पहले यात्री को कुछ दूर गाड़ी की दिशा में दौड़ना चाहिए।
न्यूटन का गति का दूसरा नियम (Newton’s Second Law of Motion)
किसी वस्तु के संवेग-परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा संवेग-परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में ही होता है। यदि वस्तु पर बाह्य बल न लगाया जाए तो वस्तु में त्वरण भी उत्पन्न नहीं होगा। त्वरण के शून्य होने का अर्थ है, कि वस्तु या तो विराम अवस्था में ही रहेगी या ‘नियत’ वेग से चलती रहेगी। इस प्रकार, न्यूटन का पहला नियम (गैलीलियो का नियम) दूसरे नियम का ही एक अंग है।
न्यूटन का गति का तृतीय नियम (Newton’s Third Law of Motion)
इस नियम के अनुसार, ‘प्रत्येक क्रिया के बराबर, परन्तु विपरीत दिशा में, प्रतिक्रिया होती है।’न्यूटन के तृतीय नियम को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है क्रिया-प्रतिक्रिया बराबर तथा विपरीत दिशा में होता है। अत: न्यूटन के तृतीय नियम को ‘क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम’ भी कहा जाता है। इस नियम के सम्बन्ध में दो बातें महत्त्वपूर्ण हैं -एक तो यह कि हम नहीं कह सकते कि कौन बल क्रिया है और कौन प्रतिक्रिया। दूसरे क्रिया तथा प्रतिक्रिया बल सदैव दो भिन्न-भिन्न वस्तुओं पर कार्य करते हैं, एक पर नहीं। इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त (Cancel) नहीं कर सकते हैं।
न्यूटन का गति का तृतीय नियम के उदाहरण
सूर्य पृथ्वी को खींचता है, पृथ्वी भी सूर्य को अपनी ओर उसी बल से खींचती है। पृथ्वी चन्द्रमा को अपनी ओर खींचती है, चन्द्रमा भी पृथ्वी को अपनी ओर उसी बल से खींचता है। चन्द्रमा के इस खिंचाव के कारण ही समुद्र में ज्वार भाटे (Tides) आते हैं।
रॉकेट में किसी ज्वलनशील पदार्थ को जलाकर गैसें उत्पन्न की जाती हैं, जो नीचे की ओर अत्यन्त तीव्र वेग से एक जेट के रूप में निकलती है। ये गैसें रॉकेट पर ऊपर की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती हैं जिससे रॉकेट ऊपर उठ जाता है। गैस के जेट का वेग जितना अधिक होता है रॉकेट भी ऊपर की ओर उतने ही अधिक वेग से उठता है।
नीचे दिए गये article में हम जानेगे कि गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) क्या होता है ? गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) की परिभाषा क्या है ? उसका मात्रक और गुण क्या है ? गुरुत्वाकर्षण बल से जुड़े नियम और विशेषताएं क्या है ?
जिस बल के कारण दो वस्तुएं एक-दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करती है, उसे ‘गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force ) किन्ही दो वस्तु, पदार्थ अथवा कणों के बीच उपस्थित एक आकर्षण बल है l गुरुत्वाकर्षण बल न सिर्फ पृथ्वी और वस्तुओं के मध्य का आकर्षण बल है बल्कि यह ब्रह्माण्ड में मौजूद हर पदार्थ या वस्तु के बीच मौजूद है। गुरुत्वाकर्षण को उस त्वरण (acceleration) से मापा जाता है जो मुक्त रूप से गिरने वाली वस्तुओं को देता है।
हर वो वस्तु जिसका द्रव्यमान ( mass) होता है उसका गुरुत्वाकर्षण भी होता है। सबसे महत्वपुर्ण बात यह है कि अगर किसी वस्तु का द्रव्यमान अधिक है तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होगा।
वस्तुएं एक-दूसरे से किसी प्रकार जुड़े बिना भी आपस में गुरुत्वाकर्षण बल लगाती हैं। किसी वस्तु पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को प्रायः उस वस्तु पर पृथ्वी का गुरुत्व बल कहा जाता है। उदाहरण के लिए पृथ्वी सूर्य के चारों ओर और चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही घूमता हैं ।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम
सर आइजैक न्यूटन (25 दिसम्बर 1642 – 20 मार्च 1726/27]) एक महान गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी और सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिक थे ।
उनकी पुस्तक फिलॉसॉफी नेचुरलिस प्रिंसिपिया मैथमैटिका (Philosophiæ Naturalis Principia Mathematica – प्राकृतिक दर्शन के गणितीय सिद्धांत), पहली बार 1687 में प्रकाशित हुई जिसमे न्यूटन ने गति और सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के नियमों को बताया ।
न्यूटन ने चंद्रमा की गति और पृथ्वी पर स्वतंत्र रूप से गिरने वाले पिंड की गति के बीच संबंध की खोज की।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम पिंडो के मध्य लगने वाले आकर्षण बल का मान ज्ञात करने के लिए काम में लिया जाता है l
यदि दो पिंडो का द्रव्यमान m1 तथा m2 हो और इन दोनों पिंडो के मध्य की दूरी r हो तो इन दोनों पिंडो के मध्य लगने वाले इस आकर्षण बल (गुरुत्वाकर्षण बल) का मान निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम
ग्रहों और चन्द्रमा की गतियों के अपने अध्ययन के दौरान , न्यूटन ने निष्कर्ष निकाला कि गुरुत्वीय आकर्षण न केवल पृथ्वी की ओर गिरते सेव की गति और पृथ्वी के चारो ओर घूर्णन करते चन्द्रमा की गति के लिए उत्तरदायी है बल्कि “ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु प्रत्येक अन्य वस्तु को आकर्षित करती है ” के लिए भी उत्तरदायी है।
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार ब्रह्माण्ड में पदार्थ का प्रत्येक कण बल द्वारा प्रत्येक अन्य कण को आकर्षित करता है जो कि कणों के द्रव्यमानों के गुणन के समानुपाती होता है और इनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
भाष्कराचार्य का गुरुत्वाकर्षण का नियम
गुरुत्वाकर्षण: “पिताजी, यह पृथ्वी, जिस पर हम निवास करते हैं, किस पर टिकी हुई है?” लीलावती ने शताब्दियों पूर्व यह प्रश्न अपने पिता भास्कराचार्य से पूछा था। इसके उत्तर में भास्कराचार्य ने कहा, “बाले लीलावती !, कुछ लोग जो यह कहते हैं कि यह पृथ्वी शेषनाग, कछुआ या हाथी या अन्य किसी वस्तु पर आधारित है तो वे गलत कहते हैं।
यदि यह मान भी लिया जाए कि यह किसी वस्तु पर टिकी हुई है तो भी प्रश्न बना रहता है कि वह वस्तु किस पर टिकी हुई है और इस प्रकार कारण का कारण और फिर उसका कारण… यह क्रम चलता रहा, तो न्याय शास्त्र में इसे अनवस्था दोष कहते हैं।
तब भास्कराचार्य ने कहा, क्यों हम यह नहीं मान सकते कि पृथ्वी किसी भी वस्तु पर आधारित नहीं है। यदि हम यह कहें कि पृथ्वी अपने ही बल से टिकी है और इसे गुरुत्वाकर्षण शक्ति कह दें तो क्या दोष है?
पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है। पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारण वह जमीन पर गिरते हैं। पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियाँ संतुलन बनाए रखती हैं।
गुरुत्वाकर्षण बल के गुण या विशेषतायें (properties of gravitational force)
यह बल प्रकृति में पाए जाने वाले सभी बलों से दुर्बल होता है, दो इलेक्ट्रान के मध्य पाए जाने वाले विद्युत बल का मान गुरुत्वाकर्षण बल से लगभग 1043 गुना होता है।
यह सार्वत्रिक (Universal) आकर्षण का बल होता है जो ब्रह्माण्ड में उपस्थित प्रत्येक दो पिंडो के मध्य पाया जाता है।
यह बल हमेशा आकर्षण प्रकृति का होता है जो बहुत कम दूरी पर स्थित पिंडो के बीच भी कार्य करता है और हजारो किलोमीटर दूर स्थित पिंडो के बीच भी कार्य करता है।
इसका मान दोनों पिंडो के द्रव्यमानो के गुणनफल के समानुपाती व दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिण्डो की उपस्थिति या अनुपस्थिति से अप्रभावित रहता है।
यह बल दोनों पिंडो के मध्य उपस्थित माध्यम पर निर्भर नहीं करता है।
गुरुत्वाकर्षण बलों पर अध्यारोपण का सिद्धांत लागू होता है अर्थात किसी निकाय में उपस्थित सभी बलों का योग , अलग अलग बलों के योग के बराबर होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल दोनों पिंडो को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है
इस बल के द्वारा किया गया कार्य का मान पथ या मार्ग पर निर्भर नहीं करता है साथ ही एक पूर्ण चक्कर में किया गया कार्य का मान शून्य होता है अत: गुरुत्वाकर्षण बल संरक्षी बल होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल और ग्रहों से जुडी महत्वपुर्ण बाते
पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को एक बल द्वारा आकर्षित करती है , जिसे वस्तु का भार कहा जाता है। वस्तु समान परिमाण के बल द्वारा पृथ्वी को भी आकर्षित करती है लेकिन पृथ्वी वस्तु की ओर गति नहीं करती है। क्यों कि पृथ्वी का त्वरण इसके उच्च द्रव्यमान (आपके द्रव्यमान का 1023 गुना ) के कारण नगण्य होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही चन्द्रमा, पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है इसके लिय चन्द्रमा को आवश्यक अभिकेंद्रिय बल का मान दोनों में उपस्थित आकर्षण बल द्वारा प्राप्त होता है।
ग्रहों या उपग्रहों को उनकी कक्षा में चक्कर लगाने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल, सूर्य के मध्य कार्यरत गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा प्राप्त होता है।
तारों के टूटने तथा बनने और आकाश गंगा के निर्माण में भी गुरुत्वाकर्षण बल का योगदान है।
गुरुत्वाकर्षण के कारण चन्द्रमा , ग्रह एवं तारे लगभग गोलीय होते है। चूँकि वस्तु के सभी कण एक दुसरे को आकर्षित करते है इसलिए कण इनके मध्य की दूरी को न्यूनतम करने के लिए गति करते है। जिसके परिणाम स्वरूप , वस्तु गोलीय आकार प्राप्त करती है। यह प्रभाव निम्न द्रव्यमान की वस्तु में अत्यधिक समानित किया जाता है। चूँकि गुरुत्वाकर्षण खिंचाव कम होता है इसलिए खगोलीय वस्तुएं जैसे क्षुदग्रह (निम्न द्रव्यमान) गोलीय नहीं होते है।
आर्टिकल में जानेगे [बल क्या होता है ? बल के प्रकार क्या होते है ? बल का सूत्र और मात्रक क्या है ? बल के प्रभाव क्या है ? ]
बल वह बाह्य कारक (External agent) है जो किसी वस्तु की विरामावस्था (State of rest) या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था (State of uniform motion in a straight line) को परिवर्तित कर सकता है।
उदाहरण के लिए, खेल के मैदान में स्थिर रखी हुई फुटबाल को पैर से किक लगाकर (अर्थात् बल लगाकर) गतिशील बनाया जा सकता है। दूर से तेजी से आती हुई फुटबाल को हाथ से पकड़कर (अर्थात् बल लगाकर) रोका जा सकता है जिससे वह गति शून्य हो जाए ।
भौतिकी में, बल एक सदिश राशि है जिससे किसी पिण्ड का वेग बदल सकता है। न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार, बल संवेग परिवर्तन की दर के अनुपाती है।
बल से त्रिविम पिण्ड का विरूपण या घूर्णन भी हो सकता है, या दाब में बदलाव हो सकता है। जब बल से कोणीय वेग में बदलाव होता है, उसे बल आघूर्ण कहा जाता है।
प्राचीन काल से लोग बल का अध्ययन कर रहे हैं। आर्किमिडीज़ और अरस्तू की कुछ धारणाएँ थीं जो न्यूटन ने सत्रहवी सदी में ग़लत साबित की। बीसवी सदी में अल्बर्ट आइंस्टीन ने उनके सापेक्षता सिद्धांत द्वारा बल की आधुनिक अवधारणा दी।
बल का मात्रक (Symbol of Force)
बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है। बल को अन्य मात्रक भी है जिसको निम्न प्रकार से परिभाषित कर सकते है :
बल का सूत्र
F = ma
बल को द्रव्यमान (m) और त्वरण (a) के गुणन द्वारा निकाला जा सकता है।
बल के सूत्र के समीकरण
इसे न्यूटन (N) या Kgm/s2 में निकाला जाता है।
त्वरण “a” को निकालने का सूत्र है, a = v/t
जहाँ v = वेग, t = लिया गया समय
अतः बल को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया जा सकता है; F = mv/t
जड़ता सूत्र को p = mv के रूप में लिखा जाता है जिसे संवेग के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है।
बल का प्रभाव
किसी वस्तु पर जब बल (Force) लगाया जाता है, तो वस्तु के आकार, दिशा और गति में परिवर्तन हो सकता है । बल वस्तु की गति में परिवर्तन करता है । बल वस्तु की दिशा बदल देता है l अगर वस्तु विराम अवस्था से गति में बदल सकता है l यह वस्तु की गति को बढ़ा या घटा या बदल सकता है उसे रोक सकता है ।
बल के प्रकार
बल कई प्रकार के होते है जो वस्तु पर कार्य करते है l कुछ प्रमुख बल के प्रकार निम्नलिखित हैं:
गुरुत्वाकर्षण बल
यांत्रिक बल
घर्षण बल
विद्युत बल
चुंबकीय बल
नाभिकीय बल
गुरुत्वाकर्षण बल
गुरुत्वाकर्षण बल दो वस्तुओं को द्रव्यमान से आकर्षित करता है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल हमें जमीन की ओर खींचता है। इसे न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
यांत्रिक बल
यांत्रिक बल तब होता है जब दो वस्तुओं के बीच सीधा संपर्क होता है और जहां एक वस्तु बल लगा रही है जबकि दूसरी वस्तु विराम की स्थिति में या गति की अवस्था में होती है।
घर्षण बल
घर्षण बल, दो सतहों के बीच लगने वाला विरोधी बल है जिसका मुख्य उद्देश्य किसी एक ही दिशा या विपरीत दिशा में जाने वाली वस्तु के लिए प्रतिरोध पैदा करना है। जब हम साइकिल चलाते हैं तो एक घर्षण बल कार्य करता हैं।
चुंबकीय बल
चुंबकीय बल, वह बल है जो विद्युत आवेशित कणों के बीच उनकी गति के कारण उत्पन्न होता है। दो चुम्बकीय धुर्वों के बीच चुंबकीय बल होता है । यह वस्तु के उन्मुखीकरण के आधार पर प्रकृति में आकर्षक या प्रतिकारक है।
विद्युतचुम्बकीय बल
विद्युत् चुम्बकीय बल को कूलम्ब बल या कूलम्ब इंटरैक्शन के रूप में भी जाना जाता है। यह दो विद्युत आवेशित वस्तुओं के बीच का बल है। इस बल के अनुसार, जैसे चार्ज, एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, वैसे ही विपरीत प्रतिकार करते हैं। लाइटनिंग विद्युत् चुम्बकीय बल(इलेक्ट्रोस्टैटिक फोर्स) का एक उदाहरण है।
नाभिकीय बल
परमाणु के नाभिक में स्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों के बीच लगने वाला बल नाभिकीय बल (nuclear force) या न्युक्लिऑन-न्युक्लिऑन अन्तःक्रिया ( nucleon–nucleon interaction या residual strong force) कहलाता है।