Category: फ़िजिक्स

  • कोणीय वेग और कोणीय संवेग क्या होते है ?

    What is Angular Velocity and Angular Momentum ?

    कोणीय वेग (Angular Velocity)

    वृत्ताकार मार्ग पर गतिशील कण को वृत्त के केन्द्र से मिलाने वाली रेखा, जैसे AO एक सेकण्ड में जितने कोण से घूम जाती है, उसे कण का कोणीय वेग कहते हैं और इसे प्रायः ग्रीक वर्णमाला के अक्षर ओमेगा (ω) से प्रकट किया जाता है।

    कोणीय संवेग (Angular Momentum)

    घूर्णन गति करने वाले किसी पिण्ड के कोणीय वेग (0) जड़त्व (1) के गुणनफल को ‘कोणीय संवेग’ कहते हैं, अर्थात्

    कोणीय संवेग L = कोणीय वेग x जड़त्व आघूर्ण =ωl

    यदि किसी अक्ष के परितः घूर्णन करने वाले पिण्ड पर कोई बाह्य बल-आघूर्ण (Torque) कार्य न करे तो उसका कोणीय संवेग नियत रहता है।

    अत: यदि घर्णन करते पिण्ड का जडत्व आपूर्ण घट जाए तो उसका कोणीय वेग बढ़ जाएगा। अतः जब कोई तैराक नदी में कूदता है, तो वह अपनी शरीर को सिकोड़ लेता है जिससे उसका जड़त्व आघूर्ण कम हो जाता है तथा कोणीय वेग बढ़ जाता है। इससे वह वायु में ही कलैया (Loop) लेता हुआ पानी में गिरता है।

    सर्कस में भी एक झूले से दूसरे झूले पर जाते समय मनुष्य भी इसी कारण चक्कर खाते हुए जाता है।

    इसी कारण स्केटिंग करने वाले भी कभी अपने हाथ फैलाते हैं और कभी हाथों को सिकोड़ लेते हैं। इससे स्केटिंग की दिशा बदलती रहती है।

  • जड़त्व आघूर्ण क्या है ?

    What is Moment of Inertia ?

    जिस प्रकार रैखिक गति में द्रव्यमान (Mass) ही वस्तु के जड़त्व की माप होता है, उसी प्रकार घूर्णन गति में जड़त्व आघूर्ण उसके जड़त्व की माप होता है।

    उपयोग

    बैलगाड़ी, साइकिल रिक्शा, आदि के पहियों का जड़त्व आघूर्ण बढ़ाने के लिए पहियों के रिम भारी व मोटे, किन्तु बीच का भाग पतला या खोखला बनाया जाता है।

    साइकिल के पहियों में तो बीच में केवल ताने (Spokes) ही लगायी जाती है। जड़त्व आघूर्ण अधिक होने के कारण ही, यदि साइकिल चलाते-चलाते पैडल मारना बन्द कर दिया जाए तो भी साइकिल काफी दूरी तक लुढ़कती रहती है। यदि पहिया किसी धातु की सपाट चादर की चकती (Disc) के रूप में बनाया जाए, तो पैडल रोकते ही साइकिल का सन्तुलन बिगड़ जाएगा और वह गिर जाएगी।

  • गुरुत्वीय त्वरण क्या है

    What is Gravitational Acceleration ?

    परिभाषा

    गुरुत्व बल द्वारा किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहा जाता है।

    दुसरे शब्दों में

    न्यूटन के गति के दुसरे नियम के अनुसार जब किसी वस्तु पर बल कार्य करता है तो उसमे त्वरण (a = F/m) उत्पन्न हो जाता है। अत: पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण वस्तु में भी एक त्वरण उत्पन्न हो जाता है इस गुरुत्व बल द्वारा उत्पन्न त्वरण को ही गुरुत्वीय त्वरण कहते है। तथा इसे ‘g’ से प्रदर्शित करते हैं।

    यदि हम किसी वस्तु को किसी ऊंचाई से मुक्त रूप से छोड़ दें तो वह नीचे की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा में गिरने लगती है। वस्तु के गिरने का वेग लगातार एकसमान दर से बढ़ता जाता है अर्थात् इसमें एक नियत त्वरण उत्पन्न हो जाता है। इसका कारण यह है, कि पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केन्द्र की ओर आकर्षित करती है। इसी आकर्षण के कारण मुक्त रूप से गिरने वाली वस्तु में एक नियत त्वरण उत्पन्न होता है और यह सभी वस्तुओं के लिए समान होता है। यही त्वरण ‘गुरुत्वीय त्वरण’ हैं।

    गुरुत्वीय त्वरण का मान 9.8 मीटर/सेकण्ड (अथवा 980 सेमी./सेकण्ड-) या 32.2 फीट सेकण्ड-2 है।

    ध्यान दे कि G को सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते है तथा g को गुरुत्वीय त्वरण कहा जाता है l

    गुरुत्वीय त्वरण की दिशा पृथ्वी के केन्द्र की ओर होती है। अत: जब हम किसी वस्तु को पृथ्वी से ऊपर की ओर फेंकते हैं तो इसमें गुरुत्वीय ‘मंदन’ उत्पन्न होता है जिसके कारण इसका वेग लगातार घटता जाता है तथा कुछ ऊंचाई तक पहुंचने के बाद इसका वेग शून्य हो जाता है। एक क्षण बाद ही वस्तु गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे चलने लगती है और गुरुत्वीय त्वरण के कारण बढ़ते हुए वेग से पृथ्वी पर आ जाती हैl

    गुरुत्वीय त्वरण व भार (Acceleration due to Gravity and Weight)

    किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे पृथ्वी उसे अपनी ओर खींचती है। यदि g बदलता है, तो वस्तु का भार भी बदल जाएगा।

    यदि हम पृथ्वी से ऊपर किसी पर्वत पर जाएं तो g कम हो जाएगा। यदि हम चन्द्रमा पर पहुंचे तो वहां g का मान 1/6 रह जाएगा। अत: चन्द्रमा पर वस्तु का भार भी पृथ्वी की तुलना में 1/6 रह जाता है। यदि हम पृथ्वी पर 2 मीटर ऊंचा उछल सकते हैं, तो चन्द्रमा पर 2 x 6 = 12 मीटर ऊंचा उछल सकेंगे।

    इसी प्रकार यदि हम किसी गहरी खान में पृथ्वी के नीचे जाएं तो भी g का मान कम हो जाएगा। पृथ्वी के केन्द्र पर तो g का मान शून्य हो जाता है, अत: वस्तु का भार भी शून्य हो जाता है।

    भूमध्य रेखा पर g का मान न्यूनतम (पृथ्वी तल के मानों में) तथा ध्रवों पर अधिकतम होता है। ध्रुवों पर और भूमध्य रेखा पर के मानों में अन्तर केवल 3.4 सेमी./ सेकण्ड होता है। ध्रुवों पर पृथ्वी की घूर्णन गति शून्य होती है, अतः वहां पर g अधिक होता है।

    पृथ्वी की घूर्णन गति (अपनी अक्ष पर) के कारण भी वस्तु का भार कम हो जाता है। यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान ना कोणीय चाल से 17 गुनी चाल से घूमने लगे तो भूमध्य रेखा पर वस्तु का भार भी शून्य हो जाएगा।

  • त्वरण (Acceleration) क्या है ?

    What is Acceleration ?

    किसी वस्तु के वेग-परिवर्तन की दर को उस वस्तु का ‘त्वरण‘ कहते हैं।

    त्वरण = वेग में परिवर्तन / समय अंतराल

    अंतिम वेग – प्रारम्भिक वेग / समय

    त्वरण को प्राय: a से प्रदर्शित करते हैं। चूंकि वेग सदिश राशि है। अत: त्वरण भी एक सदिश राशि है तथा इसे वेक्टर द्वारा निरूपित कर सकते हैं।

    यदि वस्तु के वेग में बराबर समयान्तरालों में बराबर परिवर्तन हो रहा है, तो उसका त्वरण ‘एकसमान’ कहलाता है। यदि वस्तु के वेग का परिमाण (अर्थात् वस्तु की चाल) समय के साथ-साथ बढ़ रहा है। वस्तु का त्वरण धनात्मक होता है। यदि वेग का परिमाण घट रहा है, तो त्वरण ऋणात्मक होता है तथा तब इसे ‘मंदन’ (Retardation) कहते हैं।

  • चाल तथा वेग क्या है ?

    What is Speed and Velocity ?

    चाल (Speed) की परिभाषा

    कोई वस्तु इकाई समय (Unit time) में जितनी दूरी तय करती है, उसे उसकी ‘चाल’ कहते हैं।

    चाल = दूरी / समय

    यह एक अदिश राशि है. इसका S.I. मात्रक मी./से. है l

    वेग (Velocity) की परिभाषा

    कोई वस्तु एकांक समय में जितनी विस्थापित होती है, उसे उस वस्तु का ‘वेग’ कहते हैं।

    वेग एक सदिश भौतिक राशि है; जिसके लिए परिमाण और दिशा दोनों आवश्यक हैं।

    यह एक सदिश राशि है। वेग धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है, जबकि चाल सदैव धनात्मक होती है। वेग बताते समय उसकी दिशा भी अवश्य बताई जाती है।

    यदि किसी गतिमान वस्तु के वेग में परिवर्तन हो रहा हो तब उसकी गति ‘त्वरित गति‘ (Accelerated motion) कहलाती है। वेग में यह परिवर्तन वेग के परिमाण (चाल) में. अथवा दिशा में अथवा दोनों में हो सकता है। यदि वस्तु एक सरल रेखा में चल रही है तब उसके वेग के परिमाण (चाल) में ही परिवर्तन होता है।

  • दूरी और विस्थापन क्या है ?

    What is Distance and Displacement ?

    दूरी की परिभाषा

    वस्तु द्वारा किसी समय अन्तराल में तय किए गए मार्ग की सम्पूर्ण लम्बाई (Total length of the path) को चली गई ‘दूरी (distance)’ कहते हैं l

    दूरी एक ‘अदिश राशि’ है, जिसमें केवल परिमाण होता है

    मान लीजिये कोई व्यक्ति उत्तर दिशा में 2 किलोमीटर चलता है फिर पश्चिम दिशा में 2 किलोमीटर तक चला तो उस व्यक्ति ने कुल 2 + 2 = 4 किलोमीटर की दुरी तय की है l

    दूरी को M.K.S. प्रणाली में मात्रक ‘मीटर’ होता है l दूरी को किलोमीटर में भी मापा जा सकता है l

    विस्थापन की परिभाषा

    वस्तु की अन्तिम स्थिति तथा प्रारम्भिक स्थिति के बीच की सीधी दूरी को वस्तु का ‘विस्थापन’ कहते हैं।

    विस्थापन एक ‘सदिश राशि’ है जिसमें परिमाण व दिशा दोनों होते हैं।

    दूरी और विस्थापन दो मात्राएं हैं जो कि एक जैसी प्रतीत होती है लेकिन दोनों का ही अर्थ और परिभाषाएं अलग अलग हैं।
    
    दूरी एक स्केलर मात्रा है जो "गति के दौरान कोई वस्तु को कितनी जमीन को कवर करती है" को दर्शाती है। 
    
    विस्थापन एक वेक्टर मात्रा है जो "ऑब्जेक्ट से कितनी दूर है" को दर्शाता है; यह वस्तु की स्थिति में समग्र परिवर्तन को बताता है।

  • स्थितिज ऊर्जा क्या है ?

    What is Potential Energy ?

    परिभाषा : जब किसी वस्तु में विशेष अवस्था (State) या स्थिति (Position) के कारण कार्य करने की क्षमता आ जाती है तो हम कहते हैं कि वस्तु में स्थितिज ऊर्जा है।

    उदाहरण के लिए, बांध में जल को काफी ऊंचाई पर एकत्रित किया जाता है जिससे उसमें स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। जब इस जल को नीचे टरबाइन पर गिराया जाता है, तो यह ऊर्जा टरबाइन के पहिए को घुमा देती है जिससे विद्युत उत्पन्न होती है। इस प्रकार, बांध की ऊंचाई पर स्थित जल की स्थितिज ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है।

    स्थितिज ऊर्जा के प्रकार (Type of Potential Energy)

    किसी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा कई रूपों में निहित हो सकती है, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं

    गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy)

    एक भारी हथौड़े को ऊंचाई से गिराकर किसी वस्तु को तोड़ा जा सकता है। हथौड़ा में कार्य करने की यह क्षमता अर्थात् ऊर्जा उसकी पृथ्वी-तल से ‘ऊंची’ स्थिति के कारण है। हथौड़े को पृथ्वी के गुरुत्वीय आकर्षण बल के विरुद्ध ऊपर उठाने में जो कार्य किया जाता है वह उसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अत: यह हथौड़े की ‘गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा’ है। हथौड़ा पृथ्वी-तल से जितना अधिक ऊंचा होगा, उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी।

    प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy)

    घड़ी में चाबी भर दी जाती है, तो घड़ी के भीतर की स्प्रिंग दब जाती है अर्थात् वह विकृत (Strained) होकर एक विशेष अवस्था में आ जाती है। यह दबी हुई स्प्रिंग ही धीरे-धीरे खुलकर घड़ी को चलाती रहती है। इस प्रकार यह अपनी ‘विकृत’ (दबी हुई) अवस्था के कारण कार्य करती है, अर्थात् इसमें विकृत अवस्था के कारण स्थितिज ऊर्जा होती है। स्प्रिंग को दबाने में, उसकी प्रत्यास्थता के कारण, जो कार्य किया जाता है वही स्प्रिंग में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। यह स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा’ है।

    स्थिर-विद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrostatic Potential Energy)

    विद्युत आवेश भी एक-दूसरे को आकर्षित अथवा प्रतिकर्षित करते हैं। अत: आवेशों के निकाय (System of charges) में भी स्थितिज ऊर्जा होती है जिसे ‘स्थिर-विद्युत स्थितिज ऊर्जा’ कहते हैं। यदि आवेश विपरीत प्रकार के हैं, जैसे—इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन तो उनके बीच आकर्षण बल होता है। तब उन्हें एक-दूसरे से दूर ले जाने में आर्कषण के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है जिससे निकाय की स्थिर-विद्युत स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है। यदि आवेश समान प्रकार के हैं, जैसे इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अथवा प्रोटॉन-प्रोटॉन तो वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। अब उन्हें एक-दूसरे के समीप लाने में प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है जिससे निकाय की स्थिर-विद्युत स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।

    चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा (Magnetic Potential Energy)

    चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी गतिमान आवेश अथवा धारावाही चालक पर लगने वाले चुम्बकीय बल के कारण उसमें कार्य करने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है। इसे ‘चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा’ कहते हैं।

    रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy)

    विभिन्न प्रकार के ईंधनों में स्थितिज ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा (Chemical energy) के रूप में संचित रहती है, जैसे कोयले, पेट्रोल, मिट्टी के तेल, इत्यादि में। जब इन्हें जलाया जाता है, तो यह रासायनिक ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा और प्रकाश ऊर्जा में बदल जाती है।

  • गतिज ऊर्जा क्या है?

    What is Kinetic Energy ?

    परिभाषा – किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता आ जाती है उसे उस वस्तु की ‘गतिज ऊर्जा’ कहते हैं।

    गोली में ऊर्जा उसकी गति के कारण होती है, अतः वह गतिज ऊर्जा का एक उदाहरण है। बन्दूक से छोड़ी गई गोली, धनुष से छोड़ा गया तीर, गतिमान हथौड़ा, गिरती वर्षा की बूंदें, बहती हवा, आदि भी गतिज ऊर्जा के उदाहरण हैं।

    गतिज ऊर्जा सदैव धनात्मक एवं अदिश राशि होती है। गतिज ऊर्जा को ‘K’ द्वारा दर्शाया जाता है।

    किसी गतिमान वस्तु को रोकने में या विराम अवस्था से वस्तु को वर्तमान वेग प्रदान करने में किए गए कार्य की मात्रा द्वारा वस्तु की गतिज ऊर्जा की गणना की जा सकती है।

    गतिज उर्जा का सूत्र (Kinetic Energy Formula)

    K = 1/2 mv2

    सामान्यता गतिज ऊर्जा का मात्रक जूल है।

    गतिज ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण नियम की पालन करती है अर्थात गतिज और को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है परंतु नष्ट नहीं किया जा सकता है ।

  • यांत्रिक उर्जा क्या होती है ?

    What is Mechanical Energy

    जब कभी कोई वस्तु किसी अन्य वस्तु पर कार्य करती है, तो कार्य करने वाली वस्तु की ऊर्जा खर्च होती है और जिस पर कार्य किया जाता है उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है। इस प्रकार किया गया कार्य स्थान ऊर्जा तथा कार्य द्वारा प्राप्त ऊर्जा ‘यान्त्रिक ऊर्जा’ (Mechanical energy) कहलाती है l

    यान्त्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है—(1) गतिज ऊर्जा एवं (2) स्थितिज ऊर्जा।

    गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

    गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy): किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता आ जाती है उसे उस वस्तु की ‘गतिज ऊर्जा’ कहते हैं।

    बन्दूक से छोड़ी गई गोली, धनुष से छोड़ा गया तीर, गतिमान हथौड़ा, गिरती वर्षा की बूंदें, बहती हवा, आदि गतिज ऊर्जा के उदाहरण हैं।

    स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

    जब किसी वस्तु में विशेष अवस्था (State) या स्थिति (Position) के कारण कार्य करने की क्षमता आ जाती है तो हम कहते हैं कि वस्तु में स्थितिज ऊर्जा है।

    जब किसी वस्तु में विशेष अवस्था (State) या स्थिति (Position) के कारण कार्य करने की क्षमता आ जाती है तो हम कहते हैं कि वस्तु में स्थितिज ऊर्जा है।

    उदाहरण : बांध में जल को काफी ऊंचाई पर एकत्रित किया जाता है जिससे उसमें स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। जब इस जल को नीचे टरबाइन पर गिराया जाता है, तो यह ऊर्जा टरबाइन के पहिए को घुमा देती है जिससे विद्युत उत्पन्न होती है। इस प्रकार, बांध की ऊंचाई पर स्थित जल की स्थितिज ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है।

  • अदिश एवं सदिश राशियां (Scalar & Vector) क्या है ?

    What is Scalar and Vector Quantities ?

    भौतिक राशियां दो प्रकार की होती हैं (1) अदिश तथा (2) सदिश।

    अदिश

    वे भौतिक राशियां, जिनमें केवल परिमाण (magnitude) होता है, दिशा (direction) नही होती, ‘अदिश राशियां’ कहलाती हैं, जैसे द्रव्यमान, तापमान, समय, चाल, दुरी आदि।

    परिमाण का मतलब आकार (size) से होता है जिसको अंको (numbers) से मापा (measure) जा सकता है l जैसे किसी गाड़ी कि चाल २२ मीटर प्रति सेकंड है लेकिन हम उसकी चाल से दिशा का पता नही लगा सकते है इस तरह चाल एक अदिश राशि हुई l

    सदिश

    वे भौतिक राशियां, जिनमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, ‘सदिश राशियां’ कहलाती हैं, जैसे— वेग, बल, त्वरण, आदि।

    सदिश राशि में हमे आकार के साथ दिशा का भी ज्ञान होता है जैसे बल लगाना l किसी भी कार्य कितना बल लगता है और किस दिशा में लगाया जाता है यह हमे मालूम होता है इस तरह बल एक सदिश राशि हुई l

    प्रमुख सदिश राशियां: रेखीय विस्थापन, रेखीय वेग, रेखीय त्वरण, रेखीय संवेग, बल, कोणीय विस्थापन, कोणीय वेग, कोणीय त्वरण, कोणीय संवेग, बल आघूर्ण, चुम्बकीय क्षेत्र प्रेरण. चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता, चुम्बकन तीव्रता, चुम्बकीय आघूर्ण, विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, विद्युत धारा घनत्व, विद्युत ध्रुव आघूर्ण, आदि।