Category: फ़िजिक्स

  • साउंडिंग रॉकेट, लूनर अन्तरिक्षयान और ग्रहीय परीक्षण

    What are Sounding rocket, Lunar spacecraft and Planetary test?

    साउंडिंग रॉकेट

    इनका कार्य यन्त्रों को पृथ्वी के बाह्य वायुमण्डल तथा पृथ्वी के नजदीकी अन्तरिक्ष में ले जाना है। इनमें यन्त्रों द्वारा ताप और दाब के साथ-साथ अन्तरिक्ष के विकिरणों का भी आकलन किया जा सकता है।

    लूनर अन्तरिक्षयान

    इसने चन्द्रमा के बारे में जानकारियां दी। जिससे चन्द्रमा पर अन्तरिक्ष यात्रियों का उतरना सम्भव हो पाया। ।

    ग्रहीय परीक्षण

    इस प्रकार के परीक्षण के लिए जिन उपग्रहों को छोड़ा जाता है वे सूर्य के चारों ओर कक्षा में घूमते रहते हैं। ये बाद में उस ग्रह पर भी पहुंच सकते हैं जहां के लिए उन्हें छोड़ा गया है। एक बड़ी दूरी से भी ये उपग्रह किसी ग्रह के बारे में अत्यधिक जानकारी हासिल कर सकते हैं।

  • हिम मिश्रण (Freezing Mixture) क्या होता है ?

    हिम मिश्रण (Freezing Mixture) क्या होता है ?

    हिम मिश्रण (Freezing Mixture) कैसे बनाते हैं ?

    बर्फ में नमक, नौसादर अथवा कैल्सियम क्लोराइड मिला देने पर मिश्रण का ताप 0°C से नीचे गिर जाता है। इसका कारण यह है, कि जब बर्फ में नमक मिलाया जाता है, तो नमक को 0°C तक ठण्डा करने में कुछ बर्फ गल जाती है।

    इससे बने जल में नमक घुल जाता है तथा नमक का संतृप्त घोल बन जाता है परन्तु घोल का हिमांक सदैव शुद्ध जल के हिमांक से नीचा होता है। अत: बर्फ 0°C पर नमक के घोल के साथ ठोस अवस्था में नहीं रह सकती है। जो बर्फ घोल के सम्पर्क में है वह गलने लगती है तथा इसके लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा मिश्रण से ले लेती है जिससे मिश्रण का ताप गिर जाता है।

    इस गली बर्फ में और नमक घुलता है तथा उपरोक्त क्रिया फिर दोहराई जाती है जब तक कि मिश्रण का ताप -22°C तक नहीं गिर जाता है।

    इस ताप पर बर्फ नमक के घोल के साथ ठोस अवस्था में रह सकती है। बर्फ तथा कैल्शियम क्लोराइड के मिश्रण का ताप -55°C तक गिर जाता है। गर्मियों में इस प्रकार के मिश्रण से आइसक्रीम जमाई जाती है।

  • तुल्यकाली या भू-स्थायी उपग्रह क्या है ?

    What is Synchronous or Stationary Satellite ?

    ऐसा उपग्रह जो पृथ्वी के अक्ष के लम्बवत् तल में पश्चिम में पूरब की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा जिसका परिक्रमण काल पृथ्वी के परिक्रमण काल (24 घण्टे) के बराबर होता है, ‘तुल्यकाली उपग्रह‘ कहलाता है।

    तुल्यकाली उपग्रह की विशेषताएं

    1. यह उपग्रह पृथ्वी की अक्ष के लम्बवत् विषुवत् रेखीय तल में परिक्रमण करता है।

    2. यह पश्चिम से पूर्व की ओर अपनी कक्षा में परिक्रमा करता है।

    3. इसका परिक्रमण काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल अर्थात् 24 घण्टे के तुल्य होता है। वास्तव में यह 23 घण्टा 56 मिनट 4.1 सेकण्ड होता है। अतः यह उपग्रह स्थिर न होते हुए भी पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देता है। अत: इस उपग्रह को भू-स्थायी उपग्रह भी कहते हैं

    INSAT-3A (Indian National Satellite), INSAT-3B, INSAT-3C, आदि भू-स्थायी उपग्रह हैं।

    यह उपग्रह पृथ्वी तल से लगभग 36,000 किमी. की ऊंचाई पर रहकर पृथ्वी का परिक्रमण करता है। इस उपग्रह का मुख्य उपयोग संचार तथा मौसम के मानीटरन के लिए किया जाता है। अत: ये ‘संचार उपग्रह’ भी कहलाते हैं।

  • गलनांक, क्वथनांक, द्रव हिमांक, संघनन, वाष्पीकरण

    गलनांक

    निश्चित ताप पर ठोस का द्रव में बदलना गलन कहलाता है तथा इन निश्चित ताप को ठोस गलनांक कहते हैं। ,

    द्रव हिमांक

    निश्चित ताप पर द्रव का ठोस में बदलना ‘हिमीकरण’ कहलाता है तथा इस निश्चित ताप को ‘द्रव हिमांक’ कहते हैं। प्रायः गलनांक तथा हिमांक बराबर होते हैं जो पदार्थ ठोस से द्रव में बदलने पर सिकुड़ते हैं (जैसे—बर्फ) उनका गलनांक दाब बढ़ाने पर घटता है तथा जो पदार्थ ठोस से द्रव में बदलने पर फैलते हैं, उनका गलनांक दाब बढ़ाने पर चढ़ता है। अशुद्धि मिलाने से (जैसे बर्फ में नमक मिलाने से) गलनांक घटता है !

    क्वथनांक

    निश्चित ताप पर द्रव का वाष्प (या गैसों) में बदलना वाष्प कहलाता है तथा इस निश्चित ताप को द्रव का ‘क्वथनांक’ कहते हैं। चूंकि सभी द्रव जब वाष्प में परिवर्तित होते हैं, तो वे फैलते हैं, अत: क्वथनांक दाब बढ़ाने से बढ़ता है। अशुद्धि मिलाने से भी द्रव का क्वथनांक बढ़ता है। 

    संघनन

    निश्चित ताप पर वाष्प का द्रव में बदलना संघनन कहलाता है तथा यह निश्चित ताप संघनन बिन्दु कहलाता है। प्रायः क्वथनांक तथा संघनन ताप समान होता है।

    वाष्पीकरण (Evaporation)

    द्रव की खुली सतह से प्रत्येक ताप पर धीरे-धीरे द्रव का अपने वाष्प में बदलना ‘वाष्पीकरण’ कहलाता है। वाष्पीकरण के लिए भी द्रव को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, एक ग्राम जल को वाष्प में बदलने के लिए 2,260 जूल ऊष्मा की आवश्यकता होती है। यह ऊष्मा द्रव अपने अन्दर से ही प्राप्त करता है, अत: द्रव ठण्डा हो जाता है। 

    दाब का प्रभाव

    किसी पदार्थ के ‘द्रवणांक में अल्प परिवर्तन होता है यदि उस पर दाब बढ़ाया जाता है। उदाहरण के लिए, बर्फ पर दाब बढ़ाने से उसका द्रवणांक या गलनांक कम हो जाता है। ।

    अशुद्धियों का प्रभाव

    किसी पदार्थ के द्रवणांक पर अशुद्धियों का भी प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, जब जल और बर्फ के मिश्रण में नमक मिलाया जाता है, तो तापमान के -22°C तक होने की सम्भावना रहती है। इस प्रकार बने मिश्रण का उपयोग हिमीकरण के लिए किया जाता है।

  • उपग्रह (Satellite) क्या है ?

    What is Satellite ?

    किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले पिण्ड को उस ग्रह का ‘उपग्रह’ कहते हैं।

    उदाहरण के लिए, चन्द्रमा पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह है। इसके अतिरिक्त मनुष्य ने अनेक कृत्रिम उपग्रह भी आकाश में छोड़े हुए हैं जो लगातार पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे है।

    उपग्रह की कक्षीय चाल V उसकी पृथ्वी तल से ऊंचाई h पर निर्भर करती है। उपग्रह पृथ्वी तल से जितना अधिक दूर होगा, उतनी ही उसकी चाल कम होगी।

    उपग्रह की कक्षीय चाल V उसके द्रव्यमान (m) पर निर्भर नहीं करती हैं। एक ही त्रिज्या की कक्षा में भिन्न-भिन्न द्रव्यमानों के उपग्रहों की चाल समान होगी।

    उपग्रह का परिक्रमण काल (Period of Revolution of a Satellite)

    उपग्रह अपनी कक्षा में पृथ्वी का 1 चक्कर जितने समय में लगाता है उसे उसका ‘परिक्रमण काल’ कहते हैं।

    उपग्रह का परिक्रमण काल भी केवल उसकी पृथ्वी तल से ऊंचाई पर निर्भर करता है और उपग्रह जितना अधिक दूर होता है, उतना ही अधिक उसका परिक्रमण काल होता है।

    उपग्रह का परिक्रमण काल उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

  • गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) क्या होती है ?

    गुप्त ऊष्मा

    जब कोई पदार्थ एक भौतिक अवस्था (जैसे ठोस) से दूसरी भौतिक अवस्था (जैसे द्रव) में परिवर्तित होता है तो एक नियत ताप पर उसे कुछ उष्मा प्रदान करनी पड़ती है या वह एक नियत ताप पर उष्मा प्रदान करता है। किसी पदार्थ की गुप्त उष्मा (latent heat), उष्मा की वह मात्रा है जो उसके इकाई मात्रा द्वारा अवस्था परिवर्तन (change of state) के समय अवषोषित की जाती है या मुक्त की जाती है।

    इसके अलावा पदार्थ जब अपनी कला (फेज) बदलते हैं तब भी गुप्त उष्मा के बराबर उष्मा का अदान/प्रदान करना पड़ता है।

    वाष्पन की गुप्त ऊष्मा या वाष्पन की एन्थैल्पी

    ऊर्जा की वह मात्रा है जो द्रव के इकाई मात्रा को गैस में बदलने के लिये आवश्यक होती है। इसे वाष्पन की गुप्त ऊष्मा भी कहते हैं। वाष्पन की एन्थैल्पी, उस दाब पर भी निर्भर करती है जिस पर यह अवस्था परिवर्तन किया जाता है।

  • गुरुत्व केन्द्र (Centre of Gravity) क्या है ?

    What is Centre of Gravity ?

    गुरुत्व केन्द्र वह बिन्दु है, जहां वस्तु का समस्त भार कार्य करता है, किसी पिण्ड का गुरुत्व केन्द्र तब तक स्थिर रहता है जब तक उसका आकार नहीं बदलता। किसी वस्तु का भार गुरुत्व केन्द्र से ठीक नीचे की ओर कार्यरत रहता है।

    कोई वस्तु तभी तक सन्तुलन की अवस्था में रह सकती है जब तक उसके गुरुत्व केन्द्र से गुजरने वाली ऊर्ध्वाधर रेखा उस वस्तु के आधार के क्षेत्रफल के अन्दर से होकर गुजरती है। यदि यह रेखा आधार के क्षेत्रफल से बाहर हो जाती है, तो वस्तु के आधार का क्षेत्रफल जितना बड़ा होगा, उसका सन्तुलन उतना ही स्थायी होगा।

    भार में परिवर्तन

    1. ऊंचाई पर: अधिक ऊंची जगहों पर गुरुत्वीय त्वरण का मान कम होता है। इसलिए वस्तु का भार घट जाता है।

    2. पृथ्वी के अन्दर: किसी खान के अन्दर वस्तु का भार घटता है, क्योंकि वस्तु को आकर्षित करने वाली पृथ्वी का द्रव्यमान घट जाता है।

    3. पृथ्वी की सतह परः पृथ्वी की सतह पर विभिन्न स्थानों में एक ही वस्तु का भार भिन्न-भिन्न होता है। इसके दो कारण हैं (1) पृथ्वी का विचित्र आकार और (2) पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना।

    लिफ्ट में पिण्ड का भार (Weight of Body in a Lift)

    1. जब लिफ्ट त्वरण a से ऊपर की ओर जाती है, तो लिफ्ट में स्थित व्यक्ति (जिसका द्रव्यमान m है) को अपना भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है।

    2. जब लिफ्ट नीचे की ओर त्वरण व गति करती है, तो व्यक्ति को अपना भार घटा हुआ प्रतीत होता है।

    3. जब लिफ्ट एकसमान वेग (अर्थात् त्वरण = 0) से ऊपर या नीचे गति करती है, तो व्यक्ति को अपने भार में कोई परिवर्तन नहीं प्रतीत होता है।

    4. यदि नीचे उतरते समय लिफ्ट की डोरी टूट जाए तो वह मुक्त पिण्ड की भांति नीचे गिरती है, तो व्यक्ति को अपना भार शून्य प्रतीत होता है। यही भारहीनता की स्थिति है।

    5. यदि लिफ्ट के नीचे गिरते समय लिफ्ट का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण से अधिक हो (अर्थात् ag) तो व्यक्ति लिफ्ट के फर्श से उठकर उसकी छत पर जा लगेगा।

    6. जब लिफ्ट एकसमान वेग से ऊपर या नीचे चलती है, तो व्यक्ति को अपने भार में कोई परिवर्तन प्रतीत नहीं होता।

  • ऐवोगैड्रो का नियम क्या होता है ?

    ऐवोगैड्रो का नियम

    समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। 

    इस नियम का नाम अमेदिओ अवोगाद्रो (Amedeo Avogadro) के नाम पर रखा गया है। इसे “अवोगाद्रो की परिकल्पना” (Avogadro’s hypothesis) एवं “अवोगाद्रो का सिद्धान्त” के नाम से भी जाना जाता है। सन् १८११ में अवोगाद्रो ने यह परिकल्पना प्रस्तुत की

    आवोगाड्रो ने ही सर्वप्रथम कहा कि गैसों में केवल अणुओं का स्वतंत्र अस्तित्व संभव है न कि परमाणुओं का, इसीलिए गैस के आयतन को उसमें उपस्थित अणुओं से व्यक्त करना चाहिए। इस आधार पर आवोगाड्रो ने निम्नलिखित संबंध व्यक्त किया है :एक ही ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।

    प्रारंभ में इस संबंध को आवोगाड्रो की परिकल्पना कहा गया था लेकिन बाद में जब प्रयोगों द्वारा इसका परीक्षण किया गया तो इसे आवोगाड्रो का सिद्धांत कहा जाने लगा। और अब इसे ‘आवोगाड्रो का नियम’ कहते हैं। परमाणु सिद्धांत के संशोधन में तथा गेलुसाक के नियम की व्याख्या करने में इस नियम का उयपयोग हुआ है। तात्विक गैसों की परमाणुकता निकालने में, अणु भार ज्ञात करने में, गैसों के भार आयतन के संबंध को ज्ञात करने में तथा गैसों के विश्लेषण में इस नियम का उपयोग किया जाता है।

    आवोगाड्रो की संख्या

    किसी भी गैस के एक ग्राम अणु भार में अणुओं की संख्या समान होती है। इस संख्या को ही आवोगाड्रो की संख्या कहते हैं। विभिन्न विधियों से इसका मान 6.02×1023 निश्चित किया गया है। आवोगाड्रो की संख्या पांच विश्व स्थिरांको (युनिवर्सल कांस्टैंट) में से एक है। इसे रोमन अक्षर एन (N) से निरूपित करते हैं।

    उदाहरण

    हाइड्रोजन एवं नाइट्रोजन के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होगी यदि वे एक ही ताप व दाब पर रखीं हो तथा आदर्श गैस के समान व्यवहार कर रही हों। व्यवहार में वास्तविक गैसों के लिये यह नियम पूर्णत: सत्य नहीं है बल्कि “लगभग सत्य” है।

  • सोलर कुकर (Solar Cooker) क्या होता है ?

    सोलर कुकर (Solar Cooker)

    इस उपकरण में सौर ऊर्जा का संग्रहण करके उसका उपयोग खाना बनाने में किया जाता है। सूर्य के प्रकाश का लगभग 1/3 भाग अवरक्त प्रकाश होता है जो उस वस्तु को गरम कर देता है जिस पर भी पड़ता है। 

    कैसे बना होता है ?

    यह एक फाइबर ग्लास का बना एक Box होता है। जिसके अन्दर का भाग काले रंग से रंग दिया जाता है क्योंकि काला रंग ऊष्मा को लगभग पूर्णत: अवशोषित करता है। Box का ऊपरी भाग मोटी कांच की प्लेटो द्वारा ढक दिया जाता है।

    बॉक्स के ढक्कन पर अन्दर की तरफ एक समतल दर्पण लगा होता है जो सूर्य के प्रकाश को उसके अन्दर परावर्तित करता है। बॉक्स के अन्दर ऐलुमिनियम के बर्तन रखे जाते हैं जो बाहर से काले रंग से रंगे होते हैं। इन बर्तनों में सब्जियां, आदि पकाने के लिए रखी जाती है। 

    कैसे काम करता है ?

    सौर कुकर को धूप में रखा जाता है तथा ढक्कन को इस प्रकार मोड़कर रखा जाता है, कि सूर्य का प्रकाश समतल दर्पण से परावर्तित होकर सौर कुकर के अंदर प्रवेश करे। बॉक्स के अन्दर का काला रंग तथा बर्तनों के बाहर का काला रंग ऊष्मा को अवशोषित करता है।

    बॉक्स के ऊपर रखी हुई कांच की प्लेट ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करती है जिसके कारण बॉक्स के अन्दर का ताप बढ़ता जाता है और खाने की वस्तुएं पक जाती है।

  • प्रत्यानयन बल (Restoring Force)क्या होता है ?

    कम्पन करने वाले कण जब अपनी साम्य स्थिति (या मध्यमान स्थिति) में होता है, तो उस पर नेट बल शून्य कार्य करता है तथा कण विराम अवस्था में होता है, किन्तु जब कण को साम्य स्थिति से विस्थापित कर दिया जाता है, तो उस पर एक ऐसा बल कार्य करने लगता है जो सदैव साम्य स्थिति की ओर दिष्ट होता है।

    इस बल को ‘प्रत्यानयन की ओर दिष्ट होता है। इस बल को ‘प्रत्यानयन बल’ कहते हैं। इस बल का प्रयास सदैव यही होता है, कि कण साम्य स्थिति में आ जाए। इस बल के कारण ही कण में त्वरण उत्पन्न होता है और वह दोलन करता है।