Category: फ़िजिक्स

  • द्रव दाब क्या है

    What is Pressure of the Fluids ?

    द्रव के अन्‍दर किसी बिन्‍दु पर प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को द्रव का दाब ,द्रबदाब कहते है।किसी बिन्‍दु पर द्रव का दाब भी वायुमण्‍डलीय दाब की तरह सभी दिशाओ में समान रूप से लगता है।

    द्रव दाब का मान द्रव के घनत्‍व ,सतह से गहराई तथा गुरूत्‍वीय त्‍वरण पर निर्भर करता है l

    P=ρgh
    P= द्रव दाब

    ρ= द्रव का घनत्व

    g=गुरूत्‍वीय त्‍वरण

    h=द्रव की सतह से बस्‍तु की गहराई

    दाब और गोताखोरी

    प्रत्येक 10.3 मीटर की गोताखोरी के बाद गोताखोर पर 1 atm (1 atm = 1 atmosphere = 101325 पास्कल) का दाब बढ़ता जाता है। एक्वालंग डाइविंग सूट पहनकर कोई गोताखोर 60 मीटर की गहराई तक गोताखोरी कर सकता है जहां कुल दाब 7 atm होता है। 45 मीटर की गहराई पर वे 15 मिनट तक कार्य कर सकते हैं। इतनी गहराइयों पर अधिक समय तक रहना खतरनाक होता है क्योंकि अधिक दाब के कारण नाइट्रोजन की अधिक मात्रा रक्त में मिलती है और पानी से बाहर आने पर नाइट्रोजन गैस रक्त में बुलबुले ठीक उसी प्रकार बना देती है जिस प्रकार सोडा की बोतल खोलने पर बुलबुले बनते हैं। इस स्थिति में काफी पीड़ा होती है और गोताखोर की मृत्यु भी हो सकती है। यदि गोताखोर 8% ऑक्सीजन और 9.2% हीलियम गैस के मिश्रण का उपयोग करे तो इस स्थिति से कुछ सीमा तक बचा जा सकता है।

    द्रव-दाब के अन्य उपयोग

    जब आप किसी पेय को पीने के लिए नली का प्रयोग करते हैं तो फेफड़े से जो हवा का खिंचाव होता है उसके कारण नली में से हवा फेफड़े में पहुंच जाती है। अब द्रव (पेय) की सतह पर जो दाब होता है वह नली के दाब से अधिक हो जाता है जिस कारण द्रव का प्रवाह आपके मुंह तक नली से हो जाता है। वायु शोषकों का प्रयोग कई रूप में किया जाता है।

    जब किसी साइकिल पम्प के पिस्टन को दबाया जाता है, तो पिस्टन और ट्यूब के बीच की हवा दाब के कारण ट्यूब के अन्दर चली जाती है और जब साइकिल पम्प को हटा लिया जाता है, तो टायर वाल्व बन्द हो जाता है जिसके कारण अन्दर की हवा बाहर नहीं आ पाती है।

  • प्रतिध्वनि या अनुरणन (Reverberation) क्या होता है ?

    प्रतिध्वनि या अनुरणन (Reverberation)

    जब किसी बन्द हॉल में एक अल्प समय के लिए ध्वनि उत्पन्न की जाती है, तो हॉल की दीवारों तथा छत से क्रमिक परावर्तनों के फलस्वरूप स्रोत के कम्पन बन्द हो जाने पर भी हॉल में कुछ समय तक ध्वनि बनी रहती है, इसे ‘अनुरणन’ कहते हैं।

    अनुरणन काल

    जितने समय तक ध्वनि हॉल में बनी रहती है, उसे ‘अनुरणन काल’ (Reverberation time) कहते हैं। अच्छी ध्वनिकी (Acoustics) के लिए अनुरण काल का मान अनुकूलम (Optimum) होना चाहिए। (T= 0.053 V/A)|

    अत: दीवारों पर अवशोषक पदार्थ का क्षेत्रफल बढ़ाकर या घटाकर अनुरणन काल को समंजित किया जा सकता है। यदि अनुरणन काल T का मान बहुत अधिक है, तो अनुरणन के कारण उत्तरोत्तर ध्वनियों में अतिव्यापन (Overlapping) होने से मूल ध्वनि साफ सुनायी नहीं देगी। इसके विपरीत, यदि अनुरणन काल T बहुत कम है, तो परावर्तन समाप्त होने से ध्वनि की प्रबलता एकसमान नहीं रहेगी। 

    उदाहरण

    बादलों की गर्जन, भी अनुरणन का एक उदाहरण है क्योंकि यह दो बादलों के बीच ध्वनि के लगातार परावर्तन से उत्पन्न होती है। 

    अनुरणन को कैसे रोका जा सकता है ?

    व्याख्यान हॉल या सिनेमा हॉल में आवश्यक अनुरणन को रोकने के लिए हॉल की दीवारें खुरदरी (Rough) बनाई जाती है अथवा उन्हें मोटे सरंध्र (Porous) परदों से ढक दिया जाता है। इससे ध्वनि, अवशोषित हो जाती है। फर्श पर भी इसी उद्देश्य से कालीन बिछाई जाती है।

  • ध्वनि का परावर्तन क्या होता है ?

    ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)

    ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) भी होता है। यह ठीक उसी प्रकार होता है जैसे प्रकाश का परावर्तन होता है। ध्वनि की तरंग-दैर्ध्य अधिक होती है, इसलिए इसका परावर्तन बड़े आकार के पृष्ठों से अधिक होता है, जैसे—पर्वत, समुद्रतल, नदी, घाटी, पृथ्वीतल, आदि से परावर्तन। 

    प्रतिध्वनि (Echo)

    जो ध्वनि किसी दृढ़ दीवार या पहाड़, आदि से टकराने (अर्थात् परावर्तित होने) के बाद सुनाई देती है, उसे उस ध्वनि की ‘प्रतिध्वनि’ कहते हैं। यदि श्रोता परावर्तक तल के बहुत निकट खड़ा है, तो उसे प्रतिध्वनि नहीं सुनाई देगी।

    इसी प्रकार जब हम एक खाली कमरे में खड़े हैं, तो भी हमें प्रतिध्वनि नहीं सुनाई देती क्योंकि मूल ध्वनि तथा प्रतिध्वनि की आवाज एक साथ ही आती है।

    इसका कारण यह है, कि जब हमारा कान कोई ध्वनि सुनता है, तो उसका प्रभाव हमारे मस्तिष्क में 0.1 सेकण्ड तक रहता है, अत: यदि इस अवधि में कोई अन्य ध्वनि भी आएगी तो वह पहली के साथ मिल जाएगी।

    अतः स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक है, कि परावर्तक तल श्रोता से कम-से-कम इनती दूर अवश्य हो कि परावर्तित ध्वनि को उस तक पहुंचने में 0.1 सेकण्ड से अधिक समय लेगें। ध्वनि द्वारा वायु में 0.1 सेकण्ड में चली गई दूरी =1×332 = 33.2 मीटर 

    अत: यदि हम कोई ध्वनि उत्पन्न करते हैं, तो उसकी स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक तल की दूरी 33.2 की कम-से-कम मीटर = 16.6 (लगभग 17 मीटर) होनी चाहिए। 

    प्रतिध्वनि के प्रयोग

    प्रतिध्वनि द्वारा हम समुद्र की गहराई, वायुयान की ऊंचाई, सुदूर स्थित पहाड़ की दूरी, आदि माप सकते हैं। महासागर या समुद्र की गहराई मापने के लिए ध्वनि तरंग छोड़ी जाती है जो महासागर के तल से टकराकर लौट आती है। प्रतिध्वनि के लौटने में जो समय लगता है, उसके आधार पर गहराई निर्धारत कर ली जाती है।

  • वायुमण्डलीय दाब (Atmospheric Pressure) क्या है ?

    What is Atmospheric Pressure ?

    वायुमण्डलीय दबाव का अर्थ है, किसी भी दिए गए स्थान और समय पर वहां की हवा के स्तम्भ का भार। यह दबाव एक यन्त्र की सहायता से मापा जाता है जिसे बैरोमीटर कहते हैं। समुद्रतल से ऊपर जाने पर वायु की अनेक परतें नीचे छूट जाने के कारण वायुमण्डलीय दाब कम तथा समुद्रतल के नीचे जाने पर दाब अधिक हो जाता है।

    ऊंचाई पर वायुदाब कम हो जाता है।

    वायुदाब के मात्रक

    एक पास्‍कल दाब एक न्‍युटन के बल को इकाई क्षेत्रफल पर आरोपित करने पर उत्‍पन्‍न होता है l

    वायुमंडलीय दाब 101,325 पास्कल के रूप में परिभाषित दबाव की एक इकाई है, जो 760 मिमी या 29.9212 इंच पारे के स्तम्भ के , या 14.696 psi  के बराबर है।

    वायुमण्‍डलीय दाब को atm से व्‍यक्‍त किया जाता है।
    1 atm=101325 पास्‍कल होता है।

    वायुमण्‍डलीय दाब का मात्रक बार अथवा मिलीबार होता है इसे निम्न इकाइयों से नापा जाता है –
    1 बार =100000 newton/square METER 
    1मिली बार = 100 पास्‍कल
    1 टॅार (torr) =1.332 मिलीबार =133.32 पास्‍कल
    मानक वायुमण्‍डलीय दाब ( STANDARD  ATMOSPHERIC  PRESSURE  )का मान (VALUE ) मानक समुद्र तल पर वायु के द्वारा लगाये गये दाब के बराबर होता है, जिसका मान 101325 पास्‍कल होता है।


    वायुमण्‍डलीय दाब का मापन मैनोमीटर नामक उपकरण द्वारा किया जाता है। ऊपर की और जाने पर वायुदाब में कमी होती है।

    1 टॅार (torr) =1.332 मिलीबार =133.32 पास्‍कल

    1मिली बार = 100 पास्‍कल

    1 बार =100000 newton/square METER 

    1 atm=101325 पास्‍कल होता है।

    उदाहरण

    • वायुयान में बैठे यात्री के फाउंटेन पैन से स्‍याही इसलिये रिसने लगती है क्‍योंकि उपर जाने पर वायुमण्‍डलीय दाब का मान कम हो जाता है।
    • वायुमण्‍डलीय दाब के कम हेाने के कारण पर्वतारोही तथा उच्‍च रक्‍त चाप से पीडित व्‍यक्तियों को उॅंचाई पर जाने पर उनकी नाक से खून निकलने लगता है।
    • अगर हम बिना स्पेस सूट के अंतरिक्ष में चले जाए तो हमारा शरीर फट जायर्गा क्यूंकि वहां वायुदाब शून्य होता है ।
    • गहरे पानी की समुद्री मछली सतह पर लायी जाए तो मर जाती है क्यूंकि ऊपर के पानी में दाब कम होता है और मछली का शरीर उच्च दाब का आदि होता है।
    • पहाड़ों पर खाना पकाने में कठिनाई होती है, क्योंकि वहां वायुदाब कम होने से पानी 100°C के बजाए निम्न ताप पर ही उबलकर भाप बनने लगता है।
    • प्रति 1,000 फुट ऊपर जाने पर वायु का दाब पारा स्तम्भ का 1 इंच (= 2.54 सेमी.) कम हो जाता है l

    वायुदाबमापी

    फोर्टिन वायुदाबमापी: यह सरल वायुदाबमापी का एक संशोधित रूप है जिससे दाब का मापन अधिक शुद्धता से किया जाता है।

    निर्द्रव (Aneroid) वायुदाबमापी: यह एक छोटा सुबाह्य (Portable) दाबमापी है जिसमें किसी द्रव का प्रयोग नहीं किया जाता है।

    तुंगतामापी (Altimeter): जब निर्द्रव वायुदाबमापी में ऊंचाई मापने के निशान बना दिए जाते हैं, तो उसे ‘ऊंचाईमापी’ या ‘तुगतामापी’ कहते हैं।

  • डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect) क्या होता है ?

    डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)

    ध्वनि में आवृत्ति परिवर्तन के प्रभाव को सर्वप्रथम जॉन डॉप्लर ने 1842 में प्रतिपादित किया जिसके कारण उन्हीं के नाम पर उसे ‘डॉप्लर प्रभाव’ कहते हैं। डॉप्लर के अनुसार, ‘जब किसी ध्वनि स्रोत व श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति उसकी वास्तविक आवृत्ति से अलग सुनाई देती है। यदि कोई स्त्रोत, श्रोता के निकट आ रहा होता है, तो ध्वनि की आवृत्ति बढ़ जाती है और यदि स्रोत. श्रोता से दूर जाता है, तो आवृत्ति कम हो जाती है।

    यही कारण है, कि जब रेलगाड़ी का इन्जन सीटी बजाते हुए श्रोता के निकट आता है, तो उसकी ध्वनि बड़ी तीखी (Shrill) अर्थात् अधिक आवृत्ति की सुनाई देती है और जैसे ही इन्जन श्रोता को पार करके aदूर जाने लगता है तुरन्त ध्वनि की आवृत्ति कम हो जाती है और सीटी की ध्वनि मोटी (Grave) हो जाती है। 

    प्रयोग

    डॉप्लर प्रभाव का उपयोग करके गैलेक्सी तथा सुदूर तारों का अध्ययन किया जाता है। तारे के प्रकाश के वर्णक्रमण (Spectrum) का अध्ययन करके प्रकाश की आवृत्ति में हुए परिवर्तन का पता लगाया जाता है। इस परिवर्तन से यह ज्ञात हो जाता है, कि तारा पृथ्वी से दूर जा रहा है या उसके पास आ रहा है और उसकी गति का वेग क्या है !

    यदि स्पेक्ट्रम में प्रकाश रेखा बैंगनी सिरे की ओर विस्थापित होती है (बैंगनी-विस्थापन, Violet-shift) तो प्रकाश स्रोत (तारा, गैलेक्सी, आदि) पृथ्वी की ओर आ रहा है और यदि वह लाल सिरे की ओर विस्थापित होती है (अर्थात् लाल-विस्थापन या अभिरक्त विस्थापन, Red-shift) तो प्रकाश स्रोत पृथ्वी से दूर जा रहा होता है। 

    प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव

    प्रकाश तरंगें भी डॉप्लर प्रभाव दर्शाती हैं। इन दोनों में अन्तर यह है, कि ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव असममित (Asymmetric) होता है जबकि प्रकश में सममित (Symmetric) होता है। इसका तात्पर्य यह है, कि ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है, कि ध्वनि स्रोत श्रोता की ओर आ रहा है या उससे परे जा रहा है। इसके विपरीत प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव केवल प्रकाश स्रोत व दर्शक के मध्य आपेक्षिक वेग पर निर्भर करता है, इस बात पर नहीं कि स्रोत दर्शक के निकट आ रहा है या उससे दूर जा रहा है। 

    प्रकाश के डॉप्लर प्रभाव द्वारा सुदूर तारों व गैलेक्सियों के पृथ्वी के सापेक्ष वेग तथा उनकी गति की दिशा ज्ञात की जाती है। वास्तव में खगोलज्ञ एडविन हब्बल (1889-1953) ने डॉप्लर प्रभाव द्वारा ही यह ज्ञात किया था, कि विश्व (Universe) का विस्तार हो रहा है।

    यदि कोई तारा या गैलेक्सी पृथ्वी की ओर आ रहा है, तो उससे प्राप्त प्रकाश की तरंग दैर्ध्य स्पेक्ट्रम के बैंगनी सिरे की ओर विस्थापित होती है और यदि तारा या गैलेक्सी पृथ्वी से दूर जा रहा है, तो प्राप्त प्रकाश की तरंग-दैर्ध्य स्पेक्ट्रम के लाल सिरे की ओर विस्थापित होती

  • ध्वनि का विवर्तन क्या होता है ?

    ध्वनि का विवर्तन (Diffraction of Sound)

    ध्वनि की तरंग-दैर्ध्य 1 मीटर की कोटि की होती है। अतः जब इसी कोटि का कोई अवरोध, जैसे—दरवाजा, खिड़की, दीवार, आदि। ध्वनि के मार्ग में आता है, तो ध्वनि अवरोध के किनारों पर मुड़कर आगे बढ़ जाती है।

    इस घटना को ‘ध्वनि का विवर्तन‘ कहते हैं। यही कारण है, कि यदि हम कमरे के अन्दर बैठे हैं, तो भी हम बाहर के शोरगुल या अन्य ध्वनियों को सुन लेते हैं, कारण यही है, कि बाहर से आने वाली ध्वनि दरवाजों, खिड़की, आदि पर मुड़कर हमारे कानों तक पहुंच जाती है। 

    ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव का उपयोग करके किसी वायुयान या पनडुब्बी की गति की दिशा व उसका वेग ज्ञात किया जा सकता है। 

  • ध्वनि का विस्पंद क्या होता है ?

    विस्पंद (Beat)

    जब कभी दो लगभग बराबर आवृत्ति की ध्वनि तरंग साथ-साथ उत्पन्न होती है, तो उनके अध्यारोपण से जो परिणामी ध्वनि उत्पन्न होती है, उसकी तीव्रता बारी-बारी से घटती और बढ़ती है। ध्वनि की तीव्रता के इस चढ़ाव व उतार को ‘विस्पंद’ कहते हैं। एक चढ़ाव और एक उतार को मिलाकर एक विस्पंद बनता है !

    विस्पंद आवृत्ति

    एक सेकण्ड में जितनी बार ध्वनि की तीव्रता में चढ़ाव या उतार होता है, उसे ‘विस्पंद आवृत्ति’ (Beat frequency) कहते हैं। विस्पंद आवृत्ति = ध्वनियों की आवृत्तियों का अन्तर = श्रोतों की आवृत्तियों का अन्तर। यदि हम बराबर आवृत्ति के दो ध्वनि श्रोतों को एक साथ बजाते हैं, तो उनसे उत्पन्न परिणामी ध्वनि की तीव्रता में हमें कोई उतार-चढ़ाव सुना नहीं देता। 

    विस्पंद के अनुप्रयोग

    • स्वरित्र द्विभुज की आवृत्ति के निर्धारण
    • वाद्यों के समस्वरण में
    • रेडियो अभिग्रहण में 
    • खानों में विस्फोटक मीथेन गैस का पता लगाने में
  • ध्वनि का व्यतिकरण क्या होता है ?

    ध्वनि का व्यतिकरण (Interference of Sound)

    जब समान आवृत्ति या आयाम की दो ध्वनि तरंगें एक साथ किसी बिन्दु पर पहुंचती हैं, तो उस बिन्दु पर ध्वनि ऊर्जा का पुनर्वितरण (Redistribution) हो जाता है। इस घटना को ध्वनि का व्यतिकरण कहते हैं।

    ‘सम्पोषी’ (Constructive) व्यतिकरण

    यदि दोनों तरंगें उस बिन्दु पर एक ही कला (Phase) में पहुंचती हैं, तो वहां ध्वनि की तीव्रता अधिकतम होती है। इसे ‘सम्पोषी’ (Constructive) व्यतिकरण कहते हैं।

    ‘विनाशी’ (Destructive) व्यतिकरण

    यदि दोनों तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं, तो वहां पर तीव्रता न्यूनतम होती है। इसे ‘विनाशी’ (Destructive) व्यतिकरण कहते हैं।

    उदाहरण

    व्यतिकरण के कुछ उदाहरण हैं—समुद्र में लाइट हाउस पर रखे साइरन से उत्पन्न की गई ध्वनि समुद्र पृष्ठ पर स्थित किसी बिन्दु पर दो प्रकार से पहुंचती है, एक तो लाइट हाउस से सीधे ही और दूसरे समुद्र के पृष्ठ से परावर्तित होने के बाद।

    इन दोनों तरंगों में व्यतिकरण के फलस्वरूप कुछ स्थानों पर ध्वनि तीव्र सुनाई देती है (वहां पर सम्पोषी व्यतिकरण होता है और कुछ स्थानों पर ध्वनि की तीव्रता बहुत कम होती है वहां पर विनाशी व्यतिकरण होता है। जिन्हें ‘नीरव क्षेत्र’ (Silence zone) कहते हैं। 

    किसी बड़े हॉल में एक ही स्थान पर उत्पन्न ध्वनि, श्रोता तक दो प्रकार से पहुंचती है, एक तो श्रोता के पास सीधे ही और दूसरे हाल की छत व दीवारों से परावर्तित होने के बाद। इन दोनों तरंगों में सम्पोषी व विनाशी व्यतिकरण होने के कारण हाल में कुछ बिन्दुओं पर तीव्र ध्वनि और कुछ पर अति मन्द (या बिल्कुल नहीं) ध्वनि सुनाई देगी। ध्वनि के व्यतिकरण का प्रभाव रेडियो के कार्यक्रमों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है।

  • पनडुब्बी (Submarine) कैसे काम करती है ?

    How does a submarine work ?

    पनडुब्बी ऐसा जलयान है जो समुद्र की सतह पर तथा सतह के नीचे तैर सकता है। पनडुब्बी में आगे व पीछे की ओर बड़ी-बड़ी टंकियां होती हैं जिनमें पम्पों की सहायता से समुद्री जल भरा जा सकता है अथवा खाली किया जा सकता है। जब इन टकियां को जल से भर देते हैं, तो इसका भार इसके द्वारा हटाए गए जल के भार से अधिक हो जाता है और पनडुब्बी जल के अन्दर जाकर तैरने लगती है तथा जब पनडुब्बी को सतह पर तैरना होता है, तो उन टंकियों को खाली कर देते है जिससे उसका भार उसके द्वारा हटाए गए जल के भार से कम होता है। इस प्रकार पनडुब्बी को इच्छानुसार जल के अन्दर अथवा सतह पर चलाया जा सकता है।

    यदि वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से कम है तो वह उस द्रव में तैरती है, अन्यथा डूब जाती है, जैसे लोहा पारे पर तैरता है क्योंकि लोहे का घनत्व पारे के घनत्व से कम है।

    प्लिमसोल रेखा

    यह एक रेखा है जो समुद्री जहाज की तली (Bottom) से कुछ ऊपर खिची रहती है। इस रेखा से अधिक जहाज नहीं डूबना चाहिए। यह जहाज पर अधिकतम लादे गए बोझ का सीमा बताती है।

  • द्रव-घनत्वमापी (Hydrometer) क्या है ?

    What is Hydrometer ?

    यह एक प्रकार का यन्त्र है जो द्रवों का विशिष्टि गुरुत्व (Specific gravity) निकालने तथा उनकी शुद्धता की परीक्षा करने के लिए प्रयुक्त होता है।

    आर्किमीडिज़ के सिद्धान्त के अनुसार, द्रव में तैरती हुई वस्तु का उतना ही भाग डूबता है जितने से विस्थापित द्रव की भार वस्तु को भार के बराबर हो जाए। अत: इस प्रकार तैरने वाली वस्तु को अगर विभिन्न घनत्व वाले द्रवों में डुबाया जाये तो किसी में उसका अधिक भाग डूबेगा और किसी में कम। अधिक घनत्व वाले द्रव में वह कम डूबेगी और कम घनत्व वाले द्रव में अधिक डूबेगी। इस प्रकार, वस्तु के डूबे भाग का आयतन तथा द्रव के विशिष्ट गुरुत्व में एक ऐसा सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है। जिससे डूबे भाग के आयतन का अध्ययन करके हम घनत्व जांच सकते हैं। द्रव-घनत्वामापी इसी सिद्धान्त पर कार्य करता है।

    दूध का घनत्व मापने वाला लैक्टोमीटर भी एक हाइड्रोमीटर है तथा बैटरी में अम्ल का घनत्वमापी भी हाइड्रोमीटर ही है।