Category: फ़िजिक्स

  • भौतिकी (फिजिक्स) के महत्वपुर्ण सूत्र (फार्मूला) | फिजिक्स फार्मूला (Physics Formula) in Hindi

    भौतिकी (फिजिक्स) के महत्वपुर्ण सूत्र (फार्मूला) | फिजिक्स फार्मूला (Physics Formula) in Hindi

    इस आर्टिकल में हम आपके लिए भौतिक विज्ञान के सारे फार्मूला (formulas of physics) यानी सूत्र लेकर आये है जो की प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ ही कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के विधार्थियों के लिय भी महत्वपुर्ण है | लेकिन उससे पहले हम जानेगे की की भौतिक विज्ञान यानी फिजिक्स हमारे जीवन में क्या महत्त्व रखती है :

    फिजिक्स (भौतिकी) क्या है और इसका मानव जीवन में महत्व क्या है ?

    भौतिकी वस्तु, गति और ऊर्जा का विज्ञान है। हैं। भौतिकी विज्ञान मानव जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है।

    यह विज्ञान वस्तुओं के व्यवहार के साथ-साथ गुरुत्वाकर्षण, वैद्युत और पारमाणविक बल क्षेत्रों की प्रकृति और मूल्यांकन को भी समझता है। भौतिकी विज्ञान के अध्ययन से हमें विश्व के व्यवहार को समझने में मदद मिलती है और इससे हम अन्य विषयों जैसे पृथ्वी विज्ञान, कृषि विज्ञान, रसायन विज्ञान, जैव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान आदि के अध्ययन को भी समझते हैं।

    भौतिकी विज्ञान का अंतिम उद्देश्य कुछ समग्र सिद्धांतों का निर्माण है जो सभी ऐसे तत्वों को एकत्र करते हैं जो इस विज्ञान के अध्ययन से संबंधित होते इसके अनुप्रयोग जैसे विद्युत उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, चिकित्सा आदि में उपयोग होते हैं।

    इसके अनुप्रयोग जैसे विद्युत उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, चिकित्सा आदि में उपयोग होते हैं। भौतिकी विज्ञान का अध्ययन हमें विश्व के व्यवहार को समझने में मदद मिलती है और इससे हम अन्य विषयों जैसे पृथ्वी विज्ञान, कृषि विज्ञान, रसायन विज्ञान, जैव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान आदि के अध्ययन को भी समझते हैं। यह विज्ञान हमें विश्व के व्यवहार को समझने में मदद करता है। भौतिकी विज्ञान के अनुप्रयोग जैसे विद्युत उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, चिकित्सा आदि में उपयोग होते हैं।

    भौतिकी के महत्वपूर्ण सूत्र जो की प्रतियोगी परीक्षा के साथ एकेडेमिक स्तर पर भी महत्वपुर्ण है

    निचे हम महत्वपुर्ण फिजिक्स फार्मूला (सूत्र) पढेगे जो की भौतिकी (फिजिक्स) के बेसिक और सबसे ज्यादा काम में आने वाले formula (सूत्र) है और प्रतियोगी परीक्षाओं के हिसाब से महत्वपुर्ण है |

    फिजिक्स फॉर्मूला हिंदी में (Physics Formulas in Hindi)

    भौतिकी सूत्र (Physics Formula)संकल्पना (Concept)सूत्र (फार्मूला)
    न्यूटन का दूसरा लॉसूत्र का उपयोग करके, बल को पिंड के द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।F = ma
    विस्थापन (Displacement)वस्तु की स्थिति में उसके प्रारंभिक स्थान से उसकी अंतिम स्थिति में परिवर्तन को संदर्भित करता है।D = Xf–Xi = ΔX
    औसत स्पीडइसका उपयोग तय की गई दूरी (डिस्टेंस) के साथ-साथ समय अवधि (टाइम) के लिए चलती किसी चीज़ की औसत गति (स्पीड) की गणना के लिए किया जाता है।S = dt
    त्वरणत्वरण समय में परिवर्तन के लिए वेग (Velocity) में परिवर्तन की दर को संदर्भित करता है। इसे प्रतीक a से चित्रितकिया जाता है।a =v-ut
    घनत्व (Density)यह सूत्र किसी विशिष्ट क्षेत्र में सामग्री की जड़ता को दर्शाता है।P=mV
    शक्ति (पॉवर)किसी गतिविधि को करने की क्षमता को ऊर्जा के रूप में जाना जाता है। दूसरी ओर, किसी विशेष अवधि के लिए किसी गतिविधि (कार्य) को करने में खर्च की गई ऊर्जा को शक्ति कहा जाता है।P=Wt
       
    भार (वेट)फार्मूला उस बल को मापता है जिसके साथ कोई वस्तु गुरुत्वाकर्षण के कारण गिरती है।W=mg
    दाब (प्रेशर)दबाव वस्तु के प्रति इकाई क्षेत्र में लागू बल की मात्रा को संदर्भित करता है।P=FA
    ओम (Ohm)ओम का नियम कहता है कि किसी चालक पदार्थ से गुजरने वाली धारा चालक के दो समापन बिंदुओं के बीच अंतर के समानुपाती (Proportional) होती है।V= I × R
    काइनेटिक एनर्जीगतिज ऊर्जा (Kinetic) वह ऊर्जा है जो किसी चलती हुई चीज़ की गति की स्थिति के कारण होती है।E = 12mv²
    आवृत्ति (फ़्रिक्वेंसी)फ़्रिक्वेंसी प्रति सेकंड या तरंग चक्रों की संख्या के रूप में पूर्ण क्रांतियों को संदर्भित करती है।F =vλ
    पेंडुलमयह समीकरण गणना करता है कि पेंडुलम सेकंड में आगे और पीछे कितना समय लेता है।T = 2π√Lg
    फारेनहाइटयह तापमान के लिए रूपांतरण सूत्र है।F = (95× °C) + 32
    कार्य (वर्क)कार्य सूत्र विस्थापन के परिमाण और बल के घटक के गुणन को मापता है।W = F × d × cosθ
    टार्कटार्क घूर्णी बल या मोड़ प्रभाव है। यह के परिमाण को मापता हैT = F × r × sinθ
    द्रव्यमान (मास)यह सूत्र बल और द्रव्यमान के बीच संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ F = बल, m = द्रव्यमान और a = त्वरण है।F = ma or m = F/m

    अब कुछ सामान्य भौतिकी (फिजिक्स) के सूत्र (Basic Physics Formulas)

    1. क्षेत्रफल ( A ) = लम्बाई × चौड़ाई
    2. आयतन ( V ) = ल. × चौ. × ऊं.
    3. घनत्व ( ρ ) = द्रव्यमान/आयतन
    4. वेग ( V ) या चाल = विस्थापन/समय
    5. त्वरण ( a ) , गुरुत्वीय त्वरण ( g ) , अभिकेन्द्र त्वरण = वेग में परिवर्तन/समय
    6. रैखिक संवेग ( P ) = द्रव्यमान × वेग
    7. बल ( F ) = द्रव्यमान × त्वरण
    8. आवेग ( J ) या I = बल × समय
    9. कार्य ( W ) या ऊर्जा ( E ) = बल × विस्थापन
    10. शक्ति ( P ) = कार्य / समय
    11. दाब ( P ) या प्रतिबल = बल / क्षेत्रफल
    12. पृष्ठ तनाव ( T ) = बल / लम्बाई
    13. बल नियतांक ( K ) = बल / विस्थापन
    14. विकृति = विन्यास में परिवर्तन/प्रारम्भिक विन्यास
    15. प्रत्यास्थता गुणांक = प्रतिफल/विकृति
    16. घूर्णन त्रिज्या या परिभ्रमण त्रिज्या ( K ) = दूरी
    17. जड़त्व आघूर्ण ( I ) = द्रव्यमान × ( दूरी )2
    18. वेग प्रवणता = वेग / दूरी
    19. बल आघूर्ण ( τ ) बल × दूरी
    20. प्रतिबल = बल / क्षेत्रफल
    21. आवृत्ति ( ν) = कम्पन / समय
    22. प्लांक स्थिरांक ( h ) = ऊर्जा/आवृत्ति = E/ν
    23. तरंगदैर्घ्य ( λ ) = दूरी
    24. दक्षता ( η ) = निर्गत कार्य अथवा ऊर्जा/निवेशी कार्य अथवा ऊर्जा
    25. सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक ( G ) = F = Gm1m2/r2  G = Fr2/m1m2
    26. दाब प्रवणता = दाब/ दूरी
    27. श्यानता गुणांक ( η ) = बल/क्षेत्रफल × वेग प्रवणता
    28. पृष्ठ ऊर्जा = ऊर्जा/क्षेत्रफल
    29. पृष्ठ ऊर्जा = ऊर्जा/क्षेत्रफल
    30. विशिष्ट ऊष्मा = ऊर्जा/द्रव्यमान × तापवृद्धि
    31. क्षय नियतांक = 0.693/अर्द्धआयु
    32. क्रान्तिक वेग ( v c) = रेनॉल्ड संख्या × श्यानता गुणांक/घनत्व × त्रिज्या
    33. क्रान्तिक वेग ( v e) = √2 × पृथ्वी की त्रिज्या × गुरुत्वीय त्वरण
    34. हबल नियतांक ( Hubble Constant ) (H0) = V/D = पश्चसरण चाल (Recession speed)/दूरी
    35. दाब ऊर्जा = दाब × आयतन
    36. गुप्त ऊष्मा = ऊष्मीय ऊर्जा/द्रव्यमान

    फिजिक्स (Physics) के महत्वपूर्ण फॉर्मूला की संक्षिप्त जानकारी

    गुरुत्वाकर्षण सूत्र के कारण त्वरण (Acceleration Due to Gravity Formula )

    त्वरण सूत्र ( Acceleration Formula )

    आवृत्ति सूत्र ( Frequency Formula )

    वेग सूत्र ( Velocity Formula )

    क्रॉस प्रोडक्ट फॉर्मूला ( Cross product Formula )

    vector a X vector b = module of the vector a * module of the vector b * sine of the angle between vectors a and b * normal of the plane formed by vectors a and b

    ध्वनि तीव्रता सूत्र ( Sound intensity Formula )

    sound intensity = acoustic power / normal area to the direction of propagation

    तापीय चालकता सूत्र ( Thermal Conduction Formula )

    Thermal conduction = -(heat transfer coefficient)*(Area/length)*(difference of temperature)

    आवेग सूत्र ( Impulse Formula )

    हीट ट्रांसफर फॉर्मूला ( Heat Transfer Formula )

    Heat transfer = (mass)(specific heat)(temperature change)

    10 कार्य सूत्र (Work Formula)

    work = force x distance×cosine(the angle between force and movement directions)

    11 न्यूटन का शीतलन सूत्र का नियम (Newton’s Law of Cooling Formula)

    12 दबाव सूत्र (Pressure Formula)

    P = \frac{F}{A}
    P = दाब (Pressure)

    F = बल

    A = क्षेत्र

    महत्वपूर्ण फिजिक्स फॉर्मूला (हिंदी में)

    1. औसत स्पीड फार्मूला

    इस फिजिक्स के फोर्मुले का उपयोग करके हम तय की गई दूरी (डी) के साथ-साथ समय अवधि (टी) के लिए एक गतिमान चलती हुई चीज़ की औसत गति (एस) की गणना कर सकते हैं।

    1. घनत्व फार्मूला

    यह सूत्र किसी विशिष्ट क्षेत्र में सामान की जड़ता को दर्शाता है।

    1. त्वरण फार्मूला

    त्वरण समय में परिवर्तन के संबंध में परिवर्तन वेग (Velocity of Change) की दर है।

    1. शक्ति फार्मूला

    किसी गतिविधि को करने की क्षमता को ऊर्जा के रूप में जाना जाता है। वहीँ किसी विशेष अवधि के लिए किसी गतिविधि को करने में खर्च की गई ऊर्जा को पॉवर कहा जाता है।

    1. दबाव फार्मूला

    किसी क्षेत्र की प्रति यूनिट बल की मात्रा को किसी वस्तु का दबाव कहा जाता है।

    1. ओम का नियम सूत्र

    लोकप्रिय फिजिक्स फोर्मुलों में ओम के नियम की व्याख्या इस प्रकार की जाती है कि किसी चालक सामग्री से गुजरने वाली धारा (I) कंडक्टर के दो समापन बिंदुओं के बीच संभावित अंतर (V) के सीधे आनुपातिक (Proportional) होती है।

    1. औसत स्पीड फार्मूला

    इस फिजिक्स के फोर्मुले का उपयोग करके हम तय की गई दूरी (डी) के साथ-साथ समय अवधि (टी) के लिए एक गतिमान चलती हुई चीज़ की औसत गति (एस) की गणना कर सकते हैं।

    1. घनत्व फार्मूला

    यह सूत्र किसी विशिष्ट क्षेत्र में सामान की जड़ता को दर्शाता है।

    1. त्वरण फार्मूला

    त्वरण समय में परिवर्तन के संबंध में परिवर्तन वेग (Velocity of Change) की दर है।

    1. शक्ति फार्मूला

    किसी गतिविधि को करने की क्षमता को ऊर्जा के रूप में जाना जाता है। वहीँ किसी विशेष अवधि के लिए किसी गतिविधि को करने में खर्च की गई ऊर्जा को पॉवर कहा जाता है।

    1. दबाव फार्मूला

    किसी क्षेत्र की प्रति यूनिट बल की मात्रा को किसी वस्तु का दबाव कहा जाता है।

    1. ओम का नियम सूत्र

    लोकप्रिय फिजिक्स फोर्मुलों में ओम के नियम की व्याख्या इस प्रकार की जाती है कि किसी चालक सामग्री से गुजरने वाली धारा (I) कंडक्टर के दो समापन बिंदुओं के बीच संभावित अंतर (V) के सीधे आनुपातिक (Proportional) होती है।

    भौतिकी के सारे सूत्र (फिजिक्स के फार्मूला)

    घूर्णन त्रिज्या या परिभ्रमण त्रिज्या ( K )दूरी
    जड़त्व आघूर्ण ( I )द्रव्यमान × ( दूरी )2
    वेग प्रवणतावेग / दूरी
    बल आघूर्ण ( τ )बल × दूरी
    प्रतिबलबल / क्षेत्रफल
    आवृत्ति ( ν)कम्पन / समय
    प्लांक स्थिरांक ( h )ऊर्जा / आवृत्ति = E / ν
    तरंगदैर्घ्य ( λ )दूरी
    दक्षता ( η )निर्गत कार्य अथवा ऊर्जानिवेशी कार्य अथवा ऊर्जा
    सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक ( G )F = Gm1m2 / r2
    G = Fr2 / m1m2
    दाब प्रवणतादाब / दूरी
    श्यानता गुणांक ( η )बल / क्षेत्रफल × वेग प्रवणता
    पृष्ठ ऊर्जाऊर्जा / क्षेत्रफल
    विशिष्ट ऊष्माऊर्जा / द्रव्यमान × तापवृद्धि
    क्षय नियतांक0.693 / अर्द्धआयु
    क्रान्तिक वेग ( v c)रेनॉल्ड संख्या × श्यानता गुणांकघनत्व × त्रिज्या
    क्रान्तिक वेग ( v e)√2 × पृथ्वी की त्रिज्या × गुरुत्वीय त्वरण
    हबल नियतांक ( Hubble Constant )  (H0पश्चसरण चाल ( Recession speed ) / दूरी
    दाब ऊर्जादाब × आयतन
    गुप्त ऊष्माऊष्मीय ऊर्जा / द्रव्य
    तापीय प्रसार गुणांक अथवा ऊष्मीय प्रसरणीयताविमा में परिवर्तन / मूल विमा × ताप
    वोल्ट्जमान नियतांक ( K )गतिज ऊर्जा / ताप
    सक्रियता ( A )विघटन / समय
    वीन नियतांक ( b )तरंगदैर्ध्य × तापान्तर
    स्टीफन नियतांक ( σ )समय × ताप4 × ऊर्जा / क्षेत्रफल
    ऊर्जा घनत्वऊर्जा / आयतन
    सार्वत्रिक गैस नियतांक ( R )ऊर्जा / मोल × ताप
    तरंग संख्या ( v →)2π / तरंगदैर्घ्य
    तरंग की तीव्रताऊर्जा / समय × क्षेत्रफल
    विकिरण दाबतरंग की तीव्रता / प्रकाश की चाल
    ऊष्मा चालकता ( K )ऊष्मीय ऊर्जा × मोटाईक्षेत्रफल × ताप × समय
    कोणीय संवेग ( J , L )संवेग × लम्बवत् दूरी
    कोणीय वेग ( ω ) , कोणीय आवृत्तिकोण \ समय
    विकिरण तीव्रताविकिरण शक्ति / घन कोण
    कोणीय त्वरण ( α )कोणीय वेग / समयान्तराल
    दीप्त शक्ति अथवा स्रोत का ज्योति फ्लक्सउत्सर्जित ज्योति ऊर्जा / समय
    बहने की दर ( Q )आयतन / समय
    ऊष्मा का यांत्रिक तुल्यांक ( J )कार्य / ऊष्मा
    कोणीय आवेगबल आघूर्ण × समय
    त्रिकोणमितीय अनुपातलम्बाई / लम्बाई
    विकिरण फ्लक्स , विकिरण शक्तिउत्सर्जित ऊर्जा / समय
    विभवान्तर ( V )कार्य / आवेश
    धारा घनत्व ( J )विद्युत धारा / क्षेत्रफल
    प्रदीप्ति घनत्व अथवा प्रदीप्तिआपतित ज्योति फ्लक्स / क्षेत्रफल
    आवेश ( q )धारा × समय
    ज्योति तीव्रता अथवा ज्योति स्रोत की प्रदीपन क्षमताज्योति फ्लक्स / घन कोण
    प्रदीपन तीव्रताज्योति तीव्रता / ( दूरी )2
    विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता ( ρ )प्रतिरोध × क्षेत्रफल / लम्बाई
    चालकता ( G )1 / प्रतिरोध
    फैराडे नियतांक ( F )आवोगाद्रो नियतांक × मूल आवेश
    प्रेरणिक प्रतिघात ( X L)कोणीय आवृत्ति × प्रेरकत्व
    धारितीय प्रतिघात ( X C)( कोणीय आवृत्ति × धारिता ) -1
    विद्युत क्षेत्र ( E )विद्युत बल / आवेश
    चुम्बकीय क्षेत्र ( B )बल / धारा × लम्बाई
    विद्युत फ्लक्स ( ΦE )विद्युत क्षेत्र × क्षेत्रफल
    विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ( P )बल आघूर्ण / विद्युत क्षेत्र
    गुरुत्वाकर्षण स्थिरांकG बल x ( दुरी / द्रव्यमान )2
    फ्री फॉल अक्सेलरेशनaf = ag – w2 R

    महत्वपूर्ण उपकरण और डिवाइस

    फिजिक्स के उपकरण और डिवाइस आज के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। विद्युत उपकरण जैसे बल्ब, ट्यूब लाइट, फैन, एयर कंडीशनर, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर आदि फिजिक्स के उपकरण हैं। इन उपकरणों के बिना हमारा जीवन अधूरा हो जाएगा। इनके अलावा फिजिक्स के उपकरण जैसे लेजर, एक्स-रे, एमआरआई, टेलीस्कोप, माइक्रोस्कोप, सैटेलाइट, रोबोट आदि भी हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन उपकरणों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में जैसे चिकित्सा, इंजीनियरिंग, विज्ञान, रक्षा आदि में किया जाता है।

    निम्न टेबल मे हम उपकरण और डिवाइसओं के साथ-साथ उनकी आसान परिभाषाओं को भी जानेगे ।

    उपकरणफंक्शन
    स्पीडोमीटर (Speedometer)वाहन की गति को मापने और प्रदर्शित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला उपकरण।
    एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer)यह एक ऐसा उपकरण है जो त्वरण (Acceleration) को मापता है।
    डायनामोमीटर (Dynamometer)आमतौर पर इस उपकरण का उपयोग  टार्क, बल को मापने के लिए किया जाता हैऔर इसके साथ ही शरीर की पॉवर भी मापता है।
    एनेमोमीटर (Anemometer)इस उपकरण के माध्यम से हम हवा की गति को माप सकते हैं।
    गेल्वेनोमीटर (Galvanometer)यह एक विद्युत यांत्रिक (Electromechanical) उपकरण है जिसका उपयोग विद्युत प्रवाह (Electric Current) के संकेत का पता लगाने के लिए किया जाता है।
    बैरोमीटर (Barometer)बैरोमीटर एक वैज्ञानिक उपकरण है जिसका प्रयोग मौसम विज्ञान और वायुमंडलीय दबाव की गणना के लिए किया जाता है।
    विस्कोमीटर (Viscometer)इस उपकरण के माध्यम से हम किसी फ्लूइड की श्यानता (Viscosity) की गणना कर सकते हैं।
    सीस्मोमीटर (Seismometer)यह उपकरण पृथ्वी की पपड़ी (Crust) के अंदर रैंडम मोशन का आकलन और मापने में मदद करता है जो भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट आदि से होती है।
    वोल्टमीटर (Voltmeter)वोल्टमीटर का उपयोग करके हम दो दिए गए बिंदुओं के बीच की विद्युत क्षमता को माप सकते हैं।
  • Night Vision (रात्रि दृष्टि) उपकरणों में कौन सी किरणों का प्रयोग किया जाता है ?

    Night Vision (रात्रि दृष्टि) उपकरणों में कौन सी किरणों का प्रयोग किया जाता है ?

    नाइट विजन उपकरणों में अवरक्त तरंगों का प्रयोग किया जाता है अवरक्त तरंगों की खोज विलियम हरशैल ने की थी

    अवरक्त किरणें, अधोरक्त किरणें या इन्फ़्रारेड वह विद्युत चुम्बकीय विकिरण है जिसका तरंग दैर्घ्य (वेवलेन्थ) प्रत्यक्ष प्रकाश से बड़ा हो एवं सूक्ष्म तरंग से कम हो।

    इसका नाम ‘अधोरक्त’ इसलिए है क्योंकि विद्युत चुम्बकीय तरंग के वर्णक्रम (स्पेक्ट्रम) में यह मानव द्वारा दर्शन योग्य लाल वर्ण से नीचे (या अध:) होती है।

    इसका तरंग दैर्घ्य 750 nm and 1 mm के बीच होता है। सामान्य शारिरिक तापमान पर मानव शरीर 10 माइक्रॉन की अधोरक्त तरंग प्रकाशित कर सकती है !

    यह तरंगे पदार्थों को उच्च ताप पर गर्म करने पर निकलती हैं इनका उपयोग अस्पतालों में रोगियों की सिकाई करने में एवं कोहरे में फोटोग्राफी करने में भी किया जाता है !

  • शुष्क सेल (Dry Cell) बनाने में क्या प्रयोग किया जाता है ?

    शुष्क सेल (Dry Cell) बनाने में क्या प्रयोग किया जाता है ?

    शुष्क सेल में अमोनियम क्लोराइड तथा जिंक क्लोराइड का प्रयोग विद्युत अपघटन के रूप में किया जाता है |

    ड्राई-सेल बैटरी एक या एक से अधिक इलेक्ट्रोकेमिकल कोशिकाओं से बना एक उपकरण है जो संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।

    इसमें एक इलेक्ट्रोलाइट होता है जो पेस्ट या अन्य नम माध्यम में निहित होता है।एक मानक शुष्क सेल बैटरी में एक केंद्रीय छड़ के भीतर एक जस्ता एनोड और एक कार्बन कैथोड शामिल होता है।

    कैडमियम, कार्बन, लेड, निकल और जिंक का उपयोग विभिन्न शुष्क सेल डिजाइन और क्षमताओं के निर्माण के लिए किया जाता है, कुछ मॉडल दूसरों की तुलना में कुछ उपकरणों के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

    वेट-सेल बैटरियों के विपरीत, सूखी बैटरी फैलती नहीं है, जो उन्हें पोर्टेबल उपकरणों के लिए आदर्श बनाती है।

  • मोटर कार में रेडिएटर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

    मोटर कार में रेडिएटर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

    मोटर कार में रेडिएटर समान सिद्धांत पर कार्य करता है विधि में ऊष्मा का संचरण पदार्थ के कणों के स्थानांतरण के द्वारा होता है इस प्रकार पदार्थ के कणों के स्थानांतरण से धाराएं बहती हैं जिन्हें संवहन धाराएं कहते हैं यही समय धाराएं इंजन के वाटर पंप में पहुंचकर उसे ठंडा करती रहती है !

    रेडियेटर क्या होता है ?

    विकिरक या रेडियेटर (Radiators) एक माध्यम से दूसरे माध्यम में उष्मीय उर्जा का विनिमय करने वाली युक्ति है। इसकी सहायता से किसी चीज को गरम या ठण्डा किया जा सकता है। इनका उपयोग वाहनों, घरों, एवं विद्युत उपकरणों आदि के तापमान को सुरक्षित सीमा में बनाये रखने के लिये किया जाता है।

  • CFL  और LED में क्या अंतर है ?

    CFL और LED में क्या अंतर है ?

    पारा वाष्प से विद्युत गुजारकर CFL में पराबैंगनी प्रकाश उत्पन्न किया जाता है जिसे लैम्पके अन्दर फास्फर कोटिंग से अवशोषित कराकर रौशनी उत्पन्न की जाती है !

    LED लैम्पों में पारंपरिक अर्धचालक प्रकाश उत्सर्जक डायोडों, आर्गेनिक LED या पालीमर LED तकनीक का प्रयोग होता है |

    सफल का औसत कार्यकाल 6000 से 15000 घंटे होता है जबकि LED लैम्प सामान्यत: 25-30 साल तक चल सकता है !

    ध्यान रखें !

    • प्रकाश उत्पन्न करने के लिए सफल पारा वाष्प और स्न्दिप्क का प्रयोग करता है, जबकि LED लैम्प अर्धचालक पदार्थों का प्रयोग करता है |
    • LED लैम्प की तुलना में सफल कम ऊर्जा सक्षम है |
  • एक नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का क्या काम होता है ?

    एक नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का क्या काम होता है ?

    एक नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का कार्य न्यूट्रान की गति को कम करना है | भारी जल और कुछ नहीं बल्कि D2O है |

    डयूटेरियम और ट्राईटियम H2 के आइसोटॉप्स हैं, भारी जल हाइड्रोजन के गुरुत्तर समस्थानिक ( डयूटेरियम) और आक्सीजन का यौगिक है |

    इसका सापेक्षिक घनत्व 101 और हिमांक साधारण जल से थोड़ा आशिक होता है |

    नाभिकीय ऊर्जा के साथ – साथ अनुसन्धान रिएक्टरों के लिए आवश्यक गुरुजल की मांग की आपूर्ति के निमित्त उत्पादन के लिए गुरुजल बोर्ड, मुंबई उत्तरदायी है |

  • प्रकाश-वर्ष क्या होता है ?

    प्रकाश-वर्ष क्या होता है ?

    प्रकाश वर्ष (lightyear), जो प्रव (ly) द्वारा चिन्हित किया जाता है, लम्बाई की एक मापन इकाई है। यह लगभग 95 खरब (9.5 ट्रिलियन) किलोमीटर की होती है। अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार, एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश अपने निर्वात में एक वर्ष में पूरा कर लेता है। यह इकाई मुख्यत: लम्बी दूरियों यथा दो तारों या गैलेक्सी जैसी अन्य खगोलीय वस्तुओं की बीच की दूरी मापने में प्रयोग की जाती है।[2]

    अंकीय मान

    एक प्रकाश वर्ष बराबर होता है:

    • यथार्थतः 9,460,730,472,580.8 किमी (लगभग 10 Pm)
    • लगभग 5,878,625,373,183.61 मील
    • लगभग 63,241 खगोलीय इकाई
    • लगभग 0.3066 पारसैक

    उपरोक्त आंकडे़ जूलियन वर्ष (ना कि ग्रेगोरियन वर्ष) पूरे 365.25 दिवसों के (प्रत्येक दिवस पूरे 86,400 SI सैकिण्डों का, कुल मिलाकर 31,557,600 सैकिण्ड) बराबर होता है, जैसा कि IAU द्वारा परिभाषित है।[3]

    प्रकाश वर्ष का प्रयोग प्रायः तारों की दूरियां नापने हेतु होता है। इसकी अधिमान्य इकाई है पारसैक। पारसैक की परिभाषा अनुसार वह दूरी है जो, जितनी दूरी पर एक वस्तु दिग्भेद के एक आर्क्सैकिण्ड के बराबर हिलती प्रतीत होती है, जब प्रेक्षक एक खगोलीय इकाई अपनी दॄष्टि रेखा के अभिलम्ब चलता है। यह लगभग ३.२६ प्रकाश-वर्षों के बराबर होता है। पारसैक को अन्य इकाइयों की तुलना में अधिक सरलता से पर्यवेक्षण आंकडो़ से मिलान और व्युत्पन्न किया जा सकता है। वैसे वैज्ञानिक वर्ग में प्रकाश वर्ष ही अधिक प्रचलित है।

    प्रमुख दूरियाँ (प्रकाशवर्षों में)

    • पृथ्वी-से-सूर्य : 0.0000158125 प्रकाश वर्ष, जिसे प्रकाश 8 मिनट19.005 सैकिंड में तय करता है।
    • निकटतम तारा, प्रॉक्सिमा सेन्टॉरी: 4.2420 प्रकाशवर्ष।
    • निकटतम पड़ोसी गैलेक्सी, एण्ड्रोमेडा गैलेक्सी: 25 लाख प्रकाशवर्ष।
  • नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) क्या है ?

    नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) क्या है ?

    What is Nuclear Energy ?

    किसी रेडियोसक्रिय तत्व के नाभिक में होने वाले परिवर्तनों के दौरान नाभिक के द्रव्यमान में होने वाली क्षति का ऊर्जा में परिवर्तन के परिणामस्वरूप प्राप्त ऊर्जा की नाभिकीय ऊर्जा कहलाती है।

    यूरेनियम, रेडियम तथा थोरियम, आदि तत्वों के नाभिकों में कूल कणों (प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों) की विशेष अवस्था के कारण जो स्थितिज ऊर्जा निहित होती है वही ‘नाभिकीय ऊर्जा‘ कहते हैं। नाभिकीय ऊर्जा, एक परमाणु के नाभिक (nucleus) या कोर (core) में पाई जाने वाली ऊर्जा है

    नाभिकीय ऊर्जा के दो स्रोत हैं:

    नाभिकीय विखण्डन Nuclear Fission)

    वह नाभिकीय अभिक्रिया जिसके फलस्वरूप एक भारी नाभिक विखंडित होकर दो हल्के नाभिकों में परिवर्तित हो जाता है तथा ऊर्जा की एक विशाल राशि विमुक्त होती है, ‘नाभिकीय विखण्डन’ कहलाती है

    1. 1939 ई. में जर्मन वैज्ञानिक ऑटो हान (Otto Hahn) और स्ट्रासामान (Strassman) ने बताया कि (92U235) के नाभिक पर मंद वेग वाले न्यूट्रॉन से प्रहार करने पर यूरेनियम का नाभिक टूटकर 56BA141 तथा 36Kr92 में बदल जाता है। इस प्रक्रिया में तीन अन्य न्यूट्रॉन भी उत्पन्न होते हैं तथा ऊर्जा की एक विशाल राशि विमुक्त होती है।

    2. नाभिकीय विखंडन प्रक्रिया में नाभिक के द्रव्यमान में कुछ क्षति होती है। द्रव्यमान की यह क्षति आइन्सटीन के समीकरण E=mc2 (E= ऊर्जा, m द्रव्यमान से क्षति, C = प्रकाश का वेग) के अनुसार, ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।

    3. नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों में से कुछ न्यूट्रॉन अन्य यूरेनियम नाभिकों पर प्रहार करते हैं जिसके परिणामस्वरूप प्रारम्भिक प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है। इस प्रकार एक श्रृंखला प्रक्रिया (Chain process) प्रारंभ हो जाती है और ऊर्जा की अपार राशि विमुक्त होती है। परमाणु बम (Atom bomb) के विस्फोट में यही श्रृंखला प्रक्रिया तेजी से होती है। इस प्रक्रिया को नाभिकीय रिएक्टरों (Nuclear reactor) में नियंत्रित ढंग से सम्पन्न कराकर प्राप्त ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण एवं रचनात्मक कार्यों में किया जाता है।

    नाभिकीय संयोजन (Nuclear Fusion)

    वह नाभिकीय अभिक्रिया जिसके फलस्वरूप दो हल्के नाभिक परस्पर संयुक्त होकर एक भारी और स्थायी नाभिक का निर्माण करते हैं, ‘नाभिकीय संयोजन’ कहलाती है

    नाभिकीय संयोजन प्रक्रिया में द्रव्यमान की सदैव क्षति होती है जो आइन्सटीन समीकरण E = mc2 के अनुसार, ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। यही कारण है, कि इस प्रक्रिया में अपार ऊर्जा विमुक्त होती है,

    साथ ही इस प्रक्रिया के प्रारंभ हो जाने पर इसमें विमुक्त ऊर्जा इस प्रक्रिया को जारी रखने के लिए पर्याप्त होती है। चूंकि नाभिकीय संयोजन की प्रक्रिया अति उच्च ताप (लगभग 10 लाख) डिग्री सेल्सियस पर होती है, इस कारण इसे ‘ऊष्मा नाभिकीय अभिक्रिया’ (Thermo nuclear reaction) कहा जाता है। हाइड्रोजन बम (Hydrogen bomb) जिसकी संहारक क्षमता परमाणु बम से कई गुना ज्यादा होती है, के निर्माण में नाभिकीय संयोजन का सिद्धांत निहित है।

    उदाहरण: 1H2+1H3+2He4 +0n1+ ऊर्जा

    यह अभिक्रिया लगभग 10.6 सेकण्ड में समाप्त हो जाती है। इस क्रिया में उत्पन्न न्यूट्रॉन पुन: प्लूटोनियम या यूरेनियम पर प्रहार कर उसे विखंडित करते हैं। इसी कारण हाइड्रोजन बम की संहारक क्षमता परमाणु बम की तुलना में कई गुना अधिक होती है

    परमाणु बम, हाइड्रोजन बम, सूर्य तथा अन्य तारों में नाभिकीय ऊर्जा का रूपान्तर प्रकाश व ऊष्मा के रूप में होता है।

    नाभिकीय ऊर्जा की उपयोगिताएँ

    1. नाभिकीय रिएक्टरों में यूरेनियम (92U235) के परमाणुओं को मंद न्यूट्रॉनों द्वारा विखंडन के परिणामस्वरूप मुक्त ऊष्मा ऊर्जा की विपुल राशि से जल को भाप में बदलकर टरबाइन (Turbines) चलाये जाते हैं, जिससे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।

    2. नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग वायुयान, जहाज, पनडुब्बी, आदि चलाने में किया जाता है।

    3. रॉकेट उड़ाने में भी नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है।

    4. सूर्य एवं अन्य तारों से प्राप्त ऊष्मा एवं प्रकाश ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संयोजन अभिक्रियाएँ हैं जो वहां लगातार चलती रहती हैं।

  • नाभिकीय विखण्डन और नाभिकीय संलयन पर आधारित बम और उनके दुष्प्रभाव

    नाभिकीय विखण्डन और नाभिकीय संलयन पर आधारित बम और उनके दुष्प्रभाव

    Bombs based on nuclear fission and nuclear fusion and their side effects

    नाभिकीय अस्त्र मूलतः दो प्रकार के होते हैं (1) नाभिकीय विखण्डन पर आधारित, जैसे—परमाणु बम तथा (2) नाभिकीय संलयन पर आधारित, जैसे—हाइड्रोजन बम। इनके विस्फोट से मानव जीवन पर दूरगामी प्रभाव पड़ते है।

    वे प्रभाव चार प्रकार के हैं:

    विस्फोट तरंग

    विस्फोट की शुरुआत आग के गोले के निर्माण से शुरू होती है जिसमें धूलकणों एवं गर्म गैसों का उच्च दाब पर घना बादल होता है। विस्फोट के कुछ ही क्षण बाद ये गैसें फैलने लगती है जिससे विस्फोट तरंगें बनती है, इन्हें ‘प्रघात तरंगें’ (Shock waves) भी कहते हैं। इन विस्फोट तरंगों से 5 किलोमीटर तक के सभी लोग और 10 किलोमीटर तक के कुछ लोग मारे जाते हैं। 10 किलोमीटर क्षेत्र तक के कई अन्य व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल हो जाते हैं।

    तापीय विकिरण

    इसमें आग के गोले से निकलने वाली पराबैंगनी, अवरक्त तथा दृश्य किरणें शामिल होती हैं। पराबैंगनी किरणें वायु द्वारा शीघ्रता से अवशोषित कर ली जाती हैं और इसलिए इससे कम क्षति पहुंचती है। लेकिन दृश्य विकिरणों तथा अवरक्त विकिरणों से आंख के साथ-साथ त्वचा को भी क्षति पहुंच सकती है, इसे ‘दीप्ति जलन’ कहा जाता है। तापीय विकिरणों से अखबारों एवं सूखे पत्तों में प्रज्वलन उत्पन्न हो सकता है। इन पदार्थों के जलने से आग लगने की बड़ी घटनाएं हो सकती हैं। हिरोशिमा के 20% से 30% लोगों की मृत्यु इसी विकिरण से हुई थी

    प्राथमिक नाभिकीय विकिरण

    ये विकिरण विस्फोट के 1 मिनट के अन्दर उत्पन्न होते हैं। इसमें न्यूट्रॉन और गामा किरणें होती हैं। कुछ न्यूट्रॉन तथा गामा किरणों का उत्सर्जन आग के गोले से लगातार जारी रहता है। शेष गामा किरणों का उत्सर्जन मशरूम के आकार के उन रेडियो सक्रिय पदार्थों के बादल से होता है जो विस्फोट के फलस्वरूप बनते हैं। नाभिकीय विकिरणों से सूजन हो सकती है और मानव कोशिकाओं को क्षति पहुंच सकती है तथा कोशिकाओं का सामान्य विस्थापन भी अवरुद्ध हो जाता है। विकिरणों की बड़ी मात्रा से मृत्यु भी हो सकती है।

    अवशिष्ट नाभिकीय विकिरण

    ये विकिरण विस्फोट के 1 मिनट के बाद उत्पन्न होते हैं, इन विकिरणों में गामा किरणें तथा बीटा किरणें होते हैं। संलयन से उत्पन्न विकिरणों का निर्माण मुख्यत: न्यूट्रॉनों से होता है। ये कण चट्टानों, मिट्टी तथा जल एवं अन्य पदार्थों से टकराकर मशरूम के आकार का बादल बनाते हैं। परिणामस्वरूप, ये कण रेडियो सक्रिय हो जाते हैं। जब ये कण पृथ्वी पर पुनः गिरने लगते हैं, तो इन्हें निक्षेप (Fall out) कहा जाता है। पृथ्वी की सतह से जितना निकट विस्फोट होगा, निक्षेप का निर्माण उतना ही अधिक होगा।

  • अतिचालकता (Superconductivity) क्या है ?

    अतिचालकता (Superconductivity) क्या है ?

    What is Superconductivity ?

    अतिचालकता की खोज एक डच भौतिकशास्त्री कैमरलिंग ओनिस द्वारा 1911 में की गयी।

    अत्यन्त निम्न ताप पर कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है। इन्हें ‘अतिचालक’ (Super-conductor) कहते हैं और इस गुण को ‘अतिचालकता’ कहते हैं।

    4.2 k (अर्थात् 268.8°C) पर पारा अतिचालक बन जाता है, अर्थात् उसका विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है, यदि उस समय उसमें धारा प्रवाहित की जाए तो वह अनन्त काल तक बहती रहेगी, उसमें कोई कमी नहीं आएगी।

    कुछ मिश्र धातुएं, जैसे—नियोबियस्टन काफी ऊंचे ताप पर भी अतिचालकता प्राप्त कर लेती है।

    अतिचालक का दूसरा महत्त्वपूर्ण गुण यह होता है, कि वह पूर्णतः प्रतिचुम्बकीय होता है, अर्थात् वह पूर्ण ‘चुम्बकीय कवच’ होता है जिसे कोई चुम्बकीय बल-रेखा भेदकर उसके अन्दर नहीं जा सकती है

    क्रांतिक ताप (Critical temperature)

    कुछ अतिचालक मृत्तिकाएं (Ceramics) थौलियम (TI), बेरियम और कॉपर ऑक्साइड (Cu0) से युक्त होती हैं जिनमें 120 K ताप पर ही अतिचालकता आ जाती है। कोई पदार्थ जिस ताप पर अतिचालक बनता है उसे उसका ‘क्रांतिक ताप’ (Critical temperature) कहते हैं।

    साथ में यह भी पढ़िए अति चालक