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  • इसरो का आदित्य-एल1 (Aditya L1 Mission) मिशन (सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में)

    इसरो का आदित्य-एल1 (Aditya L1 Mission) मिशन (सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में)

    इसरो का Aditya L1 Mission (आदित्य-एल1 मिशन (संस्कृत से : आदित्य, “सूर्य”) सूर्य के अवलोकन के लिए समर्पित पहला भारतीय मिशन है जो इसरो द्वारा 2 सितंबर 2023 को लांच किया गया, साथ ही इसरो द्वारा स्थापित पहली सोलर ऑब्जर्वेटरी भी है जिसके जरिए सूर्य का अध्ययन किया जाएगा ।

    Aditya L1 मिशन की लांचिंग और प्रमुख चरण (Launch and key phases of Aditya L1 mission)

    2 सितंबर 2023 को 11:50 IST पर पीएसएलवी सी57 पर आदित्य-एल1 लॉन्च किया गया | इसरो के चंद्रमा मिशन की सफल लैंडिंग के दस दिन बाद  ही Aditya L1 ने सफलतापूर्वक अपनी इच्छित कक्षा हासिल कर ली और 12:57 IST पर अपने चौथे चरण से अलग हो गया । निगार शाजी इस महत्वकांशी परियोजना की निदेशक हैं।

    योजना के अनुसार, प्रक्षेपण के लगभग 63 मिनट बाद पीएसएलवी द्वारा आदित्य-एल1 को निचली-पृथ्वी की कक्षा में तैनात किया गया। प्रक्षेपण के बाद एल1 तक की यात्रा में लगभग 110 दिन लगने का अनुमान है, इस दौरान अंतरिक्ष यान को इस गुरुत्वाकर्षण स्थिर बिंदु तक पहुंचने के लिए आवश्यक वेग देने के लिए पांच और manoeuvre दिए जाएंगे। इनमे से दो manoeuvre पुरे हो चुके है |

    आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान सूर्य का अध्ययन करने के लिए अपने साथ कुल सात उपकरण लेकर गया है, जिनमें से चार सूर्य से प्रकाश का निरीक्षण करेंगे, बचे हुए तीन उपकरण प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के यथास्थान मापदंडों को मापेंगे | इस अंतरिक्ष यान को लैग्रेंजियन बिंदु 1 (एल1) पर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जो सूर्य की दिशा में पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर है| यह सूर्य के चारों ओर समान सापेक्ष स्थिति में चक्कर लगाएगा. इस कारण लगातार सूर्य पर नजर रख सकता है |

    L1 पर पहुंचने पर, आदित्य-L1 स्थान के चारों ओर एक कक्षा में खुद को “बांधने” के लिए एक और चाल को अंजाम देगा। इसरो के अनुसार, प्रक्षेपण के लगभग 127 दिन बाद स्थापित कक्षा अनियमित आकार की होगी और सूर्य और पृथ्वी को जोड़ने वाली रेखा के लगभग लंबवत (perpendicular to a line joining the sun and Earth) में होगी।

    Aditya L1 मिशन के पीछे की कहानी (The story behind Aditya L1 mission)

    आदित्य-एल1 का सफल प्रक्षेपण 15 वर्षों से अधिक की योजना का परिणाम है | मिशन की शुरुआत जनवरी 2008 में अंतरिक्ष विज्ञान सलाहकार समिति (एडीसीओएस) (Advisory Committee for Space Sciences (ADCOS)) की एक अवधारणा के रूप में हुई थी, एक छोटे 400 किलोग्राम (880 पाउंड) उपग्रह के रूप में जो पृथ्वी की low-Earth orbit कक्षा में रहेगा। रणनीति बनाने के डेढ़ दशक में इस मिशन का पैमाना काफी बढ़ गया और इस वृद्धि को प्रतिबिंबित करने के लिए जुलाई 2019 में इसे एक नया नाम  —  “आदित्य-एल1”  —  दिया गया।

    क्या करेगा Aditya L1 मिशन ? What will Aditya L1 mission do?

    आदित्य-एल1 पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी की दूरी पर पृथ्वी और सूर्य के बीच एल1 लैग्रेंज बिंदु (Lagrange point 1 ) के चारों ओर एक प्रभामंडल (Earth-sun system) कक्षा में परिक्रमा करेगा जहां यह सौर वायुमंडल, सौर चुंबकीय तूफान और पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण पर उनके प्रभाव का अध्ययन करेगा।

    आदित्य एल-1 सूर्य के वायुमंडल, सूर्य के परते (layers) जैसे फोटोस्फेयर (photosphere – प्रकाशमंडल), क्रोमोस्फेयर (chromosphere) और सबसे बाहरी लेयर कोरोना ( the corona) की अलग-अलग कलर बैंड में स्टडी करेगा। इसरो का कहना है कि आदित्य ए-1 पेलोड के सूट कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर गतिविधियों और उनकी विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, कण और मैग्नेटिक फील्ड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करेगा।

    आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान सूर्य के करीब नहीं आएगा, पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी की दुरी से ही यह सूर्य का अध्ययन करेगा | यह दुरी पृथ्वी और सूर्य के बीच के कुल स्थान का लगभग 1% है | इसरो के अनुसार, L1 पर प्लेसमेंट अंतरिक्ष यान को सूर्य का दृश्य देखने की अनुमति देगा जो ग्रहण (eclipses) या प्रच्छाया (occultations) से निर्बाध है।

    क्या सूर्य का अध्ययन पृथ्वी से संभव है ? Is it possible to study the Sun from Earth?

    धरती पर वायुमंडल है जो सूर्य से आने वाली ज्यादातक खतरनाक रेडिएशन को अवशोषित कर लेता है। इसलिए धरती से सूर्य का अध्ययन सही से नहीं किया जा सकता। सूर्य की स्टडी के लिए स्पेस में जाना जरूरी है और इसी कारण कई देश पहले भी अपने सोलर स्पेसक्राफ्ट लॉन्च कर चुके हैं। अमेरिका, जापान, चीन और यूरोपीय यूनियन की स्पेस एजेंसियां सूर्य की स्टडी कर रही हैं। नासा ने 2018 में पार्कर सोलर प्रोब लॉन्च किया था।

    चीन और भारत के सूर्य के अध्ययन से जुड़े सैटेलाइट में अन्तर

    हाल ही चीन ने भी सूर्य के अध्ययन से जुड़ा एक सैटेलाइट लॉन्च किया। चीन ने 8 अक्टूबर 2022 को नेशनल स्पेस साइंस सेंटर से एडवांस स्पेस बेस्ड सोलर ऑब्जर्वेटरी (ASO-S) या कुआफू-1 लॉन्च किया था। आदित्य L-1 से अगर इसकी तुलना करें तो सबसे बड़ा अंतर इसकी पृथ्वी से ऊंचाई है। ASO-S जहां धरती से 720 किमी की ऊंचाई पर है तो वहीं आदित्य L-1 की दूरी धरती से लगभग 15 लाख किमी होगी। चीन का ASO-S 859 किग्रा है। वहीं भारत का आदित्य L1 का वजन 400 किग्रा है। आदित्य एल-1 और ASO-S की धरती से दूरी सबसे खास है। क्योंकि चीन का स्पेसक्राफ्ट धरती के ऑर्बिट में है, लेकिन इसरो का आदित्य इससे बिल्कुल बाहर होगा। यानी जो चीन ने नहीं किया वह भारत करेगा।

    चीन का ASO-S दुनिया का पहला स्पेसक्राफ्ट रहा है जो सोलर फ्लेयर और कोरोनल मास इजेक्शन की एक साथ स्टडी करने में सक्षम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सैटेलाइट सूर्य की मैग्नोटिक फील्ड, सोलर फ्लेयर और कोरोनल मास इजेक्शन से जुड़ा 500 जीबी का डेटा रोज धरती पर भेजता है। वहीं सूर्य में बड़ी हलचल होने पर यह हर सेकंड तस्वीर भेजता है। वहीं, आदित्य एल-1 सोलर कोरोना की स्टडी करेगा। इसके अलावा आदित्य L-1 एक्स-रे के जरिए स्टडी करेगा।

    आदित्य-एल1 मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य (Major scientific objectives of Aditya-L1 mission)

    • सौर ऊपरी वायुमंडलीय (क्रोमोस्फीयर और कोरोना) गतिशीलता का अध्ययन।
    • क्रोमोस्फेरिक और कोरोनल हीटिंग का अध्ययन, आंशिक रूप से आयनित प्लाज्मा की भौतिकी, कोरोनल द्रव्यमान इजेक्शन की शुरुआत, और फ्लेयर्स
    • सूर्य से कण गतिशीलता के अध्ययन के लिए डेटा प्रदान करने वाले इन-सीटू कण और प्लाज्मा वातावरण का निरीक्षण करें।
    • सौर कोरोना का भौतिकी और इसका तापन तंत्र।
    • कोरोनल और कोरोनल लूप प्लाज्मा का निदान: तापमान, वेग और घनत्व।
    • सीएमई का विकास, गतिशीलता और उत्पत्ति।
    • कई परतों (क्रोमोस्फीयर, बेस और विस्तारित कोरोना) पर होने वाली प्रक्रियाओं के अनुक्रम की पहचान करें जो अंततः सौर विस्फोट की घटनाओं की ओर ले जाती हैं।
    • सौर कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र टोपोलॉजी और चुंबकीय क्षेत्र माप।
    • अंतरिक्ष मौसम के लिए ड्राइवर (सौर हवा की उत्पत्ति, संरचना और गतिशीलता)।

    आदित्य-एल1 पेलोड

    आदित्य-एल1 के उपकरणों को सौर वातावरण मुख्य रूप से क्रोमोस्फीयर और कोरोना का निरीक्षण करने के लिए ट्यून किया गया है। इन-सीटू उपकरण एल1 पर स्थानीय वातावरण का निरीक्षण करेंगे। जहाज पर कुल सात पेलोड हैं जिनमें से चार सूर्य की रिमोट सेंसिंग करते हैं और तीन इन-सीटू अवलोकन करते हैं।

    वैज्ञानिक जांच की उनकी प्रमुख क्षमता के साथ पेलोड।

    Photo courtesy – ISRO (https://www.isro.gov.in/Aditya_L1.html
  • Electric Planes – भविष्य का हवाई जहाज – बिना तेल के चलने वाला विमान

    Electric Planes – भविष्य का हवाई जहाज – बिना तेल के चलने वाला विमान

    अंतरिक्ष पर्यटन (Space Tourism) के साथ अब विमानन (Aviation) के क्षेत्र में क्रांतिकारी आविष्कारों की तैयारी हो रही है| कई कंपनियां आधुनिक तकनीक से युक्त विमान विकसित कर रही हैं जो जीवाश्वम ईंधन पर नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक मोटर (Electric Motors) की ताकत के जरिए उड़ सकेंगे | कुछ कंपनियां तो इस दशक में ही इस तरह के विमानों का व्यवसायिक उपयोग शुरू करने की योजना बना रहे हैं |

    दुनिया में अभी अंतरिक्ष पर्यटन  की बातें तो होने लगी हैं | अंतरिक्ष अनुसंधानकर्ता ऐसा रॉकेट विकसित करने में लगे हैं  जिससे लोगों को अंतरिक्ष में पहुंचाने की लागत बहुत कम हो सके | इस लिहाज से देखा जाए तो हमारा विमानन या उड्डयन (Aviation) का क्षेत्र भी पीछे नहीं रहा हैं | विशेषज्ञ विमान तकनीक में नए नवाचारों पर काम रहे हैं जिसमें व्यवसायिक विद्युतीय विमानन (Electrical Aviation) भी शामिल है |

    इनमें से फैराडेयर एविएशन (Faradair Aviation) का हाइब्रिड इलेक्ट्रिक यात्री विमान (Hybrid Electric Passenger Plane), राइट इलेक्ट्रिक का विमान (Wright Electric is an American startup company developing an electric airliner), इजराइल का  ईविएशन का एलिस (Eviation Alice), जैसे विमानों पर काम चल रहा है| फैराडेयर कंपनी एक हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक विमान की अवधारणा विकसित कर रही है जो क्षेत्रीय उड़ान विकास में बाधा डालने वाली तीन मुख्य समस्याओं (संचालन लागत(Operation Costs), उत्सर्जन (Emissions ), शोर (Noise) को हल करती है।

    फैराडेयर का विमान (Faradair’s plane)

    यूके में एक स्टार्टअप इसी व्यवसायिक इलेक्ट्रिफाइट एविएशन पर काम कर रहा है| क्षेत्रीय विमानन बाजार को देखते हुए फैराडेयर एविएशन कंपनी एक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक यात्री विमान को विकसित पर बेचने की योजना पर काम कर रही है| इसमें 19 सीटें होंगी और इसके पंखों को चलाने के ले इलेक्ट्रिक मोटर ही काफी होगी| इसके लिए जरूरी बिजली एक छोटे से गैसे टर्बाइन से आएगी|

    विमान की विशेषता

    इतना ही नहीं अतिरिक्त उठाव के लिए और छोटी हवाई पट्टी पर उड़ान भरने और उतरने के लिए भी इन विमानों में त्रिस्तरीय पंख होंगे इनसे शानदार एरोडायनामिक्स होने के बाद भी वे वर्ल्ड वार वन फाइटर प्लेन के जैसे दिखाई देते हैं| कंपनी के प्रमुख नील क्लॉग्ले का दावा है कि ऐसे विमानों में परम्परागत प्रोपेलर की तुलना में हिलने वाले कम पुर्जे होंगे| इससे वह सस्ता होने के साथ ज्यादा शांत और कम उत्सर्जन पैदा करने वाला विमान होगा|

    विमानों का उपयोग

    इस तरह के किफायती विमानों पर काम केवल यात्रियों के लिए ही नहीं बल्कि माल ढोने वाले विमानों पर भी चल रहा है| ऐसे विमान रेलवे लाइन बिछाने या सड़क बनाने के खर्चे को भी बचा सकते हैं| फैराडेयर 2025 तक इस तरह के विमान की उड़ान शुरू कर सकता और 2027 से उनका व्यवसायिक उपयोग भी शुरू हो जाएगा|

    कैलिफोर्निया की राइट इलेक्ट्रिक (Wright Electric) का plane

    लेकिन इस क्षेत्र में केवल फैराडेयर ही अकेली कंपनी नहीं है| कैलिफोर्निया की राइट इलेक्ट्रिक भी 100 सीटों वाला पूरी तरह से इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट बनाने की तैयारी में है और इस सदी के मध्य में लोगों को उपलब्ध कराने की भी तैयारी कर रही है| यह विमान वर्तमान बे146 पर आधारित होगा जिसके टर्बोफैन इंजन की जगह इलेक्ट्रिक मोटर होंगी| कंपनी की ईजीजेट से साझेदारी भी होगी और यह लंदन –पेरिस, न्यूयॉर्क वॉशिंगटन या हॉन्गकॉन्ग ताईपेई के बीच एक घंटे वाली उड़ान भी मुहैया कराएगी|

    हाइब्रिड से इलेक्ट्रिक तक का सफ़र

    ये विमान अभी हाइब्रिट विमान की तरह ही होंगे जिसमें केवल चार इंजन को ही इलक्ट्रिक मोटर से बदला जाएगा| और बाकियों को सफल परीक्षणों के बाद ही बदला जाएगा| कंपनी का कहना है कि इससे ग्राहकों में एक विश्वास विकसित करने में मदद मिलेगी| कार उद्योग भी इस तरह से बदलाव ला रहा है| लेकिन विमानन में बैटरी का उपयोग एक बड़ी चुनौती है|

    इजराली ईविएशन कंपनी का विमान

    इजराइल की एक कंपनी ईविएशन एक नौ सीटों वाला विमान विकसित कर रही है|  छोटी श्रेणी का यह विमान कई सालों से विकसित किया जा रहा है| इसे 600 मील तक की उड़ान के लिए डिजाइन किया गया है और यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है| वहीं विशाल हाइब्रिड विमान 500 किलोमीटर की दूरी तय कर सकेंगे|

    यूरोपीय विमानन कंपनी एयरबस ने 2017 वमें अपने प्रोटोटाइप हाइब्रिड विमान ई-फैन एक्स पर काम करना शुरू किया था| यह राइट इलेक्ट्रिक्स के BAe 146 पर आधारित था| लेकिन तीन साल बाद इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया| इसके अलावा एयर बस हाइड्रोजन ऊर्जा के उपयोग पर भी काम कर रही है| कंपनी की टीम क्रायोजेनिक और सुपरकंडक्टिंग तकनीकों पर काम रही हैं| कंपनी का लक्ष्य साल 2035 तक हाइड्रोजन आधारित व्यवसायिक उड़ान भरने का है|

  • Microsoft Activision Blizzard Deal                     माइक्रोसॉफ्ट और एक्टिविजन ब्लिजार्ड में हुई बड़ी डील, 68.7 अरब डॉलर में हुआ समझौता

    Microsoft Activision Blizzard Deal माइक्रोसॉफ्ट और एक्टिविजन ब्लिजार्ड में हुई बड़ी डील, 68.7 अरब डॉलर में हुआ समझौता

    माइक्रोसॉफ्ट ने घोषणा की है कि वह गेम पब्‍लिशर एक्टिविजन ब्लिजार्ड (Activision Blizzard) को 68.7 अरब डॉलर (लगभग 5,10,990 करोड़ रुपये) में खरीदेगी।

    गेमिंग की दुनिया की सबसे बड़ी डील?

    माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने घोषणा की है कि माइक्रोसॉफ्ट गेम पब्‍लिशर एक्टिविजन ब्लिजार्ड (Activision Blizzard) को 68.7 अरब डॉलर (लगभग 5,10,990 करोड़ रुपये) में खरीदेगी।

    माइक्रोसॉफ्ट की यह डील अगर सफल होती है तो यह डील कंपनी को निन्टेंडो (Nintendo) से भी बड़ी वीडियो-गेम कंपनी बना देगी।

    माइक्रोसॉफ्ट की एक्टिविजन के साथ डील को कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी डील माना जा रहा है। यह माइक्रोसॉफ्ट की पिछले 46 साल की सबसे बड़ी डील है। माइक्रोसॉफ्ट इस डील के लिए प्रति शेयर 95 डॉलर का भुगतान करेगा। ऐसा माना जा रहा है कि माइक्रोसॉफ्ट मेटावर्स की दुनिया में खुद को मजबूत बनाने के लिए इस तरह की डील करेगी।

    Xbox गेमिंग सिस्टम बनाने वाली ‘Microsoft’ ने कहा है कि कैंडी क्रश, कॉल ऑफ ड्यूटी, ओवरवॉच और डियाब्लो जैसे गेम बनाने वाली कंपनी को हासिल करना गेमर्स के लिए अच्छा होगा। कंपनी मेटावर्स के लिए भी अपनी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाएगी।

    जानते है क्या यह डील गेमर्स के लिए अच्छी साबित होगी?

    इस बारे में एनालिस्‍ट विल मैककॉन-वाइट ने कहा कि ‘Microsoft इंटलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी की अपनी वैराइटी को बढ़ाना चाहती है। उनका टारगेट वीडियो गेम को व्यापक ऑडियंस तक पहुंचाना है।’

    दूसरी ओर, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी द्वारा गेम के कंटेंट को कंट्रोल करने की संभावना भी है। इससे यह चिंता पैदा होती है कि क्या कंपनी एक्टिविजन ब्लिजार्ड द्वारा बनाए गए गेम्‍स को अपने कॉम्‍पिटिटर्स के लिए प्रतिबंधित कर सकती है।

    एनालिस्‍ट माइकल पच्टर कहते हैं कि Microsoft अपनी Xbox सब्‍सक्रिप्‍शन सर्विस में एक्टिविजन ब्लिजार्ड के गेम्‍स ला सकती है। इनमें से कुछ एक्सक्लूसिव हो सकते हैं। हालांकि उनका कहना है कि एंटीट्रस्‍ट रेगुलेटर माइक्रोसॉफ्ट को सोनी के प्लेस्टेशन से इन गेम्‍स को दूर रखने की अनुमति नहीं देंगे।

    माइक्रोसॉफ्ट और मेटा

    माइक्रोसॉफ्ट ऐसा कहता है। कुछ ऐसे तरीके भी हैं जिनसे कंपनी को मेटा जैसे कॉम्पिटिटर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है। 

    इस डील को रेगुलेटर और कॉम्‍पिट‍िटभी र्स द्वारा रोकने के लिए दबाव बना सकते हैं। बाकी टेक कंपनियों जैसे- मेटा, गूगल, एमेजॉन और ऐपल ने अमेरिका और यूरोप में एंटीट्रस्ट नियामकों का ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन ‘एक्टिविजन ब्लिजार्ड’ डील इतनी बड़ी है कि माइक्रोसॉफ्ट खुद ही रेगुलेटर की नजर में आ जाएगी। 

    माना जा रहा है कि इस डील से माइक्रोसॉफ्ट को एक्टिविजन के करीब 40 करोड़ मासिक गेमिंग यूजर्स मिलेंगे।

    इस डील के बाद माइक्रोसॉफ्ट को उम्मीद है कि कंपनी Xbox कंसोल के कारोबार का तेज विस्तार कर सकेगी। और प्रतिद्वंद्वी सोनी कॉर्प के PlayStation के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। Xbox के साथ एक्टिविज़न का एक लंबा इतिहास रहा है।

  • फेसबुक – रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – चश्मा से चलते फिरते फोटो और विडियो कैप्चर कर सकेगे यूजर

    फेसबुक – रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – चश्मा से चलते फिरते फोटो और विडियो कैप्चर कर सकेगे यूजर

    Ray-Ban and Facebook introduce Ray-Ban Stories -Smart Glasses

    फेसबुक (Facebook) कंपनी ने प्रसिद्ध चश्मा कंपनी रे-बैन (Ray-Ban) के साथ मिलकर एक ऐसा चश्मा (smart glass) विकसित किया है जिस से यूजर अपनी आँखों से जो भी देख रहा है उसका फोटो और विडियो बना सकेगा और उसको अपने सोशल मीडिया फ्रेंड्स के साथ शेयर भी कर सकेगा l कंपनी ने इस चश्मा को रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास (Ray-Ban Stories – Smart Glass) का नाम दिया है l फेसबुक ने रे-बैन के साथ मिलकर इस रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास को 20 अलग-अलग कॉम्बिनेशन में लॉन्च किया गया है।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास की खासियत क्या है ?

    What are the specifications of Ray-Ban Stories: Smart glasses 

    अपने फेसबुक ब्लॉग (https://tech.fb.com/) के जरिये फेसबुक ने बताया की रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास में 5 मेगापिक्सेल का ड्यूल इंटीग्रेटेड (dual integrated) कैमरा है। जिससे आप जो भी अपनी आँखों से देख रहे होते है उसको आसानी से कैप्चर कर सकते है l फोटो के साथ साथ इसमें यूजर कैप्चर बटन का इस्तेमाल करके या फेसबुक असिस्टेंट वॉयस कमांड (Facebook Assistant voice commands) के साथ हैंड्स-फ्री (Hands Free) का इस्तेमाल करके 30 सेकंड तक के वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकता है l इसके अलावा यूजर इसमें म्यूजिक सुन सकता है और फोन कॉल को अटेंड कर सकता है ।

    ब्लॉग में कंपनी ने कहा कि जब भी आप अपने स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल करके फोटो लेते हैं या वीडियो रिकॉर्ड करते हैं तो एक हार्ड-वायर्ड कैप्चर LED (hard-wired capture LED ) की रोशनी होगी जिससे आपके सामने वाले को पता लगेगा की आप फोटो या विडियो बना रहे है ।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – बेहतर म्यूजिक का मजा

    Ray-Ban Stories Smart Glass – Enjoy richer voice and sound transmission

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास इन-बिल्ट स्पीकर्स के साथ आता हैं और इसके तीन-माइक्रोफोन ऑडियो ऐरे (three-microphone audio array) आपके कॉल और वीडियो को एक बेहतर वॉयस और साउंड ट्रांसमिशन (richer voice and sound transmission) देते है और यूजर एक्सपीरियंस को बढ़ाते है । कंपनी ने स्मार्ट ग्लास में बीमफॉर्मिंग टेक्नोलॉजी (Beamforming technology) का इस्तेमाल किया है जो आपके कॉल के दौरान बैकग्राउंड में हो रहे शोर को कम करता है और आपके कॉलिंग को ज्यादा आसान बनाता है ।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास – अपने दोस्तों और सोशल मीडिया फॉलोअर्स के साथ स्टोरी और मेमोरी शेयर करे

    Ray-Ban Stories Smart Glass – share story and memory with friends

    रे-बैन स्टोरीज को नए फेसबुक व्यू ऐप (new Facebook View app) के साथ जोड़ा गया है ताकि यूजर्स अपनी फेसबुक पोस्ट, स्टोरीज (stories) और मेमोरी (memories) को दोस्तों और अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स के साथ शेयर कर सकें।

    फेसबुक व्यू ऐप (Facebook View app)

    फेसबुक व्यू ऐप (Facebook View app) जो iOS और एंड्रॉइड पर उपलब्ध है वो रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास से कैप्चर किए गए कंटेंट को फोन में इंपोर्ट (import), एडिट (edit) और शेयर (share) करने का आप्शन (option) देगा । यह कंटेंट को आपके फ़ोन की मेमोरी में सेव करने का option भी देगा जिसको बाद में आप edit करके शेयर कर सकते है l

    रे-बैन की स्टोरीज क्लासिक रे-बैन स्टाइल्स में 20 फॉर्म्स में मिलती हैं। वेफरर (Wayfarer), वेफेयरर लार्ज (Wayfarer Large), राउंड (Round) और क्लियर सन लेंस (Clear Sun Lense) की एक सीरीज के साथ 5 कलर में आता है। रे-बैन स्टोरीज़ स्मार्ट चश्मा एक विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पोर्टेबल चार्जिंग केस के साथ आते हैं, जिसके जरिये आप अपने चश्मे को आसानी से रिचार्ज कर सकते हैं और पूरी तरह से चार्ज होने पर आप इस चश्मा को तीन दिनों तक पहन सकते है।

    रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास की कीमत क्या है ?

    What is price of Ray-Ban Stories Smart Glass ?

    कंपनी ने रे-बैन स्टोरीज स्मार्ट ग्लास की कीमत अभी $299 USD (लगभग 21,000 रुपए) रखी है और यह 20 स्टाइल कॉम्बिनेशन में ऑनलाइन मिलेगा। भारत में अभी यह चश्मा लांच नही हुआ है l फ़िलहाल फेसबुक ने इसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड, इटली और यूके के कुछ चुनिंदा रिटेल स्टोर्स में बेचने के लिय रखा है ।

    Full Article के लिए यहाँ जाये – https://tech.fb.com/ray-ban-and-facebook-introduce-ray-ban-stories-first-generation-smart-glasses/

  • Tesla Bot क्या है?

    Tesla Bot क्या है?

    Tesla Bot एक ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसकी घोषणा हाल ही में इलोन मस्क के द्वारा की गयी है, हालांकि ये अभी नहीं बताया गया है कि ये कब तक लॉंच होगा, हालांकि टेस्ला ने अगले साल तक प्रोटोटाइप लाने का वादा किया है पर जब भी लांच हो ये एक बेहतरीन AI Robot होगा |

    • हालांकि 2019 में AI (Artificial Intelligence) को दुनिया के लिए Nuclear Bomb से भी बड़ा खतरा बताया था !
    • ये रोबोट खास तौर पर Repetitive, खतरनाक और बोरिंग काम करने के लिए बेहद उपयोगी होगा !
    • फिलहाल जो Image Tesla Bot की दिखाई गयी हैं उसमें कंधे के नीचे का शरीर पूरी तरह सफेद है जबकि सिर और गर्दन का क्षेत्र काले रंग में रंगा हुआ है !
    • जैसे ही यह कैमरे के पास आता है, इसका चेहरा दिखाई देता है जहां पर एक स्क्रीन है जिसमें चेहरे जैसी कोई संरचना नहीं है ये बताया जा रहा है कि ये स्क्रीन जरूरी जानकारियों को दिखाएगी !

    अन्य विशेषताएँ

    • टेस्ला बॉट वो हर वो काम करेगा, जिसको करने में इंसानों को महनत करनी पड़ती है, वो हर वो काम, जो असुरक्षित या फिर बोरिंग होते हैं
    • ये रोबोट 5.8 फीट (1.8 मीटर) लंबा और 125 पाउंड (57 किग्रा) वजन का होगा
    • इसके चलने की गति लगभग 5mph (8 किमी प्रति घंटे) होगी
  • स्विस वैज्ञानिकों 62.8 खरब तक मापा पाई का मान

    स्विस वैज्ञानिकों 62.8 खरब तक मापा पाई का मान

    • रेखा गणित में वृत्त की परिधि की लंबाई व व्यास की लंबाई के अनुपात को पाई कहा जाता है। इसका मान 3.14159 के बराबर होता है। पाई अपरिमेय राशि और गणितीय नियतांक है।
    • ग्राब्यूंडन विश्वविद्यालय (स्विट्जरलैंड) के वैज्ञानिकों ने गणितीय संख्या पाई को 62.8 खरब तक नापा
    • ऐसा करके उन्होने एक नया विश्व रेकॉर्ड बनाया है।
    • इसके लिए सुपर कंप्यूटर का प्रयोग किया गया।
    • गणना में 108 दिन और नौ घंटे का समय लगा।
    • अभी वैज्ञानिक गिनीज बुक ऑफ रेकॉर्ड में इसके दर्ज होने का इंतजार कर रहे हैं।
    • हालांकि तक पाई की गणना के आखिरी 10 अंक ही सार्वजनिक किए जाएंगे, जो 7817924264 आए हैं।
    • गणना के लिए 510 टेराबाइट (टीबी) का स्टोरेज इस्तेमाल किया गया।
    • इसमें 16 टीबी की 38 हार्डडिस्क तथा अन्य उपकरण शामिल हैं।
    • वैज्ञानिकों ने सॉलिड स्टेट ड्राइव (एसएसडी) के बजाय हार्डडिस्क का उपयोग किया, क्योंकि एसएसडी में गहन गणना स्टोर करते समय मामूली अंतर आने का खतरा था।
    • पाई की गणना का पिछला रेकॉर्ड अमरीका के अलबामा राज्य में टिमोथी मुलिकन ने जनवरी 2020 में बनाया था। उन्होंने पाई की 50 खरब तक गणना की। उस गणना में करीब आठ महीने लगे थे। गूगल ने 2019 में क्लाउड तकनीक के जरिए इससे आधी गणना की थी।