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  • कंप्यूटर और उससे जुड़े आविष्कारों की कहानी (Invention Story of Computer)

    कंप्यूटर और उससे जुड़े आविष्कारों की कहानी (Invention Story of Computer)

    यह कल्पना करना कठिन है कि कंप्यूटर और उनके आविष्कारों के बिना जीवन कैसा होगा। कंप्यूटर के आविष्कार से हमारे काम करने, खेलने और कम्युनिकेशन के तरीके में एक क्रांति आई है । हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां कंप्यूटर हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है । चलिए, तो आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम देखेगे की कंप्यूटर के आविष्कार मानवता के लिए क्या मायने रखते हैं और इसने हमारे जीवन में इसके आविष्कार से लेकर अब तक कैसे बदलाव किये है |

    चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) के “कंप्यूटर” और उसके आविष्कार की कहानी

    ब्रिटिश गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज को अक्सर “कंप्यूटर का जनक (“father of the computer)” होने का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि वह कंप्यूटर के विचार की कल्पना करने वाले पहले व्यक्ति थे। कंप्यूटर का विचार 1800 के दशक का है, जब चार्ल्स बैबेज ने एक अंतर इंजन (difference engine) के विचार की कल्पना की थी, एक ऐसा इंजन या उपकरण जिसे खगोलीय और गणितीय डेटा की गणना (calculate astronomical and mathematical data) करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

    जब चार्ल्स बैबेज ने पहली बार कंप्यूटर के विचार की कल्पना की, तो उन्होंने इसका वर्णन करने के लिए “कंप्यूटर” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने इसे एक डिफरेंस इंजन (Difference Engine) कहा, क्योंकि इसे संख्याओं के बीच अंतर की गणना करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

    हालाँकि, “कंप्यूटर (computer)” शब्द का अर्थ अंततः कुछ पूरी तरह से अलग हो गया। इसका उपयोग उन मशीनों का वर्णन करने के लिए किया गया था जो सूचनाओं को संसाधित (process) कर सकती थीं, डेटा संग्रहीत (data collection) कर सकती थीं और यहां तक ​​कि गणना (calculation) भी कर सकती थीं।

    “कंप्यूटर” शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए भी किया जाता था जो इन मशीनों को संचालित करते थे। कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों में, कंप्यूटर उन लोगों द्वारा संचालित किए जाते थे जिन्हें “कंप्यूटर” कहा जाता था। इन लोगों को इस बात की गहरी समझ थी कि कंप्यूटर कैसे काम करते हैं और उन्हें कई तरह के काम करने के लिए प्रोग्राम करने में सक्षम थे।

    हालाँकि, पहला कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर the Electronic Numerical Integrator and Computer (ENIAC) के आविष्कार पर चार्ल्स बैबेज के अंतर इंजन (difference engine) की परिकल्पना को मान्यता मिली       ।

    ENIAC का आविष्कार 1946 में John Mauchly और J. Presper Eckert द्वारा किया गया था। यह संग्रहीत कार्यक्रम अवधारणा का उपयोग करके बनाया गया पहला कंप्यूटर था और उस समय की किसी भी अन्य मशीन की तुलना में बहुत तेजी से गणना करने में सक्षम था।

    ENIAC एक विशाल मशीन थी जो पुरे एक कमरे जितनी जगह घेरता था और 18,000 से अधिक वैक्यूम ट्यूबों का इसमें उपयोग किया।

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    बैबेज का डिफरेंस इंजन तो कभी पूरा नहीं हुआ, लेकिन इस मशीन के आईडिया ने अन्य वैज्ञानिकों को एक ऐसी मशीन की कल्पना करने को मजबूर किया जो सूचना को संसाधित (process) कर सके ।

    इस तरह 1950 और 1960 के दशक की शुरुआत में कंप्यूटर एक बड़ी मशीन के रुप में था जो की पुरे एक कमरे जितनी जगह घेरता था और यह ज्यादातर सैन्य और बड़े व्यवसायों द्वारा उपयोग किया जाता था ।

    जैसे-जैसे समय बीतता गया और टेक्नोलॉजी advanced होती गई, कंप्यूटर छोटे और अधिक शक्तिशाली होते गए, अंततः व्यक्तिगत कंप्यूटर (personal Computer), Laptop और इंटरनेट के आविष्कार के रूप में बदल गये ।

    और इस तरह कंप्यूटर ने हमारे कम्युनिकेशन, business और entertainment के तरीके को बदल दिया। अब हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां कंप्यूटर हर जगह हैं, हमारे घरों और कार्यालयों से लेकर हमारी कारों और यहां तक ​​कि हमारी जेब में |

    कंप्यूटर के आविष्कारक और उनके आविष्कार (The Inventors of the Computer and Their Inventions)

    पहले कंप्यूटर का आविष्कार कई अलग-अलग लोगों द्वारा किया गया था, जिनमें चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage), जॉन वॉन न्यूमैन (John von Neumann) और एलन ट्यूरिंग (Alan Turing) शामिल थे। इनमें से प्रत्येक आविष्कारक ने कंप्यूटर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    चार्ल्स बैबेज को अक्सर “कंप्यूटर का जनक (“father of the computer)” होने का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि उनका डिफरेंस इंजन कंप्यूटिंग के उद्देश्य से डिजाइन की जाने वाली पहली मशीन थी।

    जॉन वॉन न्यूमैन एक गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे जिन्होंने एक संग्रहीत प्रोग्राम कंप्यूटर के विचार की कल्पना की थी, जो एक ऐसी मशीन थी जो डेटा और निर्देशों को एक ही मेमोरी में संग्रहीत कर सकती थी। एलन ट्यूरिंग एक ब्रिटिश गणितज्ञ और कंप्यूटर वैज्ञानिक थे जिन्होंने ट्यूरिंग मशीन विकसित की, जिसे आधुनिक कंप्यूटर का पहला उदाहरण माना जाता है।

    कंप्यूटर और संग्रहीत कार्यक्रम अवधारणा (Stored Program Concept) का आविष्कार

    कंप्यूटर का आविष्कार मानव इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर (significant milestone) था। कंप्यूटर के आविष्कार से पहले, सूचना को मैन्युअल रूप से या कैलकुलेटर की सहायता से संसाधित किया जाना था। लेकिन कंप्यूटर के आविष्कार के साथ, सूचनाओं को बहुत तेजी से और अधिक कुशलता से संसाधित किया जा सकता था।

    संग्रहीत कार्यक्रम की अवधारणा ((Stored Program Concept)  का आविष्कार कंप्यूटिंग में एक बड़ी सफलता थी। इस अवधारणा ने निर्देशों (instructions) और डेटा (data) को एक ही मेमोरी (memory) में संग्रहीत करने की अनुमति दी, जिससे कंप्यूटर के लिए प्रोग्राम (programme) को स्टोर (store) करना और चलाना (operate) संभव हो गया। कंप्यूटिंग में यह एक बड़ा कदम था, क्योंकि इसने कंप्यूटरों को विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए प्रोग्राम करने की अनुमति दी थी।

    समय के साथ कंप्यूटर कैसे बदल गए हैं?

    पहले कंप्यूटर के आविष्कार के बाद से, कंप्यूटर तेजी से शक्तिशाली और बहुमुखी (versatile) हो गए हैं। आज, कंप्यूटर पहले से कहीं अधिक छोटे और अधिक शक्तिशाली हैं। वे गेमिंग से लेकर जटिल वित्तीय प्रणालियों (complex financial systems) के प्रबंधन तक कई प्रकार के कार्य करने में सक्षम हैं।

    कंप्यूटर अपने यूजर इंटरफेस (user interface) के मामले में भी बदल गए हैं। कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों में, कंप्यूटर उन लोगों द्वारा संचालित किए जाते थे जिन्हें कंप्यूटर और उनकी प्रोग्रामिंग भाषा की गहरी समझ थी।

    लेकिन आज, कंप्यूटर उन लोगों द्वारा संचालित किए जाते हैं जिन्हें कंप्यूटर और उनके यूजर इंटरफेस की बुनियादी समझ है। इसने कंप्यूटर को आम जनता के लिए और अधिक सुलभ बना दिया है।

    हमारे जीवन में कंप्यूटर के लाभ

    कंप्यूटर के आविष्कार ने हमारे जीवन में कई फायदे लाए हैं। कंप्यूटर ने हमारे लिए सूचनाओं को अधिक तेज़ी से और कुशलता से संसाधित करना संभव बना दिया है। उन्होंने हमारे लिए दुनिया में कहीं से भी बड़ी मात्रा में जानकारी प्राप्त करना संभव बना दिया है।

    कंप्यूटर ने हमारे लिए एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट करना भी आसान बना दिया है। अब हम मेसेज भेज सकते हैं, इमेजेज और वीडियो शेयर कर सकते हैं और यहां तक ​​कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों को वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। कंप्यूटर ने हमारे लिए घर से काम करना भी संभव बना दिया है |

    हमारे जीवन में कंप्यूटर के नुकसान

    किसी भी तकनीक की तरह, कंप्यूटर के उपयोग के भी कुछ नुकसान हैं। मुख्य नुकसानों में से एक यह है कि गलत सूचना फैलाने के लिए कंप्यूटर का उपयोग किया जा सकता है। जैसे-जैसे कंप्यूटर तेजी से शक्तिशाली होते गए हैं, वे हैकर्स और साइबर अपराधियों के लिए एक उपकरण बन गए हैं। इससे अपराधियों के लिए लोगों की निजी जानकारी और पैसे चुराना आसान हो गया है।

    कंप्यूटर का एक और नुकसान यह है कि इसका उपयोग लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा सकता है। कंप्यूटर का उपयोग लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है, जिससे गोपनीयता की चिंता हो सकती है।

    इसके अतिरिक्त, कंप्यूटर का उपयोग लोगों की राय में हेरफेर करने और चुनाव के परिणाम में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है।

    निष्कर्ष

    कंप्यूटर के आविष्कार ने हमारे जीने, काम करने और संवाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है। कंप्यूटर ने हमारे लिए सूचनाओं को अधिक तेज़ी से और कुशलता से संसाधित करना संभव बना दिया है। उन्होंने हमारे लिए एक दूसरे के साथ संवाद करना और दुनिया में कहीं से भी बड़ी मात्रा में जानकारी प्राप्त करना आसान बना दिया है।

    हालाँकि, दुरुपयोग की संभावना (potential for misuse) और निजी जानकारी और गोपनीयता संबंधी चिंताएँ (privacy concerns) जैसी कुछ कमियां computer में है । लेकिन कुल मिलाकर, कंप्यूटर के आविष्कार का हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और इसने हमारे जीने के तरीके में क्रांति ला दी है। जब से इसका आविष्कार हुआ तब से अब तक, कंप्यूटर ने हमारे जीवन को बेहतर बनाया है ।

  • नासा जब अपना पहला अस्टोरोइड-Asteroid (क्षुद्रग्रह) का नमूना लिया  

    नासा जब अपना पहला अस्टोरोइड-Asteroid (क्षुद्रग्रह) का नमूना लिया  

    अक्टूबर 2020 में, नासा के अंतरिक्ष यान ओएसआईआरआईएस-रेक्स (OSIRIS-Rex) पृथ्वी से 321 मिलियन किलोमीटर दुरी तय करके बेन्नू नामक 4.5 अरब साल पुराने क्षुद्रग्रह से चट्टानों का सैंपल लिया । यह पहला मिशन जो था जो पृथ्वी से इतनी दूर जाकर एक एक क्षुद्रग्रह को छुआ। इस क्राफ्ट को वैज्ञानिक टीम धरातल पर उतरना चाहती थी लेकिन सतह बहुत ही ज्यादा पथरीली थी इसकी बाद वैज्ञानिकों ने एक रोबोटिक हाथ का इस्तेमाल करते हुए एक चट्टान अस्टोरोइड की उठा ली |

    जब फ्लैप ने नमूना लेने के बाद बंद होना चाहिए था उसी वक्त बड़ी रॉक की वजह से वह पूरा बंद नही हो पाया जिस वजह से कुछ सैंपल रह गये | हालाकिं नासा को भरोसा है कि वे 400 ग्राम और 1 किलो से अधिक नमूना सामग्री ले पाने में सक्षम हुए है, जो न्यूनतम लक्ष्य द्रव्यमान (60 ग्राम से अधिक) से ज्यादा है |

    क्यों है जरूरी अस्टोरोइड नमूना ?

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इसमें पानी और प्रीबायोटिक सामग्री हो सकती है, जो जीवन का निर्माण खंड है। साथ ही लौटाई गई सामग्री से वैज्ञानिकों को सौर मंडल के गठन और विकास, ग्रह निर्माण के प्रारंभिक चरणों, और कार्बनिक यौगिकों के स्रोत के बारे में अधिक जानने में सक्षम होने की उम्मीद है जिससे पृथ्वी पर जीवन का निर्माण हुआ।

    ओएसआईआरआईएस-रेक्स (OSIRIS-Rex) क्या है ?

    OSIRIS-REx (Origins, Spectral Interpretation, Resource Identification, Security, Regolith Explorer) (उत्पत्ति, स्पेक्ट्रल व्याख्या, संसाधन पहचान, सुरक्षा, रेजोलिथ एक्सप्लोरर) नासा का क्षुद्रग्रह-अध्ययन ( asteroid-study) और नमूना-वापसी (sample-return) मिशन है। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य 101955 बेन्नू (101955 Bennu) से कम से कम 60 ग्राम (2.1 औंस) का एक नमूना प्राप्त करना है |

    OSIRIS-Rex के बारे में जाने –

    https://www.nasa.gov/osiris-rex

    मिशन ओएसआईआरआईएस-रेक्स (OSIRIS-Rex)

    OSIRIS-REx को 8 सितंबर 2016 को लॉन्च किया गया था, 22 सितंबर 2017 को इसने पृथ्वी से उड़ान भरी, और 3 दिसंबर 2018 को बेन्नू अस्टोरोइड पर पहुचा । इसने अगले कई महीने सतह का विश्लेषण करने में बिताए ताकि एक उपयुक्त जगह का पता लगाया जा सके जिससे नमूना निकाला जा सके। 20 अक्टूबर 2020 को, OSIRIS-REx ने बेन्नू की सतह को छुआ और सफलतापूर्वक एक नमूना एकत्र किया। ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स के 24 सितंबर 2023 को अपने नमूने के साथ पृथ्वी पर लौटने की उम्मीद है और बाद में 99942 एपोफिस (99942 Apophis क्षुद्रग्रह) का ओएसआईआरआईएस-एपेक्स (OSIRIS-APEX ) (‘एपोफिस एपेक्स) के रूप में अध्ययन करने के लिए अपना नया मिशन शुरू करेगा, जो 2029 में उस क्षुद्रग्रह पर पहुंचेगा।

    101955 बेन्नू (101955 Bennu) क्या है ?

    101955 बेन्नू 11 सितंबर 1999 को लीनियर प्रोजेक्ट द्वारा खोजे गए अपोलो समूह में एक कार्बनयुक्त क्षुद्रग्रह है। यह एक संभावित खतरनाक वस्तु है जो सेंट्री रिस्क टेबल पर सूचीबद्ध है | इस क्षुद्रग्रह का 2178 और 2290 के बीच इसके पृथ्वी से टकराने की 1,800 में 1 संचयी संभावना है। विशेषकर 24 सितंबर 2182 को सबसे बड़ा जोखिम माना गया है | इसका नाम प्राचीन मिस्र के पौराणिक पक्षी बेन्नू के नाम पर रखा गया है, जो सूर्य, सृष्टि और पुनर्जन्म से जुड़ा है।

  • कार के आविष्कार की कहानी

    कार के आविष्कार की कहानी

    कार आजकल के समय में यातायात के प्रमुख साधनों में से एक है, और सिर्फ ये ही नहीं कार बहुत समय से Status Symbol भी है, पर क्या आपको पता है कार का आविष्कार किसने और कब किया था और ये कैसे संभव हुआ था ?

    ऐसी दिखती थी पहली कार

    लेकिन दुनिया में पहली बार सफलतापूर्ण कार का आविष्कार कार्ल बेन्ज़ (Karl Benz) ने किया,

    जर्मन मैकेनिकल इंजीनियर कार्ल बेन्ज़ पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1885 में इंटरनल कंबशन इंजन से चलने वाली पहली कार बनाई थी।

    बेन्ज़ द्वारा बनाई गई पहली कार एक तीनपहिया वाहन की तरह दिखती थी, जिसमें लगभग साइकिल के आकार के पहिये लगे हुये थे। उसे Motorwagen’ नाम दिया गया था।

    उसे चलाने के लिए पेट्रोल की आवश्यकता होती थी। उस मोटरवैगन में 954 CC का हल्का इंटरनल कंबशन इंजन लगा था !

    कार्ल बेन्ज़ ने सन् 1885 में ही मोटरकार बना ली थी, लेकिन उन्हें इस आविष्कार के लिए पेटेंट जनवरी, 1886 में मिला।

    पहली बार उस मोटरकार का सार्वजनिक प्रदर्शन 3 जुलाई, 1886 को जर्मनी के मानहाइम शहर में किया गया था।

    कार्ल बेन्ज़ की मोटरवैगन को लंबी दूरी तक पहली बार उनकी पत्नी बार्था ने ही चलाया था। 5 अगस्त, 1888 को उनकी पत्नी ने अपने दो बच्चों के साथ 105 किलोमीटर लंबी यात्रा इससे पूरी की थी।

    Bertha Benz, wife and business partner of automobile inventor Karl Benz.  via Vintage Everyday | Vintage photos, Benz, Cute cars

    कार्ल बेन्ज़ ने चार पहिये वाली पहली मोटरकार “Benz Velo” सन् 1894 में बनाई थी, जिसमें 3 हाॅर्स पावर का इंजन लगा था और अधिकतम रफ्तार 20 Km/hr थी।

    Benz Velo दुनिया की पहली प्रोडक्शन मोटरकार थी, जिसका उत्पादन आम लोगों के शुरू किया गया था। सन् 1894 और 1902 के बीच कुल 1200 बेन्ज़ वीलो का निर्माण किया गया था।

  • रॉकेट का आविष्कार कैसे हुआ ?

    रॉकेट का आविष्कार कैसे हुआ ?

    क्या आपने कभी सोचा है ? यदि रॉकेट का आविष्कार नहीं होता तो मानव आज अं‍तरिक्ष में नहीं जा पाता उसका अं‍तरिक्ष में जाने का सपना सपना रह जाता ! और ना ही ढेर सारी जो मिसाइल बनाई जा रही हैं वो बन पातीं !

    रॉकेट एक ऐसा वायुयान है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार करते हुए अंतरिक्ष तक पहुचता है यही एक राकेट-यान है जिस से अंतरिक्ष में यात्रा की जा सकती है कहा जाता है !

    कब हुआ था आविष्कार ?

    रॉकेट का इतिहास 13वी सदी से शुरु होता है सबसे पहले रॉकेट का अविष्कार चीन में रॉकेट का आविष्कर हुआ था और शुरु में राकेट का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जाता था | सबसे पहले राकेट का इस्तेमाल सन 1232 में किया गया था, चीनी और मंगोलों एक दूसरे के साथ युद्ध में किया था

    मंगोल लड़ाकों के द्वारा रॉकेट टेक्नोलोजी यूरोप पहुँची थी और फिर अलग अलग शासकों से यूरोप और एशिया के अन्य भागों मे प्रचलित हुई

    ये भी कहा जाता है सन् 1792 में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने अंग्रेज सेना के साथ युद्ध के समय उनके विरुद्ध लोहे के बने रॉकेटों का प्रयोग किया गया था

    कैसे उड़ता है रॉकेट

    रॉकेट के उड़ने का सिद्धान्त न्यूटन के गति के तीसरे नियम क्रिया तथा बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया पर आधारित है रॉकेट के अंदर तरल आक्सीजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है इसमें ईंधन को जलाया जातां है तो जिससे उच्च दाब पर गैस उत्पन्न होती है

    अंग्रेजो ने यह चीज कभी नही देखी थी पहले और वे घबरा गये और जब वे आखिर में युद्ध हार गये और बाद में अंग्रेज सेना ने रॉकेट के बारे में जाना और उसका महत्त्व को समझा और इसकी टेक्नोलोजी को विकसित कर विश्वभर में इसका इस्तेमाल अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए किया।

    तरल ईंधन वाला रॉकेट

    सन् 1926 में, रॉबर्ट गोडार्ड दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट शुरू की थी और 16 मार्च, 1926 को ऑबर्न, मैसाचुसेट्स, पर दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट प्रक्षेपण था जो 60 मील प्रति घंटा, दूर लैंडिंग 41 फुट और 184 फुट की ऊंचाई तक पहुंच गया।

  • स्टेथोस्कोप के आविष्कार की कहानी

    स्टेथोस्कोप के आविष्कार की कहानी

    स्टेथोस्कोप के आविष्कार को मेडिकल साइंस के सबसे बड़े आविष्कारों में से एक माना जा सकता है. इस विशेष यंत्र के आविष्कार का श्रेय फ्रेंच वैज्ञानिक रेने थियोफाइल हाएसेनिक लीनेक को जाता है. लेकिन स्टेथोस्कोप के आविष्कार के पीछे एक मजेदार कहानी है.

    फ्रेंच वैज्ञानिक लीनेक ने किया था आविष्कार

    रेने लीनेक का जन्म 1781 में फ्रांस में हुआ था. उन्होंने मेडिसिन की पढ़ाई अपने फिजिशन अंकल की देखरेख में नैंट्स में की. लेकिन फिर उन्हें फ्रांसीसी क्रांति में मेकिल कैडेट के तौर पर भाग लेने के लिए बुलाया गया. 1801 में उन्होंने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की और 1815 में फ्रेंच राजशाही के स्थापित होने के बाद नेककर नामक हॉस्पिटल में काम करना शुरू कर दिया.

    लीनेक ने कैसे किया स्टेस्थेकोप का आविष्कार

    लीनेक ने स्टेथोस्कोप का आविष्कार 1816 में किया था और इसकी वजह बनी उनकी शर्म और झिझक, दरअसल स्टेथोस्कोप के आविष्कार से पहले डॉक्टर किसी मरीज की जांच के लिए उसके सीने के पास कान लगाकर उसकी धड़कनें सुनते थे. लीनेक जब हार्ट की किसी समस्या से जूझ रही महिला की जांच कर रहे थे तो उन्हें थोड़ा झिझक महसूस हुई.

    लीनेक ने इस स्थिति से बचने के लिए कागज को मोड़कर उससे ट्यूब जैसी सरंचना बनाई. ट्यूब के एक सिरे को महिला के चेस्ट पर दबाया और दूसरे सिरे को अपने कान के पास लगाकर उसकी हार्ट बीट सुन ली. कहा जाता है कि लीनेक को ऐसा करने की प्रेरणा इसलिए मिली क्योंकि वह बांसुरी भी बजाया करते थे.

    तो लीनेक की यह झिझक स्टेथोकोप के आविष्कार की वजह बन गई.

    अपने इस प्रयोग से उत्साहित लीनेक ने बाद में लकड़ी के कई खोखले मॉडल बनाए जिसके एक सिरे पर माइक्रोफोन लगा था और दूसरे सिरे पर ईयरपीस और उन्होंने इसे नाम दिया स्टेथोस्कोप. स्टेथोस्कोप नाम देने की भी वजह है. दरअसल स्टेथोस्कोप ग्रीक भाषा के शब्द stethos (यानि की चेस्ट) और scopos (परीक्षण) से मिलकर बना है. यानि चेस्ट के परीक्षण को स्टेथोस्कोप कहा जाता है.

    लीनेक का यह आविष्कार फ्रांस से निकलकर धीरे-धीरे यूरोप और फिर अमेरिका तक फैल गया. 1826 में ट्यूबरक्‍यूलोसिस के कारण लीनेक की महज 45 वर्ष की उम्र में मौत हो गई. लेकिन उन्हें अपने इस महत्वपूर्ण आविष्कार के महत्व का अंदाजा अच्छी तरह से था इसलिए उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी विरासत कहा था.