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  • विज्ञान के रासायनिक सूत्र | केमिस्ट्री फॉर्मुलाज़ Chemistry Formulas in Hindi

    विज्ञान के रासायनिक सूत्र | केमिस्ट्री फॉर्मुलाज़ Chemistry Formulas in Hindi

    रासायनिक सूत्र (Chemistry Formula) प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण होते है | इस आर्टिकल में हम केमिस्ट्री यानी रसायन विज्ञान के रासायनिक सूत्रों के बारे में बात करेगे | केमिस्ट्री फॉर्मुलाज़ कैसे लिखे जाते हैं, केमिस्ट्री फॉर्मुलाज़ कैसे बनाए जाते हैं |

    रसायन विज्ञान में रासायनिक सूत्र बहुत महत्त्व रखते है और केमिस्ट्री की हर अभिक्रियाओं में इन रासायनिक सूत्रों यानी केमिस्ट्री फार्मूला का प्रयोग होता है। इस लेख में हमने महत्वपुर्ण और रोजाना इस्तेमाल होने वाले रासायनिक सूत्रों को शामिल किया है।

    इन रासायनिक सूत्रों की लिस्ट में लगभग सभी सूत्र आसानी से मिल जायेगे और यह रासायनिक सूत्र लिस्ट class 9, 10, 11, 12 एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।

    रसायन विज्ञान क्या है ? What is Chemistry

    रसायन विज्ञान पदार्थ के गुणों और व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है। यह प्राकृतिक विज्ञान के तहत एक भौतिक विज्ञान है जो तत्वों को शामिल करता है जो परमाणुओं, अणुओं और आयनों से बने यौगिकों को बनाते हैं | यह विज्ञानं तत्वों की संरचना, गुण, व्यवहार और अन्य पदार्थों के साथ प्रतिक्रिया के दौरान होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है । रसायन विज्ञान रासायनिक यौगिकों में रासायनिक बंधों की प्रकृति को भी संबोधित करता है।

    केमिस्ट्री यानी रसायन विज्ञान, भौतिकी (physics) और जीव विज्ञान (Biology) के बीच एक मध्यवर्ती स्थान रखता है। इसे कभी-कभी केंद्रीय विज्ञान कहा जाता है क्योंकि यह मौलिक स्तर पर बुनियादी और अनुप्रयुक्त वैज्ञानिक दोनों विषयों को समझने के लिए एक आधार प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, रसायन विज्ञान पौधों की वृद्धि (वनस्पति विज्ञान), आग्नेय चट्टानों के निर्माण (भूविज्ञान), वायुमंडलीय ओजोन का निर्माण कैसे होता है और पर्यावरण प्रदूषकों का क्षरण (पारिस्थितिकी), चंद्रमा पर मिट्टी के गुण (ब्रह्मांड रसायन), कैसे दवाएं काम करती हैं (फार्माकोलॉजी), और अपराध स्थल पर डीएनए साक्ष्य कैसे एकत्र करें (फोरेंसिक) के पहलुओं की व्याख्या करता है |

    रासायनिक सूत्र (Chemistry formula or केमिकल सिंबल्स in Hindi) 

    किसी एक ही तत्व अथवा विभिन्न तत्वों के परमाणु आपस में संयोग करके अणु बनाते हैं। अणुओं को उनके परमाणुओं के प्रतीकों के समूह द्वारा निरूपित करने पर उनके रासायनिक सूत्र (Chemistry formula in Hindi) प्राप्त होते हैं।

    रसायन विज्ञान के अध्ययन में हम विभिन्न तत्वों के नाम पढ़ते हैं जिन्हें अलग अलग चिन्ह के नाम से जाना जाता है जैसे हम हाइड्रोजन (Hydrogen) को H लिखते हैं। जर्मन वैज्ञानिक बर्जीलियस ने इसे विकासित किया था। 

    (i) किसी तत्व के नाम का प्रथम अक्षर उस तत्व का संकेत होता है। उदाहरण-

    तत्व का नामसंकेततत्व का नामसंकेत
    हाइड्रोजन (Hydrogen)Hकार्बन (Carbon)C
    नाइट्रोजन (Nitrogen)Nऑक्सीजन (Oxygen)O
    फ्लोरीन (Fluorine)Fफॉस्फोरस (Phosphorus)P
    (ii) यदि दो या दो से अधिक तत्वों के नाम एक ही अक्षर से शुरू होते हों, तो ऐसी स्थिति में प्रत्येक तत्व के नाम का प्रथम अक्षर तथा उसके नाम का कोई अन्य प्रमुख अक्षर उस तत्व के संकेत के लिए प्रयुक्त किये जाते हैं। संकेत का प्रथम अक्षर हमेशा बड़ा (Capital) तथा दूसरा अक्षर हमेशा छोटा (small) लिखा जाता है। उदाहरण से समझते है :
    तत्व का नामसंकेततत्व का नामसंकेत
    बेरियम (Barium)Baमैग्नीशियम (Magnesium)Mg
    कैल्सियम (Calcium)Caक्लोरीन (Chlorine)Cl
    ब्रोमीन (Bromine)Brबिस्मथ (Bismuth)Bi
    मैंगनीज (Manganese)Mnमॉलिब्डेनम (Molybdenum)Mo
    (iii) कुछ तत्वों के संकेत उनके लैटिन नामों पर आधारित होते हैं। उदाहरण-
    तत्व का सामान्य नामतत्व का लैटिन नामसंकेत
    सोडियम (Sodium)नैट्रियम (Natrium)Na
    तांबा (Copper)क्यूप्रम (Cuprum)Cu
    पोटैशियम (Potassium)कैलियम (Kalium)K
    चाँदी (Silver)अर्जेण्टम (Argentum)Ag
    लोहा (Iron)फेरम (Ferrum)Fe
    सोना (Gold)औरम (Aurum)Au

    रासायनिक सूत्र के प्रकार

    रासायनिक सूत्र साधारणतः का तीन प्रकार के होते हैं।
    1. मूलानुपाती सूत्र
    2. अणु सूत्र
    3. संरचना सूत्र

    मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula)

    किसी तत्व का वह सरल सूत्र जो तत्व में उपस्थित परमाणुओं की संख्याओं के अनुपात को व्यक्त करता है। उदाहरण के लिए- कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) के परमाणुओं की संख्या का सरल अनुपात 1:3 है, अतः एथेन का मूलानुपाती सूत्र CH3 होता है। एथेन (C2H2) के एक अणु में कार्बन और हाइड्रोजन के क्रमशः 2 एवं 6 परमाणु हैं। इसी प्रकार एसीटिलीन (C2H2) तथा बेंजीन (C6H6) का मूलानुपाती सूत्र CH होता है, क्योंकि इन दोनों यौगिकों में कार्बन और हाइड्रोजन के परमाणुओं की संख्या का सरल अनुपात 1 : 1 है।

    अणु सूत्र (Molecular Formula)

    किसी तत्व का वह सूत्र जो उसके एक अणु में उपस्थित विभिन्न परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाता है वह अणु सूत्र कहलाता है। उदाहरण के लिए, जल के एक अणु में हाइड्रोजन के दो तथा ऑक्सीजन का एक परमाणु होते हैं। अतः जल का अणु सूत्र H2O होता है। इसी प्रकार हाइड्रोजन के एक अणु में हाइड्रोजन के दो परमाणु होते हैं, अतः हाइड्रोजन का अणुसूत्र H2 होता है।

    संरचना सूत्र (Structural Formula)

    रासायनिक यौगिकों के अणुओं की संरचना के ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन को संरचना सूत्र कहते है जैसे- CH3–CH2–OH

    रासायनिक अम्ल के सूत्र (Formulas of Chemical Acid)

    एसिड का नामरासायनिक अमल रासायनिक सूत्र (Chemical Formulas )
    Acetic acidएसिटिक अम्लCH₃COOH
    Sulfuric acidसल्फ्यूरिक अमलH₂SO₄
    Oxalic acidऑक्जेलिक अम्ल C₂H₂O₄
    Hydrochloric acidहाइड्रोक्लोरिक अमलHCl
    Tartaric acidटार्टरिक अम्लC₄H₆O₆
    Lactic acidलैक्टिक अम्लC₃H₆O₃
    Nitric acidनाइट्रिक अम्लHNO₃
    Formic acidफॉर्मिक अम्लCH₂O₂
    Phosphoric acidफास्फोरिक अम्लH₃O₄P
    Uric acidयूरिक अम्लC5H₄N₄O₃
    Carbonic acid कार्बनिक अम्लH₂CO₃
    Nitrous acidनाइट्रिक अम्लHNO₂
    Phosphorus acidफास्फोरस अम्ल H₃PO₃
    Acetate acidएसीटेट अम्लC₂H₃O₂
    Hydrobromic acidहाइड्रोब्रॉमिकअम्ल HBr
    Citric acidसिट्रिक एसिडC6H8O7
    Chromic acidक्रोमिक अम्ल H₂CrOI₄
    Bromic Acidब्रोमिक  अम्ल HBRO₃

    केमिकल गैसेस फॉर्मुलाज़ (Chemical Gases Formulas)

    रासायनिक यौगिककेमिकल नाम रासायनिक सूत्र (Chemical Formulas )
    जिप्समसोडियम क्लेराइडCaSO₄·₂H₂O
    धोने का सोडासोडियम कार्बोनेटNa₂CO₃
    ब्लीचिंग पाउडरकैल्शियम हाइपो क्लोराइडCa(ClO)₂
    सुहागाबोरेक्सNa₂(B₄O₅(OH)₄)·8H₂O
    बुझा चूनाकैल्शियम हाइड्रोक्साइडCaCO
    गंधकसल्फ्यूरिक अम्लH₂SO₄
    श्वेत पोटाशपोटेशियम क्लोरेटKClO₃
    नीला थोथाकॉपर सल्फेटCuSOI4
    हाइपोसोडियम थायो सल्फेटNa₂S₂O₃
    भारी जलड्यूडेरियम ऑक्साइडD₂O
    शुष्क बर्फकार्बन डाइ ऑक्साइडCO₂
    साल्ट केकसोडियम सल्फेटNa₂SOI4
    आंसू गैसक्लोरोपिक्रिन या क्लोरो एसीटोफिनोनH₃PO₃
    मार्श गैसमीथेनCH4
    लाफिंग गैसनाइट्रस ऑक्साइडN₂O
    गैलेनालेड सल्फाइडPbs
    चिली साल्टपीटरसोडियम नाइट्रेटNaNO₃

    कुछ महत्वपुर्ण केमिस्ट्री फॉर्मुलाज़ (important formulas of chemistry)

    सिलिकासिलिकन डाइऑक्साइडSiO2
    कार्बोरेण्डमसिलिकन कार्बाइडSiC
    आर्सींनआर्सेनिक हाइड्राइडAsH3
    नीला कसीसकॉपर सल्फेटCuSO4.5H2O
    लिथोपोनजिंक सल्फाइड और बेरियम सल्फेट का मिश्रणZnS+BaSO4
    प्रोड्यूसर गैसकार्बन मोनोक्साइड और नाइट्रोजन गैस का मिश्रणCO+N2
    मार्श गैसमिथेनCH4
    गेमेक्सीनबेंजीन हेक्साक्लोराइडC6H6Cl6
    फॉस्जीनकार्बोनिल क्लोराइडCOCl2
    सिरकाएसीटिक अम्ल का तनु विलयनCH3COOH
    कार्बोलिक अम्लफिनॉलC6H5OH
    ऐल्कोहॉलइथाइल ऐल्कोहॉलC2H5OH
    वुड स्पिरिटमिथाइल ऐल्कोहॉलCH3OH
    मण्डस्टार्चC6H10O5
    टी.एन.बी.ट्राइ नाइट्रो बेंजीनC6H3(NO2)3
    टी.एन.टी.ट्राइ नाइट्रो टॉल्वीनC6H3(NO2)3
    अंगूर का रसग्लूकोजC6H12O6
    फार्मेलीनफार्मेल्डिहाइड का 10% विलयनHCHO
    फ्रीऑनडाइक्लोरोडाइफ्लोरो कार्बनCF2Cl2
    क्लोरोफॉर्मट्राइ क्लोरो मिथेनCHCl3
    आयडोफॉर्मट्राइआयडो मिथेनCHI3
    पायरीनकार्बन टेट्रा क्लोराइडCCI4

    रासायनिक सूत्र लिस्ट (List of chemistry formulas)

    रसायनिक सूत्र लिस्ट को निम्न प्रकार प्रस्तुत किया गया है।

    क्रम संख्यारासायनिक सूत्ररासायनिक नाम
    1NaClसोडियम क्लोराइड
    2NaOHसोडियम हाइड्रोक्साइड
    3Na2CO3सोडियम कार्बोनेट
    4Na2SO4सोडियम सल्फेट
    5NaHSO4सोडियम बाइसल्फेट
    6NaHCO3सोडियम बाइकार्बोनेट
    7Na2S2O3सोडियम थायोसल्फेट
    8NaNO2सोडियम नाइट्राइट
    9NaNO3सोडियम नाइट्रेट
    10Na2O2सोडियम पराॅक्साइड
    11KOHपोटैशियम हाइड्रोक्साइड
    12KClपोटैशियम क्लोराइड
    13KCNपोटैशियम साइनाइड
    14K2SO4·Al2(SO4)3पोटैशियम सल्फेट एल्युमीनियम
    15K2SO4·Al2(SO4)3·24H2Oपोटाश एलम (फिटकरी)
    16CaOकैलशियम ऑक्साइड
    17CaCO3कैल्शियम कार्बोनेट
    18Ca(OH)2कैल्शियम हाइड्रोक्साइड
    19CaOCl2कैल्शियम क्लोरो हाइपोक्लोराइट
    20CaSO4कैल्शियम सल्फेट
    21CaCl2कैल्शियम क्लोराइड
    22CaH2कैल्शियम हाइड्राइड
    23CaC2कैल्शियम कार्बाइड
    24CHCl3क्लोरोफॉर्म
    25CHI3आयोडोफॉर्म
    26CH4मेथेन
    27CH3COOHएसिटिक अम्ल
    28CH3CNमैथिल सायनाइड
    29CH3NH2मैथिल अमीन
    30CH3COONaसोडियम ऐसीटेट
    31HClहाइड्रोक्लोरिक अम्ल
    32HNO3नाइट्रिक अम्ल
    33HCNहाइड्रोजन सायनाइड
    34H2SO4सल्फ्यूरिक अम्ल
    35HCOOHफार्मिक अम्ल
    36H3PO4ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल
    37H2O2हाइड्रोजन पराॅक्साइड
    38H2Oजल
    39HIहाइड्रोजन आयोडाइड
    40CCl4कार्बन टेट्राक्लोराइड
    41C2H5HSO4एथिल हाइड्रोजन सल्फेट
    42CO2कार्बन डाइऑक्साइड
    43C2H2एसिटिलीन
    44C2H4एथिलीन
    45C2H6एथेन
    46C6H6बेंजीन
    47C6H5CH3टाॅलूईन
    48C6H5NH2एनिलीन
    49C6H5COOHबेंजोइक अम्ल
    50C12H22O11सुक्रोस (चीनी)
    51C6H12O6ग्लूकोस या फ्रेक्टोस
    52C2H5CNएथिल सायनाइड
    53C2H4(OH)2एथिलीन ग्लाइकोल
    54C6H5OHफिनाॅल
    55C3H8प्रोपेन
    56C4H10ब्यूटेन
    57C5H12पेण्टेन
    58NH3अमोनिया
    59NH4Clअमोनियम क्लोराइड
    60NH2CONH2यूरिया
    61N2Oनाइट्रस ऑक्साइड
    62ZnSO4जिंक सल्फेट
    63ZnOजिंक ऑक्साइड
    64ZnCO3जिंक कार्बोनेट
    65FeCl2फेरस क्लोराइड
    66FeCl3फेरिक क्लोराइड
    67NaAlO2सोडियम एलुमिनेट
    68CuOकॉपर ऑक्साइड
    69CuSO4कॉपर सल्फेट
    70Cu(NO3)2कॉपर नाइट्रेट
    71HgCl2मरक्यूरिक क्लोराइड
    72HgSमरक्यूरिक सल्फाइड
    73PbOलेड मोनोऑक्साइड
    74Pb(NO3)2लेड नाइट्रेट
    75AgNO3सिल्वर नाइट्रेट
    76Mg(OH)2मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड
    77MgCO3मैग्नीशियम कार्बोनेट
    78D2Oड्यूटिरियम ऑक्साइड (भारी जल)
    79CO(NO3)2कोबाल्ट नाइट्रेट
    80O2ऑक्सीजन
    81O3ओजोन

    रासायनिक सूत्रों से जुड़े प्रश्न उत्तर

    प्रश्न –  रासायनिक सूत्र क्या है इसे कैसे लिखा जाता है?

    उत्तर – रासायनिक सूत्र (chemical formula) किसी रासायनिक यौगिक को इस प्रकार निरूपित करता है जिससे पता चलता है कि वह यौगिक किन-किन तत्वों के कितने-कितने परमाणुओं से मिलकर बना है। सामान्य प्रयोग में प्रायः अणुसूत्र (molecular formula) के लिये भी ‘रासायनिक सूत्र (Chemistry Formula)’ का ही प्रयोग कर दिया जाता है।

    प्रश्न –  कौन-सा धातु जल में डालने पर तैरने लगता है ?

    उत्तर – कैल्सियम धातु जल में डालने पर तैरने लगता है।

    प्रश्न –  जिप्सम का रासायनिक सूत्र क्या है ?

    उत्तर – CaSO₄·₂H₂O ,जिप्सम का रासायनिक सूत्र  है।

    प्रश्न –  नीला थोथा का रासायनिक सूत्र क्या है ?

    उत्तर – CuSO₄,नीला थोथा का रासायनिक सूत्र।

    प्रश्न –  लाल दवा का रासायनिक सूत्र क्या है ?

    उत्तर – लाल दवा का रासायनिक KMnO₄ है 

    प्रश्न –  धोने का सोडा यानि सोडियम कार्बोनेटका रासायनिक सूत्र क्या है ?

    उत्तर – Na₂CO₃धोने का सोडा यानि सोडियम कार्बोनेटका रासायनिक सूत्र है।

    प्रश्न –  किसी रासायनिक अभिक्रिया में ऑक्सीजन के अनुपात का बढ़ना क्या कहलाता है ?

    उत्तर – उपचयन अभिक्रिया

    प्रश्न –  सिलिका एलुमिनियम आक्साईड का व्यावसायिक नाम क्या है ?

    उत्तर – सिलिका एलुमिनियम आक्साईड का व्यावसायिक नाम स्लेट है 

    प्रश्न –  पोटैसियम नाइट्रेट का रासायनिक सूत्र क्या है ?

    उत्तर – पोटैसियम नाइट्रेट का रासायनिक सूत्र KNO₃ है ।

    प्रश्न –  कौन सी अभिक्रियाओं के युग्म हमेशा साथ-साथ होते हैं ?

    उत्तर – उदासीनीकरण और विस्थापन

    प्रश्न –  दही में किस प्रकार का अम्ल पाया जाता है ?

    उत्तर – दही में लैक्टिक अम्ल पाया जाता है

    प्रश्न –  जिप्सम का रासायनिक नाम क्या है?

    उत्तर – हरसौंठ (जिप्सम) (Ca SO4, 2H2o) एक तहदार खनिज है जिसे ‘सैलैनाइट’ भी कहते हैं। रासायनिक संरचना की दृष्टि से यह कैल्सियम का सल्फेट है, जिसमें जल के भी दो अणु रहते हैं। गरम करने से जल के अणु निकल जाते हैं और यह अजल हो जाता है। आकृति में यह दानेदार संगमर्मर सदृश होता है।

    प्रश्न –  मरकरी सल्फाइड का सामान्य नाम क्या है?

    उत्तर – मर्करी सल्फाइड को वेर्मिलिओन् के नाम से भी जाना जाता है। यह रासायनिक तत्वों पारा और सल्फर से बना एक रासायनिक यौगिक है। पारा सल्फाइड का रासायनिक सूत्र HgS है। CH4 के सूत्र के साथ मार्श गैस मिथेन का सामान्य नाम है।

    प्रश्न –  एचजीएस का रासायनिक नाम क्या है?

    उत्तर – सिन्दूर मरकरी और सल्फ़र के मिश्रण से बनता है। सिंदूर का रासायनिक सूत्र HgS होता है। इसे रसायन विज्ञान में मरक्यूरिक सल्फाइड के नाम से जाना जाता है।

    प्रश्न –  आग का सूत्र क्या होता है?

    उत्तर – आग की उत्पत्ति किसी वस्तु या ईंधन के दहन से होती है । दहन का अर्थ है जलना । सूत्र C है जो तत्व कार्बन के लिए रासायनिक प्रतीक है। सूत और ग्रेफाइट भी कार्बन परमाणुओं से बने होते हैं और इनमें एक ही रासायनिक प्रतीक होता है।

  • अम्लीय वर्षा के किसे कहते हैं ? कारण | प्रभाव | दुष्परिणाम

    अम्लीय वर्षा के किसे कहते हैं ? कारण | प्रभाव | दुष्परिणाम

    नाइट्रोजन के ऑक्साइड और सल्फर के ऑक्साइड वायुमंडल में जलवाष्प से अभिक्रिया कर क्रमशः नाइट्रिक अम्ल और सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं जो वर्षा के जल के साथ धरती पर गिरने लगते हैं जिससे अम्लीय वर्षा कहा जाता है !

    अम्लवर्षा में अम्ल दो प्रकार के वायु प्रदूषणों से आते हैं : SO2 और NO2, ये प्रदूषक प्रारंभिक रूप से कारखानों की चिमनियों, बसों व स्वचालित वाहनों के जलाने से उत्सर्जित होकर वायुमंडल में मिल जाते है।

    प्रभाव

    • अम्ल पदार्थो तथा संरचनाओं को दुर्बल बना देते है,जिससे मार्बल लाइमस्टोन सैंडस्टोन आदि से निर्मित बिल्डिंग का डैमेज होने लगता है।
    • अम्लीय बर्षा के कारण मृदा की अम्लीयता बढ़ जाती है जिसका मानव तथा जलीय जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा कृषि उत्पादकता भी कम हो जाती है।
    • अम्लीयता सॉइल माइक्रोबियल फौना तथा नाइट्रोजन फिक्सेशन को भी प्रभावित करती है मृदा रसायन में परिवर्तन होने से उत्पादकता काम हो जाती है।
    • अम्लीय वर्ष के कारण स्टाइल जिंक ऑईल बेस्ट पेंट्स तथा ऑटोमोबाइल कोटिंग्स आदि संछारण होने लगता है।

    दुष्परिणाम

    • अम्लवर्षा के कारण जलीय प्राणियों की मृत्यृ खेंतो और पेड़-पौधों की वृद्धि में गिरावट, तांबा और सीसा जैसे घातक तत्वों का पानी में मिल जाना, ये सभी दुष्परिणाम देखे जा सकते है। 
    • जर्मनी व पश्चिम यूरोप में जंगलो के नष्ट होने का कारण भी अम्लवर्षा ही है। मनुष्यों पर भी इसका परिणाम गंभीर होता है।
    • अम्लीय वर्षा के कारण आगरा का ताजमहल पीला पड़ रहा है
  • पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन का प्रयोग क्यों किया जाता है?

    पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन का प्रयोग क्यों किया जाता है?

    पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन के प्रयोग को क्लोरीनीकरण कहते हैं, क्लोरीन पानी में रोगाणुनाशक का कार्य करता है !

    कारण

    जब क्लोरीन पानी से अभिक्रिया करता है तो वह सर्वप्रथम हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है जो स्वयं ही हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ऑक्सीजन में टूट जाता है यही नया ऑक्सीजन रोगाणुनाशक व विरंजक का कार्य करता है |

    यानि पानी में क्लोरीन मिलाने से नवजान ऑक्सीज़न बनती है जो रोगाणुनाशक का कार्य करती है |

  • एंजाइम (Enzymes) क्या है ?

    एंजाइम (Enzymes) क्या है ?

    What are Enzymes ?

    अणु जीवों (किण्वों) में संकीर्ण नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ जो किण्वन की क्रिया सम्पादित करते है, ‘एन्जाइम‘ कहलाते हैं। एन्जाइम प्रत्येक जीवित प्राणी की कोशिकाओं में उपस्थित होते हैं और जीवित शरीर में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एन्जाइम को जीव रासायनिक उत्प्रेरक भी कहते हैं।

    एंजाइम (Enzymes)ऐसे प्रोटीन होते हैं जो जैविक उत्प्रेरक (जैव उत्प्रेरक) (biological catalysts) के रूप में कार्य करते हैं। उत्प्रेरक रासायनिक प्रतिक्रियाओं में तेजी लाते हैं। वे अणु जिन पर एंजाइम कार्य कर सकते हैं, सब्सट्रेट कहलाते हैं, और एंजाइम सब्सट्रेट को विभिन्न अणुओं में परिवर्तित करते हैं जिन्हें उत्पाद कहा जाता है। कोशिका में लगभग सभी चयापचय प्रक्रियाओं (metabolic processes) को जीवन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त तेजी से होने के लिए एंजाइम उत्प्रेरण (enzyme catalysis) की आवश्यकता होती है।

    मेटाबोलिक (Metabolic) pathways, individual steps को उत्प्रेरित करने के लिए एंजाइमों पर निर्भर करते हैं। एंजाइमों के अध्ययन को एंजाइमोलॉजी (enzymology) कहा जाता है और स्यूडोएंजाइम विश्लेषण का एक नया क्षेत्र हाल ही में विकसित हुआ है, यह मानते हुए कि विकास के दौरान, कुछ एंजाइमों ने जैविक उत्प्रेरण करने की क्षमता खो दी है, जो अक्सर उनके अमीनो एसिड अनुक्रमों और असामान्य ‘स्यूडोकैटलिटिक’ (‘pseudocatalytic’ properties) में परिलक्षित होता है।

    एंजाइमों को 5,000 से अधिक जैव रासायनिक प्रतिक्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए जाना जाता है। अन्य जैव उत्प्रेरक उत्प्रेरक आरएनए अणु हैं, जिन्हें राइबोजाइम (ribozymes) कहा जाता है। एंजाइमों की विशिष्टता उनकी अनूठी त्रि-आयामी संरचनाओं ( three-dimensional structures) से आती है।

    कुछ एंजाइम व्यावसायिक रूप से उपयोग किए जाते हैं, उदाहरण एंटीबायोटिक दवाओं के संश्लेषण (synthesis of antibiotics) में। कुछ घरेलू उधोगो में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने के लिए एंजाइम का उपयोग करते हैं बायोलॉजिकल वाशिंग पाउडर में एंजाइम कपड़ों पर प्रोटीन, स्टार्च या वसा के दाग को तोड़ते हैं l

    सर्वप्रथम फ्रांसीसी रसायनज्ञ एंसेलमे पायेन (Anselme Payen) ने 1833 में एक एंजाइम, डायस्टेस की खोज की थी l  एडुआर्ड बुचनर (Eduard Buchner) ने 1897 में खमीर के अर्क (yeast extracts) के अध्ययन पर अपना पहला पेपर प्रस्तुत किया। बर्लिन विश्वविद्यालय में प्रयोगों की एक श्रृंखला में, उन्होंने पाया कि चीनी खमीर के अर्क द्वारा किण्वित किया गया था, तब भी जब मिश्रण में कोई जीवित खमीर कोशिकाएं नहीं थीं। उन्होंने सुक्रोज के किण्वन को लाने वाले एंजाइम का नाम “ज़ाइमेज़” रखा। 1907 में, उन्हें “सेल-फ्री किण्वन (cell-free fermentation)” के लिए रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला।

    एंजाइमों को दो मुख्य मानदंडों द्वारा वर्गीकृत किया जा सकता है: या तो अमीनो एसिड अनुक्रम समानता (amino acid sequence similarity) या एंजाइमी गतिविधि (enzymatic activity)

    एन्जाइम के गुण

    1. प्रोटीन के समान संकीर्ण पदार्थ होते हैं। ये सम्पर्क उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं और उच्च कार्बनिक पदार्थों की सरलतम पदार्थों में अपघटन क्रिया को उत्प्रेरित करते हैं।

    2. ये अत्यंत ही विशिष्ट होते हैं और एक एन्जाइम केवल एक ही क्रिया को संपादित करता है।

    3. इनकी क्रियाशलता अधिक ताप (79°C) तथा विषैले पदार्थ की उपस्थिति में कम होती है या नष्ट हो

    जाती है। शरीर के ताप पर (20°C से 39°C तक) यह सबसे अच्छा काम करता है।

    4. अभिक्रियास्वरूप पदार्थों के एकत्रित हो जाने की क्रिया धीमी पड़ जाती है या नष्ट हो जाती है।

  • कांच (glass) क्या होता है ?

    कांच (glass) क्या होता है ?

    What is Glass and its properties ?

    ग्लास (कांच) विभिन्न क्षारीय धातुओं के सिलिकेटों का एक अक्रिस्टलीय पारदर्शक या अल्प पारदर्शक समांगी मिश्रण होता है।

    जब चूर्ण पिघलकर द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, तो उसे द्रव कांच (Liquid glass) कहते हैं। इस द्रव कांच को बर्तन बनाने वाले विभिन्न सांचों में डालकर धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। अतः अक्रिस्टलीय ठोस रूप में कांच एक अतिशीतित द्रव है। .

    ग्लास अक्सर पिघले हुए रूप के तेजी से ठंडा होने पर बनता है; कुछ ग्लास जैसे ज्वालामुखीय ग्लास प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। सबसे परिचित, और प्राकृतिक रूप से सबसे पुराने निर्मित ग्लास रासायनिक यौगिक सिलिका (सिलिकॉन डाइऑक्साइड, या क्वार्ट्ज) पर आधारित “सिलिकेट ग्लास” हैं, जो रेत का प्राथमिक घटक है।

    सोडा-लाइम ग्लास, जिसमें लगभग 70% सिलिका होता है, वह निर्मित ग्लास का लगभग 90% हिस्सा होता है। ग्लास शब्द, लोकप्रिय उपयोग में, अक्सर केवल इस प्रकार की सामग्री को संदर्भित करने के लिए उपयोग किया जाता है, कुछ वस्तुएं, जैसे आँखों के चश्मा आमतौर पर सिलिकेट-आधारित ग्लास से बने होते हैं कि उन्हें उस सामान के नाम से ही जाना जाता है।

    प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ओब्सीडियन ग्लास (obsidian glass ) का उपयोग पाषाण युग में किया जाता था क्योंकि ग्लास की तेज धार की वजह से इसको cutting tools और धारदार हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता था ग्लास शब्द रोमन साम्राज्य के दौरान किया गया था l सर्वप्रथम कांच का निर्माण प्राचीन काल में मिस्र (Egypt) में हुआ था।

    21 वीं सदी में, ग्लास निर्माताओं ने स्मार्टफोन, टैबलेट, कंप्यूटर और कई अन्य प्रकार के सूचना उपकरणों के लिए टचस्क्रीन के लिए रासायनिक रूप से मजबूत ग्लास के विभिन्न ब्रांड विकसित किए हैं। इनमें अमेरिकी कंपनी कॉर्निंग (Corning Incorporated) द्वारा विकसित और निर्मित गोरिल्ला ग्लास (Gorilla Glass), जापानीज कंपनी एजीसी इंक. (AGC Inc. ) के द्वारा निर्मित ड्रैगनट्रेल और शॉट एजी (Schott AG) के ज़ेनेशन (Xensation) शामिल हैं।

    कांच के प्रकार (Types of glass)

    जल कांच (Water Glass)

    सोडियम कार्बोनेट व सिलिका को गर्म करने पर सोडियम सिलिकेट प्राप्त होता है जो जल में विलेय होता है। इसे ‘जल कांच’ कहते हैं।

    फोटोक्रोमेटिक कांच (Photochromatic Glass)

    यह एक विशेष प्रकार का कांच होता है जो तीव्र प्रकाश में काला हो जाता है, अतः इसका उपयोग धूप परिरक्षक के रूप में किया जाता है। सिल्वर क्लोराइड की उपस्थिति के कारण ही इस प्रकार के कांच धूप में स्वतः काला हो जाने का गुणधर्म प्राप्त करन हैं।

    पोयरेक्स कांच (Pyrex Glass)

    इसे बोरोसिलिकेट कांच (Borsoilicate glass) भी कहते हैं। पायरेश्य काच की रासायनिक चिरस्थायित्व तथा तापीय प्रघात प्रतिरोधक क्षमता अधिक होता है।

    लेड क्रिस्टल कांच (Lead Crystal Glass)

    लेड क्रिस्टल कांच निर्मित वस्तुओं की सतहों का अलंकारिक ढंग से काटने पर इन सतहों से प्रकाश का परावर्तन प्रचुर मात्रा में होता है। फलस्वरूप ढग्य प्रकार के क्रिस्टल कांच अद्भुत झिलमिलाहट पैदा करते हैं।

    सोडा कांच (Soda Glass)

    सोडा कांच भंगुर होता है, जिस कारण यह सुगमतापूर्वक टूट जाता है, साथ ही साथ ताप में अचानक परिवर्तनों के फलस्वरूप इनमें दरारें भी पड़ जाती है। यह सबसे सस्ता व सर्वनिष्ठ कांच होता है। सोडा कांच को ‘मृदु कांच’ या Soft Glass भी कहते हैं।

    जेना कांच (Xena Glass)

    यह सर्वोत्तम श्रेणी का कांच होता है। रासायनिक पात्रों को बनाने व अन्य वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यह जिंक तथा बेरियम बोरो सिलिकेट का मिश्रण होता है।

    फिलण्ट कांच (Flint Glass)

    यह मुख्य रूप से सोडियम, पोटैशियम एवं लेड सिलिकेटों का मिश्रण होता है। इसका उपयोग उत्तम कलात्मक वस्तुओं एवं कांच के महंगे उपकरणों के निर्माण में होता है। इससे बिजली के बल्ब, दूरबीन, सूक्ष्मदर्शी, कैमरों, आदि के लेंस एवं प्रिज्म बनाये जाते हैं।

    क्राउन कांच (Crown Glass)

    यह सामान्यतः सोडा-चूना सिलिका कांच है। इसके उपयोग से चश्मों के लेंस बनाए जाते हैं।

    क्रुक्स कांच (Crooks Glass)

    इस कांच में सिरियम ऑक्साइड मिला रहता है जो हानिकारक पराबैंगनी किरणों को शोषित कर लेता है। इस कारण इससे चश्मों के लेंस बनाए जाते हैं।

    क्वार्ट्स कांच (Quartz Glass)

    इसे सिलिका कांच भी कहते हैं। इसे सिलिका को पिघलाकर प्राप्त किया जाता है। इसमें से पराबैंगनी किरणें निकल जाती हैं। अतएव यह पराबैंगनी लैम्पों के बल्ब बनाने एवं रासायनिक अभिकर्मकों को रखने के लिए पात्र बनाने के काम आता है। इसका उपयोग प्रयोगशाला उपकरणों के बनाने में भी होता है।

    कांच में रंग देने वाले पदार्थ

    संगलित कांचों में धात्विक ऑक्साइडों जैसे कुछ योगशील पदार्थों (Additives) को मिश्रित करके रंगीन कांच प्राप्त किया जाता है। उदाहरणार्थ, फेरिक ऑक्साइड मिश्रित करने के फलस्वरूप भूरे रंग का कांच प्राप्त होता है। इसी प्रकार क्रोमिक ऑक्साइड, मैंगनीज डाइऑक्साइड एवं कोबाल्ट ऑक्साइड को अलग-अलग संगलित कांचों में मिश्रित करने के फलस्वरूप क्रमशः हरे, लाल एवं नीले रंगों के कांच प्राप्त होते हैं। कांच में रंग देने के लिए उसमें अल्प मात्रा में धातुओं के यौगिक मिलाए जाते हैं।

    महत्वपुर्ण तथ्य

    कांच में क्यूलेट (Cullet) मिला देने से गलने में सुविधा होती है।

    कांच को कठोर बनाने के लिए पोटैशियम क्लोराइड का उपयोग करते हैं।

    कांच की न तो किसी प्रकार की क्रिस्टलीय संरचना होती है और न ही उसका कोई निश्चित गलनांक होता है।

    कांच का कोई निश्चित रासायनिक संघटन या सूत्र नहीं होता है क्योंकि कांच एक प्रकार का मिश्रण है।

    ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग दूरसंचार एवं शल्य-क्रियाओं (Endoscopy) में होता है।

  • उपधातु (Metalloid) क्या होते है ?

    उपधातु (Metalloid) क्या होते है ?

    What are Metalloid ?

    जो तत्व धातु और अधातु दोनों के गुण प्रदर्शित करते हैं, उन्हें उपधातु या Metalloid कहा जाता है।

    उपधातुओं की संख्या 7 है, जो इस प्रकार है— (1) बोरोन (Boron – B), (2) सिलिकन (Silicon – Si), (3) जर्मेनियम (Germanium – Ge), (4) आर्सेनिक (Arsenic – As), (5) एन्टिमनी (Antimony – Sb), (6) टेलेरियम (Tellurium – Te) और (7) पोलोनियम (Polonium – Po)

    बोरोन (Boron)

    बोरोन के यौगिक का उपयोग बोरिक एसिड नामक दवा बनाने में कांच उद्योग में, प्रयोगशाला में, बोरेक्स बीड टेस्ट, आदि में होता है। बोरोन का उपयोग अकार्बनिक ग्रेफाइट, अकार्बनिक बेंजीन तथा बोरिक एसिड बनाने में होता है। बोरिक एसिड का उपयोग एन्टीसेप्टिक दवा के निर्माण में होता है। यह कांच उद्योग में भी व्यवहृत होता है। साथ ही इसका उपयोग खाद्य-पदार्थों के परिरक्षण में होता है।

    सिलिकन (Silicon)

    सिलिकन प्रकृति में रेत (Sand) और पत्थर के रूप में अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह अपरूपता (Allotropy) घटना प्रदर्शित करता है। यह एक अधातु तत्व है। इसके हाइड्राइड ‘सिलोन’ (Silone) कहलाते हैं। पृथ्वी की सतह पर ऑक्सीजन के अतिरिक्त दूसरा बहुतायत में पाया जाने वाला तत्व सिलिकन है। पृथ्वी की परत में इसकी प्रतिशत मात्रा 26% रहती है।

    जर्मेनियम (Germanium)

    जर्मेनियम का उपयोग ट्रांजिस्टर तथा फोटो इलेक्ट्रिक सेल (Photo electric cell) में होता है। सोलर सेल में जर्मेनियम, सीजियम, आदि का उपयोग होता है।

    आर्सेनिक (Arsenic)

    कम्प्यूटर चिप्स (Computer chips) के उत्पादन में गैलियम आर्सेनाइड नामक नवीनतम पदार्थ का प्रयोग किया जा रहा है। गैलियम आर्सेनाइड अर्द्धचालक की भांति व्यवहार करता है।

    एन्टिमनी (Antimony)

    एन्टिमनी के यौगिक एन्टिमनी सल्फाइड का उपयोग दियासलाई की तिली के सिरे पर लगने वाले ज्वलनशील पदार्थ के रूप में होता है।

    टेल्यूरियम (Tellurium)

    टेल्यूरियम एक रासायनिक तत्व है जिसका प्रतीक Te और परमाणु संख्या 52 है। यह एक भंगुर, हल्का विषैला, दुर्लभ, चांदी-सफेद धातु है। टेल्यूरियम रासायनिक रूप से सेलेनियम और सल्फर से संबंधित है, ये तीनों चाकोजेन हैं। यह कभी-कभी मूल रूप में मौलिक क्रिस्टल (elemental crystals) के रूप में पाया जाता है। टेल्यूरियम पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी की तुलना में कहीं अधिक सामान्य है। पृथ्वी की पपड़ी में इसकी अत्यधिक दुर्लभता, प्लैटिनम की तुलना में, आंशिक रूप से एक वाष्पशील हाइड्राइड के गठन के कारण होती है, जिसके कारण टेल्यूरियम पृथ्वी के गर्म नेबुलर (hot nebular formation of Earth) गठन के दौरान गैस के रूप में अंतरिक्ष में खो जाता है, और आंशिक रूप से टेल्यूरियम के कारण होता है।

    पोलोनियम (Polonium)

    पोलोनियम के सर्वाधिक संख्या में समस्थानिक पाये जाते हैं। पोलोनियम प्रथम मानव निर्मित तत्व (First man made element) है।

  • अक्रिय गैस या नोबल गैस (Inert Gases) क्या होती है ?

    अक्रिय गैस या नोबल गैस (Inert Gases) क्या होती है ?

    What is Inert Gases or Noble Gases ?

    एक अक्रिय गैस एक ऐसी गैस होती है जो किन्ही दी गई शर्तों के तहत रासायनिक प्रतिक्रियाओं में भाग नही लेती है अर्थात ऐसी gas ज्यादातर पदार्थों के साथ क्रिया नही करती है। इन्हें नोबल gas भी कहा जाता है । अक्रिय गैसों का उपयोग आम तौर पर अवांछित रासायनिक प्रतिक्रियाओं (unwanted chemical reactions) से बचने के लिए किया जाता है जो एक नमूने को खराब करते हैं। ये अवांछनीय रासायनिक प्रतिक्रियाएं अक्सर हवा में ऑक्सीजन और नमी के साथ ऑक्सीकरण और हाइड्रोलिसिस प्रतिक्रियाएं होती हैं। अक्रिय गैस कुछ certain condition में और किसी पदार्थ पर निर्भर होकर प्रतिक्रिया कर लेती है ।

    शुद्ध आर्गन और नाइट्रोजन गैसों को उनकी उच्च प्राकृतिक बहुतायत (78.3% N2, 1% Ar हवा में) और कम सापेक्ष लागत के कारण अक्रिय गैसों के रूप में सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

    उत्कृष्ट गैसों के विपरीत, एक अक्रिय गैस अनिवार्य रूप से मौलिक नहीं होती है और अक्सर एक मिश्रित गैस होती है। यह एक प्रवृत्ति है, नियम नहीं, क्योंकि नोबल गैसें और अन्य “निष्क्रिय” गैसें यौगिक बनाने के लिए प्रतिक्रिया कर सकती हैं।

    समूह 18 के तत्वों में हीलियम, नियॉन, आर्गन, क्रिप्टन, क्सीनन और रेडॉन शामिल हैं। शून्य वर्ग के तत्व रासायनिक दृष्टि से निष्क्रिय होते हैं। उन्हें उत्कृष्ट गैस या अक्रिय गैस कहा जाता है। हीलियम (Helium – He) निऑन (Neon – Ne), ऑर्गन (Argon – Ar), क्रिप्टान (Krypton – Kr), जेनान (Xenon – Xe) तथा रेडॉन (Radon – Rn) आवर्त सारणी के शून्य वर्ग के तत्व हैं। ये सभी तत्व वायुमंडल में मुक्त अवस्था में पाए जाते हैं। रेडॉन (Rn) को छोड़कर अन्य सभी अक्रिय गैसें वायुमंडल में पायी जाती है। अक्रिय गैसों की खोज का श्रेय लोकेयर, रैमजे, रैले, आदि को जाता है। अक्रिय गैसों की प्राप्ति दुर्लभ होने के कारण उन्हें ‘दुर्लभ गैस’ भी कहा जाता है। वे रंगहीन, स्वादहीन और गंधहीन गैसें हैं। वे कम गलनांक और क्वथनांक प्रदर्शित करते हैं।

    हीलियम (Helium)

    हीलियम एक हल्की और अज्वलनशील गैस है। यह ब्रह्मांड में दूसरा सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्व है। इसकी खोज फ्रैंकलैण्ड और लोकेयर ने की। हीलियम का उपयोग वायुयान के टायरों में भरने के लिए किया जाता है। हल्की गैस होने के कारण हीलियम वायुयान को ऊपर उठाता है। मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए बैलून में हीलियम गैस भरकर उसे छोड़ा जाता है। हीलियम और ऑक्सीजन का मिश्रण गहरे समुद्रों में गोताखोरों द्वारा वायु के स्थान पर प्रयोग किया जाता है क्योंकि अधिक दाब पर हीलियम नाइट्रोजन की अपेक्षा रक्त में कम विलेय होता है। अस्पतालों में दमा के रोगों को कृत्रिम सांस के रूप में हीलियम और ऑक्सीजन गैस का मिश्रण दिया जाता है। द्रव हीलियम का उपयोग निम्न ताप पर प्रयोगों में निम्न तापीय अभिकर्मक के रूप में किया जाता है।

    नियॉन (Neon)

    नियॉन का उपयोग स्फुरदीप्ति बल्बों में तथा चमकने वाले विज्ञापनों में किया जाता है। नियॉन लैम्प का प्रयोग हवाई अड्डों पर विमान चालकों को संकेत देने के लिए किया जाता है क्योंकि यह प्रकाश कोहरे में अधिक चमकता है। नियॉन विसर्जन लैम्पों व ट्यूबों तथा प्रतिदीप्ति बल्बों में भरी जाती है, जिनकों विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

    आर्गन (Argon)

    आर्गन (Ar) प्रकृति में वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला अक्रिय गैस है। इसकी खोज रैमजे (Ramsay) ने की है। आर्गन का उपयोग विद्युत बल्बों में भरने में किया जाता है क्योंकि इसकी उपस्थिति में विद्युत बल्ब का तन्तु (Filament) ज्यादा समय तक सुरक्षित रहता है। आर्गन (Ar) का उपयोग उच्च तापीय धातुकर्मिक प्रक्रियाओं धातुओं अथवा मिश्रधातुओं की आर्क वेल्डिंग में निष्क्रिय वातावरण उत्पन्न करने में भी किया जाता है।

    जेनॉन (Xenon)

    सर्वाधिक यौगिक बनाने वाला अक्रिय गैस जेनॉन है।

    रेडॉन (Redon)

    रेडॉन एक रेडियोसक्रिय तत्व है। इसका उपयोग रेडियोथेरेपी (Radiotheraphy) के रूप में कैंसर रोग के इलाज में होता है।

  • हैलोजन (Halogen) तत्व क्या होते है ?

    हैलोजन (Halogen) तत्व क्या होते है ?

    What are Halogen Elements ?

    फ्लोरीन (F), क्लोरीन (CI), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I) और एस्टेटीन (At) को सम्मिलित रूप से हैलोजन कहा जाता है। हैलोजन आवर्त सारणी में एक समूह है जिसमें यह पांच रासायनिक तत्व शामिल हैं। कृत्रिम रूप से निर्मित तत्व 117, टेनेसीन, भी एक हैलोजन हो सकता है। आधुनिक IUPAC नामकरण में, इस समूह को समूह 17 (Group 17) के रूप में जाना जाता है।

    हैलोजन तत्व बहुत क्रियाशील होते हैं, अत: ये मुक्त अवस्था में नहीं पाये जाते हैं।

    फ्लोरीन और क्लोरीन गैसीय अवस्था में पाये जाते हैं जबकि ब्रोमीन द्रव एवं आयोडीन ठोस अवस्था में मिलते हैं।

    सभी हैलोजन रंगीन होते हैं। इसका कारण यह है, कि ये दृश्य-प्रकाश को अवशोषित करते हैं। आयोडीन में उपधातु जैसे जाते हैं। इसमें धातुई चमक पायी जाती है। फ्लोरीन आवर्त सारणी का सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।

    फ्लोरीन (F)

    फ्लोरीन एक रासायनिक तत्व है जिसका प्रतीक F और परमाणु क्रमांक 9 है। यह सबसे हल्का हलोजन है और मानक परिस्थितियों में अत्यधिक जहरीली, हल्के पीले रंग की डायटोमिक गैस के रूप में मौजूद है। सबसे विद्युत ऋणात्मक तत्व के रूप में, यह अत्यंत प्रतिक्रियाशील है, क्योंकि यह आर्गन, नियॉन और हीलियम को छोड़कर अन्य सभी तत्वों के साथ प्रतिक्रिया करता है।

    तत्वों में, फ्लोरीन सर्वाधिक मात्रा में पाए जाने वाले तत्वों में 24 वें और स्थलीय बहुतायत में 13 वें स्थान पर है। फ्लोराइट, फ्लोरीन का प्राथमिक खनिज स्रोत जिसने तत्व को अपना नाम दिया, का वर्णन पहली बार 1529 में किया गया था; चूंकि इसे गलाने के लिए उनके गलनांक को कम करने के लिए धातु अयस्कों में जोड़ा गया था,

    1810 में एक तत्व के रूप में, फ्लोरीन को इसके यौगिकों से अलग करना मुश्किल और खतरनाक साबित हुआ, और इसी कारण कई शुरुआती वैज्ञानिकों की प्रयोग के दौरान मृत्यु हो गई । 1886 में फ्रांसीसी रसायनज्ञ हेनरी मोइसन ने कम तापमान वाले इलेक्ट्रोलिसिस का उपयोग करके मौलिक फ्लोरीन को अलग कर दिया, एक प्रक्रिया अभी भी आधुनिक उत्पादन के लिए उपयोग की जाती है । यूरेनियम संवर्धन के लिए फ्लोरीन गैस का औद्योगिक उत्पादन, इसका सबसे बड़ा अनुप्रयोग, द्वितीय विश्व युद्ध में मैनहट्टन परियोजना के दौरान शुरू हुआ।

    क्लोरीन (Chlorine)

    क्लोरीन हरे-पीले रंग की तथा तीखी (Pungent) और दम घोंटने वाली गंध की गैस है। यह बहुत ही विषैली गैस है। यह गले, नाक और फेफड़ों पर गहरा असर करती है। यह गैस फूलों का रंग उड़ा देती है।

    क्लोरीन गैस चूने के साथ प्रतिक्रिया कर ब्लीचिंग पाउडर का निर्माण करती हैं। ब्लीचिंग पाउडर एक हल्के पीले रंग का चूर्ण है जिसमें क्लोरीन की गंध आती है।

    ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग क्लोरीन, क्लोरोफार्म के निर्माण में, पेय जल को शुद्ध करने में, जीवाणुनाशक के रूप में, रंगीन कपड़ों का रंग उड़ाने में, चीनी को सफेद करने, आदि में किया जाता है।

    क्लोरीन के मुख्य उपयोग

    1. ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण में।

    2. विरंजक के रूप में सूती कपड़ों, कागज, आदि का रंग उड़ाने में।

    3. रोगाणुनाशक के रूप में, पेयजल में उपस्थित रोगाणुओं को क्लोरीन द्वारा नष्ट किया जाता है।

    4. फॉस्जीन, मस्टर्ड गैस, ल्यूसाइट जैसी विषैली गैस के उत्पादन में।

    ब्रोमीन (Bromine)

    ब्रोमीन एक द्रव अधातु (Liquid non-metal) है। समुद्री जल में ब्रोमीन, सोडियम, पोटैशियम एवं मैग्नीशियम के ब्रोमाइड के रूप में पाया जाता है। भारत में कच्छ के रण में पाया जाने वाला ब्राइन ब्रोमीन का एक बहुमूल्य स्रोत है।

    ब्रोमीन का उपयोग

    1. ब्रोमाइड, हाइपोब्रोमाइट एवं ब्रोमेट लवणों के उत्पादन में।

    2. आंसू लाने वाली गैसों एवं अन्य विषैली गैसों के बनाने में।

    3. फोटोग्राफी में प्रयुक्त होने वाली सिल्वर ब्रोमाइड यौगिक के उत्पादन में।

    4. कार्बनिक रसायन में प्रतिकारक के रूप में।

    5. पोटैशियम ब्रोमाइड का उपयोग नींद लाने की दवा के रूप में किया जाता है।

    आयोडीन (Iodine)

    आयोडीन एक ठोस अधातु है। मानव-शरीर में आयोडीन थाइरॉयड ग्रंथि (Thyroid gland) में थाइरॉक्सिन (Thyroxin) नामक कार्बनिक यौगिक के रूप में पाया जाता है।

    मानव-शरीर में आयोडीन की कमी से थाइरॉयड ग्रंथियां बढ़ जाती है जिसे घेघा या गलगण्ड (Goitre) की बीमारी हो जाती है।

    आयोडीन एक प्रबल जीवाणुनाशी है, अत: इसका प्रयोग टिंचर आयोडीन बनाने में होता है। आयोडीन और इथाइल ऐल्कोहॉल का मिश्रण टिंचर आयोडीन कहलाता है।

    आयोडीन का प्रमुख स्रोत चिली (दक्षिणी अमेरिका) में पाया जाने वाला सोडियम नाइट्रेट का निक्षेप है। समुद्री लैमिनेरिया किस्म के समुद्री घासों (एक प्रकार का शैवाल) में आयोडीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इस समुद्री घास को अच्छी तरह सुखाने के पश्चात् गहरे गड्ढों में सावधानीपूर्वक जलाने से जो राख (Ash) प्राप्त होती है, उसे ‘केल्प’ (Kelp) कहते हैं। इसी केल्प में आयोडाइड के रूप में आयोडीन की मात्रा 0.4% से 1.3% तक रहती है। हैलोजनों में आयोडीन प्रबलतम ऑक्सीकारक है। आयोडीन का उपयोग टिंचर-आयोडीन, आयोडेक्स, आयोडोफार्म, आदि कीटाणुनाशक एवं पीडानाशक दवाओं के निर्माण में होता है।

    एस्टेटीन (Astatine)

    एस्टेटीन एक रेडियोसक्रिय तत्व है जो अत्यंत ही अस्थायी होता है। यह ठोस अधातुओं में सबसे भारी तत्व है।

    यह भू-परत में सबसे कम मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है।

  • गंधक – सल्फर (Sulfur) क्या है ?

    गंधक – सल्फर (Sulfur) क्या है ?

    What is Sulfur ?

    सल्फर शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द शुल्वारि से हुई है जिसका अर्थ होता है, तांबे का शत्रु

    एक रासायनिक तत्व है जिसका प्रतीक S और परमाणु क्रमांक 16 है। यह प्रचुर, बहुसंयोजी और अधातु है। सामान्य परिस्थितियों में, सल्फर परमाणु एक रासायनिक सूत्र S8 के साथ चक्रीय अष्टकोणीय अणु (Octatomic Molecules) बनाते हैं। सामान्य कमरे के तापमान पर एक सल्फर चमकदार पीला और क्रिस्टलीय ठोस है।

    ब्रह्मांड में द्रव्यमान के हिसाब से सल्फर दसवां सबसे सामान्य तत्व है, और पृथ्वी पर पांचवां सबसे सामान्य तत्व है। पृथ्वी पर सल्फर आमतौर पर सल्फाइड और सल्फेट खनिजों के रूप में होता है।

    यह एक आम तत्व होने के कारण और प्रचुर मात्रा में मिलने की वजह से सल्फर को प्राचीन काल से ही जाना जाता रहा है, प्राचीन भारत, प्राचीन ग्रीस, चीन और मिस्र में इसके उपयोग के लिए उल्लेख किया जा रहा है।

    प्रकृति में सल्फर मुक्त और संयुक्त दोनों ही अवस्थाओं में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह ऊष्मा और विद्युत का कुचालक होता है। धातुओं के साथ सल्फर संयोग कर धातुओं के सल्फाइड निर्माण करती है। लोहे के बुरादे और गंधन के चूर्ण के मिश्रण को गर्म करने पर काले रंग का फेरस सल्फाइड (FeS) बनता है। सल्फा के उर्ध्वपातन के फलस्वरूप प्राप्त होने वाले बारीक चूर्ण को ‘गंधक का फूल’ कहा जाता है।

    वल्कनीकरण (Vulcanisation)

    प्राकृतिक रबड़ में सल्फर मिश्रित करने की प्रक्रिया ‘वल्कनीकरण’ कहलाती के वल्कनीकरण में सल्फर का प्रयोग किया जाता है।

    सल्फर के उपयोग

    (1) आजकल ब्यूटी पार्लरों में बालों को विशिष्ट आकार में सेट करने के लिए भी सल्फर का उपयोग किया जाता है।

    (2) सल्फर का उपयोग सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फ्यूरिक अम्ल, कार्बन डाइसल्फाइड, दियासलाई, बारूद, आदि के निर्माण में होता है।

    (3) चर्म रोगों में सल्फर के मलहम का उपयोग औषधि के रूप में होता है।

    (4) सल्फा ड्रग (Sulpha drug) की गोलियां घावों को सुखाने के लिए तथा दस्त रोकने में प्रयुक्त की जाती है।

    (5) कैल्सियम बाइसल्फाइट एवं मैग्नीशियम बाइसल्फाइट का उपयोग विरंजक (Bleaching agent) के रूप में किया जाता है।

    (6) सल्फर का उपयोग रंग उद्योग में तथा जीवाणुओं एवं कीटाणुओं को नष्ट करने में भी किया जाता है। यह फफूंदी नाशी (Fungicide) के रूप में प्रयुक्त होता है।

    सल्फर के यौगिक (Compound of Sulphur)

    सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur Dioxide)

    ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसों में मुख्यतया SO2 होता है। यह एक रंगहीन, दम घोंटने वाली गंधयुक्त, हवा से भारी तथा विषैली गैस होती है। इसका जलीय घोल सल्फ्यूरस अम्ल कहलाता है। अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड की तरह आसानी से द्रवीभूत होने के कारण सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग रेफ्रिजरेशन (Refrigeration) में होता है। इस गैस का उपयोग प्रतिक्लोर (Antichlor) के रूप में होता है।

    सल्फर ट्राइऑक्साइड (Sulphur Trioxide)

    सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3)जल में शीघ्रता से घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) बनाता है। इसी कारण इसे सल्फ्यूरिक अम्ल का ‘ऐन्हाइड्राइड’ कहते हैं।

    सल्फ्यूरस अम्ल (Sulphurous Acid)

    सल्फ्यूरस अम्ल (H2SO4) ऑक्सीकारक एवं अवकारक दोनों तरह के गुण प्रदर्शित करता है।

    सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid)

    सल्फ्यूरिक अम्ल को रसायनों का सम्राट (Chemical king) कहा जाता है। इसे कसीस का तेल (Oil of Vitriol) भी कहा जाता है। सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग स्टोरेज बैटरी (Storage cells) पेट्रोलियम के शुद्धीकरण, आदि में होता है।

    ओलियम (Oleum)

    H2S2O7 को सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल, पाइरों सल्फ्यूरिक अम्ल तथा ओलियम के नाम से जाना जाता है।

    हाइड्रोजन सल्फाइड (Hydrogen Sulphide)

    ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसों में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस उपस्थित रहती है। यह एक विषैली गैस है।

  • ओजोन (Ozone) क्या है ?

    ओजोन (Ozone) क्या है ?

    What is Ozone ?

    वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर अल्ट्रा वायलेट किरणों के प्रभाव से ओजोन (Ozone) उत्पन्न होती है। यह ऑक्सीजन का एक अपरूप (Allotrop) है।

    ओजोन एक गैस है जो ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी है। ओजोन पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल और जमीनी स्तर पर दोनों में होती है। इसमें सड़ी मछली की तरह गंध होती है। ओजोन गैस सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों (Ultra violet rays) को पृथ्वी की सतह पर आने से रोकती है।

    समुद्रतल से 25 किमी. की ऊंचाई पर ओजोन की सान्द्रता अधिकतम होती है। ओजोन गैस चाँदी के चमक को काला कर देती है। ओजोन गैस ऑक्सीकारक एवं अवकारक दोनों प्रकार के गुण प्रदर्शित करता है।

    ऊपरी वायुमंडल में ओजोन का अच्छे रूप में होती है, जिसे स्ट्रैटोस्फेरिक ओजोन कहा जाता है। यहाँ पर यह एक सुरक्षात्मक परत बनाती है जो हमें सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। इसी ओजोन को मनुष्य के द्वारा बहुत ज्यादा मात्रा में रसायनों के उपयोग की वजह से आंशिक रूप से नष्ट किया जा रहा है, जिसे कभी-कभी “ओजोन में छेद” (Depletion of Ozone Layer) होना भी कहा जाता है।

    ओजोन एक हानिकारक वायु प्रदूषक है, क्योंकि इसका पर्यावरण के साथ साथ हमारे स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है और इसकी “स्मॉग” या “धुंध” में अहम भूमिका होती है।

    ओजोन के उपयोग (Use of Ozone )

    1. कीटाणुनाशक के रूप में।

    2. जल को साफ तथा शुद्ध करने में।

    3. हवा को शुद्ध करने में।

    4. खाद्य पदार्थों को सड़ने से बचाने में।

    5. कृत्रिम रेशम बनाने में।

    क्लोरोफ्लोरोकार्बन (Chlorofluorocarbons) क्या है ?

    CFCs और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (Hydrochlorofluorocarbons (HCFCs) पूरी तरह या आंशिक रूप से हैलोजेनेटेड पैराफिन हाइड्रोकार्बन (Halogenated Paraffin Hydrocarbons) हैं जिनमें केवल कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), क्लोरीन (Cl), और फ्लोरीन (F) होते हैं, जो वाष्पशील व्युत्पन्न के रूप में मीथेन, ईथेन और प्रोपेन उत्पादित करते हैं। प्रोपेन को फ़्रीऑन से भी जाना जाता है।

    हाल के वर्षों में वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के गर्म होने के प्रभाव में काफी वृद्धि हुई है। जीवाश्म ईंधन के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है । Co2 सबसे अधिक उत्पादित सीएफ़सी (सीएफसी11 और सीएफ़सी12) के अपेक्षा कम मात्रा में वायुमंडल में है लेकिन इसका प्रभाव भविष्य में कई और दशकों तक जारी रहेगा।

    सी.एफ.सी. (CFC) के एक अणु में ओजोन के एक लाख अणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है। ओजोन परत को क्षति पहुंचाने वाली गैस—CFC-11, CFC-12, CFC-22, क्लोरीन, ब्रोमीन, फ्लोरीन, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, CO2 आदि है।

    ओज़ोन परत का ह्रास (Depletion of Ozone Layer)

    ओजोन एक गैस है जो ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी है। ओजोन पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल और जमीनी स्तर पर दोनों में होती है।

    समताप मण्डल मे ओज़ोन (Ozone) की मात्रा मे कमी होना ही ओज़ोन परत का ह्रास कहलाता है। ओजोन की मात्रा के कमी तब होती है जब क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैसे समताप मण्डल मे प्रवेश कर जाती है। सूर्य से निकलने वाले पराबैगनी (अल्ट्रा वायलेट) किरणें ओज़ोन परत को खंडित करती है इसी खंडन के कारण क्लोरिन का उत्सर्जन होता है। क्लोरिन ओज़ोन से क्रिया करके उस क्षेत्र मे ओज़ोन की परत को नष्ट करना शुरू कर देता है।

    ओजोन परत का ह्रास दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ा हुआ है क्योंकि ओजोन के कमजोर पड़ने के पीछे ग्रीनहाउस गैस प्रमुख कारण है।

    ओजोन भी एक ग्रीनहाउस गैस है,  इसिलिय स्ट्रैटोस्फेरिक ओजोन की कमी से सतह ठंडी हो जाती है। इसके विपरीत, ट्रोपोस्फेरिक ओजोन और अन्य ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि से सतह गर्म होती है।