Category: पर्यावरण

  • क्या बारिश का पानी पीया जा सकता है ?

    क्या बारिश का पानी पीया जा सकता है ?

    पानी (Water) तो पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में है, लेकिन स्वच्छ, पीने योग्य और सुरक्षित पानी (Safe and drinking Water) दुर्लभ है | दुनिया के बहुत से लोग साफ और सुरक्षित पानी से आज भी वंचित हैं. लेकिन साफ पानी हासिल करना इतना मुश्किल भी नहीं है | पानी के कई स्रोत होते हैं जिनमें महासागर, नदी, तालाब, जमीन के अंदर का पानी, बारिश का पानी (Rainwater) प्रमुख हैं | यहां हम बात करेंगे कि बारिश का पानी कितना शुद्ध होता है और क्या वह पीने योग्य होता भी है या नहीं और उसका वायु प्रदूषण से क्या संबंध है |

    बारिश – पानी का सबसे शुद्ध रूप

    बारिश के  पानी को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं, लेकिन सच यही है कि यही पानी का सबसे शुद्ध रूप होता है |  एक समय था पानी की कमी नहीं मानी जाती थी | तालाब, कुएं नदी सब जगह पर पानी उपलब्ध होता था | छोटी छोटी नदियां तक 12 महीने बहा करती थीं | बारिश के पानी में बच्चे नहाया करते थे और अपना मुंह खोल कर पानी पी लिया करते थे | उन्हें बारिश का पानी साफ है कि नहीं सोचने की जरूरत नहीं पड़ती थी |

    बोतलबंद पानी की शुरुआत

    आज हम धीरे धीरे शुद्ध पानी के नाम पर बोतलबंद पानी को ही प्राथमिकता देते हैं | बारिश आते ही हम बच्चों से कहते हैं कि बारिश में ना रहो बल्कि अंदर आ जाओ. लेकिन क्या आज किसी से कहा जा सकता है कि बोतलबंद पानी की जगह बारिश का पानी पीजिए | लेकिन इस बात के प्रमाण हैं जो दर्शाते हैं कि बोतलबंद पानी की शुरुआत बारिश के पानी से हुई थी |

    बारिश के पानी की शुद्धता

    नदियों और नहरों में अधिकांश पानी बारिश का पानी होता है | यहां तक का नलों में आने वाला पानी का मुख्य स्रोत बारिश होता है | प्राकृतिक संसार में भी चल चक्र में शीर्श पर बारिश का पानी होता है | बादलों में पानी पहुंचता है वह वाष्पीकरण की प्रक्रिया से पहुंचता है जिसके बाद बारिश के जरिए धरती पर पहुंचने तक वह शुद्ध ही रहता है |

    कैसे प्रदूषित होता है पानी

    दुनिया में धरती पर कोई पानी हो, वह बारिश के पानी से ही आया है |  जब वजह जमीन के अंदर जाता है तो मिनिरल वाटर हो जाता है क्योंकि उसमें जमीन के नीचे के खनिज घुल जाते हैं | ये पानी फिर भी तुलनात्मक रूप से पाने के लिहाज से सुरक्षित और साफ होता है | बारिश का पानी जहां जाता है उसी के अनुकूल हो जाता है | कचरे पर गिरता है तो वह प्रदूषित हो जाता है |

    सबसे शुद्ध कब होता है बारिश का पानी

    यह भी एक सच है कि पानी जितना फैलता है यानि ज्यादा जगह जाता है उसमें प्रदूषण मिलने की संभावना ज्यादा होती जाती है | और उसके बाद हमें उसके शुद्धिकरण की कीमत अदा करते हैं | इस तरह सबसे शुद्ध पानी बारिश का वह पानी होता है जो जमीन पर नहीं पहुंच हो | प्राकृतिक रूप से यही सबसे शुद्ध पानी होता है | इसलिए हमें इसे प्रदूषित होने से पहले ही हासिल करने के प्रयास करना चाहिए |

  • कार्बन क्रेडिट क्या होता है?

    कार्बन क्रेडिट क्या होता है?

    कार्बन क्रेडिट की संकल्पना क्योटो प्रोटोकॉल से उद्भूत हुई, संयुक्त राष्ट्र की पहल पर ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती से निबटने हेतु 1992 में यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेन्शन ऑन क्लाइमेट चेंज अस्तित्व में आया !

    इसने जलवायु परिवर्तन के खतरों से निबटने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए बातचीत शुरू की फतेह जापान के क्योटो शहर में 11 दिसंबर 1997 को हुए UNFCC के तीसरे सम्मेलन में क्योटो प्रोटोकॉल को स्वीकार किया गया

    क्या है कार्बन क्रेडिट

    कार्बन क्रेडिट एक तरह का सर्टिफिकेट है जो कार्बन उत्सर्जन करने का सर्टिफिकेट देता है. ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए इसे तैयार किया गया है. आप जितना कार्बन उत्सर्जन करेंगे, उतना ही ज्यादा आपको ऐसे प्रोजेक्ट में खर्च करने होंगे जो उत्सर्जन को घटाएं.

    समाधान

    इसका समाधान क्या है? क्या सभी उद्योग बंद कर देने चाहिए? ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि दुनिया को चलाना जरूरी है और यह उद्योगों के बिना मुमकिन नहीं है. इसका एक हल यह हो सकता है कि अक्षय ऊर्जा के स्रोतों से उद्योगों को चलाया जाए. इसमें सोलर या विंड एनर्जी का सहारा लिया जा सकता है जिससे कि कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है. हालांकि पूरी दुनिया को अक्षय ऊर्जा स्रोत से अभी चलाना मुश्किल है क्योंकि इसमें कई वर्षों का वक्त लगेगा. ऐसे में अभी क्या किया जा सकता है?

    कार्बन क्रेडिट पर विवाद

    1997 में क्योटो प्रोटोकॉल में दुनिया भर के सभी देशों ने कार्बन उत्सर्जन घटाने पर सहमति जताई थी. उसी के हिसाब से कार्बन क्रेडिट की रूपरेखा तैयार की गई थी. इसके तहत एक सीमा तय की गई कि कंपनियां एक साल में कितना कार्बन उत्सर्जन कर सकती हैं. यूरोपीय संघ के देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन में बड़े स्तर पर कटौती करने का फैसला किया. इसके लिए कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया गया.

    इसी हिसाब से उद्योगों को कार्बन के लक्ष्य दिए गए. इसमें एक दिक्कत ये आई कि दुनिया के कुछ हिस्से में देशों ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती की जबकि कुछ देशों में उत्सर्जन जारी है. इससे उत्सर्जन में कटौती करने वाले देशों की लागत में बढ़ोतरी आई है. इसे देखते हुए कार्बन क्रेडिट पर कई लोग सवाल भी उठाते हैं. एक बात जरूर है कि कार्बन क्रेडिट के नाम पर कई परियोजनाओं में निवेश किया गया जिससे हमारे पर्यावरण को स्वस्छ बनाने में मदद मिली है.