Author: The Vigyan Team

  • हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) क्या है ?

    What is Hydrocarbon ?

    कार्बन एवं हाइड्रोजन के संयोग से बनने वाले कार्बनिक यौगिकों को ‘हाइड्रोकार्बन’ कहा जाता है। पेट्रोलियम हाइड्रोइकार्बन का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत है।

    हाइड्रोकार्बन को दो वर्गों में विभाजित किया गया है।

    1. ऐलिफैटिक हाइड्रोकार्बन (Aliphatic hydrocarbons)

    2. ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Aromatic hydrocarbons)

    खुली श्रृखला वाले हाइड्रोकार्बन को ऐलिफैटिक हाइड्रोकार्बन तथा बन्द श्रृंखला वाले हाइड्रोकार्बन को एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन कहते हैं। एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन में विशेष प्रकार का गंध पाया जाता है जबकि ऐलिफैटिक हाइड्रोकार्बन गंधहीन होता है।

    ऐलिफैटिक हाइड्रोकार्बन को पुनः दो वर्गों में विभाजित किया गया है

    संतृप्त हाइड्रोकार्बन या ऐल्केन या पैराफिन (Saturated Hydrocarbons or Alkane or Paraffin)

    संतृप्त हाइड्रोकार्बन को ‘ऐल्केन’ या ‘पैराफिन’ भी कहा जाता हैपैराफिन एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है—अल्प क्रियाशील। चूंकि संतृप्त हाइड्रोकार्बन की क्रियाशीलता बहुत कम होती है, इसलिए उन्हें पैराफिन कहा जाता है। मिथेन, इथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन, पेन्टेन, हेक्सेन, हेप्टेन, ऑक्टेन, नीनेन, डीकेन प्रथम 10 संतृप्त हाइड्रोकार्बन है।

    संतृप्त हाइड्रोकार्बन में उपस्थित सभी कार्बन परमाणु एक-दूसरे के साथ एकल बंधन (Single bond) द्वारा जुड़े रहते है तथा कार्बन परमाणु की शेष संयोजकताएं हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा संतृप्त होती है।

    असंतृप्त हाइड्रोकार्बन

    वैसे ऐलिफैटिक हाइड्रोकार्बन जिनके दो कार्बन परमाणुओं के बीच द्विबंधन (Double bond) अथवा त्रिबंधक (Triple bond) होता है, उन्हें असंतृप्त हाइड्रोजन’ कहते हैं। अंसतृप्त हाइड्रोकार्बन भी दो प्रकार के होते हैं ऐल्कीन या ओलिफिन (Alkene or Olefin) तथा ऐल्काइन (Alkyne)।

  • बहुलीकरण (Polymerisation) क्या है ?

    What is Polymerisation ?

    बहुलीकरण वह रासायनिक प्रतिक्रिया है जिसमें किसी यौगिक के दो या दो से अधिक गुण मिलकर एक बड़े अणु का निर्माण करते हैं इस प्रतिक्रिया के फलस्वरूप बने यौगिक ‘बहुलीकृत यौगिक’ या ‘बहुलक’ कहलाते हैं।

    उदाहरणार्थ, ऐसीटिलीन गैस यदि लाल-तप्त तांबे की नली में प्रवाहित की जाये तो ऐसीटिलीन के तीन अणु बहुलीकृत होकर बेंजीन बनाते हैं।

    बहुलीकरण की विशेषताएं

    1. बहुलीकरण एक उत्क्रमणीय (Reversible) क्रिया है और बहुलक सरलता से आरम्भिक यौगिक में परिणित हो जाता है।

    2. बहुलक यौगिक का अणु-भार आरम्भिक यौगिक के अणु-भार का पूर्ण गुणक होता है।

    3. बहुलीकरण में एक ही प्रकार के अणु परस्पर संयोग करते हैं।

    4. बहुलीकरण में कार्बन परमाणु नया बन्धन नहीं बनाते हैं।

    5. बहुलीकरण में जल, आदि के छोटे अणु मुक्त नहीं होते हैं।

  • रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊर्जा परिवर्तन

    Energy change in chemical reactions

    रासायनिक अभिक्रियाएँ सदा ही ऊर्जा परिवर्तन के साथ होती हैं। रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लने वाले अभिकारक अधिक स्थायी निम्न ऊर्जा-स्तर कर लेने की प्रवृत्ति रखते हैं। इसी प्रवृत्ति के कारण रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। रासायनिक अभिक्रिया तब होती है जब अभिकारकों की ऊर्जा प्रतिफल की ऊर्जा से अधिक हो।

    उर्जा परिवर्तन के आधार पर रासायनिक अभिक्रियाओं को दो भागों में बांटा जा सकता है।

    उष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction)

    वे रासायनिक अधिक्रियाएँ जिनमें उष्मा का अवशोषण होता है, ‘उष्माशोषी अभिक्रियाएँ’ कहलाती है

    उदाहरण

    1. नाइट्रोजन एवं ऑक्सीजन के मिश्रण को उच्च ताप (3,000°C) पर गर्म करने से नाइट्रिक ऑक्साइड बनता है। इस अभिक्रिया में काफी मात्रा में ऊर्जा का अवशोषण होता है।

    2. कार्बन और गंधक (सल्फर) परस्पर संयोग कर कार्बन डाइसल्फाइड बनाते हैं। इस अभिक्रिया में भी ऊष्मा का अवशोषण होता है। अत: यह एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।

    ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ (Exothermic Reactions)

    वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनसे ऊष्मा का उत्सर्जन होता है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

    उदाहरण

    1. नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के परस्पर संयोग से अमोनिया बनता है तथा इस अभिक्रिया में काफी ऊर्जा मुक्त होती है। अत: अमोनिया का बनना एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

    2. कार्बन को हवा में जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनता है, इस अभिक्रिया में भी ऊष्मा का अवशोषण होता है जो ‘ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ’ कहलाती है।

  • धातु संक्षारण (Metallic Corrosion) क्या है ?

    What is Metallic Corrosion ?

    धातु का संक्षारण एक ऑक्सीकरण-अवकरण अभिक्रिया है जिसके फलस्वरूप धातु वायुमंडल की वायु और नमी से अभिक्रिया करके अवांछनीय पदार्थों में परिवर्तित हो जाती है।

    संक्षारण की प्रक्रिया में उपयोगी धातु नमी की उपस्थिति में वायु के ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर ऑक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड के मिश्रण में बदल जाती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि धातु पूर्णत: समाप्त नहीं हो जाती है।

    उदाहरण

    1. लोहे को आर्द्र हवा में छोड़ देने पर कुछ समय के पश्चात् उसकी सतह पर भूरे रंग की परत का बैठ जाना।

    2. ताँबा को बहुत दिनों तक आर्द हवा में छोड़ देने पर कुछ समय के पश्चात् उसकी सतह पर हल्के हरे रंग की मलिन परत का बैठ जाना।

    कुछ धातुएं ऐसी हैं, जिनका संक्षारण नहीं के बराबर होता है। इनमें सोना, प्लेटिनम, आदि प्रमुख है। इसी कारण ये धातुएं उत्तम कोटि की तथा बहुमूल्य होती हैं।

    लोहे में जंग लगना (Rusting of Iron)

    लोहे में जंग लगना धातु संक्षारण का अच्छा उदाहरण है। वायु और नमी की उपस्थिति में लौह धातु का संक्षारण होता है, इससे लोहे की सतह पर फेरिक ऑक्साइड और फेरिक हाइड्रॉक्साइड की रंग की ढीली परत बैठ जाती है। लोहे में जंग लगना एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।

    धातुओं के संक्षारण के लिए दो शर्तों का होना आवश्यक है:

    1. ऑक्सीजन या वायु की उपस्थिति तथा

    2. वायु में नमी की उपस्थिति।

    गैल्वेनीकरण (Galvanization)

    लौह धातु पर जिंक धातु की परत बैठाने की क्रिया को ‘गैल्वेनीकरण’ कहते हैं। ऐसा लोहा ‘गैल्वेनीकृत लोहा’ (Galvanized iron) कहलाता है।

  • विलयन (Solution) क्या है ?

    What is Solution ?

    विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक समाग मिश्रण है, जिसमें किसी निश्चित ताप पर विलेय और विलायक की आपेक्षिक मात्राएं एक निश्चित सीमा तक निरंतर परिवर्तित हो सकती हैं, जैसे नमक का जल में विलयन, चीनी का जल में विलयन, आदि।

    विलयन की विशेषताएं (Characteristics of Solution)

    1. विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण है।

    2. किसी विलयन में विलेय के कणों की त्रिज्या 10-7 सेमी. से कम होती है। अत: इन कणों को सूक्ष्मदर्शी द्वारा भी नहीं देखा जा सकता है।

    3. विलयन में विलेय के कण विलायक में इस प्रकार घुलमिल जाते हैं कि एक का दूसरे से विभेद करना संभव नहीं होता है।

    4. विलयन में उपस्थित विलेय के कण छन्ना पत्र के आर-पार आ जा सकते हैं।

    5. विलयन स्थायी एवं पारदर्शक होता है

    विलेय और विलायक (Solute and Solvent) क्या है ?

    What are Solute and Solvent ?

    विलयन में जो पदार्थ अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होता है, उसे विलायक कहते हैं तथा जो पदार्थ कम मात्रा में उपस्थित रहता है, उसे विलेय कहते हैं।

    जिस विलायक का डाइइलेक्ट्रिक नियतांक जितना अधिक होता है, वह उतना ही अच्छा विलायक माना जाता है। जल का डाइइलेक्ट्रिक नियतांक का मान अधिक होने के कारण इसे ‘सार्वत्रिक विलायक’ (Universal solvent) कहा जाता है।

    विलायकों के उपयोग

    1. औषधि उद्योग में अनेक औषधियों के निर्माण में।

    2. निर्जल धुलाई में (बेंजीन व पेट्रोल जैसे विलायकों का)।

    3. इत्र निर्माण में।

    4. रंग, रोगन को घोलने में।

    5. अनेक प्रकार के पेय व खाद्य पदार्थों के निर्माण में, आदि।

    विलेयता (Solubility) क्या है ?

    What is Solubility ?

    किसी निश्चित ताप और दाब पर 100 ग्राम विलायक में घुलने वाली विलेय की अधिकतम मात्रा को उस विलेय पदार्थ की उस विलायक में विलेयता कहते हैं।

    विलेयता पर ताप का प्रभाव

    1. सामान्यत: ठोस पदार्थों की विलेयता ताप बढ़ाने से बढ़ती है। लेकिन कुछ ऐसे भी ठोस पदार्थ हैं, जिनकी विलेयता ताप बढ़ाने से घटती है, जैसे—सोडियम सल्फेट, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, कैल्सियम साइट्रेट, आदि।

    2. किसी द्रव में गैस की विलेयता ताप बढ़ने से घटती है।

    विलेयता संबंधी प्रमुख तथ्य

    1. अध्रुवीय पदार्थ अध्रुवीय विलायकों में प्रायः विलेय होते हैं, उदाहरणार्थ, ब्रोमीन का कार्बन टेट्राक्लोराइड में घुलना।

    2. अध्रुवीय पदार्थ ध्रुवीय विलायकों में प्रायः अधिक विलेय होते हैं, उदाहरणार्थ, कार्बन टेट्राक्लोराइड जल में बहुत ही कम विलेय होते हैं।

    3. ध्रुवीय पदार्थ ध्रुवीय विलायकों में प्रायः विलेय होते हैं, उदाहरणार्थ, इथाइल ऐल्कोहॉल जल में काफी विलेय होता है।

    4. ध्रुवीय पदार्थ अध्रुवीय विलायकों में अधिक विलेय नहीं होते हैं, उदाहरणार्थ, सोडियम क्लोराइड । कार्बन टेट्राक्लोराइड में अल्प विलेय होता है।

    5. अणुभार में वृद्धि होने से पदार्थों की विलेयता घटती जाती है, उदाहरणार्थ, मिथाइल ऐल्कोहॉल (अणुभार =32) की तुलना में ब्यूटाइल ऐल्कोहॉल (अणुभार = 74) जल में बहुत कम विलेय है।

    कोलॉइड (Colloid)

    यह दो पदार्थों का विषमाग मिश्रण होता है

    • इसमें परिक्षेपित कणों (Dipersed particles) का आकार 10-5 सेमी. और 107 सेमी. के बीच होता है।

    • इसके कणों को नग्न आखों से नहीं देखा जा सकता, बल्कि इन्हें अति सूक्ष्मदर्शी (Ultra microscope) की सहायता से ही देखा जा सकता है।

    • इसके कण छन्ना पत्र के आर-पार आ-जा सकते हैं।

    • यह स्थायी होता है। स्थिर छोड़ देने पर इसके कणों में परिक्षेपण माध्यम से अलग हो जाने की बहुत कम प्रवृत्ति पायी जाती है। उदाहरण: दूध, गोंद, रक्त, स्याही, आदि।

    उदासीन, अम्लीय तथा क्षारीय विलयन

    ऐसा विलयन जिसमें हाइड्रोजन आयनों (HD) और हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) का सांद्रण समान होता है, ‘उदासीन विलयन’ कहलाता है

    ऐसा विलयन जिसमें हाइड्रोजन आयनों (H) का सांद्रण हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) से अधिक होता है, ‘अम्लीय विलयन’ कहलाता है

    ऐसा विलयन जिसमें हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) का सांद्रण हाइड्रोजन आयनों (HP) से अधिक होता है, ‘क्षारीय विलयन’ कहलाता है

  • विद्युत अपघट्य एवं विद्युत अनपघट्य क्या है ?

    What are Electrolytes and Non-electrolytes ?

    वे यौगिक जो द्रवित अवस्था या जलीय घोल को अवस्था में विद्युत के चालक होते हैं, विद्युत अपघट्य कहलाते हैं

    जैसे—अम्ल, क्षार और लवण विद्युत अपघट्य होते हैं।

    वे यौगिक जो द्रवित अवस्था या जलीय घोल की अवस्था में विद्युत के अचालक होते हैं, ‘विद्युत अनपघट्य’ कहलाते हैं,

    जैसे—चीनी, यूरिया, क्लोरोफॉर्म, आदि।

    विद्युत अपघटनी सेल (Electrolytic Cell) क्या है ?

    What is Electrolytic Cell ?

    जिस बर्तन में विद्युत अपघट्य का घोल लेकर विद्युत अपघटन की क्रिया सम्पन्न करायी जाती है, उसे विद्युत अपघटनी सेल कहते हैं

    इस सेल में धातु की दो प्लेटें या तार डुबा दिए जाते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रोड (Electrode) कहते हैं। ये इलेक्ट्रोड किसी बैटरी के ध्रुवों से जोड़ दिए जाते हैं जो इलेक्ट्रोड बैटरी के धन-ध्रुव से जोड़ा जाता है, उसे कैथोड (Cathode) कहते हैं।

    घोल में विद्युत अपघट्य अंशत: या पूर्णतः विघटित होकर आवेशयुक्त परमाणुओं या मूलकों में टूट जाते हैं, जिन्हें आयन (Ions) कहते हैं। धन आवेशयुक्त आयन को धनायन (Cation) तथा ऋण आवेशयुक्त आयन को ऋणायन (Anion) कहते हैं। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर धनायन कैथोड पर और ऋणायन एनोड पर मुक्त होते हैं। कैथोड पर अवकरण (Reduction) तथा एनोड पर ऑक्सीकरण (Oxidation) की प्रतिक्रिया होती है।

    विद्युत अपघटन के उपयोग

    1. विद्युत लेपन में (Electro Plating): निम्न कोटि की धातु को सुरक्षित रखने या उसको आकर्षक बनाने के लिए उस पर एक उच्च कोटि की धातु की एक पतली अस्तर चढ़ाने की क्रिया को विद्युत लेपन’ कहते हैं।

    2. विद्युत मुद्रण में (Electro Typing): मुद्रण उद्योग में काम आने वाले ब्लॉक (Blocks) विद्युत अपघटन विधि से ही तैयार किये जाते हैं।

    3. धातुओं के विद्युत शोधन में (Electro Refining of Metals): कई धातुएं, जैसे ताँबा, चांदी, सोना, इत्यादि विद्युत अपघटन क्रिया द्वारा ही शुद्ध रूप में प्राप्त की जाती हैं।

    4. विद्युत धातुकर्म विज्ञान में (Electrometallurgy): अनेक धातुओं, जैसे—सोडियम, पोटैशियम, ऐलुमिनियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, आदि को उनके यौगिकों का विद्युत अपघटन करके निष्कर्षित किया जाता है।

    5. धातुओं के तुल्यांकी भार ज्ञात करने में।

    6. रासायनिक यौगिकों के निर्माण में: विद्युत अपघटन द्वारा अनेक औषधियां एवं कार्बनिक तथा अकार्बनिक योगिक तैयार किये जाते हैं। उदाहरण के लिए, सोडा, कास्टिक सोडा, हाइड्रोजन परॉक्साइड, क्लोरोफॉर्म, आयडोफार्म, ऐथेन, ऐसीटिलीन, आदि इसी विधि से तैयार किये जाते है।

    गैल्वेनिक सेल क्या है ? (

    गैल्वेनिक सेल वह युक्ति है जिसके द्वारा रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। उदाहरण के लिए, डेनियल सेल (Daniel cell) एक प्रारूपी गैल्वेनिक सेल है। इस सेल में एक पात्र होता है जिसमें CuSO4, का सान्द्र घोल भरा रहता है और इसमें तांबे की एक छड़ डूबी रहती है, इसके अंदर एक सरन्ध्र पात्र रहता है जिसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) भरा रहता है और इसमें एक जस्ते की छड़ डूबी रहती है।

    इलेक्ट्रोड (Electrodes)

    प्रत्येक सेल दो भागों का बना होता है। प्रत्येक को अर्द्धसेल (Half cell) या इलेक्ट्रोड (Electrode) कहते हैं। एक इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण तथा दूसरे इलेक्ट्रोड पर अवकरण प्रतिक्रिया होती है। जिस इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण प्रतिक्रिया होती है, उसको ‘ऐनोड (Anode) तथा जिस इलेक्ट्रोड पर अवरकण प्रतिक्रिया होती है, उसको ‘कैथोड’ कहा जाता है। डेनियल सेल में जस्ता ऐनोड तथा कॉपर कैथोड होता है।

  • दहनशील या ज्वलनशील पदार्थ क्या है ?

    What are Combustible Substances ?

    वे पदार्थ जो जलते हैं, ‘दहनशील या ज्वलनशील पदार्थ कहलाते हैं, जैसे कार्बन, गंधक, मोमबत्ती, मैग्नीशियम, इत्यादि।

    दहन के अपोषक (Non-supporter Combustion)

    जो पदार्थ दहन की क्रिया में सहायक नहीं होते हैं, उन्हें ‘दहन का अपोषक‘ कहते हैं, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड l

    रॉकेट ईंधन (Rocket Fuels)

    रॉकेट ईधन को प्रणोदक (Propellants) कहते हैं। रॉकेट के प्रणोदन (Propulsion) के लिए प्रणोदक ऊर्जा प्रदान करते है।

    प्रणोदक वैसे ईंधन हैं, जिनके जलने पर अत्यधिक मात्रा में गैसें एवं ऊर्जा उत्पन्न होती है तथा इनका दहन बहुत तीव्र गति से होता है एवं दहन के पश्चात् कोई अवशेष नहीं बचता है।

    प्रणोदक के दहन के फलस्वरूप उत्पन्न गैसें रॉकेट के पिछले भाग से जेट (Jet) के रूप में बहुत तीव्र गति से बाहर निकलती हैं जिससे रॉकेट का इच्छित दिशा में प्रणोदन होता है।

    प्रणोदक दो प्रकार के होते हैं:

    1. द्रव प्रणोदक (Liquid propellants) तथा 2. ठोस प्रणोदक (Solid propellants) |

    ऐल्कोहॉल, द्रव हाइड्रोजन, द्रव अमोनिया, किरोसिन, हाइड्राजीन, आदि द्रव प्रणोदक के प्रमुख उदाहरण हैं।

    बायो गैस (Bio Gas)

    जानवरों और पेड़ पौधों से प्राप्त व्यर्थ पदार्थ सूक्ष्म जीवों द्वारा जल की उपस्थिति में आसानी से सड़ते हैं और इस प्रक्रिया में मिथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन, हाइड्रोजन सल्फाइड, आदि गैसे निकलती हैं। इस गैसीय मिश्रण को बायो गैस कहते हैं।

    इसमें लगभग 65% मिथेन होता है। यह एक उत्तम गैसीय इंधन है। बायो गैस जलने पर धुआं उत्पन्न नहीं करता है, साथ ही साथ इसके जलने से पर्याप्त ऊष्मा प्राप्त होती है l

  • ईंधन (Fuels) क्या है ?

    What is fuels ?

    एक ईंधन कोई भी ऐसी सामग्री है जिसे अन्य पदार्थों के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए बनाया जा सकता है ताकि यह ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में छोड़े या किसी काम के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

    ईंधन के प्रकार

    कोल गैस (Coal Gas)

    यह कई दहनशील गैसों का मिश्रण होता है। इसका संघटन कोयले की किस्म और भंजक स्रवण के ताप पर निर्भर करता है। इसकी औसत प्रतिशत रचना इस प्रकार है-हाइड्रोजन-55%, मिथेन-30%, कार्बन मोनोआक्साइड-4%, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन-3%, तथा अज्वलनशील अशुद्धियां-8%

    भाप अंगार गैस (Water Gas)

    यह कार्बन मोनोआक्साइड और हाइड्रोजन का आण्विक मिश्रण होता है। इसमें अशुद्धियों के रूप में CO2, H2O और N2, इसे रक्त तप्त कोक पर भाप की धारा प्रवाहित करके प्राप्त किया जाता है। इसका कैलोरी मान प्रोड्यूशर गैस से अधिक होता है। यह अकेले अथवा कोल गैस के साथ मिलकर ईंधन के रूप में प्रयोग में लायी जाती है। यह हाइड्रोजन गैस बनाने के काम आती है जो अमोनिया के औद्योगिक उत्पादन में उपयोगी है। इससे मिथाइल ऐल्कोहॉल भी बनाया जाता हैं।

    वायु अंगार गैस (Producer Gas)

    यह कार्बन मोनोआक्साइड (CO) तथा नाइट्रोजन (N2) का मिश्रण होता है जिसमें आयतनानुसार दो भाग नाइट्रोजन और एक भाग कार्बन-मोनोआक्साइड होता है। इसमें अशुद्धि के रूप में थोड़ा कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद रहता है। इसका कैलोरी मान अन्य ईंधनों की तुलना में सबसे कम होता है। यह एक सस्ता ईंधन है जो जलकर उच्च ताप देता है। कांच के निर्माण तथा धातु निष्कर्षण में इसका बहुत उपयोग होता है।

    तेल गैस (Oil Gas)

    यह सरल, संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है, जैसे -मिथेन, ऐसीटिलीन, इथिलीन, आदि। यह मिट्टी के तेल (Kerosine oil) या पेट्रोलियम के भंजक स्त्रावण द्वारा तैयार की जाती है। इस गैस में वायु मिलाकर प्रयोगशाला में बर्नर जलाये जाते हैं।

    प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

    पेट्रोलियम के कुओं से निकलने वाली गैसों में मुख्य रूप से मिथेन तथा इथेन (क्रमश: 83% एवं 16%) होती है जो ज्वलनशील होने के कारण ईंधन के रूप में प्रयुक्त की जाती है। प्राप्त ऊष्मा की मात्रा के आधार पर प्राकृतिक गैस सर्वश्रेष्ठ ईंधन है। प्राकृतिक गैस तेल के कुओं से भी उपफल (By product) के रूप में प्राप्त किया जाता है। इस गैस का प्रधान अवयव मिथेन (CH) होता है। प्राकृतिक गैस का उपयोग कृत्रिम उर्वरकों के उत्पादन में किया जाता है।

    कोयला (Coal)

    कोयला पृथ्वी के अंदर व्यापक रूप से पाया जाने वाला जीवाश्मीय ईंधन है। इसमें 60-90% मुक्त कार्बन तथा उसके यौगिक के अतिरिक्त नाइट्रोजन, गंधक, लोहा, आदि के यौगिक भी उपस्थित रहते हैं।

    कोयला मुख्यत: 4 प्रकार के होते हैं—पीट (Peat). लिग्नाइट (Lignite), बिटुमिनस (Bituminous) तथा एन्थ्रासाइट (Anthracite)|

    पीट कोयला निर्माण की प्रथम अवस्था होती है। एन्थ्रासाइट सर्वोत्तम किस्म का कोयला होता है, जबकि बिटुमिनस कोयले की सामान्य किस्म है। संसार का अधिकांश कोयला बिटुमिनस किस्म का होता है। लिग्नाइट को भूरा कोयला (Brown coal) कहा जाता है। एन्थ्रासाइट कोयले की अंतिम अवस्था होती है। एन्थासाइट कोयला जलने पर धुआँ नहीं देता है और काफी ऊष्मा उत्पन्न करता है। बिटुमिनस कोयला इंजन में जलाने तथा कोल गैस बनाने में काम आता है। वायु की अनुपस्थिति में कोयले को गर्म करने पर कोक, अलकतरा और कोल गैस प्राप्त होते हैं। इस प्रक्रिया को कोयले का भंजक स्त्रावण’ (Destructive distillation of coal) कहते हैं।

    कच्चे पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन या स्त्रावण द्वारा निम्नलिखित पदार्थ प्राप्त होते हैं ऐस्फाल्ट (Asphalt), स्नेहक तेल (Lubricating oil), पेराफिन मोम (Paraffin was), ईंधन तेल (Fuel oil), डीजल तेल (Diesel oil), मिट्टी का तेल (Kerosine oil), पेट्रोल (Petrol), पेट्रोलियम गैस (Petroleum gas), इत्यादि।

    पेट्रोलियम गैस इथेन, प्रोपन और ब्यूटेन का मिश्रण होता है। इसका मुख्य अवयव नार्मल एवं आइसो ब्यूटेन होता है जो तेजी से जलकर ऊष्मा प्रदान करता है। दाब बढ़ाने पर नार्मल एवं आइसो ब्यूटेन आसानी से द्रवीभूत हो जाता है। अतः द्रव रूप में इसे सिलिंडरों में भरकर द्रवित पेट्रोलियम गैस (Liquified petroleum gas) के नाम से जलावन के लिए उपभोक्ता को दिया जाता है।

  • pH मूल्य (pH Value) क्या है ?

    pH मूल्य (pH Value) क्या है ?

    What is pH Value ?

    pH मूल्य एक संख्या होती है जो पदार्थों की अम्लीयताक्षारीयता को प्रदर्शित करती है। इसका मान हाइड्रोजन आयन (H+) के सांद्रण के व्युत्क्रम के लघुगुणक (Logarithm) के बराबर होता है।

    pH की अवधारणा को पहली बार 1909 में कार्ल्सबर्ग प्रयोगशाला में डेनिश रसायनज्ञ सोरेन पेडर लॉरिट्ज़ सोरेंसन द्वारा पेश किया गया था और इलेक्ट्रोकेमिकल कोशिकाओं (electrochemical cells) के संदर्भ में परिभाषाओं और मापों को समायोजित करने के लिए 1924 में आधुनिक पीएच में बदला गया था।

    pH का मान 0 से 14 के बीच होता है। जिन विलयनों के pH का मान 7 से कम होता है, वे अम्लीय होते है। जिन विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है, वे क्षारीय होते हैंउदासीन विलयनों के pH का मान 7 होता है। pH मूल्य का उपयोग ऐल्कोहॉल, चीनी, कागज, आदि उद्योगों में होता है।

    जलीय घोल (aqueous solutions) का pH मूल्य एक ग्लास इलेक्ट्रोड (glass electrode) और एक pH मीटर, या color-changing indicator से मापा जा सकता है। रसायन विज्ञान, कृषि विज्ञान, चिकित्सा, जल उपचार और कई अन्य अनुप्रयोगों में पीएच के माप महत्वपूर्ण हैं।

  • लवण (Salt) क्या है ?

    लवण (Salt) क्या है ?

    What is Salt ?

    लवण वैसे यौगिक हैं जो अम्ल में विद्यमान विस्थापनशील हाइड्रोजन परमाणुओं के धातु अथवा धातु सदृश आचरण करने वाले मूलक द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से विस्थापित होने पर बनते है। अम्ल और क्षारक (भस्म) की अभिक्रिया के फलस्वरूप जल के साथ बना दूसरा यौगिक ‘लवण’ कहलाता है।

    लवणों का वर्गीकरण

    सामान्य लवण (Normal Salts)

    किसी अम्लीय अणु से हाइड्रोजन परमाणुओं के पूर्णत: स्थानान्तरण द्वारा निर्मित लवण को सामान्य लवण कहते हैं। दूसरे शब्दों में, वे लवण जो अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु या हाइड्रॉक्सिल आयन में मुक्त रहते हैं, ‘सामान्य लवण’ कहलाते है, जैसे—Na2SO2, CaSO4, Na3PO4, Na2S, NaCI, KCI, FeCI3, आदि।

    अम्लीय लवण (Acidic Salts)

    वैसे लवण जिसमें एक या एक से अधिक स्थानान्तरण योग्य हाइड्रोजन परमाणु बने रहते हैं, उन्हें ‘अम्लीय लवण’ कहते हैं, जैसे—NaHCO3, NaHSO4, आदि।

    भास्मिक लवण (Basic Salts)

    किसी अम्ल द्वारा भस्म के आंशिक उदासीनीकरण के फलस्वरूप बने हुए लवण को ‘भास्मिक लवण’ कहते हैं, जैसे—Pb(OH)CI, Bi(OH)2NO3 .CuCO3, Cu(OH)2, 2PbCO3, Pb(OH)2, Mg(OH)CI, आदि।

    मिश्रित लवण (Mixed Salts)

    वैसे लवण जिसमें एक से अधिक भास्मिक या अम्लीय मूलक उपस्थित हो, ‘मिश्रित लवण’ कहलाते हैं, जैसे—सोडियम पोटैशियम सल्फेट (NaKSO4), विरंजक चूर्ण [Ca(OCI) CI], आदि।

    द्विक युम्म लवण (Double Salts)

    दो सामान्य लवणों से निर्मित लवण को ‘द्विक या युग्म लवण’ कहते हैं। इसमें रवा जल (Water of crystallisation) भी रहता है। द्विक लवण जल में घुलकर दो प्रकार के धातु आयन निर्गत करते हैं, जैसे मोहर लवण, पोटाश एलम, आदि।

    जटिल लवण (Complex Salt)

    वैसा लवण जिसमें एक जटिल मूलक उपस्थित रहता है और जो घोल में भी अपना पृथक अस्तित्व बनाये रखता है, ‘जटिल लवण’ कहलाता है, जैसे—पोटैशियम फेरोसायनाइड, पोटैशियम मरक्यूरिक आयोडाइड, डाइएमिनो सिल्वर क्लोराइड, आदि।

    लवणों के उपयोग

    1. सोडियम क्लोराइड: मानव आहार का आवश्यक अंग, अचार के परिरक्षण में, मांस एवं मछली के संक्षारण में, अनेक रासायनिक यौगिकों के निर्माण में, आदि।

    2. सोडियम बाइकार्बोनेटः रसोईघरों में पेट की अम्लीयता को कम करने की औषधि के रूप में, बेकिंग पाउडर के रूप में, अग्निशामक यंत्रों में, आदि।

    3. सोडियम कार्बोनेट: कपड़ों की धुलाई में, कांच निर्माण में, कास्टिक सोडा के निर्माण में, अपमार्जक (डिटर्जेण्ट) चूर्ण के निर्माण में, कास्टिक सोडा के निर्माण में, अपमार्जक (डिटर्जेण्ट) चूर्ण के निर्माण में, आदि।

    4. पोटैशियम नाइट्रेटः गन पाउडर बनाने में, आतिशबाजी का सामान बनाने में, कांच उद्योग में, उर्वरक के रूप में, आदि।

    5. कॉपर सल्फेटः कीटाणुनाशक के रूप में, विद्युत लेपन में, रंगाई एवं छपाई में, कॉपर के शुद्धीकरण में, आदि।

    6. पोटाश एलम: जल के शुद्धीकरण में, औषधि निर्माण में, रंगाई में रंग बंधक के रूप में, शरीर के किसी अंग के थोड़ा कट जाने पर खून का बहना रोकने में, चमड़ा उद्योग में, आदि।