Author: The Vigyan Team

  • प्लूटोनियम धातु और उसके गुण

    प्लूटोनियम धातु और उसके गुण

    Plutonium metal and its properties

    प्लूटोनियम एक दुर्लभ ट्रांसयूरेनिक रेडियोधर्मी तत्त्व है।

    इसका रासायनिक प्रतीक Pu और परमाणु भार 94 होता है। प्लूटोनियम के छः अपरूप होते हैं।

    यह एक ऐक्टिनाइड तत्त्व है जो दिखने में रुपहले श्वेत (सिल्वर व्हाइट) रंग का होता है। 

    प्लूटोनियम-238 का अर्धायु काल 87.74 वर्ष होता है। 

    प्लूटोनियम-239, प्लूटोनियम का एक महत्वपूर्ण समस्थानिक है जिसकी अर्धायु काल 24,100 वर्ष होता है।

    प्लूटोनियम-244, प्लूटोनियम का सर्वाधिक स्थाई समस्थानिक होता है। इसका अर्धायु काल 8 करोड़ वर्ष होता है।

    यह एक भारी रेडियो सक्रिय तत्व (धातु) है।

    प्लूटोनियम की खोज वैज्ञानिक एनरिको फर्मी और उनके दल के सदस्यों ने 1934 में की थी।

    प्लूटोनियम का आविष्कार परमाणु बम तैयार करने के समय 1940 ई. में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में हुआ था। प्लूटो नामक ग्रह के नाम पर इसका नाम प्लूटोनियम (Plutonium) पड़ा।

    प्लूटोनियम के शुद्ध रासायनिक यौगिक की प्राप्ति 1942 ई. में हुई थी।

    यह पहला धात्विक तत्व है जो केवी संश्लेषण से पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हुआ था।

    आज भी इसकी प्राप्ति नाभिकीय रिऐक्टर में ही होती है।

    प्लूटोनियम बड़ी अल्प मात्रा में यूरेनियम अयस्कों, पिचब्लेंड और मोनेज़ाइट, में पाया जाता है।

    जापान के हिरोशिमा तथा नागासाकी शहरों पर गिराए गये परमाणु बमों में प्लूटोनियम का ही उपयोग किया गया था।

     नाभिकीय रिएक्टर में यह ईंधन का कार्य करता है। ऐसे रिऐक्टर यूरेनियम-238 के साथ मिलकर ऊर्जा उत्पन्न करते हैं और साथ साथ न्यूट्रॉन के अवशोषण से प्लूटोनियम-239 भी बनता है।

    प्लूटोनियम 238 के विखंडन से जो ऊर्जा प्राप्त होती है वह ऊर्जा पूर्ण विखंडन में प्रति पाउंड 10,000,000 किलोवाट घंटा ऊष्मा ऊर्जा के बराबर होती है।

    इस ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में, या विद्युत् के रूप में, परिणत कर सकते हैं। इससे समस्त ऊर्जा के 20 से 30 प्रतिशत तक की उपलब्धि हो सकती है। ऊर्जा की उपलब्धि वस्तुत: यंत्र की दक्षता पर निर्भर करती है।

  • धातुओं से जुड़े कुछ महत्वपुर्ण बिंदु

    धातुओं से जुड़े कुछ महत्वपुर्ण बिंदु

    Some important points related to metals

    • भारत में टंगस्टन का उत्पादन राजस्थान स्थित डेगाना (Degana)खान से होता है।
    • टंगस्टन तंतु के उपचयन को रोकने के लिए बिजली के बल्ब से हवा निकाल दी जाती है।
    • जिरकोनियम धातु ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों में जलते हैं।
    • फ्रांसियम (Fr)एक रेडियोसक्रिय द्रव धातु है।
    • टंगस्टन का संकेत W होता है। इसका गलनांक लगभग 3,500°C होता है।
    • न्यूट्रॉनों को अवशोषित करने के गुणों के कारण जिनकोनियम का उपयोग नाभिकीय रिएक्टर में किया है। अतः यह नाभिकीय रिएक्टर का अनिवार्य तत्व है।
    • स्टेनस सल्फाइड (SnS2) को मोसाइक गोल्ड (Mosaic gold) कहते है, इसका प्रयोग पेंट के रूप में किया जाता है।
    • सबसे भारी धातु ओसमियम (Os) है।
    • बेरियम सल्फेट का उपयोग बेरियम (Ba)मील के रूप में उदर के X-ray में होता है।
    • आतिशबाजी के दौरान हरा रंग बेरियम की उपस्थिति के कारण होता है।
    • आतिशबाजी के दौरान लाल चटक रंग (Crimson red colour) स्ट्रॉन्शियम (Sr) की उपस्थिति के कारण उत्पन्न होता है।
    • लिथियम (Li) सबसे हल्का धात्विक तत्व है। यह सबसे प्रबल अपचायक होता है।
    • चाँदी (Ag), सोना (Au), तांबा (Cu), प्लेटिनम (Pt) तथा बिस्मथ (Bi) अपने कम अभिक्रियाशीलता के कारण स्वतंत्र अवस्था में पाये जाते हैं।
    • गोल्ड, प्लेटिनम, सिल्वर तथा मरकरी उत्कृष्ट धातुएं हैं।
    • धातुओं में सबसे अधिक आघातवर्ध्य सोना (Au)चाँदी (Ag) होते हैं।
    • पारालोहा विद्युत धारा के प्रवाह में अपेक्षाकृत अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करते हैं।
    • चाँदी एवं तांबा विद्युत धारा का सर्वोत्तम चालक है।
    • धातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति क्षारीय होती है।
    • ऐलुमिनियम का सर्वप्रथम पृथक्करण 1827 ई. में हुआ था।
    • प्याज व लहूसन में गंध का कारण पोटैशियम (k)की उपस्थिति है।
    • कैंसर रोग के इलाज में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग होता है।
    • स्मेल्टाइट (Smeltite)निकेल धातु का अयस्क है।
    • वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकेल धातु का उपयोग उत्प्रेरक (Catalyst)के रूप में होता है।
    • कैडमियम का प्रयोग नाभिकीय रिएक्टरों में न्यूट्रॉन मंदक के रूप में संग्राहक बैटरियों में तथा निम्न गलनांक की मिश्रधातु बनाने में होता है।
    • एक्टिनाइड (Actinides)रेडियोसक्रिय तत्वों का समूह होता है।
    • विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर का आधार स्टील व सीमेण्ट का बना है।
    • रेडियम का निष्कर्षण पिचब्लैंड से किया जाता है।
    • मैडम क्यूरी ने पिचब्लैंड से ही रेडियम का निष्कर्षण किया था।
    • वायुयान के निर्माण में पेलेडियम धातु प्रयुक्त होती है।
    • गैलियम धातु कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
    • सेलीनियम धातु का उपयोग फोटो इलेक्ट्रिक सेल में होता है ।
    • जिओलाइट (Zeolite)का प्रयोग जल को मृदु बनाने में किया जाता है।
    • पोटैशियम कार्बोनेट (K2CO3) को ‘पर्ल एश’ (Pearl ash) कहते हैं।
    • नाइक्रोम (Nichrome) निकिल, क्रोमियम और आयरन का मिश्रधातु है।
    • विद्युत हीटर की कुंडली (Coil) नाइक्रोम की ही बनी होती है।
    • साइटोक्रोम (Cytochrome) में लोहा उपस्थित होता है।
    • ब्रिटेनियम धातु (Britanium metal) एण्टिमनी (Sb), तांबा (Cu) व टिन (Sn) की मिश्रधातु है।
    • बारूद 75% पोटैशियम नाइट्रेट, 10% गंधक व 15% चारकोल एवं अन्य पदार्थों का मिश्रण होता है।
    • टाइटेनियम को ‘रणनीतिक धातु’ (Strategic metal) कहते हैं क्योंकि इसका उपयोग रक्षा उत्पादन में होता है। यह इस्पात के बराबर मजबूत लेकिन भार में उसका आधा गुणा वाली धातु है।

    अधातुएं

    • जो तत्व धातुओं की भांति व्यवहार नहीं करती हैं, ‘अधातु’ कहलाती है।
    • आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 22 अधातु तत्व हैं जिनमें से 11 गैसें, एक द्रव तथा शेष 10 ठोस हैं।
    • ब्रोमीन द्रव अवस्था में पाया जाने वाला अधातु है।
    • हाइड्रोजन, नाइट्रोजन ऑक्सीजन, क्लोरीन, इत्यादि कुछ गैसीय अधातुओं के उदाहरण है। कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस, आयोडीन, इत्यादि कुछ ठोस अधातुओं के उदाहरण हैं।
  • प्लेटिनम धातु और उसके गुण

    प्लेटिनम धातु और उसके गुण

    Platinum and its properties

    प्लेटिनम एक संक्रमण धातु (Transition metal) है। सर्वप्रथम सन 1741 में चार्ल्स वुड यूरोप में प्लेटिनम लाये। इसके गुणों का विस्तृत अध्ययन ब्राउनरिज द्वारा किया गया तथा उन्होंने 1750 में इस धातु के बारे में पूर्ण विवरण प्रकाशित करवाया।

    सन 1819 में यूराल पहाडियों (रूस) में जमे हुए प्लेटिनम धातु की उपस्थिति ज्ञात हुई जिसने इस समूह की अन्य धातुओं के अध्ययन का रास्ता भी खोल लिया। 1876 में इस चमकीले रंग की धातु को एक कीमती धातु के रूप में मान्यता मिली।

    प्लेटिनम अधिकांशत: मुक्त अवस्था में पाया जाता है , यद्यपि इसका एक खनिज स्पेरीलाइट PtAs2 होता है जिसमें यह आर्सेनिक के साथ संयुक्त अवस्था में पाया जाता है। प्रकृति में प्लेटिनम मुक्त अवस्था में तो होता है , लेकिन कभी भी शुद्ध अवस्था में नहीं होता।

    प्लेटिनम को सफेद सोना (White gold) कहा जाता है। इसे ‘एडम उत्प्रेरक’ (Adam’s catalyst) भी कहते हैं। यह अपने निक्षेप के अलावा निकेल तथा ताम्र अयस्कों में मिला रहता है।

    मुख्य रूप से यह रूस , कोलम्बिया और दक्षिणी अफ्रीका में पायी जाती है। क्यूप्रोनिकल अयस्कों में भी सूक्ष्म मात्रा में प्लेटिनम पाया जाता है जो इन धातुओं के निष्कर्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण उपवाद के रूप में पाया जाता है। चूँकि निकल और कॉपर काफी मात्रा वाली धातुएँ है अत: इनके साथ प्लेटिनम की भी काफी मात्रा उत्पाद के रूप में प्राप्त हो जाती है।

    यह न तो वायु द्वारा ऑक्सीकृत होता है और न ही हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलता है।

    लैड के साथ इसकी मिश्रधातु सान्द्र HNO3 में घुल जाती है तथा प्लेटिनम नाइट्रेट बनता है। गलित धातु में ऑक्सीजन घुल जाती है एवं ठण्डा होने पर वह अचानक बाहर निकल जाती है , इसे उद्वमन कहते है।

    प्लेटिनम का उपयोग

    प्लेटिनम एक भारी , मुलायम , तन्य , आघातवर्धनीय , चाँदी जैसी सफ़ेद चमक वाली धातु होती है , सोने और चाँदी के बाद यह सर्वाधिक आघातवर्धनीय धातु है अत: गहने बनाने में भी इसे प्रयुक्त किया जाता है। प्रसार गुणांक के लगभग समान मान होने के कारण यह कांच के साथ आसानी से मिश्रित हो जाता है।

    प्लेटिनम का उपयोग आभूषणों, प्रयोगशाला उपकरणों, इलेक्ट्रोडों, विद्युत सम्पार्को, मिश्रधातुओं एवं हाइड्रोजनीकरण तथा ओसवाल्ड विधि में उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है।

    फाउण्टेनपेन के निब की टिप (Tip)बनाने में भी प्लेटिनम का उपयोग होता है।

    कई कार्बनिक और अकार्बनिक संश्लेष्ण में प्लेटिनम के विभिन्न रूपों का उपयोग किया जाता है।

    यह धातु अवाष्पशील है , वायुमंडलीय ऑक्सीजन के प्रति उदासीन है तथा इसे कांच में आसानी से शील किया जा सकता है। इन गुणों के कारण इसका उपयोग इलेक्ट्रोड , विद्युत के सेल आदि बनाने में किया जाता है।

     लेड के साथ प्लेटिनम के मिश्रधातु का उपयोग दांतों / दाढो के छिद्रों को भरने में किया जाता है। टेढ़े अथवा नकली दांतों को पकड़कर स्थिति में बनाये रखने के लिए प्रयुक्त पिनों और दन्त पट्टियों को बनाने में भी प्लेटिनम का उपयोग किया जाता है।

    गुणात्मक विश्लेषण के किये जाने वाले शुष्क परिक्षण जैसे ज्वाला परिक्षण और बोरेक्स मनका परिक्षण करने के लिए प्लेटिनम के तार का उपयोग किया जाता है।

  • थोरियम और उसके गुण

    थोरियम और उसके गुण

    Thorium and its properties

    थोरियम (Thorium) आवर्त सारणी के ऐक्टिनाइड श्रेणी (actinide series) का प्रथम तत्व है।

    थोरियम के अयस्क में केवल एक समस्थानिक (द्रव्यमान संख्या 232) पाया जाता है, जो इसका सबसे स्थिर समस्थानिक (अर्ध जीवन अवधि 1.4 x 1010 वर्ष) है। परंतु यूरेनियम, रेडियम तथा ऐक्टिनियम अयस्कों में इसके कुछ समस्थानिक सदैव वर्तमान रहते हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ 227, 228, 230, 231 तथा 234 हैं। इनके अतिरिक्त 224, 225, 226, 229 एवं 233 द्रव्यमान वाले समस्थानिक कृत्रिम उपायों द्वारा निर्मित हुए हैं।

    थोरियम एक रेडियो-सक्रिय धातु है।

    थोरियम धातु की खोज 1828 ई में बर्ज़ीलियस ने थोराइट अयस्क में की थी। यद्यपि इसके अनेक अयस्क ज्ञात हैं, परंतु मोनेज़ाइट (monazite) इसका सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जिसमें थोरियम तथा अन्य विरल मृदाओं के फॉस्फेट रहते हैं।

    संसार में मोनेज़ाइट का सबसे बड़ा भंडार भारत के केरल राज्य में हैं। बिहार प्रदेश में भी थोरियम अयस्क की उपस्थिति ज्ञात हुई है। इनके अतिरिक्त मोनेज़ाइट अमरीका, आस्ट्रलिया, ब्राज़िल और मलाया में भी प्राप्त है।

    थोरियम का निष्कर्षण मुख्यतः मोनाजाइट अयस्क से किया जाता है।

    यह भूरे रंग की धातु है। इसका द्रवणांक 145°C तथा क्वथनांक 2,800°C होता है। इसका आपेक्षिक घनत्व 11.23 होता है।

    थोरियम के उपयोग

    (1) परमाणु ऊर्जा (Atomic energy) के उत्पादन में,

    (2) फोटोइलेक्ट्रिक सेल, Glow tube electrodes में, X-ray targets, Arc lamp के टंगस्टन फिलामेण्ट में,

    (3) Incandescent gas mantles में, तथा

    (4) कार्बनिक रसायन में उत्प्रेरक के रूप में।

  • यूरेनियम और उसके गुण

    यूरेनियम और उसके गुण

    Uranium and its properties

    • यूरेनियम एक दुर्लभ तत्व है।
    • यह प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है।
    • इसके सभी खनिज रेडियोसक्रियता का गुण प्रदर्शित करते हैं।
    • भारत में यूरेनियम का सर्वाधिक उत्पादन झारखण्ड राज्य में होता है।
    • यूरेनियम धातु का निष्कर्षण मुख्यतः उसके अयस्क पिचब्लैंड से किया जाता है।
    • यह चमकदार (Lustrous) सफेद धातु है।
    • यह आघातवर्ध्य और बहुत तन्य होता है। लेकिन अशुद्ध धातु भंगुर होता है।
    • यह काफी रेडियोसक्रिय होता है।
    • यह पारामैग्नेटिक होता है, इसका आपेक्षिक घनत्व 19.05, द्रवणांक 1,850°C तथा क्वथनांक 3,500°C होता है।

    यूरेनियम का उपयोग

    • यूरेनियम कार्बाइड का उपयोग हैबर विधि में अमोनिया के उत्पादन में उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है।
    • यूरेनियम का उपयोग परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है।
    • इसका उपयोग अनेक मिश्र धातुओं के निर्माण में होता है।
    • इसका उपयोग गैस विसर्जन उपकरण (Gas discharge device) में इलेक्ट्रोड के रूप में होता है।
    • यूरेनियम के नाइट्रेट, क्लोराइड और सेलिसायलेट का उपयोग दवाई निर्माण में होता है।
    • यूरेनियम के नाइट्रेट तथा एसीटेट का उपयोग फोटोग्राफी में होता है।

    यूरेनियम के समस्थानिक (Isotopes of Uranium)

    यूरेनियम के तीन समस्थानिक है

    (1) 92U234

    (2) 92U235 तथा

    (3) 92U238

    • प्रकृति में सर्वाधिक मात्रा में 92U238 पाया जाता है 99.28%, जबकि  92U235 0.71% तथा 92U234 मात्र 0.006% ही पाया जाता है।
    • यूरेनियम के समस्थानिक 92U235 का उपयोग परमाणु भट्टी (Atomic reactor) में ईंधन के रूप में होता है।
    • यूरेनियम का समस्थानिक 92U238 रेडियोसक्रियता प्रदर्शित नहीं करता है।
    • यूरेनियम को ‘आशा धातु’ (Metal of hope) भी कहा जाता है।
  • सीसा और उसके गुण

    सीसा और उसके गुण

    Lead and its properties

    • सीसे का निष्कर्षण मुख्यतः उसके अयस्क गैलना (Pbs) से किया जाता है।
    • सीसा सर्वाधिक स्थायी तत्व है।
    • यह एक ऐसा तत्व है जिससे कागज पर लिखने का काम लिया जाता है।
    • यह कागज पर निशान छोड़ता है। यह एक भारी धातु है।
    • यह ताप और विद्युत का कुचालक होता है। यह एक उभयधर्मी धातु है।
    • सीसा शुष्क वायु से कोई अभिक्रिया नहीं करता है।
    • यह आर्द्र वायु के साथ अभिक्रिया कर पहले हाइड्रॉक्साइड का और फिर कार्बोनेट का परत बनाता है।
    • यह वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर लेड ऑक्साइड तथा लाल लेड बनता है।
    • यह जल के साथ अभिक्रिया कर लेड हाइड्रॉक्साइड बनाता है।

    सीसे के उपयोग

    (1) मिश्रधातुओं के निर्माण में,

    (2) लेड चेम्बर बनाने में,

    (3) लेड पाइप के निर्माण में, तथा

    (4) कार्बन सीसा (Carbon lead) का उपयोग कृत्रिम अंगों के निर्माण में।

    सीसे के यौगिक

    1. लेड ऑक्साइड (Lead Oxide): इसे ‘लिथार्ज’ कहा जाता है। यह एक उभयधर्मी ऑक्साइड है। इसका उपयोग रबड़ उद्योग, स्टोरेज बैटरी के निर्माण में तथा फ्लिण्ट कांच बनाने में होता है।

    2. लेड डाइऑक्साइड (Lead Dioxide): इसका उपयोग दियासलाई निर्माण में होता है।

    3. लाल लेड (Red Lead): ट्राइ प्लम्बिक टेट्राऑक्साइड को लाल लेड (Red lead) कहा जाता है। इसका उपयोग लाल पेन्ट बनाने में, फ्लिण्ट कांच तथा लाल लेड सीमेण्ट निर्माण में होता है।

    4. लेड एसीटेड (Lend Acetate): इसे Sugar of Lead‘ कहा जाता है। इसे Inorganic Sugar‘ भी कहते हैं। लेड एसीटेट पेपर का उपयोग H2S गैस की उपस्थिति की जांच हेतु किया जाता है।

    5. व्हाइट लेड (White Lead): बेसिक लेड कार्बोनेट को व्हाइट लेट कहा जाता है। इसे ‘सफेदा‘ के नाम से भी जाना जाता है।

    6. लेड टेट्राइथाइल (TEL): इसका उपयोग अपस्फोटन रोकने हेतु किया जाता है।

    लेड (सीसा) के मिश्र धातु

    1.  टाइप मेटल   Type Metal Pb(75%), Sb(20%) तथा Sn(6%)

    2.  सोल्डर       Solder       Sn (50-70%) तथा Pb (50-30%)

    3. प्यूटर        Pewter       Sn (75%) तथा Pb (25%)

    • विद्युत उपकरणों में प्रयुक्त होने वाला फ्यूज तार लेड और टिन से बना मिश्रधातु होता है।
    • राजस्थान स्थित ‘जावर खान’ सीसा-जस्ता के खनन के लिए प्रसिद्ध है।
    • लेड-पाइप पीने के जल को ले जाने के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं क्योंकि ये वायु मिश्रित जल के साथ घुलकर विषैले लेड हाइड्रॉक्साइड [Pb(OH2)] उत्पन्न करते हैं।
  • पारा और उसके गुण

    पारा और उसके गुण

    Mercury and its properties

    • पारा प्रकृति में विस्तृत रूप में नहीं पाया जाता है। यह थोड़ी मात्रा में स्वतंत्र रूप में पाया जाता है।
    • इसका मुख्य अयस्क सिनेबार है जो मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको तथा इटली में पाया जाता है।
    • यह ऊष्मा एवं विद्युत का सुचालक होता है। चर्बी या चीनी के साथ खूब जोर से हिलाने पर यह भूरे रंग के चूर्ण में परिवर्तित हो जाता है। इस घटना को पारा का ‘मृतकीकरण’ (Deadening of mercury) कहते हैं। यह न तो आघातवद्धर्य होता है और न ही तन्य।
    • 4.12  k ताप पर पारा का प्रतिरोध शून्य हो जाता है। इस पर जल और क्षार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह धातुओं के साथ संयोग कर अमलगम (Amalgam) का निर्माण करता है।
    • यह गंधक के साथ अभिक्रिया कर मरक्यूरिक सल्फाइड बनाता है। यह क्लोरीन के साथ प्रतिक्रिया कर मरक्यूरिक क्लोराइड बनाता है।

    पारे का उपयोग

    (1) थर्मामीटर, बैरोमीटर, आदि यंत्रों में,

    (2) गैस को एकत्र करने में,

    (3) धातुओं के अमलगम के निर्माण में,

    (4) चाँदी और सोने के निष्कर्षण में,

    (5) सिन्दूर के निर्माण में,

    (6) कास्टनर-केलनर विधि द्वारा सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के निर्माण में, तथा

    (7) मरकरी वाष्प लैम्प बनाने में।

    पारे के यौगिक

    1. मरक्यूरस क्लोराइड (Mercurous Chloride): इसे केलोमल‘ (Calomel) भी कहा जाता है। यह जान तथा तनु अम्लों में अविलेय होता है। अम्लराज के साथ गर्म करने पर यह मरक्यूरिक क्लोराइड बनाता है। इसका उपयोग औषधि के रूप में तथा केलोमल इलेक्ट्रोड बनाने में होता है।

    2. मरक्यूरिक क्लोराइड (Mercuric Chloride): इसे कोरोसिव सब्लिमेट‘ (Corrosive sublimate) भी कहा जाता है। यह एक भयंकर विष है। यदि मरक्यूरिक क्लोराइड के विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइट डाल दिया जाए तो नेस्लर अभिकर्मक बनता है। कोरोसिव सब्लिमेट कीटाणुनाशक के रूप में तथा सर्जिकल उपकरणों को साफ करने के काम आता है।

    3. मरक्यूरिक सल्फाइड (Mercuric Sulphide): इसे ‘वर्मीलियन’ (Vermilion)’ भी कहा जाता है। इसका उपयोग सिन्दूर के रूप में, औषधियों में मकरध्वज के रूप में तथा जल रंग (Water colours)बनाने में किया जाता है।

    महत्त्वपूर्ण तथ्य

    • अमलगम (Amalgam: पारा (Hg) अन्य धातुओं के साथ मिलकर धातुई घोल बनाता है जिसे ‘अमलगम‘ कहते हैं।
    • पारे को लौह-पात्र में रखा जाता है क्योंकि यह लोहे के साथ अमलगम नहीं बनाता है।
    • ट्यूबलाइट में सामान्यतः मरकरी का वाष्प और आर्गन गैस भरी रहती है। .
    • बैरोमीटर में पारे की सतह का चढ़ना और उतरना क्रमशः स्वच्छ मौसम एवं तूफान के बारे में सूचना देता है।
    • पारे को क्विक सिल्वर (Quick silver) के नाम से भी जाना जाता है।
  • सोना और उसके गुण

    सोना और उसके गुण

    Gold and its properties

    सोने की प्राप्ति (Occurrence)

    • प्रकृति में सोना मुक्त अवस्था और संयुक्त अवस्था दोनों में पाया जाता है।
    • यह प्रायः क्वार्ट्ज (Quartz) के रूप में पाया जाता है।
    • विश्व में सोना मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, रूस एवं आस्ट्रेलिया में पाया जाता है। विश्व के कुल स्वर्ण उत्पादन का लगभग 2% भारत में उत्पादित होता है।
    • भारत विश्व का सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता वाला देश है। सोना का निष्कर्षण मुख्यतः केलावेराइट और सिल्वेनाइट अयस्क से किया जाता है।

    सोने के गुण

    • यह एक कोमल. आधातवर्ध्य, तन्य चमकदार पीले रंग की धात् है.
    • यह सबसे आघालवध्यं धातु है। यह ऊष्मा और विद्युत का सुचालक होती है।
    • यह वायु से कोई अभिक्रिया नहीं करता है।
    • पोटैशियम सायनाइड या सोडियम सायनाइड में घुलकर यह पोटैशिम औरोसायनाइड या सोडियम औरोसायनाइड बनाता है। यह क्षार के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करता है। यह अम्लराज में घुलकर क्लोरोऑरिक अम्ल बनाता है।

    सोने का उपयोग

    1. आभूषणों के निर्माण में।

    2. सिक्कों के निर्माण में।

    3. सोने के लवण फोटोग्राफी में काम आते हैं।

    4. विद्युत लेपन तथा स्वर्ण पत्र चढ़ाने में।

    5. कोलायडी स्वर्ण कांच एवं चीनी उद्योग में प्रयुक्त होता है।

    6. स्वर्ण के वर्क पतली पन्नी छपाई तथा औषधियों में प्रयोग किये जाते हैं। सोने को कठोर बनाने के लिए इसमें तांबा मिलाया जाता है।

    स्वर्ण की शुद्धता (Purity of Gold)

    • स्वर्ण की शुद्धता कैरेट (Carates) में व्यक्त की जाती है।
    • 100% शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है।
    • 22 कैरेट स्वर्ण में 22 भाग सोना तथा शेष दो भाग तांबा होता है।
    • इसी प्रकार 20 कैरेट स्वर्ण में 20 भाग सोना तथा 4 भाग कॉपर (तांबा) मिला होता है।

    सोने के यौगिक

    1. ऑरिक क्लोराइड (Auric Chloride): इसका उपयोग सर्प विषरोधी सूई (Antidote for snake poisoning) बनाने में होता है।

    2. रोल्ड गोल्ड (Rold Gold): इसे सोना का कृत्रिम रूप कहा जाता है। यह 90° Cu तथा 10% Al का मिश्रण होता है।

    3. आयरन पायराइट्स (Iron Pyrites): इसे झूठा सोना (Fools gold) बेवकूफों का सोना भी कहते हैं।

    4. स्वर्ण लेपन में पोटैशियम ओरिसायनाइड का प्रयोग विद्युत अपघट्य के रूप में होता है।

  • प्लेटिनम एवं उसके गुण

    Platinum and its properties

    प्लेटिनम

    प्लेटिनम एक संक्रमण धातु (Transition metal) है

    प्लेटिनम को सफेद सोना (White gold) कहा जाता है। इसे ‘एडम उत्प्रेरक’ (Adam’s catalyst) भी कहते हैं। यह अपने निक्षेप के अलावा निकेल तथा ताम्र अयस्कों में मिला रहता है। यह न तो वायु द्वारा ऑक्सीकृत होता है और न ही हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलता है।

    प्लेटिनम का उपयोग

    प्लेटिनम का उपयोग आभूषणों, प्रयोगशाला उपकरणों, इलेक्ट्रोडों, विद्युत सम्पार्को, मिश्रधातुओं एवं हाइड्रोजनीकरण तथा ओसवाल्ड विधि में उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है।

    फाउण्टेनपेन के निब की टिप (Tip)बनाने में भी प्लेटिनम का उपयोग होता है।

  • चाँदी और उसके गुण

    Silver and Its Properties

    चाँदी की प्राप्ति (Occurrence)

    चाँदी प्रकृति में मुक्त एवं संयुक्त दोनों अवस्थाओं में पाया जाता है। चाँदी धातु का निष्कर्षण मुख्यतः अर्जेण्टाइट अयस्क से किया जाता है।

    यह बहुत ही आघातवयं और तन्य होता है। इसके इसी गुण के कारण इसका उपयोग आभूषण निर्माण में होता है। यह ऊष्मा एवं विद्युत का सुचालक होता है। धातुओं में चाँदी सबसे अच्छा सुचालक होता है।

    चाँदी के उपयोग

    (1) आभूषण व सिक्का बनाने में,

    (2) विद्युत लेपन तथा दर्पण की कलई करने में

    (3) मिश्रधातु बनाने में,

    (4) चाँदी के वर्क (पतली पन्नी) का प्रयोग औषधि निर्माण में, तथा

    (5) दांतों के छिद्रों को भरने में।

    चाँदी के यौगिक

    1. सिल्वर क्लोराइड (Silver Chloride): इसे हार्न सिल्वर (Horn silver) कहा जाता है इसका उपयोग फोटोक्रोमेटिक कांच (Photochromatic glass) बनाने में होता है।

    2. सिल्वर ब्रोमाइड (Silver Bromide): इसका उपयोग फोटोग्राफी में होता है।

    3. सिल्वर आयोडाइड (Silver lodide): इसका उपयोग कृत्रिम वर्षा कराने में होता है।

    4. सिल्वर नाइट्रेट (Silver Nitrate): यह सिल्वर का सबसे प्रमुख यौगिक है। इसे ‘लूनर कॉस्टिक‘ भी कहते हैं। यह सिल्वर पर गर्म एवं तनु नाइट्रिक अम्ल की अभिक्रिया द्वारा बनाया जाता है। प्रयोगशाला में यह अभिकर्मक के रूप में प्रयुक्त होता है।

    खिजाब बनाने तथा चाँदी चढ़ाने में भी इसका उपयोग होता है। इसका उपयोग धोबियों के चिन्ह बनाने वाली स्याही में किया जाता है। इसका प्रयोग निशान लगाने वाली स्याही बनाने में किया जाता है।

    मतदान के समय मतदाताओं की अंगुली पर इसी का निशान लगाया जाता है। इसे रंगीन बोतलों में रखा जाता है क्योंकि यह सूर्य के प्रकाश में अपघिटत हो जाता है।

    चाँदी के चम्मच से अंडा खाना वर्जित रहता है क्योंकि चाँदी अंडे में उपस्थित गंधक से प्रतिक्रिया कर काले रंग का सिल्वर सल्फाइड बनाती है और चम्मच नष्ट हो जाता है।