Author: krishnabdwaj

  • ये पत्थर चमकता है ? आखिर क्या है ये Yooperlite? (What is Yooperlight?)

    ये पत्थर चमकता है ? आखिर क्या है ये Yooperlite? (What is Yooperlight?)

    चमकती चट्टानें, जिन्हें यूपरलाइट के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार की चट्टान है जो पराबैंगनी प्रकाश के तहत चमकती है। इन चट्टानों की खोज सबसे पहले 2017 में मिशिगन के ऊपरी प्रायद्वीप के निवासी एरिक रिंतमाकी ने की थी, जब वह सुपीरियर झील के किनारों की खोज कर रहे थे। तब से, यूपरलाइट रॉक कलेक्टरों और उत्साही लोगों के लिए एक लोकप्रिय आकर्षण बन गया है।

    चमकती चट्टानों के पीछे विज्ञान

    यूपरलाइट एक प्रकार का syenite रॉक है जिसमें फ्लोरोसेंट sodalite खनिज होते हैं। पराबैंगनी प्रकाश के संपर्क में आने पर, ये खनिज एक नारंगी-पीले रंग की चमक उत्सर्जित करते हैं। इस घटना को प्रतिदीप्ति के रूप में जाना जाता है और तब होता है जब कुछ खनिज यूवी प्रकाश से ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और इसे रोशनी के रूप में छोड़ते हैं।

    यूपरलाइट द्वारा उत्सर्जित चमक हानिकारक नहीं है और इसमें कोई रेडियोधर्मी पदार्थ नहीं है। यह विशुद्ध रूप से चट्टान की अनूठी संरचना और इसमें शामिल खनिजों का परिणाम है।

    Yooperlite कहाँ पाया जाता है ?

    यूपरलाइट मिशिगन के ऊपरी प्रायद्वीप में सुपीरियर झील के तट पर पाया जा सकता है। यूपरलाइट की खोज करने का सबसे अच्छा समय रात में होता है जब चट्टानों को यूवी प्रकाश के नीचे खोजना आसान होता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक भूमि से यूपरलाइट एकत्र करना परमिट के बिना निषिद्ध है।

    Yooperlite के उपयोग

    एक अद्वितीय और आकर्षक प्राकृतिक घटना होने के अलावा, यूपरलाइट का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है। हालांकि, यह एक लोकप्रिय सजावट की वस्तु बन गया है और अक्सर उपहार की दुकानों और ऑनलाइन स्टोर में बेचा जाता है।

    Amazon पर देखें इस लिंक पर जायें

  • अब तक का सबसे पावरफुल James Webb Telescope लॉन्च, हबल टेलीस्कोप की जगह लेगा

    अब तक का सबसे पावरफुल James Webb Telescope लॉन्च, हबल टेलीस्कोप की जगह लेगा

    नासा (NASA) ने 25 दिसंबर 2021 को अब तक का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप जेम्स वेब टेलीस्कोप (James Webb telescope) सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया, इस टेलीस्कोप को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का अगला बड़ा स्पेस मिशन कहा जा रहा है

    जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अब हबल टेलीस्कोप की जगह लेगा. NASA ने JWST को एरियन-5 ईसीए (Ariane 5 ECA) रॉकेट से लॉन्च किया. लॉन्चिंग फ्रेंच गुएना स्थित कोरोऊ लॉन्च स्टेशन से की गई.

    James Webb Telescope के उद्देश्य

    • इस टेलीस्कोप को सोलर सिस्टम के रहस्यों को सुलझाने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है. ये धरती से अलग दूसरी दुनिया और सितारों के बारे में जानकारी देगा. हमारे ब्रह्मांड की रहस्यमय संरचनाओं और उत्पत्ति के बारे में भी पता लगाएगा
    • यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड की सुदूर गहराइयों में मौजूद आकाशगंगाओं, एस्टेरॉयड, ब्लैक होल्स और सौर मंडलों आदि की खोज में मदद करेगी.
    • जेम्स वेब टेलीस्कोप का इस्तेमाल आज करीब 13.5 अरब साल पहले प्रारंभिक ब्रह्मांड में पैदा हुई पहली गैलेक्सीज को देखने के लिए होगा
    • इसके साथ ही ये टेलीस्कोप सितारों, एक्सोप्लैनेट और सोलर सिस्टम के चंद्रमाओं और ग्रहों के स्रोतों का निरीक्षण करेगा
    • टेलीस्कोप में हबल की तुलना में व्यापक स्पेक्ट्रम व्यू है और ये सोलर सिस्टम की कक्षा में भी देख सकेगा.
  • केसर बनाने के लिए पौधे का कौन सा हिस्सा उपयोग में लाया जाता है ?

    केसर बनाने के लिए पौधे का कौन सा हिस्सा उपयोग में लाया जाता है ?

    ये सवाल अक्सर ही प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है और विकल्प कुछ इस तरह होते हैं –

    • पत्ता
    • पंखुड़ी
    • बाह्यफल
    • वर्तिकाग्र (स्टिग्मा)

    उत्तर – केसर मसाला बनाने के लिए पौधे का वर्तिकाग्र प्रयोग में लाया जाता है

    केसर का वानस्पतिक नाम क्रोकस सैटाइवस (Crocus sativus) है। अंग्रेज़ी में इसे सैफरन (saffron) नाम से जाना जाता है। यह इरिडेसी (Iridaceae) कुल का क्षुद्र वनस्पति है जिसका मूल स्थान दक्षिण यूरोप है। ‘आइरिस’ परिवार का यह सदस्य लगभग 80 प्रजातियों में विश्व के विभिन्न भू-भागों में पाया जाता है।

    विश्व में केसर उगाने वाले प्रमुख देश हैं – फ्रांस, स्पेन, भारत, ईरान, इटली, ग्रीस, जर्मनी, जापान, रूस, आस्ट्रिया, तुर्किस्तान, चीन, पाकिस्तान के क्वेटा एवं स्विटज़रलैंड।

    आज सबसे अधिक केसर उगाने का श्रेय स्पेन को जाता है, इसके बाद ईरान को। कुल उत्पादन का 80% इन दोनों देशों में उगाया जा रहा है, जो लगभग 300 टन प्रतिवर्ष है।

  • शुष्क सेल (Dry Cell) बनाने में क्या प्रयोग किया जाता है ?

    शुष्क सेल (Dry Cell) बनाने में क्या प्रयोग किया जाता है ?

    शुष्क सेल में अमोनियम क्लोराइड तथा जिंक क्लोराइड का प्रयोग विद्युत अपघटन के रूप में किया जाता है |

    ड्राई-सेल बैटरी एक या एक से अधिक इलेक्ट्रोकेमिकल कोशिकाओं से बना एक उपकरण है जो संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।

    इसमें एक इलेक्ट्रोलाइट होता है जो पेस्ट या अन्य नम माध्यम में निहित होता है।एक मानक शुष्क सेल बैटरी में एक केंद्रीय छड़ के भीतर एक जस्ता एनोड और एक कार्बन कैथोड शामिल होता है।

    कैडमियम, कार्बन, लेड, निकल और जिंक का उपयोग विभिन्न शुष्क सेल डिजाइन और क्षमताओं के निर्माण के लिए किया जाता है, कुछ मॉडल दूसरों की तुलना में कुछ उपकरणों के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

    वेट-सेल बैटरियों के विपरीत, सूखी बैटरी फैलती नहीं है, जो उन्हें पोर्टेबल उपकरणों के लिए आदर्श बनाती है।

  • पाचन क्या है ? सरल भाषा में

    पाचन क्या है ? सरल भाषा में

    जटिल अणुओं का उनके सरल अणुओं में परिवर्तन पाचन कहलाता है | प्रोटीनों (जटिल अणुओं) का एमीनो अम्लों (सरल अणुओं) में विघटन – इसी प्रकार ग्लुकोज़ CO2 और H2O में विघटन – श्वसन प्रक्रिया ग्लूकोस का ग्लाइकोजन में रूपांतरण संश्लेषणात्मक प्रक्रिया है !

    पाचन वह क्रिया है जिसमें भोजन को यांत्रि‍कीय और रासायनिक रूप से छोटे छोटे घटकों में विभाजित कर दिया जाता है ताकि उन्हें रक्तधारा में अवशोषित किया जा सके. पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

    स्तनपायी प्राणियों द्वारा भोजन को मुंह में लेकर उसे दांतों से चबाने के दौरान लार ग्रंथियों से निकलने वाले लार में मौजूद रसायनों के साथ रासायनिक प्रक्रिया होने लगती है।

    यह भोजन फिर ग्रासनली से होता हुआ उदर में जाता है, जहां हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सर्वाधिक दूषित करने वाले सूक्ष्माणुओं को मारकर भोजन के कुछ हिस्से का यांत्रि‍क विभाजन (जैसे, प्रोटीन का विकृतिकरण) और कुछ हिस्से का रासायनिक परिवर्तन आरंभ करता है।

    भोजन को पक्वाशय में पहुंचते ही सर्वप्रथम इसमें यकृत से निकलने वाला पित्त रस आकर मिलता है पित्त रस छारीय होता है और यह भोजन को अम्लीय से छारीय बना देता है यहां अग्नाशय से अग्नाशय रस आकर भोजन मिलता है इसमें तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं !

    • ट्रिप्सिन यह प्रोटीन एवं उनको पॉलिपेप्टाइड तथा अमीनो अम्ल में परिवर्तित करता है
    • एमाइलेज – यह मांड को घुलनशील शर्करा में परिवर्तित करता है
    • लाइपेज – यह इमल्सीफाइड वसाओं का ग्रीन तथा फैटी एसिड्स में परिवर्तित करता है
  • किंग कोबरा घोंसला क्यूँ बनाता है ?

    किंग कोबरा घोंसला क्यूँ बनाता है ?

    विश्व में किंग कोबरा एकमात्र ऐसा सर्प है जो घोंसला बनाता है पर क्या आपको पता है वो घोंसला क्यूँ बनाता है ?

    वास्तव में ये एक अंडप्रजक सर्प है जो घोंसले में अंडे देता है और अंडों से सर्प निकलने तक घोंसले की पहरेदारी करता है ! विश्व में सर्प प्रजाति का केवल किंग कोबरा ही अपना घोंसला बनाता है !

    King Kobra संसार का सबसे लम्बा विषधर सर्प है। इसकी लम्बाई 5.6 मीटर तक होती है। सांपों की यह प्रजाति दक्षिणपूर्व एशिया एवं भारत के कुछ भागों में खूब पायी जाती है। एशिया के सांपों में यह सर्वाधिक खतरनाक सापों में से एक है।

    इसकी लंबाई 20 फिट तक हो सकती है। तथा यह भारत के दक्षिण क्षेत्रों में बहुतायात में पाया जाता है।

    भारत में, किंग कोबरा वन्यजीव संरक्षण की अनुसूची द्वितीय अधिनियम, 1972 (यथा संशोधित) और एक व्यक्ति को सांप के ऊपर से 6 साल के लिए कैद हो सकती है हत्या का दोषी के तहत रखा जाता है।

  • LASIK (लेसर असिस्टेड इन सीटू केराइटोमील्यूसिस) क्या है ?

    LASIK (लेसर असिस्टेड इन सीटू केराइटोमील्यूसिस) क्या है ?

    LASIK एक लेजर तकनीक है जो निकट दृष्टि दोष दूर दृष्टि दोष और जरा दृष्टि दोष आदि नेत्र संबंधी दोषों के उपचार में लिया जाता है किंतु उसका उपयोग अधिक उम्र के व्यक्ति पर नहीं किया जा सकता |

    LASIK नेत्र शल्य चिकित्सा दृष्टि की समस्याओं को ठीक करने के लिए सबसे प्रसिद्ध और सबसे अधिक प्रदर्शन की जाने वाली लेजर अपवर्तक सर्जरी है। लेज़र-असिस्टेड इन सीटू केराटोमाइल्यूसिस (LASIK) चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस का विकल्प हो सकता है।

    LASIK सर्जरी के दौरान, दृष्टि में सुधार के लिए आपकी आंख (कॉर्निया) के सामने गुंबद के आकार के स्पष्ट ऊतक के आकार को ठीक से बदलने के लिए एक विशेष प्रकार के काटने वाले लेजर का उपयोग किया जाता है।

    सामान्य दृष्टि वाली आंखों में, कॉर्निया आंख के पिछले हिस्से में रेटिना पर प्रकाश को ठीक से झुकता है (अपवर्तित करता है)। लेकिन निकट दृष्टि (मायोपिया), दूरदर्शिता (हाइपरोपिया) या दृष्टिवैषम्य के साथ, प्रकाश गलत तरीके से मुड़ा हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप धुंधली दृष्टि होती है।

    चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस दृष्टि को सही कर सकते हैं, लेकिन कॉर्निया को फिर से आकार देने से भी आवश्यक अपवर्तन प्रदान होगा।

    लैसिक नेत्र शल्य चिकित्सा के कुछ दुष्प्रभाव, विशेष रूप से शुष्क आंखें और अस्थायी दृश्य समस्याएं जैसे चकाचौंध, काफी सामान्य हैं।

    ये आमतौर पर कुछ हफ्तों या महीनों के बाद साफ हो जाते हैं और बहुत कम लोग इन्हें दीर्घकालिक समस्या मानते हैं।

  • कुछ पौधे कीटभक्षी (insectivorous plants) क्यों होते हैं ?

    कुछ पौधे कीटभक्षी (insectivorous plants) क्यों होते हैं ?

    कुछ वनस्पतियां कीट भक्षी होती हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त नाइट्रोजन प्राप्त नहीं होता है और वह पर्याप्त नाइट्रोजन प्राप्त करने के लिए कीट पर निर्भर रहती है !  ये पौधे अपने भोजन को स्वयं संश्लेषित करने की क्षमता रखते हैं और इसलिए इन्हें स्वपोषी (ऑटोट्रोफ्स) कहा जाता है।

    कीट भक्षी पौधे

    1- सेरोसेनिया – इस पौधे में थैली नुमा पत्तियां जमीन पर एक झुंड में सजी रहती हैं। आकर्षक रंग की इन पत्तियों पर कुछ ग्रंथियां रहती हैं जिनमें शहद होता है। कीट पतंगे इसके रंग और शहद के कारण थैली के भीतर चले जाते हैं और कांटों में फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते।

    2- ड्रोसैरा -इसे सनड्यूज़ भी कहते हैं। इसकी गोल-गोल पत्तियों के किनारे लाल रंग की घुण्‍डी वाले आलपिन सरीखे बाल होते हैं जिनसे एक चिपचिपा रस निकलता रहता है। छोटे कीट पतंगों को यही रस चिपका लेता है और फिर घुण्डियां मुड़कर चारों ओर से उसे घेर लेती हैं।

    3- यूट्रीकुलेरिया – इसे ब्लैडरवर्ट भी कहते हैं। इसकी पत्तियां गोल गुब्बारेनुमा होती हैं। जैसे ही कोई कीट-पतंगा इसके नजदीक आता है इस मौजूद रेशे उसे जकड़ लेते हैं। पत्तियों में निकलने वाला एंजाइम कीटो को खत्म करने में मदद करता है।

    4- पिचर प्लांट – इसे नेपिन्थिस के नाम से भी जाना जाता है। इसके मुंह और किनारे की ओर शहद की थैलियां होती हैं। कीट पतंगे सुराही के रंग से आकर्षित होकर शहद के लालच में अपनी जान गंवा बैठते हैं। चिकनी दीवार के कारण ये रेंगकर बाहर भी निकल नहीं पाते। इसे घटपर्णी के नाम से भी जाना जाता है। 

    5- डायोनिया – इसमें कीट पतंगों को पकड़ने वाला फंदा जमीन पर सजी पत्तियां होती हैं। यह भी ड्रोसैरा की तरह ही शिकार करता है। इसके दो पत्ते इसके लिए शिकार का काम करते हैं जिनके ऊपर लगे बाल इतने सक्रिय होते हैं कि चींटी तक की मौजूदगी तक पहचान लेते हैं। जैसे ही शिकार करीब आता है 1 सेकंड में उसे निगल लेता है।

  • पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन का प्रयोग क्यों किया जाता है?

    पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन का प्रयोग क्यों किया जाता है?

    पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन के प्रयोग को क्लोरीनीकरण कहते हैं, क्लोरीन पानी में रोगाणुनाशक का कार्य करता है !

    कारण

    जब क्लोरीन पानी से अभिक्रिया करता है तो वह सर्वप्रथम हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है जो स्वयं ही हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ऑक्सीजन में टूट जाता है यही नया ऑक्सीजन रोगाणुनाशक व विरंजक का कार्य करता है |

    यानि पानी में क्लोरीन मिलाने से नवजान ऑक्सीज़न बनती है जो रोगाणुनाशक का कार्य करती है |

  • मोटर कार में रेडिएटर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

    मोटर कार में रेडिएटर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

    मोटर कार में रेडिएटर समान सिद्धांत पर कार्य करता है विधि में ऊष्मा का संचरण पदार्थ के कणों के स्थानांतरण के द्वारा होता है इस प्रकार पदार्थ के कणों के स्थानांतरण से धाराएं बहती हैं जिन्हें संवहन धाराएं कहते हैं यही समय धाराएं इंजन के वाटर पंप में पहुंचकर उसे ठंडा करती रहती है !

    रेडियेटर क्या होता है ?

    विकिरक या रेडियेटर (Radiators) एक माध्यम से दूसरे माध्यम में उष्मीय उर्जा का विनिमय करने वाली युक्ति है। इसकी सहायता से किसी चीज को गरम या ठण्डा किया जा सकता है। इनका उपयोग वाहनों, घरों, एवं विद्युत उपकरणों आदि के तापमान को सुरक्षित सीमा में बनाये रखने के लिये किया जाता है।