ध्वनि-अनुनाद क्या होता है ?

ध्वनि-अनुनाद

जब किसी वस्तु पर कोई बाहरी आवर्ती (Periodic force) लगाया जाता है, तो वस्तु उस बल के प्रभाव में प्रणोदित कम्पन (Forced vibration) करने लगती है। 

यदि आवर्ती बल की आवृत्ति, वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर हो तो वस्तु के कम्पनों का आयाम अधिकतम हो जाता है। इस घटना को ‘अनुनाद’ (Resonance) कहते हैं। 

1939 में संयुक्त राज्य अमेरिका का टैकोमा पुल यांत्रिक अनुनाद के कारण ही क्षतिग्रस्त हो गया था। उच्च गति की पवन पुल के ऊपर कम्पन करने लगी जो पुल की स्वाभाविक आवृत्ति के लगभग बराबर आवृत्ति की थी। इससे पुल में दोलन आरम्भ हो गया और यह कई घण्टे तक चलता रहा और कम्पन के आयाम में लगातार वृद्धि होते रहने के कारण पुल टूट गया। 

उदाहरण

  1. सैनिकों को पल पार करने का प्रशिक्षण अनुनाद से बचने के लिए ही दिया जाता है। पुल को कम्पन कर सकने वाला एक निकाय माना जा सकता है जिसके लिए स्वाभाविक आवृत्ति का एक निश्चित मान होगा। यदि सैनिकों के नियमित पड़ने वाले कदमों की आवृत्ति पुल की आवृत्ति के बराबर हो जाए तो अनुनाद की स्थिति आ जाएगी और पुल में अधिक आयाम के कम्पन उत्पन्न हो जाएंगे। इससे पुल टूटने का खतरा रहता है। इसी कारण पुल पार करते समय सैनिकों की टुकडी कदम मिलाकर नहीं चलती। 
  2. बच्चों का झूला इसका एक सामान्य यांत्रिक उदाहरण है। झूले को ऊंचाई तक ले जाने के लिए उसे हर बार अधिक जोर से धक्का नहीं देना चाहिए, लेकिन उसे एक निश्चित अंतराल पर समान रूप से ही धक्का देना चाहिए। एक छोटे बल के प्रत्येक बार आरोपित होने से ही झूला अपनी उच्चतम स्थिति पर कुछ ही समय में पहुंच जाता है और उसकी गति विस्तृत हो जाती है।
  3. यदि कोई वायुयान कम ऊंचाई से गुजरता है, तो खिड़कियां खड़खडाने लगती हैं। ऐसा तब होता है जब खिड़की को स्वाभाविक आवृत्ति का मान वायुयान के इंजन की निकलने वाले शोर की आवृत्ति के बराबर हो जाता है। जब किसी कमरे में कोई बड़ा विस्फोट होता है, तो खिड़कियां तीव्र गति से खड़खड़ाने लगती हैं और ऐसा तब भी होता है जब खिड़िकियां बंद हों। यदि विस्फोट और भी शक्तिशाली हो, तो खिड़की टूटकर गिर सकती है। इसी प्रकार यदि कोई बम गिराया जाता है, तो कुछ दूरी तक के भवन गिर जाते हैं। 
  4. रेडियो भी अनुनाद के सिद्धान्त पर ही कार्य करता है, किसी रेडियो सेट को समस्वरित (Tune) करने के लिए रेडियो के धारिता के मान को तब तक परिवर्तित किया जाता है जब तक कि विद्युत की वह आवृत्ति न प्राप्त हो जाए जितनी आवृत्ति आ रहे ध्वनि संकेत की है। एण्टीना में छोटे विभवान्तर या वि.वा. बल उत्पन्न किए गए होते हैं जो समस्वरित परिपथ के आयाम के बराबर का आयाम बना सके।

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