समभारिक, समन्यूट्रॉनिक और समइलेक्ट्रॉनिक क्या है ?

What is Isobars, Isotones and Isoelectronic ?

वे तत्व जिनकी द्रव्यमान संख्याएं एक ही, किन्तु परमाणु संख्याएं भिन्न-भिन्न होती है समभारिक कहलाते है

समभारिकों की परमाणु संख्या में भिन्नता का कारण है, उन तत्वों के नाभिकों में प्रोटॉनों की संख्या का भिन्न-भिन्न होना। समभारित एक ग्रीक भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है, समान भारी (Iso = समान, Bars = भारी)।

समभारिक के गुण:

1. समभारिकों के अधिकांश भौतिक गुण एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।

2. समभारिकों के रासायनिक गुण एक-दूसरे से सर्वथा भिन्न होते हैं।

3. समभारिकों के वे भौतिक गुण एक समान होते हैं जो परमाणु द्रव्यमान पर निर्भर करते हैं।

नोटः रेडियोसक्रिय तत्वों के बीटा कणों के उत्सर्जन से समभारिक बनते हैं

समन्यूट्रॉनिक (Isotones)

वे तत्व जिनकी परमाणु संख्या एवं द्रव्यमान संख्या दोनों भिन्न-भिन्न हों, किन्तु जिनके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या समान हो, ‘समन्यूट्रॉनिक’ कहलाते हैं।

उदाहरण

1. फॉस्फोरस (15P31) तथा सल्फर (14S30) समन्यूट्रॉनिक है, क्योंकि इनमें से प्रत्येक के नाभिक में 16 न्यूट्रॉन है।

2. वेनेडियम (23V51) तथा क्रोमियम (24Cr52) भी समन्यूट्रॉनिक हैं, क्योंकि इन दोनों के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या 28 है।

समइलेक्ट्रॉनिक (Isoelectronic)

वे आयन जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, ‘समइलेक्ट्रॉनिक आयन’ कहलाते हैं

उदाहरण:

Na+, Mg++, F, आदि समइलेक्ट्रॉनिक आयन हैं, क्योंकि इनमें से प्रत्येक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 10 है।

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