ओम का नियम (Ohm’s Law) क्या है ?

What is Ohm’s Law ?

किसी चालक में प्रवाहित विद्युत धारा का मान उसके सिरों पर लगे हुए विभवान्तर के अनुक्रमानुपाती होता है। (जबकि चालक की विमाएं तथा ताप स्थिर रहें)। इस कथन को ओम का नियम (Ohm’s Law) कहते हैं।

विभवान्तर को वोल्ट में तथा धारा को ऐम्पियर में व्यक्त करें, तो प्रतिरोध का मान वोल्ट/ऐम्पियर में होगा। वोल्ट/ऐम्पियर को ‘ओम’ (Ohm) कहते हैं।

जो चालक ओम के नियम का पालन करते हैं उन्हें ओमीय प्रतिरोध (Ohmic resistor) तथा उनके प्रतिरोधक को ओमीय प्रतिरोध कहते हैं, जैसे—मैंगनिन का तार।

जो चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते, उन्हें अन ओमीय प्रतिरोधक तथा उनके प्रतिरोध को अनओमीय प्रतिरोध (Non-ohmic resistance) कहते हैं, जैसे ट्रायोड वाल्व का प्रतिरोध।

पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध

• किसी चालक पदार्थ के एक मीटर भुजा वाले घन के आमने-सामने के फलकों के बीच विद्युत प्रतिरोध को उस पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध (Specific resistance) कहते हैं। इसका मात्रक ओम मीटर होता है। एक ही पदार्थ के बने हुए मोटे तार का प्रतिरोध कम तथा पतले तार का प्रतिरोध अधिक होता है परन्तु दोनों का विशिष्ट प्रतिरोध समान होता है क्योंकि यह केवल पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है। विशिष्ट प्रतिरोध को आजकल ‘प्रतिरोधकता’ (Resistivity) कहा जाता है।

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